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पीपला और ग्रामीणों की पहल से आदर्श ग्राम की ओर बढ़ता चरौदा, विशेष ग्राम सभा में पारित हुए चार लक्ष्य

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आरंग- शासन के निर्देशानुसार सोमवार को ग्राम पंचायत चरौदा में विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया गया। सभा में सरपंच देवशरण धीवर, सचिव, उपसरपंच, समस्त पंचगण, पटवारी, शिक्षक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन, स्वास्थ्य कार्यकर्ता, महिला स्व-सहायता समूह एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजनों ने सहभागिता की।ग्राम सभा में गांधी जयंती, स्वच्छता अभियान, चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा, ग्राम पंचायत विकास योजना, शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं, पेयजल, स्वच्छता, मूलभूत सुविधाओं तथा आय-व्यय के साथ-साथ ग्रामीणों की समस्याओं एवं सुझावों पर विस्तार से चर्चा हुई।

शिक्षक की पहल बनी आदर्श ग्राम की नींव

इस पूरे आदर्श ग्राम अभियान के प्रणेता शिक्षक एवं पीपला वेलफेयर फाउंडेशन के सक्रिय सदस्य महेन्द्र कुमार पटेल हैं। गत माह उन्हीं की पहल पर फाउंडेशन ने ग्रामवासियों और पंचायत के साथ मिलकर शासकीय गाइडलाइन अनुसार चरौदा को आदर्श ग्राम बनाने का प्रस्ताव रखा था, जिसका सभी जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने हर्ष के साथ स्वागत किया।

उच्च अधिकारियों के दिशा-निर्देश व पटेल के निरंतर प्रयास और ग्रामीणों के सहयोग से चरौदा ने  चार बड़े लक्ष्य हासिल कर लिए हैं। शत-प्रतिशत बच्चों का स्कूल में प्रवेश,  बाल विवाह मुक्त ग्राम चरौदा, हरियर ग्राम चरौदा, शत-प्रतिशत वय वंदन योजना में पंजीयन इन चारों लक्ष्यों की प्राप्ति का प्रस्ताव सर्वसम्मति से ग्राम सभा में पारित किया गया। फाउंडेशन के सदस्यों ने ग्राम सभा में आदर्श ग्राम के शेष लक्ष्यों और उसे पूर्ण करने की रूपरेखा पर विस्तार से प्रकाश डाला, जिसकी उपस्थित ग्रामीणों ने  सराहना की।


सरपंच देवशरण धीवर ने बताया कि फाउंडेशन और उच्च अधिकारियों के दिशा-निर्देशन में शेष लक्ष्यों पर भी तेजी से कार्य जारी है।

चरौदा अब सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि जनभागीदारी से आदर्श बनते ग्राम का मॉडल बन रहा है।

सिंगापुर की एनर्जी कैपिटल ग्लोबल छत्तीसगढ़ में एआई-रेडी डेटा सेंटर कैंपस में करेगी ₹41,750 करोड़ का निवेश

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प्रथम SING फोरम 2026 में राज्य को ₹43,250 करोड़ के FDI निवेश की प्रतिबद्धताएं मिलीं

रायपुर- छत्तीसगढ़ ने आज भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था का प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाते हुए सिंगापुर में आयोजित प्रथम सिंगापुर-इंडिया नेटवर्क फॉर ग्रोथ (SING) फोरम 2026 में ₹43,250 करोड़ के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की प्रतिबद्धताएं प्राप्त कीं। इनमें एआई-रेडी डेटा सेंटर कैंपस के लिए ₹41,750 करोड़ की एक बड़ी निवेश प्रतिबद्धता शामिल है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने फोरम में राज्य के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया, जहां छत्तीसगढ़ भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के नामांकन पर सहभागिता कर रहा था।


यह महत्वपूर्ण निवेश प्रतिबद्धता सिंगापुर मुख्यालय वाली एनर्जी कैपिटल ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड की ओर से आई है, जो छत्तीसगढ़ में 100 मेगावाट क्षमता का एआई-रेडी डेटा सेंटर कैंपस स्थापित करेगी। एनर्जी कैपिटल ग्लोबल एशिया-प्रशांत क्षेत्र में ऑन-साइट स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े एआई-रेडी डेटा सेंटर्स का विकास और वित्तपोषण करती है तथा इसकी उपस्थिति सिंगापुर, भारत, मलेशिया, कजाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया में है। मुख्यमंत्री ने फोरम में कंपनी को ‘इन्विटेशन टू इन्वेस्ट’ सौंपा।

यह निवेश प्रतिबद्धता छत्तीसगढ़ में डिजिटल क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों को और गति देती है। राज्य में पहले से ही भारत का पहला एआई डेटा सेंटर पार्क स्थापित है। ये परियोजनाएं मिलकर छत्तीसगढ़ को भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के एक उभरते केंद्र के रूप में स्थापित कर रही हैं।

एनर्जी कैपिटल ग्लोबल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्टानिस्लाव बोरिसोव ने कहा, “एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए जिस ऊर्जा, भूमि और राजनीतिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता है, वह आज छत्तीसगढ़ में उपलब्ध है। यह एमओयू एक दीर्घकालिक साझेदारी की शुरुआत है। हम मध्य भारत में सबसे बड़ा एआई-रेडी डेटा सेंटर कैंपस विकसित करने, राज्य में अंतरराष्ट्रीय पूंजी और विशेषज्ञता लाने तथा इसके संचालन के लिए छत्तीसगढ़ के इंजीनियरों को प्रशिक्षित करने की दिशा में आगे बढ़ने को लेकर उत्साहित हैं।”

राज्य को सनस्ट्रीम ग्रीन एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड से सोलर क्षेत्र के साथ-साथ संबंधित बैटरी स्टोरेज और कंपोनेंट्स के लिए ₹1,500 करोड़ का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्रस्ताव भी प्राप्त हुआ। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ये निवेश प्रतिबद्धताएं छत्तीसगढ़ की नीतियों, संभावनाओं और लोगों के प्रति विश्वास का प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि इससे राज्य के युवाओं के लिए नए अवसर सृजित होंगे और छत्तीसगढ़ को विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य के और करीब ले जाने में मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ एक फायरसाइड चैट में भी हिस्सा लिया, जिसका संचालन सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन द्वारा किया गया। छत्तीसगढ़ का पक्ष प्रभावी ढंग से रखते हुए उन्होंने कहा, “हम बंद कमरों में चर्चा करके सुधार नहीं लाते। हम सीधे उद्योग जगत से उनकी कठिनाइयों के बारे में पूछते हैं और उसके अनुरूप अपनी व्यवस्थाओं में बदलाव करते हैं। 450 से अधिक सुधार किए जा चुके हैं और यह ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ तब तक नहीं रुकेगी, जब तक लोग स्वयं यह न कहें कि अब और सुधार की आवश्यकता नहीं है।” उन्होंने कहा कि सुधारों, प्रगतिशील औद्योगिक नीति और सक्रिय सरकार के इस संयोजन के कारण छत्तीसगढ़ को केवल 18 महीनों में ₹8 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।

सिंगापुर सरकार के विदेश मंत्रालय तथा व्यापार एवं उद्योग मंत्रालय की राज्य मंत्री गैन सियो ह्वांग फोरम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। उनकी उपस्थिति ने भारतीय राज्यों के साथ आर्थिक संबंधों को और गहरा करने को सिंगापुर द्वारा दिए जा रहे महत्व को रेखांकित किया। मास्टरकार्ड, आईएचसीएल (ताज होटल्स) और नेस्ले सहित वैश्विक कंपनियों के वरिष्ठ नेतृत्व ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।

फोरम के इतर मुख्यमंत्री ने एक्वाटेक और एड्रॉइट ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। इन चर्चाओं में उद्योगों के लिए अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग से संबंधित अधोसंरचना और छत्तीसगढ़ में खाद्य प्रसंस्करण के व्यापक अवसरों पर ध्यान केंद्रित किया गया।

मुख्यमंत्री 6 अक्टूबर 2026 को CEO राउंडटेबल में सिंगापुर की प्रमुख कंपनियों और निवेश संस्थानों के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात करेंगे और फोरम से बनी निवेश की गति को आगे बढ़ाएंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबके लिए आवास’ के संकल्प को छत्तीसगढ़ पूरी प्रतिबद्धता से कर रहा साकार - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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जमीन से लेकर किफायती घर तक प्रभावी व्यवस्था खड़ी करने के प्रयासों को मिला सम्मान - उप मुख्यमंत्री अरुण साव

ईडब्ल्यूएस-एलआईजी के लिए भूमि आरक्षण और किफायती आवास उपलब्ध कराने में छत्तीसगढ़ की पहल को राष्ट्रीय सम्मान

विश्व पर्यावास दिवस पर नई दिल्ली के विज्ञान भवन में छत्तीसगढ़ पुरस्कृत

प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत छत्तीसगढ़ की ‘बेस्ट प्रैक्टिस’ को मिली राष्ट्रीय पहचान

निजी कॉलोनियों में भूमि आरक्षण से 25,413 आवासों के लिए बिना सरकारी खर्च के उपलब्ध हुई जमीन

रायपुर- आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और निम्न आय वर्ग (LIG) के परिवारों को किफायती एवं सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किए जा रहे नवाचारों और प्रभावी कार्यप्रणाली को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। 

ईडब्ल्यूएस-एलआईजी वर्ग के लिए भूमि आरक्षण तथा एएचपी (Affordable Housing in Partnership) के माध्यम से आवास उपलब्ध कराने की उत्कृष्ट कार्यप्रणाली (Best Practice) के लिए भारत सरकार के आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत किया है।

विश्व पर्यावास दिवस के अवसर पर आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने छत्तीसगढ़ को यह पुरस्कार प्रदान किया। राज्य की ओर से नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा तथा राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी-सह-राज्य मिशन संचालक, प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) सुमित अग्रवाल ने सम्मान ग्रहण किया।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार शहरी क्षेत्रों में आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए आवास की उपलब्धता बढ़ाने के साथ ही उन्हें बेहतर नागरिक सुविधाओं से युक्त सम्मानजनक जीवन प्रदान करने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव के मार्गदर्शन में विभाग द्वारा आवासीय परियोजनाओं की स्वीकृति, भूमि की उपलब्धता, निर्माण की गुणवत्ता और समयबद्ध पूर्णता तक प्रत्येक स्तर पर प्रभावी निगरानी की जा रही है।

हर पात्र परिवार को पक्का आवास हमारा संकल्प

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस राष्ट्रीय उपलब्धि के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, SUDA तथा नगरीय निकायों की पूरी टीम को बधाई दी है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में छत्तीसगढ़ की कार्यप्रणाली को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलना पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए भूमि आरक्षण तथा एएचपी के माध्यम से किफायती आवास उपलब्ध कराने की हमारी पहल को मिली यह पहचान राज्य सरकार की जनकल्याण के प्रति प्रतिबद्धता और परिणामोन्मुख कार्यशैली का प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के ‘सबके लिए आवास’ के संकल्प को छत्तीसगढ़ पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ा रहा है। पक्का घर केवल चार दीवारें और छत नहीं, बल्कि एक परिवार की सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य का आधार है। राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रदेश का कोई भी पात्र परिवार पक्के आवास से वंचित न रहे और जरूरतमंद परिवारों को मूलभूत सुविधाओं से युक्त बेहतर आवास उपलब्ध हो।

25,413 आवासों के लिए बिना सरकारी खर्च के मिली जमीन

शहरी क्षेत्रों में गरीब और निम्न आय वर्ग के लिए आवास निर्माण की सबसे बड़ी चुनौतियों में भूमि की उपलब्धता प्रमुख रही है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस चुनौती के समाधान के लिए निजी कॉलोनियों में ईडब्ल्यूएस और एलआईजी वर्ग के लिए भूमि आरक्षण के प्रावधान को प्रभावी ढंग से लागू किया है।

इस व्यवस्था के परिणामस्वरूप राज्य में 25 हजार 413 आवासों के निर्माण के लिए बिना सरकारी खर्च के भूमि उपलब्ध हुई है। इनमें प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 के अंतर्गत 17 हजार 790 और प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के अंतर्गत 7 हजार 623 आवास शामिल हैं।

इस पहल की विशेषता यह है कि कमजोर एवं निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए आवास केवल शहरों के बाहरी क्षेत्रों तक सीमित न रहकर नियोजित कॉलोनियों और विकसित शहरी क्षेत्रों का हिस्सा बन रहे हैं। इससे लाभार्थी परिवारों को सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा सहित अन्य आवश्यक शहरी सुविधाओं तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

भूमि से लेकर आवास तक छत्तीसगढ़ ने विकसित की प्रभावी व्यवस्था

राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत एएचपी मॉडल के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया है। भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ ही परियोजनाओं की स्वीकृति, निर्माण की प्रगति, गुणवत्ता और समयबद्ध पूर्णता की नियमित निगरानी की जा रही है।

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग तथा SUDA द्वारा नगरीय निकायों के साथ समन्वय कर ऐसी व्यवस्था विकसित की गई है, जिससे शहरी गरीब परिवारों के लिए किफायती आवास की उपलब्धता को गति मिली है। इसी समग्र कार्यप्रणाली को भारत सरकार ने ‘बेस्ट प्रैक्टिस’ के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी है।

उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने राष्ट्रीय सम्मान के लिए विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों और नगरीय निकायों की टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि शहरी गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों को किफायती आवास उपलब्ध कराने की दिशा में छत्तीसगढ़ द्वारा किए जा रहे ठोस प्रयासों की पहचान है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने शहरी गरीबों के आवास के लिए केवल योजना बनाने तक स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि जमीन की उपलब्धता से लेकर किफायती घर के निर्माण तक प्रभावी व्यवस्था विकसित की है। ईडब्ल्यूएस-एलआईजी वर्ग के लिए भूमि आरक्षण और एएचपी मॉडल को राष्ट्रीय सम्मान मिलना इसी कार्य का परिणाम है।

साव ने कहा कि विभाग का लक्ष्य है कि शहरों में जरूरतमंद परिवारों को तेजी से सम्मानजनक और किफायती आवास उपलब्ध हों। यह राष्ट्रीय सम्मान पूरी टीम को और बेहतर परिणाम देने के लिए प्रेरित करने के साथ हमारी जिम्मेदारी भी बढ़ाता है।

‘सबके लिए आवास’ की दिशा में छत्तीसगढ़ का मजबूत कदम

राज्य सरकार की इस पहल से 25 हजार से अधिक शहरी गरीब एवं निम्न आय वर्ग के परिवारों के पक्के घर का सपना साकार होने की दिशा में आगे बढ़ा है। निजी कॉलोनियों में भूमि आरक्षण के प्रभावी क्रियान्वयन ने एक ओर आवास निर्माण के लिए जमीन की उपलब्धता की बड़ी चुनौती का समाधान किया है, वहीं दूसरी ओर समाज के कमजोर वर्गों को विकसित शहरी क्षेत्रों और बेहतर नागरिक सुविधाओं से जोड़ने का रास्ता भी बनाया है।

विश्व पर्यावास दिवस पर मिला यह राष्ट्रीय सम्मान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबके लिए आवास’ के संकल्प को धरातल पर उतारने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार की प्रतिबद्धता, नवाचार और परिणामोन्मुख कार्यप्रणाली की राष्ट्रीय पहचान है।

स्पेन में समय से पहले आम चुनाव का ऐलान, 29 नवंबर को होगा मतदान

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स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने देश में समय से पहले आम चुनाव कराने का ऐलान किया है। प्रधानमंत्री ने सोमवार को घोषणा की कि स्पेन में 29 नवंबर 2026 को आम चुनाव होंगे। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब उनकी सरकार को संसद में लगातार राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

आवास संकट बना बड़ा मुद्दा

स्पेन में बढ़ती महंगाई और खासकर मकानों तथा किराए की बढ़ती कीमतों को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। हाल के दिनों में देश के कई शहरों में हजारों लोगों ने प्रदर्शन कर सरकार से किफायती आवास और किराए को लेकर ठोस कदम उठाने की मांग की।

संसद में सरकार को लगा झटका

सरकार की ओर से आवास संकट से निपटने के लिए लाए गए आपातकालीन उपायों को संसद में समर्थन नहीं मिल सका। इन प्रस्तावों में कमजोर वर्गों को बेदखली से राहत देने और किरायेदारों के अधिकार मजबूत करने जैसे कदम शामिल थे। प्रस्तावों के खारिज होने के बाद सरकार पर राजनीतिक दबाव और बढ़ गया।

अब जनता के बीच जाएंगे सांचेज़

प्रधानमंत्री सांचेज़ ने कहा कि अब जनता से नया जनादेश लेने का समय है। उनके नेतृत्व वाली सरकार को संसद में बहुमत के लिए विभिन्न दलों के समर्थन पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में यह चुनाव स्पेन की आगे की राजनीतिक दिशा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

फिलहाल, स्पेन में 29 नवंबर को होने वाला यह चुनाव आवास संकट, सरकार की नीतियों और संसद में राजनीतिक समर्थन जैसे मुद्दों के बीच होगा।

यूक्रेन को जर्मनी की बड़ी सैन्य सहायता, रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र के लिए बढ़ाया सहयोग

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यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध के बीच जर्मनी ने यूक्रेन के समर्थन को और मजबूत करने का फैसला किया है। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की यूक्रेन यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और आर्थिक सहायता को लेकर महत्वपूर्ण बातचीत हुई।

रक्षा क्षेत्र में बढ़ेगा सहयोग

जर्मनी यूक्रेन की रक्षा क्षमता मजबूत करने के लिए सैन्य उपकरण, ड्रोन और अन्य रक्षा तकनीक उपलब्ध कराने पर जोर दे रहा है। दोनों देशों के बीच ड्रोन तकनीक और संयुक्त रक्षा उत्पादन को लेकर भी सहयोग बढ़ाने की चर्चा हुई है।

जर्मनी का कहना है कि यूक्रेन को अपनी सुरक्षा मजबूत करने के लिए जरूरी सहायता उपलब्ध कराना यूरोपीय सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है।

ऊर्जा ढांचे को लेकर भी मदद

रूस के हमलों से यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे को हुए नुकसान के बीच ऊर्जा क्षेत्र के पुनर्निर्माण और सुरक्षा पर भी जर्मनी की ओर से सहायता देने की बात कही गई है। सर्दियों से पहले यूक्रेन के बिजली और ऊर्जा नेटवर्क को मजबूत करना एक प्रमुख प्राथमिकता है।

यूरोप का समर्थन जारी

जर्मनी लंबे समय से यूक्रेन के प्रमुख यूरोपीय समर्थकों में शामिल रहा है। नई सहायता के जरिए बर्लिन यूक्रेन की रक्षा क्षमता और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में मदद करना चाहता है।

रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच जर्मनी की यह पहल यूरोप की सुरक्षा नीति और यूक्रेन के लिए पश्चिमी देशों के समर्थन को लेकर महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ बड़ा सैन्य अभियान, सरकार ने शुरू किया जवाबी ऑपरेशन

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यमन में लंबे समय से जारी संघर्ष एक बार फिर तेज हो गया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार ने ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के कब्जे वाले इलाकों को वापस लेने के लिए बड़े सैन्य अभियान की घोषणा की है। राष्ट्रपति परिषद के प्रमुख राशद अल-अलीमी ने कहा कि सरकारी बल देश के बाकी हिस्सों को हूती नियंत्रण से मुक्त कराने के लिए अभियान जारी रखेंगे।

ताइज के आसपास बढ़ा तनाव

यह सैन्य अभियान ऐसे समय शुरू हुआ है जब हूती लड़ाकों ने दक्षिण-पश्चिमी यमन के ताइज शहर के आसपास अपनी स्थिति मजबूत की है। हाल में हूतियों ने ताइज और अदन को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण मार्ग के पास बढ़त बनाई है। इस मार्ग पर नियंत्रण से ताइज की सरकारी आपूर्ति और आवाजाही प्रभावित हो सकती है।

ताइज यमन का एक महत्वपूर्ण शहर है और लंबे समय से हूती विद्रोहियों की घेराबंदी का सामना कर रहा है। हालिया लड़ाई के बाद शहर के आसपास मानवीय स्थिति को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।

सऊदी अरब ने दिया समर्थन

यमनी सरकार को सऊदी अरब का समर्थन प्राप्त है। सऊदी अधिकारियों ने कहा है कि वह हूती हमलों के खिलाफ यमनी सरकारी बलों को ऑपरेशनल समर्थन देगा। दूसरी ओर, हूतियों ने सऊदी अरब में मिसाइल और ड्रोन हमले करने का दावा किया है, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि तत्काल नहीं हुई है।

लाल सागर और वैश्विक व्यापार पर असर

इस संघर्ष का असर केवल यमन तक सीमित नहीं है। लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य दुनिया के महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल हैं। इस क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधि से जहाजों की सुरक्षा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ने की आशंका है।

मानवीय संकट की चिंता

संघर्ष बढ़ने से बड़ी संख्या में लोगों के विस्थापित होने और खाद्य एवं जरूरी सामान की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है। ताइज और आसपास के इलाकों में जारी लड़ाई ने मानवीय संकट को और गंभीर बना दिया है।


बेमेतरा में 22 बंदरों की मौत का मामला, फसलों को बचाने के लिए गोली मारने का आरोप

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छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले से वन्यजीवों से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। एक गांव में कथित तौर पर 22 बंदरों की मौत के बाद हड़कंप मच गया है। आरोप है कि फसलों को नुकसान से बचाने के लिए बंदरों को गोली मारी गई।

ग्रामीणों के आरोपों के बाद जांच शुरू

मामले की जानकारी सामने आने के बाद वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों की टीम घटनास्थल पर पहुंचकर मृत बंदरों के संबंध में जानकारी जुटा रही है और मौत के कारणों की जांच की जा रही है।

जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि बंदरों की मौत वास्तव में गोली लगने से हुई या इसके पीछे कोई अन्य वजह है। इसके साथ ही घटना में शामिल लोगों की पहचान करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।

फसलों को नुकसान पहुंचाने का दावा

स्थानीय स्तर पर यह बात सामने आई है कि बंदरों के झुंड से फसलों को नुकसान पहुंचने की शिकायतें थीं। इसी वजह से कथित तौर पर उन्हें रोकने के लिए गोली चलाने की बात कही जा रही है। हालांकि, इस मामले में वास्तविक कारण और जिम्मेदार लोगों की भूमिका जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

वन्यजीव संरक्षण को लेकर सवाल

एक साथ बड़ी संख्या में बंदरों की मौत की खबर के बाद वन्यजीव संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, फसलों को वन्यजीवों से बचाने के लिए कानून के दायरे में रहते हुए सुरक्षित उपाय अपनाना जरूरी है।

फिलहाल वन विभाग और पुलिस की जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही बंदरों की मौत की वास्तविक वजह और मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होगी।

दिल्ली में ₹50 करोड़ की हेरोइन बरामद, अंतरराज्यीय ड्रग्स नेटवर्क का भंडाफोड़

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दिल्ली पुलिस ने नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक कथित अंतरराज्यीय हेरोइन तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उनके कब्जे से करीब ₹50 करोड़ कीमत की हेरोइन बरामद करने का दावा किया है।

पुलिस के अनुसार, यह नेटवर्क दिल्ली के अलावा दूसरे राज्यों में भी नशीले पदार्थों की सप्लाई कर रहा था। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क के पीछे कौन लोग हैं और ड्रग्स की सप्लाई कहां से की जा रही थी।

पुलिस की जांच जारी

पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है। पूछताछ के जरिए नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, सप्लायरों और ड्रग्स की सप्लाई के रास्तों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।

जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि बरामद हेरोइन दिल्ली में कहां पहुंचाई जानी थी और इसके पीछे किसी बड़े संगठित गिरोह की भूमिका है या नहीं।

ड्रग्स नेटवर्क पर शिकंजा

दिल्ली में नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों की कार्रवाई लगातार जारी है। इस कार्रवाई को इसी अभियान के तहत एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।

फिलहाल चारों आरोपियों से पूछताछ जारी है और पुलिस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में गतिरोध, आगे समझौते की राह मुश्किल

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भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार समझौते की बातचीत फिलहाल एक मुश्किल मोड़ पर पहुंच गई है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन अब दोनों पक्ष ऐसी स्थिति में पहुंच गए हैं, जहां आगे और रियायत देना या लेना बेहद मुश्किल हो सकता है।

वित्त मंत्री ने बातचीत की मौजूदा स्थिति को “प्लेटो” यानी एक ऐसे पड़ाव के रूप में बताया, जहां काफी बातचीत और समझौते के बाद भी आगे बढ़ने की गुंजाइश सीमित नजर आ रही है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बातचीत पूरी तरह बंद नहीं हुई है और यदि दोनों देशों को आगे समझौते की कोई गुंजाइश मिलती है, तो बातचीत आगे बढ़ सकती है।

कहां फंसी है बातचीत?

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत फरवरी 2025 से चल रही है। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार और बाजार पहुंच को बढ़ाना तथा लंबे समय से चले आ रहे व्यापार असंतुलन से जुड़े मुद्दों को सुलझाना है।

अमेरिका भारत के साथ अपने व्यापार घाटे को कम करना चाहता है। वहीं भारत अपनी व्यापारिक और आर्थिक प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए समझौते की शर्तों पर सावधानी से आगे बढ़ रहा है। यही अंतर बातचीत में एक महत्वपूर्ण चुनौती बना हुआ है।

टैरिफ भी बना बड़ा मुद्दा

बातचीत के बीच अमेरिका की ओर से टैरिफ यानी आयात शुल्क को लेकर दबाव बढ़ा है। रॉयटर्स के अनुसार, रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिकी शुल्क से जुड़ी नई परिस्थितियों ने भी भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता को और जटिल बनाया है। भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है।

अब आगे क्या?

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने भी संकेत दिया है कि तत्काल समझौता होने की संभावना नहीं है। इसके बावजूद दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या दोनों पक्ष ऐसी नई शर्तों पर सहमत हो पाएंगे, जिससे व्यापार समझौता आगे बढ़ सके।

फिलहाल स्थिति यह है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता रद्द नहीं हुआ है, लेकिन बातचीत एक कठिन और संवेदनशील चरण में पहुंच गई है।

छत्तीसगढ़ के जंगलों को ग्लोबल टूरिज्म मॉडल से जोड़ेंगे साय

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सिंगापुर के Mandai Wildlife Reserve में वन्यजीव संरक्षण और इको-टूरिज्म की व्यवस्थाएं देखीं

रायपुर/सिंगापुर- छत्तीसगढ़ के जंगलों और वन्यजीव संपदा को वैश्विक पर्यटन से जोड़ने की दिशा में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सिंगापुर के Mandai Wildlife Reserve का दौरा किया। उन्होंने वन्यजीव संरक्षण, प्राकृतिक आवास के प्रबंधन और पर्यटक सुविधाओं की आधुनिक व्यवस्था का अवलोकन किया। साय ने कहा कि सिंगापुर के अनुभवों से सीख लेकर छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुरूप इको-टूरिज्म का ऐसा मॉडल विकसित किया जा सकता है, जिसमें संरक्षण के साथ पर्यटन और रोजगार को भी गति मिले।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ मंडाई वाइल्डलाइफ रिजर्व का दौरा कर वन्यजीव संरक्षण और इको-टूरिज्म की व्यवस्थाएं देखीं। साय भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के नामांकन पर सिंगापुर में आयोजित प्रथम सिंगापुर-इंडिया नेटवर्क फॉर ग्रोथ (SING) फोरम 2026 में भाग लेने पहुंचे हैं।

छत्तीसगढ़ की करीब 44 प्रतिशत भूमि वन क्षेत्र है। बस्तर से सरगुजा तक फैले जंगल, समृद्ध जैव-विविधता और राष्ट्रीय उद्यान-अभयारण्य राज्य को इको-टूरिज्म के लिए विशिष्ट आधार देते हैं। सरकार अब इन प्राकृतिक संसाधनों को बेहतर पर्यटक सुविधाओं और स्थानीय भागीदारी से जोड़कर पर्यटन की नई संभावनाएं तलाश रही है।

Mandai Wildlife Reserve में मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक परिवेश में वन्यजीव संरक्षण, पर्यटकों के अनुभव, प्रबंधन व्यवस्था और जागरूकता गतिविधियों का अध्ययन किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि छत्तीसगढ़ में विकास का मॉडल उसकी अपनी भौगोलिक और जैव-विविधता संबंधी विशेषताओं के अनुरूप होना चाहिए।

साय ने कहा कि सिंगापुर की व्यवस्थाओं को हूबहू अपनाने के बजाय वहां के सफल अनुभवों को छत्तीसगढ़ की जरूरतों के अनुसार उपयोग में लाया जाएगा। लक्ष्य ऐसा इको-टूरिज्म मॉडल तैयार करना है, जिसमें जंगल और वन्यजीव सुरक्षित रहें तथा स्थानीय समुदायों, युवाओं और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए आय के नए अवसर बनें।

बस्तर, कांगेर घाटी, अचानकमार, इंद्रावती और उदंती-सीतानदी जैसे क्षेत्र छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक पर्यटन क्षमता को दर्शाते हैं। इन क्षेत्रों में संरक्षण, स्थानीय भागीदारी और आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का बेहतर समन्वय राज्य को राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय इको-टूरिज्म मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

5 अक्टूबर 2026 — देश, दुनिया और छत्तीसगढ़ की ताज़ा खबरें

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नमस्कार! स्वागत है आपका आज की बड़ी और महत्वपूर्ण खबरों के साथ।

आइए जानते हैं देश-दुनिया, छत्तीसगढ़, कारोबार, खेल और मौसम से जुड़ी आज की प्रमुख खबरें।

आज की 10 बड़ी खबरें

1. सुप्रीम कोर्ट में आज अहम सुनवाई
मुख्य चुनाव आयुक्त और देशभर में चल रहे Special Intensive Revision (SIR) से जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। यह मामला चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़ा होने के कारण महत्वपूर्ण है।

2. भारतीय शेयर बाजार में आज राहत की उम्मीद
पिछले सप्ताह लगातार गिरावट के बाद आज बाजार में सुधार के संकेत हैं। GIFT Nifty करीब 22,640 के आसपास रहा। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर कम होती चिंता से बाजार को सहारा मिल सकता है। 

3. HDFC Bank में बड़ा बदलाव
HDFC Bank ने अनुप बागची को नया CEO नियुक्त किया है। यह बैंकिंग सेक्टर की आज की प्रमुख कॉरपोरेट खबरों में शामिल है। 

4. छत्तीसगढ़ में तेंदुए का आतंक
महासमुंद जिले के एक गांव में घर में घुसे तेंदुए ने 6 लोगों को घायल कर दिया। इलाके में दो दिनों के भीतर यह दूसरा तेंदुआ हमला बताया गया है। 

5. दुनिया में पश्चिम एशिया को लेकर तनाव जारी
ईरान, अमेरिका और क्षेत्रीय देशों के बीच तनाव तथा कूटनीतिक प्रयासों पर दुनिया की नजर बनी हुई है।

6. यूक्रेन युद्ध को लेकर यूरोप सक्रिय
यूक्रेन के लिए यूरोपीय देशों की सैन्य और आर्थिक मदद तथा ड्रोन एवं रक्षा सहयोग पर बातचीत जारी है।

7. आज विश्व शिक्षक दिवस 
आज World Teachers' Day मनाया जा रहा है। वर्ष 2026 में UNESCO-ILO की शिक्षकों की स्थिति संबंधी ऐतिहासिक सिफारिश के 60 वर्ष पूरे हो रहे हैं।

8. देश के कई हिस्सों में बारिश का अलर्ट 
IMD के अनुसार आज कई राज्यों में तेज बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना है। कुछ क्षेत्रों में हवा की गति 60 किमी/घंटे तक पहुंच सकती है।

9. एशियन गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन 
भारत ने 2026 एशियन गेम्स में 85 पदक जीतकर चौथा स्थान हासिल किया। इनमें 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य पदक शामिल हैं।

10. AI और टेक्नोलॉजी पर बढ़ता फोकस 
भारत में AI के इस्तेमाल, डेटा सुरक्षा और देश के भीतर AI मॉडल की processing क्षमता बढ़ाने को लेकर टेक कंपनियां और सरकार लगातार काम कर रही हैं।

छत्तीसगढ़ की खास खबरें

महासमुंद में तेंदुए का हमला

महासमुंद जिले के झिटकी गांव में तेंदुआ एक घर में घुस गया और 6 लोगों को घायल कर दिया। घायलों में कुछ की स्थिति गंभीर बताई गई है। लगातार हो रहे हमलों के कारण ग्रामीणों में चिंता बढ़ी है। 

छत्तीसगढ़ का Green Development Plan

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सिंगापुर यात्रा के दौरान हरित विकास, शहरी नियोजन और बागवानी से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। 

नवा रायपुर पर फोकस

नवा रायपुर को टेक्नोलॉजी, पर्यटन और नए उद्योगों के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में काम जारी है। 

शेयर बाजार — आज क्या देखें?

बाजार खुलने से पहले संकेत सकारात्मक हैं।

  • GIFT Nifty: करीब 22,640

  • Brent Crude: करीब $102 प्रति बैरल

  • पिछले सप्ताह बाजार में लगातार गिरावट रही।

  • विदेशी निवेशकों की बिकवाली बाजार पर दबाव डाल रही है।

  • घरेलू संस्थागत निवेशक खरीदारी कर रहे हैं।

  • आज HDFC Bank, Infosys, Yes Bank, Hindustan Zinc, RVNL समेत कई शेयर खबरों में हैं। 

दुनिया की खबरें

अमेरिका

अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बाजार की चिंता कुछ कम हुई है। कमजोर अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के बाद अक्टूबर में Fed की संभावित rate hike को लेकर उम्मीदें बदली हैं।

यूक्रेन

यूक्रेन के लिए यूरोपीय रक्षा सहयोग और सैन्य सहायता लगातार महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है।

पश्चिम एशिया

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक रास्ते तलाशे जा रहे हैं, लेकिन क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति अभी भी संवेदनशील है।

 आज का मौसम

देश के कई हिस्सों में बारिश और आंधी-तूफान की संभावना है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड सहित कई क्षेत्रों में मौसम खराब रहने का अनुमान है।

छत्तीसगढ़ में: आने वाले दिनों में गरज-चमक और बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

 खेल जगत

 एशियन गेम्स 2026:
भारत ने कुल 85 पदक के साथ चौथा स्थान हासिल किया।

🥇 स्वर्ण — 21
🥈 रजत — 27
🥉 कांस्य — 37

भारत के लिए यह प्रदर्शन कई खेलों में मजबूत वापसी का संकेत रहा।

आज का खास दिन

विश्व शिक्षक दिवस — 5 अक्टूबर

आज दुनिया भर में शिक्षकों के योगदान को सम्मान देने के लिए World Teachers' Day मनाया जाता है। इस साल UNESCO-ILO की 1966 की Recommendation concerning the Status of Teachers के 60 साल पूरे हो रहे हैं। 


Navratri 2026: मां दुर्गा का हाथी पर आगमन क्यों माना जाता है शुभ? जानें प्रस्थान की मान्यता

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 Navratri 2026: शक्ति की आराधना का पर्व शारदीय नवरात्र इस वर्ष 11 अक्टूबर 2026 से शुरू होगा। नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाएगी। 19 अक्टूबर को महानवमी और 20 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी। नवरात्र के दौरान माता के आगमन और प्रस्थान के वाहन को लेकर भी धार्मिक परंपरा में विशेष मान्यता है।


मान्यता के अनुसार नवरात्र की शुरुआत जिस दिन होती है, उसी आधार पर मां दुर्गा के आगमन का वाहन निर्धारित किया जाता है। वहीं, नवरात्र के समापन यानी विजयादशमी के दिन के आधार पर माता के प्रस्थान का वाहन माना जाता है। इस बार मां दुर्गा का आगमन हाथी पर और प्रस्थान पैदल माना जा रहा है।

रविवार को नवरात्र शुरू, हाथी पर आएंगी माता रानी

देवी भागवत पुराण में मां दुर्गा के आगमन के वाहनों का उल्लेख मिलता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार रविवार या सोमवार को नवरात्र शुरू होने पर माता का वाहन हाथी माना जाता है। शनिवार या मंगलवार को शुरुआत होने पर घोड़ा, गुरुवार या शुक्रवार को डोली और बुधवार को शुरुआत होने पर नौका को माता का वाहन माना जाता है।

इस वर्ष शारदीय नवरात्र की शुरुआत 11 अक्टूबर, रविवार से हो रही है। ऐसे में मान्यता के अनुसार मां दुर्गा गज यानी हाथी पर सवार होकर धरती पर आएंगी।

धार्मिक मान्यताओं में माता का हाथी पर आगमन शुभ माना गया है। इसे सुख-समृद्धि, अच्छी वर्षा, कृषि उत्पादन में वृद्धि और धन-धान्य की बढ़ोतरी का संकेत माना जाता है। श्रद्धालु इसे माता रानी के आशीर्वाद और समृद्धि से जोड़कर देखते हैं।

दशहरे पर कैसे होगा मां दुर्गा का प्रस्थान?

मां दुर्गा के आगमन की तरह उनके प्रस्थान के वाहन को लेकर भी अलग धार्मिक मान्यता है। विजयादशमी जिस वार को पड़ती है, उसके आधार पर माता के प्रस्थान का वाहन निर्धारित किया जाता है।

इस बार 20 अक्टूबर 2026 को मंगलवार को विजयादशमी मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार मंगलवार या शनिवार को नवरात्र का समापन होने पर माता के प्रस्थान का वाहन पैदल माना जाता है।

इसलिए इस वर्ष मां दुर्गा का प्रस्थान पैदल माना जा रहा है।

पैदल प्रस्थान को क्यों माना जाता है अशुभ?

धार्मिक मान्यताओं में माता के पैदल प्रस्थान को सामान्यतः शुभ संकेत नहीं माना जाता। इसे शोक, रोग, दुख और सामाजिक अस्थिरता से जोड़कर देखा जाता है। कुछ मान्यताओं के अनुसार ऐसे समय में प्राकृतिक आपदाओं या राजनीतिक-सामाजिक परिस्थितियों में उतार-चढ़ाव की आशंका मानी जाती है।

हालांकि, इन सभी बातों का आधार धार्मिक मान्यताएं और परंपराएं हैं। इन्हें वैज्ञानिक तथ्य या भविष्य की निश्चित भविष्यवाणी नहीं माना जाना चाहिए।

नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की होगी पूजा

शारदीय नवरात्र के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है। भक्त उपवास, पूजा-पाठ, मंत्र जाप और आरती के माध्यम से माता की भक्ति करते हैं। अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन और कन्या भोज की भी परंपरा है।

मान्यता है कि नवरात्र में श्रद्धापूर्वक मां दुर्गा की पूजा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए माता से प्रार्थना करते हैं।

नवरात्र 2026 में माता के वाहन का संयोग

इस बार नवरात्र की शुरुआत रविवार से होने के कारण मां दुर्गा का आगमन हाथी पर माना जा रहा है। वहीं विजयादशमी मंगलवार को होने से धार्मिक मान्यता के अनुसार माता का प्रस्थान पैदल होगा।

यानी इस वर्ष नवरात्र में माता के हाथी पर आगमन और पैदल प्रस्थान का संयोग बन रहा है। श्रद्धालु इसे धार्मिक दृष्टि से विशेष मान रहे हैं और नवरात्र के नौ दिनों में मां दुर्गा की आराधना कर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना करेंगे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की गार्डन्स बाय द बे के साथ महत्वपूर्ण चर्चा, सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन के लीडरशिप डिनर में हुए शामिल

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 सिंगापुर प्रवास का पहला दिन

SING फोरम 2026 में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं मुख्यमंत्री साय

नवा रायपुर में बॉटनिकल गार्डन के विकास, हरित क्षेत्रों के विस्तार और ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए गार्डन्स बाय द बे के अनुभवों का मिलेगा लाभ

सिंगापुर के उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के समक्ष मुख्यमंत्री ने रखीं छत्तीसगढ़ की निवेश संभावनाएं, विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में भागीदारी का दिया आमंत्रण

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधिमंडल भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा नामांकन के उपरांत सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन (SBF) द्वारा आयोजित प्रथम ‘सिंगापुर-इंडिया नेटवर्क फॉर ग्रोथ (SING) फोरम 2026’ में सहभागिता के लिए सिंगापुर प्रवास पर है।

सिंगापुर प्रवास के पहले दिन मुख्यमंत्री साय एवं छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधिमंडल ने विश्व प्रसिद्ध ‘गार्डन्स बाय द बे’ के जनरल मैनेजर, मास्टर प्लानिंग जेसन येओ तथा डायरेक्टर लिम चियाप सॉन्ग सहित संस्थान के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ औपचारिक बैठक की।

बैठक के दौरान छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधिमंडल को गार्डन्स बाय द बे की मास्टर प्लानिंग, सतत डिजाइन और उद्यान प्रबंधन से जुड़ी उत्कृष्ट कार्यप्रणालियों की जानकारी दी गई। दोनों पक्षों के बीच उद्यानिकी, वनस्पति संरक्षण, शहरी हरियाली, ईको-टूरिज्म और क्षमता विकास के क्षेत्रों में संस्थागत सहयोग की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ समृद्ध वनों और जैव विविधता से परिपूर्ण प्रदेश है। गार्डन्स बाय द बे की विशेषज्ञता और अनुभवों का लाभ नवा रायपुर में बॉटनिकल गार्डन के विकास के साथ ही प्रदेश के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर लैंडस्केपिंग और हरित क्षेत्रों के विस्तार में लिया जा सकता है। इससे छत्तीसगढ़ में पर्यटन की संभावनाओं को नया विस्तार मिलेगा, पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी और सैकड़ों लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन के लीडरशिप डिनर में शामिल हुए मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री साय शाम को SING फोरम की पूर्व संध्या पर सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन द्वारा आयोजित लीडरशिप डिनर में शामिल हुए। इस अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, सिंगापुर में भारत के उच्चायुक्त डॉ. शिल्पक अंबुले, सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन के चेयरमैन मार्क ली और सीईओ कोक पिंग सून उपस्थित थे।

लीडरशिप डिनर में सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन के सदस्यों के साथ मास्टरकार्ड, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, नेस्ले और द इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड के वरिष्ठ प्रतिनिधि तथा छत्तीसगढ़ के 7 सदस्यीय और हरियाणा के 26 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने भी सहभागिता की।

यह आयोजन भारतीय राज्यों और सिंगापुर के व्यावसायिक समुदाय के बीच निवेश, व्यापार और दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी को लेकर संवाद का महत्वपूर्ण मंच बना।

मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ को तेजी से उभरते निवेश गंतव्य के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने प्रदेश की प्रगतिशील औद्योगिक नीति, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए किए गए सुधारों तथा एमएसएमई, स्टार्टअप और मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में उपलब्ध व्यापक अवसरों की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने सिंगापुर के उद्योग जगत को ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के निर्माण की यात्रा में सहभागी बनने और प्रदेश में निवेश के अवसरों का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 5 अक्टूबर को SING फोरम 2026 में सहभागिता करेंगे। इसके पश्चात 6 अक्टूबर को सिंगापुर की प्रमुख कंपनियों और निवेश संस्थानों के शीर्ष नेतृत्व के साथ आयोजित सीईओ राउंडटेबल में छत्तीसगढ़ की निवेश संभावनाओं और आर्थिक साझेदारी के अवसरों पर विस्तृत चर्चा करेंगे।

’आईईडी विस्फोटों की विरह वेदना से बाहर आएगा बस्तर, पीड़ितों को मिलेंगे कृत्रिम हाथ-पैर - उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा’

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 रायपुर : उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा है कि बस्तर अब आईईडी विस्फोटों की विरह वेदना से बाहर निकलने को तैयार है। वर्षों तक नक्सल हिंसा के दौर में बस्तर के अनेक इलाकों में सड़कों, नदी-तालाबों के किनारे और स्कूलों के आसपास लगाए गए आईईडी की चपेट में सुरक्षाबलों के जवानों के साथ आम नागरिक और पशु भी आए। कई नागरिकों ने इन विस्फोटों में अपने हाथ-पैर गंवाए और आज भी दिव्यांगता के साथ कठिन जीवन जी रहे हैं। जिनकी वेदना को कम करने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और छत्तीसगढ़ शासन भी लगातार प्रयासरत है। ऐसे लोगों के जीवन की मुश्किलें कम करने के उद्देश्य से बस्तर संभाग में दो चरणों में विशाल निःशुल्क दिव्यांग सेवा शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।


पहला तीन दिवसीय शिविर 5, 6 और 7 अक्टूबर को बस्तर के जिला मुख्यालय जगदलपुर में आयोजित होगा। इसमें बस्तर, कांकेर, नारायणपुर और कोण्डागांव जिले के दिव्यांगजन भी शामिल होंगे। दूसरा शिविर 15, 16 और 17 अक्टूबर को दंतेवाड़ा में आयोजित किया जाएगा, जिसमें दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर जिले के हितग्राहियों को लाभ मिलेगा। इन शिविरों में भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर के तकनीकी सहयोग से जरूरत के अनुसार कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे।

’जगदलपुर शिविर के लिए 2,953 दिव्यांगजन चिन्हांकित’

शिविर की तैयारियां बड़े स्तर पर की जा रही हैं। उपलब्ध विभागीय विवरण के अनुसार जगदलपुर में आयोजित होने वाले शिविर के लिए चार जिलों में कुल 2,953 दिव्यांगजन चिन्हांकित किए गए हैं। इनमें बस्तर के 1,570, कोण्डागांव के 1,080, कांकेर के 236 और नारायणपुर के 67 दिव्यांगजन शामिल हैं।

समाज कल्याण विभाग के सहयोग से दिव्यांगों की अन्य सहायक उपकरण जैसे श्रवण यंत्र, वैशाखी, स्मार्ट छड़ी, वॉकिंग स्टिक, छड़ी, व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, कैलिपर्स एवं दृष्टिबाधित दिव्यांगजनों के लिए उपयोगी उपकरणों का भी वितरण किया जाएगा।

’आईईडी पीड़ितों को कृत्रिम हाथ-पैर देकर जीवन आसान करने का प्रयास’

उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि आईईडी किसी को पहचानता नहीं था। उसकी चपेट में कभी जवान आए, कभी आम नागरिक और कभी पशु। जिन नागरिकों ने विस्फोटों में अपने पैर या हाथ गंवाए, उनका जीवन बच तो गया, लेकिन उन्हें वर्षों से कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। अब प्रयास है कि ऐसे प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचकर उसकी जरूरत के अनुरूप कृत्रिम अंग उपलब्ध कराया जाए।

’आईईडी मुक्त बस्तर के साथ ही आईईडी के प्रभावितों के साथ भी सरकार’

शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने नक्सलवाद की समाप्ति के बाद ना सिर्फ बस्तर को आईईडी के भय से मुक्त कराने बल्कि आईईडी से प्रभावितों के साथ भी खड़ी है। शिविर में आईईडी विस्फोट से दिव्यांग हुए नागरिकों को विशेष रूप से चिन्हांकित कर उनकी आवश्यकता के अनुसार कृत्रिम पैर (जयपुर फुट), कृत्रिम हाथ तथा अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके साथ ही अन्य कारणों से दिव्यांग हुए लोग भी शिविर का लाभ ले सकेंगे। विशेषज्ञों द्वारा परीक्षण और नाप लेकर आवश्यकता के अनुसार कृत्रिम अंग तैयार करने तथा पुराने अथवा क्षतिग्रस्त कृत्रिम अंगों की मरम्मत की व्यवस्था भी शिविर में रखे जाने की जानकारी सामने आई है।

’ग्राम पंचायत से लेकर जिला स्तर तक पंजीयन की व्यवस्था’

उप मुख्यमंत्री शर्मा ने बस्तर संभाग के दिव्यांगजनों और विशेष रूप से आईईडी विस्फोट पीड़ितों से शिविर में पहुंचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि हितग्राही अपने जिले के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। ग्राम सभाओं में भी ऐसे हितग्राहियों के नाम ग्राम पंचायत सचिव के माध्यम से पंजीयन कर जनपद और जिला पंचायत तक पहुंचाई जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी कारणवश पूर्व पंजीयन नहीं हो पाया हो तो जरूरतमंद व्यक्ति सीधे शिविर में भी पहुंचें। शिविर में आने वाले हितग्राहियों के भोजन और ठहरने की व्यवस्था की जाएगी।

उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि इन दोनों शिविरों के माध्यम से प्रयास है कि समूचे बस्तर में आईईडी विस्फोटों से दिव्यांग हुए लोगों तक सहायता पहुंचे और वर्षों से उनके जीवन से जुड़ी इस पीड़ा को कम किया जा सके। उन्होंने कहा कि बस्तर में आईईडी विस्फोट के इस दंश को समाप्त कर देना है।

जीएसटी में गिरफ्तारी के अधिकार पर बड़ा बदलाव संभव, 7 अक्टूबर को परिषद की बैठक में होगी चर्चा

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नई दिल्ली- वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। केंद्र सरकार जीएसटी कानून के तहत कर अधिकारियों को मिलने वाले गिरफ्तारी के अधिकार को खत्म करने या सीमित करने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर 7 अक्टूबर 2026 को होने वाली जीएसटी परिषद की बैठक में चर्चा होने की संभावना है।

यदि इस प्रस्ताव पर सहमति बनती है, तो जीएसटी से जुड़े मामलों में कर अधिकारियों की कार्रवाई और कारोबारियों के लिए कानूनी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं। हालांकि, फिलहाल यह केवल एक प्रस्ताव है और इसे अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता।

क्या है पूरा मामला?

वर्तमान जीएसटी कानून में गंभीर कर अपराधों के मामलों में कुछ परिस्थितियों में कर अधिकारियों को आरोपी को गिरफ्तार करने का अधिकार दिया गया है। केंद्रीय जीएसटी अधिनियम की धारा 69 के तहत आयुक्त कुछ गंभीर अपराधों के मामलों में गिरफ्तारी का आदेश दे सकते हैं।

इन अपराधों में फर्जी चालान जारी करना, गलत तरीके से कर क्रेडिट का लाभ लेना, कर चोरी और जानबूझकर कर से जुड़ी धोखाधड़ी जैसे गंभीर मामले शामिल हो सकते हैं।

अब सरकार इस व्यवस्था की समीक्षा कर रही है। प्रस्ताव के तहत यह विचार किया जा रहा है कि जीएसटी कानून में गिरफ्तारी की शक्ति को खत्म किया जाए या इसके इस्तेमाल का दायरा सीमित किया जाए।

7 अक्टूबर की बैठक क्यों महत्वपूर्ण?

जीएसटी परिषद की 7 अक्टूबर को होने वाली बैठक इस मुद्दे पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बैठक में केंद्र और राज्यों के प्रतिनिधि प्रस्ताव पर चर्चा कर सकते हैं।

यदि परिषद इस बदलाव पर सहमति देती है, तो इसके बाद जीएसटी कानून में आवश्यक संशोधन की प्रक्रिया शुरू करनी होगी। इसके लिए संसद में संबंधित विधेयक या संशोधन प्रस्ताव लाया जा सकता है।

यानी केवल जीएसटी परिषद की बैठक में चर्चा होने से नियम तुरंत नहीं बदलेंगे। इसके लिए आगे की कानूनी प्रक्रिया भी पूरी करनी होगी।

अभी क्या है गिरफ्तारी का प्रावधान?

मौजूदा व्यवस्था में गंभीर जीएसटी अपराधों के मामले में गिरफ्तारी का प्रावधान मौजूद है। हालांकि, हर कर विवाद या कर संबंधी गलती में गिरफ्तारी नहीं की जाती।

गंभीर अपराधों की जांच, उपलब्ध सबूत और मामले की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ही गिरफ्तारी की कार्रवाई की जाती है। सरकार की ओर से अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि गिरफ्तारी की शक्ति का इस्तेमाल उचित मामलों में ही किया जाए।

कारोबारियों को क्या फायदा हो सकता है?

यदि गिरफ्तारी के अधिकार को सीमित या समाप्त करने का प्रस्ताव लागू होता है, तो जीएसटी से जुड़े कई मामलों में कारोबारियों को राहत मिल सकती है।

खासकर ऐसे मामलों में जहां विवाद कर की गणना, रिटर्न में गलती, दस्तावेजों की कमी या अन्य अनुपालन संबंधी मुद्दों से जुड़ा हो, वहां कार्रवाई का जोर आपराधिक प्रक्रिया के बजाय कर निर्धारण, ब्याज और जुर्माने जैसी प्रक्रियाओं पर हो सकता है।

हालांकि, प्रस्ताव लागू होने के बाद इसका वास्तविक प्रभाव उसके अंतिम स्वरूप पर निर्भर करेगा।

क्या कर चोरी करने वालों पर कार्रवाई बंद हो जाएगी?

नहीं। गिरफ्तारी के प्रावधान में बदलाव का मतलब यह नहीं है कि गंभीर कर चोरी या धोखाधड़ी के मामलों में सरकार कार्रवाई नहीं कर पाएगी।

जानबूझकर की गई बड़ी कर चोरी, फर्जी दस्तावेज, फर्जी कंपनियों या संगठित कर धोखाधड़ी जैसे मामलों में कानून के तहत कार्रवाई की व्यवस्था बनी रह सकती है। सरकार का उद्देश्य गंभीर अपराधों पर कार्रवाई जारी रखते हुए गिरफ्तारी की शक्ति के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट व्यवस्था तैयार करना बताया जा रहा है।

जीएसटी व्यवस्था में और भी बदलाव संभव

गिरफ्तारी के अधिकार की समीक्षा जीएसटी व्यवस्था में किए जा रहे व्यापक सुधारों का हिस्सा हो सकती है। इसके अलावा कर अनुपालन को आसान बनाने, पंजीकरण प्रक्रिया, कर वापसी, दंड और अन्य प्रक्रियाओं को सरल बनाने से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है।

सरकार का प्रयास जीएसटी व्यवस्था को कारोबारियों के लिए सरल बनाने के साथ-साथ कर चोरी और धोखाधड़ी पर प्रभावी नियंत्रण बनाए रखना है।

फिलहाल पुराने नियम ही लागू

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अभी जीएसटी कानून में गिरफ्तारी का मौजूदा प्रावधान लागू है। 7 अक्टूबर की बैठक में प्रस्ताव पर चर्चा होने के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

यदि जीएसटी परिषद प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो उसके बाद कानून में संशोधन की प्रक्रिया शुरू होगी। जब तक संशोधित कानून आधिकारिक रूप से लागू नहीं हो जाता, तब तक मौजूदा नियम ही प्रभावी रहेंगे।

निष्कर्ष

जीएसटी में गिरफ्तारी के अधिकार को लेकर प्रस्तावित बदलाव करदाताओं और कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। 7 अक्टूबर को होने वाली जीएसटी परिषद की बैठक में इस मुद्दे पर होने वाली चर्चा पर सभी की नजर रहेगी। बैठक के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि गिरफ्तारी के मौजूदा प्रावधान में वास्तव में क्या बदलाव किए जाते हैं।


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