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स्मार्ट मीटर पर फैली भ्रांतियों की निकली हवा, आधिकारिक आंकड़ों ने बताई बिजली खपत घटने की असली वजह

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रायपुर- रायपुर सिटी रीजन के जून एवं जुलाई 2026 के बिजली उपभोग के आधिकारिक आंकड़ों के विश्लेषण से यह स्पष्ट हुआ है कि जुलाई माह में बिजली की खपत में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। जून 2026 में कुल बिजली खपत 131.27 मिलियन यूनिट (एमयू) थी, जो जुलाई में घटकर 89.38 मिलियन यूनिट रह गई। इस प्रकार एक माह में बिजली खपत में 31.91 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।

आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि अधिक बिजली उपयोग करने वाले सभी उपभोक्ता वर्गों में खपत के साथ-साथ उपभोक्ताओं की संख्या में भी कमी आई है। 600 यूनिट से अधिक बिजली उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं की संख्या में 64.23 प्रतिशत तथा उनकी कुल बिजली खपत में 38.13 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इसी प्रकार 401 से 600 यूनिट श्रेणी में उपभोक्ताओं की संख्या 33.99 प्रतिशत तथा बिजली खपत 32.58 प्रतिशत घटी है।

विश्लेषण से यह भी सामने आया है कि राज्य शासन की हाफ बिजली बिल योजना का सकारात्मक प्रभाव उपभोक्ताओं के बिजली उपयोग के स्वरूप में दिखाई दे रहा है। जून माह में 400 यूनिट तक बिजली उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं की संख्या 1 लाख 96 हजार 777 थी, जो जुलाई में बढ़कर 2 लाख 56 हजार 471 हो गई। यह 30.34 प्रतिशत की वृद्धि है। वहीं 400 यूनिट से अधिक बिजली उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं की संख्या 1 लाख 20 हजार 615 से घटकर 60 हजार 921 रह गई, जो लगभग 50 प्रतिशत की कमी है। इससे यह संकेत मिलता है कि बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं ने अपनी बिजली खपत को 400 यूनिट के भीतर रखने का प्रयास किया, जिससे उन्हें शासन की राहतकारी योजना का लाभ मिल सके।

आंकड़ों के अनुसार 0 से 100 यूनिट श्रेणी में उपभोक्ताओं की संख्या 53.12 प्रतिशत तथा 101 से 200 यूनिट श्रेणी में 51.79 प्रतिशत बढ़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मी का मौसम समाप्त होने, एयर कंडीशनर एवं कूलर जैसे विद्युत उपकरणों के उपयोग में कमी आने तथा ऊर्जा संरक्षण के प्रति बढ़ती जागरूकता का भी बिजली खपत में आई कमी पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

ऊर्जा विभाग के अधिकारियों के अनुसार रायपुर सिटी रीजन के आधिकारिक आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि जुलाई माह में बिजली की मांग में कमी आई है और उपभोक्ताओं ने अपनी बिजली खपत को नियंत्रित किया है। उपलब्ध आंकड़ों के विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि बिजली उपयोग में आया यह परिवर्तन मुख्यतः मौसमी परिस्थितियों, ऊर्जा संरक्षण की प्रवृत्ति तथा राज्य शासन की जनहितकारी योजनाओं के प्रभाव का परिणाम है।

आधिकारिक आंकड़ों का विश्लेषण यह भी दर्शाता है कि बड़ी संख्या में उपभोक्ता अब 400 यूनिट तक की श्रेणी में आ गए हैं, जिससे उन्हें शासन की राहतकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त हो रहा है। उपलब्ध तथ्यों एवं आंकड़ों के आधार पर स्मार्ट मीटर के संबंध में प्रचलित विभिन्न प्रकार की भ्रांतियों की पुष्टि नहीं होती।

शिक्षा से विकसित छत्तीसगढ़ तक: मुख्यमंत्री साय ने नीट क्वालीफाई विद्यार्थियों के साथ साझा किया भविष्य का रोडमैप

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रयास आवासीय विद्यालय के नीट क्वालीफाई विद्यार्थियों से किया प्रेरक संवाद

संवेदनशील डॉक्टर बनकर समाज और राष्ट्र की सेवा करने का दिया संदेश

मुख्यमंत्री साय ने विद्यार्थियों के सवालों का विस्तार से दिया जवाब:  शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, पर्यटन, रोजगार, सुशासन, नशामुक्ति और विकसित छत्तीसगढ़ के विजन पर रखे विचार

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित विशेष कार्यक्रम में प्रयास आवासीय विद्यालयों के नीट-2026 में सफल विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद किया। मुख्यमंत्री ने सभी विद्यार्थियों का मुख्यमंत्री निवास में स्वागत करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं और कहा कि यह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है कि प्रदेश में संचालित प्रयास आवासीय विद्यालयों के गरीब एवं आदिवासी समुदाय के विद्यार्थियों ने नीट जैसी कठिन परीक्षा में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में वर्तमान में 17 प्रयास आवासीय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। इन विद्यालयों का उद्देश्य दूरस्थ, आदिवासी एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रतिभाशाली बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की इस सफलता में उनके माता-पिता का आशीर्वाद, गुरुजनों का समर्पण और विद्यार्थियों की कठोर मेहनत समान रूप से शामिल है। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों के साथ-साथ उनके अभिभावकों और शिक्षकों को भी हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आप सभी भविष्य के डॉक्टर हैं। समाज में डॉक्टर का स्थान भगवान के बाद माना जाता है। भगवान हमें जन्म देते हैं और डॉक्टर जीवन बचाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे केवल कुशल चिकित्सक ही नहीं, बल्कि संवेदनशील, व्यवहारिक और मिलनसार डॉक्टर भी बनें। उन्होंने कहा कि मरीज के साथ अच्छा व्यवहार स्वयं कई बीमारियों के उपचार का माध्यम बन जाता है। उन्होंने विद्यार्थियों से समाज, प्रदेश और देश की सेवा को अपना सर्वोच्च दायित्व मानने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ आज शिक्षा सहित हर क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने अपनी संघर्षपूर्ण शिक्षा यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि आज विद्यार्थियों को शासन की ओर से पहले की तुलना में कहीं अधिक संसाधन और अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए प्रदेशभर में नालंदा परिसर संचालित किए जा रहे हैं तथा 34 नए नालंदा परिसर निर्माणाधीन हैं, जहां सातों दिन 24 घंटे ऑनलाइन एवं ऑफलाइन अध्ययन सामग्री उपलब्ध रहेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली स्थित ट्रायबल यूथ हॉस्टल में सीटों की संख्या 50 से बढ़ाकर 200 कर दी गई है। वहां विद्यार्थियों को निःशुल्क आवास एवं भोजन की सुविधा दी जा रही है। उन्होंने गर्व के साथ बताया कि इसी वर्ष ट्रायबल यूथ हॉस्टल के 13 विद्यार्थियों ने संघ लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा में सफलता प्राप्त की है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य निर्माण के समय प्रदेश में केवल एक मेडिकल कॉलेज था, जबकि आज निजी एवं शासकीय संस्थानों को मिलाकर 15 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। राज्य सरकार पांच नए मेडिकल कॉलेज भी स्थापित कर रही है, जिससे एमबीबीएस की 250 अतिरिक्त सीटें उपलब्ध होंगी।

संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ किए गए देशव्यापी 'नशा मुक्त युवा, विकसित भारत संकल्प अभियान' का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज देशभर में करोड़ों लोगों ने नशा नहीं करने की शपथ ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह अभियान स्वस्थ भारत के निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है, जो आगामी दो वर्षों तक संचालित होगा तथा इसमें माय भारत वालंटियर्स सहित बड़ी संख्या में युवा सहभागी बन रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि यदि युवा स्वस्थ, संस्कारित, परिश्रमी और नशामुक्त रहेंगे तो स्वस्थ छत्तीसगढ़ और स्वस्थ भारत का निर्माण संभव होगा। उन्होंने कहा कि नशा व्यक्ति के शरीर और मस्तिष्क दोनों को प्रभावित करता है, अपराध को बढ़ावा देता है, पारिवारिक संबंधों को कमजोर करता है तथा पूरे परिवार को संकट में डाल देता है। उन्होंने युवाओं से स्वयं नशे से दूर रहने और समाज को भी इसके प्रति जागरूक करने का आह्वान किया।

जगदलपुर प्रयास आवासीय विद्यालय की छात्रा नेल्सा के प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार शिक्षा के संसाधनों को लगातार बढ़ा रही है। प्रयास आवासीय विद्यालय इसका एक उदाहरण हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाएं संचालित की जा रही हैं। श्रमिक परिवारों के बच्चे यदि विदेश में अध्ययन करना चाहते हैं तो उनका संपूर्ण व्यय राज्य सरकार वहन करती है। उन्होंने बताया कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए जिला मुख्यालयों एवं प्रमुख शहरों में 34 नालंदा परिसर निर्माणाधीन हैं, जहां सातों दिन 24 घंटे ऑनलाइन एवं ऑफलाइन अध्ययन सामग्री उपलब्ध रहेगी। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि संसाधनों की कमी किसी भी प्रतिभाशाली विद्यार्थी की शिक्षा में बाधा न बने।

अंबिकापुर प्रयास विद्यालय की छात्रा यामिनी पैकरा के प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में नई शिक्षा नीति लागू की गई है, जिसके अंतर्गत रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों को शामिल किया गया है। शासकीय विद्यालयों को निजी विद्यालयों के समकक्ष विकसित करने के लिए स्मार्ट क्लास प्रारंभ की जा रही हैं, विद्यालयों का नवीनीकरण किया जा रहा है तथा शिक्षकों को नियमित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब शासकीय विद्यालयों में भी निजी विद्यालयों की तरह पेरेंट्स-टीचर मीटिंग आयोजित की जा रही है। विशेष अवसरों पर अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा न्योता भोज जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं ताकि बच्चों को मध्यान्ह भोजन के अतिरिक्त पौष्टिक भोजन भी मिल सके। जवाहर उत्कर्ष योजना के माध्यम से बच्चों को निजी विद्यालयों में भी प्रवेश दिलाया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में शासकीय विद्यालय निजी विद्यालयों से भी बेहतर बनेंगे।

जगदलपुर की छात्रा दिलेश्वरी साहू ने युवाओं की राजनीति एवं प्रशासन में भागीदारी को लेकर प्रश्न पूछा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में कोई भी कार्य छोटा या बड़ा नहीं होता। डॉक्टर बनकर भी समाज और राष्ट्र की बड़ी सेवा की जा सकती है। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने सपनों के अनुरूप नौकरी, कृषि, राजनीति, जनसेवा अथवा व्यापार जैसे किसी भी क्षेत्र का चयन करना चाहिए, लेकिन अपने कर्तव्यों के प्रति निष्ठा और संस्कार हमेशा सर्वोपरि होने चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीति सेवा का एक प्रभावी माध्यम है और लोकतंत्र के माध्यम से समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है। सेवा और कर्तव्य एक-दूसरे के पूरक हैं।सरगुजा के छात्र समीर करकेट्टा के प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ लगभग चार से पांच दशकों तक नक्सलवाद से प्रभावित रहा। डबल इंजन सरकार के गठन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प, सुरक्षा बलों के अदम्य साहस और स्थानीय जनता के सहयोग से 31 मार्च 2026 को प्रदेश नक्सलमुक्त हुआ। उन्होंने कहा कि अब बस्तर और सरगुजा में पर्यटन की अपार संभावनाएं विकसित हो रही हैं। चित्रकोट, तीरथगढ़ और रानीदाह जैसे प्राकृतिक पर्यटन स्थलों के साथ अबूझमाड़ का विशाल वन क्षेत्र विश्वभर के पर्यटकों को आकर्षित कर सकता है। उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा विश्व के 60 देशों के 20 प्रमुख पर्यटन स्थलों में बस्तर के धुड़मारास को स्थान दिया गया है। नई उद्योग नीति 2024-30 में पर्यटन क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दी गई है तथा होमस्टे योजना के माध्यम से जनजातीय परिवारों को पांच कमरों के मकान निर्माण के लिए ऋण एवं अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि भोरमदेव मंदिर को भारत सरकार की प्रसाद योजना में शामिल किया गया है, जिसके लिए 168 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। साथ ही दंतेश्वरी, बम्लेश्वरी, चंद्रहासिनी, महामाया एवं बागेश्वरी शक्तिपीठों का भी जीर्णोद्धार किया जा रहा है। राम वन गमन पथ के माध्यम से भगवान श्रीराम से जुड़े स्थलों का विकास भी किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद की समाप्ति के बाद बस्तर में पर्यटन उद्योग के माध्यम से लाखों रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

महासमुंद के छात्र हेमंत यादव के प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ का भविष्य अत्यंत उज्ज्वल है। यह देश के मध्य में स्थित राज्य है और चारों महानगरों से बेहतर संपर्क रखता है। प्रदेश खनिज संपदा से समृद्ध है। देश के लगभग 19 से 20 प्रतिशत लौह अयस्क का उत्पादन छत्तीसगढ़ में होता है। यहां कोयला, बॉक्साइट, हीरा, सोना, लिथियम और यूरेनियम जैसे बहुमूल्य खनिज उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद समाप्त होने के बाद सुरक्षा शिविरों को सेवा डेरे के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां स्कूल, अस्पताल और प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। प्रदेश बिजली उत्पादन में सरप्लस राज्य है। वर्तमान में लगभग 30 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है तथा ऊर्जा क्षेत्र में लगभग 3.50 लाख करोड़ रुपये के निवेश समझौते हुए हैं, जिनसे भविष्य में अतिरिक्त 30 हजार मेगावाट उत्पादन होगा। इससे रोजगार और राजस्व दोनों बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ धान का कटोरा है तथा 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक की सिंचाई योजनाओं को स्वीकृति दी गई है। बस्तर संभाग में देउरगांव और मटनार सिंचाई परियोजनाओं पर लगभग 1700 करोड़ रुपये तथा सिकासार-कोड़ार पाइपलाइन परियोजना पर लगभग 2500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि किसानों को समृद्ध बनाने के लिए पशुपालन, मत्स्य पालन, हर्बल उत्पादन, राइस मिल, कोल्ड स्टोरेज तथा मूल्य संवर्धन आधारित उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है। नई उद्योग नीति में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ देश का अग्रणी राज्य बनेगा।

सरगुजा के छात्र कोमल पटेल के प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में भारत ने कॉमनवेल्थ एवं ओलंपिक जैसे अंतरराष्ट्रीय खेलों में बेहतर प्रदर्शन किया है। उन्होंने बताया कि हाल ही में कॉमनवेल्थ गेम्स में छत्तीसगढ़ की बेटी ज्ञानेश्वरी यादव ने वेटलिफ्टिंग में रजत पदक जीतकर प्रदेश और देश का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि खेलो इंडिया एवं फिट इंडिया जैसे अभियान युवाओं को नई दिशा दे रहे हैं। जशपुर में 67 करोड़ रुपये की लागत से स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स तथा 60 करोड़ रुपये से आर्चरी अकादमी का निर्माण किया जा रहा है। राज्य सरकार ने खेल अलंकरण समारोह प्रारंभ किया है, जिसके तहत उत्कृष्ट खिलाड़ियों को आर्थिक सहायता, प्रशस्ति पत्र तथा शासकीय सेवा का लाभ दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार की खेल नीति के अनुसार ओलंपिक में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को 21 लाख रुपये, स्वर्ण पदक विजेता को 3 करोड़ रुपये, रजत पदक विजेता को 2 करोड़ रुपये तथा कांस्य पदक विजेता को 1 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।  उन्होंने शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम तथा उत्कृष्ट खेल मिशन का भी उल्लेख किया।राजनांदगांव की छात्रा प्राची मलगामे के प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने अपने जीवन संघर्षों का उल्लेख करते हुए बताया कि 10 वर्ष की आयु में पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। उन्होंने खेती-बाड़ी कर परिवार का पालन-पोषण किया। उन्होंने कहा कि राजनीति में आने का कोई पूर्व निर्धारित लक्ष्य नहीं था, लेकिन जो भी दायित्व मिला, उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में आज भी वे प्रदेश की साढ़े तीन करोड़ जनता के विश्वास पर खरा उतरने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि कोई भी कार्य छोटा नहीं होता, केवल उसे पूरी ईमानदारी और समर्पण से करना चाहिए।

सरगुजा की शाहिना अंसारी के प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने स्वच्छता को जनजीवन का महत्वपूर्ण आधार माना था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत मिशन के माध्यम से इसे जनआंदोलन का रूप दिया। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त 2014 को लाल किले से दिए गए आह्वान के बाद देश में स्वच्छता के प्रति व्यापक जागरूकता आई है। गांव-गांव में शौचालय बने हैं और लोगों की आदतों में सकारात्मक परिवर्तन आया है। 

दुर्ग के छात्र निखिल कुमार ठाकुर के प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा शक्ति ही राष्ट्र शक्ति है। युवाओं में संस्कार, बड़ों के प्रति सम्मान, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्राचीन काल में भारत विश्वगुरु था और नालंदा तथा तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालय विश्वभर के विद्यार्थियों को आकर्षित करते थे। लंबे समय तक विदेशी शासन के कारण यह परंपरा प्रभावित हुई, लेकिन आज भारत आर्थिक दृष्टि से विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक, ऑपरेशन सिंदूर, मेक इन इंडिया, स्वदेशी वैक्सीन निर्माण और ब्रह्मोस जैसी उपलब्धियां नए भारत की शक्ति का परिचायक हैं। उन्होंने युवाओं से राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को बताया कि हाल ही में प्रारंभ की गई सीएम हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से प्रदेशवासी अपनी समस्याएं और सुझाव सीधे शासन तक पहुंचा सकते हैं। इस व्यवस्था में लगभग 8 हजार अधिकारियों को शिकायतों के निराकरण के लिए जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी भी अपने हॉस्टल अथवा शिक्षा से जुड़ी समस्याओं और सुझावों को इस माध्यम से दर्ज करा सकते हैं। उन्होंने बताया कि प्रारंभ के डेढ़ माह में ही इस व्यवस्था को अच्छा प्रतिसाद मिला है और बिजली, पानी, नामांतरण, खाता विभाजन, सीमांकन जैसी अनेक समस्याओं का त्वरित निराकरण हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने अंत में बताया कि राज्य सरकार मुख्यमंत्री डैशबोर्ड भी विकसित कर रही है, जिसके माध्यम से प्रदेश के सभी शासकीय संस्थानों को जोड़ा जाएगा। इस डैशबोर्ड के जरिए मुख्यमंत्री निवास से ही स्कूलों, अस्पतालों, शिक्षकों की उपस्थिति, राशन की उपलब्धता सहित विभिन्न सेवाओं की रियल टाइम मॉनिटरिंग संभव होगी। उन्होंने कहा कि सुशासन, पारदर्शिता और तकनीक आधारित प्रशासन के माध्यम से प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक बेहतर सेवाएं पहुंचाना राज्य सरकार का संकल्प है।

वर्तमान चुनौतियों और आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार नए आपराधिक कानूनों ने न्याय व्यवस्था में लाया ऐतिहासिक परिवर्तन : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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स्ट्रेंथिंग डिजिटल जस्टिस राज्य स्तरीय कार्यशाला में मुख्यमंत्री साय ने कहा— आम नागरिक को त्वरित, पारदर्शी और समयबद्ध न्याय दिलाना नए कानूनों का मूल उद्देश्य

समन्वित प्रयासों से नए कानूनों और डिजिटल न्याय प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ बनेगा देश का अग्रणी राज्य - मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा

ई-साक्ष्य, ई-समन, न्याय श्रुति, सीसीटीएनएस और आईसीजेएस जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं से न्याय प्रणाली हो रही अधिक प्रभावी और जवाबदेह

नए कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य में सतत प्रशिक्षण, मॉनिटरिंग और तकनीकी क्षमता विकास पर विशेष जोर

रायपुर- वर्तमान समय की आवश्यकताओं और बदलती चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए नए आपराधिक कानून भारत की न्याय व्यवस्था में ऐतिहासिक परिवर्तन के वाहक बने हैं। इन कानूनों का उद्देश्य केवल अपराधियों को दंडित करना नहीं, बल्कि आम नागरिक को त्वरित, पारदर्शी, सुलभ और समयबद्ध न्याय उपलब्ध कराना है। आधुनिक तकनीक, डिजिटल प्रणालियों और वैज्ञानिक साक्ष्यों को न्याय प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बनाकर न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी, विश्वसनीय और जवाबदेह बनाया गया है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर में आयोजित "स्ट्रेंथिंग डिजिटल जस्टिस" राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए यह बात कही। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लगभग डेढ़ सौ वर्ष पुराने औपनिवेशिक कानूनों के स्थान पर भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम लागू किए गए हैं। इन कानूनों की मूल भावना नागरिक-केंद्रित न्याय व्यवस्था की स्थापना है, जिसमें पीड़ित को शीघ्र न्याय मिले और अपराधी कानून के शिकंजे से बच न सके।

उन्होंने कहा कि पुराने कानून ऐसे समय में बने थे, जब डिजिटल तकनीक, सीसीटीवी, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और आधुनिक फॉरेंसिक विज्ञान का अस्तित्व नहीं था। आज अपराधों की प्रकृति बदल चुकी है और तकनीक न्याय व्यवस्था का अनिवार्य हिस्सा बन गई है। नए कानूनों ने डिजिटल साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल चैट, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड तथा वैज्ञानिक फॉरेंसिक जांच को विधिक मान्यता देकर अपराध अनुसंधान और अभियोजन को नई मजबूती प्रदान की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी की शाखा प्रारंभ होने से अपराध अनुसंधान और न्यायिक प्रक्रिया को नई दिशा मिलेगी। ई-साक्ष्य जैसी व्यवस्था इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के सुरक्षित संरक्षण और उनकी प्रामाणिकता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक के उपयोग से न्याय प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज और प्रभावी हुई है। पहले समन की तामील में कई दिन लग जाते थे, जबकि अब ई-समन के माध्यम से सूचना तत्काल संबंधित व्यक्ति तक पहुंच रही है और उसकी डिजिटल ट्रैकिंग भी संभव हो गई है। न्याय श्रुति जैसी व्यवस्था न्यायालयीन कार्यवाही के सुरक्षित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने के साथ-साथ ऑनलाइन एवं हाइब्रिड सुनवाई को भी अधिक सक्षम बना रही है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (सीसीटीएनएस) के माध्यम से देशभर के पुलिस थाने डिजिटल रूप से एक-दूसरे से जुड़े हैं। इससे अपराधियों का रिकॉर्ड तत्काल उपलब्ध हो जाता है और पुलिस को त्वरित कार्रवाई में सुविधा मिलती है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के सभी थाने ऑनलाइन मोड में कार्यरत हैं तथा राज्य में अब तक 1 लाख 97 हजार 547 एफआईआर ऑनलाइन दर्ज की जा चुकी हैं। नागरिकों को डिजिटल हस्ताक्षरित एफआईआर की प्रति भी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस) न्यायपालिका, पुलिस, अभियोजन, जेल और अन्य संबंधित संस्थाओं के बीच सुरक्षित डिजिटल समन्वय स्थापित कर रहा है। इससे सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान संभव हुआ है और न्यायिक प्रक्रिया में होने वाली अनावश्यक देरी में उल्लेखनीय कमी आई है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि तकनीक निरंतर विकसित हो रही है। इसलिए न्याय व्यवस्था से जुड़े प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी को समय-समय पर प्रशिक्षण प्राप्त करना आवश्यक है। राज्य सरकार नए कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सतत प्रशिक्षण, क्षमता विकास और नियमित मॉनिटरिंग के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने कहा कि तीनों नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन से राज्य की आपराधिक न्याय प्रणाली अधिक पारदर्शी, वैज्ञानिक, त्वरित और तकनीक आधारित बनेगी। उन्होंने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, भारतीय न्याय संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम देश की न्याय व्यवस्था में व्यापक बदलाव लेकर आए हैं। इन कानूनों की सफलता केवल उनके लागू होने में नहीं, बल्कि सभी संबंधित संस्थाओं द्वारा उनके प्रभावी क्रियान्वयन में निहित है।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि आज की चर्चा केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपराधिक अनुसंधान और न्यायिक प्रक्रिया में व्यापक परिवर्तन का प्रतीक है। ई-साक्ष्य, ई-चालान, न्याय श्रुति तथा डिजिटल फॉरेंसिक्स जैसी व्यवस्थाएं नए कानूनों की मूल भावना को साकार करने के महत्वपूर्ण माध्यम हैं। विशेष रूप से ई-साक्ष्य को उन्होंने साक्ष्य प्रबंधन की समग्र एवं एकीकृत प्रणाली बताते हुए कहा कि इससे साक्ष्यों की विश्वसनीयता और प्रामाणिकता सुनिश्चित होगी।

उन्होंने कहा कि न्याय की प्रक्रिया अपराध स्थल से प्रारंभ होती है। यदि प्रारंभिक जांच वैज्ञानिक, निष्पक्ष और पारदर्शी होगी, तो पूरी न्यायिक प्रक्रिया अधिक मजबूत और विश्वसनीय बनेगी। तकनीक न्यायिक विवेक का स्थान नहीं ले सकती, लेकिन उसे अधिक प्रभावी अवश्य बना सकती है।

मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि जून माह के दौरान जिला न्यायालयों में लगभग 9,910 मामलों तथा उच्च न्यायालय में 58 मामलों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की गई। उन्होंने सभी हितधारकों से न्याय श्रुति प्लेटफॉर्म का व्यापक उपयोग करने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 ने इलेक्ट्रॉनिक एवं डिजिटल अभिलेखों को व्यापक कानूनी मान्यता प्रदान की है, जबकि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 ने अपराध पंजीयन, अनुसंधान, तलाशी, जब्ती, वीडियो रिकॉर्डिंग तथा इलेक्ट्रॉनिक संचार जैसी प्रक्रियाओं में तकनीक के उपयोग को बढ़ावा दिया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी संबंधित संस्थाओं के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ नए आपराधिक कानूनों एवं डिजिटल न्याय प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन में देश का अग्रणी राज्य बनेगा।

उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि यह कार्यशाला न्याय व्यवस्था के इतिहास में मील का पत्थर सिद्ध होगी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम की समीक्षा के बाद इसके त्वरित क्रियान्वयन के निर्देश दिए गए, जिसके परिणामस्वरूप न्याय एवं कानून व्यवस्था के डिजिटलीकरण की दिशा में तेजी से कार्य हो रहा है।
उन्होंने कहा कि नए आपराधिक कानूनों की मूल भावना यह सुनिश्चित करना है कि निचली अदालत से लेकर उच्चतम न्यायालय तक न्यायिक प्रक्रिया अनावश्यक रूप से लंबित न रहे और प्रत्येक नागरिक को समयबद्ध न्याय मिल सके। उन्होंने "वन डेटा, वन एंट्री" की अवधारणा पर कार्य करने, एफआईआर की मैनुअल प्रक्रिया समाप्त करने तथा ई-फॉरेंसिक, ई-साक्ष्य, न्याय श्रुति, सीसीटीएनएस, नेफिस, सीआरपीआई एप्लिकेशन और डीएनए सैंपलिंग जैसी आधुनिक प्रणालियों के व्यापक उपयोग पर बल दिया।

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार न्याय व्यवस्था के आधुनिकीकरण के लिए आवश्यक सभी संसाधन उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी न्याय सुनिश्चित किया जा सके।

कार्यक्रम में विधि एवं विधायी कार्य मंत्री गजेंद्र यादव, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एन.के. चन्द्रवंशी, उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायमूर्तिगण, प्रमुख सचिव गृह निहारिका बारिक सिंह, प्रमुख सचिव विधि एवं विधायी कार्य विभाग सुषमा सावंत, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, विभिन्न जिलों के न्यायाधीश, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, सीसीटीएनएस के नोडल अधिकारी, अभियोजन अधिकारी, एफएसएल के अधिकारी, मेडिकल कॉलेजों के चिकित्सक, विधि विशेषज्ञ तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

NCC साइक्लोथॉन 2026 का आयोजन, स्वतंत्रता के 79 वर्ष पूरे होने पर युवाओं को दिया फिटनेस और राष्ट्रसेवा का संदेश

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नई दिल्ली- भारत की स्वतंत्रता के 79 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) ने रविवार (2 अगस्त 2026) को NCC साइक्लोथॉन 2026 का आयोजन किया। इस पहल का उद्देश्य युवाओं को फिटनेस, पर्यावरण संरक्षण और सतत जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना तथा देशभक्ति, अनुशासन, एकता और राष्ट्रीय सेवा जैसे NCC के मूल्यों को सुदृढ़ करना था।

साइक्लोथॉन को केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, विश्व प्रसिद्ध मुक्केबाज एम.सी. मैरी कॉम, दिग्गज टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस तथा एनसीसी के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल वीरेंद्र वत्स भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के तहत 79 एनसीसी कैडेटों ने स्वतंत्रता के 79 वर्षों का प्रतीकात्मक संदेश देते हुए 79 किलोमीटर की साइकिल यात्रा पूरी की। साइक्लोथॉन की शुरुआत मेजर ध्यानचंद राष्ट्रीय स्टेडियम से हुई और राष्ट्रीय राजधानी के प्रमुख स्थलों से गुजरते हुए यात्रा का समापन भी वहीं हुआ।

"स्वच्छ भारत, हरित भारत, फिट इंडिया" थीम पर आयोजित इस साइक्लोथॉन के माध्यम से टीबी मुक्त भारत, स्वच्छ भारत अभियान, एक पेड़ मां के नाम और हर घर तिरंगा जैसे राष्ट्रीय अभियानों के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया गया। साथ ही लोगों को पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ परिवहन के रूप में साइकिल अपनाने, कार्बन उत्सर्जन कम करने तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

यह आयोजन केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि शारीरिक फिटनेस, पर्यावरण संरक्षण, सड़क सुरक्षा और जिम्मेदार नागरिकता के प्रति जागरूकता फैलाने का महत्वपूर्ण मंच भी बना। कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं को अनुशासन, टीम भावना, धैर्य और सामुदायिक सेवा की भावना अपनाकर समाज में सकारात्मक बदलाव के दूत बनने का आह्वान किया गया।

NCC साइक्लोथॉन 2026 ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि स्वस्थ, हरित और सशक्त भारत के निर्माण में युवाओं की सक्रिय भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने वर्चुअली दिखाई PBG सोल्जराथॉन को हरी झंडी, सैनिकों के सम्मान में दौड़े हजारों प्रतिभागी

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नई दिल्ली- भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (2 अगस्त 2026) राष्ट्रपति भवन के प्रांगण से आयोजित समारोह में प्रेसिडेंट्स बॉडीगार्ड (PBG) सोल्जराथॉन को वर्चुअली हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने कार्यक्रम की स्मृति में विशेष डाक आवरण (स्पेशल पोस्टल कवर) का भी विमोचन किया। कार्यक्रम में मिजोरम के राज्यपाल एवं पहल के संरक्षक जनरल (डॉ.) वी.के. सिंह (सेवानिवृत्त) भी उपस्थित रहे। दौड़ का आयोजन करियप्पा परेड ग्राउंड, दिल्ली कैंट में किया गया।

'Run for Soldiers, Run with Soldiers' की थीम पर आयोजित सोल्जराथॉन का उद्देश्य आम नागरिकों और भारतीय सशस्त्र बलों के बीच संबंधों को और मजबूत बनाना है। इस वर्ष कार्यक्रम का मुख्य विषय "Supporting Real Heroes – the Armed Forces of India" रखा गया, जिसके माध्यम से देश के वीर सैनिकों के साहस, समर्पण और बलिदान को सम्मान दिया गया तथा नागरिकों से उनके प्रति एकजुटता व्यक्त करने का आह्वान किया गया।

सोल्जराथॉन में प्रतिभागियों के लिए 3 किलोमीटर, 5 किलोमीटर और 10 किलोमीटर की दौड़ आयोजित की गई। बड़ी संख्या में नागरिकों, पूर्व सैनिकों और सैन्य कर्मियों ने इसमें भाग लेकर सैनिकों के प्रति अपना सम्मान और समर्थन व्यक्त किया।

सोल्जराथॉन से प्राप्त आय का उपयोग सशस्त्र बलों के पैराप्लेजिक पुनर्वास केंद्र (Paraplegic Rehabilitation Centre), युद्ध में घायल एवं शहीद सैनिकों के परिवारों और उनके आश्रितों के कल्याण सहित विभिन्न सामाजिक एवं कल्याणकारी कार्यों के लिए किया जाएगा। वहीं PBG सोल्जराथॉन से प्राप्त सहयोग का उपयोग प्रेसिडेंट्स बॉडीगार्ड के घोड़ों और जवानों के कल्याण के लिए किया जाएगा।

यह आयोजन सैनिकों के प्रति सम्मान, राष्ट्रभक्ति और नागरिक-सैन्य सहयोग की भावना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।


राष्ट्रपति भवन में गूंजी बस्तर की जनजातीय संस्कृति

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 ​रायपुर : बस्तर के घने जंगलों, अनूठी सामाजिक व्यवस्था और समृद्ध जनजातीय विरासत की गूंज अब देश के सर्वोच्च मंच राष्ट्रपति भवन तक जा पहुंची है। नारायणपुर जिले के पारंपरिक मांझी-चालकी और 'बस्तर पंडुम' प्रतियोगिता के विजेताओं का एक विशेष प्रतिनिधिमंडल हाल ही में नई दिल्ली पहुंचा, जहां उन्होंने महामहिम राष्ट्रपति से सौजन्य मुलाकात की। इस आत्मीय भेंट के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति को बस्तर की जीवंत परंपराओं, लोक कलाओं और सदियों पुरानी सांस्कृतिक पहचान से रूबरू कराया।


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को बस्तर की सांस्कृतिक पहचान से रूबरू कराने के लिए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने 30 जुलाई 2026 में राष्ट्रपति भवन का दौरा किया, जिसमें बस्तर पंडुम के विजेता, मांझी-चालकी और पद्मश्री सम्मानित कलाकार शामिल थे।


​इस ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत 27 जुलाई को नारायणपुर से हुई थी, जब नगरपालिका अध्यक्ष इंद्रप्रसाद बघेल ने हरी झंडी दिखाकर इस दल को दिल्ली के लिए रवाना किया था। पूरे जिले के लिए यह एक अत्यंत गर्व का क्षण था। इसके बाद 30 जुलाई को दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में बस्तर की जनजातीय संस्कृति को राष्ट्रीय पटल पर प्रस्तुत करने का यह सुनहरा अवसर आया।


​मुलाकात के दौरान बस्तर की कला और परंपरा के प्रमुख ध्वजवाहकों ने अपनी माटी का प्रतिनिधित्व किया। इनमें 'बस्तर पंडुम' के जनजातीय आभूषण विधा की विजेता मुंगड़ी कोर्राम और सुदनी दुग्गा शामिल थीं, जिन्होंने पारंपरिक आभूषणों के सौंदर्य और उनके सांस्कृतिक महत्व की जानकारी साझा की। वहीं, बस्तर की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था का नेतृत्व करते हुए एड़का परगना के मांझी राजाराम, करंगाल परगना के मांझी सुधवाराम करंगा, गोटाली परगना के मांझी मंगतू राम ध्रुव, नूरदेश परगना के मांझी गुड्डू पोटाई तथा करंगाल परगना के चालकी सोमारू राम ने बस्तर की पारंपरिक सामाजिक संरचना और रीति-रिवाजों का परिचय दिया।

​प्रतिनिधिमंडल की इस मुलाकात से न केवल नारायणपुर और समूचा बस्तर संभाग गौरवान्वित महसूस कर रहा है, बल्कि इससे राष्ट्रीय स्तर पर बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को एक नई पहचान मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मंचों से जनजातीय कला, परंपराओं और लोक धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन को अभूतपूर्व प्रोत्साहन मिलेगा।

राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में लोक भवन से ‘नशा मुक्त युवा विकसित भारत संकल्प अभियान’ का शुभारंभ

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 रायपुर : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर आज देशभर में प्रारंभ हुए ‘नशा मुक्त युवा विकसित भारत संकल्प अभियान’ के तहत राजधानी रायपुर स्थित लोक भवन में राज्य स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राज्यपाल रमेन डेका एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की गरिमामयी उपस्थिति में बड़ी संख्या में युवा, छात्र-छात्राएं, शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि, स्वयंसेवी संगठन तथा विभिन्न युवा संगठनों के सदस्य शामिल हुए। कार्यक्रम में उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने नशामुक्त भारत के निर्माण का संकल्प लिया और समाज को नशे के दुष्प्रभावों से मुक्त बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प दोहराया।


इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली से वर्चुअल माध्यम से देशभर के युवाओं को संबोधित करते हुए 100 सप्ताह तक चलने वाले इस राष्ट्रव्यापी जन-जागरूकता अभियान का शुभारंभ किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि नशा केवल व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को प्रभावित करता है। विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में युवाओं की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है और यदि युवा नशे से दूर रहकर अपनी ऊर्जा, प्रतिभा और क्षमता का सकारात्मक उपयोग करें, तो भारत को विकसित राष्ट्र बनने से कोई नहीं रोक सकता। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं से स्वयं नशामुक्त जीवन अपनाने के साथ-साथ अपने परिवार, मित्रों और समाज को भी इस दिशा में जागरूक करने का आह्वान किया।

लोक भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन का सीधा प्रसारण बड़ी संख्या में उपस्थित युवाओं ने उत्साहपूर्वक देखा। राज्यपाल श्री रमेन डेका एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में सभी प्रतिभागियों ने नशामुक्ति की शपथ ली। कार्यक्रम में युवाओं को नशीले पदार्थों के सेवन से होने वाले शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आर्थिक दुष्प्रभावों की जानकारी दी गई तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, सकारात्मक सोच विकसित करने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का संदेश दिया गया।

उल्लेखनीय है कि ‘नशा मुक्त युवा विकसित भारत संकल्प अभियान’ 2 अगस्त 2026 से प्रारंभ होकर आगामी 100 सप्ताह तक देशभर में संचालित किया जाएगा। अभियान के अंतर्गत विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस), राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी), माय भारत युवा संगठन तथा अन्य युवा संगठनों के सहयोग से विविध जन-जागरूकता गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी। इनमें नशामुक्ति शपथ कार्यक्रम, जागरूकता रैलियाँ, पोस्टर एवं चित्रकला प्रतियोगिताएँ, वाद-विवाद, निबंध लेखन, नुक्कड़ नाटक, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, लघु फिल्म प्रदर्शन, सोशल मीडिया अभियान तथा सामुदायिक संवाद जैसे कार्यक्रम शामिल होंगे।

अभियान का उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना, उन्हें सकारात्मक जीवन मूल्यों से जोड़ना तथा विकसित भारत के निर्माण में उनकी सक्रिय और जिम्मेदार भागीदारी सुनिश्चित करना है। केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों से यह अभियान समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाकर इसे जनभागीदारी का व्यापक आंदोलन बनाया जाएगा।

इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, विधिक सलाहकार सत्यभामा अजय दुबे, रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह, विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में युवा एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

दोस्ती: जीवन का सबसे खूबसूरत रिश्ता, फ्रेंडशिप डे पर खास

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 जीवन में कुछ रिश्ते जन्म से मिलते हैं, लेकिन दोस्ती एक ऐसा रिश्ता है जिसे हम अपनी पसंद और विश्वास से चुनते हैं। यही कारण है कि मित्रता को दुनिया का सबसे अनमोल और निस्वार्थ रिश्ता माना जाता है। हर वर्ष अगस्त माह के पहले रविवार को मनाया जाने वाला फ्रेंडशिप डे हमें अपने दोस्तों के प्रति सम्मान, विश्वास और प्रेम व्यक्त करने का अवसर देता है।

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जहां रिश्तों के लिए समय निकालना मुश्किल होता जा रहा है, वहीं सच्चा दोस्त हर सुख-दुख में साथ खड़ा नजर आता है। बचपन की शरारतों से लेकर स्कूल, कॉलेज, नौकरी और जीवन के हर पड़ाव तक दोस्त हमारी यादों और अनुभवों का अहम हिस्सा बन जाते हैं। कठिन परिस्थितियों में दोस्त का साथ न केवल हौसला बढ़ाता है, बल्कि जीवन को नई दिशा भी देता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत मित्रता मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बेहद लाभकारी होती है। अच्छे दोस्त तनाव कम करने, आत्मविश्वास बढ़ाने और सकारात्मक सोच विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यही कारण है कि मित्रता को केवल एक सामाजिक संबंध नहीं, बल्कि भावनात्मक सहारे का मजबूत आधार भी माना जाता है।

समय के साथ दोस्ती का स्वरूप जरूर बदला है। अब सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से लोग दूर रहकर भी जुड़े रहते हैं, लेकिन वास्तविक मित्रता की पहचान आज भी विश्वास, ईमानदारी और एक-दूसरे के प्रति सम्मान से होती है। ऑनलाइन संदेशों और पोस्ट के साथ-साथ व्यक्तिगत मुलाकात, एक फोन कॉल या हालचाल पूछने का छोटा-सा प्रयास भी रिश्तों को और मजबूत बना सकता है।

फ्रेंडशिप डे के अवसर पर स्कूलों, कॉलेजों और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा मित्रता से जुड़े कार्यक्रम, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। युवा अपने दोस्तों को फ्रेंडशिप बैंड बांधकर, शुभकामनाएं देकर और यादगार पल साझा कर इस दिन को खास बनाते हैं।

यह दिन हमें यह संदेश भी देता है कि सच्ची दोस्ती जाति, धर्म, भाषा और आर्थिक स्थिति से ऊपर उठकर केवल इंसानियत, विश्वास और अपनत्व पर आधारित होती है। यदि हर व्यक्ति अपने जीवन में सच्ची मित्रता के मूल्यों को अपनाए, तो समाज में प्रेम, सहयोग और भाईचारे की भावना और अधिक मजबूत हो सकती है।

फ्रेंडशिप डे केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि उन रिश्तों को संजोने और उन्हें समय देने का अवसर है, जो जीवन की हर कठिन राह को आसान बना देते हैं। आखिरकार, सच्चा दोस्त वही होता है, जो परिस्थितियां बदल जाने पर भी कभी साथ नहीं छोड़ता।

निर्विरोध चयन बना मिसाल, संकुल केंद्र खट्टा के नए समन्वयक बने गेंदलाल कोकडिया

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महासमुंद- संकुल केंद्र खट्टा में नए संकुल समन्वयक के चयन में शिक्षकों ने एकजुटता और लोकतांत्रिक परंपरा की अनूठी मिसाल पेश की। शासकीय विद्यालय कोकड़ी के शिक्षक एवं चेतना विकास मूल्य शिक्षा से जुड़े गेंदलाल कोकडिया का सर्वसम्मति एवं निर्विरोध संकुल समन्वयक के रूप में चयन किया गया।

संकुल अंतर्गत सभी विद्यालयों के प्रधानपाठकों, शिक्षकों, संकुल प्राचार्य लिकेश कुमार साहू, पूर्व संकुल समन्वयक सुरेश कुमार साहू तथा वरिष्ठ शिक्षक ओमनारायण शर्मा की उपस्थिति में कोकडिया के नाम का प्रस्ताव रखा गया, जिसे सभी शिक्षकों और प्रधानपाठकों ने एकमत से समर्थन दिया। निर्विरोध चयन के बाद शिक्षकों ने कोकडिया का स्वागत कर उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं।

नवनियुक्त संकुल समन्वयक गेंदलाल कोकडिया ने अपने चयन का श्रेय वरिष्ठ शिक्षक ओमनारायण शर्मा, पूर्व समन्वयक सुरेश कुमार साहू तथा संकुल के सभी शिक्षकों को देते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समन्वयक का कार्य सभी शिक्षकों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना है।

उन्होंने कहा कि उनका प्रमुख लक्ष्य संकुल के सभी विद्यालयों में जीवन विद्या अध्ययन और चेतना विकास मूल्य शिक्षा को प्रभावी ढंग से लागू करना है, ताकि प्रत्येक बच्चे का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके। उन्होंने शिक्षकों से राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप पाठ योजना तैयार करने, नियमित रूप से डेली डायरी संधारित करने, विद्यार्थियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने, विद्यालयों में अनमोल वचन, स्वच्छता, अनुशासन, स्वानुशासन, सहयोग, आज्ञापालन तथा मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषयों पर बच्चों से नियमित संवाद करने का भी आग्रह किया।

कोकडिया ने कहा कि संकुल के सभी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाएंगे और प्रत्येक शिक्षक की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि जहां कई स्थानों पर संकुल समन्वयक के चयन को लेकर मतभेद और खींचतान देखने को मिलती है, वहीं संकुल केंद्र खट्टा में शिक्षकों ने निर्विरोध एवं सर्वसम्मति से समन्वयक का चयन कर आपसी विश्वास, सहयोग और लोकतांत्रिक मूल्यों का परिचय दिया है। शिक्षकों का यह निर्णय न केवल अन्य संकुलों बल्कि जनप्रतिनिधियों के लिए भी एक सकारात्मक संदेश है कि अच्छे कार्य करने वाले व्यक्ति को समाज और सहयोगियों का स्वतः समर्थन प्राप्त होता है।

बीएसपी लोहा चोरी कांड: रसूख का नशा उतरा! कारोबारी भास्कर मुदलियार गिरफ्तार, 17 आरोपी पहुंचे सलाखों के पीछे

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 भिलाई । भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) में हुए करोड़ों रुपये के लोहा चोरी के बहुचर्चित मामले में पुलिस ने शनिवार को एक और बड़ी सफलता हासिल की है। मामले में संलिप्तता उजागर होने पर पुलिस ने शहर के रसूखदार कारोबारी भास्कर मुदलियार को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।




संयंत्र के भीतर संचालित होती थीं गाड़ियां

पुलिस जांच के अनुसार, वैशाली नगर निवासी भास्कर मुदलियार की गाड़ियां लंबे समय से भिलाई इस्पात संयंत्र के भीतर संचालित हो रही थीं। मामले की जांच के दौरान पुलिस को कई महत्वपूर्ण तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्य मिले, जिनसे चोरी के इस खेल में मुदलियार की सीधी संलिप्तता की पुष्टि हुई। इसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की और गिरफ्तारी की कार्रवाई की।

नेटवर्क खंगालने में जुटी पुलिस, और गिरफ्तारियां संभव

इस हाई-प्रोफाइल लोहा चोरी मामले में पुलिस अब तक जीएम (जनरल मैनेजर), इंजीनियर, एसोसिएट और मुख्य साजिशकर्ता समेत कुल 17 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लोहा चोरी से जुड़े पूरे सिंडिकेट और नेटवर्क की गहन जांच जारी है। पूछताछ के दौरान नए तथ्य सामने आ रहे हैं, जिसके आधार पर आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और प्रमुख लोगों की गिरफ्तारियां होने की पूरी संभावना है।

हैंडलूम हैकाथॉन 2.0 का सफल समापन, IIT दिल्ली में नवाचारों को मिला मंच

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नई दिल्ली- वस्त्र मंत्रालय के सहयोग से आयोजित हैंडलूम हैकाथॉन 2.0 – "वीविंग इनोवेशंस" का सफल समापन फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (FITT), IIT दिल्ली में हुआ। हैकाथॉन में देशभर से 2,500 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें से शीर्ष 100 चयनित टीमों का प्रतिनिधित्व करते हुए 280 प्रतिभागियों ने भारत के हथकरघा क्षेत्र के लिए तकनीक आधारित समाधान प्रस्तुत किए।

इस हैकाथॉन ने नवप्रवर्तकों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों और हथकरघा विशेषज्ञों को करघों के आधुनिकीकरण, डिजाइन नवाचार, सतत विकास, बाजार तक पहुंच और बुनकरों की आजीविका से जुड़ी चुनौतियों के समाधान के लिए एक राष्ट्रीय मंच प्रदान किया। प्रतिभागियों ने उत्पादकता बढ़ाने, पारंपरिक हस्तकला को संरक्षित करने और हथकरघा क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत करने वाले कई नवाचार प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम में विकास आयुक्त (हैंडलूम), वस्त्र मंत्रालय डॉ. एम. बीना (IAS), IIT दिल्ली के वस्त्र एवं फाइबर इंजीनियरिंग विभाग की प्रमुख डॉ. दीप्ति गुप्ता, IIT दिल्ली एलुमनाई एसोसिएशन के सचिव पंकज कपाड़िया तथा थिंकस्टार्टअप के सह-संस्थापक संजीवा शिवेश उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने सरकार, शिक्षा जगत और उद्योग के बीच सहयोग की मजबूत मिसाल पेश की।

इस अवसर पर डॉ. एम. बीना ने कहा कि "हैंडलूम हमारी समृद्ध विरासत का प्रतीक है, जबकि तकनीक भविष्य का प्रतिनिधित्व करती है। हैंडलूम हैकाथॉन के माध्यम से हम इन दोनों को जोड़कर बुनकर समुदाय को सशक्त बना रहे हैं।"

उन्होंने कहा कि हथकरघा क्षेत्र स्वाभाविक रूप से सतत विकास और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देता है। उन्होंने करघा प्रक्रियाओं, डिजाइन विकास और आधुनिक विपणन में नवाचार की आवश्यकता पर बल देते हुए इंडियन हैंडमेड पोर्टल का उल्लेख किया, जो बुनकरों को बिना किसी तीसरे पक्ष के अपने उत्पाद सीधे वैश्विक बाजार में बेचने का अवसर प्रदान करता है।

डॉ. बीना ने IIT और NIFT जैसे प्रमुख संस्थानों के साथ साझेदारी की आवश्यकता पर भी जोर दिया, ताकि ऐसी तकनीक विकसित की जा सके जो बुनाई की पारंपरिक प्रक्रिया में वैज्ञानिक सटीकता लाए, श्रम को कम करे और बुनकरों की आय बढ़ाने में सहायक बने।

IIT दिल्ली की डॉ. दीप्ति गुप्ता ने बताया कि संस्थान में स्थापित होने जा रहा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर हैंडलूम टेक्नोलॉजी तकनीक और हथकरघा के बेहतर समन्वय को बढ़ावा देगा। इससे उत्पादकता और मानकीकरण में सुधार होगा, जबकि हस्तनिर्मित वस्त्रों की विशिष्टता भी बनी रहेगी। यह केंद्र अगले सप्ताह वस्त्र मंत्रालय के सहयोग से शुरू किया जाएगा।

पंकज कपाड़िया ने कहा कि तकनीक हथकरघा क्षेत्र को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, जबकि संजीवा शिवेश ने फाइनलिस्ट टीमों को बधाई देते हुए उन्हें भविष्य में भी सामाजिक और आर्थिक बदलाव लाने वाले नवाचार विकसित करने के लिए प्रेरित किया।

हैकाथॉन के विजेताओं को चार प्रमुख श्रेणियों—बुनकर आजीविका एवं वित्तीय समावेशन, मार्केट एक्सेस एवं डिजिटल इंटीग्रेशन, सतत विकास एवं पर्यावरणीय प्रभाव, तथा डिजाइन एवं संचालन में नवाचार—में सम्मानित किया गया। विजेता समाधानों में एआई आधारित बुनकर सहायता प्लेटफॉर्म, डिजिटल मार्केटिंग टूल, पर्यावरण अनुकूल रंगाई एवं निगरानी प्रणाली तथा करघा आधुनिकीकरण से जुड़े तकनीकी नवाचार शामिल रहे।

विजेता टीमों में केसीजी कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी, IIHT सलेम, IIT मद्रास, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, श्री ईश्वर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, कुमारगुरु कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी, KLB IIHT हैदराबाद और स्टार्टअप साविन्या स्टूडियो के प्रतिभागी शामिल रहे।

हैंडलूम हैकाथॉन 2.0 का सफल आयोजन वस्त्र मंत्रालय की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके तहत नवाचार, शिक्षा-उद्योग सहयोग और तकनीक आधारित समाधानों के माध्यम से भारत के हथकरघा क्षेत्र को अधिक सक्षम, टिकाऊ और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा रहा है, ताकि देश के बुनकरों की आजीविका और समृद्धि को नई गति मिल सके।

युद्ध टला, समझौते का रास्ता साफ: ट्रंप ने रद्द की ईरान पर बड़े हमले की तैयारी, 'हॉर्मुज' जलडमरूमध्य पूरी तरह खुलेगा

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 वाशिंगटन / तेहरान: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका ने ईरान पर एक अत्यंत भीषण हमले की पूरी तैयारी कर ली थी। उनके अनुसार, यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा सैन्य हमला होता। हालांकि, ईरान और मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) के अन्य देशों की अपील पर इस प्रस्तावित हमले को फिलहाल टाल दिया गया है।


राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया कि इस फैसले के तहत 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' को समुद्री आवाजाही के लिए पूरी तरह से खोला जाएगा और ईरान अपने परमाणु हथियार (न्यूक्लियर बम) कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करेगा।

'ट्रुथ सोशल' पर ट्रंप का बड़ा दावा

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा कि अमेरिकी सेना इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के खिलाफ कार्रवाई के लिए पूरी तरह मुस्तैद थी। उन्होंने कहा:

"मध्य पूर्व के देशों की अपील पर, दुनिया के सुरक्षित भविष्य और एक सफल व खुशहाल ईरान के अस्तित्व को ध्यान में रखते हुए, मैं इस हमले को रद्द करने पर सहमत हुआ हूँ—बशर्ते हम जल्द ही एक समझौते पर पहुँच जाएँ। इज़राइल भी इस प्रतिबद्धता में अमेरिका के साथ काम करने के लिए सहमत है।"

ईरान ने स्वीकार कीं शर्तें!

ट्रंप के अनुसार, मध्य पूर्व के देश और ईरान युद्ध को समाप्त करने के लिए अमेरिका द्वारा तय किए गए समझौते के मानकों को मानने पर सहमत हो गए हैं। इस समझौते की मुख्य शर्तों में शामिल हैं:

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज की पूर्ण बहाली: अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और तेल टैंकरों के लिए इस मार्ग को पूरी तरह सुरक्षित और खुला रखा जाएगा।

परमाणु कार्यक्रम पर रोक: ईरान भविष्य में कोई भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा।

सैन्य तैयारी और परामर्श जारी

अमेरिकी प्रशासन ने हमले से पहले सुरक्षात्मक उपाय के रूप में अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की थी। इसमें मध्य पूर्व में उड़ानों के रद्द होने और सुरक्षा जोखिमों के प्रति आगाह करते हुए अमेरिकी नागरिकों को जल्द से जल्द क्षेत्र छोड़ने या सतर्क रहने का परामर्श दिया गया था।

फिलहाल, अमेरिका और उसके सहयोगियों का ध्यान इस समझौते को अंतिम रूप देने पर केंद्रित है।

नोटों के बंडल का लालच पड़ा भारी: भिलाई में महिला गंवा बैठी सोने का मंगलसूत्र और नकदी

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 भिलाई। पावर हाउस स्थित जवाहर मार्केट में ठगों के एक गिरोह ने महिला को 500 रुपये के नोटों की गड्डी का लालच देकर सोने का मंगलसूत्र और 2,000 रुपये नकदी पार कर दिए। पीड़िता को बाद में पता चला कि नोटों की गड्डी में ऊपर सिर्फ एक असली नोट था और अंदर रद्दी कागज भरा हुआ था। मामला छावनी थाने का है।


रास्ता पूछने के बहाने की बातचीत
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, जवाहर मार्केट निवासी पीड़िता टी. चंद्रावती स्थानीय बाजार में किराना दुकान चलाती हैं। शुक्रवार दोपहर करीब 4 बजे वह सब्जी खरीदने बाजार गई थीं। इसी दौरान एक अज्ञात युवक ने उनसे दुर्ग जाने का रास्ता पूछा और बातचीत में उलझा लिया।

नागपुर जाने और सेठ की कहानी गढ़ी
कुछ ही देर में वहाँ एक महिला और एक अन्य पुरुष आ पहुँचे। उन्होंने खुद को बिलासपुर का निवासी बताते हुए कहा कि उनके सेठ ने उन्हें काम से निकाल दिया है और अब उन्हें नागपुर जाने के लिए पैसों की सख्त जरूरत है।

ऐसे दिया ठगी को अंजाम
बातचीत के दौरान गिरोह के एक सदस्य ने 500-500 रुपये के नोटों का एक बंडल दिखाया। उसने महिला से कहा कि यदि वह अपना पुराना मंगलसूत्र दे दे, तो वे बदले में पूरा बंडल उसे सौंप देंगे। झांसे में आकर महिला ने अपना मंगलसूत्र उतारकर उन्हें दे दिया। इसके बाद शातिरों ने नागपुर जाने का किराया बताते हुए 2,000 रुपये नकद भी ले लिए और रफूचक्कर हो गए।

घर पहुँचकर खुला राज, मामला दर्ज
घर पहुँचने पर जब महिला ने बंडल खोला, तो उसके उड़ गए। ऊपर सिर्फ एक 500 रुपये का असली नोट था, जबकि नीचे केवल रद्दी कागज भरे थे। ठगी का अहसास होने पर महिला ने अपने बेटे के साथ छावनी थाना पहुँचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

दिल्ली-एनसीआर में तड़के भूकंप के झटके, असम और अरुणाचल में भी डोली धरती

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 नई दिल्ली : राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली समेत देश के तीन राज्यों में रविवार तड़के भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। दिल्ली के उत्तरी जिले (North District) में सुबह-सुबह आई इस भूगर्भीय हलचल से कुछ देर के लिए लोग दहशत में आ गए। हालांकि, राहत की बात यह रही कि कहीं से भी किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है।


दिल्ली में 2.9 रही तीव्रता

नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, दिल्ली में भूकंप तड़के 4:14 बजे आया। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 2.9 दर्ज की गई।

  • केंद्र (Epicenter): नॉर्थ दिल्ली
  • गहराई (Depth): जमीन से 8 किलोमीटर नीचे
  • एनसीएस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर पोस्ट साझा कर भूकंप की पुष्टि की।

असम और अरुणाचल प्रदेश में भी महसूस हुए झटके

  1. दिल्ली के अलावा पूर्वोत्तर राज्यों असम और अरुणाचल प्रदेश में भी रविवार सुबह भूकंप दर्ज किया गया:
  2. असम (बारपेटा): सुबह 5:25 बजे 2.4 तीव्रता का भूकंप आया, जिसकी गहराई 4 किलोमीटर थी।
  3. अरुणाचल प्रदेश (तवांग): सुबह 5:38 बजे 2.8 तीव्रता के झटके महसूस किए गए, इसका केंद्र 5 किलोमीटर गहराई पर था।

कम गहराई वाले (Shallow) भूकंप क्यों होते हैं खतरनाक?

अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, 0 से 700 किमी गहराई तक आने वाले भूकंपों को तीन श्रेणियों—शैलो (कम गहराई), इंटरमीडिएट (मध्यम) और डीप (गहरे) में बांटा जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि कम गहराई वाले भूकंप की तीव्रता भले ही कम हो, लेकिन इनकी तरंगें सतह तक बहुत तेज़ी से पहुँचती हैं। इसके चलते ज़मीन पर झटके अधिक तेज़ महसूस होते हैं और यदि तीव्रता अधिक हो, तो नुकसान की संभावना काफी बढ़ जाती है।

ध्यान दें: दिल्ली सीस्मिक जोन-4 (Seismic Zone-4) में आता है, जो भूकंप के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। यहाँ समय-समय पर हल्के और मध्यम दर्जे के झटके आते रहते हैं।

बिजली दर वृद्धि और स्मार्ट मीटर के विरोध में कांग्रेस का दो माह का राज्यव्यापी आंदोलन

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रायपुर- छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस ने बिजली दरों में वृद्धि, स्मार्ट मीटर की स्थापना और बिजली सब्सिडी से जुड़े मुद्दों को लेकर राज्यभर में दो महीने तक चलने वाले चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है।

कांग्रेस का आरोप है कि बिजली दरों में बढ़ोतरी और स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया से आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। पार्टी ने मांग की है कि राज्य सरकार बिजली दर वृद्धि पर पुनर्विचार करे, स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करे तथा उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए।

प्रदेश कांग्रेस के अनुसार, आंदोलन के दौरान जिला, ब्लॉक और ग्राम स्तर पर जनसभाएं, प्रदर्शन, ज्ञापन सौंपने और जनजागरण अभियान जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पार्टी का कहना है कि वह बिजली उपभोक्ताओं की समस्याओं और जनहित के मुद्दों को व्यापक रूप से उठाएगी।

वहीं, राज्य सरकार का कहना है कि बिजली क्षेत्र में किए जा रहे सुधारों का उद्देश्य वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, आधुनिक और दक्ष बनाना है। सरकार का दावा है कि स्मार्ट मीटर से बिजली की वास्तविक खपत का सटीक आकलन होगा और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।

आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है, क्योंकि कांग्रेस इसे राज्यव्यापी जनआंदोलन के रूप में चलाने की तैयारी कर रही है।

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