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छत्तीसगढ़ में भी अब बर्ड फ्लू को लेकर अलर्ट जारी, कृषि एवं पशुपालन मंत्री ने कही ये बात…

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बर्ड फ्लू का कहर अब छत्तीसगढ़ भी पहुंच चुका है. छत्तीसगढ़ सरकार ने सावधानी बरतते हुए जिला पशुपालन अधिकारियों को सतर्क (bird flu in Chhattisgarh) रहने के निर्देश जारी कर दिए है। हालांकि अभी राज्य में ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया हैं, जहां बर्ड फ्लू के लक्षण मिले हो। फिर भी सरकार अपनी तरफ से कोई कोताही बरतने के मूड में नहीं है।

कृषि और पशुपालन मंत्री रविंद्र चौबे ने कहा कि


राज्य के कृषि और पशुपालन मंत्री रविंद्र (Ravindra Choubey’s Statement) चौबे ने पॉलेट्री फार्म और पक्षियों की मौत को लेकर सतत निगरानी को कहा गया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी बर्ड फ्लू को लेकर सतर्कता के निर्देश जारी किये गये हैं। हमारे संयुक्त संचालक को इस बात का निर्देश जारी कर दिया गया है। पॉलेट्री फार्म और पक्षियों की मौत को लेकर सतत निगरानी को कहा गया है। पक्षियों की लगातार मौत पर किस तरह का कार्य किया जाना है, उसे लेकर भी निर्देश दिया गया है। हालांकि प्रदेश के पालेट्री फार्म में में बर्ड फ्लू का किसी भी तरह का कोई लक्षण नहीं मिला है।

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इन राज्यों में पहले से जारी हैं अलर्ट


आपको बता दें कि देश के कई हिस्सों में बर्ड फ्लू का अलर्ट (bird flu in Chhattisgarh) जारी हो चुका। मध्यप्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश सहित कई राज्यों में इसे लेकर अलर्ट जारी कर दिया गया है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तो इस मामले को लेकर आज आपात बैठक भी बुलायी थी। वहीं मंदसौर में चिकन और अंडा बिक्री पर रोक भी लगा दिया गया है।

ये है बर्ड फ्लू के लक्षण (Symptoms Of Bird Flu)

बर्ड फ्लू होने पर आपको कफ, डायरिया, बुखार, सांस से जुड़ी दिक्कत, सिर दर्द, मांसपेशियों में दर्द, गले में खराश, नाक बहना और बेचैनी जैसी समस्या हो सकती है।  अगर आपको लगता है कि आप बर्ड फ्लू की चपेट में आ गए हैं तो किसी और के संपर्क में आने से पहले डॉक्टर को दिखाएं। 

बर्ड फ्लू होने के कारण

बर्ड फ्लू कई तरह के होते हैं, लेकिन H5N1 पहला ऐसा एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस है, जो इंसानों को संक्रमित करता है।  इसका पहला मामला 1997 में हॉन्ग कॉन्ग में आया था।  उस समय बर्ड फ्लू के प्रकोप को पोल्ट्री फार्म में संक्रमित मुर्गियों से जोड़ा गया था। 

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मुर्गियों में आसानी से फैलता है यह फ्लू

H5N1 प्राकृतिक रूप से पक्षियों में होता है, लेकिन ये पालतू मुर्गियों में आसानी से फैल जाता है।  ये बीमारी संक्रमित पक्षी के मल, नाक के स्राव, मुंह के लार या आंखों से निकलने वाली पानी के संपर्क में आने से होता है।  संक्रमित मुर्गियों के 165ºF पर पकाए गए मांस या अंडे के सेवन से बर्ड फ्लू नहीं फैलता है, लेकिन संक्रमित मुर्गी के अंडों को कच्चा या उबालकर नहीं खाना चाहिए। 

इन लोगों को होता है बर्ड फ्लू का खतरा

 H5N1 में लंबे समय तक जीवित रहने की क्षमता होती है।  संक्रमित पक्षियों के मल और लार में ये वायरस 10 दिनों तक जिंदा रहता है।  दूषित सतहों को छूने से ये संक्रमण फैल सकता है।  अगर इसके फैलने का सबसे ज्यादा खतरा मुर्गीपालन से जुड़े लोगों को होता है।   इसके अलावा संक्रमित जगहों पर जाने वाले, संक्रमित पक्षियों के संपर्क में आने वाले, कच्चा या अधपका मुर्गा-अंडा खाने वाले या संक्रमित मरीजों का देखभाल करने वाले लोगों को भी बर्ड फ्लू हो सकता है।  

यह है इलाज

अलग-अलग तरह के बर्ड फ्लू का अलग-अलग तरीकों से इलाज किया जाता है, लेकिन ज्यादतर मामलों में एंटीवायरल दवाओं से इसका इलाज किया जाता है।  लक्षण दिखने के 48 घंटों के भीतर इसकी दवाएं लेनी जरूरी होती हैं।  बर्ड फ्लू से संक्रमित व्यक्ति के अलावा उसके संपर्क में आए घर के अन्य सदस्यों को भी ये दवाएं ली जाने की सलाह दी जाती है, भले ही उन लोगों में बीमारी के लक्षण न हों। 

इस तरह करें बचाव

 इन्फ्लूएंजा से बचने के लिए डॉक्टर आपको फ्लू की वैक्सीन लगवाने की सलाह दे सकते हैं। इसके अलावा आप खुले बाजर में जाने, संक्रमित पक्षियों के संपर्क में आने और अधपका चिकन खाने से बचें।  हाइजीन बनाए रखें और समय-समय पर अपने हाथ धोते रहें। 

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