रायपुर

Chhattisgarh Yoga Guru : ये ‘बाबा’ नहीं हैं ‘रामदेव’, खा ना जाना धोखा

बाबा रामदेव के योग से प्रेरित होकर बाबा बन गया लेखुराम। योग और स्वदेसी को समर्पित किया अपना जीवन। दो सौ शिविरों में 50 हजार लोगों को सिखा चुके हैं योग।

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कवर्धा : योग भगाए रोग का नारा देकर बाबा रामदेव दुनिया में छा गए। योग की चर्चा बाबा रामदेव के नाम के बिना अधूरी लगती है। हिंदुस्तान ही नहीं, सात समंदर पार तक उनके योग की चर्चा हो रही है। बाबा का खूब नाम है। हम आपको बाबा रामदेव के हमशक्ल एक ऐसे शख्स के बारे में आज बता रहे हैं। जो पहली नजर में रामदेव नजर आते हैं। केवल बाबा रामदेव से मिलता-जुलता शक्ल ही नहीं है, बल्कि उनका पहनावा भी बाबा रामदेव की तरह ही है। भगवा रंग की धोती, पैरों में खड़ाऊ, लंबी दाढ़ी और वैसे ही बाल रखते हैं। एकबारगी कोई देखे तो धोखा खा जाते हैं।

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पचास हजार लोगों को सिखाया योग

वे करीब दो सौ शिविरों में पचास हजार से ज्यादा लोगों को योग सिखा चुके हैं। छत्तीसगढ़ ही नहीं, अन्य प्रांतों में भी शिविर लगा चुके हैं। इतना ही नहीं, वे बाबा रामदेव की तरह ही स्वदेसी का भी प्रचार करते हैं। कवर्धा जिले के पंडरिया विकासखंड के ग्राम सूढ़ा निवासी करीब 33 वर्षीय लेखूराम योग में पारंगत हैं। गांव के स्कूल में मिडिल तक की पढ़ाई की। बाद कवर्धा के नवीन स्कूल में हाई स्कूल की शिक्षा ली। इसके बाद पीपी कालेज में उच्च शिक्षा लेने गए।

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अहमदाबाद में भी लगा चुके हैं शिविर

गुजरात के अहमदाबाद में भी वे विशाल शिविर आयोजित कर चुके हैं। योग के लिए डेढ़ सौ से अधिक गांवों में वे पहुंच चुके हैं। कवर्धा के लोग अब इन्हें ‘लेखू बाबा’ के नाम से पहचानते हैं। वे सुबह चार बजे मैसेज कर युवाओं को न सिर्फ जगाते हैं बल्कि उन्हें योग करने बुलाकर प्रेरित भी करते हैं।

बचपन से योग से लगाव

योग के प्रति उनका लगाव बचपन से है। बाबा रामदेव के बारे में पढ़ना, जानना, उनके योगाभ्यास को देखना उन्हें अच्छा लगता है। उनसे प्रेरित होकर आसपास के गांवों में वे योग का शिविर लगाने लगे। वर्ष 2010 में बाबा रामदेव के योग शिविर में लेखूराम को योगाभ्यास कराने का अवसर मिला। इस शिविर ने उनकी जिंदगी का लक्ष्य ही बदल दिया।

योग के लिए छोड़ दी पढ़ाई

वर्ष 2011 में बीएससी अंतिम वर्ष की पढ़ाई छोड़कर वे योग से पूरी तरह जुड़ गए। उन्होंने पूरा जीवन योग-प्राणायाम और स्वदेसी वस्तुओं के प्रचार-प्रसार को समर्पित करने का संकल्प लिया। इसके बाद से लेखूराम लगातार शिविर आयोजित कर बच्चे, बूढ़े, युवा, महिलाओं सभी को योग सिखा रहे हैं। मंच पर वे जब उतरते हैं तो पहली बार देखने वाले को जब तक न बताएं, वह लेखु को बाबा रामदेव ही समझता रहता है। योग के लिए स्कूल उनके प्रमुख केंद्र हैं, जहां वे बच्चों को निश्शुल्क योग सिखाते हैं। उनका मानना है कि नई पीढ़ी को संभाल लिए तो भविष्य स्वमेव उज्ज्वल हो जाएगा।

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