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गर्मी से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग सतर्क, हीटवेव से निपटने की तैयारियाँ तेज

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रायपुर। राज्य में बढ़ते तापमान और संभावित हीटवेव की स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को सजग रखने की दिशा में आवश्यक तैयारियाँ तेज कर दी गई हैं। संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएँ, छत्तीसगढ़ द्वारा जारी एडवाइजरी के अनुसार जिला अस्पतालों सहित सभी स्वास्थ्य संस्थानों में गर्मी से होने वाली बीमारियों के प्रबंधन के लिए आवश्यक व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की जा रही हैं।

जारी निर्देशों के अनुसार जिला अस्पतालों, की स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) में हीट स्ट्रोक प्रबंधन कक्ष सक्रिय रखे जाएंगे। इन केंद्रों में पर्याप्त मात्रा में ओआरएस, आईवी फ्लूड, आवश्यक जीवन रक्षक दवाइयों तथा शीतलन संबंधी व्यवस्थाएँ उपलब्ध रखने को कहा गया है, ताकि गर्मी से प्रभावित मरीजों को तत्काल उपचार मिल सके। समुचित सुविधाओं से युक्त ऊष्मा आघात कक्ष रायपुर और दुर्ग जिला अस्पताल मे बनाये जा चुके हैं साथ hi अन्य सभी जिलों मे भी इस प्रकार के कक्ष बनाएं जाने निर्देश दिए गए हैं

एम्बुलेंस सेवाओं को भी अलर्ट मोड में रखने और जरूरत पड़ने पर त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।

राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्यकम की राज्य कार्यक्रम अधिकारी डॉ स्मृति देवांगन ने बताया की अत्यधिक तापमान के संपर्क में आने से शरीर में हीट स्ट्रेस की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिससे हीट रैश, मांसपेशियों में ऐंठन, चक्कर आना, सिरदर्द, अत्यधिक प्यास और उल्टी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। गंभीर अवस्था में शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक हो जाने पर हीट स्ट्रोक की स्थिति बन जाती है, जो चिकित्सकीय आपातकाल मानी जाती है। 

हीट वेव से बचाव के लिए आवश्यक है की गर्मी के मौसम में पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करें, हल्के व ढीले सूती कपड़े पहनें तथा दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच धूप में निकलने से बचें। घर से बाहर निकलते समय सिर को ढककर रखना, नींबू पानी, छाछ और मौसमी फलों का सेवन करना शरीर को हाइड्रेट रखने में सहायक होता है। 

बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और खुले में काम करने वाले श्रमिकों को गर्मी से अधिक जोखिम माना गया है। ऐसे में इन वर्गों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है। यदि किसी व्यक्ति में तेज बुखार, बेहोशी, भ्रम, अत्यधिक कमजोरी या पसीना आना बंद होने जैसे लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत ठंडी जगह पर ले जाकर आपातकालीन सेवा 108 के माध्यम से चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

गर्मी से होने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए समय पर सावधानी और जागरूकता को सबसे प्रभावी उपाय माना गया है। इसी उद्देश्य से स्वास्थ्य संस्थानों में उपचार संबंधी व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के साथ-साथ आम नागरिकों को बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करने पर भी जोर दिया जा रहा है.

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर बस्तर में होगा ‘वृहद महतारी वंदन सम्मेलन–2026:मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जारी करेंगे महतारी वंदन योजना की 25वीं किस्त

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69 लाख से अधिक महिलाओं के खातों में पहुंचेगी आर्थिक संबल की नई राशि

रायपुर- अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च के अवसर पर बस्तर जिले में ‘वृहद महतारी वंदन सम्मेलन–2026’ का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल होंगे और सम्मेलन के दौरान प्रदेश की महिलाओं के खातों में महतारी वंदन योजना की 25वीं किस्त जारी करेंगे। 

कार्यक्रम की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह करेंगे।इस गरिमामय आयोजन में केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा एवं अरुण साव, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े तथा वन मंत्री केदार कश्यप सहित अनेक जनप्रतिनिधि, सांसद, विधायक तथा विभिन्न आयोगों और मंडलों के पदाधिकारी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित यह सम्मेलन मातृशक्ति के सम्मान, महिला सशक्तिकरण तथा महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम स्थल पर विभागीय स्टॉलों के माध्यम से महिलाओं को शासन की विभिन्न योजनाओं, स्वरोजगार के अवसरों तथा पोषण संबंधी कार्यक्रमों की जानकारी भी प्रदान की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के उद्देश्य से संचालित महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रदेश की 69 लाख से अधिक महिलाओं को लाभान्वित किया जा रहा है। योजना के तहत 25वीं किस्त जारी होने के बाद अब तक कुल 16 हजार 237 करोड़ 33 लाख रुपये की राशि महिलाओं के बैंक खातों में अंतरित हो जाएगी। 

इस योजना के माध्यम से महिलाओं को नियमित आर्थिक सहयोग प्राप्त हो रहा है, जिससे वे अपने परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति करने के साथ-साथ बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण पर भी विशेष ध्यान दे पा रही हैं। यह योजना महिलाओं के आत्मसम्मान और आर्थिक स्वावलंबन को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है।

कार्यक्रम के दौरान बस्तर संभाग में आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटी नक्सली महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए विशेष पहल की जाएगी। इन महिलाओं को लखपति दीदी योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ महिला कोष के माध्यम से ब्याजमुक्त एक-एक लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाएगा।इसके साथ ही मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा इन महिलाओं को ‘लक्ष्मी-सखी मिलेट किट’ भी प्रदान की जाएगी। इन महिलाओं को इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के सहयोग से मिलेट (मोटे अनाज) आधारित खाद्य उत्पादों के निर्माण का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे इन उत्पादों के निर्माण और बिक्री के माध्यम से स्वरोजगार प्राप्त कर अपनी आय में वृद्धि कर सकें।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाला यह वृहद सम्मेलन महिलाओं के सम्मान, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल होगा। सम्मेलन में बड़ी संख्या में महिलाएं, स्व-सहायता समूहों की सदस्याएं तथा विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित हितग्राही शामिल होंगी। यह आयोजन प्रदेश में महिला सशक्तिकरण के संकल्प को और अधिक मजबूत करेगा।

सामाजिक कार्यकर्ता प्रेमशीला को दिल्ली में किया गया “इंटरनेशनल वूमेंस विजनरी अवार्ड” से सम्मानित

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इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स एंबेसेडर ऑर्गेनाइजेशन ने दिया पुरस्कार

महासमुंद- महासमुंद की सामाजिक कार्यकर्ता  प्रेमशीला बघेल को आज देश की राजधानी दिल्ली के वाईएमसीए हॉल में आयोजित कार्यक्रम में इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स एंबेसेडर ऑर्गेनाइजेशन द्वारा “इंटरनेशनल विमेंस विजनरी अवार्ड 2026” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें रमादेवी पूर्व सदस्य पैनल ऑफ चेयरपर्सन 17 वीं लोकसभा, राजीव मेनन अभिनेता एवं निर्माता, नुज़रथ जहाँ, अभिनेत्री, मनीष गवई सदस्य, जयलक्ष्मी राव अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स एम्बेसडर ऑर्गेनाइजेशन नई दिल्ली द्वारा महिला एवं बाल सशक्तिकरण, डिजिटल वित्तीय समावेशन और ग्रामीण आजीविका विकास के क्षेत्र में उनके तीन दशकों के उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया।

प्रेमशीला पिछले लगभग 30 वर्षों से गरीब, दलित, आदिवासी तथा ग्रामीण-शहरी महिलाओं के उत्थान के लिए कार्य कर रही हैं। उन्होंने वर्ष 1994 में मात्र 300 रुपये मानदेय पर बालवाड़ी शिक्षिका के रूप में अपनी सामाजिक यात्रा शुरू की और अब तक 1,500 स्व-सहायता समूहों का गठन कर 15,000 से अधिक महिलाओं को सशक्त बनाया। उन्होंने 1,000 से अधिक बैंक खाते खुलवाने, 50 लाख रुपये से अधिक माइक्रो-क्रेडिट लिंकिंग कराने तथा 850 महिलाओं को डिजिटल बैंकिंग व मोबाइल लेन-देन का प्रशिक्षण देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।वर्ष 2005 में उन्होंने “उन्नयन जन विकास समिति” की स्थापना की, जिसके माध्यम से 2,200 से अधिक महिलाओं और युवाओं को साबुन निर्माण, बांस शिल्प, टेराकोटा, हाथकरघा, जैविक खेती एवं अन्य आजीविका कौशलों में प्रशिक्षण दिया गया। उनके प्रयासों से 7,500 से अधिक ग्रामीणों तक जागरूकता अभियान पहुंचा तथा 30 गांवों में बाल विवाह और शराबखोरी जैसी सामाजिक बुराइयों को कम करने में सफलता मिली।

डिजिटल सशक्तिकरण के क्षेत्र में उन्होंने नाबार्ड के ई-शक्ति कार्यक्रम के तहत स्व-सहायता समूहों का डिजिटलीकरण कराया और महिलाओं को UPI, डिजिटल ट्रांजेक्शन, बैलेंस जांच तथा मोबाइल रिकॉर्ड कीपिंग का प्रशिक्षण दिया। इसके अलावा महासमुंद रेलवे स्टेशन के पास सस्ती दर में भोजन उपलब्ध कराने महिला कैंटीन मां की रोटी स्थापित कर महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा गया।

 प्रेमशीला बघेल वर्ष 2000 में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र (UN) में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व कर महिलाओं की गरीबी और हिंसा से जुड़े मुद्दों को भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठा चुकी हैं।

उन्हें इस वर्ष 2025 में देश के उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य शासन अंतर्गत अलंकरण “वीरांगना अवंतीबाई लोधी पुरस्कार” से भी सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा नाबार्ड , मीडिया समूह, जिला प्रशासन तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा भी उन्हें सम्मानित किया गया है। वे वर्तमान में श्रम विभाग अंतर्गत जिला स्तरीय टास्क फोर्स समिति की सदस्य भी है। 

प्रेमशीला बघेल का महिला दिवस पर संदेश है कि नारी शक्ति जब आत्मविश्वास, शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता से जुड़ती है, तब समाज में स्थायी परिवर्तन संभव होता है। उनके कार्यों से हजारों महिलाओं में आत्मनिर्भरता, डिजिटल साक्षरता और नेतृत्व की नई चेतना विकसित होती है।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस विशेष- छत्तीसगढ़ की महिलाएँ गढ़ रहीं हैं नया कीर्तिमान

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छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण की नई कहानी

स्व-सहायता समूहों और सरकारी योजनाओं से महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर

रायपुर- अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में महिला सशक्तिकरण की प्रेरक तस्वीर सामने आ रही है। शासन की योजनाओं, विशेषकर बिहान मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना और महतारी वंदन योजना के माध्यम से ग्रामीण महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं और आत्मनिर्भरता की दिशा में उल्लेखनीय कार्य कर रही हैं।

सरगुजा जिले में महिला सशक्तिकरण का एक अनूठा मॉडल सामने आया है। प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़े निर्माण कार्यों ने महिलाओं के लिए नए व्यवसायिक अवसर पैदा किए हैं। जिले की 650 से अधिक महिलाएं सेंट्रिंग प्लेट व्यवसाय से जुड़ी हैं और 1000 से अधिक सेंट्रिंग प्लेट सेटों का संचालन कर रही हैं। इसके अलावा 271 महिलाएं ईंट निर्माण और कई महिलाएं सीमेंट-छड़ व्यवसाय से जुड़कर नियमित आय अर्जित कर रही हैं। जिले में 319 महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बनकर आर्थिक सशक्तिकरण की मिसाल बन चुकी हैं।

धमतरी जिले में 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर “महतारी वंदन महिला सम्मान उत्सव” का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं और स्व-सहायता समूहों को सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम की विशेषता यह होगी कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बस्तर से धमतरी जिले की महिलाओं के साथ द्विमार्गीय संवाद करेंगे।

रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ विकासखंड के ग्राम तालगांव की गायत्री यादव महिला सशक्तिकरण का प्रेरक उदाहरण बनकर उभरी हैं। बिहान योजना से जुड़कर उन्होंने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि आठ पंचायतों की महिलाओं को भी स्व-सहायता समूहों और विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इसी तरह बालोद जिले के गुरूर विकासखंड के ग्राम कर्रेझर में स्थापित महतारी सदन ग्रामीण महिलाओं के लिए सशक्तिकरण का नया केंद्र बन गया है। यहां महिलाएं संगठित होकर बैठक, प्रशिक्षण और अपने उत्पादों के भंडारण एवं विक्रय की सुविधाओं का लाभ ले रही हैं, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो रही है।

प्रदेश के विभिन्न जिलों में महिलाओं की ये उपलब्धियां यह दर्शाती हैं कि शासन की योजनाओं और महिलाओं की मेहनत से छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण की दिशा में सकारात्मक बदलाव आ रहा है और महिलाएं विकास की मुख्य धारा में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।


महतारी गौरव वर्ष में सशक्त हो रही छत्तीसगढ़ की मातृशक्ति

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महिला सशक्तिकरण की नयी मिसालें, स्व-सहायता समूहों से जुड़कर बन रहीं आत्मनिर्भर

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण की दिशा में निरंतर प्रभावी पहल की जा रही हैं। मातृशक्ति के सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य सरकार ने इस वर्ष को ‘महतारी गौरव वर्ष’ के रूप में मनाने की घोषणा की है। शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं और स्व-सहायता समूहों के माध्यम से प्रदेश की महिलाएँ आर्थिक रूप से सशक्त बनते हुए समाज में नई पहचान स्थापित कर रही हैं।

प्रदेश की महिलाएं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत स्व-सहायता समूहों से जुड़कर कई महिलाओं ने अपने जीवन की दिशा बदली है। इसी कड़ी में कोरबा जिले के विकासखंड करतला के ग्राम सरगबुंदिया निवासी शासन के सहयोग से कपड़ा व्यवसाय के माध्यम से सावित्री उरांव आज ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन चुकी हैं। सीमित संसाधनों और आर्थिक कठिनाइयों के बीच जीवनयापन करने वाली सावित्री उरांव ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाया और आज अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं।

जशपुर जिले के दुलदुला विकासखंड के ग्राम सिमड़ा की पूनम देवी, गणेश महिला स्व-सहायता समूह की सदस्य हैं और वे आज “लखपति दीदी” के रूप में जानी जाती हैं। पहले वे घर-गृहस्थी के कामकाज तक सीमित थीं और परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए मेहनत-मजदूरी का काम करती थी। स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें बचत, ऋण सुविधा और स्वरोजगार के अवसर मिले, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया। उन्होंने मछली पालन, बकरी पालन और अन्य आजीविका गतिविधियों से जुड़कर आय अर्जित करते देख उन्हें भी प्रेरणा मिली। उन्होंने मुद्रा योजना के तहत 1 लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया। इस राशि का उपयोग उन्होंने अपने छोटे से किराना दुकान के विस्तार कर आत्म निर्भरता की ओर आगे बढ़ रही है। 

कांकेर जिले के ग्राम गढ़पिछवाड़ी की आदिवासी महिला सगो तेता भी शासन की योजनाओं का लाभ लेकर आत्मनिर्भर बनी हैं। प्रशिक्षण और सहयोग के माध्यम से उन्होंने अपने हुनर को आगे बढ़ाया और आज वह खेती-किसानी कर “लखपति दीदी” के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं।

इसी तरह गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत सधवानी की बृहस्पति धुर्वे ने भी स्व-सहायता समूह से जुड़कर मशरूम उत्पादन और सब्जी-भाजी की खेती शुरू की। कड़ी मेहनत और लगन से आज उनकी वार्षिक आय लगभग डेढ़ से दो लाख रुपये तक पहुँच गई है। वे आर्थिक रूप से सशक्त बनकर अपने परिवार की जरूरतों को आत्मविश्वास के साथ पूरा कर रही हैं।

कोरिया जिले के बैकुंठपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत बुडार में अंजनि, हीरामनी, लीलावती और मित्तल स्वच्छता दीदी के रूप में कार्य करते हुए गाँव को स्वच्छ और स्वस्थ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। ये महिलाएँ सप्ताह में दो दिन घर-घर जाकर कचरा संग्रहण करती हैं और ग्रामीणों को गीले एवं सूखे कचरे को अलग-अलग रखने के लिए जागरूक करती हैं।

बस्तर जिले के ग्राम पंचायत मामड़पाल मुनगा की दशमी नाग भी महिला सशक्तिकरण की एक प्रेरक कहानी बन चुकी हैं। पहले मजदूरी पर निर्भर रहने वाली दशमी नाग आज स्व-सहायता समूह से जुड़कर खेती, पशुपालन और सब्जी उत्पादन के माध्यम से “लखपति दीदी” के रूप में अपनी नई पहचान बना चुकी हैं।

प्रदेश में मुख्यमंत्री साय के मार्गदर्शन में जनकल्याणकारी योजनाओं और महिला समूहों की सामूहिक पहल से सामाजिक क्षेत्र में भी सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। कोरिया जिले के बैकुंठपुर विकासखंड के ग्राम आनी में ज्योति महिला स्व-सहायता समूह और माँ शारदा स्व-सहायता समूह की महिलाएँ “कोरिया मोदक” नामक पौष्टिक लड्डू तैयार कर रही हैं, जिन्हें गर्भवती महिलाओं को नियमित रूप से उपलब्ध कराया जा रहा है। इस पहल से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार और कम वजन वाले शिशुओं के जन्म की समस्या को कम करने में मदद मिल रही है।

इसी प्रकार कोंडागांव के नहरपारा निवासी फरिदा बेगम भी महतारी वंदन योजना का लाभ लेकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं। यह योजना महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान कर उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च के अवसर पर यह स्पष्ट रूप से दिखाई देता है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ उठाकर प्रदेश की महिलाएँ आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। स्व-सहायता समूहों के माध्यम से वे न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन की नई मिसाल भी स्थापित कर रही हैं।

पीएम आवास योजना 2.0 में 28,461 घरों के लिए 435 करोड़ की स्वीकृति से 'सभी के लिए आवास’ के संकल्प को मिलेगी नई गति: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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हर जरूरतमंद परिवार को सम्मानजनक आवास दिलाना हमारा संकल्प - उपमुख्यमंत्री अरुण साव

छत्तीसगढ़ के लिए 263 परियोजनाएं स्वीकृत, 36 माह में पूरे होंगे काम

रतनपुर में डेमोंस्ट्रेशन हाउसिंग प्रोजेक्ट, आधुनिक और उन्नत तकनीकों से बीएमटीपीसी बनाएगी 40 आवास

रायपुर- छत्तीसगढ़ में शहरी गरीबों के लिए बड़े पैमाने पर आवास निर्माण की राह खुल गई है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत राज्य में 28 हजार 461 नए पक्के घरों के निर्माण के लिए 435 करोड़ रुपये से अधिक की केंद्रीय सहायता स्वीकृत हुई है। केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति ने राज्य की 263 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। 

प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत राज्य में 28 हजार 461 नए पक्के आवासों के निर्माण के लिए 435 करोड़ रुपए से अधिक की केंद्रीय सहायता स्वीकृत की गई है। हाल ही में 23 फरवरी को केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय की केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति (Central Sanction & Monitoring Committee) की बैठक में इसकी मंजूरी दी गई। इससे राज्य के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के हजारों परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक आशियाना मिल सकेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सभी के लिए आवास’ के संकल्प को साकार करने देशभर में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 का क्रियान्वयन किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव के मार्गदर्शन में शहरी गरीबों को किफायती और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने सक्रियता से काम किया जा रहा है। उप मुख्यमंत्री अरुण साव नियमित समीक्षा कर आवासों के आबंटन और इनके निर्माण में तेजी व पारदर्शिता सुनिश्चित करने विभागीय अधिकारियों को लगातार निर्देशित कर रहे हैं।

केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की बैठक में छत्तीसगढ़ द्वारा प्रस्तुत 263 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें 211 लाभार्थी आधारित निर्माण परियोजनाएं (Beneficiary-led Construction) और 52 किफायती आवास साझेदारी परियोजनाएं (Affordable Housing Projects) शामिल हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेशभर के नगरीय निकायों में कुल 28 हजार 461 आवासों का निर्माण किया जाएगा।

लाभार्थी आधारित निर्माण घटक के तहत 13 हजार 058 आवासों को स्वीकृति दी गई है, जिनमें पात्र हितग्राही अपनी स्वयं की भूमि पर पक्का घर बना सकेंगे। प्रथम बैच में 52 परियोजनाओं के माध्यम से 3844 आवासों को मंजूरी दी गई है, जिसके लिए 57 करोड़ 66 लाख रुपए की केंद्रीय सहायता स्वीकृत हुई है। वहीं द्वितीय बैच में 159 परियोजनाओं के अंतर्गत 9214 आवासों के निर्माण को मंजूरी दी गई है, जिसके लिए 138 करोड़ 21 लाख रुपए की केंद्रीय सहायता स्वीकृत की गई है। इन आवासों की प्रति इकाई परियोजना लागत लगभग 3 लाख 89 हजार रुपए निर्धारित की गई है।

किफायती आवास साझेदारी घटक के तहत 15 हजार 363 आवासों का निर्माण किया जाएगा। इसके तहत शासकीय भूमि पर सार्वजनिक एजेंसियों के माध्यम से सर्वसुविधायुक्त आवासीय परिसर विकसित किए जाएंगे, जिनमें स्लम पुनर्विकास और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए किफायती आवास उपलब्ध होंगे। इस घटक के प्रथम बैच में 24 परियोजनाओं के जरिए 6996 आवासों को मंजूरी दी गई है, जबकि दूसरे बैच में 28 परियोजनाओं के माध्यम से 8367 आवासों के निर्माण को स्वीकृति दी गई है। इन आवासों की प्रति इकाई लागत 5 लाख 75 हजार रुपए तय की गई है। ये सभी परियोजनाएं 36 महीनों में पूर्ण की जाएंगी।

भारत सरकार ने छत्तीसगढ़ को मार्च 2026 तक 50 हजार आवासों के प्रस्ताव प्रस्तुत करने का लक्ष्य दिया था। छत्तीसगढ़ ने 52 हजार 588 आवासों के प्रस्ताव भेजकर लक्ष्य से अधिक उपलब्धि हासिल की है। केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की बैठक में राज्य की इस सक्रियता और तत्परता की सराहना भी की गई। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा सभी परियोजनाओं के विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन, भू-अभिलेख, लाभार्थी सूची और यूनिफाइड वेब पोर्टल पर आवश्यक प्रविष्टियां केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पूरी की गई हैं। सभी पात्र हितग्राहियों को केंद्रीय सहायता आधार आधारित प्रत्यक्ष लाभ अंतरण प्रणाली के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में प्रदान की जाएगी। यूनिफाइड वेब पोर्टल के जरिए पारदर्शी तरीके से यह पूरी प्रक्रिया संचालित की जाएगी।

रतनपुर में भारत सरकार का नवाचारी प्रोजेक्ट, पात्र लोगों को किराये पर देगा सूडा

केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की बैठक में बिलासपुर जिले के रतनपुर में एक अभिनव डेमोंस्ट्रेशन हाउसिंग प्रोजेक्ट (Demonstration Housing Project) को भी मंजूरी मिली है। यह परियोजना भारत सरकार की नवाचार आधारित एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसे देश के चुनिंदा राज्यों में ही स्वीकृत किया जा रहा है। इसके अंतर्गत आधुनिक और उन्नत तकनीकों का उपयोग कर 40 आवास बनाए जाएंगे। इनका निर्माण भवन निर्माण सामग्री एवं प्रौद्योगिकी संवर्धन परिषद (Building Materials & Technology Promotion Council) द्वारा किया जाएगा। राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) इन आवासों को पात्र लोगों को किराये पर उपलब्ध कराएगा। राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थल रतनपुर में आकार लेने वाली यह परियोजना सामाजिक उपयोग के साथ ही पर्यटन को भी बढ़ावा देने में सहायक होगी। उप मुख्यमंत्री अरुण साव की विशेष कोशिशों से रतनपुर को यह परियोजना मिली है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत छत्तीसगढ़ को बड़ी उपलब्धि मिली है। राज्य में 28,461 नए पक्के घरों के निर्माण के लिए 435 करोड़ रुपये से अधिक की केंद्रीय सहायता स्वीकृत हुई है। इससे हजारों जरूरतमंद परिवारों का अपने पक्के घर का सपना साकार होगा। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हृदय से आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश की 263 परियोजनाओं को मंजूरी मिली है और अगले 36 महीनों में इन आवासों का निर्माण किया जाएगा। बिलासपुर जिले के रतनपुर में आधुनिक तकनीक से 40 आवासों का एक विशेष प्रोजेक्ट भी बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है, ताकि ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंद परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक आवास मिल सके।

उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार शहरी गरीबों को आवासीय सुरक्षा प्रदान करने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 का प्रभावी क्रियान्वयन कर रही है। विभागीय स्तर पर नियमित समीक्षा बैठकों के माध्यम से प्रगति की लगातार निगरानी की जा रही है। नगरीय निकायों के सहयोग से पात्र हितग्राहियों की पहचान कर उन्हें समयबद्ध तरीके से योजना से जोड़ने की प्रक्रिया जारी है, ताकि अधिक से अधिक परिवारों को पक्के आवास दिए जा सके। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा दी जा रही 435 करोड़ रुपए की सहायता से आवास निर्माण में और तेजी आएगी।

धमतरी को मखाना हब बनाने की दिशा में पहल

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वनांचल क्षेत्र में आय के नए स्रोत- मखाना खेती से सशक्त होंगे महिला समूह

नगरी क्षेत्र की जलवायु बनी उपयुक्त, मखाना उत्पादन से बढ़ेगी किसानों की आय

महिला स्व-सहायता समूहों को मिलेगा नया आयाम, मखाना उत्पादन से जुड़ेंगे किसान

रायपुर- मखाना एक ऐसा पौधा है जो तालाबों, दलदलों और आर्द्रभूमि जैसे स्थिर जल निकायों में उगाया जाता है। इसका प्रसार बीजों द्वारा होता है और अंकुरण के लिए पूर्णतः परिपक्व बीजों की आवश्यकता होती है। मखाना की खेती में न्यूनतम खर्च आता है क्योंकि पिछले फसल से बचे हुए बीजों से नए पौधे आसानी से अंकुरित हो जाते हैं। पोषक तत्वों से भरपूर होने और नकदी फसल के रूप में किसानों की आय को दोगुना करने की अपार क्षमता को देखते मिलता है। मखाना खेती से धमतरी की ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक तस्वीर बदलेगी ।  छोटी छोटी डबरी से समृद्धि तक धमतरी की महिलाओं को मखाना खेती में आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह दिखायी दे रही है । शासकीय प्रयासों का प्रतिफल है कि मखाना खेती से धमतरी में आर्थिक सशक्तिकरण होगा ।

उल्लेखनीय है कि केंद्रीय कृषिमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने धमतरी प्रवास के दौरान जिले को मखाना बोर्ड में शामिल करने की घोषणा की थी। इस घोषणा के बाद जिला प्रशासन द्वारा मखाना उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की गई है।

धमतरी जिले के नगरी वनांचल क्षेत्र में आजीविका संवर्धन की दिशा में एक नई पहल के तहत मखाना खेती की तैयारी स्व-सहायता समूहों के माध्यम से प्रारंभ की गई है। जिले में कुल 100 एकड़ भूमि मखाना उत्पादन के लिए चिन्हांकित की गई है। प्रारंभिक चरण में संकरा क्षेत्र में 25 एकड़ रकबे में मखाना की खेती की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। 

विशेषज्ञों के अनुसार नगरी क्षेत्र की जलवायु, पर्याप्त जल उपलब्धता एवं प्राकृतिक वातावरण मखाना उत्पादन के लिए अनुकूल है। इससे स्थानीय किसानों एवं महिला स्व-सहायता समूहों को अतिरिक्त आय के अवसर प्राप्त होंगे। इस पहल से वनांचल क्षेत्र में कृषि विविधीकरण को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

कलेक्टर धमतरी बीते दिनों संकरा पहुंचकर मखाना खेती की तैयारियों का अवलोकन किया तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि “मखाना खेती नगरी वनांचल क्षेत्र के लिए आय वृद्धि का प्रभावी माध्यम बन सकती है। स्व-सहायता समूहों को तकनीकी प्रशिक्षण, गुणवत्तापूर्ण बीज एवं विपणन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। हमारा प्रयास है कि धमतरी जिला प्रदेश में मखाना उत्पादन का मॉडल विकसित करे।”

कलेक्टर ने यह भी निर्देशित किया कि कृषि एवं उद्यानिकी विभाग समन्वय बनाकर किसानों को प्रशिक्षण प्रदान करें तथा जल प्रबंधन एवं फसल संरक्षण पर विशेष ध्यान दें। आने वाले समय में चरणबद्ध रूप से रकबे का विस्तार कर अधिक से अधिक समूहों को इस पहल से जोड़ा जाएगा। जिला प्रशासन की इस पहल से नगरी वनांचल क्षेत्र में आर्थिक सशक्तिकरण की नई संभावनाएं साकार होती दिखाई दे रही हैं।


सीआरपीएफ कंपोजिट अस्पताल भिलाई में चिकित्सा शिविर आयोजित

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आरंग- शनिवार को डीआईजी मेडिकल डॉ.दुर्गा भवानी राजनाला के निर्देशन में सीआरपीएफ कंपोजिट हास्पीटल में चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में सीआरपीएफ कैंप के जवान व उनके परिवारजन, आसपास के ग्राम के ग्रामीणों सहित चरौदा के स्कूली बच्चों ने उपस्थित होकर स्वास्थ्य जांच कराया। साथ ही स्वास्थ्य संबंधी परामर्श व उपचार प्राप्त किया। शिविर के आयोजन, संयोजन में मुख्य रूप डॉ.तनिंदर सिंह ,डॉ इंदु वशिष्ठ,डॉ.अश्वथी रमेश ,सिस्टर कला ,रूबी, अभिषेक ने अहम् भूमिका निभाई।इस मौके पर डाक्टरों ने बच्चों को न्यूट्रिशियन संबंधी जानकारी देते हुए स्वास्थ्य संबंधी जागरूक रहने प्रेरित भी किया।


राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण ने NHCX हैकाथॉन और इनोवेशन मीट का सफल आयोजन किया

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हैदराबाद-राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण  ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के तहत राष्ट्रीय स्वास्थ्य दावों एक्सचेंज (NHCX) हैकाथॉन का सफल आयोजन किया। इस हैकाथॉन का उद्देश्य NHCX के इर्द-गिर्द नवाचार को प्रोत्साहित करना था। विजेता टीमों ने अपने समाधान NHCX इनोवेशन मीट में प्रस्तुत किए, जो 6–7 मार्च 2026 को IIT हैदराबाद में आयोजित हुआ।

हैकाथॉन में हेल्थकेयर, बीमा और तकनीकी क्षेत्र की संस्थाओं, स्टार्टअप्स, TPAs, अस्पतालों और छात्रों सहित विविध प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रतियोगियों ने मुख्य रूप से दावा प्रक्रिया (Claims Processing) और पारिस्थितिकी तंत्र इंटरऑपरेबिलिटी से जुड़ी चुनौतियों के समाधान विकसित किए।

NHCX ABDM के तीन मुख्य गेटवे में से एक है, जो देशभर में स्वास्थ्य बीमा दावों को सरल और मानकीकृत बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह अस्पतालों, बीमा कंपनियों और मरीजों के बीच दावों के डेटा के निर्बाध आदान-प्रदान के लिए एक unified डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रदान करता है।

हैकाथॉन के निर्माण ट्रैक में प्रतिभागियों ने  पुरानी प्रणालियाँ या पूर्ववर्ती सिस्टमको NHCX-aligned FHIR Converter में बदलने,  चिकित्सीय दस्तावेज़ या क्लिनिकल दस्तावेज़ को FHIR Structured Data में परिवर्तित करने और PDF को NHCX-aligned Insurance Plan FHIR Bundle में बदलने जैसे समाधान विकसित किए।  विचार-उत्प्रेरक ट्रैक या विचार निर्माण मार्गमें, उन्होंने दुरुपयोग/अत्याचार का पता लगाने , दावे प्रक्रिया में समय और लागत कम करने जैसी समस्याओं के समाधान पेश किए।

इन-नोवेशन मीट में प्रमुख व्यक्तियों ने हिस्सा लिया, जिनमें शामिल थे:

  • सुनिल कुमार बरवाल – CEO, NHA

  • सौरभ गौर – स्वास्थ्य, चिकित्सा एवं परिवार कल्याण सचिव, आंध्र प्रदेश सरकार

  • डॉ. गिरधार ज्ञानि – DG, Association of Healthcare Providers of India (AHPI)

  • प्रो. जी. नरहरी शास्त्री – डीन, IIT हैदराबाद

इस दो-दिवसीय कार्यक्रम में विजेता टीमों के समाधान प्रदर्शित किए गए, कीनोट भाषण और पैनल चर्चाओं का आयोजन किया गया। प्रमुख विषय थे: मानकीकरण, इंटरऑपरेबिलिटी, दक्षता और डिजिटल स्वास्थ्य दावों के भविष्य पर चर्चा।

कार्यक्रम में NHCX चैंपियंस, ABDM एम्बेसडर और PM-JAY–NHCX इंटीग्रेटर्स को सम्मानित किया गया। इन पहलों के माध्यम से भारत में डिजिटल, इंटरऑपरेबल स्वास्थ्य दावों की पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और व्यापक रूप से अपनाने का प्रयास किया जा रहा है।

समापन सत्र किरण गोपाल वास्का, संयुक्त सचिव और मिशन निदेशक (ABDM), NHA और अजय सेठ, IRDAI के अध्यक्ष द्वारा किया गया।



“पहले हम खारा कुएँ का पानी पीते थे, अब सभी लोग पेयजल के लिए विलोसित पानी का उपयोग कर रहे हैं”

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कवायद्वीप- जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को लो टेम्परेचर थर्मल डीसैलिनेशन (LTTD) प्लांट का दौरा किया और वहां स्थानीय निवासियों के साथ बातचीत की। इस दौरान कवायद्वीप के निवासी अब्दुल रहमान ने बताया कि पहले क्षेत्र में लोग खारा कुएँ का पानी पीते थे, लेकिन अब सभी के घरों में विलोसित (desalinated) पानी उपलब्ध है।

रहमान उन कई स्थानीय निवासियों में से थे जिन्होंने मंत्री को अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि LTTD तकनीक समुद्र के ऊपरी गर्म पानी और गहरे समुद्र के ठंडे पानी के तापमान के अंतर का उपयोग कर समुद्र के पानी को पीने योग्य पानी में बदलती है। इस तकनीक से अब पानी सीधे नलों के माध्यम से घरों तक पहुँचता है।

दूसरे निवासी वालिया बी ने कहा कि पहले उन्हें पानी रोज़ाना कुएँ से घर तक लाना पड़ता था, लेकिन अब पानी उनके दरवाजे तक उपलब्ध है।

मंत्री सिंह ने कहा कि कवायद्वीप में शुरू हुए यह परियोजना धीरे-धीरे अन्य द्वीपों तक भी फैल चुकी है। उन्होंने ओशन थर्मल एनर्जी कन्वर्ज़न (OTEC) परियोजना की प्रगति की भी समीक्षा की, जो न केवल स्वच्छ बिजली उत्पादन करेगी बल्कि ताजे पानी का उत्पादन भी करेगी।

सिंह ने बताया कि ये तकनीकें विशेष रूप से उन द्वीप क्षेत्रों के लिए उपयुक्त हैं, जहां ताजे पानी के स्रोत सीमित हैं लेकिन समुद्र पानी प्रचुर मात्रा में है। उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएँ डीज़ल आधारित आपूर्ति पर निर्भरता को भी कम करेंगी, जो मानसून के दौरान अक्सर प्रभावित होती है।

लक्षद्वीप में ताजे पानी की सीमित उपलब्धता, खारेपन और वर्षा पर भारी निर्भरता के कारण हमेशा पेयजल की चुनौती रही है। अधिकारियों ने बताया कि डीसैलिनेशन सुविधाएँ आने वाले वर्षों में द्वीपवासियों के लिए स्थायी और विश्वसनीय पीने के पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।


यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में सफल प्रदेश के अभ्यर्थियों को मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉल के जरिए दी बधाई

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने  संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में सफल छत्तीसगढ़ के अभ्यर्थियों से वीडियो कॉल के माध्यम से संवाद कर उन्हें हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दीं।

मुख्यमंत्री साय ने इस दौरान खरसिया (रायगढ़) निवासी रौनक अग्रवाल, रायपुर निवासी संजय डहरिया, धमतरी जिले के परसवानी निवासी डायमंड सिंह ध्रुव तथा एमसीबी जिले के जनकपुर निवासी दर्शना सिंह से बातचीत की।मुख्यमंत्री साय ने उनके परिवारजनों से भी संवाद करते हुए इस उपलब्धि पर उन्हें बधाई दी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आप सभी युवाओं ने अपनी मेहनत, लगन और धैर्य के बल पर प्रतिष्ठित यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में सफलता प्राप्त कर प्रदेश का मान बढ़ाया है। आपकी यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है और यह संदेश देती है कि निरंतर परिश्रम और लक्ष्य के प्रति समर्पण से किसी भी ऊँचाई को प्राप्त किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ से युवाओं का सिविल सेवा में चयन होना प्रदेश के लिए गौरव की बात है। इससे यह सिद्ध होता है कि छत्तीसगढ़ के दूरस्थ क्षेत्रों में भी प्रतिभा की कोई कमी नहीं है और हमारे युवा अपने परिश्रम के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं।

मुख्यमंत्री साय ने सभी सफल अभ्यर्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि यह सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों के सपनों को नई ऊर्जा और दिशा देने वाली प्रेरणा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये सभी प्रतिभाशाली युवा प्रशासनिक सेवाओं में रहते हुए पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ जनसेवा करेंगे तथा राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 9वां अंतर्राष्ट्रीय संताल सम्मेलन में शिरकत की

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दार्जिलिंग, पश्चिम बंगाल, 7 मार्च 2026 – भारत की राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मू  ने आज दार्जिलिंग में आयोजित 9वें अंतर्राष्ट्रीय संताल सम्मेलन में शिरकत की।

राष्ट्रपति ने इस अवसर पर कहा कि संताल समुदाय के लिए यह गर्व की बात है कि हमारे पूर्वज तिलका मांझी ने लगभग 240 साल पहले शोषण के खिलाफ विद्रोह का झंडा उठाया। उनके विद्रोह के लगभग 60 साल बाद, बहादुर भाइयों सिडो-कन्हू और चंद-भैरव, साथ ही बहादुर बहनों फूलो-झानो ने 1855 में संताल हुल का नेतृत्व किया।

राष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 2003 संताल समुदाय के इतिहास में सदैव याद किया जाएगा, क्योंकि उसी वर्ष संताल भाषा को भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया। पिछले वर्ष, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर संताल भाषा में लिखित संविधान, ओल चिकी लिपि में जारी किया गया।

राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि वर्ष 1925 में पंडित रघुनाथ मुर्मू ने ओल चिकी लिपि का आविष्कार किया। हाल ही में इस आविष्कार की शताब्दी समारोह के रूप में मनाई गई। उनके योगदान ने संताल भाषियों को अभिव्यक्ति के नए अवसर प्रदान किए। उन्होंने कई नाटकों की रचना की, जैसे “बिदु चंदन”, “खेड़वाल वीर”, “डालेगे धन” और “सिडो-कन्हू - संताल हुल”, जिनके माध्यम से उन्होंने संताल समुदाय में साहित्य और सामाजिक चेतना का प्रकाश फैलाया। राष्ट्रपति ने कहा कि संताल समुदाय के सदस्य अन्य भाषाओं और लिपियों का अध्ययन करें, लेकिन अपनी भाषा से जुड़े रहें।

राष्ट्रपति ने कहा कि जनजातीय समुदायों ने सदियों से अपनी लोक-संगीत, नृत्य और परंपराओं को संरक्षित किया है। उन्होंने प्राकृतिक वातावरण के प्रति संवेदनशीलता को पीढ़ी दर पीढ़ी बनाए रखा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्राकृतिक संरक्षण का पाठ भविष्य की पीढ़ियों तक पहुंचाना आवश्यक है। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि लोक परंपराओं और पर्यावरण को संरक्षित करने के साथ-साथ हमारे जनजातीय समुदायों को आधुनिक विकास को अपनाते हुए प्रगति की यात्रा पर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि संताल समुदाय सहित जनजातीय समुदाय प्रगति और प्रकृति के बीच संतुलन का उदाहरण प्रस्तुत करेंगे।

राष्ट्रपति ने कहा कि वर्तमान समय की आवश्यकता शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक सशक्तिकरण पर ध्यान केंद्रित करना है। जनजातीय युवा शिक्षा और कौशल विकास के माध्यम से आगे बढ़ें। लेकिन इन प्रयासों में वे अपनी जड़ों को नहीं भूलें। उन्होंने कहा कि हमें अपनी भाषा और संस्कृति का संरक्षण, शिक्षा को प्राथमिकता देने और समाज में एकता और भाईचारे को बनाए रखने का संकल्प करना चाहिए। यह हमें सशक्त समाज और मजबूत भारत बनाने में मदद करेगा।

मार्च में ही जल संकट की चपेट में छत्तीसगढ़, रायपुर समेत कई इलाकों में पानी की किल्लत

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में मार्च के पहले पखवाड़े से ही तेज गर्मी के साथ जल संकट गहराने लगा है। कई इलाकों में बोरवेल सूखने लगे हैं, जिससे राजधानी रायपुर सहित राज्य के कई शहरों और गांवों में पेयजल की किल्लत सामने आ रही है।


यह स्थिति तब है जब पिछले सात वर्षों में जल आपूर्ति व्यवस्था सुधारने के लिए विभिन्न योजनाओं पर 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद गर्मी की शुरुआत में ही पानी की समस्या बढ़ने लगी है।

राज्य सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल संकट और दूषित जल की समस्या के समाधान के लिए मल्टी-विलेज स्कीम शुरू की है। इस योजना के तहत 4,527 करोड़ रुपये की लागत से 18 जिलों में 71 योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं के माध्यम से तीन हजार से अधिक गांवों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

इसके अलावा गांवों और शहरों में हजारों ओवरहेड टैंक बनाए गए हैं। नालों के गंदे पानी को शुद्ध करने के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) भी स्थापित किए गए हैं, ताकि इस पानी का उपयोग उद्योगों और अन्य कार्यों में किया जा सके और पीने के पानी पर दबाव कम हो।

प्रदेश में पेयजल व्यवस्था सुधारने के लिए जल जीवन मिशन और अटल मिशन फॉर रीजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (AMRUT) जैसी योजनाओं के माध्यम से भी हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। रायपुर में खारुन नदी के किनारे 200 एमएलडी क्षमता के तीन STP स्थापित किए गए हैं। AMRUT योजना के तहत रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग-भिलाई, कोरबा और अंबिकापुर जैसे शहरों में नई पाइपलाइन, जलाशय और STP परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं।

इसके बावजूद गर्मी के दिनों में पानी की समस्या कम नहीं हो पाई है। पड़ताल में सामने आया है कि कई परियोजनाएं अधूरी होने के कारण योजनाओं का पूरा लाभ लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है।

राजधानी रायपुर के लाभांडी और फुंडहर जैसे इलाकों में ओवरहेड टंकियां वर्षों पहले बन चुकी हैं, लेकिन उन्हें अब तक मुख्य राइजिंग पाइपलाइन से नहीं जोड़ा गया है। नगर निगम अधिकारियों के मुताबिक पाइपलाइन विस्तार के लिए समय पर पर्याप्त बजट और तकनीकी स्वीकृति नहीं मिलने से कई परियोजनाएं अधर में अटकी हुई हैं।

गर्मी बढ़ने के साथ ही बोरवेल सूखने और जलस्तर गिरने की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। ग्रामीण इलाकों में कई जगहों पर लोगों की निर्भरता टैंकरों पर बढ़ती जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि भूजल दोहन पर नियंत्रण, वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने और पुरानी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से ही जल संकट की समस्या का स्थायी समाधान संभव है।

मंदिर में शादी का झांसा, फिर दरिंदगी: एक दिन में दो बार रेप, आखिर में मौत, पढ़े पूरी खबर

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 जगतसिंहपुर (ओडिशा)। ओडिशा के जगतसिंहपुर जिले से मानवता को शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है। यहां 23 वर्षीय युवती के साथ एक ही दिन में दो अलग-अलग आरोपियों ने दुष्कर्म किया और बाद में उसे चार मंजिला इमारत से नीचे फेंक दिया गया, जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस ने मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उनके खिलाफ अपहरण, दुष्कर्म और हत्या सहित कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है।


पुलिस के अनुसार यह घटना 22 फरवरी की है। उस दिन सुबह करीब 10 बजे युवती अपने प्रेमी सोमनाथ ओझा के साथ घर से निकली थी। दोनों ने शादी करने की योजना बनाई थी। प्रेमी ने युवती को शादी का झांसा देकर जगतसिंहपुर स्थित सरला मंदिर बुलाया था।

मंदिर पहुंचने के बाद शादी करने के बजाय आरोपी उसे एक सुनसान जगह पर ले गया। वहां उसने युवती के साथ दुष्कर्म किया और बाद में उसे रहमा बस स्टैंड पर छोड़कर फरार हो गया।

मदद के बहाने दूसरा आरोपी बना दरिंदा

घटना के बाद युवती रहमा बस स्टैंड पर काफी देर तक अकेली और परेशान हालत में खड़ी रही। इसी दौरान एक बाइक सवार युवक वहां पहुंचा, जिसकी पहचान झारखंड के धनबाद निवासी शुभम कुमार सिंह के रूप में हुई।

उसने युवती को अकेला देखकर मदद की पेशकश की और भरोसा दिलाया कि वह उसे सुरक्षित जगह पहुंचा देगा।

किराए के मकान में ले जाकर फिर किया दुष्कर्म

पुलिस के अनुसार आरोपी युवक युवती को अपनी मोटरसाइकिल पर बैठाकर पारादीप स्थित अपने किराए के मकान पर ले गया। वहां उसने युवती को मकान की छत पर ले जाकर उसके साथ दोबारा दुष्कर्म किया।

इसके बाद अपराध छिपाने और सबूत मिटाने की नीयत से आरोपी ने युवती को चार मंजिला इमारत की छत से नीचे धक्का दे दिया। नीचे गिरने से युवती की मौके पर ही मौत हो गई। अगले दिन सुबह युवती का शव बरामद किया गया।

भाई ने दर्ज कराई गुमशुदगी

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार 22 फरवरी की शाम जब युवती घर नहीं लौटी तो 23 फरवरी को उसके भाई ने तिरतोल पुलिस स्टेशन में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।

उसी दिन युवती का शव मिलने के बाद अस्वाभाविक मृत्यु का मामला दर्ज किया गया। बाद में 25 फरवरी को भाई ने पारादीप मॉडल पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत देकर अपनी बहन के साथ दुष्कर्म और हत्या का आरोप लगाया।

दोनों आरोपी गिरफ्तार

जांच के दौरान पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी प्रेमी सोमनाथ ओझा के खिलाफ बीएनएस की धारा 87, 75(2), 79, 69 और 64(2)(m) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

वहीं दूसरे आरोपी शुभम कुमार सिंह पर बीएनएस की धारा 140(3), 103(1), 64(1), 64(2)(i) और 238 के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपियों की मोटरसाइकिल और मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए हैं।

इलाके में आक्रोश, जांच जारी

इस घटना के सामने आने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। पुलिस का कहना है कि मामले की गहन जांच जारी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट सहित सभी सबूतों को जांच में शामिल किया जा रहा है। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन: भारत में ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मेथनॉल के मानक अधिसूचित

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भारत सरकार ने राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 27 फरवरी 2026 को भारत के लिए ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मेथनॉल के मानक अधिसूचित किए हैं। ये मानकनवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालयद्वारा जारी किए गए हैं। इन मानकों में उत्सर्जन की सीमा और पात्रता शर्तें निर्धारित की गई हैं, जिन्हें पूरा करने पर अमोनिया और मेथनॉल को “ग्रीन” माना जाएगा, अर्थात् वे नवीकरणीय स्रोतों से प्राप्त ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग करके उत्पादित किए गए हों।

ग्रीन अमोनिया के लिए मानक

भारत के लिए निर्धारित मानक के अनुसार ग्रीन अमोनिया में कुल गैर-जैविक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन—जो ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन, अमोनिया संश्लेषण, शुद्धिकरण, संपीड़न और ऑन-साइट भंडारण से उत्पन्न होता है—0.38 किलोग्राम CO₂ समतुल्य प्रति किलोग्राम अमोनिया (kg CO₂ eq/kg NH₃) से अधिक नहीं होना चाहिए। यह गणना पिछले 12 महीनों के औसत के आधार पर की जाएगी।

ग्रीन मेथनॉल के लिए मानक

इसी प्रकार, ग्रीन मेथनॉल के लिए कुल गैर-जैविक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन—जो ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन, मेथनॉल संश्लेषण, शुद्धिकरण और ऑन-साइट भंडारण से उत्पन्न होता है—0.44 किलोग्राम CO₂ समतुल्य प्रति किलोग्राम मेथनॉल (kg CO₂ eq/kg CH₃OH) से अधिक नहीं होना चाहिए। यह भी पिछले 12 महीनों के औसत के आधार पर निर्धारित किया जाएगा।

कार्बन डाइऑक्साइड के स्रोत

अधिसूचना के अनुसार ग्रीन मेथनॉल के उत्पादन के लिए उपयोग की जाने वाली कार्बन डाइऑक्साइड निम्न स्रोतों से प्राप्त की जा सकती है:

  • जैविक (Biogenic) स्रोत

  • Direct Air Capture (DAC)

  • मौजूदा औद्योगिक स्रोत

मंत्रालय समय-समय पर कार्बन डाइऑक्साइड के पात्र स्रोतों में संशोधन कर सकता है। ऐसे संशोधन भविष्य में लागू होंगे और उपयुक्त ग्रैंडफादरिंग प्रावधानों के साथ लागू किए जाएंगे।

नवीकरणीय ऊर्जा की परिभाषा

ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मेथनॉल के उत्पादन में प्रयुक्त नवीकरणीय ऊर्जा में वह बिजली भी शामिल होगी जो नवीकरणीय स्रोतों से उत्पन्न होकर ऊर्जा भंडारण प्रणाली में संग्रहीत की गई हो या लागू नियमों के अनुसार ग्रिड के साथ बैंक की गई हो।

निगरानी और प्रमाणन

अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि मापन, रिपोर्टिंग, निगरानी, ऑन-साइट सत्यापन और प्रमाणन के लिए विस्तृत कार्यप्रणाली नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा अलग से जारी की जाएगी।

पहले से जारी निविदाएँ

अधिसूचना से पहले जारी की गई किसी भी टेंडर, बोली प्रक्रिया या निविदा पर उस समय लागू नियम और शर्तें लागू रहेंगी। हालांकि, यदि संभव हो और दोनों पक्ष सहमत हों, तो ऐसी निविदाओं को नए मानकों के अनुरूप भी बनाया जा सकता है।

उद्योग और निर्यात के लिए महत्व

ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मेथनॉल के मानकों की यह अधिसूचना उद्योग, निवेशकों और अन्य हितधारकों को स्पष्ट दिशा प्रदान करेगी। यह उर्वरक, शिपिंग, बिजली और भारी उद्योग जैसे क्षेत्रों के डीकार्बोनाइजेशन को बढ़ावा देने में सहायक होगी और भारत को ग्रीन ईंधनों के विश्वसनीय उत्पादक और निर्यातक के रूप में मजबूत बनाएगी।

भारतीय ग्रीन हाइड्रोजन डेवलपर्स ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मेथनॉल के लिए निर्यात बाजारों को लक्ष्य बना रहे हैं। इन मानकों के जारी होने से भारत ने नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के अंतर्गत ग्रीन हाइड्रोजन और उसके उत्पादों के लिए अपने नियामक ढांचे को और मजबूत किया है।

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