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Big Decision : ऋचा जोगी का जाति प्रमाण पत्र निलंबित

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मुंगेली : पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की बहू श्रीमती ऋचा जोगी का जाति प्रमाण पत्र (Richa jogi caste certificate) ज़िला स्तरीय छानबीन समिति ने निलंबित कर दिया है। ज़िला स्तरीय छानबीन समिति की ओर से ADM राजेश नशीने ने बताया कि “ऋचा रुपाली साधू से जाति प्रमाण पत्र के संबंध में अभिलेख और जवाब माँगा गया था, उनके द्वारा प्रस्तुत जवाब समिति को संतुष्ट नहीं करता है, इसलिए ऋचा रुपाली साधू का जाति प्रमाण पत्र (caste certificate) निलंबित किया गया है .

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विदित हो कि राज्य सरकार ने जाति प्रमाण पत्र (Richa jogi caste certificate Controversy) के छानबीन के लिए ज़िला स्तर पर समिति का गठन किया है और उसे निरस्त करने का नही, जाति प्रमाण पत्र को निलंबित करने का अधिकार है।

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हालाँकि मुंगेली जिला प्रशासन की इस जाति प्रमाण पत्र छानबीन समिति ने फैसला अब से कुछ देर पहले सार्वजनिक किया है, लेकिन प्रदेश में इस बात के पुष्ट संकेत थे कि अंततः ज़िला स्तरीय जाति प्रमाण पत्र छानबीन समिति ऋचा रुपाली साधू का जाति प्रमाण पत्र निलंबित करेगी और अभिलेखों को सौंपने के लिए जो अतिरिक्त समय माँगा गया है, वह नहीं दिया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि सोमवार को ऋचा जोगी ने जवाब के लिए कोरोना संक्रमण का हवाला देते हुए 10 दिनों का वक्त मांगा था। हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर अधिनियम 2013 के संशोधन और जिला समिति के नोटिस को चुनौती दी थी। साथ ही कांग्रेस पर जाति प्रमाणपत्र रद्द करवाकर मरवाही उपचुनाव लड़ने देने से रोकने का आरोप भी लगाया है।

ऋचा जोगी के जाति प्रमाण पत्र के निलम्बन पर अमित की प्रतिक्रिया

अमित जोगी ने कहा कि, ऋचा जोगी का प्रमाण पत्र राजनीतिक दबाव और दुर्भावना में केवल इसलिए निलम्बित किया गया क्योंकि वे स्वर्गीय अजीत जोगी जी और डॉक्टर रेनु जोगी की बहु हैं और मेरे बेटे की माँ हैं। सरकार किसी भी सूरत में मेरे परिवार को चुनाव लड़ने से रोकना चाहती है।

अमित ने कहा कि 24 सितम्बर 2020 को छत्तीसगढ़ शासन द्वारा छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग अधिनियम 2013 में नियम विरुद्ध किए गए संशोधन के परिपालन में मुंगेली जिला जाति सत्यापन समिति को केवल ऋचा जोगी का जाति प्रमाण पत्र निलम्बित करने का अधिकार है और जब तक उनका प्रमाण पत्र पूर्ण रूप से निरस्त नहीं किया जाता है, उनके नामांकन पत्र को स्वीकार करने के अलावा निर्वाचन अधिकारी के पास कोई दूसरा वैधानिक विकल्प नहीं है। अमित जोगी ने कहा कि इस सम्बंध में वे पहले से ही उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर चुके हैं तथा इसकी सूचना मुख्य निर्वाचन आयुक्त को भी दे चुके हैं।

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