Chhattisgarh Newsअच्छी पहलछत्तीसगढ़छत्तीसगढ़ न्यूजदुर्गरायपुर
Trending

मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान को मिली बड़ी सफलता: दुर्ग के दो गांव हुए कुपोषण मुक्त

दुर्ग के दो गांव कुपोषण मुक्त (Two villages malnutrition free) हो गए है। कोरोना काल की दिक्कतों के बावजूद मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के लिए संकल्पबद्ध कार्यकर्ताओं ने मेहनत से यह बड़ी सफलता पाई है।

www.media24media.com

दुर्ग जिले में पाटन ब्लॉक के दो गांव गुजरा और बटरेल पूरी तरह से कुपोषण मुक्त (Two villages malnutrition free) हो चुके हैं। मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के अंतर्गत यह बड़ी सफलता मिली है। कोरोना काल में दिक्कतों के बावजूद महिला एवं बाल विकास विभाग के संकल्पबद्ध कार्यकर्ताओं ने यह लक्ष्य प्राप्त किया है। यह बेहद मुश्किल लक्ष्य है क्योंकि स्वास्थ्यगत परिस्थिति के चलते कोई न कोई बच्चा कुपोषण के दायरे में आ ही जाता है। ऐसे में संपूर्ण सुपोषण के लक्ष्य को प्राप्त करना बड़ी सफलता है।

यह भी पढ़ें:- Placement Camp in Dhamtari- 24 फरवरी को जनपद पंचायत कुरूद में रोजगार मेले का आयोजन

मुख्यमंत्री सुपोषण मिशन के अंतर्गत गुजरा ग्राम पंचायत के 6 आंगनबाड़ी केंद्रों के 150 बच्चों में 16 बच्चे कुपोषित चिन्हांकित किये गए थे। मिशन के अंतर्गत लगातार इन बच्चों की बेहतर फीडिंग की गई और नतीजा सामने आया है। पिछले हफ्ते मटिया ग्राम की एकमात्र कुपोषित बच्ची क्षमा भी कुपोषण के दायरे से बाहर आ गई।

गुजरा गांव दो महीने पहले ही कुपोषण के दायरे से बाहर आ गया था। इसी प्रकार बटरेल में अक्टूबर 2019 में 177 बच्चों में से 5 कुपोषित थे। अभी यहां 230 बच्चे हैं और एक भी कुपोषित नहीं है।

जिला कार्यक्रम अधिकारी विपिन जैन ने बताया कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशानुरूप कलेक्टर सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे के मार्गदर्शन में मुख्यमंत्री सुपोषण मिशन के अंतर्गत कुपोषित बच्चों को कुपोषण के दायरे से बाहर निकालने का कार्य निरंतर जारी है। इसे ट्रैक करने के लिए सुपोषण साफ्टवेयर भी दुर्ग जिले में बनाया गया है।

यह भी पढ़ें:- अब सिर्फ WhatsApp पर एक मैसेज करने से दूर होंगी PF अकाउंट की समस्याएं, जानिए क्या हैं प्रक्रिया

प्रथम फेस के लिए 11 हजार कुपोषित बच्चे चयनित किए गए थे। इसमें से लगभग 3600 कुपोषण की श्रेणी से बाहर आ गए थे। दूसरे चरण के बाद लगभग छह हजार बच्चे कुपोषण के दायरे में हैं, जिन्हें सुपोषित करने निरंतर कार्य किया जा रहा है।

इस तरह कदम दर कदम पहुंचे मंजिल पर

कुपोषण मुक्ति का लक्ष्य लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर-घर गृह भेंट के लिए पहुंचे। कार्यकर्ता लता नायर ने बताया कि उन्होंने गृह भेंट के दौरान लोगों को बताया कि बच्चों को कुपोषण से बचाने बीच-बीच में खिलाना बेहद आवश्यक है। नारियल तेल के साथ रोटी देने की सलाह दी गई। पहले बच्चों के आहार में केवल चावल शामिल था, उन्होंने रोटी की भी आदत की। खाने में मुनगा और भाजियों का समावेश किया। हमने अपनी आंगनबाड़ी में मुनगा भी रोपा।

महिला पुलिस वालंटियर की ली मदद

लोगों को कुपोषण मुक्ति के लिए प्रेरित करने अभिनव पहल महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा की गई। पाटन ब्लॉक के परियोजना अधिकारी सुमीत गंडेचा ने बताया कि महिला पुलिस वालंटियर की सहायता भी ली गई। वालंटियर शाम के भोजन के समय बच्चों के परिजनों से मिलने रोज पहुंचे। इससे नियमित रूप से बच्चों का आहार रूटीन में आ गया।

गृह भेंट की फोटो व्हाटसएप ग्रुप पर

कार्यकर्ताओं के हर दिन गृह भेंट का शेड्यूल तय किया गया। इसके फोटोग्राफ कार्यकर्ताओं को सुपरवाइजर को देने थे और इस तरह से जिला कार्यक्रम अधिकारी द्वारा सभी कार्यकर्ताओं की मानिटरिंग की गई। कार्यकर्ताओं ने इसमें फीडबैक भी शेयर किये और व्हाटसएप ग्रुप्स के माध्यम से उन्हें सलाह दी गई। गुजरा केंद्र की सुपरवाइजरसमता सिंह ने बताया कि हर दिन यह फोटो उच्चाधिकारियों को शेयर किये जाते हैं।

सरपंच और जनप्रतिनिधियों ने भी लगाया जोर

ग्राम पंचायत गुजरा में सरपंच और अन्य जनप्रतिनिधियों तथा ग्रामीणों ने भी मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान को सफल करने पर पूरा जोर लगाया। ग्राम गुजरा में यह लक्ष्य पूरा प्राप्त कर लिया गया था। मटिया में केवल क्षमा इस दायरे से बाहर थी। क्षमा को भी सुपोषित करने पूरा जोर लगाया गया। अब क्षमा भी कुपोषण के दायरे से बाहर है।

Tags

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Close
Close