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रायपुर: एक लाख रूपए कीमत की अवैध लकड़ी के साथ वाहन जब्त

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वन मंत्री मोहम्मद अकबर (Forest Minister Mohammad Akbar) द्वारा वन अपराधों की रोकथाम के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत 22 जनवरी को रायपुर वनवृत्त के अंतर्गत लगभग एक लाख रूपए मूल्य के अवैध लकड़ी सहित (illegal timber sized in Raipur) वाहन की जब्ती की गई। साथ ही दो लोगों को गिरफ्तार भी किया है। मुख्य संरक्षक रायपुर जे.आर. नायक के मार्गदर्शन में डिप्टी रेंजर दीपक तिवारी के नेतृत्व में टीम द्वारा लकड़ी की अवैध परिवहन कर रहे एक वाहन को जब्त किया है।

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इस अभियान में टीम द्वारा जांच के दौरान संलिप्त आरोपी रवि वर्मा के पास कोई भी वैध दस्तावेज नहीं पाया गया। इस कार्रवाई में यदुराम साहू, इन्द्रचंद धनगर, राधे और प्रशांत यादव सहित विभागीय अमला शामिल था।
गौरतलब है कि 21 जनवरी को डिप्टी रेंजर दीपक तिवारी के ही नेतृत्व में गठित टीम द्वारा मुरा मोड़ में घेराबंदी कर लगभग 70 हजार रूपए मूल्य के अवैध लकड़ी सहित (illegal timber sized in Raipur) एक अन्य वाहन की जब्ती की गई थी।

रायपुर और दुर्ग के उद्योगों का दूषित जल नहीं हो रहा खारून नदी में प्रवाहित

खारुन नदी में दुर्ग और रायपुर के किसी भी उद्योग से दूषित जल प्रवाहित नहीं किया जा रहा है। इस संबंध में प्रकाशित खबरों के संबंध में छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने स्पष्ट किया है कि आवास और पर्यावरण मंत्री मोहम्मद अकबर के निर्देश पर नगरपालिक निगम बिरगांव और पर्यावरण मंडल के संयुक्त जांच दल द्वारा गोंदवारा, सोनडोंगरी, बिरगांव औद्योगिक क्षेत्र उरला, सरोरा, उरकुरा, रावाभाटा सहित भनपुरी के आस-पास के उद्योगों और दुर्ग के उद्योगों का निरीक्षण किया गया है।

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निरीक्षण में पाया गया कि किसी भी उद्योग से दूषित जल खारून नदी में प्रवाहित नहीं हो रहा है। खारुन नदी का कुछ भाग घरेलू दूषित जल से प्रभावित है। इसमें सुधार के लिए नगर निगमों द्वारा 01 जुलाई 2021 के पूर्व सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना की जानी है, ये प्लांट नगरीय निकायों के अधीन निर्माणाधीन हैं। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मण्डल द्वारा जल प्रदूषणकारी उद्योगों से हो रहे जल प्रदूषण पर प्रभावी ढंग से नियंत्रण किया गया है और इसकी सतत रूप से मॉनिटरिंग भी की जा रही है। साथ ही प्राकृतिक जल स्त्रोतों की जल गुणवत्ता की मॉनिटरिंग भी की जा रही है।

आवश्यक होने पर न्यायालयीन कार्रवाई

पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा यह भी सुनिश्चित कराया गया है कि सभी जल प्रदूषणकारी उद्योग, दूषित जल उपचार संयंत्र की स्थापना के साथ ही संचालित हो। इसमें उल्लंघन पाये जाने पर उद्योगों को बंद कराने और विद्युत विच्छेदन की कार्रवाई की जा रही है और आवश्यक होने पर न्यायालयीन कार्रवाई भी की जा रही है।

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छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के निरीक्षण में यह भी पाया गया है कि भनपुरी, उरला और सिलतरा सहित दुर्ग के औद्योगिक क्षेत्र से निकलकर खारून नदी तक पहुंचने वाले पानी से नालों और खारून नदी की गुणवत्ता किसी तरह प्रभावित नहीं हो रही है। इन क्षेत्रों में स्थित अधिकांश उद्योग वायु प्रदूषणकारी प्रकृति के हैं या इनसे दूषित जल का निस्सारण होकर नदी नाले में मिलने जैसी स्थिति नहीं है। क्षेत्र में कोई भी ऐसा जल प्रदूषणकारी उद्योग संचालित नहीं है, जिसमें दूषित जल उपचार संयंत्र स्थापित न हो।

सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना

वहीं मंडल द्वारा प्रदेश की मुख्य नदियां, महानदी, शिवनाथ, खारून, अरपा, हसदेव, केलो, शंखनी-डंकनी, मांड, इंद्रावती में प्राकृतिक जल स्त्रोतों की गुणवत्ता पर सतत रूप से निगरानी रखी जा रही है। इसके लिए विभिन्न सैम्पलिंग प्वॉइंट बनाए गए हैं, जहां से सैंपल लेकर जल स्त्रोतों की नियमित जांच की जा रही है। नगरीय क्षेत्रों से जनित दूषित जल के उपचार के लिए दूषित जल उपचार संयंत्र की स्थापना और घरेलू दूषित जल के उपचार के लिए विभिन्न नालों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना की कार्रवाई की जा रही है।

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