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शिशु संरक्षण माह: स्वस्थ बचपन और सुरक्षित भविष्य का आधार

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 धनंजय राठौर - संयुक्त संचालक, जनसंपर्क

शिशु जीवन का वह नाजुक चरण है, जहाँ सही पोषण और स्वास्थ्य देखभाल उनके भविष्य की दिशा तय करती है। भारत जैसे विकासशील देश में 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों में कुपोषण, एनीमिया और विभिन्न संक्रामक बीमारियों की दर को कम करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य एवं महिला-बाल विकास विभाग द्वारा 'शिशु संरक्षण माह' का आयोजन किया जाता है।


यह एक विशेष स्वास्थ्य अभियान है, जो नवजात और छोटे बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए एक मजबूत कवच का कार्य करता है। बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण स्तर को सुधारने के लिए चलाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण अभियान है। छत्तीसगढ़ राज्य में इस अभियान का नया चरण 18 अगस्त 2026 से शुरू हो गया है, जिसके तहत 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों की विशेष देखभाल की जा रही है।


अभियान का मुख्य उद्देश्य

इस विशेष माह को मनाने का प्राथमिक लक्ष्य बाल मृत्यु दर और 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में कमी लाना है। इसके साथ ही, बच्चों में समय पर बीमारियों की पहचान करना, उन्हें आवश्यक विटामिन और खनिज प्रदान करना, तथा माताओं को सही पोषण और स्वच्छता के प्रति जागरूक करना इस अभियान के प्रमुख उद्देश्य हैं।


प्रमुख स्वास्थ्य सेवाएं और गतिविधियाँ

शिशु संरक्षण माह के दौरान गांव-गांव और शहरों में स्वास्थ्य केंद्रों व आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से सेवाएं प्रदान की जाती हैं:
• विटामिन 'ए' का अनुपूरण: 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को रतौंधी (Night Blindness) जैसी आंखों की बीमारियों से बचाने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए विटामिन 'ए' की खुराक दी जाती है।
• एनीमिया से बचाव 6 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को खून की कमी (एनीमिया) से सुरक्षित रखने हेतु आयरन एवं फॉलिक एसिड (IFA) सिरप का वितरण किया जाता है।
• पूर्ण टीकाकरण: जिन बच्चों के नियमित टीके छूट गए हैं, उन्हें खसरा, रुबेला, पोलिया, काली खांसी और टिटनेस जैसी घातक बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकृत किया जाता है।
• कुपोषण की पहचान व उपचार: आंगनवाड़ी स्तर पर सभी बच्चों का वजन और लंबाई नापकर गंभीर रूप से कुपोषित और मध्यम कुपोषित बच्चों को चिह्नित किया जाता है। आवश्यकता पड़ने पर गंभीर बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र भेजा जाता है।
• दस्त नियंत्रण और ओआरएस वितरण: बच्चों में डिहाइड्रेशन रोकने के लिए माताओं को ओआरएस पैकेट और जिंक की गोलियां दी जाती हैं।

जागरूकता एवं परामर्श सत्र

केवल दवाएं देना ही इस अभियान का हिस्सा नहीं है, बल्कि माताओं और परिवारों का व्यवहार परिवर्तन भी इसका महत्वपूर्ण अंग है:

• स्तनपान का महत्व: जन्म के तुरंत बाद (1 घंटे के अंदर) मां का पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलस्ट्रम) और शुरुआती 6 माह तक केवल स्तनपान कराने के लिए माताओं को प्रेरित किया जाता है।
• ऊपरी आहार की शुरुआत: 6 माह की आयु पूरी होने के बाद बच्चे को स्तनपान के साथ-साथ सही मात्रा और गुणवत्ता वाला पूरक आहार (ऊपरी आहार) देने की सलाह दी जाती है। 6 से 12 महीने की उम्र के बीच, आपका शिशु पौष्टिक ठोस आहार खाना शुरू कर देगा, लेकिन माँ का दूध फिर भी पोषण का एक महत्वपूर्ण स्रोत बना रहेगा। जब आपका शिशु माँ का दूध या फार्मूला दूध पीना छोड़ दे, तो उसे धीरे-धीरे और धैर्य से खिलाएँ। उसे नए स्वाद चखने दें, लेकिन ज़बरदस्ती न करें। जब आपका बच्चा ठोस आहार खाना शुरू करे, तो उसे भोजन को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर खाने से रोकें ताकि वह गले में न अटके।
• अपने शिशु के मस्तिष्क के विकास में मदद करने के लिए उसे पढ़ें, उससे बातें करें और उसके लिए गाएं।
• अपने शिशु को सोने के पर्याप्त अवसर प्रदान करें - 4 से 12 महीने के शिशुओं के लिए अनुशंसित नींद की मात्रा प्रतिदिन 12 से 16 घंटे (24 घंटे की अवधि में, झपकी सहित) है।
• शिशु को सक्रिय रखना उसके विकास के लिए महत्वपूर्ण है। दिन भर उसके हाथ-पैर हिलाते रहने के लिए उसके साथ शारीरिक गतिविधियाँ करें। ज़मीन पर बैठकर हिलने-डुलने से शिशु मजबूत बनता है और साथ ही वह दुनिया को समझने और जानने की कला सीखता है।
• स्वच्छता व सैनिटेशन: हाथ धोने की सही आदत और बच्चे की देखभाल में साफ-सफाई के महत्व पर चर्चा की जाती है, जिससे संक्रमण से बचाव संभव हो सके।
• शिशु को सक्रिय रखना उसके विकास के लिए महत्वपूर्ण है। दिन भर उसके हाथ-पैर हिलाते रहने के लिए उसके साथ शारीरिक गतिविधियाँ करें। ज़मीन पर बैठकर हिलने-डुलने से शिशु मजबूत बनता है और साथ ही वह दुनिया को समझने और जानने की कला सीखता है।
• शिशु को बांधकर रखने वाले उपकरण उसके विकास में बाधा डाल सकते हैं। शिशु को झूले, स्ट्रोलर, बाउंसिंग सीट, एक्सरसाइज़ सॉसर या अन्य किसी भी बांधकर रखने वाले उपकरण में लंबे समय तक न रखें। उन्हें बाहर निकालें और घूमने-फिरने दें।

शिशु संरक्षण माह केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह हर परिवार और समाज के लिए अपने बच्चों के प्रति जिम्मेदारी का अहसास कराने वाला समय है। जब समाज का हर वर्ग—स्वास्थ्य कार्यकर्ता, मितानिन/आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और अभिभावक—एक साथ मिलकर प्रयास करेंगे, तभी हम एक स्वस्थ, कुपोषण-मुक्त और सशक्त पीढ़ी का निर्माण कर सकेंगे।

छत्तीसगढ़ में बाढ़ आपदा से निपटने आज बड़ी मॉक ड्रिल, राहत-बचाव तैयारियों की होगी परीक्षा

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में संभावित बाढ़ और जलभराव जैसी आपदा की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के दिशा-निर्देशों के तहत 20 अगस्त को प्रदेश में व्यापक मॉक ड्रिल आयोजित की जा रही है। इसका उद्देश्य आपदा के दौरान राहत, बचाव और प्रशासनिक प्रतिक्रिया की तैयारियों को जमीनी स्तर पर परखना है।


रायपुर में परसदा सेंध झील में होगा अभ्यास

राजधानी रायपुर में मुख्य मॉक ड्रिल मंदिर हसौद तहसील के परसदा गांव स्थित सेंध झील में आयोजित की जा रही है। यह अभ्यास सुबह 10:30 बजे से दोपहर 1 बजे तक चलेगा। NDMA और जिला प्रशासन की संयुक्त पहल के तहत होने वाले इस अभ्यास में आपदा की सूचना मिलने से लेकर राहत एवं बचाव दलों के मौके पर पहुंचने तक की पूरी प्रक्रिया को परखा जाएगा।

परखी जाएगी विभागों की तैयारी

मॉक ड्रिल के दौरान पुलिस, नगर सेना, अग्निशमन, नागरिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, ऊर्जा सहित विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया की क्षमता का परीक्षण किया जाएगा। अधिकारियों को निर्धारित Standard Operating Procedures (SOPs) को समझने और उनका प्रभावी पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

इस अभ्यास का प्रमुख उद्देश्य यह देखना है कि अचानक बाढ़ या जलभराव की स्थिति में प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, राहत सामग्री उपलब्ध कराने और बचाव अभियान शुरू करने में कितना समय लगता है।

‘जीरो डिले’ रिस्पॉन्स पर फोकस

आपदा प्रबंधन की तैयारियों में ‘जीरो डिले’ रिस्पॉन्स पर विशेष जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि ऐसे पूर्वाभ्यास से वास्तविक आपदा के समय होने वाली देरी और व्यवस्थागत कमियों को पहले ही चिन्हित किया जा सकता है। इसके आधार पर राहत एवं बचाव व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।

प्रदेश में 18 अगस्त को राज्य स्तरीय टेबल-टॉप एक्सरसाइज भी आयोजित की गई थी, जिसमें अधिकारियों ने संभावित बाढ़ परिदृश्यों और विभागीय जिम्मेदारियों पर अभ्यास किया। इसके बाद 20 अगस्त को जमीनी स्तर पर मॉक ड्रिल के जरिए तैयारियों की वास्तविक परीक्षा की जा रही है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मॉक ड्रिल?

बाढ़ जैसी आपदा के दौरान शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में प्रशासन का त्वरित निर्णय, राहत-बचाव दलों की पहुंच, संचार व्यवस्था और विभिन्न विभागों के बीच तालमेल सीधे तौर पर जनहानि को कम करने में मदद कर सकता है।

यह मॉक ड्रिल प्रदेश की आपदा प्रबंधन क्षमता, अंतर-विभागीय समन्वय और त्वरित राहत-बचाव व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघों के शिकार पर CBI जांच की मांग, अंतरराज्यीय नेटवर्क के कनेक्शन की आशंका

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बीजापुर- छत्तीसगढ़ के इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघों के शिकार और कथित तस्करी से जुड़े मामले ने गंभीर रूप ले लिया है। मामले की जांच में अंतरराज्यीय कनेक्शन सामने आने की आशंका के बाद छत्तीसगढ़ वन विभाग ने केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की सिफारिश की है। वन मंत्री केदार कश्यप ने भी मामले में CBI जांच की मांग का समर्थन किया है।

प्रारंभिक जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि बाघों के अवैध शिकार से जुड़े आरोपियों के तार छत्तीसगढ़ से बाहर तक जुड़े हो सकते हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में महाराष्ट्र पुलिस की खुफिया शाखा से जुड़े दो लोगों के नाम भी सामने आए हैं। इस वजह से जांच का दायरा बढ़ गया है और संभावित अंतरराज्यीय वन्यजीव तस्करी नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है।

बाघों की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

इंद्रावती टाइगर रिजर्व लंबे समय से बाघ संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण क्षेत्र रहा है। ऐसे में बाघों के अवैध शिकार और उनकी खाल की तस्करी से जुड़े मामलों ने वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।

छत्तीसगढ़ सरकार के अनुसार, वर्ष 2024 में एक, 2025 में एक और 2026 में तीन अवैध शिकार/तस्करी के मामले सामने आए हैं। इन मामलों में कुल 6 बाघों की खाल जब्त किए जाने और 41 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी विधानसभा में दी गई थी।

CBI जांच से सामने आ सकता है पूरा नेटवर्क

वन विभाग का मानना है कि मामले में यदि अंतरराज्यीय नेटवर्क की भूमिका है, तो इसकी स्वतंत्र और विस्तृत जांच जरूरी है। इसी वजह से केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की सिफारिश की गई है। अधिकारियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि बाघों के शिकार के पीछे कौन लोग हैं, वन्यजीवों के अंगों की तस्करी कहां तक फैली है और इस पूरे नेटवर्क में किन-किन लोगों की भूमिका हो सकती है।

मामले में वन्यजीव संरक्षण से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। यदि किसी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

संरक्षण व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर

बाघों की सुरक्षा को लेकर केंद्र का राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) भी राज्यों के साथ संरक्षण गतिविधियों और निगरानी को मजबूत करने का काम करता है।

अब इस मामले में केंद्रीय जांच की मांग के बाद सभी की नजर आगे की कार्रवाई पर है। CBI जांच होने की स्थिति में संभावित अंतरराज्यीय नेटवर्क, वन्यजीव तस्करी और संबंधित अधिकारियों की भूमिका को लेकर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

नोट: मामले में सामने आए आरोप और संभावित कनेक्शन जांच का विषय हैं। किसी व्यक्ति की संलिप्तता न्यायिक प्रक्रिया में दोष सिद्ध होने तक आरोप मात्र है।

शराब घोटाला मामले में कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल के ठिकानों पर ED की दबिश

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रायपुर- छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार को कांग्रेस नेता और छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। एजेंसी की टीम ने धमतरी स्थित उनके आवास के साथ रायपुर में भी कार्रवाई की।

जानकारी के मुताबिक, ED की टीम सुबह धमतरी स्थित अग्रवाल के आवास पहुंची और कई घंटों तक दस्तावेजों तथा अन्य रिकॉर्ड की जांच की। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी की गई थी। कुछ कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और ED की कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन किया।

शराब घोटाले की जांच से जुड़ी कार्रवाई

यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच का हिस्सा है। ED ने इससे पहले 11 अगस्त 2026 को रामगोपाल अग्रवाल को PMLA के तहत गिरफ्तार किया था। उस समय वह रायपुर सेंट्रल जेल में विचाराधीन बंदी के रूप में निरुद्ध थे। विशेष PMLA अदालत ने उन्हें ED की हिरासत में भेजा था।

ED का आरोप है कि वर्ष 2019 से 2023 के दौरान छत्तीसगढ़ के आबकारी तंत्र में कथित अनियमितताओं से करीब ₹3,000 करोड़ की अपराध से अर्जित आय पैदा हुई। जांच एजेंसी के अनुसार, इस रकम के एक हिस्से के नकद लेनदेन में रामगोपाल अग्रवाल की भूमिका की जांच की जा रही है।

एजेंसी ने अपने आधिकारिक बयान में दावा किया है कि जांच के दौरान ऐसे बयान सामने आए जिनमें कथित नकदी को रायपुर स्थित राजीव भवन तक पहुंचाए जाने का उल्लेख है। हालांकि, ये ED द्वारा लगाए गए आरोप हैं और मामले की जांच अभी जारी है।

आगे भी जारी रहेगी जांच

ED ने कहा है कि मामले में आगे की जांच जारी है। ताजा तलाशी के दौरान बरामद या जांचे गए दस्तावेजों और अन्य सामग्री के आधार पर एजेंसी आगे की कार्रवाई कर सकती है।

नोट: शराब घोटाले से जुड़े आरोपों और ED के दावों पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही माना जाएगा।

ब्रिक्स ICT ट्रैक में भारत ने रखा डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का विजन, ग्लोबल साउथ के लिए मजबूत डिजिटल साझेदारी का आह्वान

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पुणे- संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी ने पुणे में आयोजित BRICS ICT Track Thematic Panel Discussion में मुख्य वक्तव्य देते हुए भारत के खुले, समावेशी और मजबूत डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे (Digital Public Infrastructure—DPI) की वैश्विक भूमिका पर प्रकाश डाला।

“Sustainable and Resilient Digital and ICT Ecosystems: Digital Public Infrastructure for Impact – Global South Insights on Powering Public Services and Economic Growth” विषय पर आयोजित इस चर्चा में BRICS देशों के मंत्री, नीति-निर्माता, शिक्षाविद और उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल हुए।

भारत का डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बना नई विकास व्यवस्था का आधार

डॉ. पेम्मासानी ने कहा कि पारंपरिक रूप से इंफ्रास्ट्रक्चर का अर्थ सड़क, बंदरगाह और बिजली जैसी भौतिक संपत्तियों से लगाया जाता था, लेकिन भारत ने पहचान, बैंकिंग, भुगतान, सत्यापन योग्य दस्तावेज और सहमति आधारित डेटा जैसे डिजिटल माध्यमों पर आधारित एक आधुनिक डिजिटल व्यवस्था विकसित की है।

उन्होंने कहा कि भारत की असली उपलब्धि एक ऐसे खुले और इंटरऑपरेबल सार्वजनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म का निर्माण है, जिस पर बैंक, फिनटेक कंपनियां और सरकारी विभाग विभिन्न सेवाएं विकसित कर सकते हैं।

UPI ने डिजिटल भुगतान को बनाया आसान

डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रमुख स्तंभों का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री ने UPI की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि UPI से 720 बैंक जुड़े हुए हैं और यह भारत के लगभग 85 प्रतिशत डिजिटल लेनदेन को प्रोसेस करता है। उन्होंने कहा कि वैश्विक रियल-टाइम भुगतान में भारत की हिस्सेदारी करीब 49 प्रतिशत है और UPI अब 9 साझेदार देशों तक पहुंच चुका है।

DBT और DigiLocker से पारदर्शिता को बढ़ावा

डॉ. पेम्मासानी ने Direct Benefit Transfer (DBT) की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। DBT पोर्टल के माध्यम से 56 मंत्रालयों की 318 योजनाओं को जोड़ा गया है, जिससे बिचौलियों की भूमिका कम करने और लाभ सीधे पात्र लोगों तक पहुंचाने में मदद मिली है।

वहीं, DigiLocker के 70 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता हैं और इसके माध्यम से करीब 9 अरब सत्यापन योग्य डिजिटल दस्तावेज जारी किए जा चुके हैं।

उन्होंने ONDC, Government e-Marketplace (GeM) और Account Aggregator जैसी पहलों को भी डिजिटल बाजार और डेटा से जुड़ी नागरिकों की स्वायत्तता को बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया।

99 प्रतिशत गांवों तक 4G कवरेज

भारत के दूरसंचार क्षेत्र में हो रहे विस्तार पर प्रकाश डालते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि देश के लगभग 99 प्रतिशत गांवों में 4G मोबाइल कवरेज पहुंच चुका है। इसके लिए करीब 4 अरब डॉलर के सैचुरेशन अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है।

भारत में 5G नेटवर्क का भी तेजी से विस्तार हुआ है और 5 लाख से अधिक 5G बेस स्टेशन तैनात किए जा चुके हैं। वहीं, BharatNet मिशन के तहत प्रमुख गांवों तक हाई-स्पीड ऑप्टिकल फाइबर पहुंचाने का काम जारी है।

हरित ऊर्जा पर भी जोर

डिजिटल और दूरसंचार विस्तार के साथ पर्यावरणीय स्थिरता पर भी जोर देते हुए डॉ. पेम्मासानी ने बताया कि मोबाइल टावरों में वर्तमान में 12.4 प्रतिशत हरित ऊर्जा का उपयोग हो रहा है। वर्ष 2030 तक दूरसंचार बुनियादी ढांचे में 30 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग का राष्ट्रीय लक्ष्य रखा गया है।

ग्लोबल साउथ के लिए DPI जरूरी

अपने संबोधन के समापन में डॉ. पेम्मासानी ने कहा कि Digital Public Infrastructure केवल विकसित देशों के लिए सुविधा नहीं, बल्कि ग्लोबल साउथ के सतत विकास की आवश्यकता है।

उन्होंने BRICS देशों के बीच मजबूत डिजिटल सहयोग का आह्वान करते हुए मॉड्यूलर और ओपन-सोर्स तकनीकी ढांचे को साझा करने पर जोर दिया, ताकि महंगे लाइसेंसिंग खर्च को कम किया जा सके। साथ ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय ICT मानक निर्धारण संस्थाओं में ग्लोबल साउथ की उचित भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त क्षमता निर्माण की आवश्यकता बताई।

इस thematic panel में ब्राजील के संचार मंत्री फ्रेडेरिको डी सिकीरा फिल्हो और दक्षिण अफ्रीका के संचार एवं डिजिटल प्रौद्योगिकी उपमंत्री मोंडली गंगुबेले सहित BRICS देशों के अन्य प्रतिनिधि और वैश्विक तकनीकी क्षेत्र के प्रमुख विशेषज्ञ भी शामिल हुए।

बिहार के लिए बड़ा पैकेज: 11.18 लाख पक्के आवास मंजूर, ₹13,427 करोड़ का आवंटन

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पटना- केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पटना में आयोजित प्रधानमंत्री आवास योजना के राज्य स्तरीय कार्यक्रम में बिहार के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने राज्य के गरीब परिवारों के लिए 11,18,937 पक्के मकानों को मंजूरी देने के साथ ₹13,427 करोड़ के आवंटन की घोषणा की। कार्यक्रम में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सहित राज्य सरकार के वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी मौजूद रहे।

11.18 लाख परिवारों को मिलेगा पक्का घर

चौहान ने कहा कि पक्का मकान केवल ईंट और सीमेंट की संरचना नहीं, बल्कि गरीब परिवारों के लिए सम्मान, सुरक्षा और बेहतर जीवन का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हर गरीब परिवार को पक्का घर उपलब्ध कराने के संकल्प को बिहार में बड़े स्तर पर साकार किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में बिहार के लिए 24,30,327 मकानों को मंजूरी दी जा चुकी है, जिन पर कुल ₹29,164 करोड़ का व्यय प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से सीधे पात्र लाभार्थियों तक पहुंचाया जा रहा है।

बिहार के किसानों के लिए फसल बीमा योजना

केंद्रीय मंत्री ने बिहार में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के क्रियान्वयन को भी महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि बाढ़, सूखा, अत्यधिक बारिश और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से फसल को होने वाले नुकसान की स्थिति में पात्र किसानों को बीमा के माध्यम से आर्थिक सुरक्षा मिलेगी।

उन्होंने कहा कि किसान देश की खाद्य सुरक्षा की रीढ़ हैं और उन्हें प्राकृतिक जोखिमों से सुरक्षा देना सरकार की जिम्मेदारी है। साथ ही कृषि को अधिक लाभकारी और मजबूत बनाने के लिए खरीद व्यवस्था, तकनीक और अन्य सहायता प्रणालियों को भी मजबूत किया जा रहा है।

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर

चौहान ने बिहार में लखपति दीदी अभियान को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं और अपना व्यवसाय खड़ा कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि महिलाओं की आय बढ़ने से पूरे परिवार की आर्थिक और सामाजिक स्थिति मजबूत होती है। स्वयं रोजगार, समूह आधारित उद्यम, बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को उद्यमी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

हर जिले में बनेंगे She-Marts

महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए हर जिले में She-Mart स्थापित करने की दिशा में काम करने की बात भी कही गई। इन बाजारों के माध्यम से जीविका दीदियों और महिला समूहों को अपने उत्पाद बेचने के लिए बेहतर मंच मिलेगा।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि महिलाओं के उत्पादों के लिए उचित बाजार, बेहतर पैकेजिंग, उत्पाद विकास और मार्केटिंग की व्यवस्था भी जरूरी है। इससे महिलाओं की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों को मजबूती मिलेगी।

53.83 लाख किसानों के Farmer ID बने

बिहार में 53,83,000 Farmer ID बनाए जाने पर चौहान ने राज्य सरकार की सराहना की। उन्होंने कहा कि Farmer ID के माध्यम से किसानों की पहचान आसान होगी और सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र किसानों तक अधिक तेजी और पारदर्शिता के साथ पहुंचाया जा सकेगा।

उन्होंने शेष किसानों के Farmer ID भी जल्द तैयार किए जाने की उम्मीद जताई।

सड़क, आवास और कृषि—ग्रामीण विकास के तीन आधार

चौहान ने ग्रामीण विकास के लिए सड़क, आवास और कृषि को तीन महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि बेहतर सड़कें गांवों को बाजार और सेवाओं से जोड़ेंगी, पक्के मकान परिवारों को सुरक्षा देंगे और मजबूत कृषि से ग्रामीण आय में वृद्धि होगी।

उन्होंने केंद्र और बिहार सरकार के बीच बेहतर समन्वय को राज्य के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि सरकार बिहार के गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने और राज्य को देश की विकास यात्रा में और मजबूत भूमिका देने के लिए प्रतिबद्ध है।

वंदे मातरम् को बताया राष्ट्रीय गौरव का विषय

कार्यक्रम के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने वंदे मातरम् को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् किसी राजनीतिक दल का विषय नहीं, बल्कि भारत माता के प्रति सम्मान और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में इसके योगदान का उल्लेख करते हुए इसे राष्ट्रीय भावना से जुड़ा विषय बताया।

कार्यक्रम में बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा, ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार सहित कई मंत्री, जनप्रतिनिधि, लाभार्थी, महिलाएं और अधिकारी उपस्थित रहे।

कुल मिलाकर, बिहार के लिए घोषित आवास, कृषि, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण कनेक्टिविटी से जुड़े ये कदम राज्य के ग्रामीण परिवारों की आय, आवासीय सुरक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

शिशु संरक्षण माह: स्वस्थ बचपन और सुरक्षित भविष्य का आधार

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धनंजय राठौर

संयुक्त संचालक, जनसंपर्क

शिशु जीवन का वह नाजुक चरण है, जहाँ सही पोषण और स्वास्थ्य देखभाल उनके भविष्य की दिशा तय करती है। भारत जैसे विकासशील देश में 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों में कुपोषण, एनीमिया और विभिन्न संक्रामक बीमारियों की दर को कम करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य एवं महिला-बाल विकास विभाग द्वारा 'शिशु संरक्षण माह' का आयोजन किया जाता है। यह एक विशेष स्वास्थ्य अभियान है, जो नवजात और छोटे बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए एक मजबूत कवच का कार्य करता है। बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण स्तर को सुधारने के लिए चलाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण अभियान है। छत्तीसगढ़ राज्य में इस अभियान का नया चरण 18 अगस्त 2026 से शुरू हो गया है, जिसके तहत 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों की विशेष देखभाल की जा रही है। 


अभियान का मुख्य उद्देश्य

इस विशेष माह को मनाने का प्राथमिक लक्ष्य बाल मृत्यु दर और 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में कमी लाना है। इसके साथ ही, बच्चों में समय पर बीमारियों की पहचान करना, उन्हें आवश्यक विटामिन और खनिज प्रदान करना, तथा माताओं को सही पोषण और स्वच्छता के प्रति जागरूक करना इस अभियान के प्रमुख उद्देश्य हैं।

प्रमुख स्वास्थ्य सेवाएं और गतिविधियाँ

शिशु संरक्षण माह के दौरान गांव-गांव और शहरों में स्वास्थ्य केंद्रों व आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से सेवाएं प्रदान की जाती हैं:

विटामिन 'ए' का अनुपूरण: 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को रतौंधी (Night Blindness) जैसी आंखों की बीमारियों से बचाने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए विटामिन 'ए' की खुराक दी जाती है।

•एनीमिया से बचाव: 6 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को खून की कमी (एनीमिया) से सुरक्षित रखने हेतु आयरन एवं फॉलिक एसिड (IFA) सिरप का वितरण किया जाता है।

पूर्ण टीकाकरण: जिन बच्चों के नियमित टीके छूट गए हैं, उन्हें खसरा, रुबेला, पोलिया, काली खांसी और टिटनेस जैसी घातक बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकृत किया जाता है।

कुपोषण की पहचान व उपचार: आंगनवाड़ी स्तर पर सभी बच्चों का वजन और लंबाई नापकर गंभीर रूप से कुपोषित और मध्यम कुपोषित बच्चों को चिह्नित किया जाता है। आवश्यकता पड़ने पर गंभीर बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र भेजा जाता है।

•दस्त नियंत्रण और ओआरएस वितरण: बच्चों में डिहाइड्रेशन रोकने के लिए माताओं को ओआरएस पैकेट और जिंक की गोलियां दी जाती हैं।

जागरूकता एवं परामर्श सत्र

केवल दवाएं देना ही इस अभियान का हिस्सा नहीं है, बल्कि माताओं और परिवारों का व्यवहार परिवर्तन भी इसका महत्वपूर्ण अंग है:

•स्तनपान का महत्व: जन्म के तुरंत बाद (1 घंटे के अंदर) मां का पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलस्ट्रम) और शुरुआती 6 माह तक केवल स्तनपान कराने के लिए माताओं को प्रेरित किया जाता है।

•ऊपरी आहार की शुरुआत: 6 माह की आयु पूरी होने के बाद बच्चे को स्तनपान के साथ-साथ सही मात्रा और गुणवत्ता वाला पूरक आहार (ऊपरी आहार) देने की सलाह दी जाती है। 6 से 12 महीने की उम्र के बीच, आपका शिशु पौष्टिक ठोस आहार खाना शुरू कर देगा, लेकिन माँ का दूध फिर भी पोषण का एक महत्वपूर्ण स्रोत बना रहेगा। जब आपका शिशु माँ का दूध या फार्मूला दूध पीना छोड़ दे, तो उसे धीरे-धीरे और धैर्य से खिलाएँ। उसे नए स्वाद चखने दें, लेकिन ज़बरदस्ती न करें।  जब आपका बच्चा ठोस आहार खाना शुरू करे, तो उसे भोजन को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर खाने से रोकें ताकि वह गले में न अटके।

•अपने शिशु के मस्तिष्क के विकास में मदद करने के लिए उसे पढ़ें, उससे बातें करें और उसके लिए गाएं।

•अपने शिशु को सोने के पर्याप्त अवसर प्रदान करें - 4 से 12 महीने के शिशुओं के लिए अनुशंसित नींद की मात्रा प्रतिदिन 12 से 16 घंटे (24 घंटे की अवधि में, झपकी सहित) है।

•शिशु को सक्रिय रखना उसके विकास के लिए महत्वपूर्ण है। दिन भर उसके हाथ-पैर हिलाते रहने के लिए उसके साथ शारीरिक गतिविधियाँ करें। ज़मीन पर बैठकर हिलने-डुलने से शिशु मजबूत बनता है और साथ ही वह दुनिया को समझने और जानने की कला सीखता है।

स्वच्छता व सैनिटेशन: हाथ धोने की सही आदत और बच्चे की देखभाल में साफ-सफाई के महत्व पर चर्चा की जाती है, जिससे संक्रमण से बचाव संभव हो सके।

•शिशु को सक्रिय रखना उसके विकास के लिए महत्वपूर्ण है। दिन भर उसके हाथ-पैर हिलाते रहने के लिए उसके साथ शारीरिक गतिविधियाँ करें। ज़मीन पर बैठकर हिलने-डुलने से शिशु मजबूत बनता है और साथ ही वह दुनिया को समझने और जानने की कला सीखता है।

•शिशु को बांधकर रखने वाले उपकरण उसके विकास में बाधा डाल सकते हैं। शिशु को झूले, स्ट्रोलर, बाउंसिंग सीट, एक्सरसाइज़ सॉसर या अन्य किसी भी बांधकर रखने वाले उपकरण में लंबे समय तक न रखें। उन्हें बाहर निकालें और घूमने-फिरने दें।

शिशु संरक्षण माह केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह हर परिवार और समाज के लिए अपने बच्चों के प्रति जिम्मेदारी का अहसास कराने वाला समय है। जब समाज का हर वर्ग—स्वास्थ्य कार्यकर्ता, मितानिन/आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और अभिभावक—एक साथ मिलकर प्रयास करेंगे, तभी हम एक स्वस्थ, कुपोषण-मुक्त और सशक्त पीढ़ी का निर्माण कर सकेंगे।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश: पूर्व हाईकोर्ट जजों के रिटायरमेंट लाभों पर बनेगी समान राष्ट्रीय नीति

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नई दिल्ली- सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व हाईकोर्ट मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों को सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली सुविधाओं में एकरूपता लाने के लिए केंद्र सरकार को समिति गठित करने के लिए एक सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने केंद्र की ओर से अतिरिक्त समय मांगे जाने पर यह अनुमति दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि केंद्र तय समय में समिति का गठन नहीं करता है, तो सुप्रीम कोर्ट स्वयं समिति गठित कर सकता है।

दरअसल, अलग-अलग राज्यों में सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जजों को मिलने वाली सुविधाओं में काफी अंतर है। इनमें ड्राइवर, सुरक्षा व्यवस्था और यात्रा के दौरान सरकारी आवास जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इसी असमानता को दूर करने के लिए पूरे देश में एक समान नीति तैयार करने की दिशा में यह कदम उठाया गया है। 

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले 20 जुलाई 2026 को केंद्र को दो सप्ताह के भीतर समिति गठित करने का निर्देश दिया था। समिति को इस विषय पर अपनी सिफारिशें तैयार करनी हैं।

अब मामले की अगली सुनवाई करीब 10 दिन बाद होने की संभावना है। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश से सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जजों के लिए देशभर में सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली सुविधाओं को लेकर एक समान व्यवस्था बनने का रास्ता साफ हो सकता है।

छत्तीसगढ़ में BharatNet को बड़ा बढ़ावा, ₹3,942 करोड़ की मंजूरी

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में ग्रामीण क्षेत्रों की डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। Digital Bharat Nidhi (DBN), दूरसंचार विभाग और छत्तीसगढ़ सरकार के बीच Amended BharatNet Programme (ABP) के क्रियान्वयन के लिए समझौता हुआ है। यह समझौता 18 अगस्त 2026 को नई दिल्ली स्थित संचार भवन में हुआ।

इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ में BharatNet के विस्तार के लिए ₹3,942 करोड़ की वित्तीय सहायता मंजूर की है। इसका उद्देश्य राज्य के ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में तेज एवं बेहतर ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है।

11,682 ग्राम पंचायतों तक पहुंचेगा नेटवर्क

Amended BharatNet Programme के तहत छत्तीसगढ़ की 11,682 ग्राम पंचायतों को कवर करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही 8,328 गांवों में मांग के आधार पर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने की योजना है। इससे उन ग्रामीण इलाकों को भी हाई-स्पीड इंटरनेट से जोड़ने में मदद मिलेगी, जहां अभी डिजिटल सेवाओं की पहुंच सीमित है। 

समझौते में Digital Bharat Nidhi, छत्तीसगढ़ सरकार, Chhattisgarh State BharatNet Infrastructure Limited (CSBIL), BSNL और Chhattisgarh Infotech Promotion Society (CHiPS) शामिल हैं। राज्य के नेतृत्व वाले मॉडल के तहत परियोजना को आगे बढ़ाया जाएगा। 

3 लाख से अधिक ग्रामीण घरों को मिलेगा लाभ

परियोजना के तहत तीन लाख से अधिक ग्रामीण घरों तक फाइबर कनेक्शन पहुंचाने में सरकारी वित्तीय सहायता मिलने की उम्मीद है। इससे ग्रामीण परिवारों को इंटरनेट आधारित शिक्षा, ऑनलाइन सरकारी सेवाओं, डिजिटल भुगतान, टेलीमेडिसिन और अन्य डिजिटल सुविधाओं तक बेहतर पहुंच मिल सकती है। 

गांवों में डिजिटल सेवाओं को मिलेगी रफ्तार

BharatNet का विस्तार केवल इंटरनेट कनेक्शन तक सीमित नहीं है। बेहतर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से ग्राम पंचायतों में ई-गवर्नेंस, ऑनलाइन प्रमाणपत्र एवं सरकारी सेवाएं, डिजिटल शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और वित्तीय समावेशन को मजबूती मिलने की उम्मीद है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों और शहरों के बीच मौजूद डिजिटल अंतर को कम करने में भी मदद मिलेगी। 

केंद्र सरकार ने 2023 में Amended BharatNet Programme को देश के बसे हुए गांवों तक हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड पहुंचाने के उद्देश्य से मंजूरी दी थी। छत्तीसगढ़ सहित चुनिंदा राज्यों में इसके राज्य-आधारित क्रियान्वयन की व्यवस्था की गई है। 

कुल मिलाकर, ₹3,942 करोड़ का यह निवेश छत्तीसगढ़ के ग्रामीण डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि परियोजना निर्धारित गति से लागू होती है, तो हजारों ग्राम पंचायतों और गांवों में इंटरनेट आधारित शिक्षा, रोजगार, कारोबार और सरकारी सेवाओं के नए अवसर खुल सकते हैं।

मनिहारी का ठेला छोड़कर वर्दी पहनी और देश के लिए दे दी अपनी जान

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पंद्रहवीं पुण्यतिथि पर शहीद घनश्याम कन्नौजे का पुण्य स्मरण

नक्सलियों से लोहा लेते हुए बिरकोनी के वीर घनश्याम ने दिया था सर्वोच्च बलिदान

महासमुंद- “वतन की राह में वतन के नौजवां शहीद हो...” यह पंक्ति उन वीरों की कहानी कहती है, जिनके लिए देश की सुरक्षा से बढ़कर कुछ नहीं था। ऐसे ही एक साधारण परिवार में जन्मे असाधारण साहस के धनी थे बिरकोनी के घनश्याम कन्नौजे। हाथों में कभी मनिहारी का सामान लेकर गांव की गलियों में घूमने वाला यह नौजवान जब वर्दी में आया, तो देश की रक्षा को अपना धर्म मान लिया। बस्तर के घने जंगलों में नक्सलियों से मुठभेड़ के दौरान महज 23 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। 21 अगस्त 2026 को उनकी पंद्रहवीं पुण्यतिथि पर यह अंचल अपने उस वीर लाल को श्रद्धा और गर्व के साथ याद कर रहा है।

साल 2011 में एएसएफ की दूसरी बटालियन, सकरी बिलासपुर में आरक्षक क्रमांक 111 के रूप में पदस्थ घनश्याम कन्नौजे बीजापुर के भद्राकाली क्षेत्र में तैनात थे। 19 अगस्त को फोर्स की एक टुकड़ी कैंप के लिए रसद लेने निकली थी। जवानों को अंदाजा नहीं था कि जिस जंगल के रास्ते से वे गुजर रहे हैं, वहीं नक्सलियों ने घात लगा रखी है। अचानक बारूदी सुरंग में जोरदार विस्फोट हुआ। वाहन के परखच्चे उड़ गए और कई जवान घायल हो गए। विस्फोट के तुरंत बाद नक्सलियों ने तीन दिशाओं से अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। परिस्थितियां बेहद प्रतिकूल थीं, लेकिन जवानों ने हिम्मत नहीं छोड़ी। घायल होने के बावजूद उन्होंने मोर्चा संभाला और हमलावरों को मुंहतोड़ जवाब दिया। गोलियों और बारूदी विस्फोटों के बीच जवान आखिरी सांस तक लड़ते रहे। इस मुठभेड़ में 13 जवान शहीद हुए। उनमें बिरकोनी का वह नौजवान घनश्याम कन्नौजे भी था।

20 अगस्त को उनका पार्थिव शरीर मिला। अगले दिन, 21 अगस्त को बिरकोनी के हाईस्कूल परिसर में पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। जिस विद्यालय में कभी घनश्याम ने पढ़ाई की थी, वही परिसर उस दिन उनके अंतिम विदाई का साक्षी बना। अपने वीर बेटे को अंतिम विदाई देने पूरा गांव उमड़ पड़ा था।

6 अक्टूबर 1988 को महासमुंद के समीप ग्राम बिरकोनी में जन्मे घनश्याम का बचपन किसी संपन्न परिवार में नहीं, बल्कि मेहनत और संघर्ष के बीच बीता। उनके दादाजी पुरानिक कन्नौजे सीमांत किसान थे। पिता गुलाब कन्नौजे खेती के साथ मनिहारी का सामान बेचकर परिवार का भरण-पोषण करते थे। घनश्याम ने बिरकोनी के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय और महासमुंद के शासकीय आदर्श स्कूल में पढ़ाई की। पढ़ाई के साथ वे खेती में हाथ बंटाते और पिता के मनिहारी व्यवसाय में भी सहयोग करते थे। कई बार स्वयं मनिहारी का ठेला लेकर गांव की गलियों में घूमते थे। 

जीवन की कठिनाइयों ने उनके हौसले को कमजोर नहीं किया। करीब 20 वर्ष की उम्र में उन्होंने फोर्स ज्वाइन की। गांव की गलियों में मनिहारी का सामान बेचने वाला यह युवक देखते ही देखते वर्दीधारी जवान बन गया। लेकिन नियति को शायद कुछ और ही मंजूर था। सेवा के कुछ ही वर्षों बाद, 23 वर्ष की उम्र पूरी होने से पहले, उन्होंने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। गांव आया तो तिरंगे में लिपटकर। 

शहीद घनश्याम कन्नौजे की स्मृति आज भी बिरकोनी में उतनी ही जीवंत है। स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस और 21 अक्टूबर पुलिस दिवस के अवसर पर पुलिस जवान, नागरिक, शिक्षक-शिक्षिकाएं और विद्यार्थी उनकी प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित करते हैं। बिरकोनी के हाईस्कूल परिसर में स्थापित उनकी प्रतिमा आज भी आने-जाने वालों को उनके बलिदान की याद दिलाती है। इससे भी आगे बढ़कर गांव के श्रीराम-जानकी मंदिर सहित अनेक देवालयों में उनके छायाचित्र लगाए गए हैं। धार्मिक स्थलों में सहेजी गई उनकी तस्वीरें इस बात की गवाही देती हैं कि शहीद घनश्याम केवल परिवार या गांव के नहीं, बल्कि पूरे अंचल के गौरव हैं।

 उनकी शहादत को याद करना केवल अतीत को स्मरण करना नहीं है। यह आने वाली पीढ़ियों को यह बताना भी है कि देश की सुरक्षा और सम्मान के लिए कुछ लोग अपना आज कुर्बान कर देते हैं, ताकि देश का कल सुरक्षित रहे। बिरकोनी की मिट्टी ने मनिहारी का सामान बेचने वाले जिस साधारण से बेटे को जन्म दिया था, उसी बेटे ने असाधारण साहस के साथ देश के लिए अपना जीवन अर्पित कर दिया। घनश्याम कन्नौजे आज भी इस अंचल के लिए केवल एक शहीद नहीं, बल्कि उस मिट्टी की अमर पहचान हैं, जिसने उन्हें जन्म दिया।

काली मंदिर में देर रात चोरी: दानपेटी से नकदी व सोने-चांदी के जेवर पार, सीसीटीवी में दिखे दो संदिग्ध

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 बिलासपुर/तखतपुर। तखतपुर नगर के कालीबाड़ी स्थित प्रसिद्ध काली मंदिर में बीती रात चोरों ने धावा बोलकर दानपेटी की नकदी समेत सोने-चांदी के आभूषणों पर हाथ साफ कर दिया। चोरी गए सामान और नकदी की प्रारंभिक कीमत एक लाख रुपये से अधिक आंकी जा रही है। पूरी वारदात मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई है, जिसके आधार पर पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।


पीछे के रास्ते से दाखिल हुए चोर

जानकारी के अनुसार घटना रात करीब 2 बजे की है। दो अज्ञात चोर मंदिर के पिछले हिस्से से परिसर के भीतर दाखिल हुए। चोरों ने सबसे पहले मंदिर के अंदर रखी दानपेटी का ताला तोड़कर उसमें जमा नकदी निकाली। इसके बाद वे मंदिर में रखे सोने और चांदी के आभूषण समेटकर फरार हो गए।

कैमरों से छेड़छाड़ की कोशिश, फुटेज में दिखे संदिध

शातिर चोरों ने वारदात को अंजाम देने से पहले सीसीटीवी कैमरों को घुमाने या बंद करने की कोशिश की, लेकिन उनकी यह करतूत कैमरे में रिकॉर्ड हो गई। फुटेज में दो संदिग्ध मंदिर परिसर के अंदर चोरी करते स्पष्ट नजर आ रहे हैं।

पुलिस ने तेज की जांच

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर मुआयना किया। पुलिस मंदिर और आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है ताकि आरोपियों के आने-जाने के मार्ग का पता लगाया जा सके।

10 साल से बिस्तर पर जिंदगी गुजार रहे शशिकांत ने मुख्यमंत्री से लगाई इलाज की गुहार, कहा—इलाज कराइए या इच्छा मृत्यु की अनुमति दीजिए

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धमतरी- धमतरी जिले के शशिकांत भरत ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से अपने इलाज के लिए मदद की गुहार लगाई है। करीब 10 वर्षों से बिस्तर पर जीवन गुजार रहे शशिकांत ने सरकार से दिल्ली के वसंत कुंज स्थित ESIC अस्पताल में बेहतर इलाज की व्यवस्था कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि उनकी एकमात्र इच्छा है कि उनका समुचित इलाज हो और वे अपने पैरों पर खड़े होकर सामान्य जीवन जी सकें।

शशिकांत के मुताबिक वे धमतरी के भटगांव ITI में कंप्यूटर प्रशिक्षण की पढ़ाई कर रहे थे। 11 नवंबर 2016 को जेठोनी त्योहार की छुट्टी के दौरान वे अपने गांव देवपुर लौट रहे थे। रास्ते में दुकली (गचकन्हार) गांव के पास उनके साथ एक हादसा हुआ, जिसके बाद उनका पूरा शरीर लकवाग्रस्त हो गया। चिकित्सकों के अनुसार उन्हें सर्वाइकल स्पाइन इंजरी की गंभीर समस्या हुई है। हादसे के बाद से वह लगातार बिस्तर पर हैं और रोजमर्रा के कामों के लिए भी अपने माता-पिता पर निर्भर हैं।

शशिकांत ने बताया कि वह अपने माता-पिता के इकलौते बेटे हैं। पिछले 10 वर्षों से बीमारी और शारीरिक पीड़ा के बीच जीवन बिताना उनके लिए बेहद कठिन हो गया है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि उन्हें उचित उपचार उपलब्ध कराया जाए, ताकि उनके जीवन में उम्मीद की नई किरण आ सके।

उन्होंने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री से अपनी समस्या रखने के लिए कई बार प्रयास किया। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री से मुलाकात के लिए वे करीब पांच बार प्रयास कर चुके हैं। एक बार सुशासन तिहार के दौरान धमतरी में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में भी पहुंचे थे, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री निवास जाकर भी कई बार मिलने का प्रयास किया, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था के कारण उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली।

शशिकांत के मुताबिक 11 जनवरी 2023 को सिहावा विधानसभा क्षेत्र में आयोजित भेंट-मुलाकात कार्यक्रम के दौरान उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के समक्ष भी अपनी समस्या रखी थी। इसके बाद 10 अगस्त 2026 को सिहावा विधानसभा क्षेत्र में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान उन्हें अपनी बात सीधे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सामने रखने का अवसर मिला। शशिकांत ने बताया कि मुख्यमंत्री ने उनकी समस्या सुनी, उनका आवेदन लिया और हरसंभव मदद का भरोसा दिया।

अब शशिकांत ने कलेक्टर अविनाश मिश्रा, विधायक अंबिका मरकाम और छत्तीसगढ़ के नागरिकों से भी अपील की है कि उनकी मांग को मुख्यमंत्री तक पहुंचाने और इलाज की व्यवस्था कराने में सहयोग करें।

शशिकांत ने अपने वीडियो को अपने चैनल पर साझा करने वाले पत्रकार का भी आभार जताया। उन्होंने कहा कि पत्रकार के माध्यम से उनकी आवाज सरकार तक पहुंच सकी। उन्होंने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से भावुक अपील करते हुए कहा कि उन्हें बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जाए और यदि इलाज संभव नहीं है तो इच्छा मृत्यु की अनुमति दिलाने में मदद की जाए।

https://youtu.be/ERH5go9ywuc

शशिकांत की अपील अब सरकार और प्रशासन से यही है कि उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए मामले में तत्काल मानवीय आधार पर हस्तक्षेप कर विशेषज्ञ चिकित्सा उपचार की व्यवस्था की जाए, ताकि पिछले एक दशक से बिस्तर पर जिंदगी गुजार रहे इस युवक को बेहतर जीवन की उम्मीद मिल सके।

नोट: यह वीडियो शशिकांत भरत द्वारा साझा की गई जानकारी और उनकी अपील पर आधारित है।

इंदौर संभाग में जनजातीय कल्याण योजनाओं की जमीनी हकीकत परखी, MoTA सचिव ने अधिकारियों को दिए समयबद्ध क्रियान्वयन के निर्देश

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इंदौर- जनजातीय कार्य मंत्रालय (MoTA) की सचिव रंजना चोपड़ा ने अतिरिक्त सचिव मनीष ठाकुर के साथ मध्य प्रदेश के इंदौर संभाग का व्यापक क्षेत्रीय दौरा कर जनजातीय कल्याण योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने जनजातीय लाभार्थियों, विद्यार्थियों, महिला बुनकरों और स्थानीय उद्यमियों से सीधे संवाद कर योजनाओं के प्रभाव और चुनौतियों की जानकारी ली।

दौरे की शुरुआत एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS), मोरोद (PVTG), इंदौर से हुई। सचिव ने कक्षा 6वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों और शिक्षकों से बातचीत की तथा विद्यालय में संचालित डिजिटल स्मार्ट कक्षाओं का अवलोकन किया। विद्यार्थियों ने इंजीनियर, उद्यमी और विभिन्न क्षेत्रों में पेशेवर बनने की अपनी आकांक्षाएं साझा कीं। सचिव ने जनजातीय बच्चों, विशेषकर विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा उपलब्ध कराने के प्रयासों की सराहना की।

इसके बाद टीम ने महेश्वर, खरगोन स्थित बुनकर सुविधा केंद्र का दौरा किया। यहां राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) से जुड़े सहायता समूह के माध्यम से जनजातीय महिलाएं प्रसिद्ध महेश्वरी साड़ियों का निर्माण कर रही हैं। केंद्र पर प्रतिदिन करीब 1,000 से 2,000 साड़ियों का उत्पादन किया जाता है। TRIFED, स्वयं सहायता समूहों और जिला पंचायतों के सहयोग से इन उत्पादों को बाजार तक पहुंचाया जा रहा है। सचिव ने महिला बुनकरों से बातचीत कर उनके कार्य, आय और बाजार से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी ली।

सचिव ने आदि सेवा केंद्र, केरियाखेड़ी का भी निरीक्षण किया। यह केंद्र जनजातीय समुदाय के लिए एकल-खिड़की सुविधा केंद्र के रूप में कार्य कर रहा है, जहां राशन कार्ड से लेकर विभिन्न सरकारी योजनाओं में पंजीयन और अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए सहायता उपलब्ध कराई जाती है। केंद्र पर आयोजित जन सुनवाई और शिकायत निवारण की व्यवस्था की भी जानकारी ली गई।

दौरे के दौरान खरगोन जिले में एक जनजातीय होमस्टे का भी निरीक्षण किया गया। इसे स्थानीय जनजातीय परिवार द्वारा संचालित किया जा रहा है। सचिव ने ग्रामीण पर्यटन के माध्यम से जनजातीय परिवारों के लिए पैदा हो रहे रोजगार और आय के अवसरों को समझा। होमस्टे संचालकों को प्रशिक्षण, हैंडहोल्डिंग और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए निरंतर सहयोग दिए जाने की जानकारी भी साझा की गई।

इसके बाद सचिव ने इंदौर स्थित सिकल सेल रोग के Center of Competence का दौरा किया और जनजातीय आबादी में सिकल सेल रोग के उन्मूलन के लिए चल रही स्क्रीनिंग, काउंसलिंग और उपचार सुविधाओं की समीक्षा की।

दौरे के अंत में इंदौर संभागायुक्त कार्यालय में योजनाओं की प्रगति समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता रंजना चोपड़ा ने की। इसमें संबंधित विभागों के अधिकारी, राज्य जनजातीय कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा संभाग के अन्य जिलों के कलेक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।

समीक्षा के दौरान सचिव ने कलेक्टरों को MoTA की सभी योजनाओं का जमीनी स्तर पर शीघ्र संतृप्तिकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों के बीच समयबद्ध समन्वय के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाए कि सरकार की योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र जनजातीय परिवार और बस्ती तक पहुंचे।

पूरे दौरे ने जनजातीय कल्याण योजनाओं की अंतिम छोर तक पहुंच, संस्थागत ढांचे को मजबूत करने तथा शिक्षा, कौशल, उद्यमिता और ग्रामीण पर्यटन के माध्यम से जनजातीय समुदायों के लिए टिकाऊ आजीविका के अवसर बढ़ाने के प्रति मंत्रालय की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

“स्थानीय से वैश्विक: डिजिटल कॉमर्स के माध्यम से निर्यात-तैयार MSMEs को सशक्त बनाना”

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भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) के अधीन MSME विकास एवं सुविधा कार्यालय, चेन्नई ने IIT मद्रास के उद्यमिता प्रकोष्ठ के सहयोग से 18 अगस्त को IIT मद्रास, चेन्नई में “स्थानीय से वैश्विक: डिजिटल कॉमर्स के माध्यम से निर्यात-तैयार MSMEs को सक्षम बनाना” विषय पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया।

संगोष्ठी में MSMEs, उद्यमियों, विद्यार्थियों, नीति-निर्माताओं, वित्तीय संस्थानों, निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़े हितधारकों तथा डिजिटल कॉमर्स विशेषज्ञों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य MSMEs को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँच बनाने के लिए व्यावहारिक मार्गों पर चर्चा करना था।

उद्घाटन सत्र में तमिलनाडु सरकार के MSME विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रवीण यादव ने विशेष संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि डिजिटल कॉमर्स भौगोलिक सीमाओं को पार करते हुए MSMEs की वैश्विक बाजारों तक पहुँच को बदल रहा है। उन्होंने MSMEs की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को तेज करने के लिए केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय तथा सक्षम वातावरण बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

IIT मद्रास के IC&SR के डीन प्रो. मनु संथानम ने अपने विशेष संबोधन में नवाचार तथा अकादमिक संस्थानों और उद्योग के बीच सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ऐसे सहयोग से MSMEs नए उत्पादों और प्रौद्योगिकियों का विकास कर अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ा सकते हैं।

हंसराज वर्मा, महानिदेशक, Council of State Industrial Development & Investment Corporation of India, ने भी विशेष संबोधन दिया। उन्होंने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत करने के लिए गुणवत्ता को बुनियादी तत्व बताया और MSMEs की बाजार पहुँच बढ़ाने में डिजिटलीकरण के महत्व को रेखांकित किया।

धयालन, निदेशक एवं प्रमुख, MSME DFO चेन्नई ने मुख्य वक्तव्य दिया और विशिष्ट अतिथियों को सम्मानित किया। रेशमा राजीवन, उप निदेशक, MSME DFO चेन्नई ने स्वागत भाषण दिया और संगोष्ठी की पृष्ठभूमि प्रस्तुत की। उन्होंने MSMEs को घरेलू बाजारों से आगे बढ़ाकर वैश्विक अवसरों से जोड़ने के लिए आवश्यक सहयोग पर जोर दिया।

संगोष्ठी में अंतरराष्ट्रीय व्यापार के बदलते स्वरूप तथा MSMEs को भौगोलिक सीमाओं से परे ग्राहकों तक पहुँचाने में डिजिटल कॉमर्स, प्रौद्योगिकी, नवाचार और बाजार संपर्क की बढ़ती भूमिका पर विशेष ध्यान दिया गया।

तकनीकी सत्रों में DGFT, EXIM Bank, ECGC, IIT मद्रास तथा निर्यात और ई-कॉमर्स परामर्श क्षेत्र के विशेषज्ञों और अधिकारियों ने भाग लिया। उन्होंने MSMEs को निर्यात प्रक्रियाओं, व्यापार वित्त, निर्यात जोखिम प्रबंधन, बाजार की पहचान, अंतरराष्ट्रीय भुगतान, अनुपालन, डिजिटल ऑनबोर्डिंग तथा वैश्विक बाजार तक पहुँच के लिए ई-कॉमर्स का लाभ उठाने के अवसरों के बारे में व्यावहारिक जानकारी दी।

चर्चाएँ सरकार द्वारा MSMEs की बाजार पहुँच मजबूत करने के निरंतर प्रयासों के संदर्भ में विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहीं। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय की Procurement & Marketing Support (PMS) Scheme में क्षमता निर्माण के अंतर्गत राष्ट्रीय कार्यशालाओं/संगोष्ठियों को एक समर्पित घटक के रूप में शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य MSMEs को बाजार पहुँच, पैकेजिंग, आयात-निर्यात प्रक्रियाओं, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म तथा बाजार विस्तार से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण विकासों के बारे में जागरूक करना और शिक्षित करना है।

चेन्नई में आयोजित यह राष्ट्रीय संगोष्ठी इसी घटक के तहत आयोजित की गई, जिसके माध्यम से MSMEs को डिजिटल कॉमर्स और निर्यात के लिए तैयार होने से संबंधित विशेषज्ञों तथा व्यावहारिक जानकारी तक सीधे पहुँच प्रदान की गई।

संगोष्ठी ने विद्यार्थियों और उभरते उद्यमियों को डिजिटल कॉमर्स, उद्यमिता और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उभरते अवसरों को समझने के लिए भी एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया।

कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें विशिष्ट अतिथियों, वक्ताओं, विशेषज्ञों, पैनलिस्टों, भाग लेने वाले MSMEs, विद्यार्थियों, सहयोगी संस्थानों तथा आयोजन टीम के योगदान के लिए आभार व्यक्त किया गया।

यह पहल MSMEs की बाजार पहुँच, डिजिटल अपनाने, निर्यात तैयारी और हैंडहोल्डिंग सहायता को मजबूत करने के लिए MSME मंत्रालय की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है और भारतीय उद्यमों को “स्थानीय से वैश्विक” बनाने के दृष्टिकोण में योगदान देती है।

CG NEWS : सरपंच के खिलाफ पंचों का मोर्चा, अविश्वास प्रस्ताव की सूचना, भ्रष्टाचार के लगाए आरोप

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 मुंगेली/लोरमी। जिले के लोरमी क्षेत्र की ग्राम पंचायत डिंडौरी में सरपंच के खिलाफ पंचों की नाराजगी खुलकर सामने आई है। ग्राम पंचायत की सरपंच ललिता मार्को के खिलाफ पंचों ने एकजुट होकर अविश्वास प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) लोरमी को लिखित सूचना दी है। पंचों ने सरपंच और उनके पति पर पंचायत के कामकाज में कथित अनियमितता, वित्तीय गड़बड़ी और दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।


सरपंच पति के हस्तक्षेप का आरोप

पंचों द्वारा एसडीएम को सौंपे गए ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि निर्वाचित सरपंच होने के बावजूद उनके पति पंचायत के कामकाज में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। पंचों का दावा है कि पंचायत से संबंधित कुछ दस्तावेजों में सरपंच के बजाय उनके पति के हस्ताक्षर किए जाते हैं। इसे लेकर पंचों ने पंचायत संचालन की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।

विकास कार्यों में अनियमितता का आरोप

पंचों ने आरोप लगाया है कि पंचायत क्षेत्र में विभिन्न विकास कार्यों के नाम पर राशि का आहरण किया गया, लेकिन कई कार्य अधूरे हैं या मौके पर अपेक्षित काम दिखाई नहीं देता। पंचों के मुताबिक, पंचायत के आय-व्यय और विकास कार्यों से संबंधित जानकारी मांगने पर उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।

ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि पंचायत के कामकाज पर सवाल उठाने या जानकारी मांगने पर पंचों के साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया जाता है। विरोध करने पर धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया गया है। पंचों का कहना है कि इन कारणों से लंबे समय से असंतोष बना हुआ था, जो अब अविश्वास प्रस्ताव की मांग के रूप में सामने आया है।

निष्पक्ष जांच की मांग

पंचों ने एसडीएम से मामले की निष्पक्ष जांच कराने के साथ पंचायत के वित्तीय लेन-देन और विकास कार्यों की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पंचायत के रिकॉर्ड और मौके पर किए गए कार्यों की जांच से कथित अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

प्रशासन की कार्रवाई पर नजर

अविश्वास प्रस्ताव की लिखित सूचना एसडीएम कार्यालय में सौंपे जाने के बाद अब आगे की प्रक्रिया प्रशासनिक स्तर पर तय होगी। संबंधित नियमों के तहत आवश्यक कार्रवाई और बैठक की तारीख निर्धारित होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि सरपंच के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव किस दिशा में आगे बढ़ता है।

फिलहाल ग्राम पंचायत डिंडौरी का मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। पंचों की ओर से लगाए गए आरोपों की वास्तविकता प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। अब सभी की नजरें एसडीएम लोरमी की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।

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