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कोरोना की वैक्सीन ही अभी संजीवनी, टीकाकरण से नहीं होती किसी की मौत, ICMR के विश्लेषण में खुलासा

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बढ़ते कोरोना संक्रमण से बचाव और उससे होने वाली मौतों को रोकने के लिए कोरोना की वैक्सीन ही अभी संजीवनी साबित हो रही है। कोरोना की वैक्सीन लगवाने से अभी तक किसी भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई है। दवाइयों और बीमारियों के इलाजों के बारे में शोध करने वाली भारत की सबसे बड़ी संस्था इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च विश्लेषण में यह बात साफ हो गई है कि कोरोना वैक्सीन के दोनों डोज लगवाने वाले 99 प्रतिशत लोग कोरोना संक्रमण से सुरक्षित हैं।

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वर्तमान में 45 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को कोवैक्सीन और कोविशील्ड टीका कोरोना से बचाव के लिए लगाया जा रहा है। कोरोना वैक्सीन लगवाने से नहीं होती किसी की मौत बल्कि कोरोना संकमण को गंभीर होने से रोकता है।

डॉ. योगेन्द्र बड़गैया ने दी जानकारी

मेडिकल कॉलेज कोरबा के अधिष्ठाता डॉ. योगेन्द्र बड़गैया ने बताया कि कोरोना का टीका लगवाने के बाद आज तक किसी भी व्यक्ति की मौत का कोई भी मामला संज्ञान में नहीं आया है। इसके उलट ICMR का विश्लेषण बताता है कि वैक्सीन के दोनों डोज लगवाने वाले 99 प्रतिशत लोग कोरोना से संक्रमित नहीं हुए हैं।

संक्रमण सीवियर नहीं

डीन डॉ. बड़गैया ने बताया कि कोरोना की वैक्सीन पूरी तरह से सुरक्षित है, जिसे मंजूरी देने के पहले सरकार और वैज्ञानिकों द्वारा सभी मानक मापदंडों पर टेस्टिंग की गई है। इन मापदंडों पर खरा उतरने पर ही टीकों को मंजूरी दी गई है। उन्होंने यह भी बताया कि वैक्सीन के दोनों डोज लगाने के बाद भी व्यक्ति कोरोना से संक्रमित हो सकता है, लेकिन ऐसी स्थिति में संक्रमण सीवियर नहीं होगा। ऐसे लोग इलाज के बाद जल्द ठीक हो रहे हैं। ऐसे टीकाकृत रोगी की जान बच जा रहीं हैं।

लोगों की पूरी काउंसिलिंग


डीन डॉ. बड़गैया ने बताया कि बीसीजी या दूसरे टीके लगवाने के बाद हल्का बुखार या इंजेक्शन लगने की जगह पर दर्द, शरीर में भारीपन साइड इफेक्ट होते हैं, ठीक वैसे ही हल्के साइड इफेक्ट कोरोना के टीके से भी 12 से 24 घंटे के बीच हो सकते हैं। इनसे घबराने की आवश्यकता नहीं है, टीकाकरण केन्द्र पर इसके लिए भी लोगों की पूरी काउंसिलिंग की जाती है और इन छोटे-मोटे क्षणिक साइड इफेक्ट से निपटने के लिए टीकाकरण केन्द्रों पर निगरानी की व्यवस्था के साथ दवाई के बारे में भी लोगों को बताया जाता है।

टीकाकरण कराने की अपील

मेडिकल कॉलेज के डीन ने डायबिटिज, ब्लडप्रेशर जैसी अन्य बीमारियों से ग्रसित मरीजों सहित सभी लोगों से कोरोना का टीकाकरण कराने की भी अपील की है।

ICMR के आंकड़े वैक्सीनेशन के लिए

इलाज और दवाओं के शोध से जुड़ी भारत की सबसे बड़ी संस्था ICMR के आंकड़े कोरोना वैक्सीनेशन के पक्ष धर हैं। आंकड़ों का विश्लेषण यह बताता है कि कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज  लेने वाले 99 प्रतिशत लोगों को कोरोना संक्रमण नहीं हुआ है। कोरोना वैक्सीन की दूसरी डोज लेने के बाद केवल 0.03 प्रतिशत लोग ही कोविड वायरस से संक्रमित हुए हैं। इसी तरह वैक्सीन की पहली डोज लेने के बाद सिर्फ 0.02 प्रतिशत लोगों को ही कोरोना हुआ है।

संक्रमण के जोखिम को करता है कम

ICMR के हिसाब से यह संख्या बहुत छोटी और चिंता जनक नहीं है। कोविड वैक्सीन संक्रमण के जोखिम को कम करते हैं साथ ही मौत और संक्रमण को गंभीर होने से रोकते हैं।

रेमडेसिविर कोई जादुई ड्रग नहीं

मेडिकल कॉलेज कोरबा के डीन डॉ. बड़गैया ने कोरोना मरीजों के इलाज के लिए रेमडेसिविर दवाई के उपयोग पर भी विशेष जानकारी लोगों को दी है। डाॅ. बड़गैया ने कहा है कि रेमडेसिविर दवाई कोई जादुई ड्रग नहीं है, जिससे कोरोना को पूरी तरह से खत्म किया जा सके।

फेफड़ों के संक्रमण का नियंत्रण

डॉ. बड़गैया ने बताया कि कोरोना वायरस को खत्म करने की कोई स्पेसिफिक दवाई अभी तक खोजी नहीं जा सकी है। कुछ एंटी वायरल दवाओं से मरीज कोरोना से ठीक हो रहे हैं, रेमडेसिविर उनमें से एक है, लेकिन यह कोरोना को खत्म करने वाली स्पेसिफिक दवाई नहीं है। इससे केवल गंभीर संक्रमित लोगों के फेफड़ों के संक्रमण को नियंत्रित किया जा सकता है।

समय पर इलाज शुरू करना जरूरी

डॉ. बड़गैया ने कहा कि अगर रेमडेसिविर कोविड वायरस को खत्म करने की स्पेसिफिक दवाई होती तो ना तो वायरस इतना अधिक फैलता, ना ही इतनी अधिक संख्या में लोग संक्रमित होते। डॉ. बड़गैया ने कहा कि कोरोना संक्रमित मरीज को इसके अलावा भी समय पर इलाज शुरू करके अन्य दवाओं के उपयोग और सावधानी से ठीक किया जा सकता है।

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