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मकर संक्रांति का पर्व आज, इन बातों का रखें खास तौर पर ध्यान

आज मकर संक्रांति (Makar Sankranti) का पर्व है। मकर संक्रांति (Makar Sankranti) देशभर में धूमधाम से मनाया जाता है। इस बार यह पर्व 14 जनवरी यानी गुरुवार को मनाया जा रहा है।

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आज मकर संक्रांति (Makar Sankranti) का पर्व है। मकर संक्रांति देशभर में धूमधाम से मनाया जाता है। इस बार यह पर्व 14 जनवरी यानी गुरुवार को मनाया जा रहा है। इस बार ग्रहों के राजा सूर्य 14 जनवरी को यानी आज दोपहर 08 बजकर 30 मिनट पर अपने बेटे शनि के मकर राशि में प्रवेश करेंगे। मान्यता है कि मकर संक्रांति पर तिल, कंबल, घी का दान करने से भगवान सूर्यदेव प्रसन्न होकर संपत्ति प्रदान करते हैं।

पतंग उड़ाने को लेकर मान्यता (Makar Sankranti)

वहीं मकर संक्रांति में पतंग उड़ाने को लेकर भी मान्यता है। मान्यता के मुताबिक पतंग उड़ाते समय व्यक्ति का शरीर सीधे सूर्य की किरणों के संपर्क में आता है, जिससे उसे सर्दी से जुड़ी कई शारीरिक समस्याओं से निजात मिलने के साथ विटामिन डी भी पर्याप्त मात्रा में मिलता। बता दें कि विटामिन डी शरीर के लिए बहुत जरुरत है, जो शरीर के लिए जीवनदायिनी शक्ति की तरह काम करता है।

मकर संक्रांति का महत्व (Makar Sankranti)

ज्योतिष में मकर संक्रांति को देवी के रूप में माना जाता है और इनके स्वरूप पर बहुत कुछ निर्भर करता है। जैसे कि संक्रांति किस वाहन पर बैठकर आएगी और इसका शस्त्र क्या होगा। उसने क्या कपड़े पहने होंगे। उसका मुख किस तरफ होगा, वो क्या भोजन करेगी और वो किस दिशा से आएगी।

शुभ मुहूर्त (Makar Sankranti Dan Pun time)

भगवान सूर्य 14 जनवरी दिन गुरुवार की सुबह 8 बजकर 30 मिनट पर धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसी के साथ मकर संक्रांति की शुरुआत हो जाएगी। वहीं, दिन भर में पुण्य काल करीब शाम 5 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। महापुण्य काल सुबह में ही रहेगा। माना जाता है कि पुण्य काल में स्नान-दान करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है।

संक्रांति का ये होगा असर

दुनिया के केंद्र में इस संक्रांति (Makar Sankranti) से हलचल मचने वाली है क्योंकि ये दक्षिण की तरफ बढ़ रही है। दुनिया भर में फैली महामारी में एक महीने के अंदर भारी गिरावट आएगी। ये संक्रांति कुछ मामलों में अच्छी तो कुछ मामलों में मुश्किल भरी रहेगी। खासतौर से शासक वर्ग के लिए ये मकर संक्रांति (Makar Sankranti) कई चुनौतियां लेकर आ रही है।

मकर संक्रांति का प्रभाव

इस संक्रांति के प्रभाव से देश में जितनी भी सफेद वस्तुएं हैं जैसे कि चावल, चांदी, दूध और शक्कर इनके दाम बढ़ सकते हैं। वहीं सोने के दाम में भी गिरावट आएगी। ये संक्रांति लोगों के मन में चिंता और डर पैदा करेगी। इस संक्रांति के कारण जो भी सरकार केंद्र या राज्य में है उसके प्रति लोगों का रोष बढ़ेगा।

सबसे खास होती हैं ये चार संक्रांतियां

साल में 12 संक्रांतियां होती हैं जिनमें से सबसे खास चार होती हैं। सबसे पहली मेष संक्रांति होती है। इसमें सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करने से ऋतु परिवर्तन होता है और गर्मी की शुरूआत होती है।

मकर संक्रांति के दिन मनाए जाते हैं कई पर्व

मकर संक्रांति (Makar Sankranti) से एक दिन पहले लोहड़ी का पर्व भी मनाया जाता है। मकर संक्रांति पर गुजरात लोग पतंगबाजी भी करते हैं। मकर संक्रांति को उत्तर भारत के कुछ इलाकों में खिचड़ी के पर्व के रूप में मनाते हैं। कई जगह खिचड़ी दान की जाती है तो कई जगह खिचड़ी का भोग लगाया जाता है। वहीं दक्षिण भारत के तमिलनाडु व केरल में इसे पोंगल के रूप में मनाते हैं। पोंगल का पर्व नई फसल आने की खुशी में मनाया जाता है।

पतंग उड़ाने का है ये फायदा

पतंग उड़ाने से दिमाग सदैव सक्रिय बना रहता है। इससे हाथ और गर्दन की मांसपेशियों में लचीलापन आता है। साथ ही मन-मस्तिष्क प्रसन्न रहता है क्योंकि इससे गुड हार्मोंस का बहाव बढ़ता है। पतंग उड़ाते समय आंखों की भी एक्सरसाइज होती है।

मकर संक्रांति से जुड़े हैं कई तथ्य

मकर संक्रांति (Makar Sankranti) पर सूर्य उत्तरायण का होता है, इस कारण इस समय सूर्य की किरणें व्यक्ति के लिए औषधि का काम करती हैं। सर्दी के मौसम में व्यक्ति के शरीर में कफ की मात्रा बढ़ जाती है। साथ ही त्वचा में भी रुखापन आने लगता है। ऐसे में छत पर खड़े होकर पतंग उड़ाने से इन समस्याओं से राहत मिलती है।

भगवान श्रीराम ने की थी पतंग उड़ाने की शुरुआत

पुराणों में उल्लेख है कि मकर संक्रांति पर पहली बार पतंग उड़ाने की परंपरा सबसे पहले भगवान श्रीराम ने शुरु की थी। तमिल की तन्दनानरामायण के अनुसार भगवान राम ने जो पतंग उड़ाई वह स्वर्गलोक में इंद्र के पास जा पहुंची थी।भगवान राम द्वारा शुरू की गई इसी परंपरा को आज भी निभाया जाता है।

दान का है विशेष महत्व

मकर संक्रांति के दिन दान का विशेष महत्व है। इस दिन गरीबों को यथाशक्ति दान करना चाहिए। पवित्र नदियों में स्नान करें। इसके बाद खिचड़ी का दान देना विशेष फलदायी माना गया है। इसके अलावा गुड़-तिल, रेवड़ी, गजक आदि का प्रसाद बांटा जाता है।

ये सामग्री दान करने की है मान्यता

सूर्यदेव को जल, लाल फूल, लाल वस्त्र, गेहूं, गुड़, अक्षत, सुपारी और दक्षिणा अर्पित की जाती है। पूजा के उपरांत लोग अपनी इच्छा से दान-दक्षिणा करते हैं। इस दिन खिचड़ी का दान भी विशेष महत्व रखता है।

खरमास का हो जाएगा समापन

पौष शुक्ल पक्ष प्रतिपदा 14 जनवरी 2021 यानी आज 2:03 बजे सूर्य देव का परिवर्तन अपने पुत्र शनिदेव की राशि मकर में होगा। इसी के साथ खरमास का समापन हो जाएगा।

ऐसे करें घर पर मकर संकांति की पूजा

  • सुबह जल में गंगाजल, सुगंध, तिल, सर्वऔषधि मिलाकर स्नान करें। स्नान करने के दौरान गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरी जलस्मिन्सन्निधिं कुरु। इस मंत्र को पढ़े।
  • भगवान विष्णु की पूजा करें, भगवान को तिल, गुड़, नमक, हल्दी, फूल, पीले फूल, हल्दी, चावल भेट करें। घी का दीप जलाएं और पूजन करें।
  • इसके बाद सूर्यदेव को जल में गुड़ तिल मिलाकर अर्घ्य दें।
  • जल में काले तिल, गुड़ डालकर पीपल को जल दें,
  • जरूरतमंदों को तिल, गुड़, चावल, नमक, घी, धन, हल्दी जो भी भगवान को भेट किया वह दान कर दें।
  • सूर्यपुराण, शनि स्तोत्र, आदित्यहृदय स्तोत्र, विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना लाभकारी रहेगा।

मकर संक्रांति को महा संक्रांति भी कहा जाता है। इस साल की मकर संक्रांति कई मायनों में खास रहने वाली है। ज्योतिर्विद कमल नंदलाल से जानते हैं कि इस संक्रांति का देश और दुनिया पर क्या प्रभाव पड़ेगा। ज्योतिष में सूर्य को पिता कहा गया है। सूर्य देव एक साल में 12 राशियों में अलग-अलग समय में भ्रमण करते हैं। इस राशि परिवर्तन को सूर्य की संक्रांति कहा जाता है। संक्रांति शब्द संक्रमण से बना है और संक्रमण का अर्थ होता है एक जगह से दूसरी जगह फैलना। सूर्य एक राशि को छोड़कर दूसरी राशि में उजाला कर देता है। सूर्य के इसी राशि परिवर्तन को संक्रांति कहते हैं।

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2021 में मकर संक्रांति मंद देवी के रूप में आ रही है। इनकी शवारी शेर है और ये बैठी हुई अवस्था में आएंगी। इनका उपवाहन हाथी होगा। इस साल की संक्रांति अपने बाल अवस्था में हैं। इन्होंने सफेद वस्त्र धारण किए हैं और कस्तूरी का इत्र लगा रखा है। इनके हाथ में नाग केसर का फूल है। देवी संक्रांति का वस्त्र गदा होगा और ये सोने के बर्तन नें अन्न खाते हुए आएंगी। मंद नामक देवी संक्रांति का वार मुख उत्तर की और जबकि इनकी दृष्टि उत्तर से ईशान की तरफ होगी। ये दक्षिण दिशा की तरफ गमन करेंगी।

Happy Sankranti 2021: मकर संक्रांति के दिन इन बातों का जरूर रखें ध्यान

सूर्य जब राशि में भम्रण करता है तो उसे संक्रांति कहते हैं। इसी तरह से जब सूर्य धनु राशि से मकर में प्रवेश करता है, उसे मकर संक्रांति कहते हैं। हर साल मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जाती है। मकर संक्रांति के दिन से सूर्य छह माह के लिए उत्तरायण होता है। यही कारण है कि देश के कई हिस्सों में इसे उत्तरायण पर्व भी कहते हैं।

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मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन दान करने से कई गुना ज्यादा पुण्य मिलता है। शास्त्रों के मुताबिक मकर संक्रांति के दिन मांगलिक कार्यों को करना शुभ होता है। हालांकि कहा जाता है कि इस दिन कुछ कार्यों को भूलकर भी नहीं करना चाहिए।

  • अक्सर लोग बिस्तर पर सुबह चाय पीते हैं या फिर उठते ही कुछ न कुछ खाना शुरू कर देते हैं। लेकिन मकर संक्रांति के दिन सुबह स्नान करने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद ही कुछ खाना-पीना चाहिए।
  • मकर संक्रांति का पर्व प्रकृति से जुड़ा है। इस दिन किसी भी तरह के पेड़-पौधों की कटाई-छंटाई नहीं करनी चाहिए। कहते हैं कि ऐसा करने से घर में बरकत नहीं होती है।
  • मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन मांस-मदिरा और किसी भी तरह की नशीली चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। कहते हैं कि ऐसा करने से मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त नहीं होता है।
  • मकर संक्रांति के दिन भोजन में व्याज-लहसुन आदि का प्रयोग नहीं करना चाहिए। शास्त्रों में इन दोनों चीजों को तामसिक माना गया है। खाने में सात्विकता का ध्यान रखना जरूरी है।
  • अगर आपके घर में दूध देने वाले मवेशी हैं तो कहा जाता है कि मकर संक्रांति के दिन गाय या भैंस का दूध नहीं दूहना चाहिए।
  • मकर संक्रांति को शांति और उमंग का प्रतीक माना जाता है। इसलिए इस दिन क्रोध या बहस नहीं करनी चाहिए। कहते हैं कि मकर संक्रांति के दिन किसी को कटु वचन भी नहीं बोलने चाहिए।
  • मकर संक्रांति के दिन दान का विशेष महत्व होता है। इस दिन किसी भी गरीब या जरुरतमंद को घर से खाली हाथ नहीं लौटाना चाहिए।
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