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मानसून में देरी से घबराएं नहीं, समय पर करें धान की बोआई-रोपाई : कृषि वैज्ञानिक

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रायपुर-  प्रदेश में इस वर्ष मानसून सामान्य से कुछ देर से पहुंचा है, लेकिन किसानों को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के वैज्ञानिकों ने कहा है कि अभी भी धान की खेती के लिए पर्याप्त समय है। मौसम को देखते हुए किसानों को कुछ जरूरी कृषि सलाह जारी की गई है।

वैज्ञानिकों के अनुसार इस वर्ष अल नीनो के प्रभाव के कारण मानसून लगभग 10 दिन देर से आया। जून माह में सामान्य से लगभग 40 प्रतिशत कम वर्षा हुई, लेकिन अब प्रदेश के सभी हिस्सों में मानसून पहुंच चुका है। मौसम विभाग के अनुसार 8 जुलाई तक राज्य में अच्छी वर्षा होने की संभावना है।

कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि किसान 15 जुलाई तक धान की सीधी बुआई तथा 30 जुलाई तक रोपाई और बियासी का कार्य कर सकते हैं। यदि किसी कारणवश थोड़ा विलंब भी हो जाए और हरेली (12 अगस्त) तक बोआई-रोपाई करनी पड़े, तब भी फसल पर अधिक असर नहीं पड़ेगा।

मानसून में देरी को देखते हुए किसानों को कम अवधि में तैयार होने वाली धान की किस्मों, जैसे इन्द्रावती, बस्तर धान-1, छत्तीसगढ़ बारानी धान, इंदिरा एरोबिक धान, एमटीयू-1010, एमटीयू-1153, एमटीयू-1156, एमटीयू-1001, छत्तीसगढ़ धान-1919, छत्तीसगढ़ तेजस्वी धान और महामाया का उपयोग करने की सलाह दी गई है। किसानों से कहा गया है कि बुआई से पहले बीज का फफूंदनाशक दवा से उपचार अवश्य करें और जैव उर्वरकों का भी उपयोग करें। इससे फसल स्वस्थ रहती है और उत्पादन बढ़ता है।

वैज्ञानिकों ने बताया कि धान की सीधी बुआई में खरपतवार (खरपतवार/घास) बड़ी समस्या होती है। यदि समय पर नियंत्रण नहीं किया गया तो उत्पादन में भारी कमी आ सकती है। इसलिए बुआई के बाद पहले 40 दिनों तक खेत को खरपतवार मुक्त रखना जरूरी है। इसके लिए हाथ से निंदाई, पैडी वीडर या कृषि विभाग द्वारा अनुशंसित खरपतवारनाशकों का उपयोग किया जा सकता है।

उर्वरक प्रबंधन को लेकर किसानों को सलाह दी गई है कि प्रति एकड़ अधिकतम दो बोरी यूरिया और एक बोरी डीएपी का ही उपयोग करें। डीएपी की पूरी मात्रा बुआई या रोपाई के समय दें, जबकि यूरिया की पहली खुराक 30 से 35 दिन बाद और दूसरी खुराक 60 से 70 दिन बाद दें। साथ ही हरी खाद और जैव उर्वरकों के उपयोग पर भी जोर दिया गया है।

वैज्ञानिकों ने बताया कि राज्य की प्राथमिक कृषि साख समितियों में किसानों के लिए यूरिया, डीएपी, एनपीके, सिंगल सुपर फॉस्फेट और पोटाश का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है। किसानों को आवश्यकता के अनुसार उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा।

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अनुसंधान सेवाओं के संचालक डॉ. विवेक कुमार त्रिपाठी ने किसानों से अपील की है कि खेती से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी या समस्या के समाधान के लिए अपने निकटतम कृषि विज्ञान केन्द्र, कृषि अनुसंधान केन्द्र, कृषि महाविद्यालय अथवा कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क करें। विश्वविद्यालय द्वारा समय-समय पर किसानों के लिए आवश्यक तकनीकी सलाह जारी की जा रही है।

उर्वरकों की कालाबाजारी पर राज्य सरकार का जीरो टॉलरेंस

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बेमेतरा में अवैध उर्वरक भंडारण पर बड़ी कार्रवाई, 275 बोरी यूरिया जब्त; किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए राज्य सरकार सजग

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार किसानों को समय पर, उचित मूल्य पर और गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। खरीफ सीजन 2026 के दौरान किसानों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार के निर्देश पर पूरे प्रदेश में उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी और अवैध भंडारण के विरुद्ध सघन अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में बेमेतरा जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से भंडारित 275 बोरी यूरिया जब्त कर यह स्पष्ट संदेश दिया है कि किसानों के अधिकारों से खिलवाड़ करने वालों के विरुद्ध किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी प्रतिष्ठा ममगाईं के निर्देश तथा कृषि विभाग के उप संचालक मोरध्वज डडसेना के मार्गदर्शन में गठित जिला स्तरीय उड़नदस्ता दल द्वारा जिलेभर में लगातार औचक निरीक्षण और छापामार कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को निर्धारित मूल्य पर पर्याप्त मात्रा में गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध हो तथा कृत्रिम अभाव उत्पन्न कर अनुचित लाभ कमाने के प्रयासों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

इसी अभियान के तहत प्राप्त गोपनीय सूचना के आधार पर उड़नदस्ता दल ने ग्राम जानो, तहसील देवकर में अँजोर वर्मा के परिसर में औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए 275 बोरी यूरिया का अवैध भंडारण पाया गया। मौके पर संपूर्ण उर्वरक को विधिवत जब्त कर लिया गया तथा संबंधित व्यक्ति को कारण बताओ नोटिस जारी करने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। प्राप्त जवाब के परीक्षण के बाद नियमानुसार आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

कृषि विभाग ने जब्त किए गए उर्वरकों के नमूने गुणवत्ता परीक्षण के लिए अधिकृत प्रयोगशाला भेजने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को केवल मानक गुणवत्ता वाले उर्वरक ही उपलब्ध कराए जाएं और किसी भी प्रकार की मिलावट अथवा निम्न गुणवत्ता की सामग्री बाजार में न पहुंचे।

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि खरीफ सीजन के दौरान उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी, अवैध भंडारण तथा निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर बिक्री करने वालों के विरुद्ध अभियान निरंतर जारी रहेगा। यदि कोई निजी कृषि केंद्र, उर्वरक विक्रेता अथवा सहकारी संस्था इस प्रकार की अनियमितता करते हुए पाई जाती है, तो उसके विरुद्ध उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। आवश्यक होने पर पुलिस में एफआईआर दर्ज कर प्रकरण न्यायालय में भी प्रस्तुत किया जाएगा।

कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाईं ने कहा है कि किसानों के हितों की रक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी परिस्थिति में उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी अथवा कृत्रिम अभाव उत्पन्न करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्रशासन पूरे जिले में लगातार निगरानी कर रहा है और शिकायत प्राप्त होते ही बिना पूर्व सूचना के तत्काल जांच एवं छापामार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों के हितों की सुरक्षा, कृषि व्यवस्था में पारदर्शिता तथा कृषि आदानों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठा रही है। प्रदेश में चल रही इस तरह की सतत कार्रवाई न केवल कालाबाजारी और जमाखोरी पर अंकुश लगाने में सहायक होगी, बल्कि किसानों का विश्वास भी मजबूत करेगी कि सरकार उनकी मेहनत, उनकी फसल और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

जिला प्रशासन ने किसानों एवं आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि कहीं उर्वरकों की कालाबाजारी, अवैध भंडारण, अधिक मूल्य पर बिक्री अथवा अन्य किसी प्रकार की अनियमितता की जानकारी मिले तो तत्काल कृषि विभाग अथवा जिला प्रशासन को सूचित करें। प्रशासन ने आश्वस्त किया है कि शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी तथा प्रत्येक शिकायत पर त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई की 

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की पहल ला रही बदलाव, हरी खाद अपनाकर आत्मनिर्भर खेती की राह पर बढ़ रहे किसान

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महासमुंद के किसान हिमांशु बंजारे ने ढैंचा की हरी खाद से शुरू की जैविक खेती, मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और लागत घटाने की दिशा में बना प्रेरक उदाहरण

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार प्राकृतिक, जैविक और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। राज्य सरकार की किसान हितैषी नीतियों और कृषि विभाग के मार्गदर्शन का सकारात्मक प्रभाव अब गांवों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। किसान आधुनिक तकनीकों के साथ-साथ पारंपरिक एवं पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बना रहे हैं।

इसी कड़ी में महासमुंद जिले के विकासखंड बसना अंतर्गत ग्राम बड़ेसाजापाली के प्रगतिशील किसान हिमांशु बंजारे ने जैविक खेती की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए अपने 0.80 हेक्टेयर कृषि रकबे में ढैंचा की हरी खाद की फसल लगाई है। लगभग 30 दिन की हो चुकी इस फसल को निर्धारित समय पर खेत में पलटकर हरी खाद के रूप में उपयोग किया जाएगा, जिससे भूमि की उर्वराशक्ति बढ़ेगी, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी तथा आगामी फसलों की उत्पादकता में सुधार होने की संभावना है।

हिमांशु बंजारे का कहना है कि जैविक एवं प्राकृतिक खेती न केवल खेती की लागत को कम करती है, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता को भी लंबे समय तक बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने बताया कि ढैंचा जैसी हरी खाद वाली फसलों के उपयोग से खेतों में प्राकृतिक रूप से पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ती है और उत्पादन अधिक टिकाऊ बनता है। उन्होंने अन्य किसानों से भी इस पद्धति को अपनाकर पर्यावरण अनुकूल खेती को बढ़ावा देने की अपील की।

उप संचालक कृषि एफ.आर. कश्यप ने बताया कि हरी खाद मिट्टी की उर्वरता और संरचना सुधारने का अत्यंत प्रभावी माध्यम है। ढैंचा, सन, लोबिया, उड़द, मूंग और ग्वार जैसी दलहनी फसलें कम समय में तैयार हो जाती हैं तथा कम लागत में अधिक मात्रा में जैविक पदार्थ उपलब्ध कराती हैं। इन फसलों को फूल आने से पहले खेत में पलटने पर लगभग 50 से 60 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक नाइट्रोजन की आपूर्ति होती है, जिससे रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता कम हो जाती है।

उन्होंने बताया कि हरी खाद के नियमित उपयोग से मिट्टी भुरभुरी बनती है, जलधारण क्षमता बढ़ती है, वायु संचार बेहतर होता है तथा अम्लीय और क्षारीय भूमि के संतुलन में भी सुधार होता है। इसके साथ ही मृदा में सूक्ष्मजीवों की संख्या और सक्रियता बढ़ती है, जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति और उत्पादन क्षमता में दीर्घकालिक वृद्धि होती है। हरी खाद मृदा क्षरण को रोकने और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों को टिकाऊ, कम लागत और पर्यावरण-अनुकूल खेती के लिए प्रोत्साहित कर रही है। कृषि विभाग द्वारा किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, जागरूकता और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे प्रदेश में प्राकृतिक एवं जैविक खेती का दायरा लगातार बढ़ रहा है। हिमांशु बंजारे जैसे प्रगतिशील किसानों की पहल इस बात का प्रमाण है कि सरकार की किसान-केंद्रित योजनाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ मिट्टी और सुरक्षित कृषि व्यवस्था की दिशा में भी सार्थक परिणाम दे रही हैं।

चिंतन शिविर 3.0 से सुशासन के अगले चरण की रूपरेखा तैयार होगी : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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डिजिटल गवर्नेंस, उभरती तकनीकों, कृषि समृद्धि और नेतृत्व विकास पर मंथन

पिछले चिंतन शिविरों के परिणामस्वरूप ई-ऑफिस, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 और सेवा सेतु जैसे नवाचार हुए साकार

रायपुर- चिंतन शिविर 3.0 का उद्देश्य शासन-प्रशासन को अधिक प्रभावी, आधुनिक, पारदर्शी और जनहितैषी बनाते हुए विकसित छत्तीसगढ़ के लिए दूरदर्शी नीति-निर्माण की मजबूत आधारशिला तैयार करना है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रायपुर में सुशासन एवं अभिसरण विभाग तथा आईआईएम रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय मंत्रिमंडल चिंतन शिविर में मुख्यमंत्री, मंत्रिपरिषद के सदस्य तथा देश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने शासन के विभिन्न आयामों पर व्यापक मंथन करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि चिंतन शिविर केवल विचार-विमर्श का मंच नहीं, बल्कि शासन की कार्यसंस्कृति में निरंतर सुधार और नवाचार का माध्यम बन चुका है। पिछले दो संस्करणों से प्राप्त सुझावों को सरकार ने प्रभावी ढंग से धरातल पर उतारा है, जिसके सकारात्मक परिणाम आज प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि शासन में तकनीक, पारदर्शिता, जवाबदेही और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर आगे बढ़ना ही इस शिविर का मूल उद्देश्य है।

मुख्यमंत्रीसाय ने कहा कि चिंतन शिविर 3.0 के प्रथम दिवस में नेतृत्व विकास, सुशासन, उभरती प्रौद्योगिकियों तथा कृषि समृद्धि जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत सत्र आयोजित किए गए। प्रसिद्ध आध्यात्मिक चिंतक गौर गोपाल दास ने नेतृत्व, भावनात्मक संतुलन, सेवा-भाव और जनप्रतिनिधियों के नैतिक दायित्वों पर अपने विचार रखे। उन्होंने मूल्य-आधारित नेतृत्व और संवेदनशील प्रशासन को प्रभावी सुशासन की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।

शिविर में नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर ने "इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज़" विषय पर संबोधित करते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, 5जी, ड्रोन, जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी, ब्लॉकचेन तथा डेटा-आधारित प्रशासन के माध्यम से शासन व्यवस्था को अधिक दक्ष, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने तकनीक आधारित सेवा वितरण, नवाचार, रोजगार सृजन तथा डिजिटल समावेशन के लिए छत्तीसगढ़ के समक्ष उपलब्ध अवसरों की भी चर्चा की।

कृषि विषयक सत्र "कृषि से समृद्धि" में कृषि अर्थशास्त्री डॉ. रमेश चंद तथा कृषि विशेषज्ञ टी. विजय कुमार ने प्राकृतिक खेती, जलवायु अनुकूल कृषि, फसल विविधीकरण, मूल्य संवर्धन, बाजार संपर्क और तकनीक आधारित कृषि सुधारों पर अपने अनुभव साझा किए। विशेषज्ञों ने देश के विभिन्न राज्यों के सफल मॉडलों की जानकारी देते हुए किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और कृषि को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत किए। इस दौरान मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने समूह आधारित विचार-मंथन में भी भाग लिया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पिछले चिंतन शिविरों से प्राप्त सुझावों के आधार पर मंत्रालय में ई-ऑफिस प्रणाली लागू की गई, जिससे फाइलों के निपटारे की प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और समयबद्ध बनी है। इसी प्रकार मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 तथा सेवा सेतु जैसे महत्वपूर्ण नवाचार भी इसी चिंतन प्रक्रिया का परिणाम हैं। आज सेवा सेतु के माध्यम से 36 विभागों की 520 से अधिक सेवाएं नागरिकों को ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे आमजन को सरल, त्वरित और पारदर्शी सेवाएं मिल रही हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विश्वास व्यक्त किया कि चिंतन शिविर 3.0 से प्राप्त सुझाव सुशासन, तकनीक आधारित प्रशासन, कृषि सुधार, विभागीय समन्वय और जनसेवा के नए मानक स्थापित करेंगे। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के संकल्प के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए सरकार नवाचार, ज्ञान, तकनीक और प्रभावी नीति-निर्माण को निरंतर प्रोत्साहित करती रहेगी तथा चिंतन शिविर से निकले विचारों को शीघ्र ही ठोस नीतिगत और प्रशासनिक पहलों के रूप में लागू किया जाएगा।

मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वालों पर सरकार की बड़ी कार्रवाई,डी.डी. अस्पताल का ऑपरेशन थियेटर और आईसीयू सील

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लाइसेंस अस्थायी रूप से निरस्त; लापरवाही पर सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार आम नागरिकों को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और जवाबदेह स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के संकल्प के साथ लगातार कार्य कर रही है। इसी प्रतिबद्धता का परिचय देते हुए गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में गंभीर चिकित्सीय लापरवाही के आरोपों की जांच के बाद जिला प्रशासन ने डी.डी. अस्पताल, सेमरा के विरुद्ध कड़ी दंडात्मक कार्रवाई करते हुए उसके ऑपरेशन थियेटर एवं आईसीयू वार्ड को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया है। साथ ही अस्पताल का पंजीयन (लाइसेंस) अस्थायी एवं सशर्त रूप से निरस्त कर दिया गया है।

कलेक्टर एवं पर्यवेक्षी प्राधिकारी डॉ. संतोष कुमार देवांगन द्वारा नर्सिंग होम एक्ट तथा छत्तीसगढ़ राज्य उपचर्यागृह एवं रोगोपचार संबंधी स्थापनाएं अनुज्ञापन अधिनियम, 2020 के प्रावधानों के तहत यह कार्रवाई की गई है। राज्य सरकार की स्पष्ट नीति है कि मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

यह कार्रवाई 22 जून 2026 को गंभीर अवस्था में जिला अस्पताल से सिम्स बिलासपुर रेफर की गई प्रसूता ज्योति सोनवानी के उपचार से जुड़े मामले की जांच के बाद की गई। घटना के पश्चात परिजनों और नागरिकों द्वारा उठाई गई शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त जांच टीम गठित कर अस्पताल का विस्तृत निरीक्षण कराया।

जांच के दौरान अस्पताल में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। निरीक्षण में पाया गया कि गंभीर मरीजों के उपचार के दौरान विशेषज्ञ चिकित्सकों और प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की पर्याप्त उपलब्धता नहीं थी। गंभीर मरीजों के उपचार के लिए आवश्यक संसाधनों का भी अभाव पाया गया। इसके अतिरिक्त आयुष्मान भारत योजना के हितग्राहियों से अतिरिक्त शुल्क लिए जाने संबंधी शिकायतें भी जांच के दायरे में आईं।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा सिविल सर्जन-सह-मुख्य अस्पताल अधीक्षक द्वारा किए गए पुनः निरीक्षण में यह भी पाया गया कि एक्लेम्प्सिया जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज का उपचार आवश्यक विशेषज्ञों एवं पर्याप्त चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में किया गया। अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ, एनेस्थेटिस्ट तथा पोस्ट ऑपरेटिव देखभाल के लिए आवश्यक चिकित्सकीय व्यवस्था उपलब्ध नहीं होने के बावजूद गंभीर मरीजों का उपचार किया जा रहा था, जिसे जांच में गंभीर लापरवाही माना गया।

प्रकरण में अस्पताल प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था। प्राप्त जवाब और जांच प्रतिवेदनों के परीक्षण के बाद प्रशासन ने पाया कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा प्रस्तुत कई तथ्य जांच में सही नहीं पाए गए तथा संबंधित अधिनियमों के विभिन्न प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है। जांच के दौरान एक अन्य गंभीर प्रसूता के उपचार में भी लापरवाही के तथ्य सामने आए।

सभी तथ्यों, जांच प्रतिवेदनों और संबंधित अधिकारियों की अनुशंसाओं के आधार पर जिला प्रशासन ने डी.डी. अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर एवं आईसीयू वार्ड को तत्काल प्रभाव से सील करने तथा अस्पताल का पंजीयन अस्थायी एवं सशर्त रूप से निरस्त करने का आदेश जारी किया। आदेश की प्रतिलिपि स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, पुलिस अधीक्षक, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सहित संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है।

यह कार्रवाई मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही आधारित प्रशासन की कार्यशैली को भी रेखांकित करती है। राज्य सरकार लगातार यह सुनिश्चित कर रही है कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हों तथा चिकित्सीय लापरवाही या नियमों के उल्लंघन के मामलों में बिना किसी भेदभाव के सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि जनता के स्वास्थ्य और जीवन से खिलवाड़ करने वालों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी और प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए प्रशासन पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करता रहेगा।

धान के बदले वैकल्पिक फसलों पर 15 हजार रुपये प्रति एकड़ मिलेगी आदान सहायता राशि

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दलहन, तिलहन और मोटे अनाज की खेती को मिलेगा बढ़ावा

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने और कृषि में फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कृषक उन्नति योजना के नवीन स्वरूप को मंजूरी दी है। योजना के तहत खरीफ सीजन में धान के स्थान पर वैकल्पिक फसलें लगाने वाले किसानों को 15 हजार रुपये प्रति एकड़ की आदान सहायता राशि प्रदान की जाएगी।

योजना के अंतर्गत अरहर, उड़द, मूंग, सोयाबीन, मूंगफली, तिल, मक्का, कपास तथा कोदो, कुटकी और रागी जैसी मोटे अनाज की फसलों को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य धान पर निर्भरता कम करना, दलहन-तिलहन उत्पादन बढ़ाना, जल संरक्षण को बढ़ावा देना तथा भूमि की उर्वरता में सुधार करना है। योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। साथ ही डिजिटल फसल सर्वेक्षण के माध्यम से यह सत्यापित किया जाएगा कि किसान ने धान के स्थान पर स्वीकृत वैकल्पिक फसल की ही खेती की है। विगत खरीफ सीजन में धान की खेती करने वाले और इस वर्ष वैकल्पिक फसल का चयन करने वाले पात्र किसानों को 15 हजार रुपये प्रति एकड़ की सहायता राशि सीधे डीबीटी के माध्यम से उनके बैंक खाते में दी जाएगी।

वहीं जो किसान पहले से खरीफ सीजन में दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी अथवा कपास की खेती कर रहे हैं, उन्हें पूर्ववत 10 हजार रुपये प्रति एकड़ की आदान सहायता राशि मिलेगी। योजना का लाभ ट्रस्ट, निजी कंपनियों, शाला विकास समितियों तथा शासकीय संस्थानों सहित अन्य विधिक संस्थाओं को नहीं मिलेगा। कृषि विभाग ने बताया कि पंजीयन के लिए आधार कार्ड, भूमि संबंधी दस्तावेज (बी-1 एवं पी-2), डीबीटी से लिंक बैंक खाता तथा मोबाइल नंबर आवश्यक होगा। किसान अपनी फसल प्रविष्टि में संशोधन के लिए निकटतम प्राथमिक कृषि सहकारी समिति, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी अथवा विकासखंड कृषि कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।

जिले में दलहन एवं तिलहन फसलों के विपणन के लिए प्रधानमंत्री आशा योजना भी संचालित है। इसके तहत अरहर, उड़द, मूंग, मूंगफली एवं सोयाबीन की खरीदी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर जिले की 13 सहकारी समितियों के माध्यम से की जाएगी। शासन द्वारा अरहर का न्यूनतम समर्थन मूल्य 8,450 रुपये, उड़द 8,200 रुपये, मूंग 8,780 रुपये, मूंगफली 7,517 रुपये तथा सोयाबीन 5,708 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। विभाग के अनुसार जिले में इस खरीफ सीजन के लिए मक्का 18,200 हेक्टेयर, दलहन 15,270 हेक्टेयर, तिलहन 4,920 हेक्टेयर तथा लघु धान्य फसलों के लिए 1,158 हेक्टेयर क्षेत्र में खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।


वन्यजीव संरक्षण में बड़ी सफलता,नर चीतल के अवैध शिकार का खुलासा, सात आरोपी गिरफ्तार, न्यायालय ने भेजा जेल

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सरकार की सख्ती से वन्यजीव अपराधों पर लग रहा अंकुश, वन्यजीव संरक्षण को मिल रही मजबूती

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सशक्त नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार वन, वन्यजीव और जैव विविधता के संरक्षण के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में वन विभाग और छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम द्वारा अवैध शिकार के विरुद्ध विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। इन अभियानों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। इसी क्रम में कवर्धा परियोजना मंडल ने नर चीतल के अवैध शिकार के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपियों को न्यायालय में प्रस्तुत किए जाने के बाद जेल भेज दिया गया।

मुखबिर की सूचना पर योजनाबद्ध कार्रवाई

वन विकास निगम के बोड़ला परियोजना परिक्षेत्र के भलपहरी बीट स्थित जंगल में शिकारियों ने जाल बिछाकर लगभग तीन वर्ष के नर चीतल का शिकार किया। इसके बाद उसके मांस को पकाकर आपस में बांटने की तैयारी की जा रही थी। मुखबिर से मिली सूचना पर वन विकास निगम की टीम ने तत्काल योजनाबद्ध तरीके से घेराबंदी कर दबिश दी और सभी सात आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।

शिकार में प्रयुक्त सामग्री और चीतल का मांस जब्त

कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से लगभग 500 ग्राम पका हुआ चीतल का मांस, नायलॉन की रस्सी, तीन कुल्हाड़ियां, स्टील के तार एवं लकड़ी से बने फंदे तथा खून से सना थैला बरामद कर जब्त किया गया। आरोपियों के विरुद्ध वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की गई।

सघन निगरानी और गश्त से मिल रही सफलता

वन विभाग और वन विकास निगम द्वारा संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित गश्त, सूचना तंत्र को मजबूत करने तथा विशेष निगरानी अभियान चलाने के कारण वन्यजीव अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो रहा है। विभाग की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से अवैध शिकार करने वालों के विरुद्ध लगातार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।

वन्यजीव संरक्षण के लिए सरकार की स्पष्ट नीति

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्राकृतिक संसाधनों और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार वन विभाग आधुनिक निगरानी व्यवस्था, नियमित गश्त और प्रभावी सूचना तंत्र के माध्यम से वन्यजीव अपराधों पर अंकुश लगाने का कार्य कर रहा है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि वन्यजीवों का अवैध शिकार करने या प्राकृतिक संपदा को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।  वन मंत्री कश्यप ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वन्यजीवों के संरक्षण में अपनी भागीदारी निभाएं। यदि कहीं भी अवैध शिकार या वन अपराध की जानकारी मिले तो उसकी सूचना तत्काल वन विभाग को दें, ताकि समय रहते प्रभावी कार्रवाई कर प्रदेश की समृद्ध वन्यजीव संपदा और जैव विविधता का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

16वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं पर राष्ट्रीय कार्यशाला में शामिल हुए उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

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पंचायतों के वित्तीय सशक्तिकरण एवं ग्रामीण विकास के विभिन्न पहलुओं पर हुई चर्चा

रायपुर- नई दिल्ली में आयोजित 16वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं पर राष्ट्रीय कार्यशाला में छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा शामिल हुए। कार्यशाला में विभिन्न राज्यों के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों तथा नीति-निर्माताओं ने भाग लिया। इस अवसर पर ग्रामीण स्थानीय निकायों को वित्तीय संसाधनों के आवंटन, पंचायतों की वित्तीय क्षमता को सुदृढ़ करने तथा 16वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।

कार्यशाला में स्थानीय निकायों की वित्तीय स्वायत्तता, बेहतर सेवा प्रदायगी, पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रदर्शन आधारित अनुदान व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर विशेष चर्चा हुई। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कार्यशाला के विभिन्न तकनीकी सत्रों में सहभागिता करते हुए पंचायतों एवं ग्रामीण विकास से जुड़े मुद्दों पर आयोजित प्रस्तुतियों और विचार-विमर्श का अवलोकन किया।

छत्तीसगढ़ को ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए 11,664 करोड़ रुपए का अनुदान

कार्यशाला के दौरान 16वें वित्त आयोग द्वारा ग्रामीण स्थानीय निकायों (Rural Local Bodies) के लिए प्रस्तावित अनुदान की जानकारी साझा की गई। आयोग की अनुशंसाओं के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 की अवधि में छत्तीसगढ़ को कुल 11,664 करोड़ रुपए का अनुदान प्राप्त होगा। इसमें 9,331 करोड़ रुपए बेसिक ग्रांट तथा 2,333 करोड़ रुपए परफॉर्मेंस ग्रांट शामिल हैं। वहीं, ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए अंतर-राज्यीय अनुदान वितरण में छत्तीसगढ़ की हिस्सेदारी 2.68 प्रतिशत निर्धारित की गई है।

वर्षवार आवंटन के अनुसार 2026-27 में राज्य को 1,498 करोड़ रुपए की बेसिक ग्रांट मिलेगी। 2027-28 में 1,663 करोड़ रुपए बेसिक ग्रांट एवं 248 करोड़ रुपए परफॉर्मेंस ग्रांट, 2028-29 में 1,846 करोड़ रुपए बेसिक ग्रांट एवं 624 करोड़ रुपए परफॉर्मेंस ग्रांट, 2029-30 में 2,049 करोड़ रुपए बेसिक ग्रांट एवं 693 करोड़ रुपए परफॉर्मेंस ग्रांट तथा 2030-31 में 2,275 करोड़ रुपए बेसिक ग्रांट एवं 768 करोड़ रुपए परफॉर्मेंस ग्रांट का प्रावधान किया गया है।

यह अनुदान ग्राम पंचायतों एवं अन्य ग्रामीण स्थानीय निकायों के माध्यम से आधारभूत अधोसंरचना के विकास, नागरिक सुविधाओं के विस्तार तथा ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को और अधिक गति प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मीडिया एवं संचार अधिकारियों के लिए राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित

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नई दिल्ली स्थित आईआईआईडीईएम में आयोजित हुआ एक दिवसीय प्रशिक्षण एवं संवाद कार्यक्रम

रायपुर- भारत निर्वाचन आयोग द्वारा नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट (आईआईआईडीईएम) में मीडिया एवं संचार अधिकारियों के लिए दूसरे एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। तीन जुलाई शुक्रवार को आयोजित सम्मेलन में देश के 16 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के विभिन्न जिलों के मीडिया नोडल अधिकारी, सोशल मीडिया नोडल अधिकारी, जिला जनसंपर्क अधिकारी तथा राज्य जनसंपर्क विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों सहित 260 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। छत्तीसगढ़ से सहायक मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, अपर संचालक जनसंपर्क विभाग तथा प्रदेश के सभी 33 जिलों के जिला जनसंपर्क अधिकारी सम्मेलन में शामिल हुए। 

सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग की प्रत्येक कार्यवाही संविधान, निर्वाचन संबंधी कानूनों तथा आयोग द्वारा समय-समय पर जारी पारदर्शी दिशा-निर्देशों के अनुरूप संचालित होती है। उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली भ्रामक एवं फर्जी सूचनाओं के प्रति सतर्क रहने तथा तथ्यात्मक जानकारी के प्रभावी प्रसार के माध्यम से गलत सूचनाओं पर अंकुश लगाने में मीडिया एवं संचार अधिकारियों की सक्रिय भूमिका पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हाल के विधानसभा चुनावों में रिकॉर्ड मतदान प्रतिशत भारतीय मतदाताओं के निर्वाचन प्रणाली पर गहरे विश्वास का परिचायक है।

चुनाव आयुक्त डॉ. विवेक जोशी ने डिजिटल युग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डीपफेक तथा भ्रामक डिजिटल सामग्री से उत्पन्न चुनौतियों का उल्लेख करते हुए अधिकारियों से आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप इनका प्रभावी ढंग से मुकाबला करने का आह्वान किया। उन्होंने चुनावी साक्षरता क्लबों के माध्यम से युवा मतदाताओं को निर्वाचन प्रक्रिया से जोड़ने पर भी विशेष जोर दिया।

सम्मेलन में निर्वाचन प्रक्रिया के विभिन्न चरणों से संबंधित संचार रणनीतियों, मतदाता सूची प्रबंधन, मतदान एवं मतगणना प्रक्रिया, ईसीआईनेट, संवैधानिक एवं विधिक प्रावधानों, मीडिया प्रबंधन, प्रेस विज्ञप्ति लेखन, सोशल मीडिया के प्रभावी उपयोग तथा भ्रामक सूचनाओं के प्रबंधन पर विस्तृत तकनीकी एवं व्यावहारिक सत्र आयोजित किए गए। प्रतिभागियों को समूहों में निर्वाचन प्रक्रिया का व्यवहारिक प्रदर्शन कराया गया तथा प्रदर्शनी एवं मीडिया कॉर्नर का अवलोकन भी कराया गया। कार्यक्रम के दौरान हाल ही में चुनाव संपन्न कराने वाले राज्यों के अधिकारियों ने निर्वाचन प्रबंधन एवं जनसंचार से जुड़े अपने अनुभव साझा किए तथा प्रभावी संचार की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों पर चर्चा की। सम्मेलन का समापन प्रतिभागियों एवं भारत निर्वाचन आयोग के अधिकारियों के बीच प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ।

पहली पत्नी को जिंदा जलाने की कोशिश का आरोप: दूसरी पत्नी, बहन और जीजा गिरफ्तार, पति फरार

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 भिलाई। दुर्ग जिले के भिलाई में पारिवारिक विवाद ने सनसनीखेज मोड़ ले लिया। सुपेला थाना क्षेत्र में पहली पत्नी को कथित तौर पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर जिंदा जलाने की कोशिश करने के मामले में पुलिस ने दूसरी पत्नी, उसकी बहन और जीजा को गिरफ्तार किया है। वहीं घटना का मुख्य आरोपी पति अभी फरार है, जिसकी तलाश जारी है।


पुलिस के अनुसार मामला सुपेला थाना क्षेत्र की स्मृति नगर चौकी का है। गिरफ्तार आरोपियों में परी खान (23), उसकी बहन मुस्कान (24) और जीजा राहुल यादव (35) शामिल हैं। जबकि मुख्य आरोपी लक्की सरदार फरार है।

पुलिस जांच में सामने आया है कि 2 जुलाई की रात करीब 8 बजे परी खान ने अपने पति लक्की सरदार, बहन मुस्कान और जीजा राहुल यादव के साथ मिलकर कथित तौर पर पहली पत्नी के घर पहुंचकर विवाद किया। आरोप है कि चारों ने पहले महिला के साथ मारपीट की और फिर उस पर तथा घर के भीतर ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगाने का प्रयास किया।

बताया जा रहा है कि पीड़िता किसी तरह आरोपियों के चंगुल से निकलकर मौके से भागने में सफल रही, जिससे उसकी जान बच गई। घटना के बाद उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।

पहली पत्नी से विवाद के बाद की थी दूसरी शादी

पुलिस के मुताबिक, लक्की सरदार की पहली शादी शीतल वर्मा से हुई थी। दोनों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था, जिसके बाद शीतल अपने मायके चली गई थी। दहेज और पैसों के विवाद को लेकर मामला पुलिस तक भी पहुंचा था।

बाद में दोनों अलग हो गए। वर्ष 2025 में लक्की सरदार ने परी खान से प्रेम विवाह कर लिया और दोनों खम्हरिया क्षेत्र में रहने लगे। इसी बीच पहली पत्नी को जिंदा जलाने की कोशिश का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

फिलहाल पुलिस फरार आरोपी लक्की सरदार की तलाश में जुटी हुई है। मामले की जांच जारी है।

CG NEWS : पड़ोस के नाबालिग ने दो बच्चियों से किया अनाचार, पुलिस ने लिया हिरासत में

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 दुर्ग। जिले के छावनी थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां पड़ोस में रहने वाले एक 17 वर्षीय नाबालिग पर सात और नौ वर्ष की दो सगी बहनों के साथ अनाचार करने का आरोप लगा है। पीड़ित पक्ष की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आरोपी नाबालिग को हिरासत में ले लिया है।


खेलने के बहाने बुलाकर दी वारदात को अंजाम

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, घटना बीते गुरुवार (2 जुलाई) शाम की है। आरोपी नाबालिग ने बच्चियों को खेलने के बहाने अपने घर बुलाया था, जहां उसने इस कथित कृत्य को अंजाम दिया। घटना का खुलासा तब हुआ जब बड़ी बच्ची ने घर लौटने पर पेट और निजी अंगों में तेज दर्द की शिकायत की। बच्ची की अस्वस्थ स्थिति देखकर परिजनों को संदेह हुआ। जब उन्होंने दोनों बहनों से अलग-अलग पूछताछ की, तब बच्चियों ने आपबीती सुनाई। इसके बाद परिजनों ने तत्काल छावनी थाने पहुंचकर मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई।

विश्वास का फायदा उठाने का आरोप

पीड़ित परिवार के एक रिश्तेदार ने बताया कि दोनों परिवार पड़ोसी होने के कारण एक-दूसरे के परिचित थे और उनके बीच आना-जाना था। आरोपी ने इसी भरोसे का फायदा उठाकर इस घिनौनी वारदात को अंजाम दिया। बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों के बीच पूर्व में कुछ पारिवारिक विवाद भी था।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई, सख्त सजा और बुलडोजर की मांग

शिकायत मिलते ही छावनी थाना पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल तलाशी शुरू की और आरोपी नाबालिग को अभिरक्षा में ले लिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में संबंधित धाराओं के तहत वैधानिक कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।

दूसरी ओर, पीड़ित परिवार और परिजनों में घटना को लेकर भारी आक्रोश है। उन्होंने प्रशासन से आरोपी के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही पीड़ित पक्ष ने प्रशासन से आरोपी के मकान पर बुलडोजर चलाने की भी मांग की है।

फीफा वर्ल्ड कप 2026: नॉकआउट मुकाबलों पर मौसम की मार

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2026 फीफा वर्ल्ड कप के राउंड ऑफ 16 मुकाबले शुरू हो चुके हैं, लेकिन इस बार मैचों से ज्यादा चर्चा भीषण गर्मी और खराब मौसम की हो रही है।

अमेरिका के कई मेजबान शहरों में तापमान बेहद ऊंचा है। खासकर फिलाडेल्फिया में गर्मी और उमस के कारण खिलाड़ियों और दर्शकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ स्थानों पर हीट इंडेक्स 46°C (115°F) तक पहुंच सकता है।

इसी बीच मेक्सिको बनाम इंग्लैंड के नॉकआउट मुकाबले के समय में बदलाव की अटकलें भी लगीं, क्योंकि तूफान और तेज बारिश की संभावना जताई गई थी। हालांकि, बाद में फीफा ने स्पष्ट किया कि मैच अपने निर्धारित समय पर ही खेला जाएगा। 

खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए फीफा ने अतिरिक्त वॉटर ब्रेक, मेडिकल टीमों की तैनाती और स्टेडियमों में कूलिंग सुविधाओं की व्यवस्था की है। फिर भी कई विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी भीषण गर्मी में मैच आयोजित करना खिलाड़ियों और दर्शकों दोनों के लिए जोखिम भरा हो सकता है।

भारत की सख्त कार्रवाई, लश्कर-जैश से जुड़े 23 आतंकी अब आधिकारिक तौर पर आतंकवादी घोषित

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 नई दिल्ली। आतंकवाद के खिलाफ केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए 23 आतंकियों को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत आधिकारिक तौर पर आतंकवादी घोषित कर दिया है। गृह मंत्रालय द्वारा जारी राजपत्र (गजट) अधिसूचना के अनुसार, इन सभी के नाम UAPA की चौथी अनुसूची में शामिल किए गए हैं। 


सरकार का कहना है कि ये सभी भारत विरोधी आतंकी गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं और इनमें से अधिकांश पाकिस्तान या पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में छिपे हुए हैं।

लश्कर और जैश के कई आतंकी सूची में शामिल

गृह मंत्रालय की सूची में मसूद इलियास कश्मीरी, मोहम्मद मुसादिक, मुफ्ती मोहम्मद असगर खान और हाफिज अब्दुल शकूर सहित कई आतंकियों के नाम शामिल हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, इन पर वर्ष 2016 में नगरोटा स्थित सेना शिविर पर हुए आतंकी हमले तथा वर्ष 2022 में जम्मू के सुंजवां क्षेत्र में सुरक्षा बलों पर हुए हमले में शामिल होने के आरोप हैं।

इसके अलावा लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े अब्दुल रऊफ और हाफिज खालिद वलीद को आतंकी संगठन के सरगना हाफिज मोहम्मद सईद का करीबी सहयोगी बताया गया है।

बेंगलुरु का निवासी, फिलहाल पाकिस्तान में सक्रिय

सूची में मोहम्मद शहीद फैसल उर्फ उस्ताद उर्फ जाकिर का नाम भी शामिल है। अधिसूचना के मुताबिक उसका स्थायी पता बेंगलुरु (कर्नाटक) का है, जबकि वर्तमान में वह पाकिस्तान के रावलपिंडी में रह रहा है।

सरकार का आरोप है कि वह लश्कर-ए-तैयबा, अल-कायदा और ISIS से जुड़े मॉड्यूल के संपर्क में रहा है। उस पर सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं की भर्ती करने, हथियारों का प्रशिक्षण दिलाने और आतंकी गतिविधियों के लिए धन जुटाने के आरोप भी हैं।

UAPA के तहत कार्रवाई होगी और प्रभावी

गृह मंत्रालय ने अधिसूचना में कहा है कि इन व्यक्तियों के आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के पर्याप्त साक्ष्य और आधार मिले हैं। इसी के आधार पर UAPA की धारा 35 के तहत इनके नाम चौथी अनुसूची में शामिल किए गए हैं।

सरकार का कहना है कि आतंकवादी घोषित किए जाने के बाद इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई, जांच, संपत्ति जब्त करने और वित्तीय नेटवर्क पर कार्रवाई की प्रक्रिया और अधिक प्रभावी होगी।

गृह मंत्रालय ने जारी की अधिसूचना

यह अधिसूचना गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव राकेश राठी की ओर से जारी की गई है। केंद्र सरकार ने दोहराया है कि आतंकवाद के खिलाफ उसकी 'जीरो टॉलरेंस' नीति जारी रहेगी और देश की सुरक्षा के लिए ऐसे तत्वों के खिलाफ आगे भी कड़ी कार्रवाई की जाती रहेगी।

मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में मंत्रिमंडल का दो दिवसीय 'चिंतन शिविर 3.0' का आयोजनआज से

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल का दो दिवसीय 'चिंतन शिविर 3.0' का आयोजन आज 4 एवं 5 जुलाई को भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), रायपुर में किया जाएगा। छत्तीसगढ़ शासन के सुशासन एवं अभिसरण विभाग द्वारा आईआईएम रायपुर के सहयोग से आयोजित इस शिविर का उद्देश्य शासन की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी, नवाचार आधारित तथा परिणामोन्मुख बनाते हुए विकसित छत्तीसगढ़ के विज़न को नई गति देना है।


मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बदलते समय की चुनौतियों और अवसरों के अनुरूप शासन को भी निरंतर सीखना, स्वयं का मूल्यांकन करना और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार करना चाहिए। इसी सोच के अनुरूप आयोजित यह चिंतन शिविर मंत्रिमंडल और विभिन्न क्षेत्रों के राष्ट्रीय विशेषज्ञों के बीच संवाद, अनुभव-साझाकरण तथा नीति-निर्माण का महत्वपूर्ण मंच बनेगा।

शिविर में प्रदेश के समग्र, संतुलित और समावेशी विकास से जुड़े विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श किया जाएगा। कृषि, ग्रामीण विकास, उद्योग, निवेश, पर्यटन, खेल, नवाचार, उभरती प्रौद्योगिकी, सुशासन, संस्थागत सुधार, नेतृत्व विकास तथा प्रभावी जनसेवा जैसे विषयों पर विस्तृत सत्र आयोजित होंगे। इन चर्चाओं के आधार पर शासन की प्राथमिकताओं, विभागीय समन्वय और जनहितकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए भावी रणनीति तैयार की जाएगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा है कि सुशासन केवल योजनाएँ बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि समय की मांग के अनुरूप स्वयं को निरंतर बेहतर बनाते हुए जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना भी है। चिंतन शिविर इसी सतत सुधार की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य ऐसी कार्यसंस्कृति विकसित करना है जो पारदर्शी, उत्तरदायी, संवेदनशील और परिणाम आधारित हो तथा जिसका प्रत्यक्ष लाभ प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक पहुँचे।

उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण केवल संसाधनों के बेहतर उपयोग से नहीं, बल्कि दूरदर्शी नीति, नवाचार, प्रभावी नेतृत्व और विभागों के बीच बेहतर समन्वय से संभव होगा। चिंतन शिविर में होने वाला मंथन आने वाले वर्षों की विकास यात्रा को नई दिशा देगा।

राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ साझा करेंगे अनुभव

चिंतन शिविर के प्रथम दिवस की शुरुआत आध्यात्मिक गुरु एवं मोटिवेशनल स्पीकर श्री गौर गोपाल दास के नेतृत्व एवं जीवन मूल्यों पर व्याख्यान से होगी। इसके बाद श्री अभय करंदीकर उभरती प्रौद्योगिकियों एवं भविष्य की शासन व्यवस्था में उनकी भूमिका पर अपने विचार रखेंगे। डॉ. रमेश चंद कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और भविष्य की कृषि रणनीतियों पर विशेष व्याख्यान देंगे।

द्वितीय दिवस की शुरुआत योग सत्र से होगी। इसके पश्चात श्री सुमन बिल्ला पर्यटन एवं सेवा क्षेत्र की संभावनाओं, श्री शशांक मणि त्रिपाठी सार्वजनिक नीति एवं विकास, ओलंपिक पदक विजेता श्री गगन नारंग उत्कृष्टता, नेतृत्व और प्रदर्शन की संस्कृति तथा डॉ. विनय सहस्रबुद्धे सुशासन, नेतृत्व और जनकेंद्रित प्रशासन पर अपने विचार साझा करेंगे।

सुशासन की नई कार्यसंस्कृति को मिलेगा बल

चिंतन शिविर का प्रमुख उद्देश्य शासन व्यवस्था में नवाचार को बढ़ावा देना, विभागों के बीच अभिसरण एवं समन्वय को मजबूत करना, निर्णय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना तथा परिणामोन्मुखी प्रशासनिक संस्कृति को प्रोत्साहित करना है। साथ ही शासन में प्रौद्योगिकी के बेहतर उपयोग, नवाचार आधारित समाधान और नागरिक-केंद्रित सेवाओं को लेकर भी विस्तृत चर्चा होगी।

सावन 2026 में दो ग्रहण का संयोग: क्या है खतरे की घंटी या सिर्फ खगोलीय घटना? जानें ज्योतिषीय मान्यताएं

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 नई दिल्ली। भगवान शिव को समर्पित सावन का महीना हिंदू धर्म में सबसे पवित्र माना जाता है। वर्ष 2026 में सावन 30 जुलाई से 28 अगस्त तक रहेगा। इस बार सावन के दौरान एक विशेष संयोग बन रहा है, क्योंकि इसी महीने सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण दोनों पड़ रहे हैं। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह किसी बड़े संकट या अशुभ संकेत का प्रतीक है? आइए जानते हैं धर्म, ज्योतिष और खगोल विज्ञान के नजरिए से इसका महत्व।


सावन में कब लगेंगे दोनों ग्रहण?

  • सूर्य ग्रहण: 12 अगस्त 2026 (अमावस्या)
    • समय: रात 8:04 बजे से 1:07 बजे तक
    • भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए सूतक काल मान्य नहीं होगा।
  • चंद्र ग्रहण: 28 अगस्त 2026 (सावन पूर्णिमा)
    • समय: सुबह 8:04 बजे से 11:22 बजे तक
    • यह भी भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए धार्मिक कार्यों पर कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा।

क्या सावन में दो ग्रहण अशुभ माने जाते हैं?

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, 15 दिनों के भीतर सूर्य और चंद्र ग्रहण का लगना विशेष संयोग माना जाता है। मान्यता है कि जब राहु और केतु कम समय के अंतराल में सूर्य और चंद्रमा दोनों को प्रभावित करते हैं, तो इसका असर विश्व स्तर पर बड़े बदलाव, राजनीतिक उथल-पुथल, आर्थिक चुनौतियों या प्राकृतिक घटनाओं के रूप में देखा जा सकता है।

हालांकि, इन मान्यताओं का वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। खगोल विज्ञान के अनुसार, सूर्य और चंद्र ग्रहण पूरी तरह प्राकृतिक और नियमित खगोलीय घटनाएं हैं।

क्या भारत पर पड़ेगा कोई प्रभाव?

क्योंकि दोनों ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देंगे, इसलिए पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इनका सूतक काल मान्य नहीं होगा। ऐसे में पूजा-पाठ, व्रत, शिव आराधना और अन्य धार्मिक कार्य सामान्य रूप से किए जा सकेंगे।

क्या सचमुच खतरे की घंटी है?

धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से इसे परिवर्तनकारी समय माना जा सकता है, लेकिन इसे निश्चित रूप से किसी आपदा या संकट का संकेत कहना उचित नहीं है। महाभारत काल से जुड़ी ग्रहण संबंधी कथाएं धार्मिक परंपराओं का हिस्सा हैं, जिनकी ऐतिहासिक या वैज्ञानिक पुष्टि नहीं है।

सावन में क्या करें?

  • भगवान शिव की विधिवत पूजा और जलाभिषेक करें।
  • महामृत्युंजय मंत्र या 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करें।
  • सकारात्मक सोच रखें और अफवाहों से बचें।
  • ग्रहण भारत में दिखाई न देने के कारण सामान्य धार्मिक गतिविधियां जारी रख सकते हैं।

नोट: ग्रहण से जुड़े शुभ-अशुभ प्रभाव मुख्य रूप से धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ग्रहण एक सामान्य खगोलीय घटना है, इसलिए इसे लेकर अनावश्यक भय या भ्रम की आवश्यकता नहीं है।

 
 
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