प्रेरक प्रसंग

Chhath Puja 2020 : खरना के साथ दो दिवसीय निर्जला व्रत शुरू

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छठ पर्व (Chhath Puja started) के दूसरे दिन व्रतियों ने खरना कर छठ माई की आराधना की। सूर्यास्त के समय सूर्य को अ‌र्घ्य (Sunrise) देने के बाद रसियाव रोटी खाकर व्रतियों ने 36 घंटे का निर्जला व्रत धारण कर लिया है। अब शनिवार भोर में सूर्य को अ‌र्घ्य देने और भोग लगाने के बाद यह व्रत खोला जाएगा।

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खरना संपन्न होने के साथ ही छठ व्रतियों का 36 घंटे का निर्जला उपवास (Chhath Vratis fasting for 36 hours) शुरू हो गया है. विधायक डाॅ नीरा यादव ने भी कोडरमा स्थित अपने आवास पर खरना किया. खरना का प्रसाद ग्रहण करने के लिए काफी संख्या में लोग विधायक आवास पहुंचे.

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महापर्व के तीसरे दिन शुक्रवार को छठ व्रती (Chhath Puja started) महिलाएं- पुरुष अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को अर्घ अर्पित करेंगे. इसके उपरांत शनिवार की सुबह उदीयमान सूर्यदेव को अर्घ देने के साथ छठव्रती पारण करेंगी. इसके साथ ही महापर्व का समापन होगा.

छठ व्रत की पौराणिक कथा

पौराणिक कथा (Legend of Chhath Vrat) के अनुसार, प्राचीन समय की बात है जब एक नगर में प्रियव्रत नाम के राजा थे. उनकी पत्नी का नाम मालिनी था. दोनों की कोई संतान नहीं थी. इस बात से राजा और उसकी पत्नी बहुत दुखी रहते थे. उन्होंने एक दिन संतान प्राप्ति की इच्छा से महर्षि कश्यप द्वारा पुत्रेष्टि यज्ञ करवाया. इस यज्ञ के फलस्वरूप रानी गर्भवती हो गईं.

बाद संतान सुख को प्राप्त (Achieve child happiness) करने का समय आया तो रानी को मरा हुआ पुत्र प्राप्त हुआ. इस बात का पता चलने पर राजा को बहुत दुख हुआ. संतान शोक में वह आत्म हत्या का मन बना लिया. लेकिन जैसे ही राजा ने आत्महत्या करने की कोशिश की उनके सामने एक सुंदर देवी प्रकट हुईं.

देवी ने राजा को कहा कि मैं षष्टी देवी हूं. मैं लोगों को पुत्र का सौभाग्य प्रदान करती हूं. इसके अलावा जो सच्चे भाव से मेरी पूजा करता है, मैं उसके सभी प्रकार के मनोरथ को पूर्ण कर देती हूं. यदि तुम मेरी पूजा करोगे तो मैं तुम्हें पुत्र रत्न प्रदान करूंगी. देवी की बातों से प्रभावित होकर राजा ने उनकी आज्ञा का पालन किया. राजा और उनकी पत्नी ने कार्तिक शुक्ल की षष्टी तिथि के दिन देवी षष्टी की पूरे विधि-विधान से पूजा की. इस पूजा के फलस्वरूप उन्हें एक सुंदर पुत्र की प्राप्ति हुई. तभी से छठ का पावन पर्व मनाया जाने लगा.

छठ व्रत (Chhath Puja) के संदर्भ में एक अन्य कथा के अनुसार जब पांडव अपना सारा राजपाट जुए में हार गए, तब द्रौपदी ने छठ व्रत रखा. इस व्रत के प्रभाव से उसकी मनोकामनाएं पूरी हुईं तथा पांडवों को राजपाट वापस मिल गया.

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