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New Side Effect of Corona Virus: शरीर के इस हिस्से में फैल रहा इंफेक्शन

कोरोना के नए-नए साइड इफेक्ट (New side effects of Corona) सामने आने लगे हैं। ठीक होने के बाद भी कई लोगों के शरीर में कोरोना का असर काफी दिनों तक रह रहा है, जिसकी वजह से उन्हें नई तरह की परेशानियां हो रहीं हैं।

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कोरोना वायरस (New Side Effect of Corona Virus) ने पूरी दुनिया में कहर मचाकर रखा है। दुनियाभर के अलग-अलग कोनों से रोजाना हजारों की संख्या में कोरोना मरीजों (Corona virus) की पहचान हो रही हैं। इसी बीच कोरोना वैक्सीन बनाने की खबर ने सभी लोगों को इस वायरस से लड़ने के लिए एक उम्मीद जगाई थी, लेकिन इस बीच कोरोना के नए कोविड स्ट्रेन (Corona New stain) की पहचान होने से लोगों की चिंता और भी ज्यादा बढ़ गई है।

कोरोना के नए साइड इफेक्ट

वहीं दूसरी तरफ कोरोना के नए-नए साइड इफेक्ट (New Side Effect of Corona Virus) भी सामने आने लगे हैं। ठीक होने के बाद भी कई लोगों के शरीर में कोरोना का असर काफी दिनों तक रह रहा है, जिसकी वजह से उन्हें नई तरह की परेशानियां हो रहीं हैं। मुंबई के डॉक्‍टर्स के मुताबिक वे कुछ बुजुर्ग मरीजों में कोरोना वायरस का एक नया इंफेक्शन (A new infection of corona virus) देख रहे हैं। ये इंफेक्शन कोरोना की वजह से रीढ़ की हड्डी में हो रहा है।

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एक रिपोर्ट के मुताबिक जुहू स्थित नानावती अस्पताल (Nanavati Hospital) में वायरल बुखार होने पर 6 बुजुर्गों को भर्ती किया गया था। ये सभी लोग कोरोना वायरस (Corona virus) से संक्रमित थे। इस दौरान इन लोगों की रीढ़ की हड्डी में इंफेक्शन (Spinal infection) पाया गया। वहीं चार हफ्ते तक इन लोगों का इलाज किया गया।

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अस्‍पताल के स्‍पाइन सर्जन डॉक्टर मिहिर बापट ने कहा कि ‘Covid-19 संक्रमण की वजह से उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। इन मरीजों में संक्रमण इतना ज्यादा था कि इनमें से 5 लोगों की रीढ़ की हड्डी का ऑपरेशन कराना पड़ा। इन्हें साथ में एंटीबायोटिक भी दी गईं। उन्‍हें पूरी तरह से ठीक होने में 3 महीने लगेंगे।’

एंटीबायोटिक दवाओं (Antibiotic medicines) का रोजाना खर्च 7000 हजार

रिपोर्ट के मुताबिक वसई के रहने वाले 68 साल के रीनोल्‍ड सिरवेल कोरोना वायरस की वजह से सितंबर से अस्‍पताल में भर्ती थे। उनके अब तक का बिल 15 लाख रुपये से भी ज्यादा आ चुका है। वो अब तक चार बार अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं, जिसमें एक बार उनकी रीढ़ की हड्डी का ऑपरेशन किया गया। एक नर्स दिन में तीन बार उन्‍हें एंटीबॉयोटिक दवा देने के लिए घर आती है। इन एंटीबायोटिक दवाओं (Antibiotic medicines) का रोजाना खर्च 7000 हजार रुपये है।

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रीनोल्‍ड सिरवेल के बेटे विनीत (Vineet, son of Reynold Sirwell) का कहना है कि उनके पिता कभी बीमार नहीं पड़ते थे और कोरोना होने से पहले तक रोज 10 किमी पैदल तक चलते थे। कोरोना होने के बाद उन्हें दस दिनों के लिए अस्‍पताल में भर्ती कराया गया, जहां रेमडेसिवीर दवा (Ramadasivir medicine) से उनका इलाज किया गया। घर लौटने के कुछ दिनों बाद उन्हें पीठ के निचले हिस्से में तेज दर्द होने लगा और उन्हें वापस अस्पताल ले जाना पड़ा। वो दो महीने से डॉक्टर के पास जा रहे हैं और उनका स्‍पाइन ट्यूबरक्लोसिस (Spine tuberculosis) का इलाज चल रहा है।

‘आईसीयू में पाए जाते हैं बैक्टीरिया’

रिपोर्ट के मुताबिक रीनोल्ड सिरवेल (Reynold Sirwell) को डॉक्टर बापट के पास रेफर किया गया। वहां स्पाइनल बायोप्सी में रीनोल्‍ड के रीढ़ की हड्डी में बैक्टीरिया पाए गए। खास बात ये है कि ये बैक्टीरिया सिर्फ अस्पताल के आईसीयू में पाए जाते हैं। 7 दिसंबर को नानावती अस्पताल में रीढ़ की हड्डी का ऑपरेशन कराने के बाद सिरवेल को डिस्चार्ज कर दिया गया, लेकिन अभी उन्हें तीन हफ्तों तक एंटीबायोटिक दवाएं (Antibiotic medicines) लेनी होंगी।

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वहीं डॉक्टर बापट का कहना है कि रीढ़ में हुआ संक्रमण कोरोना की वजह से नहीं है बल्कि कम इम्यूनिटी की वजह से हो रहा है। कोरोना के जिन मरीजों में इम्यूनिटी बहुत कम होती है, उनकी रीढ़ की हड्डी में इंफेक्शन (Spinal infection) हो सकता है। हिंदुजा अस्पताल (Hinduja Hospital) के एक स्पाइन सर्जन डॉक्टर समीर दलवी (Spine Surgeon Doctor Sameer Dalvi) ने कोरोना से ठीक होने वाले मरीजों की रीढ़ में इंफेक्शन के मामले देखे हैं। उनका कहना है कि कोरोना संक्रमण से लड़ने की शरीर की क्षमता को प्रभावित करता है।

रीढ़ की हड्डी में संक्रमण (Spinal infection)

एक अन्य डॉक्टर का कहना है कि रीढ़ की हड्डी में संक्रमण (Spinal infection) सिर्फ अस्पताल के आईसीयू में पाए गए सूक्ष्म जीवों के कारण होता है, इसका मतलब है कि कोरोना का इलाज करवाने के लिए अस्पताल में भर्ती मरीजों को यहां रहने के दौरान ही इंफेक्शन हो रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि रीढ़ की हड्डी में संक्रमण के बारे में जल्द बताने की जरूरत है। डॉक्टर बापट (Doctor bapt) का कहना है कि अगर कोरोना से रिकवर हो चुके मरीजों को पीठ में दर्द रहता है और वो दो हफ्ते आराम करने के बाद भी ठीक नहीं होता है तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए।

कोरोना का नया कोविड स्ट्रेन (Corona’s new Covid strain)

कोरोना पहले से ही हमारी जिंदगी में कहर बरपा रहा है। इसी बीच इसकी नई किस्म (Corona’s new Covid strain) ने न सिर्फ इंग्लैंड के लोगों में दहशत पैदा कर दी है बल्कि पूरी दुनिया भी सहम गई है। वहीं वैज्ञानिक नए वायरस के मूल का पता लगाने की कोशिश कर रहे है, लेकिन अब तक कुछ भी साबित नहीं हो सका है। विशेषज्ञों के मुताबिक नया वायरस 56 प्रतिशत ज्यादा संक्रामक है। रिसर्च में बताया गया है कि वायरस की नई किस्म तेज गति से फैलनेवाली और ज्यादा संक्रामक है।

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