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पुरुषों को भी हो सकता है ब्रेस्ट कैंसर, जानें क्या हैं इसके लक्षण

जब बात ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer) की आती है तो लोगों को लगता है कि ये सिर्फ महिलाओं की बीमारी है, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि पुरुषों को भी ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer in Men) हो सकता है।

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मनुष्य का शरीर (Human Body) कईं अनगिनत सैल्स से बना हुआ है और इन कोशिकाओं में निरंतर ही विभाजन होता रहता है । यह एक सामान्य प्रक्रिया है और इसपर शरीर का पूरा नियंत्रण होता है, लेकिन कभी-कभी जब शरीर के किसी विशेष अंग की कोशिकाओं पर शरीर का नियंत्रण बिगड़ जाता है और कोशिकाएं बेहिसाब तरीके से बढ़ने लगती हैं, तो उसे कैंसर (Cancer) कहा जाता हैं। इसके कई प्रकार होते हैं, जिनमें से एक ब्रैस्ट कैंसर (Breast Cancer in Men) भी है, जिसके बारे में आज हम बात कर रहे हैं।

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जब बात ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer) की आती है तो लोगों को लगता है कि ये सिर्फ महिलाओं की बीमारी है, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि पुरुषों को भी ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer in Men) हो सकता है और इसका ताजा उदाहरण हैं अमेरिकी सिंगर बियॉन्से के पिता माइकल नोअल्स (American singer Beyoncé’s father Michael Knowles) जिन्हें ब्रेस्ट कैंसर डिटेक्ट हुआ था और उन्हें इसका ऑपरेशन भी करवाना पड़ा था।

1 प्रतिशत पुरुषों में होता है ब्रेस्ट कैंसर

दरअसल हजारों में से किसी 1 पुरुष को ही ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer) होता है और वह एक कोई भी हो सकता है। हालांकि महिलाओं की तुलना में पुरुषों में ये बीमारी बहुत कम पाई जाती है, लेकिन फिर भी कुछ सालों में ये मामले बढ़े हैं। पुरुषों में होने वाले ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer) को लेकर लोग जागरुक नहीं हैं। वहीं ध्यान नहीं देने की वजह से कई पुरुषों को इस बीमारी का पता काफी एडवांस स्टेज में जाकर चलता है। आज हम आपको पुरुषों में होने वाले ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer) के लक्षण के बारे में जानकारी दे रहे हैं।

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पुणे के आदित्य बिरला मेमोरियल हॉस्पिटल के कैंसर स्पेशलिस्ट डॉक्टर जगदीश शिंदे (Cancer Specialist Doctor Jagdish Shinde) का कहना है कि कुछ खास वजहों से पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। जैसे कि अगर किसी पुरुष ने अपनी छाती के पास रेडिएशन थेरेपी ली है तो उसमें ब्रेस्ट कैंसर का रिस्क बढ़ जाता है। इसके अलावा अगर किसी के परिवार में ब्रेस्ट कैंसर की हिस्ट्री रही है तो उसमें भी इस बीमारी की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा खराब लाइफस्टाइल या कुछ जेनेटिक डिसऑर्डर की वजह से भी पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर हो सकता है।

विशेषज्ञों ने दी जानकारी

विशेषज्ञों के मुताबिक जिन लोगों में क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम जैसे आनुवंशिक विकार रहे हों, जिन लोगों के परिवार में पहले किसी को स्तन कैंसर (Breast Cancer) हो चुका हो ऐसे लोगों में ब्रेस्‍ट कैंसर (Breast Cancer) होने का खतरा अधिक रहता है। पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण आपको सामान्य रूप से भी दिख सकते हैं। अमूमन इस बीमारी की स्थिति में एरोलेटर (निप्पल) के आसपास असामान्य सी वृद्धि दिखाई देगी। कुछ मामलों में निप्पल से खून भी निकलता है। बायोप्सी जैसी तकनीक के माध्यम से प्रभावित ऊतकों का पता लगाया जाता है।

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यह बीमारी लाइलाज नहीं है, लेकिन इसका उपचार बीमारी की सीमा पर निर्भर करता है। कई लोगों में बीमारी के लक्षणों को देखते हुए प्रभावित स्तन क्षेत्र को रेडिएशन के जरिए निकाल दिया जाता है। कीमोथेरेपी और हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी द्वारा भी इसका इलाज किया जाता है।

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जैसा कि पहले ही बताया गया है कि यह बीमारी लाइलाज नहीं है। इसलिए अगर आप अपने ब्रेस्ट एरिया के आसपास गांठ महसूस करते हैं, तो घबराएं नहीं। जरूरी नहीं है कि हर तरह की गांठ कैंसर का रूप ले ले। हो सकता है यह गांठ जाइनेकोमास्टिया या कुछ तरल पदार्थ भरा उभार हो। पुरुषों के ब्रेस्ट कैंसर की गांठ कुछ अलग होती है।

इन लक्षणों को नहीं करना चाहिए नजरअंदाज

पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer in Men) के ज्यादातर मामले 60 साल से ज्यादा के पुरुषों में पाए गए हैं। लक्षण नहीं पता होने की वजह से पुरुषों में इसकी गंभीर स्थिति देखने को मिलती है। पुरुषों को इन लक्षणों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer) के लक्षण

छाती में गांठ बनना

अगर आपकी छाती पर गांठ बन रही है तो इसे नजरअंदाज करें। ये ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer) का लक्षण हो सकता है। ये गांठ एक ब्रेस्ट में ही निप्पल के आसपास होता है। आमतौर पर इन गांठ में दर्द नहीं होता है, लेकिन छूने पर ये सख्त होता है। जैसे-जैसे कैंसर बढ़ता है, इसकी सूजन गर्दन तक फैल जाती है। हालांकि ज्यादातर गांठ कैंसर का लक्षण नहीं होते हैं, लेकिन फिर भी अगर आपको ऐसी कोई शिकायत है तो डॉक्टर से जरूर संपर्क करें।

पिंपल की तरह का घाव

ब्रेस्ट कैंसर में ट्यूमर स्किन से ही उभरता है, ऐसे में कैंसर बढ़ने के साथ निप्पल्स पर खुला घाव दिखाई पड़ सकता है। ये घाव एक पिंपल की तरह दिखता है। इसके अलावा बगल में गांठ आ जाना या छाती की स्किन का रंग बदलने जैसे लक्षण भी पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer) के संकेत हो सकते हैं।

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निप्पल का अंदर चले जाना

ट्यूमर बढ़ने के साथ-साथ ब्रेस्ट के अंदर खिंचाव होने लगता है। ऐसे में निप्पल्स अंदर की ओर चले जाते हैं। निप्पल्स वाले हिस्से के आस-पास की त्वचा रूखी होने लगती है और रैशेज भी होने लगते हैं।

निप्पल डिस्चार्ज

अगर आपको अपनी शर्ट पर अक्सर किसी तरह का दाग दिखता है तो इसे नजरअंदाज ना करें। इस निप्पल डिस्चार्ज में खून भी हो सकता है। निप्पल के आसपास की स्किन में सूजन आ जाती है और स्किन छूने में बहुत हार्ड लगती है।

पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer) के अन्य लक्षण

इन लक्षणों के साथ हर समय थकान, हड्डियों में दर्द, सांस लेने में दिक्कत, बीमार महसूस होना और स्किन में खुजली जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। अगर आपको इन लक्षणों में से कुछ भी दिखाई देता है, तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

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डायग्नोसिस

पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण दिखाई दिए जाने के बाद उनकी बायोप्सी की जाती है। इसमें छाती में हुई गांठ से एक टुकड़ा निकालकर टेस्ट के लिए लैब में भेजा जाता है। टेस्ट में पता चलता है कि ये गांठ कैंसर की वजह से है या नहीं। इसके अलावा, कैंसर के कुछ और टेस्ट भी किए जाते हैं ताकि इसके स्टेज पता लगाया जा सके।

निप्पल में बदलाव जैसे कि निप्पल का अंदर की ओर मुड़ना, लालिमा, परतदार त्वचा

अगर जल्द ही इसके लक्षणों का पता नहीं चलता तो यह फैल सकता है, उस स्थिति में ये सब अनुभव हो सकते हैं।

  • बहुत अधिक थकान लगना
  • खाने के प्रति अरुचि
  • वजन में कमी
  • जोड़ों और हड्डियों में दर्द
  • सांस की तकलीफ

पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर के कारण (Causes of breast cancer in men)

पुरुषों में होने वाले ब्रेस्ट कैंसर का सटीक कारण (Causes of breast cancer in men) क्या है, अब तक इस संबंध में कोई पुख्ता शोध नहीं है। हालांकि माना जाता रहा है कि आनुवंशिक उत्परिवर्तन, आनुवंशिक विकार, परिवार में किसी को पहले भी इस तरह की समस्या रहने की स्थिति में, पिछले किसी उपचार के दौरान हार्मोनल थेरेपी के प्रयोग और विकिरण के संपर्क में आने की स्थिति में ब्रेस्ट कैंसर होने का जोखिम अधिक रहता है।

क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम (Klinefelter syndrome)

इस स्थिति वाले पुरुष अतिरिक्त एक्स क्रोमोसोम के साथ पैदा होते हैं, जो स्तन के विकास और लो टेस्टोस्टेरोन जैसी स्थितियों को उत्पन्न करता है। क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम (Klinefelter syndrome) वाले लोगों में ब्रेस्ट कैंसर होने की आशंका अधिक होती है।

लिवर की बीमारी (Liver disease)

लिवर की बीमारी (Liver disease) खून में एस्ट्रोजन की मात्रा को भी बढ़ा देती है जो ब्रेस्ट कैंसर का कारण बन सकती है।

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ऑर्काइटिस/ एपिडिडीमाइटिस

ऑर्काइटिस या एपिडीडिमाइटिस जैसी स्थितियों के कारण अंडकोष की सूजन आ जाती है, जिससे टेस्टोस्टेरोन के स्तर में परिवर्तन आ सकता है।

प्रोस्टेट कैंसर (prostate cancer)

प्रोस्टेट कैंसर (prostate cancer) के लिए दिए जाने वाले हार्मोनल उपचार से भी इसका जोखिम बढ़ सकता है। इसके अलावा कभी-कभी प्रोस्टेट कैंसर वाले लोगों में ब्रेस्ट कैंसर विकसित हो सकता है।

पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर का इलाज (Treatment of breast cancer in men)

अगर शुरुआती चरणों में पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर के लक्षणों को पहचान लिया जाए, तो इसका इलाज संभव है। इसके इलाज में आमतौर पर स्तन के ऊतक को हटाने के लिए सर्जरी की जाती है। कुछ स्थितियों में कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी की मदद ली जाती है।

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ब्रेस्ट कैंसर का इलाज पुरुषों और महिलाओं में ज्यादातर एक ही तरह से होता है। ब्रेस्ट कैंसर में तीन तरह से इलाज किया जाता है। पहले इलाज में मरीज का ऑपरेशन कर छाती से गांठ निकाल दी जाती है। दूसरे तरीके में मरीज की कीमोथेरेपी की जाती है, जिसमें दवाओं के जरिए कैंसर की कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है।

तीसरा इलाज

तीसरा इलाज रेडिएशन थेरेपी के जरिए किया जाता है। इसमें हाई एनर्जी एक्स-रे या गामा-रेज रेडिएशन के माध्यम से कैंसर का ट्रीटमेंट किया जाता है। डॉक्टर्स का कहना है कि हर व्यक्ति को ये जानना जरूरी है कि ब्रेस्ट कैंसर सिर्फ महिलाओं को नहीं होता है। इसलिए हर किसी को अपने लक्षणों पर ध्यान देने की जरूरत है।

सर्जरी (Surgery) –

मस्टेक्टमी : इसमें सभी ब्रेस्ट ऊतकों को हटाया जाता है।

रेडिएशन थेरेपी : रेडिएशन थेरेपी में कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने के लिए एक्स-रे व प्रोटॉन जैसे हाई एनर्जी बीम का उपयोग किया जाता है। पुरुषों में स्तन कैंसर की स्थिति में सर्जरी के बाद स्तन, छाती की मांसपेशियों या बगल में बची हुई कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने के लिए रेडिएशन थेरेपी का प्रयोग किया जा सकता है।

हार्मोन थेरेपी : पुरुषों में स्तन कैंसर के अधिकांश मामलों में ट्यूमर का संबंध हार्मोन (हार्मोन सेंसिटिविटी) से होता है। यदि किसी पुरुष को हार्मोन सेंसिटिव कैंसर है, तो ऐसे में डॉक्टर हार्मोन थेरेपी की सलाह दे सकते हैं।

पुरुषों के लिए ये हैं रिस्क फैक्टर्स

दुनियाभर में होने वाले ब्रेस्ट कैंसर केसेज में सिर्फ 1 प्रतिशत ही पुरुषों के मामले होते हैं। डॉ। लाला का कहना है कि दुनिया के बाकी हिस्सों में पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर के मामले 60 या 70 साल की उम्र में देखने को मिलते हैं, लेकिन भारत में पता नहीं क्यों 40-50 साल के पुरुषों में भी ब्रेस्ट कैंसर के मामले दिखते हैं।

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पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर का रिस्क बढ़ाने के फैक्टर्स की बात करें तो मोटापा, खानपान की गलत आदतें, एक्सर्साइज न करना, स्मोकिंग और ड्रिंकिंग जैसी चीजें शामिल हैं। वैसे पुरुष जो गाइनैकोमास्टिया यानी ब्रेस्ट टिशू के सूजन या बढ़ने की समस्या से परेशान हैं उनमें ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है।

ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ है अक्टूबर (October is breast cancer awareness month)

अक्टूबर के महीने को ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ (October is breast cancer awareness month) के रूप में देखा जाता है, ऐसे में सिर्फ महिलाओं को ही नहीं बल्कि पुरुषों को भी ब्रेस्ट कैंसर के प्रति जागरूक होने की जरूरत है। मुंबई के हिंदूजा अस्पताल के ऑन्कोसर्जरी के कंसल्टेंट डॉ. मुराद लाला का कहना है कि ‘महिलाओं और पुरुषों दोनों में ब्रेस्ट टिशू एक जैसा ही होता है। प्यूबर्टी आने पर पुरुषों में ऐस्ट्रोजेन हॉर्मोन का लेवल कम और टेस्टोस्टेरॉन का लेवल अधिक हो जाता है इसलिए पुरुषों में ब्रेस्ट का डिवेलपमेंट नहीं होता। लेकिन ब्रेस्ट टिशू तो रहता ही है इसलिए ब्रेस्ट कैंसर का रिस्क भी बना रहता है।’

एक दशक में 20 केस- पुरुष ब्रेस्ट कैंसर केस (20 cases in a decade – male breast cancer cases)

एशियन कैंसर इंस्टिट्यूट में ब्रेस्ट कैंसर डिपार्टमेंट के हेड डॉ. संजय शर्मा का कहना है कि उन्होंने पिछले एक दशक में ब्रेस्ट कैंसर के हजारों केसेज में से 20 केस (20 cases in a decade – male breast cancer cases) ऐसे भी देखे जिसमें पुरुषों को ब्रेस्ट कैंसर हुआ था। डॉ. संजय का कहना है कि पुरुषों को ब्रेस्ट कैंसर हो सकता है इस बात को टैबू समझा जाता है, लिहाजा मरीज इसके लक्षणों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर देते हैं।

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