प्रेरक प्रसंग

क्या आप जानते हैं, किन मानव अंगों को दान किया जा सकता है?

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जी हां मानव अंगों का दान किया जा सकता है मनुष्य की मृत्यु के बाद कोई भी अंग काम नहीं आते इसलिये हम अपने अंग दान (human organs Donation rules) कर देने चाहिये जैसे आंखे, किडनी, गुर्दा आदि हम दान करके किसी दूसरे को जीवन दान दे सकते है।

अंग दान के लिए आयु सीमा अलग अलग है, जो इस पर निर्भर करती है कि क्या जीवित व्यक्ति द्वारा दान (human organs Donation rules) किया जा रहा है या मृत व्यक्ति द्वारा, उदाहरण के लिए जीवित व्यक्ति द्वारा दान हेतु व्यक्ति की उम्र 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए और अधिकांश अंगों के लिए निर्णय लेने वाला कारक व्यक्ति की शारीरिक स्थिति है, उसकी उम्र नहीं।

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विशेषज्ञ स्वांस्य्णत देखभाल व्यवसायिक व्यक्ति तय करते हैं कि हर मामले के अनुसार कौन सा अंग उपयुक्त् है। लोगों में उनके 70 और 80 वर्ष के दौरान अंगों और ऊतकों को दुनिया भर में सफलता पूर्वक प्रत्यारोपित किया गया है। ऊतकों और आंखों के मामले में आम तौर पर उम्र महत्व नहीं रखती। एक मृत दाता आम तौर पर निम्नलिखित आयु सीमा के अंदर अंगों और ऊतकों का दान कर सकता है :

  1. गुर्दे, यकृत : 70 वर्ष तक
  2. हृदय, फेफड़े : 50 वर्ष तक
  3. अग्न्याशय, आंत : 60-65 वर्ष तक
  4. कॉर्निया, त्वचा : 100 वर्ष तक
  5. हृदय वाल्व : 50 वर्ष तक
  6. हड्डी : 70 वर्ष तक

कौन एक दाता हो सकता है?

जीवित दाता : एक व्यक्ति जिसकी उम्र 18 साल से कम नहीं है, जो स्वेच्छा से अपने अंग और / या ऊतक निकालने का अधिकार अपने जीवन काल के दौरान चिकित्सीय प्रयोजनों के लिए प्रचलित चिकित्सात प्रथाओं के अनुसार देता है।

मृतक दाता : कोई भी व्यक्ति, चाहे उसकी उम्र, नस्लं लिंग कोई भी हो वह अपनी मृत्यु (मस्तिष्क / हृदय) के बाद अंग और ऊतक दाता बन सकता है। मृत शरीर से इसके लिए उसके निकट संबंधियों या कानूनी तौर पर उसके साथ उस संबंध रखने वाले व्यक्ति की सहमति आवश्यक होती है। यदि मृत दाता की उम्र 18 साल से कम है तो माता पिता में से किसी एक द्वारा अधिकृत नजदीकी रिश्तेदार की सहमति अनिवार्य है। दान देने की चिकित्सा उपयुक्तताता का निर्धारण मृत्यु के समय किया जाता है।

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यदि मैंने रक्त दान के लिए मना कर दिया है, तो क्या मैं एक अंग दाता हो सकता हूं?

हां, इसके बारे में निर्णय कि कुछ या सभी अंग या ऊतक प्रत्यारोपण के लिए उपयुक्त हैं, इसका निर्णय आपके पिछले चिकित्सीय विवरण को विचार में लेकर हमेशा किसी विशेषज्ञ द्वारा ही किया जाएगा। इसके विशिष्टि कारण हो सकते हैं कि रक्त दान करना संभव क्यों नहीं है, जैसे खून की कमी होना या रक्त आधान या पिछले दिनों में हिपेटाइटिस का प्रभाव या ऐसे कोई अन्य कारण जिनसे आप अपने स्‍वास्‍थ्‍य के कारण उस वक्त रक्तदान नहीं कर सके – कभी कभार एक सरल स्थिति जैसे जुकाम या आप द्वारा ली जाने वाली दवा के कारण आप रक्त दान नहीं कर सकते।

पूरे शरीर के दान से अंग दान कैसे अलग है?

चिकित्सकीय प्रयोजनों के लिए अंग दान (Donation of human organs) मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम (टीएचओए 1994) के तहत कवर किया जाता है। पूरे शरीर के दान को शारीरिक रचना अधिनियम 1984 द्वारा कवर किया जाता है।

अंग और ऊतक प्रत्याररोपण को अन्य लोगों के लिए जीवन देने के कार्य के रूप में परिभाषित किया जाता है जो अंतिम चरण पर अंग के विफल रहने से पीड़ित जरूरत मंद लोगों को उसके अंग मृत्यु के बाद लगाए जाते हैं।

शरीर का दान चिकित्सा अनुसंधान और शिक्षा के लिए मौत के बाद व्यक्ति के शरीर को देने का कार्य है। जो लोग मृत शरीर का दान करते हैं, वे शरीर रचना वैज्ञानिकों और चिकित्सा शिक्षकों द्वारा पूरी शारीरिक संरचना सिखाने का एक प्रधान साधन बने रहते हैं।

अंग दान क्या है?

यह किसी जीवित या मृतक व्यक्ति, जिसे दाता (donor) कहा जाता है,  से अंग प्राप्त करने या खरीदने की प्रक्रिया है। अंगों को पुनः वापस प्राप्त करने की प्रक्रिया को हार्वेस्टिंग कहा जाता है। दाता (donor) द्वारा दान किये गए अंग को उस प्राप्तकर्ता में प्रत्यारोपित किया जाता है, जिसे अंग की आवश्यकता होती है।

स्त्रोत: https://hi.vikaspedia.in/

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