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टीवी-मोबाइल युग में परंपरा-संस्कृति को बचाना है जरूरी

लाफिनकला गांव में हुआ सामुदायिक दीपावली उत्सव का आयोजन। राउत नाचा और सुआ नृत्य से बंधा समां।

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महासमुन्द। जिला मुख्यालय महासमुन्द से 8 किमी दूर लाफिनकला गांव में सामुदायिक दीपावली उत्सव का आयोजन हुआ। छत्तीसगढ़ की परंपरा-संस्कृति को समेटे हुए इस खास उत्सव में कला और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। राउत नाचा से जहाँ यादव बंधुओं ने शौर्य प्रदर्शन किया। वहीं बालिकाएं, बहूओ और उम्र दराज महिलाओं की तीन पीढ़ियों के संगम ने अलग-अलग टोलियों में सुआ नृत्य कर सबका मन मोह लिया। आतिशबाजी करके सार्वजनिक दीपोत्सव की गांव की परंपरा को यहां के उत्साही युवाओं ने कायम रखा। इस अवसर पर अतिथियों ने कहा कि टीवी-मोबाइल के आधुनिक युग में अपनी संस्कृति और परंपरा को संरक्षित करने की जरूरत है। यदि हम सामुदायिक उत्सवों की परंपरा को नहीं बचाएंगे तो आने वाली पीढ़ी को एकाकी जीवन का दंश झेलना पड़ेगा। इसलिए हमारे प्रमुख उत्सवों को सार्वजनिक रूप से मनाने की परंपरा कायम रहनी चाहिए।

गोबर को बनाया माथे का तिलक

सामुदायिक दीपोत्सव कार्यक्रम के संयोजक महेंद्र कुमार पटेल, गोवर्धन साहू, रामजी साहू, सुखीराम साहू सरपंच हेमीन नेतन पटेल, उपसरपंच डुमन लाल साहू और गांव की ईशर गौरा सुआ नृत्य मंडली थी। सर्वप्रथम गांव के सहाड़ा देव के समक्ष गोवर्धन पूजा कर इस उत्सव का शुभारंभ किया गया। गोबर को माथे का तिलक बनाकर आगंतुकों का अभिनंदन किया गया। इस विशेष आयोजन के मुख्य अतिथि प्रेस क्लब महासमुन्द अध्यक्ष आनंदराम साहू थे। अध्यक्षता गांव की प्रथम नागरिक महिला सरपंच हेमिन नेतन पटेल ने की। विशिष्ट अतिथि क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य जागेश्वर जुगनू चंद्राकर, जनपद सदस्य प्रतिनिधि राकेश चंद्राकर, लोकेश साहू लाफिनखुर्द सहित गांव के बुजुर्ग व पंचायत प्रतिनिधिगण मंचस्थ थे।

आतिशबाजी से उत्सव का शुभारंभ

अतिथियों ने आतिशबाजी कर सामुदायिक दीपोत्सव का शुभारंभ किया। बाद राऊत नाचा और सुआ नृत्य ने समां बांधी। हर टोली के नृत्य प्रस्तुतियों पर नगद सम्मान राशि का प्रोत्साहन दिया जाता रहा। निम्न और मध्यम आय वर्ग के लोगों द्वारा कलाकारों को नगद प्रोत्साहन राशि देकर प्रोत्साहित करने की सर्वत्र सराहना हुई।

ऐसा आयोजन गांव-गांव में हो

मुख्य अतिथि की आसंदी से संबोधित करते हुए आनंदराम साहू ने कहा कि हमें यही परंपरा एकता और भाईचारा के एक सूत्र में पिरोकर रखता है। टीवी-मोबाइल के आधुनिक युग में हमें अपनी परंपरा और संस्कृति को बचाने ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की जरूरत है। युवाओं का यह प्रयास गांव की सांस्कृतिक विरासत को बचाकर रखने में सहायक है। उन्होंने नशा मुक्ति के लिए खास प्रयास करने पर जोर देते हुए कहा कि शराब की खराब लत से गांवों का माहौल दूषित हो रहा है। इससे निपटने में ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रम सहायक हैं। ऐसे आयोजन गांव-गांव में करने और इससे सभी को जोड़ने की जरूरत है

जनप्रतिनिधियों ने थपथपाई पीठ
जिला पंचायत सदस्य जागेश्वर जुगनू चंद्राकर, जनपद सदस्य प्रतिनिधि राकेश चंद्राकर ने भी उपस्थितजनों को संबोधित करते हुए आयोजकों की पीठ थपथपाई। नगद राशि देकर लोक कलाकारों को सम्मानित किया। सुआ नृत्य टोली को आयोजक मंडल की ओर से प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन शिक्षक गोवर्धन साहू और आभार प्रदर्शन महेंद्र कुमार पटेल ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में पंच नेहा साहू, रोशनी वैष्णव, पूर्णिमा साहू, कमलेश साहू सहित कोटवार गंगाराम मानिकपुरी की सराहनीय भूमिका रही। परंपरा-संस्कृति

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