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Murder In Mahasamund : जोबा में ऐसे हुआ महाभारत, जानिए जमीन कैसे बना जी का जंजाल

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अशोक कुमार साहू

रायपुरः छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से 75 किमी दूर स्थित है गांव जोबा। महासमुंद जिले के इस गांव की आधा आबादी बाबा गुरूघासीदास के अनुयायी सतनामी समाज के लोगों की है। बाबा ने सत्य-अहिंसा और नशामुक्ति का पाठ पढ़ाया, यह हम सब जानते हैं। लेकिन, यहां बाबा के अनुयायी एक परिवार की बेइमानी ने महाभारत करा दिया। कहा जाता है कि जर-जोरू-जमीन ये तीन ही संसार में सभी फसाद की जड़ हैं। कुरूक्षेत्र का महाभारत- हस्तिानपुर में सुई के नोंक के बराबर जमीन नहीं देने संबंधी दुर्योधन के उद्गार से शुरू हुआ। जो कौरव वंश के समूल नाश का कारण बना। ऐसा ही घटना महासमुंद जिले के जोबा गांव में घटित हुआ। जमीन का बंटवारा नहीं देना एक परिवार के लिए जी का जंजाल बन गया। ।

और महज 6 एकड़ जमीन के बंटवारा के लिए अब तक चार हत्याएं हो चुकी है। हत्या करने वालों की योजना तो बड़े भाई के खानदान को समूल नष्ट करने का था। लेकिन, ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था। इसके चलते उनकी योजना सफल नहीं हो पायी।

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हत्यारोपी: चेहरे पर जरा भी सिकन नहीं

हाथों में हथियार लिए खड़े ये दोनों पिता-पुत्र पर त्रिपल मर्डर का आरोप है। तुमगांव थाना में इनके खिलाफ घर में बलात प्रवेश कर हत्या और हत्या का प्रयास का अपराध पंजीबद्ध हुआ है। अपने ही सगे भाई-भतीजों और रिश्तेदारों को मौत के घाट उतारने के बाद भी इनके चेहरे पर जरा भी सिकन नहीं है। हत्या का आरोपी परसराम गायकवाड़ तो अपने भतीजे की हत्या का दोषाभियुक्त रहा है। वह अपने भतीजा धनीराम की हत्या के लिए दस साल की सजा काटकर कुछ महीने पहले ही जेल से रिहा हुआ है। पिता के जेल जाने और खुद दाने-दाने के लिए मोहताज होने से परसराम के बेटे बज्रसेन के मन में भी नफरत घर कर गया था। बाप-बेटे के मन में भरा नफरत का गुबार योजनाबद्ध तरीके से हत्या की साजिश बनकर निकला।

आंख में मिर्ची पाउडर डालकर मारा

महासमुंद डीएसपी नारद सूर्यवंशी बताते हैं कि हत्यारोपी परसराम 62 और उनका बेटा बज्रसेन 27 दोनों ने हत्या की योजना बनाई। मिर्ची पाउडर लेकर ओसराम के घर के बाहर खड़े थे। सुबह करीब चार बजे जागृति नींद से जागकर शौच आदि के लिए जा रही थी। उसके आंखों में मिर्ची पाउडर डालकर धारदार हथियार से गला रेत दिया। बाद दोनों बाप-बेटा घर में प्रवेश कर गए। पत्नी जागृति की चीख-पुकार सुनकर घर से निकल रहे ओसकुमार पर भी दोनों ने संघातिक वार किया। वह जख्मी होने के बाद जैसे-तैसे वहां से भागकर जान बचाया और अपने बड़े भाई खिलावन को जगाया।

इस बीच हत्या की योजना बनाकर घर में घुसे बाप-बेटे ने सब्बल से एक कमरे के दरवाजे को तोड़ा और कमरे में सो रही टीना का गला रेत दिया। इस बीच टीना का नौ साल का भाई मनीष भागकर घर से बाहर निकला तो उसे दोनों ने दौड़ाकर पकड़ लिया और गला रेतकर हत्या कर दी।

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एक के बाद एक सात लोगों पर किया वार

आरोपित बाप-बेटे ने एक के बाद एक सात लोगों पर वार किया। परसराम की भाभी अनारबाई 60 पति सादराम का गला रेता। उसे मृत समझकर ओसकुमार की 15 साल की गूंगी बेटी गीतांजलि और 11 साल के बेटे ओमन पर भी वार किया। दोनों बाप-बेटे के सिर में खून सवार था। वे वहशी दरिंदे की तरह ओसकुमार को मारने के लिए ढूंढ रहे थे। जिससे कि वे उसे मारकर जमीन हासिल कर सकें। लेकिन, ओसकुमार ने वहां से भागकर ग्रामीणों को घटना की जानकारी दी। जिससे आरोपी बाप-बेटे की योजना पूरी तरह से सफल नहीं हो पायी। त्वरित उपचार मिलने से चार की जान फिलहाल बच गई है। गंभीर रूप से घायल ओसकुमार, गीतांजलि, अनारबाई और ओमन रायपुर के चिकित्सालय में भर्ती हैं।

यह है जमीन विवाद की जड़

इस जमीन विवाद को समझने के लिए तीन पीढ़ी की कहानी जानना जरूरी है। जोबा में लुड़गू सतनामी के दो बेटे हुए बड़ा सादराम और छोटा परसराम गायकवाड़( हत्यारोपी)। लुड़गू के पैतृक संपत्ति करीब 6 एकड़ का दोनों भाई के बीच बंटवारा होना था। जो विधिवत नहीं हुआ। आपसी बंटवारा से तीन-तीन एकड़ जमीन को खेती करके जीवन बसर कर रहे थे। ब़ड़े भाई सादराम के तीन बेटे हुए धनीराम, खिलावन और ओसकुमार। इधर, छोटे भाई परसराम का एक बेटा हुआ बज्रसेन गायकवाड़ (हत्यारोपी)।

लुड़गू की मौत के बाद पूरी जमीन बड़े भाई सादराम के नाम पर लंबरदारी में दर्ज हुआ। सादराम, तीन बेटों के जवान होने और बड़े होने से सबल हो गया। इधर, परसराम का बेटा छोटा था। जमीन के स्वामित्व और कब्जा को लेकर अक्सर भाई और भतीजों के बीच विवाद होता था। इससे आवेश में आकर एक दिन परसराम ने अपने बड़े भतीजे धनीराम की हत्या कर डाली। तब उसका बेटा ब्रजसेन नाबालिग था। भतीजे की हत्या न्यायालय में प्रमाणित होने से परसराम को दस साल की कैद की सजा सुनाई गई। वह सजा पूरी करके अभी कुछ समय पहले ही जेल से रिहा हुआ है।

पिता-पुत्र ने मिलकर बनाई हत्या की योजना

जेल की सजा काटने और जमीन नहीं मिलने से दोनों पिता-पुत्र के मन में नफरत घर कर गया था। कुछ महीने पहले बज्रसेन पलायन करके अन्य प्रांत में रोजी-रोटी की तलाश में गया था। जहां से कटार जैसे धारदार हथियार लेकर आया था। वह बलौदाबाजार जिले में अपने मामा के घर रह रहा था। इस बीच पिता के जेल से छूटने पर दोनों ने मिलकर हत्या करने और अपनी जमीन वापस हथियाने की योजना बनाई। करीब महीनेभर पहले दोनों बाप-बेटा अपने पैतृक गांव जोबा आए। जहां उन्हें रहने को घर नहीं मिला तो कांजी हाउस को आशियाना बना लिए। और खानदानी जमीन पर खेती कर रहे ओसकुमार के परिवार को निशाना बनाकर उनकी दिनचर्या पता करते रहे। जब उन्हें यकीन हो गया कि सुबह चार बजे के समय में हत्या की जा सकती है। तब योजनाबद्ध तरीके से मिर्ची पाउडर लेकर और हथियार लेकर आज सुबह धावा बोल दिया।

आठ साल पहले धनीराम का हुआ निधन

यह पुरानी रंजिश की अजब-गजब कहानी है। परसराम ने करीब आठ साल पहले अपने बड़े भतीजे धनीराम की हत्या कर दी थीं। जागृति उसी की धर्मपत्नी थी। बाद में जागृति ने पति की मौत का बदला लेने की ठानी और अपने देवर ओसकुमार से शादी कर ली। उसने योजनाबद्ध तरीके से वंशवृद्धि की। टीना, गीतांजलि दो बेटी और ओम तथा मनीष दो बेटों को उन्होंने जन्म दिया। अपने पहले पति की मौत का बदला लेने की बात अक्सर वह गुस्से में अपने चाचा ससुर के बेटे बज्रसेन से कहती थी। यह उसे नागवार गुजरा और अपने पिता के साथ मिलकर हत्या की योजना बना डाली

जमीन के बंटवारे को लेकर उपजा संघर्ष महाभारत में तब्दील हो गया। महज छह एकड़ जमीन का बंटवारा जी का जंजाल बन गया। जागृति का परिवार बिखर गया। जागृति और उसके दो बच्चों की मौत हो गई। वहीं उसकी सास, पति और दो बच्चे जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं।

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