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छत्तीसगढ़ में 1703 पदों पर बंपर भर्ती, कर्मचारी चयन मंडल ने जारी किया नोटिफिकेशन; 10 जनवरी 2027 को होगी लिखित परीक्षा

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर है। छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल (CGSSB), रायपुर ने समूह-2, तृतीय श्रेणी (स्नातकोत्तर एवं स्नातक स्तर) उपसमूह-02 के अंतर्गत विभिन्न विभागों के 1703 पदों पर भर्ती के लिए लिखित परीक्षा का कार्यक्रम जारी कर दिया है। मंडल द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार भर्ती परीक्षा 10 जनवरी 2027 को आयोजित की जाएगी।

10 विभागीय पदों पर होगी भर्ती

जारी विज्ञप्ति के अनुसार विभिन्न पदों का विवरण इस प्रकार है—

  1. शीघ्रलेखक (हिन्दी) – 30 पद

  2. शीघ्रलेखक (अंग्रेजी) – 03 पद

  3. शीघ्रलेखक (द्विभाषी) – 13 पद

  4. उप निरीक्षक-अ (शीघ्रलेखक), सामान्य शाखा (हिन्दी) – 34 पद

  5. डाटा एंट्री ऑपरेटर – 25 पद

  6. स्टेनो टाइपिस्ट – 23 पद

  7. सहायक ग्रेड-3 – 1206 पद

  8. पंजीयन लिपिक – 50 पद

  9. सहायक उप निरीक्षक-अ (सामान्य शाखा) – 40 पद

  10. सहायक उप निरीक्षक-अ (जिला इकाई संवर्ग) – 279 पद

कुल रिक्तियां – 1703 पद।

आवेदन की महत्वपूर्ण तिथियां

कर्मचारी चयन मंडल ने ऑनलाइन आवेदन और परीक्षा से संबंधित कार्यक्रम भी जारी कर दिया है।

  • ऑनलाइन आवेदन प्रारंभ: 5 नवंबर 2026

  • आवेदन की अंतिम तिथि: 27 नवंबर 2026, शाम 5 बजे तक

  • आवेदन में त्रुटि सुधार: 28 नवंबर से 30 नवंबर 2026, शाम 5 बजे तक

  • लिखित परीक्षा: 10 जनवरी 2027 (रविवार)

  • प्रवेश पत्र जारी होने की संभावित तिथि: 4 जनवरी 2027

दो घंटे 15 मिनट की होगी परीक्षा

जारी कार्यक्रम के अनुसार लिखित परीक्षा 10 जनवरी 2027 को सुबह 10 बजे से दोपहर 12:15 बजे तक आयोजित की जाएगी। परीक्षा के लिए प्रदेश के पांचों संभागीय मुख्यालयों में परीक्षा केंद्र निर्धारित किए गए हैं।

स्थानीय अभ्यर्थियों को मिलेगी परीक्षा शुल्क वापसी

विज्ञप्ति में दी गई जानकारी के अनुसार ऑनलाइन आवेदन करते समय अभ्यर्थियों को परीक्षा शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करना होगा। छत्तीसगढ़ शासन के नियमानुसार छत्तीसगढ़ के स्थानीय निवासी अभ्यर्थियों को परीक्षा में उपस्थित होने पर परीक्षा शुल्क वापस कर दिया जाएगा। शुल्क की वापसी उसी बैंक खाते में की जाएगी, जिससे ऑनलाइन आवेदन के दौरान भुगतान किया गया होगा।

आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है विस्तृत जानकारी

भर्ती से संबंधित विस्तृत जानकारी, ऑनलाइन आवेदन और अन्य निर्देश छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।

आधिकारिक वेबसाइट: https://cgssb.cgstate.gov.in

अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि आवेदन करने से पहले आधिकारिक विज्ञप्ति में दिए गए पात्रता मानदंड, शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा और अन्य शर्तों का ध्यानपूर्वक अध्ययन कर लें।


सोशल मीडिया कंपनियों पर केंद्र सरकार की बड़ी सख्ती की तैयारी

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Facebook, Instagram, YouTube और X की कानूनी जिम्मेदारी बढ़ सकती है।

केंद्र सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा यानी Safe Harbour Protection में बदलाव करने पर विचार कर रही है। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो सोशल मीडिया कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म पर यूजर्स द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए पहले से ज्यादा जवाबदेह होना पड़ सकता है।

इसका असर करोड़ों सोशल मीडिया यूजर्स, कंटेंट क्रिएटर्स, डिजिटल मीडिया कंपनियों और टेक्नोलॉजी सेक्टर पर पड़ सकता है।

आखिर सरकार क्या बदलना चाहती है?

इस पूरे मामले का केंद्र है Information Technology Act, 2000 की धारा 79 (Section 79)।

इस धारा के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को एक विशेष कानूनी सुरक्षा मिलती है, जिसे Safe Harbour Protection कहा जाता है।

इसका मतलब है कि अगर कोई व्यक्ति Facebook पर गलत पोस्ट करता है, Instagram पर आपत्तिजनक वीडियो डालता है या YouTube पर गैरकानूनी कंटेंट अपलोड करता है, तो सामान्यतः उस यूजर के कंटेंट के लिए प्लेटफॉर्म को सीधे जिम्मेदार नहीं ठहराया जाता, बशर्ते कंपनी कानून की निर्धारित शर्तों और उचित सावधानियों का पालन करे।

सरकार अब इसी कानूनी सुरक्षा की समीक्षा कर रही है।

सरकार का तर्क है कि सोशल मीडिया कंपनियां केवल दूसरों की पोस्ट दिखाने का काम नहीं करतीं, बल्कि उनके एल्गोरिदम यह भी तय करते हैं कि किस व्यक्ति को कौन-सा वीडियो, पोस्ट या कंटेंट ज्यादा दिखाया जाए।

इसलिए सरकार यह सवाल उठा रही है कि जब कंपनियां खुद कंटेंट की पहुंच और लोकप्रियता को प्रभावित करती हैं, तो उन्हें उसकी जिम्मेदारी से पूरी तरह अलग क्यों रखा जाए?

Safe Harbour Protection क्या है? आसान उदाहरण से समझिए

मान लीजिए:

  • किसी व्यक्ति ने Facebook पर किसी दूसरे व्यक्ति के खिलाफ झूठी और मानहानिकारक पोस्ट डाल दी।

  • किसी यूजर ने YouTube पर भ्रामक वीडियो अपलोड कर दिया।

  • किसी ने Instagram पर किसी महिला की फर्जी तस्वीर या Deepfake वीडियो डाल दिया।

ऐसी स्थिति में पोस्ट करने वाला व्यक्ति अपने कंटेंट के लिए कानूनी रूप से जिम्मेदार हो सकता है।

लेकिन मौजूदा व्यवस्था में सोशल मीडिया कंपनी को केवल इसलिए स्वतः दोषी नहीं माना जाता कि उसके प्लेटफॉर्म पर किसी यूजर ने ऐसा कंटेंट अपलोड किया है।

हालांकि यह सुरक्षा बिना शर्त नहीं है। कंपनियों को कानून के अनुसार उचित सावधानियां बरतनी होती हैं और निर्धारित परिस्थितियों में गैरकानूनी कंटेंट पर कार्रवाई करनी होती है।

प्रस्तावित बदलाव के बाद: अगर प्लेटफॉर्म अपने एल्गोरिदम के जरिए किसी कंटेंट को बढ़ावा देता है, उसकी पहुंच बढ़ाता है या उसे यूजर्स तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाता है, तो उसकी कानूनी जिम्मेदारी पर अधिक गंभीरता से विचार किया जा सकता है।

किन सोशल मीडिया कंपनियों पर पड़ेगा असर?

Facebook

यूजर्स की पोस्ट, वायरल कंटेंट और एल्गोरिदम से कंटेंट प्रमोशन पर अधिक जवाबदेही का सवाल उठेगा।

Instagram

Reels, Deepfake, फर्जी अकाउंट और आपत्तिजनक तस्वीरों से जुड़े मामलों में अधिक जिम्मेदारी आ सकती है।

YouTube

वीडियो रिकमेंडेशन, भ्रामक वीडियो और वायरल कंटेंट को बढ़ावा देने के मामलों की जांच हो सकती है।

X (Twitter)

राजनीतिक पोस्ट, भ्रामक जानकारी और एल्गोरिदम के जरिए कंटेंट की पहुंच बढ़ाने पर जवाबदेही का सवाल उठ सकता है।

सरकार ऐसा कदम क्यों उठाना चाहती है?

इस प्रस्ताव के पीछे कुछ प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं:

(A) फेक न्यूज पर नियंत्रण

सोशल मीडिया पर कई बार गलत जानकारी तेजी से वायरल हो जाती है। सरकार चाहती है कि प्लेटफॉर्म की भूमिका और जवाबदेही भी तय हो।

(B) Deepfake और AI से बने फर्जी वीडियो

AI की मदद से किसी नेता, अभिनेता या आम नागरिक का नकली वीडियो बनाया जा सकता है। इससे प्रतिष्ठा, सुरक्षा और निजी जीवन को नुकसान पहुंच सकता है।

(C) महिलाओं और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा

बिना सहमति के निजी तस्वीरें और वीडियो साझा करना, यौन शोषण से संबंधित सामग्री और बच्चों के खिलाफ ऑनलाइन अपराध गंभीर चिंता हैं।

(D) एल्गोरिदम की जवाबदेही

किसी वीडियो को लाखों लोगों तक पहुंचाने में प्लेटफॉर्म के एल्गोरिदम की भूमिका होती है। सरकार जानना चाहती है कि ऐसे मामलों में कंपनियों की जिम्मेदारी क्या होनी चाहिए।

(E) भारतीय कानूनों का पालन

सरकार चाहती है कि भारत में काम करने वाली वैश्विक टेक कंपनियां भारतीय कानूनों और नियामकीय निर्देशों का पालन करें।

WhatsApp और दूसरे मैसेजिंग ऐप पर क्या असर होगा?

प्रस्ताव पर उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ऐसी सेवाओं को अलग रखने पर विचार कर रही है जो केवल एक यूजर का संदेश दूसरे यूजर तक पहुंचाती हैं और कंटेंट की रैंकिंग या प्रमोशन में सक्रिय भूमिका नहीं निभातीं।

इसलिए Peer-to-Peer Messaging Services को सोशल मीडिया फीड और रिकमेंडेशन प्लेटफॉर्म से अलग श्रेणी में रखने का विचार है।

इसका मतलब यह नहीं है कि WhatsApp को सभी भारतीय कानूनों से छूट मिल जाएगी। केवल Safe Harbour में प्रस्तावित बदलाव का दायरा अलग हो सकता है।

आम सोशल मीडिया यूजर्स पर क्या असर पड़ेगा?

अगर प्रस्ताव लागू होता है तो आम लोगों के लिए कुछ महत्वपूर्ण बदलाव संभव हैं:

क्षेत्र

 संभावित असर

फेक न्यूज

 गलत जानकारी फैलाने पर निगरानी बढ़ सकती है

Deepfake

 नकली फोटो-वीडियो हटाने की प्रक्रिया तेज हो सकती है

Reels और Shorts

 कंटेंट रिकमेंडेशन पर जवाबदेही बढ़ सकती है

मानहानिकारक पोस्ट

 शिकायतों पर प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी बढ़ सकती है

निजी तस्वीरें

 बिना सहमति साझा सामग्री हटाने के लिए मजबूत व्यवस्था बन सकती है

कंटेंट क्रिएटर्स

 कंटेंट मॉडरेशन और नियमों का पालन अधिक महत्वपूर्ण होगा

क्या सरकार के पास शिकायत करने पर वीडियो तुरंत हटाया जा सकेगा?

सरकार एक अन्य प्रस्ताव पर भी विचार कर रही है।

इसके तहत किसी व्यक्ति को सीधे सोशल मीडिया कंपनी से शिकायत करके अपने खिलाफ पोस्ट किए गए Deepfake, निजी तस्वीर या बिना सहमति साझा किए गए वीडियो को हटाने की मांग करने की सुविधा दी जा सकती है।

अभी कई मामलों में पीड़ित को पुलिस, साइबर क्राइम पोर्टल या अदालत की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।

नई व्यवस्था का उद्देश्य पीड़ितों को तेज राहत देना है। हालांकि प्रस्तावित प्रक्रिया, समय-सीमा और शिकायतों के निपटारे के नियम अभी अंतिम रूप में घोषित नहीं हुए हैं।

क्या सोशल मीडिया कंपनियों को भारी जुर्माना भी लग सकता है?

यह भी एक महत्वपूर्ण पहलू है।

सरकार की चर्चा केवल Safe Harbour खत्म करने तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया कंपनियों के लिए अनुपालन और शिकायत निवारण की व्यवस्था मजबूत करने पर भी विचार हो रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने भी बच्चों के यौन शोषण से संबंधित ऑनलाइन सामग्री रोकने में प्लेटफॉर्म की विफलताओं पर चिंता जताई है और अधिक अनुपातिक दंड व्यवस्था की जरूरत पर चर्चा की है।

संभावित बदलावों में शामिल हो सकते हैं:

  • आर्थिक जुर्माने की व्यवस्था।

  • गैरकानूनी कंटेंट पर समयबद्ध कार्रवाई।

  • शिकायतों का बेहतर निपटारा।

  • प्लेटफॉर्म के एल्गोरिदम और कंटेंट प्रमोशन की जवाबदेही।

लेकिन अभी इन प्रस्तावों की अंतिम कानूनी रूपरेखा तय नहीं है।

इस प्रस्ताव के फायदे और नुकसान क्या हो सकते हैं?

संभावित फायदे

        संभावित चिंताएं

फेक न्यूज पर नियंत्रण

    अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रभावित होने का खतरा

Deepfake पर कार्रवाई

    कंपनियां जरूरत से ज्यादा पोस्ट हटा सकती हैं

महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा

    सरकारी हस्तक्षेप बढ़ने की आशंका

प्लेटफॉर्म की जवाबदेही

    छोटी कंपनियों पर अनुपालन का बोझ

पीड़ितों को जल्द राहत

    कानूनी विवाद और लागत बढ़ सकती है

इसलिए इस कानून में सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बेहद जरूरी होगा।

सबसे महत्वपूर्ण सवाल: क्या सरकार ने यह कानून लागू कर दिया है?

अभी प्रस्तावित / विचाराधीन

5 नवंबर 2026 तक उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार:

  1. इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) इस विषय पर विचार-विमर्श कर रहा है।

  2. Safe Harbour Protection में बदलाव के प्रस्ताव पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।

  3. Section 79 में बड़ा बदलाव करने के लिए IT Act में संशोधन की जरूरत पड़ सकती है।

  4. इस तरह के संशोधन के लिए संसद की विधायी प्रक्रिया आवश्यक होगी।

  5. टेक कंपनियों और अन्य हितधारकों से विचार-विमर्श भी किया जा सकता है।

इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि Facebook, Instagram, YouTube और X की कानूनी सुरक्षा खत्म हो चुकी है।

परीक्षा और सामान्य ज्ञान के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

प्रश्न

     उत्तर

संबंधित मंत्रालय

    इलेक्ट्रॉनिक्स एवं IT मंत्रालय (MeitY)

संबंधित कानून

    Information Technology Act, 2000

संबंधित धारा

    Section 79

कानूनी सुरक्षा का नाम

    Safe Harbour Protection

मुख्य मुद्दा

   User-generated content की कानूनी जवाबदेही

संबंधित कंपनियां

   Meta, Google, X आदि

प्रस्ताव की स्थिति

   विचाराधीन, अंतिम निर्णय नहीं


छत्तीसगढ़ में अवैध विदेशी नागरिकों की पहचान के लिए 15 नवंबर से चलेगा दो महीने का अभियान, रायपुर-कोरबा-रायगढ़ पर विशेष नजर

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रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान और उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई के लिए दो महीने का विशेष राज्यव्यापी जांच अभियान चलाने की घोषणा की है। यह अभियान 15 नवंबर 2026 से 15 जनवरी 2027 तक प्रस्तावित है। उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने 28 अक्टूबर को नवा रायपुर स्थित मंत्रालय में सभी जिलों के नोडल अधिकारियों के साथ बैठक कर अभियान की तैयारियों और दिशा-निर्देशों की समीक्षा की थी।

सरकार के मुताबिक, अभियान का उद्देश्य केवल संदिग्ध विदेशी नागरिकों की पहचान करना ही नहीं, बल्कि अवैध रूप से रहने में मदद करने वाले नेटवर्क, फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों, बिचौलियों और जानबूझकर आश्रय या रोजगार देने वालों की भूमिका की भी जांच करना है। रिपोर्टों में विशेष रूप से बांग्लादेश से अवैध रूप से आए नागरिकों की पहचान पर ध्यान देने की बात कही गई है।

15 नवंबर से 15 जनवरी तक चलेगा अभियान

राज्य सरकार की घोषित योजना के अनुसार, यह अभियान पूरे छत्तीसगढ़ में एक साथ चलाया जाएगा। प्रत्येक जिले में नोडल अधिकारी और संबंधित पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित किया जाएगा।

अधिकारियों को स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाने, संदिग्ध मामलों की पहचान करने और दस्तावेजों का सत्यापन करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार करने की भी जानकारी दी गई है।

किन जगहों पर होगी जांच?

अभियान के दौरान उन स्थानों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा जहां बड़ी संख्या में बाहरी श्रमिक या अन्य लोग रहते अथवा काम करते हैं।

  • औद्योगिक क्षेत्र और फैक्ट्रियां।

  • सड़क एवं भवन निर्माण स्थल।

  • कुटीर उद्योग और गुड़ निर्माण इकाइयां।

  • किराए के मकान और आवासीय परिसर।

  • होटल, लॉज और धर्मशालाएं।

  • श्रमिक ठेकेदारों के ठिकाने और आवागमन के प्रमुख स्थान।

सरकार ने औद्योगिक गतिविधियों वाले रायपुर, कोरबा और रायगढ़ में विशेष निगरानी और जांच की तैयारी करने के निर्देश दिए हैं।

मकान मालिकों और ठेकेदारों की भी होगी जांच

अभियान में केवल संदिग्ध व्यक्तियों की ही नहीं, बल्कि उन्हें काम या रहने की जगह उपलब्ध कराने वाले लोगों की भूमिका भी जांची जाएगी।

  • मकान मालिकों को किराएदारों के पहचान संबंधी दस्तावेज लेकर उनका सत्यापन कराने के निर्देश दिए गए हैं।

  • ठेकेदारों और नियोक्ताओं को श्रमिकों के दस्तावेजों की जांच करने को कहा गया है।

  • होटल, लॉज और धर्मशालाओं में ठहरने वाले लोगों का रिकॉर्ड जांच के दायरे में रहेगा।

  • जानबूझकर अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को आश्रय या रोजगार देने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।

ग्राम सभाओं और पार्षदों की भी ली जाएगी मदद

ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम सभाओं और शहरी क्षेत्रों में वार्ड पार्षदों के सहयोग से स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाई जाएगी।

सरकार की योजना के अनुसार, स्थानीय स्तर पर मिलने वाली सूचनाओं को संबंधित पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा। हालांकि, किसी व्यक्ति के खिलाफ केवल अफवाह या सूचना के आधार पर उसे विदेशी नागरिक घोषित नहीं किया जा सकता। उसकी पहचान और नागरिकता का सत्यापन निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत ही किया जाएगा।

फर्जी आधार कार्ड और पासपोर्ट बनाने वालों पर भी कार्रवाई

इस अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले नेटवर्क की जांच करना है।

सरकार ने ऐसे बिचौलियों और गिरोहों की पहचान करने के निर्देश दिए हैं, जो कथित तौर पर फर्जी आधार कार्ड, पासपोर्ट या अन्य पहचान संबंधी दस्तावेज तैयार कराने में मदद करते हैं।

यदि कोई दस्तावेज जांच में फर्जी पाया जाता है, तो संबंधित प्राधिकरण के माध्यम से उसे नियमानुसार निष्क्रिय या निरस्त कराने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। ऐसे दस्तावेज तैयार करने और इस्तेमाल कराने वालों के खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई हो सकती है।

जिलों के बीच जानकारी साझा करने के लिए बनेगा विशेष सॉफ्टवेयर

अभियान को व्यवस्थित बनाने के लिए सरकार ने एक विशेष सॉफ्टवेयर विकसित करने की योजना बनाई है। इसके माध्यम से अलग-अलग जिलों में चल रही जांच और सत्यापन से संबंधित जानकारी एक जगह उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।

इसमें निम्न जानकारियां दर्ज रखने की योजना है:

  • सत्यापन के दायरे में आए मामलों का रिकॉर्ड।

  • संबंधित व्यक्तियों के दस्तावेजों की जांच की स्थिति।

  • विभिन्न जिलों में हुई जांच का विवरण।

  • संदिग्ध अवैध प्रवासन नेटवर्क से संबंधित सूचनाएं।

  • संबंधित पुलिस इकाइयों की जांच और कार्रवाई की जानकारी।

इस व्यवस्था का उद्देश्य जिलों के बीच समन्वय बढ़ाना और एक ही मामले की बार-बार जांच होने से बचाना है।

 आधार कार्ड, पैन कार्ड और राशन कार्ड को लेकर गृह मंत्री का बयान

उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने स्पष्ट किया है कि आधार कार्ड, पैन कार्ड या राशन कार्ड अपने आप में भारतीय नागरिकता का प्रमाण नहीं हैं। लंबे समय तक भारत में रहने मात्र से भी किसी व्यक्ति को स्वतः भारतीय नागरिकता नहीं मिल जाती।

इसलिए किसी व्यक्ति की नागरिकता और भारत में रहने की वैधता का सत्यापन केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों और लागू कानूनों के अनुसार किया जाएगा।

नागरिकों से मांगा गया सहयोग, हेल्पलाइन नंबर जारी

राज्य सरकार ने आम नागरिकों से भी अभियान में सहयोग करने की अपील की है। जारी जानकारी के अनुसार, अवैध प्रवासन से संबंधित सूचना देने के लिए टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है।

सरकार द्वारा जारी हेल्पलाइन- 1800-233-1905, टोल फ्री

प्राप्त सूचना की संबंधित एजेंसियों द्वारा जांच की जाएगी।

अवैध प्रवासन की पुष्टि होने पर क्या कार्रवाई होगी?

सरकार की घोषित योजना के अनुसार, जांच में यदि किसी विदेशी नागरिक के भारत में अवैध रूप से रहने की पुष्टि होती है, तो उसके खिलाफ लागू कानूनों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। आवश्यक होने पर निर्वासन यानी संबंधित देश वापस भेजने की प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है।

इसके अलावा, फर्जी दस्तावेज बनाने, उपलब्ध कराने या जानबूझकर अवैध रूप से रह रहे लोगों को शरण देने में शामिल व्यक्तियों की भूमिका भी जांची जाएगी। किसी व्यक्ति के खिलाफ अंतिम कार्रवाई से पहले उसकी पहचान, नागरिकता और कानूनी स्थिति का सत्यापन आवश्यक होगा।

आम नागरिकों के लिए क्या महत्वपूर्ण है?

इस अभियान के दौरान मकान मालिकों, होटल संचालकों, ठेकेदारों और नियोक्ताओं को अपने यहां रहने या काम करने वाले लोगों के दस्तावेजों का उचित रिकॉर्ड रखने और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सत्यापन कराने पर ध्यान देना चाहिए।

साथ ही, किसी व्यक्ति की भाषा, पहनावे, क्षेत्र या बाहरी राज्य से आने के आधार पर उसे विदेशी नागरिक नहीं माना जा सकता। संदेह की स्थिति में तथ्यात्मक जानकारी संबंधित अधिकारियों को दें और सत्यापन का निर्णय कानून के अनुसार होने दें।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ सरकार का यह अभियान 15 नवंबर 2026 से शुरू होकर 15 जनवरी 2027 तक चलेगा। सरकार का कहना है कि इसके माध्यम से अवैध विदेशी नागरिकों की पहचान, फर्जी दस्तावेजों के नेटवर्क की जांच और अवैध प्रवासन को बढ़ावा देने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।

अब देखना होगा कि अभियान शुरू होने के बाद जिलों में जांच किस तरह आगे बढ़ती है और प्रशासन कितने मामलों में दस्तावेजों का सत्यापन कर पाता है। फिलहाल रायपुर, कोरबा और रायगढ़ जैसे औद्योगिक क्षेत्रों पर विशेष नजर रखे जाने की तैयारी है।


महासमुंद में प्रधानमंत्री आवास योजना पर बवाल, रोजगार सहायिका पर हजारों रुपये वसूलने का आरोप

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 महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर कथित अवैध वसूली का मामला सामने आया है। बागबाहरा विकासखंड के ग्राम कोमा में ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत की रोजगार सहायिका और उसके पति पर आवास स्वीकृत कराने का झांसा देकर हितग्राहियों से 3 हजार से लेकर 20 हजार रुपये तक वसूलने का गंभीर आरोप लगाया है। मामले को लेकर ग्रामीणों ने शपथ पत्र के साथ कलेक्टर से शिकायत की है और रोजगार सहायिका को पद से हटाने की मांग की है।


शपथ पत्र लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीण, लगाए गंभीर आरोप

ग्राम कोमा के कई ग्रामीण अपनी शिकायत लेकर जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट पहुंचे। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान दिलाने और आवास स्वीकृत कराने का भरोसा देकर अलग-अलग हितग्राहियों से 3 हजार, 5 हजार, 10 हजार और 20 हजार रुपये तक लिए गए हैं।

शिकायतकर्ताओं ने अपने आरोपों के समर्थन में 10 रुपये के स्टांप पेपर पर तैयार शपथ पत्र भी जिला प्रशासन को सौंपे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस मामले की शिकायत पहले भी की गई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें दोबारा प्रशासन के पास पहुंचना पड़ा।

रकम लेने के बाद भी नहीं मिला प्रधानमंत्री आवास

ग्रामीणों के मुताबिक, जिन हितग्राहियों से कथित तौर पर पैसे लिए गए, उनमें से कई लोगों के प्रधानमंत्री आवास अब तक स्वीकृत नहीं हुए हैं। आरोप है कि जब हितग्राहियों ने अपनी रकम वापस मांगी तो उन्हें टालमटोल का सामना करना पड़ा।

ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, संबंधित रोजगार सहायिका को पद से हटाने और आरोप सही पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।

जिला पंचायत CEO ने जारी किया नोटिस, मांगा जवाब

मामले में जिला पंचायत प्रशासन ने जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जिला पंचायत CEO के अनुसार, जनपद पंचायत स्तर से इस प्रकरण की जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई है। रिपोर्ट के आधार पर संबंधित रोजगार सहायिका को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।

प्रशासन अब जांच रिपोर्ट और रोजगार सहायिका के जवाब का परीक्षण करेगा। इसके बाद उपलब्ध तथ्यों के आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

जांच के बाद ही स्पष्ट होगी आरोपों की सच्चाई

फिलहाल रोजगार सहायिका और उसके पति पर लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। हालांकि, इस शिकायत के सामने आने से प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन और पंचायत स्तर पर निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

पटवारी आंदोलन पर सरकार की सख्ती: 150 से अधिक निलंबन की खबर, 1,000 से ज्यादा को ब्रेक-इन-सर्विस नोटिस; धमतरी में भी दो पटवारी निलंबित

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में राजस्व पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल को लेकर सरकार और पटवारी संघ के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर 13 अक्टूबर 2026 से प्रदेशभर के पटवारी आंदोलन कर रहे हैं। हड़ताल के कारण राजस्व विभाग के कई महत्वपूर्ण काम प्रभावित हो रहे हैं। वहीं, प्रशासन ने आंदोलन में शामिल कर्मचारियों के खिलाफ नोटिस, निलंबन और अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है।

5 नवंबर को प्रकाशित द रूरल प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में 150 से अधिक पटवारियों को निलंबित किया गया है, जबकि 1,000 से अधिक पटवारियों को ब्रेक-इन-सर्विस का नोटिस जारी किया गया है। हालांकि, उसी दिन विस्तारित न्यूज की रिपोर्ट में अब तक 123 पटवारियों पर निलंबन और तबादले की कार्रवाई का आंकड़ा दिया गया है। इसलिए कार्रवाई की कुल संख्या को अलग-अलग रिपोर्टों के अनुसार समझना जरूरी है।

13 अक्टूबर से जारी है अनिश्चितकालीन हड़ताल

राजस्व पटवारी संघ के बैनर तले प्रदेश के पटवारी 13 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। पटवारियों का कहना है कि लंबे समय से उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा है। इसी वजह से उन्होंने आंदोलन का रास्ता अपनाया है।

हड़ताल के चलते किसानों और आम नागरिकों को राजस्व कार्यालयों से जुड़े कई कामों में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। धान खरीदी का सीजन नजदीक होने के कारण यह आंदोलन और भी महत्वपूर्ण हो गया है।

सरकार ने दिखाई सख्ती, नोटिस और निलंबन की कार्रवाई

द रूरल प्रेस की 5 नवंबर की रिपोर्ट के अनुसार, बिलासपुर संभाग के 259 और सरगुजा संभाग के 819 पटवारियों सहित प्रदेशभर में 1,000 से अधिक कर्मचारियों को नोटिस जारी किए गए हैं।

नोटिस में निर्धारित समय के भीतर काम पर लौटने और अनुपस्थिति को लेकर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसा नहीं करने पर अनुपस्थिति को सेवा में व्यवधान मानते हुए एकतरफा अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

धमतरी में दो पटवारी निलंबित, 148 कर्मचारी हड़ताल पर

धमतरी जिले में भी पटवारियों का आंदोलन लगातार जारी है। 2 नवंबर की रिपोर्ट के अनुसार, जिले में कुल 168 पटवारी कार्यरत हैं, जिनमें से लगभग 148 पटवारी हड़ताल में शामिल हैं। शेष 20 प्रशिक्षु पटवारी आंदोलन में शामिल नहीं बताए गए हैं।

प्रशासन ने जिले में दो पटवारियों को निलंबित किया है:

  1. चिम्मन लाल ध्रुव – हल्का पांवद्वार, नगरी क्षेत्र।

  2. चैतन्य नेताम – मुख्यालय बेलोरा, मगरलोड क्षेत्र।

रिपोर्ट के अनुसार, चिम्मन लाल ध्रुव को समीक्षा बैठक में अनुपस्थित रहने पर पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। जवाब नहीं मिलने के बाद निलंबन की कार्रवाई की गई। वहीं, चैतन्य नेताम के निलंबन का आदेश मगरलोड तहसीलदार की ओर से जारी किया गया।

इसके अलावा धमतरी, नगरी, मगरलोड, भखारा और कुरुद क्षेत्र के पटवारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर 48 घंटे के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए गए थे। 4 नवंबर को अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, धमतरी के गांधी मैदान में आंदोलन कर रहे पटवारियों ने प्रशासनिक नोटिस की प्रतियां जलाकर विरोध जताया।

आखिर क्यों नाराज हैं पटवारी?

पटवारी संघ की नाराजगी के पीछे कई प्रमुख मांगें हैं। इनमें सबसे प्रमुख है PV ऐप यानी Physical Verification App से जुड़ी तकनीकी और व्यावहारिक समस्याएं।

पटवारियों की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

  • PV ऐप में सुधार: ऐप की तकनीकी खामियां दूर की जाएं और इसकी व्यावहारिक समस्याओं का समाधान किया जाए।

  • वेतन विसंगति दूर करना: लंबे समय से लंबित वेतन संबंधी विसंगतियों का निराकरण किया जाए।

  • पदोन्नति का लाभ: राजस्व निरीक्षक (RI) पद पर पदोन्नति सहित लंबित पदोन्नति प्रक्रिया पूरी की जाए।

  • अतिरिक्त कार्यभार में राहत: डिजिटल सर्वे और अन्य ऑनलाइन कार्यों के दबाव को कम किया जाए।

  • कार्रवाई वापस लेना: आंदोलन के दौरान जारी निलंबन, नोटिस और तबादले के आदेश वापस लिए जाएं।

PV ऐप को लेकर क्या है विवाद?

पटवारियों का आरोप है कि गांवों और खेतों में नेटवर्क की समस्या के कारण PV ऐप ठीक से काम नहीं करता। कई बार सर्वर डाउन होने से डेटा अपलोड करने में काफी समय लगता है।

उनका यह भी कहना है कि बिना पर्याप्त प्रशिक्षण के पॉलीगॉन मैपिंग जैसे तकनीकी काम की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा डिजिटल क्रॉप सर्वे, एग्रीस्टैक, किसान पंजीयन और स्वामित्व योजना जैसे कार्यों का अतिरिक्त बोझ भी पटवारियों पर है।

पटवारियों का कहना है कि वे काम करने के विरोध में नहीं हैं, लेकिन तकनीकी सुविधाएं और पर्याप्त प्रशिक्षण उपलब्ध कराए बिना काम का दबाव बढ़ाना व्यावहारिक नहीं है। ये समस्याएं पटवारी संघ की ओर से उठाई गई हैं।

हड़ताल से किसानों को हो रही परेशानी

पटवारियों की हड़ताल का असर अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी दिखाई देने लगा है। राजस्व विभाग से जुड़े कई काम प्रभावित होने की खबर है।

प्रमुख रूप से प्रभावित कार्य:

  1. डिजिटल क्रॉप सर्वे और गिरदावरी।

  2. धान खरीदी से पहले फसल संबंधी सत्यापन।

  3. किसान पंजीयन और किसान अभिलेख सत्यापन।

  4. भूमि नामांतरण और बंटवारा।

  5. सीमांकन और राजस्व रिकॉर्ड से जुड़े कार्य।

  6. विभिन्न प्रमाणपत्रों के लिए आवश्यक सत्यापन।

खासकर धान खरीदी से पहले फसल का डिजिटल सर्वे पूरा होना जरूरी है। ऐसे में सर्वे में देरी होने पर किसानों के पंजीयन और धान खरीदी की तैयारियों पर असर पड़ने की आशंका है।

कर्मचारी फेडरेशन ने भी किया हस्तक्षेप

छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के प्रदेश संयोजक कमल वर्मा ने सरकार की कार्रवाई पर नाराजगी जताई है। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है।

फेडरेशन की मांग है कि पटवारियों के खिलाफ जारी निलंबन, नोटिस और तबादले की कार्रवाई पर रोक लगाकर बातचीत के माध्यम से समाधान निकाला जाए। साथ ही PV ऐप की तकनीकी समस्याओं को दूर करने और वेतन विसंगति तथा पदोन्नति से जुड़े मुद्दों का निराकरण किया जाए।

अब आगे क्या होगा?

एक तरफ प्रशासन पटवारियों को काम पर लौटने के निर्देश दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ पटवारी संघ अपनी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रहा है।

इस पूरे विवाद में सबसे ज्यादा परेशानी किसानों और ग्रामीण नागरिकों को हो रही है। धान खरीदी का समय नजदीक है और राजस्व संबंधी काम प्रभावित होने से किसानों की चिंता बढ़ रही है।

अब देखना होगा कि राज्य सरकार और पटवारी संघ के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलता है या आंदोलन आगे भी जारी रहता है।


रायपुर में D.Ed अभ्यर्थियों का शिक्षा मंत्री के बंगले पर प्रदर्शन, 2,300 सहायक शिक्षक पदों पर नियुक्ति की मांग

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक भर्ती को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे D.Ed अभ्यर्थियों का आक्रोश गुरुवार, 5 नवंबर को देखने को मिला। अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत अभ्यर्थी गुरुवार तड़के अपने माता-पिता और परिजनों के साथ स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के नवा रायपुर स्थित शासकीय बंगले पहुंच गए। यहां उन्होंने बंगले का घेराव कर परिसर में धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया।

अभ्यर्थियों की प्रमुख मांग है कि वर्ष 2023 की सहायक शिक्षक भर्ती के शेष लगभग 2,300 पदों पर पात्र D.Ed अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी जाए और सरकार नियुक्ति की निश्चित तारीख घोषित करे।

D.Ed अभ्यर्थियों का शिक्षा मंत्री के बंगले पर प्रदर्शन, 2,300 पदों पर नियुक्ति की मांग

रायपुर। छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक भर्ती का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। लंबे समय से नियुक्ति की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे D.Ed अभ्यर्थियों ने गुरुवार सुबह अपना विरोध तेज करते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के शासकीय बंगले का घेराव कर दिया। अभ्यर्थी अपने माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ नवा रायपुर स्थित मंत्री के बंगले पहुंचे और परिसर में बैठकर धरना शुरू कर दिया।

321 दिनों से जारी है आंदोलन

अभ्यर्थियों के मुताबिक, वे पिछले 321 दिनों से नवा रायपुर के तूता धरना स्थल पर अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। करीब 10 महीने से जारी इस आंदोलन के बावजूद उन्हें नियुक्ति को लेकर कोई निश्चित तारीख नहीं मिली है। अभ्यर्थियों का कहना है कि लंबे इंतजार और लगातार प्रदर्शन के बाद भी जब उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं हुआ, तब उन्हें मंत्री के बंगले तक पहुंचकर अपनी बात रखने का फैसला लेना पड़ा।

2,300 सहायक शिक्षक पदों पर नियुक्ति की मांग

प्रदर्शन कर रहे D.Ed अभ्यर्थियों की मुख्य मांग वर्ष 2023 की सहायक शिक्षक भर्ती के शेष लगभग 2,300 पदों पर पात्र उम्मीदवारों को नियुक्ति देने की है। अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़े रिक्त पदों पर नियुक्ति की स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए और सरकार को यह बताना चाहिए कि नियुक्ति कब तक पूरी होगी।

अभ्यर्थियों ने मांग की है कि सरकार केवल आश्वासन देने के बजाय नियुक्ति का स्पष्ट कार्यक्रम और निश्चित तारीख घोषित करे। उनका कहना है कि वे लंबे समय से इस फैसले का इंतजार कर रहे हैं और अब अनिश्चितता के बीच आंदोलन जारी रखने को मजबूर हैं।

परिवार के साथ मंत्री के बंगले पहुंचे अभ्यर्थी

इस प्रदर्शन में अभ्यर्थियों के साथ उनके माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्य भी शामिल हुए। अभ्यर्थियों का कहना है कि लंबे समय से नौकरी की प्रतीक्षा के कारण उनके परिवार भी परेशान हैं। पढ़ाई पूरी करने और भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी उम्मीदें रखने के बाद भी नियुक्ति नहीं मिलने से उनके भविष्य पर असर पड़ रहा है।

परिजनों की मौजूदगी के साथ अभ्यर्थियों ने सरकार तक अपनी मांग पहुंचाने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे किसी विवाद के लिए नहीं, बल्कि अपनी नियुक्ति से जुड़ा स्पष्ट जवाब मांगने के लिए मंत्री से मिलना चाहते हैं।

पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई कहासुनी

मंत्री के बंगले पर प्रदर्शन की सूचना मिलने के बाद पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिसकर्मियों ने अभ्यर्थियों से निर्धारित धरना स्थल पर लौटने को कहा। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच बहस और कहासुनी हुई।

कुछ समाचार रिपोर्टों के अनुसार, प्रशासन ने अभ्यर्थियों को समझाने का प्रयास किया। बाद में हिन्दुस्थान समाचार की रिपोर्ट में आरंग SDM रवि सिंह के हवाले से बताया गया कि अभ्यर्थियों को बसों के माध्यम से रायपुर ले जाया जा रहा है और आगे नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रदर्शन के समय शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव बंगले में मौजूद नहीं थे।

न्यायालय के आदेशों के पालन की भी मांग

अभ्यर्थियों ने अपनी मांग के समर्थन में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के पालन का मुद्दा भी उठाया है। उनका दावा है कि भर्ती से जुड़े न्यायिक निर्देशों के बावजूद नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। हालांकि, इन आदेशों का वास्तविक दायरा और वर्तमान भर्ती प्रक्रिया पर उनका प्रभाव संबंधित न्यायिक आदेशों तथा शासन के आधिकारिक पक्ष से स्पष्ट होना जरूरी है।

अब सरकार के फैसले पर टिकी नजरें

321 दिनों से जारी आंदोलन और गुरुवार को मंत्री के बंगले तक पहुंचे प्रदर्शन के बाद सहायक शिक्षक भर्ती का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है। अभ्यर्थियों की मांग है कि सरकार रिक्त पदों की स्थिति स्पष्ट करे, पात्र उम्मीदवारों की नियुक्ति पर निर्णय ले और नियुक्ति की निश्चित समय-सीमा घोषित करे।

अब देखना होगा कि स्कूल शिक्षा विभाग और राज्य सरकार इस मामले में क्या कदम उठाते हैं। फिलहाल अभ्यर्थियों की मुख्य मांग यही है कि लंबे इंतजार के बाद उन्हें आश्वासन नहीं, बल्कि नियुक्ति को लेकर ठोस निर्णय मिले।


चुनाव आयोग ने छह और राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची संशोधन की घोषणा की

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भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) द्वारा मतदाता सूचियों को अपडेट करने के लिए विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (Special Summary Revision – SSR) की प्रक्रिया का विस्तार किए जाने की खबर है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची में नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ना, गलतियों को सुधारना और अपात्र या स्थानांतरित मतदाताओं से जुड़ी प्रविष्टियों की जाँच करना है।

छह राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में होगा मतदाता सूची का पुनरीक्षण

5 नवंबर 2026 को जारी जानकारी के अनुसार, निर्वाचन आयोग ने चार राज्यों और दो केंद्रशासित प्रदेशों में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कराने का निर्णय लिया है। इसका मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक अद्यतन बनाना और 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके युवाओं सहित सभी पात्र नागरिकों को मतदान का अधिकार सुनिश्चित करने के लिए सूची में शामिल करना है।

किन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में होगी प्रक्रिया?

इस बार पुनरीक्षण अभियान निम्नलिखित छह क्षेत्रों में चलाया जाएगा:

  1. अरुणाचल प्रदेश

  2. मिजोरम

  3. ओडिशा

  4. सिक्किम

  5. चंडीगढ़

  6. दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव

यह स्पष्ट करना जरूरी है कि इनमें चार राज्य और दो केंद्रशासित प्रदेश शामिल हैं।

क्या है विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR)?

विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण यानी Special Summary Revision मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया है। इसके तहत:

  • 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके पात्र नागरिकों के नाम जोड़े जाएंगे।

  • जिन मतदाताओं के नाम सूची में छूट गए हैं, उन्हें शामिल करने का अवसर मिलेगा।

  • मतदाता सूची में दर्ज नाम, पता और अन्य विवरणों में सुधार किया जा सकेगा।

  • मृत्यु या स्थायी रूप से स्थानांतरित होने जैसे मामलों में नियमानुसार नाम हटाने की प्रक्रिया की जाएगी।

  • मतदाता सूची में दोहराव और अन्य त्रुटियों की जाँच की जाएगी।

इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से बाहर न रहे और अपात्र व्यक्ति का नाम सूची में दर्ज न हो।

महत्वपूर्ण तारीखें

निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार:

प्रक्रिया

    निर्धारित तारीख

मतदान केंद्रों का युक्तिकरण एवं पुनर्व्यवस्था

    20 नवंबर 2026 तक

प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन

    30 नवंबर 2026

दावा एवं आपत्ति दर्ज करने की अवधि

    30 नवंबर से 30 दिसंबर 2026

दावे एवं आपत्तियों का निपटारा

    18 जनवरी 2027 तक

अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन

    21 जनवरी 2027


युवाओं और नए मतदाताओं को मिलेगा विशेष अवसर

इस अभियान में पहली बार मतदान करने वाले युवाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। 1 जनवरी 2027 को 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले पात्र नागरिक मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकेंगे।

इसके अलावा, निर्वाचन आयोग ने उन युवाओं के लिए अग्रिम आवेदन की सुविधा भी दी है, जो 2027 में 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर को 18 वर्ष की आयु पूरी करेंगे। उनके आवेदन पात्रता की संबंधित तिमाही में प्रक्रिया के लिए लिए जाएंगे।

छत्तीसगढ़ के लिए क्या है इसका महत्व?

छत्तीसगढ़ का नाम इस बार घोषित किए गए छह नए क्षेत्रों की सूची में नहीं है। राज्य को पहले घोषित पुनरीक्षण कार्यक्रम में शामिल किया गया था। इसलिए छत्तीसगढ़ के मतदाताओं को अपने राज्य के लिए जारी कार्यक्रम और संबंधित निर्वाचन कार्यालय की सूचनाओं पर ध्यान देना चाहिए।

मतदाताओं को क्या करना चाहिए?

मतदाताओं को सलाह दी जाती है कि वे प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद अपना नाम और विवरण अवश्य जाँचें। यदि नाम छूट गया हो या किसी प्रकार की गलती हो, तो निर्धारित समय-सीमा में संबंधित निर्वाचन अधिकारी के समक्ष दावा या आपत्ति दर्ज कराएं। आधिकारिक जानकारी के लिए निर्वाचन आयोग की वेबसाइट Voters' Services Portal देख सकते हैं।

निष्कर्ष

निर्वाचन आयोग का यह कदम आगामी चुनावी प्रक्रिया से पहले मतदाता सूची को अद्यतन करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रशासनिक पहल है। नए मतदाताओं को सूची में शामिल करने, पुराने रिकॉर्ड में सुधार करने और मतदाता सूची की त्रुटियों को दूर करने के लिए यह अभियान चलाया जाएगा। अब सभी की नजर 30 नवंबर को प्रकाशित होने वाली प्रारूप मतदाता सूची और 21 जनवरी 2027 को जारी होने वाली अंतिम सूची पर रहेगी।


सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: 24 घंटे से ज्यादा हिरासत में रखने पर तुरंत रिहाई, गिरफ्तारी नहीं बल्कि हिरासत के समय से शुरू होगी समय-सीमा

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नई दिल्ली- देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को नागरिकों के व्यक्तिगत स्वतंत्रता और गिरफ्तारी से जुड़े संवैधानिक अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति को पुलिस हिरासत में लेने के बाद 24 घंटे की समय-सीमा उसी समय से शुरू होगी, जब उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता वास्तव में सीमित की जाती है। पुलिस द्वारा औपचारिक गिरफ्तारी दर्ज किए जाने के समय से यह अवधि शुरू नहीं होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को वास्तविक हिरासत में लेने के 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश नहीं किया जाता है, तो उसे तत्काल रिहा करना होगा। हालांकि, मजिस्ट्रेट की अदालत तक पहुंचने में लगने वाला आवश्यक यात्रा समय इस गणना से बाहर रहेगा।

किन न्यायाधीशों की पीठ ने सुनाया फैसला?

यह महत्वपूर्ण फैसला न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां और न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने सुनाया।

मामले में अदालत ने स्पष्ट किया कि पुलिस किसी व्यक्ति को जांच, पूछताछ, तलाशी या जब्ती के नाम पर हिरासत में रखकर औपचारिक गिरफ्तारी दर्ज करने में देरी नहीं कर सकती।

अदालत के अनुसार, हिरासत और गिरफ्तारी के बीच कृत्रिम अंतर बनाकर संवैधानिक सुरक्षा को कमजोर नहीं किया जा सकता।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला Sujit Das v. Union of India से जुड़ा है। इसमें चार आरोपियों ने त्रिपुरा हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें NDPS एक्ट के तहत दर्ज मादक पदार्थों की तस्करी के मामले में जमानत देने से इनकार किया गया था।

मामले की घटनाओं के अनुसार:

  • 29 सितंबर 2025 को दोपहर करीब 2 बजे आरोपियों को तलाशी और जब्ती की कार्रवाई के दौरान हिरासत में लिया गया।

  • पुलिस ने उनकी औपचारिक गिरफ्तारी 30 सितंबर 2025 को सुबह करीब 11 बजे दर्ज की।

  • इस दौरान लगभग 18 घंटे तक वे न्यायिक निगरानी के बिना हिरासत में रहे।

  • आरोपियों की ओर से दलील दी गई कि औपचारिक गिरफ्तारी दर्ज करने में देरी करके 24 घंटे की संवैधानिक समय-सीमा को प्रभावित करने का प्रयास किया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले के तथ्यों और संवैधानिक प्रावधानों पर विचार करते हुए हिरासत के वास्तविक समय को ही 24 घंटे की गणना का आधार माना।

संविधान के अनुच्छेद 22(2) में क्या प्रावधान है?

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 22(2) गिरफ्तार व्यक्ति को महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रदान करता है।

इसके अनुसार:

  • गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के स्थान से मजिस्ट्रेट की अदालत तक पहुंचने में लगने वाले आवश्यक यात्रा समय को छोड़कर 24 घंटे के भीतर निकटतम मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना अनिवार्य है।

  • पुलिस किसी व्यक्ति को अनिश्चित समय तक अपनी हिरासत में नहीं रख सकती।

  • 24 घंटे के बाद हिरासत जारी रखने के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट की अनुमति आवश्यक होती है।

  • गिरफ्तारी और हिरासत से जुड़े संवैधानिक अधिकारों का पालन करना पुलिस की जिम्मेदारी है।

सुप्रीम कोर्ट की नई व्याख्या: 24 घंटे की गणना उस समय से होगी जब व्यक्ति की स्वतंत्रता वास्तव में छीन ली गई हो, न कि पुलिस रिकॉर्ड में गिरफ्तारी दर्ज होने के समय से।


अब पुलिस के लिए क्या बदलेगा?

इस फैसले के बाद जांच एजेंसियों के लिए कुछ महत्वपूर्ण बातें स्पष्ट हो गई हैं

    1. विषय

    1. सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

    1. हिरासत का समय

    1. वास्तविक हिरासत से गणना

    1. औपचारिक गिरफ्तारी             

    1. समय-सीमा का नया प्रारंभ नहीं

    1. जांच और पूछताछ

    1. इस दौरान का समय भी शामिल

    1. तलाशी और जब्ती

    1. हिरासत का समय शामिल

    1. यात्रा का समय

    1. आवश्यक यात्रा समय की छूट

    1. 24 घंटे से अधिक हिरासत

    1. बिना मजिस्ट्रेट के पेशी के अवैध

    1. मजिस्ट्रेट की भूमिका

    1. वास्तविक हिरासत का समय दर्ज करना और जांचना

अदालत ने यह भी कहा कि मजिस्ट्रेट को व्यक्ति को पेश किए जाने पर हिरासत शुरू होने की वास्तविक तारीख और समय दर्ज करना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने चार आरोपियों की तत्काल रिहाई का आदेश दिया

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि आरोपियों को 29 सितंबर 2025 को दोपहर 2 बजे हिरासत में लिया गया था। उन्हें 30 सितंबर को शाम 4:45 बजे मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया।

इस प्रकार वास्तविक हिरासत के 24 घंटे की समय-सीमा पार हो चुकी थी।

अदालत ने हिरासत की प्रक्रिया को असंवैधानिक मानते हुए चारों अपीलकर्ताओं की तत्काल रिहाई का आदेश दिया और त्रिपुरा हाईकोर्ट के जमानत से इनकार करने वाले फैसले को पलट दिया।

NDPS एक्ट जैसे सख्त कानून में भी लागू होंगे संवैधानिक अधिकार

यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मामला NDPS एक्ट यानी मादक पदार्थ एवं मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम के तहत दर्ज था।

इस मामले में कथित तौर पर 11.03 किलोग्राम मेथामफेटामाइन टैबलेट (याबा) बरामद होने का आरोप था।

NDPS एक्ट की धारा 37 में व्यावसायिक मात्रा के मामलों में जमानत के लिए कड़ी शर्तें हैं।

लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी विशेष कानून की सख्त जमानत शर्तें भी संविधान के अनुच्छेद 21 और 22 के तहत प्राप्त मौलिक अधिकारों को समाप्त नहीं कर सकतीं।

हिरासत में प्रताड़ना रोकने पर भी अदालत की चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने हिरासत में होने वाली हिंसा और प्रताड़ना पर चिंता व्यक्त की।

अदालत ने कहा कि कई बार जांच के नाम पर लोगों को औपचारिक गिरफ्तारी दिखाए बिना लंबे समय तक पुलिस नियंत्रण में रखा जाता है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति के संवैधानिक अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।

अदालत का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी व्यक्ति को न्यायिक निगरानी से बाहर रखकर गैरकानूनी तरीके से हिरासत में न रखा जाए।

आम नागरिकों के लिए इस फैसले का क्या महत्व है?

इस फैसले से आम नागरिकों के व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार को स्पष्ट सुरक्षा मिलती है।

  1. पुलिस हिरासत में लिए जाने का वास्तविक समय महत्वपूर्ण होगा।

  2. केवल औपचारिक गिरफ्तारी दर्ज करने में देरी करके 24 घंटे की अवधि नहीं बढ़ाई जा सकेगी।

  3. व्यक्ति को निर्धारित समय में मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना होगा।

  4. मजिस्ट्रेट हिरासत की वैधता और अवधि की स्वतंत्र रूप से जांच करेंगे।

  5. संवैधानिक नियमों का उल्लंघन होने पर व्यक्ति की तत्काल रिहाई का आदेश दिया जा सकता है।

ध्यान रहे, यह फैसला गैरकानूनी हिरासत और निर्धारित प्रक्रिया के उल्लंघन के संदर्भ में है। इसका अर्थ यह नहीं है कि हर गिरफ्तारी के बाद व्यक्ति स्वतः रिहा हो जाएगा।

फैसले से जुड़ी महत्वपूर्ण कानूनी धाराएं

कानून

प्रावधान

भारतीय संविधान

अनुच्छेद 21 – जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता

भारतीय संविधान

अनुच्छेद 22(2) – 24 घंटे में मजिस्ट्रेट के सामने पेशी

BNSS 2023

धारा 56 – गिरफ्तार व्यक्ति की स्वास्थ्य एवं सुरक्षा

BNSS 2023

धारा 58 – 24 घंटे से अधिक हिरासत पर रोक

NDPS एक्ट

धारा 37 – जमानत की कठोर शर्तें


दिल्ली में बड़ा हादसा: चावड़ी बाजार में निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत ढही, 2 लोगों की मौत, 4 घायल

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नई दिल्ली- राजधानी दिल्ली के पुराने इलाके चावड़ी बाजार में गुरुवार सुबह एक बड़ा हादसा हो गया। यहां गली सितारा (Gali Sitara) में निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत अचानक भरभराकर ढह गई। हादसे में अब तक दो लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि चार लोग घायल बताए जा रहे हैं। शुरुआती जानकारी में कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई गई थी। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

सुबह करीब 9:50 बजे हुआ हादसा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुरुवार 5 नवंबर को सुबह करीब 9:50 बजे चावड़ी बाजार मेट्रो स्टेशन के पास स्थित गली सितारा में निर्माणाधीन इमारत ढह गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इमारत गिरने से पहले जोरदार आवाज सुनाई दी। आसपास के लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। कुछ ही देर में घटनास्थल पर लोगों की भीड़ जमा हो गई।

बताया गया कि इमारत में पिछले 3 से 4 महीनों से निर्माण कार्य चल रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि इमारत में तीन से चार कंक्रीट स्लैब डाले जा चुके थे, जो हादसे के दौरान एक साथ ढह गए।

दो लोगों की मौत, चार घायल

हादसे के बाद राहत एवं बचाव दल ने मलबे में फंसे लोगों को निकालने का अभियान शुरू किया।

5 नवंबर को दोपहर बाद उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार:

  • दो लोगों की मौत की पुष्टि हुई।

  • चार लोग घायल हुए।

  • घायलों को बचाकर उपचार के लिए भेजा गया।

  • मलबे में अन्य लोगों के फंसे होने की आशंका के चलते तलाशी अभियान जारी रहा।

मृतकों की पहचान और हादसे में मौजूद लोगों की कुल संख्या के संबंध में पूरी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई थी।

NDRF, दिल्ली पुलिस और दमकल विभाग का रेस्क्यू ऑपरेशन

घटना की सूचना मिलते ही दिल्ली अग्निशमन सेवा, दिल्ली पुलिस, नगर निगम और NDRF की टीमें मौके पर पहुंचीं।

  • शुरुआत में दो वाटर टेंडर, एक वाटर बॉजर, एक क्विक रिस्पांस वाहन और एक इन्सिडेंट रिस्पांस टीम भेजी गई।

  • बाद में अतिरिक्त दमकल वाहन और वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुंचे।

  • कुल छह दमकल यूनिटों को राहत एवं बचाव कार्य में लगाया गया।

  • NDRF की टीम ने मलबे में दबे लोगों की तलाश की।

  • बचावकर्मियों ने सावधानीपूर्वक मलबा हटाकर लोगों को निकालने का काम किया।
MCD की बड़ी कार्रवाई, दो इंजीनियर निलंबित

हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम (MCD) ने कार्रवाई करते हुए एक असिस्टेंट इंजीनियर और एक जूनियर इंजीनियर को निलंबित कर दिया है।

रिपोर्ट के अनुसार, MCD ने बताया कि इस निर्माण के लिए कोई बिल्डिंग प्लान स्वीकृत नहीं कराया गया था। इसके बाद निर्माण कार्य की अनुमति, निगरानी और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

जांच के घेरे में निर्माण कार्य और सुरक्षा व्यवस्था

इस हादसे ने पुरानी दिल्ली के घनी आबादी वाले इलाकों में निर्माणाधीन इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जांच में मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर ध्यान दिया जा सकता है:

  1. क्या निर्माण कार्य निर्धारित नियमों के अनुसार किया जा रहा था?

  2. क्या इमारत का नक्शा और निर्माण संबंधी अनुमति ली गई थी?

  3. निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं?

  4. क्या संबंधित अधिकारियों ने समय पर निरीक्षण किया था?

  5. इमारत के ढहने की वास्तविक तकनीकी वजह क्या थी?

फिलहाल हादसे के वास्तविक कारण की आधिकारिक जांच का निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

दो महीने पहले भी दिल्ली में हुआ था बड़ा हादसा

यह घटना दिल्ली में भवन सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाने वाली है। इससे पहले 6 सितंबर 2026 को पश्चिमी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला आवासीय इमारत गिर गई थी। उस हादसे में सात लोगों की मौत हुई थी।

प्रशासन के सामने बड़े सवाल
  • बिना स्वीकृत नक्शे के निर्माण कैसे चल रहा था?

  • निर्माण स्थल पर सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं थे?

  • क्या समय रहते निरीक्षण किया गया था?

  • घनी आबादी वाले इलाकों में जर्जर और निर्माणाधीन इमारतों की सुरक्षा जांच कब होगी?

फिलहाल चावड़ी बाजार हादसे की जांच और राहत-बचाव अभियान इस घटना के प्रमुख पहलू बने हुए हैं।


वोट चोरी के आरोपों पर अरुण साव का कांग्रेस पर पलटवार, बोले- हार के बहाने तलाश रहा विपक्ष

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के ‘वोट चोरी’ अभियान को लेकर सियासत तेज हो गई है। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी अपनी राजनीतिक कमजोरियों और चुनावी हार की समीक्षा करने के बजाय संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं पर सवाल खड़े कर रही है। उन्होंने दावा किया कि 17 नगरीय निकाय चुनावों में हार के बाद कांग्रेस अब अपनी नाकामी छिपाने के लिए नए-नए बहाने तलाश रही है।


मीडिया से चर्चा के दौरान अरुण साव ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के सोशल मीडिया पोस्ट पर भी निशाना साधा। बघेल ने अपने पोस्ट में लिखा था कि ‘राहुल गांधी के सामने सबकी लाइन-लेंथ बिगड़ रही है।’ इस पर पलटवार करते हुए साव ने कहा कि किसकी लाइन-लेंथ बिगड़ रही है, यह पूरा देश देख रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिन नेताओं से हाथ मिलाया जा रहा है और गले मिला जा रहा है, वे भी कोई खास तवज्जो नहीं दे रहे हैं। जिस नेता के नेतृत्व में कांग्रेस 100 चुनाव हार चुकी है, उसे आखिर कौन गंभीरता से लेगा।

SIR पर कांग्रेस को घेरा, घुसपैठियों के पक्ष में खड़े होने का आरोप

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भाजपा के कार्टून पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए उप मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस घुसपैठियों के पक्ष में खड़ी दिखाई दे रही है। साव ने दावा किया कि आजादी के बाद देश में 12 बार SIR की प्रक्रिया हो चुकी है, जिनमें से 10 बार केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी। उस समय कांग्रेस ने इस प्रक्रिया को लेकर कोई विरोध नहीं किया।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास जनता का समर्थन नहीं है, इसलिए वह SIR को लेकर लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा करने की कोशिश कर रही है। साव ने सवाल उठाया कि जब जनता कांग्रेस को वोट ही नहीं दे रही है, तो फिर वोट चोरी का आरोप लगाने का क्या आधार है?

‘देश को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा विपक्ष’

भाजपा के ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान पर भी अरुण साव ने विपक्ष को निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल देश में अराजकता का माहौल बनाने का प्रयास कर रहे हैं। इसके विपरीत भाजपा जनता के बीच जाकर विपक्ष की राजनीति और उसके कथित कारनामों को उजागर कर रही है।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस ऐसे मुद्दों को हवा दे रही है, जिनका आम जनता से कोई सीधा संबंध नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष देश को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है और ऐसे लोगों के समर्थन में खड़ा है, जो मतदाता बनने की पात्रता नहीं रखते। साव ने विदेशी षड्यंत्र के जरिए देश की व्यवस्था को अस्थिर करने की कोशिश किए जाने का आरोप भी लगाया।

कुल मिलाकर SIR और ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव लगातार तेज होता दिखाई दे रहा है।

दीपावली से पहले छत्तीसगढ़ के बुनकरों और महिला स्व-सहायता समूहों को बड़ी सौगात

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9 करोड़ 41 लाख रुपये का पारिश्रमिक सीधे बैंक खातों में अंतरित

बुनकरों और महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार देकर आर्थिक रूप से सशक्त बनाना हमारी प्राथमिकता : मंत्री गजेन्द्र यादव

रायपुर- दीपावली के पावन पर्व से ठीक पहले छत्तीसगढ़ के बुनकरों और सिलाई कार्य से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूहों के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशानुरूप और ग्रामोद्योग मंत्री गजेन्द्र यादव के विशेष निर्देशों के तहत, राज्य सरकार ने बुनकर सहकारी समितियों और महिला स्व-सहायता समूहों को उनके श्रम का पारिश्रमिक जारी कर दिया है। इसके तहत कुल 9 करोड़ 41 लाख रुपये की राशि आरटीजीएस (RTGS) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की गई है। समय पर भुगतान होने से इन परिवारों में दीवाली की खुशियां और अधिक दोगुनी हो गई हैं।

समय पर भुगतान से मजबूत हो रहा स्थानीय हुनर- मंत्री गजेन्द्र यादव

ग्रामोद्योग मंत्री गजेन्द्र यादव ने इस संबंध में प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि बुनकरों और महिला स्व-सहायता समूहों के कठिन परिश्रम का समय पर पारिश्रमिक भुगतान हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में हमारी सरकार स्थानीय हुनर को रोजगार से जोड़कर बुनकरों और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। दीपावली से पहले पारिश्रमिक मिलने से उनके परिवारों के जीवन में उत्साह और समृद्धि का संचार होगा।

मंत्री यादव ने आगे जोर देते हुए कहा कि वोकल फॉर लोकल की भावना को आत्मसात करते हुए बुनाई और गणवेश (यूनिफॉर्म) सिलाई के जरिए जमीनी स्तर पर सतत रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। महिलाओं के कौशल विकास और स्वरोजगार के दायरे को बढ़ाकर उनकी आय में वृद्धि करना सरकार का मुख्य ध्येय है।

9 करोड़ 41 लाख रुपये का पारिश्रमिक सीधे बैंक खातों में अंतरित

ग्रामोद्योग विभाग के सचिव सह प्रबंध संचालक राजेश सिंह राणा ने बताया कि इस वित्तीय वर्ष और त्योहारी सीजन के दौरान पारिश्रमिक का यह वितरण पूरी पारदर्शिता के साथ सीधे खातों में किया गया है।  प्रदेश के 26 जिलों की 302 बुनकर सहकारी समितियों को 7 करोड़ 60 लाख रुपये का भुगतान अक्टूबर 2026 में किया गया। 49 बुनकर सहकारी समितियों को 1 करोड़ 50 लाख रुपये तथा 128 महिला स्व-सहायता समूहों को 31 लाख रुपये का पारिश्रमिक 3 नवंबर को अतिरिक्त भुगतान किया गया।

चालू वित्तीय वर्ष (2026-27) की कुल उपलब्धियां

राज्य हाथकरघा संघ द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 में 3 नवंबर तक कुल 76 करोड़ 13 लाख 54 हजार रुपये की राशि सीधे बैंक खातों में भेजी जा चुकी है, जिसमें शामिल हैं।  बुनकर सहकारी समितियों  को  345 बुनकर सहकारी समितियों को बुनाई पारिश्रमिक के रूप में 54 करोड़ 87 लाख रुपये, 2005 महिला स्व-सहायता समूहों को सिलाई पारिश्रमिक के रूप में 21 करोड़ 17 लाख रुपये की राशि सीधे बैंक खातों में भेजी जा चुकी है।

बुनकरों को  कल्याणकारी सहायता

बुनकरों की आकस्मिक मृत्यु पर 29 आश्रित परिवारों को 5 लाख 80 हजार रुपये की आर्थिक सहायता अनुदान और हाथकरघा क्षेत्र के 11 पुरस्कृत हितग्राहियों को 3 लाख 74 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है।

सुकमा, बस्तर, कोरबा और जशपुर में पुनर्वासित महिलाओं के लिए नए अवसर

पारंपरिक कार्यों के साथ-साथ सुदूर और आकांक्षी जिलों में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की अनूठी पहल भी शुरू की गई है। इसके तहत सुकमा, बस्तर, कोरबा एवं जशपुर जिलों की 30 पुनर्वासित महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई का विशेष प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है।

राज्य हाथकरघा संघ के अनुपयोगी और कटपीस वस्त्रों का सदुपयोग करते हुए इनसे आकर्षक खिलौने, थैले (बैग) और वाटर बैग जैसे उत्पाद तैयार करवाने के कार्यादेश दिए जा रहे हैं। साथ ही, इन महिलाओं को घर पर ही निःशुल्क सिलाई मशीन उपलब्ध कराकर उनके लिए आय के नए और स्थायी अवसर विकसित किए जा रहे हैं, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।

सौरभ के बाद अब रवि उप्पल पर शिकंजा! दुबई में गिरफ्तारी की खबर, भारत लाने की तैयारी

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 रायपुर। महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप मामले में जांच एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर एक और बड़ी खबर सामने आई है। ऐप के कथित सह-संचालक और प्रमुख आरोपी रवि उप्पल को दुबई में गिरफ्तार किए जाने की सूचना है। हालांकि, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) सरकार की ओर से अभी तक गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इधर, प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) उसे भारत लाने की प्रक्रिया को लेकर तैयारी कर रहे हैं।


रवि उप्पल की गिरफ्तारी की खबर ऐसे समय आई है, जब महादेव ऐप के दूसरे प्रमुख आरोपी सौरभ चंद्राकर को हाल ही में ओमान से भारत लाया गया है। अब सौरभ की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों की नजर रवि उप्पल पर टिकी है। दोनों आरोपियों से पूछताछ के जरिए करोड़ों रुपये के कथित सट्टेबाजी नेटवर्क और उसके संचालन से जुड़े कई राज सामने आने की उम्मीद है।

दुबई में रवि उप्पल की गिरफ्तारी, आधिकारिक पुष्टि का इंतजार

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय जांच एजेंसियों को अनौपचारिक माध्यमों से रवि उप्पल को दुबई में हिरासत में लिए जाने की जानकारी मिली है। हालांकि, UAE सरकार की तरफ से इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

ऐसे में उसकी गिरफ्तारी की वास्तविक स्थिति और भारत प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को लेकर अभी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। ED और CBI इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया को लेकर तैयारी कर रही हैं।

दिसंबर 2023 में भी दुबई में पकड़ा गया था रवि उप्पल

भिलाई निवासी रवि उप्पल पर दुबई से महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप के संचालन में अहम भूमिका निभाने का आरोप है। अक्टूबर 2023 में उसके खिलाफ इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था।

दिसंबर 2023 में भी दुबई में उसे हिरासत में लिया गया था, लेकिन करीब 45 दिन बाद रिहा कर दिया गया। इसके बाद जनवरी 2024 में प्रवर्तन निदेशालय ने उसके प्रत्यर्पण के लिए अनुरोध किया था।

अब एक बार फिर उसकी गिरफ्तारी की खबर सामने आने से महादेव सट्टा ऐप मामले की जांच में तेजी आने की संभावना जताई जा रही है।

सौरभ चंद्राकर 8 दिन की CBI रिमांड पर

इधर, महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप के दूसरे प्रमुख आरोपी सौरभ चंद्राकर को बुधवार को रायपुर की विशेष CBI अदालत में पेश किया गया। अदालत ने पूछताछ के लिए उसे आठ दिन की कस्टोडियल रिमांड पर CBI को सौंपने की अनुमति दी है।

इसके साथ ही जांच एजेंसी को सौरभ चंद्राकर को दिल्ली स्थित अपने मुख्यालय ले जाकर पूछताछ करने की भी अनुमति मिल गई है। CBI अब उससे सट्टेबाजी ऐप के संचालन और पूरे नेटवर्क से जुड़े सवालों के जवाब तलाशेगी।

करोड़ों के लेन-देन और सट्टेबाजी सिंडिकेट की होगी पड़ताल

जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती महादेव ऐप के कथित आर्थिक नेटवर्क की पूरी जानकारी जुटाना है। CBI सौरभ चंद्राकर से ऐप के संचालन, पैसों के लेन-देन, सट्टेबाजी के नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका को लेकर पूछताछ करेगी।

एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश करेगी कि इस कथित सिंडिकेट का संचालन किन माध्यमों से होता था और देश-विदेश में इसके नेटवर्क से कौन-कौन लोग जुड़े हुए थे।

रवि उप्पल की गिरफ्तारी की खबर और सौरभ चंद्राकर की आठ दिन की CBI रिमांड ने महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप मामले को फिर चर्चा में ला दिया है। हालांकि, रवि उप्पल की गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि और भारत प्रत्यर्पण को लेकर अभी अंतिम जानकारी सामने आना बाकी है।

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