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चरित्र विवाद में दरिंदगी, दो सहेलियों ने महिला की बेरहमी से हत्या

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 गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से एक सनसनीखेज और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां चरित्र पर सवाल उठाने से नाराज दो महिलाओं ने मिलकर अपनी ही सहेली की बेरहमी से हत्या कर दी। घटना मैनपुर ब्लॉक के शोभा थाना क्षेत्र की है।


2 जनवरी को ग्राम गरीबा के पास स्थित झोपड़ी में 37 वर्षीय सुमित्रा नेताम का शव मिला। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि महिला के साथ पहले मारपीट की गई और फिर उसकी हत्या कर दी गई। मृतका और दोनों आरोपी महिलाएं आपस में सहेलियां थीं तथा एक साथ मजदूरी का काम करती थीं।

पुलिस के अनुसार सुमित्रा मूल रूप से ओडिशा की रहने वाली थी। पति से अलग होने के बाद वह पिछले दो वर्षों से ग्राम गरीबा के बाहर झोपड़ी में रहकर मजदूरी कर जीवनयापन कर रही थी। इसी दौरान उसका विवाद गांव की ही सुगतिन नेताम (36) और ईतवारिन बाई (46) से चल रहा था।

आरोप है कि सुमित्रा गांव में दोनों महिलाओं के चरित्र को लेकर अपमानजनक टिप्पणियां करती थी, जिससे उनके पारिवारिक जीवन में तनाव बढ़ गया था। इसी रंजिश के चलते दोनों महिलाओं ने सुमित्रा को सबक सिखाने की योजना बनाई।

2 जनवरी की दोपहर दोनों आरोपी सुमित्रा की झोपड़ी पर पहुंचीं। वहां कहासुनी के बाद उन्होंने उसके हाथ-पैर बांध दिए और उसके साथ गंभीर रूप से मारपीट की। दर्द और यातना के कारण सुमित्रा की मौके पर ही मौत हो गई। झोपड़ी आबादी से दूर होने के कारण किसी को समय पर जानकारी नहीं मिल सकी। वारदात के बाद आरोपी महिलाएं मौके से फरार हो गईं।

शाम को ग्रामीणों को घटना की जानकारी मिली। पहले मामले को आपसी स्तर पर दबाने का प्रयास किया गया, लेकिन विरोध बढ़ने पर 3 जनवरी को पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पंचनामा कार्रवाई कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण हृदय गति रुकना बताया गया है। डॉक्टरों के अनुसार सीने पर दबाव और अत्यधिक मारपीट के चलते हार्ट फेल हुआ। एडिशनल एसपी धीरेंद्र पटेल ने बताया कि पूछताछ में दोनों आरोपियों ने अपराध स्वीकार कर लिया है।

फिलहाल पुलिस ने दोनों महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया है। हत्या में प्रयुक्त डंडों समेत अन्य साक्ष्य जब्त किए जा रहे हैं। थाना प्रभारी नकुल सिदार ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

परंपरा, पहचान और गर्व का उत्सव : बस्तर पण्डुम 2026 में दिखेगा जनजातीय वैभव

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 रायपुर : बस्तर पण्डुम छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र का एक प्रमुख सांस्कृतिक, सामुदायिक और प्राकृतिक उत्सव है, जो जनजातीय परंपराओं, लोक कलाओं और जीवन शैली को संरक्षित व प्रदर्शित करता है। जिसमें पारंपरिक नृत्य, संगीत (मांदर-बांसुरी), वेशभूषा, लोक शिल्प (काष्ठ/बांस/धातु) और पारंपरिक खान-पान का प्रदर्शन किया जाएगा। यह उत्सव बस्तर की आत्म-अस्मिता का प्रतीक है, जो स्थानीय कलाकारों को मंच देने के साथ-साथ युवाओं को उनकी जड़ों से जोड़ता है। विभिन्न अंचलों से आए प्रतिभागियों ने बस्तर की 12 पारंपरिक सांस्कृतिक विधाओं का प्रदर्शन करेंगें।


इस वर्ष 54 हजार से अधिक प्रतिभागियों का पंजीयन

इस वर्ष के आयोजन ने लोकप्रियता के पुराने सभी पैमाने ध्वस्त कर दिए हैं और यह केवल एक प्रतियोगिता न रहकर अब लोक संस्कृति के एक विशाल उत्सव का रूप ले चुका है। आँकड़ों पर नजर डालें तो यह आयोजन इस बार एक ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। वर्ष 2025 में जहाँ विकासखंड स्तर पर आयोजित प्रतियोगिताओं में 15,596 प्रतिभागियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी, वहीं इस वर्ष यह आँकड़ा तीन गुना से भी अधिक बढ़कर 54,745 तक पहुँच गया है। बस्तर के लोग अपनी जड़ों, परंपराओं और लोक कलाओं को सहेजने के लिए कितने जागरूक और उत्साहित हैं। विशेष रूप से दन्तेवाड़ा जिले ने 24,267 पंजीयन के साथ पूरे संभाग में सर्वाधिक भागीदारी का रिकॉर्ड बनाया है, जिसके बाद कांकेर, बीजापुर और सुकमा जैसे जिलों ने भी हजारों की संख्या में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई है।


समृद्ध जनजातीय संस्कृति विश्व पटल पर अपनी छाप छोड़ने तैयार

बस्तर की माटी की खुशबू और यहाँ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति एक बार फिर विश्व पटल पर अपनी छाप छोड़ने को तैयार है। संभाग स्तरीय बस्तर पण्डुम 07 से 09 फरवरी 2026 तक आयोजित होने वाी है, जिसके लिए अंचल के निवासियों में अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिल रहा है। इस भारी उत्साह के बीच, अब सभी की निगाहें 07 से 09 फरवरी के बीच होने वाली संभाग स्तरीय प्रतियोगिताओं पर टिकी हैं। जिला स्तर की कड़ी प्रतिस्पर्धा से जीत कर आए 84 दल और उनके 705 चयनित कलाकार इस दौरान अपनी कला की जादू बिखरेंगे। इन तीन दिनों में मुख्य आकर्षण का केंद्र रहेगा जनजातीय नृत्य की थाप, पारंपरिक गीतों की गूंज और नाटकों का मंचन ।


65 कलाकार पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन छेड़ेंगे

प्रतियोगिता में कुल 12 अलग-अलग विधाओं का प्रदर्शन किया जाएगा, जिसमें सर्वाधिक 192 कलाकार जनजातीय नृत्य में और 134 कलाकार जनजातीय नाटक में अपना हुनर दिखाएंगे। यह मंच केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं होगा, बल्कि यह बस्तर के ज्ञान, कला और स्वाद का एक अनुपम संगम होगा। जहाँ एक ओर 65 कलाकार पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन छेड़ेंगे, वहीं दूसरी ओर 56 प्रतिभागी लजीज जनजातीय व्यंजनों की खुशबू बिखेरेंगेे। इसके अतिरिक्त बस्तर की दुर्लभ वन औषधियों, चित्रकला, शिल्प कला, आभूषण और आंचलिक साहित्य का प्रदर्शन भी किया जाएगा, जो नई पीढ़ी को अपनी विरासत से रूबरू कराएगा।

संभाग स्तर पर 340 महिलाएं अपनी कौशल का करेंगी प्रदर्शन

इस आयोजन की एक और सबसे खूबसूरत तस्वीर मातृशक्ति की बढ़ती भागीदारी है। संभाग स्तर पर पहुँचने वाली 705 प्रतिभागियों में महिला और पुरुष कलाकारों की संख्या में गजब का संतुलन देखने को मिल रहा है, जिसमें 340 महिलाएं और 365 पुरुष शामिल हैं। यह भागीदारी बताती है कि बस्तर की संस्कृति को आगे ले जाने और उसे संरक्षित करने में यहाँ की महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। कुल मिलाकर बस्तर पण्डुम 2026 अपनी भव्यता और जन-भागीदारी के साथ एक अविस्मरणीय आयोजन की ओर अग्रसर है।

भारत-किर्गिस्तान संयुक्त विशेष बल अभ्यास “खंजर” (KHANJAR) का 13वाँ संस्करण असम के मिसमारी में शुरू

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04 से 17 फरवरी 2026 तक आयोजित होने वाला भारत-किर्गिस्तान संयुक्त विशेष बल अभ्यास “खंजर” (KHANJAR) का 13वाँ संस्करण असम के मिसमारी में प्रारंभ हो गया है। यह अभ्यास वार्षिक प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जिसे भारत और किर्गिस्तान में बारी-बारी से आयोजित किया जाता है। पिछले संस्करण का आयोजन मार्च 2025 में किर्गिस्तान में किया गया था।

भारतीय सेना की 20 सदस्यीय टुकड़ी पैराशूट रेजिमेंट (विशेष बल) के जवानों द्वारा प्रतिनिधित्व की गई है, जबकि किर्गिस्तान की समान संख्या में आईएलबीआरआईएस विशेष बल ब्रिगेड के जवान हिस्सा ले रहे हैं।

अभ्यास का उद्देश्य शहरी और पर्वतीय क्षेत्रों में आतंकवाद विरोधी और विशेष बल संचालन के सर्वोत्तम अभ्यास और अनुभवों का आदान-प्रदान करना है। इसके अलावा, स्नाइपिंग, जटिल भवन अभियानों और पर्वतीय कौशल जैसे उन्नत विशेष बल प्रशिक्षण को भी विकसित करने पर ध्यान दिया जाएगा।

खंजर अभ्यास दोनों देशों को अपनी रक्षा साझेदारी को मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है और अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद व उग्रवाद जैसी साझा चुनौतियों का सामना करने में सहयोग को बढ़ावा देता है। यह अभ्यास भारत और किर्गिस्तान की क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को भी पुष्ट करता है।

भारतीय नौसेना के प्रशिक्षण पोत आईएनएस सुदर्शिनी ने ओमान के सलालाह बंदरगाह पर किया आगमन

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भारतीय नौसेना का पाल नौसैनिक प्रशिक्षण पोत आईएनएस सुदर्शिनी 02 फरवरी 2026 को ओमान के सलालाह बंदरगाह पर पहुंचा, जो उसके प्रतिष्ठित लोकायन 26 अंतरमहासागरीय अभियान का पहला अंतरराष्ट्रीय पोर्ट कॉल है। ओमान में आगमन इस दस महीने लंबे अभियान में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जिसका उद्देश्य भारत की समृद्ध समुद्री विरासत को प्रदर्शित करना और अंतरराष्ट्रीय समुद्री सहयोग को बढ़ावा देना है।

आईएनएस सुदर्शिनी ने अपना अभियान कोच्चि से 20 जनवरी 2026 को शुरू किया, और अरब सागर की मौसमी हवाओं के बीच पहला चरण पूरा किया। यह पोर्ट कॉल भारत और ओमान के बीच गहरे समुद्री संबंधों और रणनीतिक साझेदारी को दर्शाता है। तीन दिवसीय दौरे के दौरान, रॉयल नेवी ऑफ ओमान के साथ पेशेवर सहयोग और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा, पोत को स्कूल के बच्चों और स्थानीय निवासियों के लिए खोला जाएगा, ताकि समुद्री जागरूकता और जनसंपर्क को बढ़ावा मिले।

लोकायन 26 अभियान भारतीय नौसेना की समुद्री कूटनीति, सद्भावना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक बनकर जारी है।

जनसुविधा को प्राथमिकता: एनएच-66 पर अरिकाडी के पास अस्थायी टोल प्लाज़ा तत्काल हटाया गया

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यात्रियों की सुविधा और जनकल्याण को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने केरल के कासरगोड ज़िले में राष्ट्रीय राजमार्ग-66 (NH-66) पर अरिकाडी के पास स्थित अस्थायी टोल प्लाज़ा को तत्काल प्रभाव से हटाने का निर्णय लिया है। यह अस्थायी टोल प्लाज़ा एनएच-66 के विकास एवं रखरखाव से जुड़ी परिचालन व्यवस्थाओं के तहत स्थापित किया गया था।

इस निर्णय की औपचारिक घोषणा आज नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग तथा कॉर्पोरेट कार्य राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने की। उन्होंने कहा कि सरकार देशभर में तेज़ी से बुनियादी ढांचे का विकास करते हुए भी जनहित और नागरिकों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास की प्रक्रिया को हमेशा “ईज़ ऑफ़ लिविंग” के साथ जोड़कर देखा जाना चाहिए।

हर्ष मल्होत्रा ने बताया कि केरल में भारतीय जनता पार्टी की राज्य इकाई की ओर से अरिकाडी स्थित अस्थायी टोल प्लाज़ा को लेकर स्थानीय लोगों की समस्याओं के संबंध में मंत्रालय को अभ्यावेदन प्राप्त हुए थे। इसके बाद केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के मार्गदर्शन में मंत्रालय ने इस विषय पर विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए व्यापक समीक्षा की।

समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि अस्थायी टोल प्लाज़ा के कारण स्थानीय निवासियों को वास्तविक और गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इन परिस्थितियों को देखते हुए मंत्रालय ने तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने का निर्णय लिया और अरिकाडी के पास स्थित अस्थायी टोल प्लाज़ा पर संचालन और शुल्क वसूली को तुरंत बंद करने का फैसला किया गया।

इस निर्णय की घोषणा करते हुए हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि सुशासन की बुनियाद संवेदनशीलता और जवाबदेही पर टिकी होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फैसला स्थानीय नागरिकों द्वारा झेली जा रही वास्तविक समस्याओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

मंत्री ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और नितिन गडकरी के मार्गदर्शन में पिछले एक दशक में देश ने बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। सरकार ने संपर्क बढ़ाने और विभिन्न क्षेत्रों की आर्थिक क्षमता को सशक्त करने के लिए कई परिवर्तनकारी परियोजनाएं शुरू की हैं।

हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि सरकार एक ऐसे भविष्य-तैयार भारत के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है, जहां विकास के साथ-साथ करुणा और जनकल्याण भी समान रूप से प्रतिबिंबित हों। अरिकाडी के पास अस्थायी टोल प्लाज़ा को हटाने का निर्णय जन-सुनवाई और जनहित में त्वरित कार्रवाई का एक और उदाहरण है, जो यह सुनिश्चित करता है कि विकास का लाभ अंततः आम नागरिकों तक पहुंचे।

अनुसंधान, विकास और नवाचार को नई गति: आरडीआई फंड के तहत टीडीबी की पहली ओपन कॉल लॉन्च

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मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) फंड के अंतर्गत प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB) की पहली ओपन कॉल का शुभारंभ किया। यह पहल अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) के तहत शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के व्यावसायीकरण को संरचित और दीर्घकालिक वित्तीय सहायता प्रदान कर भारत के नवाचार पारितंत्र को सुदृढ़ बनाना है।

इस अवसर पर संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह पहल पारंपरिक सरकारी वित्तपोषण मॉडल से एक महत्वपूर्ण और दुर्लभ बदलाव को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि अब तक सरकारें मुख्यतः परोपकार या कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के माध्यम से निजी क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करती रही हैं, जबकि निजी नवाचार को सीधे सरकारी वित्तीय समर्थन सीमित रहा है। आरडीआई फंड इस अंतर को पाटने का प्रयास है, जिससे निजी उद्यमों को उन क्षेत्रों में प्रौद्योगिकियों को विस्तार देने में सहायता मिलेगी, जो अब तक मुख्यतः सार्वजनिक क्षेत्र तक सीमित थे।

मंत्री ने बताया कि अंतरिक्ष और परमाणु जैसे रणनीतिक क्षेत्रों को निजी भागीदारी के लिए खोलने से दशकों पुरानी परंपराओं में बदलाव आया है। आरडीआई फंड इसी परिवर्तन को समर्थन देने के लिए तैयार किया गया है, जो वित्तीय जोखिम को कम करते हुए जवाबदेही भी सुनिश्चित करता है। यह फंड दीर्घकालिक, किफायती वित्तपोषण प्रदान करता है और इसमें जोखिम साझा करने के लिए इक्विटी-लिंक्ड विकल्प भी शामिल हैं, जिससे जिम्मेदार व्यावसायीकरण को बढ़ावा मिलेगा।

डॉ. सिंह ने जानकारी दी कि आरडीआई फंड का कुल कोष ₹1 लाख करोड़ है। इसके अंतर्गत लगभग 2 से 4 प्रतिशत की रियायती ब्याज दर पर 15 वर्ष तक की अवधि के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, जिसमें मोरेटोरियम का प्रावधान भी शामिल है। यह ढांचा प्रौद्योगिकी डेवलपर्स के लिए पूंजी तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने के साथ-साथ वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए तैयार किया गया है।

पहली कॉल के तहत प्राप्त प्रतिक्रिया का उल्लेख करते हुए मंत्री ने बताया कि लगभग 191 प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें से अधिकांश निजी क्षेत्र से आए हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रतिक्रिया नवाचार-आधारित विकास को समर्थन देने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता पर निजी उद्योग के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है। साथ ही उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आवेदनों को योजना की मूल भावना के अनुरूप होना चाहिए और धनराशि का उपयोग वास्तविक प्रौद्योगिकी विकास और विस्तार के लिए किया जाना चाहिए।

कार्यक्रम में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार पारितंत्र से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी और हितधारक उपस्थित रहे। मंच पर प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड के सचिव राजेश पाठक और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो. अभय करंदीकर भी मौजूद थे।

कार्यक्रम में बताया गया कि आरडीआई फंड के तहत टीडीबी की पहली कॉल उन परियोजनाओं पर केंद्रित है, जो टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल (TRL) 4 या उससे ऊपर की अवस्था में हैं। वित्तीय सहायता सेकेंड लेवल फंड मैनेजर्स (SLFMs) के माध्यम से ऋण, इक्विटी या हाइब्रिड साधनों के रूप में प्रदान की जाएगी। किसी भी परियोजना के लिए अधिकतम 50 प्रतिशत तक का वित्तपोषण उपलब्ध होगा, जबकि शेष राशि कंपनियों या निजी निवेशकों द्वारा वहन की जाएगी।

इस फंडिंग व्यवस्था की एक प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें किसी प्रकार की जमानत, व्यक्तिगत या कॉर्पोरेट गारंटी की आवश्यकता नहीं होगी। प्रस्तावों का मूल्यांकन वैज्ञानिक, तकनीकी, वित्तीय और व्यावसायिक आधार पर किया जाएगा तथा मूल्यांकन और धनराशि निर्गमन के लिए स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की गई है। यह योजना अनुदान (ग्रांट) आधारित नहीं है, बल्कि टिकाऊ और व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य प्रौद्योगिकियों के विस्तार पर केंद्रित है।

उल्लेखनीय है कि आरडीआई फंड को जुलाई 2025 में केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिली थी और नवंबर 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका शुभारंभ किया था। यह पहल स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं के निर्माण और भारत की नवाचार-आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दीर्घकालिक दृष्टि का हिस्सा है।

कार्यक्रम के दौरान आरडीआई फंड के तहत टीडीबी की पहली ओपन कॉल का औपचारिक शुभारंभ किया गया। डॉ. जितेंद्र सिंह ने नवोन्मेषकों, उद्योग जगत और मीडिया से आह्वान किया कि वे इस पहल की जानकारी व्यापक रूप से प्रसारित करें, ताकि देशभर के पात्र उद्यम भारत की प्रौद्योगिकी विकास यात्रा में सक्रिय रूप से भाग ले सकें।

प्लास्टिक उद्योग में रोजगार और कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए डीसीपीसी प्रतिबद्ध : सचिव निवेदिता शुक्ला वर्मा

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रसायन एवं पेट्रोकेमिकल्स विभाग (DCPC) की सचिव निवेदिता शुक्ला वर्मा ने कहा कि डीसीपीसी युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करने और कौशल उन्नयन को बढ़ावा देने वाले संगठनों को हरसंभव सहयोग देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

उन्होंने यह बात नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित एक जॉब फेयर के दौरान ऑल इंडिया प्लास्टिक मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (AIPMA) के प्रतिनिधियों से बातचीत करते हुए कही। सचिव ने आश्वासन दिया कि इस प्रकार की रचनात्मक गतिविधियों में डीसीपीसी की ओर से हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी।

निवेदिता शुक्ला वर्मा ने बताया कि विभाग रोजगार मेलों और कौशल विकास कार्यक्रमों जैसी पहलों का निरंतर समर्थन करता आ रहा है। उन्होंने कहा कि विभाग की ओर से केंद्रीय पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (CIPET) युवाओं के कौशल विकास पर विशेष जोर दे रहा है और उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षण पद्धतियों में बदलाव कर रहा है।

सचिव ने यह भी उल्लेख किया कि कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भारत से छात्रों की भर्ती कर रही हैं और बदलती औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल एवं योग्यताओं को उन्नत करना अत्यंत आवश्यक हो गया है।

AIPMA जॉब फेयर सीज़न 2026 का आयोजन रसायन एवं पेट्रोकेमिकल्स विभाग (DCPC) द्वारा ऑल इंडिया प्लास्टिक्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (AIPMA) के सहयोग से तथा CIPET के समर्थन से किया गया। इस अवसर पर उद्घाटन समारोह की मुख्य अतिथि डीसीपीसी की सचिव निवेदिता शुक्ला वर्मा रहीं।

कार्यक्रम में दीपक मिश्रा, संयुक्त सचिव (पेट्रोकेमिकल्स), डीसीपीसी; प्रो. (डॉ.) शिशिर सिन्हा, महानिदेशक, CIPET; मर्सी एपाओ, संयुक्त सचिव, एमएसएमई मंत्रालय तथा उद्योग जगत के कई प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

इस जॉब फेयर में प्लास्टिक उद्योग की रोजगार क्षमता को रेखांकित किया गया, स्किलिंग और अपस्किलिंग के महत्व पर जोर दिया गया तथा उद्योग–शिक्षा जगत के बीच सहयोग को मजबूत करने में AIPMA की भूमिका को प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम में 30 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने भाग लिया, जिससे यह प्लास्टिक उद्योग के सबसे बड़े रोजगार मेलों में से एक बन गया।

ड्रोन परीक्षण एवं प्रमाणन में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम, एनटीएच और एसटीक्यूसी के बीच समझौता

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मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत और विज़न 2047 के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ करते हुए, नेशनल टेस्ट हाउस (NTH) ने भारत को सुरक्षित, विश्वसनीय और प्रमाणित ड्रोन प्रौद्योगिकियों का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है।

इसी क्रम में नेशनल टेस्ट हाउस (NTH) ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अंतर्गत मानकीकरण परीक्षण एवं गुणवत्ता प्रमाणन निदेशालय (STQC) – इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्रीय परीक्षण प्रयोगशाला (उत्तर) [ERTL (North)] के साथ सरकार-से-सरकार सहयोग स्थापित किया है। इस सहयोग के तहत ड्रोन के लिए इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंटरफेरेंस (EMI) और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कम्पैटिबिलिटी (EMC) परीक्षण किए जाएंगे, जिससे भारत के ड्रोन परीक्षण और प्रमाणन ढांचे को और मजबूती मिलेगी।

यह सहयोग ड्रोन नियम, 2021 तथा मानवरहित विमान प्रणालियों के लिए प्रमाणन योजना (CSUAS), 2022 के तहत एक महत्वपूर्ण नियामक आवश्यकता को पूरा करता है और सुरक्षित, भरोसेमंद तथा वैश्विक मानकों के अनुरूप ड्रोन प्रणालियों के प्रमाणन की भारत की क्षमता को सशक्त करेगा।

इस संबंध में समझौता ज्ञापन (MoU) पर 2 फरवरी 2026 को हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर उपभोक्ता कार्य विभाग की सचिव निधि खरे, नेशनल टेस्ट हाउस के महानिदेशक डॉ. आलोक कुमार श्रीवास्तव, एसटीक्यूसी निदेशालय के वैज्ञानिक ‘जी’ विवेक कश्यप तथा ईआरटीएल (उत्तर) के निदेशक एवं वैज्ञानिक ‘एफ’ प्रदीप गुंज्याल उपस्थित रहे।

समझौते के तहत ड्रोन एवं उनके उप-प्रणालियों का EMI/EMC तथा इम्युनिटी परीक्षण ईआरटीएल (उत्तर) में आईईसी 61000 / आईएस 14700 मानकों के अनुसार किया जाएगा, जबकि अन्य परीक्षण एनटीएच द्वारा अपने परिसरों में संपन्न किए जाएंगे। इस सहयोग से तैयार परीक्षण रिपोर्ट्स को टाइप सर्टिफिकेशन प्रक्रिया में सीधे जोड़ा जाएगा, जिससे विशेषकर स्टार्टअप्स और एमएसएमई को एक पारदर्शी, सरल, विश्वसनीय और सरकारी समर्थन वाला प्रमाणन मार्ग उपलब्ध होगा।

यह साझेदारी महंगे परीक्षण अवसंरचना की अनावश्यक पुनरावृत्ति से बचाते हुए राष्ट्रीय संसाधनों के बेहतर उपयोग को सुनिश्चित करती है तथा ड्रोन सुरक्षा और विश्वसनीयता के लिए भारत के नियामक ढांचे को मजबूत बनाती है। साथ ही, एनटीएच के माध्यम से प्रमाणित ड्रोन अंतरराष्ट्रीय मानकों जैसे IEC/ISO, MIL-STD, ASTM और RTCA के अनुरूप होंगे, जिससे भारतीय ड्रोन की वैश्विक स्वीकार्यता बढ़ेगी।

सरकारी सुविधाओं के माध्यम से कम लागत पर विश्वस्तरीय ड्रोन परीक्षण और प्रमाणन उपलब्ध होने से कृषि, लॉजिस्टिक्स, स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन, अवसंरचना निगरानी और स्मार्ट सिटी जैसे क्षेत्रों में नवाचार को नई गति मिलेगी।

एनटीएच और एसटीक्यूसी–ईआरटीएल (उत्तर) के बीच यह सहयोग भारत के लिए एक मजबूत, स्वदेशी और भविष्य के अनुरूप ड्रोन प्रमाणन पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

उल्लेखनीय है कि नेशनल टेस्ट हाउस को डीजीसीए और क्यूसीआई द्वारा सीएसयूएएस के तहत प्रमाणन निकाय / अधिकृत परीक्षण संस्था के रूप में मान्यता प्राप्त है और यह ड्रोन सहित उभरती प्रौद्योगिकियों की सुरक्षा, गुणवत्ता और नियामक अनुपालन सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा रहा है।

1912 में स्थापित नेशनल टेस्ट हाउस, भारत सरकार का एक प्रमुख वैज्ञानिक एवं परीक्षण संस्थान है, जो उपभोक्ता कार्य विभाग, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है। देशभर में एनएबीएल-मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं के नेटवर्क के साथ एनटीएच विभिन्न क्षेत्रों में परीक्षण, निरीक्षण, गुणवत्ता आश्वासन और प्रमाणन सेवाएं प्रदान करता है।

आईआईसीए ने आईईएस और आईटीएस अधिकारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया

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कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय कॉरपोरेट कार्य संस्थान (IICA) ने भारतीय आर्थिक सेवा (IES) और भारतीय व्यापार सेवा (ITS) के 21 अधिकारियों के लिए कंपनी अधिनियम, प्रतिस्पर्धा कानून तथा दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC) पर एक विशेषीकृत प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम 2 से 6 फरवरी 2026 तक हरियाणा के आईएमटी मानेसर स्थित आईआईसीए परिसर में आयोजित किया गया।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य अधिकारी प्रशिक्षुओं को कंपनी अधिनियम, प्रतिस्पर्धा कानून, कॉरपोरेट वित्त और दिवाला कानून जैसे प्रमुख विषयों के प्रति संवेदनशील बनाना तथा उनके पेशेवर दायित्वों के अनुरूप नियामक और नीति संबंधी समझ को सुदृढ़ करना है। कार्यक्रम के माध्यम से प्रतिभागियों को कॉरपोरेट प्रशासन, नियामक ढांचे और व्यावहारिक नीति दृष्टिकोण की गहन जानकारी प्रदान की जा रही है।

कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों को कंपनी मामलों के प्रबंधन, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) की शक्तियों और कार्यों, प्रतिस्पर्धा विरोधी समझौते, प्रभुत्व के दुरुपयोग, कॉरपोरेट वित्त, ऋण और चूक, दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP), एनसीएलटी और एनसीएलएटी की भूमिका, डेटा आधारित निर्णय निर्माण तथा विधायी मंशा जैसे विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में देश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने सहभागिता की, जिनमें सुधाकर शुक्ला (पूर्व सदस्य, IBBI), ज्ञानेश्वर कुमार सिंह (महानिदेशक एवं सीईओ, IICA), धनेंद्र कुमार (पूर्व अध्यक्ष, CCI), जी.पी. मदान, समीर गांधी, डॉ. एम.एस. साहू, डॉ. ऑगस्टीन पीटर, डॉ. नवीन सिरोही सहित कई वरिष्ठ विधि एवं नीति विशेषज्ञ शामिल रहे।

कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन आईआईसीए के महानिदेशक एवं सीईओ ज्ञानेश्वर कुमार सिंह ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय देश की सबसे बड़ी नियामक संरचनाओं में से एक का संचालन करता है और ‘ट्रस्ट आधारित विनियमन’ की अवधारणा पर बल दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत में सुधाकर शुक्ला ने भारत में ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस के तीन प्रमुख स्तंभ—प्रवेश की स्वतंत्रता, संचालन की स्वतंत्रता और निकास की स्वतंत्रता—पर प्रकाश डाला और इन्हें कंपनी अधिनियम, प्रतिस्पर्धा अधिनियम तथा दिवाला संहिता से जोड़ा।

उद्घाटन सत्र को धनेंद्र कुमार, भारत के पहले प्रतिस्पर्धा आयोग अध्यक्ष, के संबोधन ने और भी समृद्ध बनाया। उन्होंने एमआरटीपी अधिनियम से लेकर आधुनिक प्रतिस्पर्धा कानून तक के विकास की यात्रा साझा की। तकनीकी सत्रों में कॉरपोरेट गवर्नेंस, निदेशकों की जिम्मेदारियों और प्रतिस्पर्धा कानून के व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तृत चर्चा हुई।

कार्यक्रम का समापन आईआईसीए के स्कूल ऑफ कॉरपोरेट लॉ एंड कॉम्पिटिशन लॉ के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्याला नारायण राव द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया गया।

भारत में अंतरिक्ष स्टार्टअप्स को लेकर सरकार की स्थिति स्पष्ट, 399 स्टार्टअप DPIIT में पंजीकृत

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भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) के पास स्टार्टअप्स के लिए कोई अलग पंजीकरण प्रक्रिया नहीं है, क्योंकि यह उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) की भूमिका की पुनरावृत्ति होगी। स्टार्टअप्स इंडिया पोर्टल के अनुसार, वर्तमान में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी से जुड़े 399 स्टार्टअप्स DPIIT में पंजीकृत हैं, जिनमें उपग्रह, प्रक्षेपण यान विकास एवं अन्य अंतरिक्ष गतिविधियों से जुड़े स्टार्टअप शामिल हैं। हालांकि, IN-SPACe राज्यवार स्टार्टअप्स का डेटा संधारित नहीं करता है।

अब तक भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप्स द्वारा 7 उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण, 20 पेलोड्स का सफल लॉन्च, तथा 2 अंतरिक्ष यानों (सब-ऑर्बिटल लॉन्च) का सफल प्रक्षेपण किया जा चुका है।

निजी क्षेत्र की अंतरिक्ष गतिविधियों को सुगम और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से IN-SPACe ने 3 मई 2024 को भारतीय अंतरिक्ष नीति-2023 के क्रियान्वयन हेतु Norms, Guidelines and Procedures (NGP) अधिसूचित किए हैं। यह ढांचा निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स को अंतरिक्ष गतिविधियों की अनुमति देने के लिए एक सुव्यवस्थित, पारदर्शी और पूर्वानुमेय नियामक व्यवस्था प्रदान करता है।

सरकार भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप्स को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने में भी सक्रिय सहयोग दे रही है। भारतीय अंतरिक्ष नीति-2023 के साथ उदारीकृत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नीति अंतरिक्ष क्षेत्र में वैश्विक विस्तार के लिए वित्तीय और परिचालन सुविधा प्रदान करती है।

इसके अतिरिक्त, IN-SPACe विदेशी उद्योगों और सरकारी संस्थाओं के साथ सक्रिय रूप से संवाद कर भारतीय स्टार्टअप्स को बढ़ावा दे रहा है। अब तक 7 स्पेस डेज़ का आयोजन किया जा चुका है, साथ ही अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों जैसे इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉटिकल कांग्रेस (IAC), GSTCE सिंगापुर और केन्या स्पेस एक्सपो में भारतीय प्रतिनिधिमंडलों का नेतृत्व किया गया है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप्स ने 25 से अधिक देशों में व्यावसायिक समझौते हासिल किए हैं।

यह जानकारी केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष विभाग के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में लिखित उत्तर के माध्यम से दी।

अंतरिक्ष सुरक्षा, बीमा और मलबा प्रबंधन को सुदृढ़ कर रहा है भारत

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भारत में अंतरिक्ष गतिविधियों की बढ़ती भूमिका और निजी क्षेत्र की भागीदारी को ध्यान में रखते हुए सरकार अंतरिक्ष सुरक्षा, मलबा प्रबंधन और बीमा ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए लगातार कदम उठा रही है। देश में विभिन्न प्रकार के स्पेस इंश्योरेंस उत्पाद उपलब्ध हैं, जिन्हें भारतीय बीमा कंपनियां वैश्विक बीमाकर्ताओं, री-इंश्योरर्स, अंडरराइटर्स और ब्रोकर्स के सहयोग से प्रदान कर रही हैं। निजी संस्थाओं को उनके द्वारा किए जा रहे अंतरिक्ष अभियानों के अनुरूप उपयुक्त बीमा लेने की स्वतंत्रता दी गई है।

स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस (SSA) के बढ़ते महत्व को स्वीकार करते हुए, अंतरिक्ष संचालन की सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए ISRO System for Safe and Sustainable Space Operations Management (IS4OM) की स्थापना की गई है। यह प्रणाली अंतरिक्ष उड़ानों की सुरक्षा, अंतरिक्ष मलबा न्यूनीकरण और भीड़भाड़ वाले अंतरिक्ष वातावरण में उभरती चुनौतियों से निपटने पर केंद्रित है।

ISRO अपने सभी मिशनों में संयुक्त राष्ट्र की UN-COPUOS और Inter-Agency Space Debris Coordination Committee (IADC) द्वारा अनुशंसित अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष मलबा न्यूनीकरण दिशानिर्देशों का अधिकतम पालन करता है। इसके साथ ही, ISRO अंतरिक्ष गतिविधियों की सुरक्षा और सतत उपयोग से जुड़े वैश्विक दिशा-निर्देशों के निर्माण में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। ISRO, IADC, International Academy of Astronautics (IAA), International Organization for Standardization (ISO), International Astronautical Federation (IAF) और संयुक्त राष्ट्र के Long Term Sustainability Working Group जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों का सक्रिय सदस्य है।

भारतीय अंतरिक्ष नीति में अंतरिक्ष मलबा न्यूनीकरण और SSA क्षमताओं के निर्माण को विशेष महत्व दिया गया है। इसी दिशा में ISRO द्वारा Debris Free Space Mission (DFSM) पहल का नेतृत्व किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य वर्ष 2030 तक सभी भारतीय अंतरिक्ष अभियानों—सरकारी और गैर-सरकारी—को मलबा मुक्त बनाना है। यह पहल वैश्विक अंतरिक्ष स्थिरता प्रयासों के अनुरूप है और भारत को बाह्य अंतरिक्ष में सुरक्षा, संरक्षा और सततता को प्राथमिकता देने वाले देश के रूप में स्थापित करती है।

सरकार देश में अंतरिक्ष गतिविधियों से जुड़े निजी संस्थानों को उनके अभियानों से जुड़े जोखिमों को कवर करने के लिए पर्याप्त और उपयुक्त बीमा लेने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इसी क्रम में, “भारतीय अंतरिक्ष वस्तुओं से उत्पन्न तृतीय पक्ष क्षति के लिए राज्य की देयता से संबंधित नीति ढांचा एवं दिशानिर्देश” का एक मसौदा विभिन्न स्तरों पर परामर्श प्रक्रिया में है। इस मसौदे में, अन्य प्रावधानों के साथ-साथ, प्रक्षेपण संचालकों द्वारा तृतीय पक्ष देयता बीमा बनाए रखने का प्रावधान भी शामिल है, ताकि अंतरराष्ट्रीय संधियों और सम्मेलनों के तहत राज्य की देयता को कवर किया जा सके।

चूंकि अंतरिक्ष गतिविधियां उच्च पूंजी निवेश और जोखिम से जुड़ी होती हैं, इसलिए वैश्विक स्तर पर बीमा और री-बीमा कंपनियों द्वारा जोखिम को आपस में साझा करना एक सामान्य प्रथा है। भारत में भी इसी वैश्विक व्यवस्था के अनुरूप बीमा तंत्र उपलब्ध है।

यह जानकारी केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

वर्ष 2025 के दौरान राष्ट्रीय प्रक्षेपण एवं अंतरिक्ष अवसंरचना को सुदृढ़ करने में हुई प्रगति

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वर्ष 2025 के दौरान भारत ने प्रक्षेपण क्षमताओं, अंतरिक्ष अवसंरचना, प्रौद्योगिकी विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल कीं।

SPADEX मिशन के अंतर्गत उपग्रहों के बीच स्वायत्त डॉकिंग और अनडॉकिंग तथा पावर ट्रांसफर का सफल प्रदर्शन किया गया, जो कक्षा में सर्विसिंग क्षमताओं और अंतरिक्ष स्टेशन संचालन की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसके साथ ही SPADEX उपग्रहों ने एक-दूसरे की सफल परिक्रमा भी की। इस उपलब्धि के साथ भारत अंतरिक्ष में डॉकिंग का प्रदर्शन करने वाला विश्व का चौथा देश बन गया।

PSLV ऑर्बिटल एक्सपेरिमेंटल मॉड्यूल (POEM-04), जो PSLV-C60 / SPADEX मिशन का हिस्सा था, में इसरो, अंतरिक्ष स्टार्टअप्स और शैक्षणिक संस्थानों के कई पेलोड शामिल थे। POEM-04 ने 1000 से अधिक कक्षाओं को सफलतापूर्वक पूरा किया। इस मिशन में कक्षा में रोबोटिक आर्म, तथा सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण में बीज अंकुरण का भी प्रदर्शन किया गया।

GSLV-F15 / NVS-02 मिशन (जनवरी 2025) श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित होने वाला 100वां मिशन था। प्रक्षेपण यान ने उपग्रह को सटीक रूप से निर्धारित कक्षा में स्थापित किया।

GSLV-F16 / NISAR मिशन इसरो–नासा का पहला संयुक्त मिशन बना। पृथ्वी अवलोकन क्षेत्र में सबसे महंगे पेलोड्स में से एक, नासा का 12 मीटर अनफर्लेबल एंटीना, भारतीय सैटेलाइट बस पर एकीकृत कर भारतीय प्रक्षेपण यान से लॉन्च किया गया। NISAR, विश्व का पहला डुअल-फ्रीक्वेंसी SAR उपग्रह, अब पूर्ण रूप से परिचालन में है।

LVM3-M5 / CMS-03 मिशन के माध्यम से इसरो ने भारतीय धरती से अब तक के सबसे भारी GTO उपग्रह का प्रक्षेपण किया।

LVM3-M6 / ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 मिशन ने भारत से अब तक के सबसे भारी उपग्रह प्रक्षेपण का रिकॉर्ड बनाया। इस मिशन में S200 मोटर के लिए इलेक्ट्रो-मैकेनिकल एक्टुएशन (EMA) का सत्यापन किया गया, जिसे विश्व का सबसे शक्तिशाली स्पेस-क्वालिफाइड इलेक्ट्रिक एक्टुएशन सिस्टम माना गया है।

सरकार से श्रीहरिकोटा में तीसरे लॉन्च पैड की स्थापना हेतु वित्तीय स्वीकृति प्राप्त हुई है। इसके साथ ही कुलसेकरपट्टिनम (तमिलनाडु) में SSLV के लिए समर्पित प्रक्षेपण स्थल का निर्माण कार्य भी प्रारंभ हो चुका है।

ठोस प्रणोदक उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए श्रीहरिकोटा में 10 टन वर्टिकल मिक्सर, केरल के अलुवा में अमोनियम परक्लोरेट संयंत्र की दूसरी उत्पादन लाइन, क्रायोजेनिक टर्बोपंप परीक्षण सुविधा तथा कर्नाटक के तुमकुरु में टाइटेनियम मिश्र धातु टैंक उत्पादन सुविधा की स्थापना की गई।

इसरो ने 300 mN उच्च-थ्रस्ट विद्युत प्रणोदन प्रणाली विकसित एवं क्वालिफाई की है। नवंबर 2025 में LVM3-M5 मिशन के दौरान क्रायोजेनिक इंजन के पुनः प्रज्वलन का सफल प्रदर्शन किया गया। साथ ही बिना सहायक स्टार्ट-अप सिस्टम के गैस-जनरेटर क्रायोजेनिक इंजन की बूट-स्ट्रैप स्टार्टिंग का भी सफल परीक्षण किया गया।

इसरो ने स्वदेशी 32-बिट प्रोसेसर VIKRAM3201 विकसित किया है, जो अंतरिक्ष अनुप्रयोगों के लिए क्वालिफाई होने वाला भारत का पहला प्रोसेसर है। इसके अतिरिक्त KALPANA32 माइक्रोप्रोसेसर भी विकसित किया गया है।

स्पेस टेक्नोलॉजी इनक्यूबेशन सेंटर्स (STICs) कार्यक्रम के माध्यम से इसरो शैक्षणिक संस्थानों और युवा नवप्रवर्तकों को समर्थन दे रहा है।

इसरो ने SSLV तकनीक HAL को हस्तांतरित की है तथा लिथियम-आयन बैटरी, IMA बस, डिस्टे्रस अलर्ट सिस्टम जैसी कई तकनीकों को निजी उद्योगों को सौंपा है। अब तक 100 टेक्नोलॉजी ट्रांसफर समझौते किए जा चुके हैं।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग

वर्ष 2025 में अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ 10 सहयोग दस्तावेज़ हस्ताक्षरित किए गए।
भारत ने UNCOPUOS के दो कार्य समूहों में नेतृत्व भूमिका निभाई।
अंतरराष्ट्रीय आपदा प्रबंधन के लिए इसरो ने 2,260 से अधिक उपग्रह डेटा सेट प्राप्त किए और 725 से अधिक डेटा सेट वैश्विक उपयोग हेतु उपलब्ध कराए।

इसरो ने 2025 में इंटरनेशनल चार्टर ऑन स्पेस एंड मेजर डिज़ास्टर्स की छह माह तक सफलतापूर्वक अध्यक्षता की।

वर्ष 2026 में भारत ICG, BRICS अंतरिक्ष एजेंसियों के प्रमुखों, और इंटरनेशनल प्लैनेटरी डेटा एलायंस की बैठकों की मेज़बानी करेगा।

यह जानकारी केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय से संबद्ध राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा आज लोकसभा में लिखित उत्तर के माध्यम से दी गई।


सिरपुर की गौरवगाथा पर बनी डॉक्यूमेंट्री फिल्म की लॉन्चिंग, महोत्सव में दर्शकों की मिली वाहवाही

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महासमुंद- छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहर सिरपुर की गौरवशाली परंपरा और विरासत पर केंद्रीत लघु  डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनायी गई है। इसका विमोचन सिरपुर महोत्सव के समापन समारोह में  महासमुंद लोकसभा क्षेत्र के सांसद रूपकुमारी चौधरी, विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा की मौजूदगी में किया गया। महज चार मिनट के लघु फिल्म में सिरपुर के गौरव को बेहतरीन ढंग से प्रदर्शित किया गया है। पटकथा वरिष्ठ पत्रकार व पीपला वेलफेयर फाउंडेशन के संरक्षक आनंदराम साहू ने लिखी है। उनके द्वारा परिकल्पित इस लघु डाक्यूमेंट्री फिल्म में सिरपुर की  गाथा को आत्मकथा का रूप दिया गया है।वहीं फाउंडेशन के संयोजक महेन्द्र कुमार पटेल द्वारा  रिकार्डिंग, शूटिंग और एडिटिंग  तथा छायांकन में प्रतीक कुमार टोन्ड्रे ने अहम भूमिका निभाई है। पार्श्व स्वर आकाशवाणी-दूरदर्शन एंकर शशांक खरे नका है। पिपला अध्यक्ष दूजेराम धीवर ने बताया कि इसकी लॉन्चिंग के साथ ही दर्शकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला और डॉक्यूमेंट्री फिल्म को दर्शकों की ओर से खूब सराहना मिली।

इसमें सिरपुर के प्राचीन मंदिरों, लक्ष्मण मंदिर, गंधेश्वर नाथ महादेव मंदिर, बौद्ध विहारों, ऐतिहासिक महत्व, महानदी की निर्मल जलधारा और सांस्कृतिक वैभव को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया गया है।

लघु डॉक्यूमेंट्री फिल्म के माध्यम से सिरपुर की गौरवगाथा, उसकी ऐतिहासिक पहचान और पर्यटन की संभावनाओं को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।

महोत्सव में मौजूद अतिथियों और हजारों दर्शकों ने फिल्म की कहानी, प्रस्तुति और तकनीकी पक्ष की सराहना करते हुए इसे छत्तीसगढ़ की विरासत को सहेजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। कार्यक्रम में मौजूद जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने कहा कि ऐसी फिल्में प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहर को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में अहम् भूमिका निभाएंगी।

डॉक्युमेंट्री फिल्म के निर्माताओं ने बताया कि इस लघु फिल्म का उद्देश्य सिरपुर की पहचान को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करना है, ताकि अधिक से अधिक पर्यटक सिरपुर की ऐतिहासिक विरासत से रूबरू हो सकें। बहुत जल्दी इसका प्रसारण यूट्यूब पर भी उपलब्ध होगा। 

महोत्सव में फिल्म की स्क्रीनिंग के दौरान तालियों की गड़गड़ाहट और दर्शकों की वाहवाही ने यह साबित कर दिया कि सिरपुर की गौरगाथा लोगों के दिलों को छू गई है।

ज्ञात हो कि इससे पहले यह संस्था पौराणिक नगरी आरंग पर भी डाक्यूमेंट्री फिल्म का निर्माण किये है।जिसे राजा मोरध्वज महोत्सव आरंग महोत्सव में प्रस्तुत किया गया।जिसे मुख्यमंत्री मंत्री विष्णु देव साय, कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब सहित, सांसद, मंत्रीमंडल,व जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने सराहा।

नशा, नक्सल और नेटवर्क—तीनों पर सरकार का प्रहार, साय कैबिनेट के 9 बड़े निर्णय

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 रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में 4 फरवरी 2026 को मंत्रालय महानदी भवन में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य की सुरक्षा, रोजगार, डिजिटल कनेक्टिविटी और शहरी सुविधाओं से जुड़े 9 बड़े फैसलों पर मुहर लगी।


नशे के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए सरकार ने प्रदेश के 10 जिलों में जिला स्तरीय एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के गठन को मंजूरी दी है। इसके लिए 100 नए पद स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें रायपुर से लेकर बस्तर और सरगुजा तक के जिले शामिल हैं।

पुलिस व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए एसओजी (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) के गठन को भी हरी झंडी दी गई है। यह टीम आतंकी हमले या किसी बड़ी आपात स्थिति में तुरंत मोर्चा संभालेगी। इसके लिए 44 नए पद स्वीकृत किए गए हैं।

युवाओं के लिए बड़ी राहत की खबर यह रही कि राज्य में फ्लाइट ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (FTO) खोलने का फैसला लिया गया है। निजी सहभागिता से शुरू होने वाली इस योजना से पायलट ट्रेनिंग के साथ-साथ विमानन सेक्टर में रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।

स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ नवाचार एवं स्टार्टअप प्रोत्साहन नीति 2025-26 को मंजूरी दी गई है, जिससे राज्य को देश के बड़े इनोवेशन हब के रूप में विकसित करने की तैयारी है।

शहरी नागरिकों के लिए राहत भरा फैसला लेते हुए सरकार ने 35 पूरी हो चुकी आवासीय कॉलोनियों को नगर निगम और नगर पालिकाओं को सौंपने का निर्णय लिया है। इससे कॉलोनीवासियों को पानी, सड़क, सफाई जैसी सुविधाएं मिलेंगी और दोहरा मेंटेनेंस खर्च खत्म होगा।

नवा रायपुर अटल नगर में शासकीय विभागों के लिए एक बहुमंजिला भवन बनाने का निर्णय लिया गया है, ताकि जमीन का बेहतर उपयोग हो सके।

सिरपुर और अरपा क्षेत्र के सुनियोजित विकास को गति देने के लिए शासकीय भूमि आबंटन का अधिकार संबंधित जिले के कलेक्टर को दिया गया है। यहां भूमि मात्र 1 रुपये प्रीमियम पर दी जाएगी।

डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करने के लिए राज्य में छत्तीसगढ़ क्लाउड फर्स्ट नीति लागू करने का फैसला हुआ है, जिससे सभी सरकारी सेवाएं सुरक्षित क्लाउड सिस्टम पर शिफ्ट होंगी।

इसके साथ ही मोबाइल टावर योजना को भी मंजूरी दी गई है, जिससे दूरस्थ और नक्सल प्रभावित इलाकों में नेटवर्क पहुंचेगा और ई-गवर्नेंस सेवाओं का विस्तार होगा।

BJP में गए रवनीत सिंह बिट्टू को राहुल गांधी ने कहा ‘गद्दार’, जवाब में बिट्टू बोले- ‘देश का दुश्मन’

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 नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के बीच बुधवार को संसद परिसर के बाहर तीखी नोकझोंक देखने को मिली। इस दौरान राहुल गांधी ने भाजपा में शामिल हो चुके रवनीत बिट्टू को ‘गद्दार’ कह दिया, जिसके जवाब में बिट्टू ने राहुल गांधी को ‘देश का दुश्मन’ बताया।


यह घटना संसद के मकर द्वार के पास उस समय हुई, जब कांग्रेस सांसद लोकसभा में विपक्ष के आठ सांसदों के निलंबन के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान वहां से गुजरते हुए राहुल गांधी ने रवनीत बिट्टू की ओर इशारा करते हुए कहा—“देखो, एक गद्दार मेरे सामने से गुजर रहा है।” इसके बाद उन्होंने हाथ मिलाने की पेशकश करते हुए कहा—“नमस्ते भाई, मेरे गद्दार दोस्त। चिंता मत करो, तुम वापस आओगे।”

हालांकि, केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने हाथ मिलाने से इनकार कर दिया और पलटवार करते हुए राहुल गांधी को ‘देश का दुश्मन’ कहा। इसके साथ ही दोनों नेताओं के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। बताया जा रहा है कि इससे पहले बिट्टू ने प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस सांसदों पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि “ये ऐसे बैठे हैं जैसे इन्होंने कोई युद्ध जीत लिया हो।”

उल्लेखनीय है कि रवनीत सिंह बिट्टू ने वर्ष 2024 में कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया था, जिसके बाद से दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक तल्खी बनी हुई है।

इससे पहले दिन में बजट सत्र के दौरान लोकसभा में भारी हंगामे के चलते सदन को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा। विपक्षी दलों ने एक दिन पहले निलंबित किए गए आठ सांसदों के समर्थन में जोरदार नारेबाजी की। निलंबित सांसद संसद परिसर के बाहर “प्रधानमंत्री समझौता कर चुके हैं” लिखे पोस्टर लेकर प्रदर्शन करते नजर आए।

निलंबित सांसदों में कांग्रेस के हिबी ईडन, अमरिंदर सिंह राजा वारिंग, मणिकम टैगोर, गुरजीत सिंह औजला, प्रशांत यदाओराव पाडोले, चमाला किरण कुमार रेड्डी, डीन कुरियाकोस और सीपीआई (एम) के एस वेंकटेशन शामिल हैं। इन सांसदों को सदन की कार्यवाही में व्यवधान डालने और नियमों के उल्लंघन के आरोप में लोकसभा के शेष बजट सत्र के लिए निलंबित किया गया है।

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