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छत्तीसगढ़ में सनसनीखेज हत्याकांड : बेटे ने बेटे संग मिलकर की परिवार के 4 लोगों की हत्या

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के भवंतरा गांव में एक ही परिवार के चार लोगों की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस जघन्य वारदात को मृतक के पुत्र सोना साय कश्यप ने अपने बेटे गोलू के साथ मिलकर अंजाम दिया। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।


मृतकों की पहचान मेदनी प्रसाद कश्यप, पीताम्बर कश्यप, शांति बाई और कुमारी मोगरा के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि पूरा मामला पैतृक संपत्ति विवाद से जुड़ा हुआ है। परिवार में लंबे समय से जमीन और संपत्ति के बंटवारे को लेकर तनाव बना हुआ था, जो धीरे-धीरे गंभीर विवाद में बदल गया।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि मुख्य आरोपी सोना साय कश्यप का आपराधिक रिकॉर्ड पहले से रहा है। जानकारी के अनुसार, उसने पूर्व में अपने बड़े भाई की हत्या की थी, जिसके चलते वह करीब 15 वर्षों तक जेल में रहा। हाल ही में सजा पूरी कर गांव लौटने के बाद भी परिवारिक विवाद खत्म नहीं हुआ और संपत्ति को लेकर लगातार तनाव बना रहा।

बताया जा रहा है कि इसी विवाद के चलते आरोपी ने अपने बेटे के साथ मिलकर इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया। शिवरीनारायण पुलिस ने पहले भी आरोपी के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की थी, लेकिन विवाद शांत नहीं हो सका।

सुबह मिस्त्री ने देखे शव, फिर खुला मामला

गौरतलब है कि गुरुवार सुबह पुलिस को सूचना मिली कि भवंतरा गांव में बुधवार देर रात एक ही परिवार के चार लोगों की धारदार हथियार से हत्या कर दी गई है। मृतकों में पति-पत्नी और उनके नाती-नातिन शामिल हैं। सभी के शव निर्माणाधीन मकान में खाट पर पड़े मिले।
पुलिस के अनुसार, घटना का खुलासा उस समय हुआ जब सुबह काम पर पहुंचे एक मिस्त्री ने शव देखे और तत्काल पुलिस को सूचना दी। इसके बाद मौके पर फोरेंसिक और डॉग स्क्वायड की टीम पहुंची और जांच शुरू की गई।
पूछताछ के दौरान पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ की, जिसके बाद पूरे हत्याकांड का खुलासा हुआ। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच कर रही है और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।
घटना के बाद पूरे गांव में दहशत और तनाव का माहौल बना हुआ है।

रील बनाने के दौरान नदी में डूबा युवक, 48 घंटे बाद मिला शव

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 कोरबा:  जिले के Kusmunda थाना क्षेत्र स्थित अहिरन नदी में रील बनाने के दौरान एक युवक की डूबने से मौत हो गई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।


मृतक की पहचान 25 वर्षीय निखिल सिंह के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, निखिल अपने तीन दोस्तों के साथ नदी में नहाने गया था। इसी दौरान उसने नदी में छलांग लगाई, जबकि उसके दोस्त मोबाइल से वीडियो रिकॉर्ड कर रहे थे।

बताया जा रहा है कि छलांग लगाने के बाद निखिल कुछ देर तक पानी में हाथ-पैर मारता रहा। दोस्तों को पहले लगा कि वह सामान्य रूप से तैर रहा है, लेकिन देखते ही देखते वह गहरे पानी में चला गया और डूबने लगा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इस दौरान कोई भी दोस्त उसे बचाने के लिए पानी में नहीं उतरा।

घटना मंगलवार दोपहर की बताई जा रही है। हादसे के बाद दोस्तों ने पुलिस और परिजनों को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस और गोताखोरों की टीम ने युवक की तलाश में लगातार दो दिनों तक सर्च ऑपरेशन चलाया।
करीब 48 घंटे की तलाश के बाद बुधवार देर शाम युवक का शव नदी में पानी के ऊपर दिखाई दिया, जिसके बाद उसे बाहर निकाला गया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच जारी है।

छत्तीसगढ़ में बढ़ेगी गर्मी, 16 मई से हीट वेव का अलर्ट

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में आने वाले दिनों में गर्मी और तेज होने वाली है। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अगले चार दिनों में प्रदेश के अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की क्रमिक बढ़ोतरी हो सकती है।


मौसम विभाग के अनुसार, तापमान बढ़ने के प्रभाव से 16 मई से मध्य छत्तीसगढ़ के एक-दो इलाकों में ग्रीष्म लहर (हीट वेव) चलने की प्रबल संभावना है। खासकर दोपहर के समय तेज गर्म हवाएं लोगों की परेशानी बढ़ा सकती हैं।

हालांकि बढ़ती गर्मी के बीच प्रदेश में मौसम पूरी तरह शुष्क नहीं रहेगा। स्थानीय मौसम प्रणालियों के असर से अगले पांच दिनों तक प्रदेश के कुछ स्थानों पर मेघगर्जन, तेज हवाओं और हल्की बारिश की गतिविधियां जारी रहने की संभावना जताई गई है।

मौसम विभाग ने लोगों को दोपहर के समय जरूरी काम होने पर ही घर से निकलने, पर्याप्त मात्रा में पानी पीने और गर्मी से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी है।

आंधी-तूफान का कहर: 74 लोगों की मौत, 38 जिलों में येलो अलर्ट जारी

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 उत्तर प्रदेश में बुधवार को आए भीषण आंधी-तूफान, बारिश और ओलावृष्टि ने भारी तबाही मचाई। प्रदेश के कई जिलों में पेड़ गिरने, दीवार ढहने, बिजली गिरने और टीन शेड उड़ने जैसी घटनाओं में अब तक 74 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग घायल बताए जा रहे हैं। प्रशासन ने मृतकों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका जताई है। इस बीच मौसम विभाग ने प्रदेश के 38 जिलों में येलो अलर्ट जारी किया है।


100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाएं

मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ऊपर बने चक्रवाती सिस्टम और दक्षिण राजस्थान से आ रही पूरवा हवाओं के प्रभाव से प्रदेश के कई इलाकों में 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलीं। बुधवार दोपहर बाद शुरू हुआ मौसम का बदलाव शाम तक भीषण तूफान में बदल गया।

उन्नाव और प्रयागराज में दोपहर करीब ढाई बजे तेज बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई। कई जिलों में तेज हवाओं से पेड़ उखड़ गए, टीन शेड उड़ गए और साइन बोर्ड गिर पड़े। उन्नाव में सड़क किनारे खड़ी कार पर विशाल पेड़ गिर गया। वहीं प्रयागराज, जौनपुर, प्रतापगढ़ और बांदा में आंधी की रफ्तार 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक दर्ज की गई। बरेली और बदायूं में कई यूनिपोल और साइन बोर्ड गिरने की घटनाएं सामने आईं।

सबसे ज्यादा प्रभावित जिले

आंधी-तूफान और बारिश से प्रदेश के कई जिलों में जनहानि हुई है। भदोही में 10, प्रयागराज में 17, फतेहपुर में 8, उन्नाव में 7, बदायूं में 6, बरेली में 4, सीतापुर में 2 और रायबरेली में 1 व्यक्ति की मौत दर्ज की गई। इसके अलावा हरदोई, झांसी, कानपुर देहात, संभल, प्रतापगढ़ समेत अन्य जिलों में भी लोगों की जान गई है।

प्रयागराज में 17 लोगों की मौत

प्रयागराज जिले में सबसे ज्यादा 17 लोगों की मौत हुई। सदर तहसील में 1, हंडिया में 7, फूलपुर में 4, सोरांव में 3 और मेजा में 2 लोगों की जान गई। मृतकों में पांच महिलाएं, चार बच्चे और आठ पुरुष शामिल हैं। इसके अलावा पांच लोग घायल हुए हैं। प्रशासन के अनुसार, जिले में 20 पशुओं की भी मौत हुई है और 16 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं।

उन्नाव में मासूम समेत 7 की मौत

उन्नाव जिले में तेज आंधी और बारिश के दौरान अलग-अलग हादसों में सात लोगों की मौत हो गई। दही थाना क्षेत्र में आम का पेड़ गिरने से 70 वर्षीय किसान राम आश्रय की मौत हो गई। वहीं आसीवन थाना क्षेत्र में यूकेलिप्टस का पेड़ गिरने से 9 वर्षीय अंश की जान चली गई। दो अन्य गंभीर घायलों को इलाज के लिए लखनऊ ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया है।

बिजली व्यवस्था और यातायात प्रभावित

तूफान के चलते सैकड़ों पेड़ और बिजली के खंभे गिर गए, जिससे कई जिलों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। सड़क मार्गों पर भी यातायात प्रभावित रहा। कई जगहों पर मकानों और वाहनों को नुकसान पहुंचा है।

38 जिलों में येलो अलर्ट

मौसम विभाग ने लखनऊ, उन्नाव, सीतापुर, प्रयागराज, जौनपुर, प्रतापगढ़, बांदा समेत 38 जिलों में अगले कुछ घंटों के दौरान तेज बारिश, बिजली गिरने और 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से हवाएं चलने की चेतावनी जारी की है। प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान घरों में रहने और पेड़ों व बिजली के खंभों से दूर रहने की अपील की है।

10 साल से खांसी में खून की समस्या से जूझ रहे युवक को अम्बेडकर अस्पताल में मिली नई जिंदगी

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 रायपुर : डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग ने एक अत्यंत जटिल एवं जीवनरक्षक सर्जरी कर 25 वर्षीय युवक की जान बचाने में सफलता प्राप्त की है। मरीज लंबे समय से खांसी के साथ खून आने की गंभीर समस्या से पीड़ित था। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी थी कि प्रत्येक बार खांसने पर लगभग 50 से 70 एमएल तक खून निकल रहा था। डॉक्टरों के अनुसार यदि समय रहते ऑपरेशन नहीं किया जाता तो अत्यधिक रक्तस्राव के कारण मरीज की जान भी जा सकती थी।


अस्पताल के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू ने बताया कि अम्बेडकर अस्पताल के हार्ट, चेस्ट एंड वैस्कुलर सर्जरी विभाग में छाती एवं फेफड़ों के अधिकांश ऑपरेशन उन्नत तकनीक से की जा रही है। अभनपुर के पास चटौद निवासी 25 वर्षीय युवक को पिछले लगभग 10 वर्षों से खांसी के साथ बलगम में खून आने की शिकायत थी। प्रारंभ में यह समस्या कम थी, लेकिन पिछले एक माह से लगातार बढ़ रही थी। पिछले कुछ दिनों में स्थिति और गंभीर हो गई तथा हर बार खांसने पर अत्यधिक मात्रा में खून आने लगा।


मरीज ने पूर्व में टीबी की दवाइयों का सेवन भी किया था तथा उपचार के लिए कई बड़े अस्पतालों में परामर्श लिया, लेकिन उसे राहत नहीं मिली। जांच के दौरान मरीज का सीटी स्कैन कराया गया, जिसमें दाएं फेफड़े के निचले हिस्से (लोअर लोब) में बड़ी कैविटी बनने एवं उसमें एस्परजिलोमा नामक फंगल संक्रमण होने की पुष्टि हुई। यह बीमारी सामान्यतः टीबी से पीड़ित मरीजों में देखने को मिलती है।

सीटी स्कैन रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद डॉ. साहू ने बताया कि मरीज की जान बचाने के लिए तत्काल ऑपरेशन आवश्यक था। इस सर्जिकल प्रक्रिया को मेडिकल भाषा में लोबेक्टॉमी (लोअर लोब ऑफ राइट लंग) कहा जाता है, जिसमें फेफड़े के संक्रमित हिस्से को काटकर निकाला जाता है। यह ऑपरेशन अत्यंत जटिल एवं हाई-रिस्क सर्जरी की श्रेणी में आता है, क्योंकि ऑपरेशन के दौरान फेफड़ों की प्रमुख रक्त वाहिनियों- पल्मोनरी आर्टरी एवं पल्मोनरी वेन, को क्षति पहुंचने का खतरा बना रहता है।

परिजनों की सहमति मिलने के बाद मरीज का अगले ही दिन आपातकालीन ऑपरेशन किया गया। सर्जरी के दौरान अत्याधुनिक लंग स्टेपलर गन तकनीक का उपयोग किया गया, जिससे ऑपरेशन के बाद एयर लीक जैसी जटिलताओं की संभावना कम हो सके। सफल सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ और कुछ दिनों बाद उसे पूर्णतः स्वस्थ होने पर अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। यह संपूर्ण उपचार आयुष्मान योजना के अंतर्गत निशुल्क किया गया।

डॉ. साहू ने बताया कि खांसी के साथ खून आने की स्थिति को मेडिकल भाषा में हीमोप्टाइसिस कहा जाता है। इसके प्रमुख कारणों में फेफड़ों की टीबी, फेफड़ों का कैंसर, पल्मोनरी एवी मालफॉर्मेशन, ब्रोंकाइटिस तथा अन्य गंभीर फेफड़ा संबंधी रोग शामिल हैं।

पंडित नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी का कहना है कि चिकित्सकों की टीम ने समन्वित प्रयास करते हुए समय पर सफल सर्जरी कर मरीज को नया जीवन दिया। भविष्य में भी हमारा संस्थान इसी प्रकार मरीजों को बेहतर, सुलभ एवं उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

अम्बेडकर अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर कहते हैं कि अस्पताल प्रबंधन का निरंतर यह प्रयास रहा है कि आयुष्मान योजना के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों को उच्चस्तरीय एवं निशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जाए और इस दिशा में हमें सफलता भी मिल रही है। वर्तमान में इस योजना से कई मरीज लाभांवित भी हो रहे हैं।

मिशन मोड में संचालित होंगी शासन की प्रमुख योजनाएं, मुख्य सचिव ने की समीक्षा बैठक

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मंशा अनुसार छत्तीसगढ़ शासन विशिष्ट क्षेत्रों में तीव्र और लक्षित विकास के लिए महत्वपूर्ण योजनाओं के कार्यों को मिशन मोड में संचालित करेगा। इस संबंध मे आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में अधिकारियों की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार ने लक्षित विकास के लिए नए मिशन शुरू किए है। जिन्हें पूरी तरह मिशन मोड में संचालित किया जाएगा। अधिकारियों ने बैठक में अपनी विभागीय योनजाओं के संबंध में प्रस्तुतिकरण के जरिए विस्तार से जानकारी रखी।



बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री एआई मिशन के संबंध में बताया कि उभरती हुए तकनीकों और प्रौद्योगिकियों में छत्तीसगढ़ को देश का अग्रणी राज्य बनाना है। इसके लिए यहां के युवाओं को एआई आधारित स्टार्टअप के लिए बढ़ावा दिया जाएगा। शासन व्यवस्था के कार्यों में भी एआई का उपयोग किया जाएगा। इसके लिए शासन के अधिकारी-कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। इसी तरह से छात्र-छात्राओं, युवाओं को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के तहत ग्रामीण और जमीनी स्तर पर छिपी हुई खेल प्रतिभा की पहचान कर उन्हें निखारा जाएगा। खिलाड़ियों को सुविधाएं दी जाएगी। राज्य के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करना तथा महिला खिलाड़ियों की भागीदारी को बढ़ाया जाएगा।

मुख्यमंत्री पर्यटन मिशन के अंतर्गत प्रमुख पर्यटन स्थलों को वैश्विक मानचित्र पर लाने के लिए थीम-आधारित पर्यटन सर्किट विकसित किए जाएंगे। सांस्कृतिक मेलों, उत्सवों और प्रदर्शनियों का आयोजन तथा स्थानीय स्तर पर ’होमस्टे’ योजना को बढ़ावा दिया जाएगा। पर्यटन के तहत स्थानीय युवाओं को टूर-गाइडों के कौशल विकास के जरिए रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराये जाएंगे।

मुख्यमंत्री अधोसंरचना मिशन के जरिए राज्य के बुनियादें ढांचें, सड़कों, पुलों और शहरी-ग्रामीण कनेक्टिविटी को मिशन मोड में मजबूत करना है। प्रदेश में आर्थिक विकास को गति देने के लिए अधोसंरचना का तेजी से निर्माण किया जाना है। मुख्यमंत्री स्टार्टअप मिशन के तहत प्रदेश के युवाओं में उद्यमिता को बढ़ावा देना और नए व्यापारिक विचारों को जमीन पर उतारना। नए स्टार्टअप्स के लिए वित्तीय सहायता और सरल प्रक्रियाएं सुनिश्चित किए जाएंगे।

बैठक में उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के सचिव रजत कुमार, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव अंकित आनंद, वित्त विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, विशेष सचिव वित्त चंदन कुमार, विशेष सचिव उच्च शिक्षा जय प्रकाश मौर्य सहित सूचना प्रौद्योगिकी एवं चिप्स के अधिकारी शामिल हुए।

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना : शासन बना बेटियों का संबल और सामूहिक विवाह बना सामाजिक बदलाव का उत्सव

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 डॉ. दानेश्वरी संभाकर - उप संचालक (जनसंपर्क)


रायपुर : त्तीसगढ़ में इन दिनों जब भी सामूहिक विवाह समारोहों में शहनाइयां गूंजती हैं, तो वह केवल दो लोगों के वैवाहिक बंधन में बंधने का अवसर नहीं होता, बल्कि समाज में समानता, सम्मान और संवेदनशील शासन व्यवस्था का जीवंत उत्सव बन जाता है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के नेतृत्व में यह योजना प्रदेश में सामाजिक बदलाव की नई इबारत लिख रही है। हजारों परिवारों के चेहरों पर मुस्कान लाने वाली यह पहल वास्तव में “बेटियों के साथ सुशासन का आशीर्वाद” बनकर उभरी है।


मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना ने हजारों गरीब परिवारों की चिंताओं को कम करते हुए बेटियों के सपनों को नई पहचान दी है। यह योजना आज प्रदेश में सामाजिक समरसता, महिला सम्मान और जनकल्याण का ऐसा मॉडल बन चुकी है, जिसने यह साबित किया है कि शासन की योजनाएं यदि संवेदनशील सोच के साथ लागू हों, तो वे सीधे लोगों के जीवन में खुशियां ला सकती हैं।

एक योजना, जिसने बदली हजारों परिवारों की स्थिति

गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए बेटियों का विवाह अक्सर आर्थिक चिंता का बड़ा कारण बन जाता है। कई बार परिवार कर्ज लेने को मजबूर होते हैं, तो कई बार सामाजिक दबाव और फिजूलखर्ची उन्हें मानसिक रूप से कमजोर कर देती है। इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना की शुरुआत की गई।

योजना का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि विवाह को गरिमामय, सादगीपूर्ण और सामाजिक सहयोग का माध्यम बनाना है। यह योजना सामूहिक विवाहों को बढ़ावा देकर दहेज जैसी कुरीतियों पर भी प्रभावी रोक लगाने का काम कर रही है।
राज्य शासन ने योजना को और अधिक मानवीय स्वरूप देते हुए विधवा, अनाथ और निराश्रित कन्याओं को भी इसमें शामिल किया है, इससे यह योजना सामाजिक सुरक्षा और संवेदनशीलता की मिसाल बन गई है।

50 हजार रुपये की सहायता, सम्मान के साथ नई शुरुआत

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले परिवारों तथा मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना के कार्डधारी परिवारों की 18 वर्ष से अधिक आयु की अधिकतम दो कन्याओं को लाभ प्रदान किया जाता है।
प्रत्येक कन्या विवाह हेतु शासन द्वारा अधिकतम 50 हजार रुपये तक सहायता दी जाती है। इसमें वर-वधु के लिए श्रृंगार सामग्री, उपहार सामग्री और अन्य आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराई जाती हैं। साथ ही 35 हजार रुपये की राशि बैंक ड्राफ्ट के रूप में दी जाती है, जिससे नवदंपति आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता के साथ अपने नए जीवन और खुशहाल की शुरुआत कर सकें। विवाह आयोजन की व्यवस्थाओं पर भी प्रति कन्या 8 हजार रुपये तक खर्च किया जाता है।

24 हजार से अधिक बेटियों के जीवन में आई नई खुशियां

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के माध्यम से अब तक प्रदेश में 24 हजार से अधिक बेटियों का विवाह संपन्न कराया जा चुका है। यह केवल एक सरकारी आंकड़ा नहीं, बल्कि उन हजारों परिवारों की खुशी और राहत की कहानी है, जिनके लिए बेटियों का विवाह कभी बड़ी चिंता हुआ करता था।

प्रदेश सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 3200 विवाहों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें से 347 विवाह पहले ही संपन्न हो चुके थे, जबकि 8 मई 2026 को आयोजित राज्यव्यापी सामूहिक विवाह समारोहों में 1385 जोड़े परिणय सूत्र में बंधे। इस प्रकार अब तक कुल 1732 जोड़े वैवाहिक जीवन की नई शुरुआत कर चुके हैं।

8 मई 2026 को प्रदेशभर में आयोजित सामूहिक विवाह समारोहों ने छत्तीसगढ़ को उत्सवमय बना दिया। रायपुर से लेकर दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों तक हजारों लोगों ने इन आयोजनों में भाग लिया। हर जिले में पारंपरिक रीति-रिवाजों और सादगी के साथ विवाह सम्पन्न हुए।
इन समारोहों की सबसे बड़ी खूबी इसकी समावेशी भावना रही। हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध और विशेष पिछड़ी जनजातियों के जोड़े अपने-अपने धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह बंधन में बंधे। यह दृश्य छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक एकता का जीवंत उदाहरण बन गया।

महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े की संवेदनशील पहल

महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने इस योजना को प्रभावी और जनहितकारी स्वरूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके मार्गदर्शन में विभाग द्वारा प्रदेशभर में सुव्यवस्थित सामूहिक विवाह समारोह आयोजित किए जा रहे हैं।
श्रीमती राजवाड़े लगातार यह सुनिश्चित कर रही हैं कि हर आयोजन में नवदंपति और उनके परिजनों को गरिमापूर्ण वातावरण मिले। विवाह स्थलों की सजावट, गुणवत्तापूर्ण भोजन, स्वच्छ पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था विभाग द्वारा सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा है कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना केवल सहायता योजना नहीं, बल्कि बेटियों के सम्मान और सामाजिक समानता का अभियान है।

6412 जोड़ों का विवाह और विश्व रिकॉर्ड

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना ने राष्ट्रीय स्तर पर भी छत्तीसगढ़ को नई पहचान दिलाई है। 10 फरवरी 2026 को आयोजित वृहद सामूहिक विवाह समारोह में 6412 जोड़े विवाह बंधन में बंधे। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति में आयोजित यह कार्यक्रम ऐतिहासिक बन गया और इसके लिए छत्तीसगढ़ का नाम गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया।
यह उपलब्धि दर्शाती है कि सामूहिक विवाह केवल सामाजिक सहयोग का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और जनभागीदारी की मजबूत मिसाल भी बन सकता हैं।

सुशासन का संवेदनशील चेहरा

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना आज छत्तीसगढ़ में सुशासन के संवेदनशील और मानवीय स्वरूप का प्रतीक बन चुकी है। यह योजना केवल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं है, बल्कि बेटियों को सम्मान, परिवारों को आत्मविश्वास और समाज को सकारात्मक दिशा देने का काम कर रही है।

CG NEWS : सीवरेज पाइपलाइन कार्य के दौरान बड़ा हादसा, मिट्टी धंसने से तीन मजदूरों की मौत

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 बालोद जिले में सीवरेज पाइपलाइन विस्तार कार्य के दौरान बड़ा हादसा हो गया। दल्लीराजहरा थाना क्षेत्र स्थित फुटबॉल ग्राउंड के पास दास पान ठेला के सामने निर्माण कार्य के दौरान अचानक मिट्टी धंस गई, जिससे तीन मजदूर नाली में दब गए। हादसे में तीनों मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों में एक महिला मजदूर भी शामिल है।


जानकारी के अनुसार, Bhilai Steel Plant की सीवरेज पाइपलाइन विस्तार परियोजना के तहत इलाके में खुदाई का काम चल रहा था। इसी दौरान जेसीबी और चेन माउंट मशीन की मदद से खुदाई की जा रही थी, तभी अचानक मिट्टी भरभराकर धंस गई और वहां कार्य कर रहे मजदूर मलबे में दब गए।

घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। सूचना मिलते ही पुलिस और बीएसपी के वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे तथा राहत और बचाव कार्य शुरू कराया गया।
प्राथमिक तौर पर हादसे के पीछे निर्माण कार्य में लापरवाही की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। इधर, Bhojraj Nag भी घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।

बीजापुर में सुरक्षाबलों की बड़ी कार्रवाई, 65 लाख नकद समेत भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक बरामद

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 Bijapur जिले में चलाए जा रहे विशेष नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली है। बीजापुर पुलिस, डीआरजी, एसटीएफ, कोबरा और Central Reserve Police Force की संयुक्त कार्रवाई में माओवादियों के पुराने ठिकानों और डंप से भारी मात्रा में नकदी, हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री बरामद की गई है।


पुलिस अधीक्षक डॉ. Jitendra Kumar Yadav ने बताया कि हालिया कार्रवाई में सुरक्षाबलों ने 65 लाख 52 हजार रुपये नकद बरामद किए हैं। इसके साथ ही एलएमजी, एसएलआर, कार्बाइन, .303 और .315 रायफल समेत कुल 32 हथियार और बड़ी मात्रा में जिंदा कारतूस जब्त किए गए हैं।

एक महीने से चल रहा था सघन अभियान

पुलिस के अनुसार बीजापुर के अतिसंवेदनशील और दुर्गम इलाकों में पिछले एक महीने से लगातार सर्चिंग और एरिया डोमिनेशन अभियान चलाया जा रहा था। ग्रामीणों के सहयोग, आत्मसमर्पित माओवादी कैडरों से पूछताछ और मजबूत खुफिया तंत्र के आधार पर जंगलों में छिपाए गए नक्सली डंप का पता लगाया गया।

संयुक्त बलों ने पामेड़ थाना क्षेत्र के कवरगुट्टा जंगल और नेशनल पार्क इलाके में छिपाकर रखे गए करीब 140 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट और यूरिया को सुरक्षा मानकों के तहत नष्ट भी किया।

बरामद हथियार और गोला-बारूद

बरामद सामग्री में प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • 1 एलएमजी रायफल
  • 4 एसएलआर रायफल
  • 1 कार्बाइन रायफल
  • 5 .303 रायफल
  • 1 .315 रायफल
  • 7 बीजीएल लॉन्चर
  • 1 पिस्टल
  • 33 AK-47 कारतूस
  • 219 एसएलआर कारतूस
  • 181 .303 कारतूस
  • 118 .315 कारतूस
  • 84 बीजीएल सेल

इसके अलावा आईईडी निर्माण से जुड़े उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक सामग्री और दैनिक उपयोग की वस्तुएं भी बरामद की गई हैं।

अब तक 20 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति जब्त

पुलिस के मुताबिक वर्ष 2024 से अब तक जिले में चलाए गए अभियानों के दौरान 517 हथियार, 1092 आईईडी और करीब 20 करोड़ 8 लाख 52 हजार रुपये की संपत्ति बरामद की जा चुकी है। इसमें 7 करोड़ 28 लाख 52 हजार रुपये नकद और लगभग 8.20 किलोग्राम सोना शामिल है, जिसकी अनुमानित कीमत 12.80 करोड़ रुपये बताई गई है।

इसी अवधि में संयुक्त अभियानों के दौरान 234 माओवादी मारे गए, 1192 गिरफ्तार किए गए, जबकि 1003 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर पुनर्वास का रास्ता अपनाया है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लगातार चल रही कार्रवाइयों से नक्सलियों की हथियार आपूर्ति, लॉजिस्टिक नेटवर्क और आईईडी निर्माण क्षमता को गंभीर नुकसान पहुंचा है। जिला बीजापुर को नक्सलमुक्त बनाने के लक्ष्य के तहत आगे भी इसी तरह के अभियान जारी रहेंगे।

 
 
 

CG NEWS : शासकीय कर्मचारियों को बड़ी राहत, निजी अस्पतालों में भी करा सकेंगे इलाज

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 Chhattisgarh सरकार ने शासकीय कर्मचारियों और उनके परिजनों को बड़ी राहत देते हुए स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार का फैसला किया है। चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार अब कर्मचारी राज्य सहित बाहरी निजी अस्पतालों में भी इलाज करा सकेंगे।


जारी आदेश के मुताबिक, छत्तीसगढ़ के 86 निजी अस्पतालों को उपचार के लिए अधिकृत किया गया है। वहीं अन्य राज्यों के 66 निजी अस्पतालों को भी सूची में शामिल किया गया है, जहां शासकीय कर्मचारी और उनके परिवारजन विभिन्न बीमारियों का इलाज करा सकेंगे।

इस फैसले से राज्य के हजारों कर्मचारियों को बेहतर और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का लाभ मिलने की उम्मीद है। राजधानी Raipur के कई नए निजी अस्पतालों को भी सूची में शामिल किया गया है, जिससे स्थानीय स्तर पर उपचार के अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे।

सरकार के इस निर्णय को कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच और गुणवत्तापूर्ण इलाज सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।











MeitY ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी क्षेत्र में पेटेंट से उत्पाद तक की प्रक्रिया को तेज करने के लिए IP Catalyst पहल शुरू की

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इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), भारत सरकार द्वारा 12 मई 2026 को इंडिया हैबिटेट सेंटर, नई दिल्ली में “पेटेंट से उत्पाद तक: इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी में आईपी (बौद्धिक संपदा) के व्यावसायीकरण को तेज करना” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में नीति-निर्माता, नवप्रवर्तक, उद्योग जगत के नेता, स्टार्टअप्स, MSMEs, शिक्षाविद्, शोधकर्ता और R&D संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए, जिन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी क्षेत्र में भारत के नवाचार और बौद्धिक संपदा पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने पर विचार-विमर्श किया।

उद्घाटन सत्र में “IP Catalyst” पहल और इसके डिजिटल प्लेटफॉर्म (https://cipie.in) का औपचारिक शुभारंभ MeitY के सचिव एस. कृष्णन द्वारा किया गया। इस अवसर पर MeitY के अतिरिक्त सचिव एवं भारत सेमीकंडक्टर मिशन के सीईओ अमितेश कुमार सिन्हा, समूह समन्वयक एवं वैज्ञानिक-जी सुनीता वर्मा तथा कॉपीराइट महानियंत्रक, CGPDTM (DPIIT) के रजिस्ट्रार प्रो. (डॉ.) उन्नत पी. पंडित सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

IP Catalyst पहल

IP Catalyst को CDAC पुणे द्वारा MeitY के सहयोग से लागू किया जा रहा है। इसका उद्देश्य एक समग्र डिजिटल इकोसिस्टम विकसित करना है जो नवाचार की पूरी प्रक्रिया—अनुसंधान, आईपी निर्माण से लेकर तकनीक हस्तांतरण, व्यावसायीकरण और बाजार में उपयोग तक—को सक्षम बनाए। यह पहल सार्वजनिक R&D और उद्योग अपनाने के बीच की दूरी को कम करने पर केंद्रित है।

मुख्य विशेषताएं:

  • MeitY संस्थानों और अनुदान प्राप्त संस्थानों के लिए IP फाइलिंग में वित्तीय सहायता

  • स्टार्टअप्स और MSMEs के लिए अंतरराष्ट्रीय पेटेंट फाइलिंग सहायता

  • तकनीक व्यावसायीकरण और IP सेवाओं का एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म

  • पूर्व कला (prior-art) खोज और IP सलाह सेवाएं

  • तकनीक परिपक्वता और तत्परता मूल्यांकन

  • IP मूल्यांकन और व्यावसायीकरण सहायता

  • तकनीक हस्तांतरण और लाइसेंसिंग सुविधा

  • उद्योग–शिक्षा–स्टार्टअप सहयोग

  • MeitY समर्थित तकनीकों तक पहुंच

  • प्रोटोटाइप से उत्पाद विकास और बाजार में उतारने में सहायता

डिजिटल प्लेटफॉर्म (cipie.in)

यह प्लेटफॉर्म IP और तकनीक व्यावसायीकरण सेवाओं के लिए एक एकीकृत राष्ट्रीय डिजिटल पोर्टल के रूप में कार्य करेगा। यह MeitY समर्थित R&D परियोजनाओं से विकसित तकनीकों का राष्ट्रीय डिजिटल भंडार भी होगा, जिससे स्टार्टअप्स, MSMEs और उद्योग को स्वदेशी तकनीकों की पहचान और सहयोग के अवसर मिलेंगे।

प्रमुख वक्तव्य

 एस. कृष्णन ने कहा कि भारत अपने नवाचार यात्रा के निर्णायक चरण में है। वित्त वर्ष 2024–25 में भारत में 1,10,375 पेटेंट आवेदन दर्ज हुए, जिनमें से लगभग 44% इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी क्षेत्र से थे। 2025–26 में यह संख्या बढ़कर 1,43,729 हो गई, और इस क्षेत्र में पेटेंट फाइलिंग में 52% की वृद्धि दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि IP Catalyst नवाचार को उत्पाद और सामाजिक प्रभाव में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

अमितेश कुमार सिन्हा ने सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, AI और उभरती तकनीकों में बौद्धिक संपदा के बढ़ते महत्व पर जोर दिया और कहा कि यह पहल स्टार्टअप्स और उद्योग को स्वदेशी तकनीकों से जोड़कर नवाचार आधारित विकास को गति देगी।

सुनीता वर्मा ने कहा कि यह प्लेटफॉर्म नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के सभी हितधारकों के बीच सहयोग को मजबूत करेगा और IP सेवाओं को डिजिटल रूप से सुलभ बनाएगा।

प्रो. (डॉ.) उन्नत पी. पंडित ने कहा कि भारत को अब केवल पेटेंट फाइलिंग से आगे बढ़कर “पेटेंट → उत्पाद → लाभ” मॉडल अपनाना चाहिए, जिससे पेटेंट वास्तविक आर्थिक और तकनीकी मूल्य उत्पन्न कर सकें।

सम्मेलन में लैब-टू-मार्केट, स्टार्टअप समर्थन, तकनीक हस्तांतरण, वैश्विक पेटेंट रणनीतियों और IP के वास्तविक मूल्यांकन जैसे विषयों पर पैनल चर्चाएं भी हुईं। यह पहल भारत सरकार के “विकसित भारत” विजन के अनुरूप इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी क्षेत्र में स्वदेशी नवाचार और तकनीकी व्यावसायीकरण को गति देने का लक्ष्य रखती है।

इंडियाAI मिशन और NHA ने AB PM-JAY ऑटो-एडजुडिकेशन हैकाथॉन शोकेस 2026 के विजेताओं को सम्मानित किया

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इंडियाAI मिशन ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) और भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु के सहयोग से 9 मई 2026 को IISc बेंगलुरु में AB PM-JAY ऑटो-एडजुडिकेशन हैकाथॉन शोकेस 2026 के विजेताओं को सम्मानित किया। यह आयोजन दो दिवसीय राष्ट्रीय स्तर के शोकेस का समापन था, जिसमें सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित नवाचारों को प्रदर्शित किया गया।

यह हैकाथॉन NHA और IISc बेंगलुरु के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य दावों (क्लेम्स) के निपटान की प्रक्रिया को अधिक तेज, पारदर्शी और सटीक बनाना तथा धोखाधड़ी (फ्रॉड) की पहचान को मजबूत करना था।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के सीईओ सुनील कुमार बर्नवाल, राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी के महानिदेशक अभिषेक सिंह, NHA की संयुक्त सचिव ज्योति यादव तथा MeitY की संयुक्त निदेशक शिखा दहिया ने उन नवप्रवर्तकों को सम्मानित किया, जिनके समाधान AI आधारित क्लेम प्रोसेसिंग को बदलने की क्षमता रखते हैं।

यह हैकाथॉन आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY) के अंतर्गत तीन प्रमुख समस्या क्षेत्रों पर केंद्रित था, जो दुनिया की सबसे बड़ी सार्वजनिक रूप से वित्तपोषित स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में से एक है। इस योजना के तहत प्रतिदिन 1900+ उपचार पैकेजों के लिए बड़ी संख्या में क्लेम प्रोसेस किए जाते हैं।

हैकाथॉन विजेता

समस्या विवरण 1: क्लिनिकल डॉक्यूमेंट क्लासिफिकेशन एवं STG अनुपालन

अलग-अलग गुणवत्ता वाले मेडिकल दस्तावेजों को पढ़कर महत्वपूर्ण डेटा निकालना, आवश्यक विज़ुअल तत्वों की पहचान करना और NHA द्वारा निर्धारित स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट गाइडलाइंस (STG) के अनुपालन की जांच करना।

  • विजेता: विनय बाबू उल्ली

  • रनर-अप:  खुशी सिंह

  • द्वितीय रनर-अप: विजय बालाजी

समस्या विवरण 2: रेडियोलॉजिकल इमेज आधारित रोग पहचान एवं रिपोर्ट मिलान

एक्स-रे, सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी जांचों की इमेज का विश्लेषण कर उन्हें रिपोर्ट से मिलाकर सही तरीके से क्लेम का सत्यापन करना।

  • विजेता: हरीश कुमार

  • रनर-अप:  भरत वर्मा संगाराजू

  • द्वितीय रनर-अप: अर्नोल्ड सचित

समस्या विवरण 3: डॉक्यूमेंट फर्जीवाड़ा एवं डीपफेक पहचान

फर्जी या AI-जनरेटेड दस्तावेजों, जैसे कि नकली डिस्चार्ज समरी, बिल में छेड़छाड़ और फर्जी पहचान की पहचान करना।

  • विजेता: प्रवीण श्रीधर

  • रनर-अप: निकिलेश्वर राव सुलाके

  • द्वितीय रनर-अप: सुमंत नायडू माथिरेड्डी

विजेता टीमों को क्रमशः ₹5 लाख, ₹3 लाख और ₹2 लाख की नकद राशि प्रदान की गई। अधिकारियों ने बताया कि चयनित समाधान भविष्य में AB PM-JAY प्रणाली में लागू किए जा सकते हैं।

भारतीय वायु सेना का संयुक्त एयरोस्पेस पावर सेमिनार: आत्मनिर्भरता और कुशल अनुरक्षण पर विशेष जोर

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भारतीय वायु सेना के मुख्यालय अनुरक्षण कमान ने स्वायत्त रक्षा चिंतन संस्थान सेंटर फॉर एयरपावर एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज़ (CAPSS) के सहयोग से 11 मई 2026 को नागपुर में एक दिवसीय संयुक्त एयरोस्पेस पावर सेमिनार का सफल आयोजन किया। “कुशल अनुरक्षण एवं आत्मनिर्भरता: वायु शक्ति के सक्षम आधार” विषय पर आयोजित इस सेमिनार में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों, विषय विशेषज्ञों तथा विशिष्ट प्रतिभागियों ने भाग लिया और एयरोस्पेस क्षमता को सुदृढ़ बनाने में अनुरक्षण दक्षता तथा आत्मनिर्भरता की महत्वपूर्ण भूमिका पर विचार-विमर्श किया।

इस अवसर पर अनुरक्षण कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ एयर मार्शल यल्ला उमेश, वीएसएम, पीएचडी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अपने संबोधन में उन्होंने परिचालन तत्परता बनाए रखने और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सुदृढ़ अनुरक्षण ढांचे तथा स्वदेशी क्षमता विकास के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि एयरोस्पेस प्रणालियों में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना देश की सामरिक मजबूती, बाहरी निर्भरता में कमी और मिशन की प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

सेमिनार में उभरती अनुरक्षण पद्धतियों, तकनीकी प्रगति, स्वदेशीकरण पहलों तथा भारत की रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दृष्टि को सशक्त बनाने वाली नीतिगत व्यवस्थाओं पर विशेषज्ञ प्रस्तुतियां और पैनल चर्चाएं आयोजित की गईं। भारतीय वायु सेना और CAPSS के विशेषज्ञों ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप अनुरक्षण रणनीतियों को विकसित करने पर अपने विचार साझा किए।

यह आयोजन ज्ञान-विनिमय का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ और इससे रणनीतिक विशेषज्ञों तथा परिचालन हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय को बढ़ावा मिला। इस सेमिनार ने राष्ट्रीय उद्देश्यों की पूर्ति हेतु भारतीय वायु सेना की अनुरक्षण कमान की नवाचार आधारित दृष्टिकोण अपनाने और स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित किया।

सेमिनार का समापन एयरोस्पेस अनुरक्षण और क्षमता विकास में परिवर्तनकारी सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए रक्षा चिंतन संस्थानों और सशस्त्र बलों के बीच सहयोग को और अधिक मजबूत करने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।

अंधाधुंध रासायनिक खेती और पराली का धुआं: क्या हम अपनी ही मौत का सामान उगा रहे हैं?

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महासमुंद- छत्तीसगढ़ को 'धान का कटोरा' कहा जाता है, लेकिन आज इस कटोरे में लालच और रसायनों का जहर घुलता जा रहा है। केशवा (महासमुंद) के किसान और पर्यावरण चिंतक मोहन चंद्राकर ने खेती की वर्तमान स्थिति और पर्यावरण को लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि पर्यावरण की सुरक्षा केवल उद्योगों की नहीं, बल्कि किसानों की भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

मोहन चंद्राकर

मुनाफे की अंधी दौड़ में खो गई परंपरा 

​मोहन चंद्राकर का कहना है कि ज्यादा पैदावार के लालच में किसान खतरनाक रसायनों और खादों का भारी उपयोग कर रहे हैं। इससे न केवल मिट्टी बंजर हो रही है, बल्कि कैंसर जैसी बीमारियां घर-घर पहुंच रही हैं। गाँव से गाय और पारंपरिक गोबर खाद (घुरवा) गायब हो रहे हैं। आज किसान विदेशी रसायनों पर निर्भर है, जिससे देश की मुद्रा और किसान का स्वास्थ्य दोनों बर्बाद हो रहे हैं।

खेतों में जलता 'पैरा' और मौन पर्यावरणविद 

​उन्होंने सवाल उठाया  है कि जब उद्योग प्रदूषण करते हैं, तो सब आवाज उठाते हैं। लेकिन जब किसान खेतों में पराली (पैरा) जलाते हैं, तो पर्यावरणविद चुप क्यों हो जाते हैं? उन्होंने कहा-

  • ​पैरा जलाना एक 'कुकृत्य' है जो आने वाली पीढ़ी का भविष्य जला रहा है।
  • ​किसान फसल की तरह पराली की जिम्मेदारी भी खुद लें।
  • ​पराली को जलाने के बजाय गौशालाओं को दान करें।

सरकार से सख्त कानून की मांग 

​मोहन चंद्राकर ने प्रदेश सरकार से अपील की है कि जैसे उद्योगों के लिए नियम हैं, वैसे ही किसानों के लिए भी हों। उन्होंने सुझाव दिया कि:-

​ धान खरीदी पर रोक : जो किसान खेत में पैरा जलाते हैं, सरकार उनका धान न खरीदे।

​ मिट्टी की सुरक्षा : खेतों से मिट्टी निकालकर अवैध ईंट भट्ठे चलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई हो।

​ निगरानी: गाँवों में ईंट पकाने के लिए लकड़ी और भूसे के अवैध इस्तेमाल को रोका जाए।

​ समाधान: प्राकृतिक और जैविक खेती की ओर वापसी 

​प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब हमें कोदो, कुटकी, ज्वार, बाजरा और रागी जैसे मोटे अनाजों की ओर लौटना होगा। प्राकृतिक और औषधीय खेती ही पर्यावरण, परंपरा और भारत के गौरव को बचा सकती है। उन्होंने रसायन मुक्त खेती की ओर लौटने का आग्रह किसान भाइयों से किया है।

"जिस दिन प्रकृति हमारे प्रतिकूल हो गई, उस दिन न किसान बचेगा, न अन्न और न ही मानव सभ्यता।" 

— मोहन चंद्राकर, किसान साथी (केशवा, महासमुंद)

यह लेख हर उस किसान के लिए एक आईना है जो मिट्टी को सिर्फ पैसा कमाने का जरिया समझ रहा है। मिट्टी बचेगी, तभी जीवन बचेगा।

CBSE 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 का रिजल्ट जारी, 85.20% छात्र पास

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 CBSE 12th Result 2026 OUT: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने कक्षा 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 का परिणाम घोषित कर दिया है। परीक्षा में शामिल छात्र अपना रिजल्ट बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट CBSE Results और CBSE Result Portal पर जाकर देख सकते हैं।


रिजल्ट देखने के लिए छात्रों को रोल नंबर, स्कूल नंबर, एडमिट कार्ड आईडी और जन्म तिथि दर्ज करनी होगी। इस वर्ष परीक्षा का कुल पास प्रतिशत 85.20 फीसदी दर्ज किया गया है।

सीबीएसई ने इस बार 12वीं कक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए पहली बार ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ (OSM) प्रणाली लागू की थी। इसके तहत कॉपियों की जांच पारंपरिक तरीके के बजाय डिजिटल माध्यम से की गई। माना जा रहा है कि इसी प्रक्रिया के कारण रिजल्ट जारी होने में कुछ देरी हुई।

वहीं, 10वीं कक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन पहले की तरह पारंपरिक तरीके से ही किया गया।

ऐसे चेक करें CBSE 12वीं का रिजल्ट

  • आधिकारिक वेबसाइट CBSE Results या CBSE Result Portal पर जाएं।
  • “CBSE Class 12th Result 2026” लिंक पर क्लिक करें।
  • रोल नंबर, स्कूल नंबर, एडमिट कार्ड आईडी और जन्म तिथि दर्ज करें।
  • Submit पर क्लिक करते ही स्कोरकार्ड स्क्रीन पर दिखाई देगा।
  • भविष्य के लिए रिजल्ट डाउनलोड कर प्रिंट आउट सुरक्षित रखें।
 
 
 
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