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Corona infection : उम्मीद की किरण बनी स्टेम सेल थैरेपी , जाने क्या स्टेम सेल थैरेपी ?

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Corona infection : कोरोना संक्रमण के इलाज के लिए दुनियाभर के देश वैक्सीन बनाने में जुटे हैं। भारत भी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है लेकिन सम्पूर्ण ट्रायल प्रक्रिया पूरी होने तथा मरीजों के इलाज के लिए वैक्सीन उपलब्ध होने में अभी समय लगेगा। कई देशों में कोरोना के इलाज के लिए कुछ संभावित दवाओं या उपचार पद्धतियों के क्लीनिकल ट्रायल हो रहे हैं और कुछ में शुरुआती सफलता भी दिख रही है। कुछ देशों में ‘स्टेम सेल थैरेपी’ (Stem cell therapy) से भी कोरोना मरीजों का इलाज (Treatment of corona patients) करने के प्रयास चल रहे हैं।

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यूएई (संयुक्त अरब अमीरात) में इसी उपचार पद्धति से 73 कोरोना वायरस संक्रमितों को ठीक करने की सुखद खबर सामने आई थी। वहां के विदेश मंत्रालय के स्ट्रैटेजिक कम्युनिकेशंस विभाग की निदेशक हेंड अल कतीबा के अनुसार ‘अबूधाबी स्टेम सेल सेंटर’ (एडीएससीसी) ने ‘स्टेम सेल थैरेपी’ के जरिये कोरोना के सभी 73 कोरोना मरीजों को ठीक करने में सफलता प्राप्त की। अल कतीबा के मुताबिक इस रिसर्च सेंटर ने ‘स्टेम सेल थैरेपी’ से कोरोना इलाज की नई तकनीक ‘गेम-चेंजर’ विकसित की है, जिससे कोरोना संक्रमण को मात दी जा सकती है।

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इस नए इलाज में मरीज के रक्त से स्टेम सेल्स को निकालकर उन्हें फिर से सक्रिय करके रोगी के फेफड़ों में डाला जाता है। इससे फेफड़ों की कोशिकाओं को पुनर्जीवित किया जाता है, जिससे फेफड़ों की क्षमता पुनः बढ़ जाती है। यूएई की विदेश मंत्री हिंद अल ओतैबा के मुताबिक कोरोना महामारी से लड़ने में यह अभूतपूर्व कदम साबित हो सकता है। यूएई में जिन 73 मरीजों को यह उपचार दिया गया, उनमें से किसी भी मरीज ने तुरंत किसी साइड इफैक्ट्स की शिकायत नहीं की।

कुछ भारतीय शोधकर्ता (Indian Researcher) भी ‘स्टेम सेल थैरेपी’ से कोरोना मरीजों के उपचार को लेकर उत्साहित दिख रहे हैं। कई भारतीय डॉक्टरों का मानना है कि शरीर में पाई जाने वाली मिजेंकाइमल स्टेम सेल्स कोरोना संक्रमित रोगी के क्षतिग्रस्त अंगों को पुनः स्वस्थ कर सकती है क्योंकि स्टेम सेल्स का कार्य क्षतिग्रस्त टिश्यू की मरम्मत और नया टिश्यू बनाना है। भारतीय स्टेम सेल विशेषज्ञों के मुताबिक स्टेम सेल्स को रोगी या किसी स्वस्थ व्यक्ति से लेकर लैब में कल्चर कर एक निश्चित मात्रा में कोरोना संक्रमित व्यक्ति के शरीर में डाला जाए तो मरीज ठीक हो सकता है।

‘स्टेम सेल थैरेपी’ पर शोध

देशभर के कुल 8 डॉक्टरों के समूह ‘भारतीय स्टेम सेल स्टडी ग्रुप’ ने ‘स्टेम सेल थैरेपी’ पर शोध करने के बाद दावा किया है कि कोरोना के मरीज स्वयं के स्टेम सेल से ठीक हो सकेंगे। इनका कहना है कि प्लासेंटा, अंबीलिकल कॉर्ड तथा बोन मैरो से निकलने वाले स्टेम सेल से कोरोना मरीज का उपचार किया जा सकता है। स्टेम सेल तीन प्रकार के होते हैं, भ्रूण स्टेम सेल (एंब्रियोनिक स्टेम सेल्स), व्यस्क स्टेम सेल (एडल्ट स्टेम सेल) तथा कॉर्ड स्टेम सेल।

स्टेम सेल थेरेपी क्या है?

स्टेम सेल यानी मूल कोशिकाएं शरीर की बिल्डिंग ब्लॉक्स हैं. विखंडन की मदद से ये कोशिकाएं खुद को नया कर सकती हैं. जब स्टेल सेल टूटता है, तो हर नए सेल में स्टेम सेल बने रहने या स्पेशलाइज्ड सेल बनने की क्षमता होती है- जैसे कि मसल सेल, रेड ब्लड सेल या ब्रेन सेल.

कुछ प्रायोगिक दशाओं के तहत इन्हें टिश्यू बनाने या खास काम के लिए अंग-विशेष के सेल्स बनाने के लिए तैयार किया जा सकता है. यही स्टेम सेल थेरेपी का आधार है.

स्टेम सेल आमतौर पर बोन मैरो, सर्कुलेटिंग ब्लड, अमबिलिकल (गर्भनाल) कॉर्ड ब्लड से निकाले जाते हैं और इसका गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल किया जाता है. उदाहरण के लिए, अगर किसी बीमारी के कारण किसी शख्स के स्वस्थ ब्लड सेल खराब हो गए हैं, तो स्वस्थ डोनर से स्टेम सेल ट्रांसप्लांट किया जा सकता है. इससे उनके शरीर में दोबारा स्वस्थ ब्लड सेल्स बनाना शुरू हो सकता है.

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