पड़ताल

यहां फूलों की नहीं, चढ़ती है चप्पलों की माला

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मंदिरों में फूलों की माला, सोना-चांदी का चढ़ावा तो हम सबने देखा या सुना है, मगर आपने क्या किसी ऐसे मंदिर के बारे में सुना है जहां फूलों या सोने-चांदी की जगह चप्पलें रखी जाती हों। चौंकिए मत, कुछ ऐसा ही होता है कनार्टक में गुलबर्ग जि़ले में स्थित लकम्मा देवी (lakamma devee) के भव्य मंदिर में, जहां भक्त मां को खुश करने के लिए चप्पल की माला बांधते हैं।

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हर साल यहां (lakamma devee) फुटवियर फेस्टिवल का आयोजन होता है। जिसमें अलग-अलग गांवों से लोग चप्पल चढ़ाने आते हैं। हर साल ये दिवाली के छठे दिन मनाया जाता है। लोग मन्नत मांगते हैं और पूरा होने के लिए मंदिर के बाहर के एक पेड़ पर चप्पलें टांगते हैं। यहां के लोगो का मानना है कि चप्पल चढ़ाने से माता उनकी चढ़ाई गईं चप्पलों को पहनकर रात में घूमती हैं और बुरी शक्ति से उन्हें बचाती हैं।

कहा जाता है कि पहले यहां बैलों की बलि दी जाती थी, मगर जानवरों की बलि पर रोक के बाद से बलि देना बंद कर दिया गया। इसे बंद करने के बाद से ही चप्पल की माला बांधने की परंपरा शुरू हो गई।

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