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तालाब बना काल: संतोष यादव की डूबकर मौत, दलदल में मिला शव

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 भिलाई के कैंप-2 तालाब में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया, जहां नहाने गए एक व्यक्ति की डूबने से मौत हो गई। काफी तलाश के बाद उसका शव तालाब के बीच दलदली हिस्से में फंसा हुआ मिला।


यह घटना छावनी थाना क्षेत्र स्थित कैंप-2 तालाब की है। जानकारी के अनुसार, संतोष यादव (48 वर्ष), निवासी शारदा पारा, कैंप-2, बुधवार दोपहर करीब 3 बजे रोज की तरह तालाब में नहाने गए थे। संतोष एक अच्छे तैराक माने जाते थे और अक्सर तालाब को एक छोर से दूसरे छोर तक पार कर लेते थे।

नहाते-नहाते वे तालाब के बीच तक पहुंच गए, लेकिन इसी दौरान अचानक डूबने लगे। आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल सकी।

घटना की सूचना मिलते ही एसडीआरएफ (SDRF) की टीम मौके पर पहुंची। जिला सेनानी नागेंद्र कुमार सिंह के निर्देश पर डीप डाइविंग टीम ने तालाब में सर्च ऑपरेशन शुरू किया। चंद्रप्रताप जघेल, ओंकार, भानुप्रताप और राजकुमार यादव की टीम ने शाम करीब 7:30 बजे तक तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।

अंधेरा बढ़ने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन रोकना पड़ा। इसके बाद गुरुवार सुबह करीब 7 बजे टीम दोबारा मौके पर पहुंची और खोजबीन शुरू की गई।

करीब ढाई घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद सुबह लगभग 9:30 बजे संतोष यादव का शव तालाब के बीच दलदली हिस्से में धंसा हुआ मिला। टीम ने शव को बाहर निकालकर पुलिस के सुपुर्द कर दिया।

छावनी पुलिस की मौजूदगी में पंचनामा कार्रवाई पूरी की गई और शव को पोस्टमार्टम के लिए सुपेला मरच्यूरी भेज दिया गया।

वनांचल में तेंदुलकर परिवार का गोपनीय दौरा: बैगा समुदाय से मिले, स्वास्थ्य सेवाओं का लिया जायजा

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 मुंगेली/बिलासपुर। सचिन तेंदुलकर के परिवार ने छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचल क्षेत्रों का दो दिवसीय गोपनीय दौरा किया। इस दौरान उनकी पत्नी अंजलि तेंदुलकर, बेटी सारा तेंदुलकर और बहू सानिया तेंदुलकर ने मुंगेली जिले स्थित अचानकमार टाइगर रिजर्व के भीतर बसे दूरस्थ गांवों का भ्रमण किया।


जानकारी के अनुसार, यह दौरा पूरी तरह लो-प्रोफाइल रखा गया था। इस दौरान तेंदुलकर परिवार ने बैगा आदिवासी परिवारों से मुलाकात कर उनके जीवन, स्वास्थ्य सुविधाओं और जरूरतों को करीब से समझा।

सूत्रों के मुताबिक, यह प्रवास Sachin Tendulkar Foundation द्वारा वित्तपोषित गनियारी स्थित जन स्वास्थ्य सहयोग संस्था के कार्यों के मूल्यांकन से जुड़ा था।

दौरे के दूसरे दिन परिवार बिलासपुर के पास गनियारी स्थित जन स्वास्थ्य केंद्र पहुंचा, जहां अस्पताल की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया गया और डॉक्टरों व नर्सों के साथ बैठक कर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर चर्चा की गई।

पहले दिन टीम बम्हनी, लमनी और छपरवा जैसे दूरस्थ गांवों में पहुंची, जहां ग्रामीणों से आत्मीय मुलाकात की गई। इस दौरान सारा और सानिया नवजात बच्चों को गोद में लेकर दुलार करती नजर आईं, जिससे दौरे का भावनात्मक पक्ष भी सामने आया।

दो दिवसीय प्रवास के बाद बुधवार शाम तेंदुलकर परिवार मुंबई लौट गया। इस दौरे ने छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर नई उम्मीद जगाई है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वियतनाम के नए उप प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री को दी बधाई

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नई दिल्ली- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वियतनाम के जनरल फान वान जियांग को सोशलिस्ट रिपब्लिक ऑफ वियतनाम के उप प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय रक्षा मंत्री के रूप में नियुक्त होने पर बधाई दी है।

रक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने संदेश में कहा कि भारत वियतनाम के साथ अपने लंबे समय से चले आ रहे रक्षा संबंधों को और मजबूत करने तथा सुरक्षा, सैन्य आदान-प्रदान और रक्षा उद्योग में सहयोग को गहरा करने के लिए उत्सुक है।

उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में भारत-वियतनाम साझेदारी और अधिक मजबूत होगी तथा नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगी।

महिलाओं के लिए विधायी आरक्षण: लोकतंत्र को अधिक सशक्त और सहभागी बनाने की दिशा में आवश्यक कदम

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि विधायी संस्थाओं (जैसे संसद और विधानसभाओं) में महिलाओं के लिए आरक्षण समय की मांग है, जिससे भारतीय लोकतंत्र और अधिक जीवंत तथा सहभागी बनेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि इस आरक्षण को लागू करने में किसी भी प्रकार की देरी अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण होगी। इस विषय पर उन्होंने अपने विचार एक हाल ही में प्रकाशित ओप-एड लेख के माध्यम से विस्तार से साझा किए हैं।

प्रधानमंत्री ने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा:

“महिलाओं के लिए विधायी संस्थाओं में आरक्षण समय की मांग है! इससे हमारा लोकतंत्र और अधिक जीवंत एवं सहभागी बनेगा। इस आरक्षण को लागू करने में किसी भी तरह की देरी अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण होगी। इसी को लेकर मैंने अपने विचार इस आलेख में साझा किए हैं।”

मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव: इजरायल-हिजबुल्लाह टकराव से सीजफायर पर संकट, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य किया बंद

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 तेहरान/यरुशलम: पश्चिम एशिया में हालात एक बार फिर तनावपूर्ण हो गए हैं। इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी (IRNA) के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में घोषित दो सप्ताह का सीजफायर अब खतरे में पड़ता दिख रहा है।


रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल की तेज सैन्य कार्रवाई के जवाब में रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से बंद करने का फैसला लिया है।

इस घटनाक्रम से वैश्विक तेल आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि ईरान ने इस जलमार्ग से गुजरने वाले तेल टैंकरों की आवाजाही रोक दी है, जिससे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ गई है।

वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि हिजबुल्लाह इस सीजफायर समझौते का हिस्सा नहीं था।

लेबनान में इजरायल के हमले तेज

इजरायली सेना इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने पुष्टि की है कि लेबनान में हालिया हमले हिजबुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए हैं। सेना के अनुसार, “ऑपरेशन रोरिंग लायन” के तहत अब तक का सबसे बड़ा समन्वित हमला किया गया, जिसमें बेरूत, बेका वैली और दक्षिणी लेबनान में 100 से अधिक ठिकानों पर स्ट्राइक की गई।

लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, इन हमलों में कम से कम 112 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 800 से अधिक घायल हुए हैं।

सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर कार्रवाई

IDF प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल इयाल जमीर ने कहा कि यह ऑपरेशन सटीक खुफिया जानकारी पर आधारित था और कई हफ्तों की योजना के बाद अंजाम दिया गया।

सेना के अनुसार, हमलों में हिजबुल्लाह के कमांड सेंटर, मिसाइल ठिकाने, नौसैनिक क्षमताएं, राडवान फोर्स और एरियल यूनिट्स से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया।

इजरायल ने जारी रखी सख्त नीति

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि हिजबुल्लाह से उत्पन्न खतरे को खत्म करने तक दक्षिणी लेबनान में सैन्य अभियान जारी रहेगा।

प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि इजरायल, ट्रंप प्रशासन के उस प्रस्ताव का समर्थन करता है, जिसमें ईरान के खिलाफ हमले अस्थायी रूप से रोकने की बात कही गई है—लेकिन शर्त यह है कि ईरान तुरंत होर्मुज जलडमरूमध्य को खोले और क्षेत्र में सभी हमले बंद करे।

मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य टकराव और रणनीतिक जलमार्ग के बंद होने से न केवल क्षेत्रीय स्थिरता बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी बड़ा असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात जल्द नहीं सुधरे, तो यह संकट और गहरा सकता है।

9 से 23 अप्रैल तक मनाया जाएगा पोषण पखवाड़ा 2026, बच्चों के बेहतर विकास और पोषण पर जोर

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नई दिल्ली- महिला एवं बाल विकास मंत्रालय 9 से 23 अप्रैल 2026 तक पोषण पखवाड़ा (Poshan Pakhwada) का 8वां संस्करण मनाने जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य देशभर में माताओं और बच्चों के पोषण स्तर में सुधार लाना और स्वस्थ भारत की नींव को मजबूत करना है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पोषण के महत्व पर जोर देते हुए कहा है कि “एक स्वस्थ और पोषित बच्चा ही एक मजबूत राष्ट्र की आधारशिला है। पोषण अभियान केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि जन आंदोलन है।”

इस वर्ष पोषण पखवाड़ा का राष्ट्रीय शुभारंभ 9 अप्रैल 2026 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में होगा। इस कार्यक्रम में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी, राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर और मंत्रालय के सचिव अनिल मलिक मौजूद रहेंगे।

इस वर्ष की थीम

“जीवन के पहले छह वर्षों में मस्तिष्क विकास को अधिकतम करना”
विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चे के जीवन के पहले 1000 दिन और 6 वर्ष तक का समय उसके मानसिक और शारीरिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इस दौरान 85% तक मस्तिष्क विकास हो जाता है।

मुख्य फोकस क्षेत्र

  • मातृ एवं शिशु पोषण: गर्भावस्था, स्तनपान और सही आहार पर जोर

  • 0–3 वर्ष: बच्चों के मस्तिष्क विकास के लिए शुरुआती गतिविधियां

  • 3–6 वर्ष: खेल आधारित शिक्षा और समग्र विकास

  • स्क्रीन टाइम कम करना: बच्चों में स्वस्थ आदतें बढ़ाना

  • आंगनवाड़ी सशक्तिकरण: सामुदायिक भागीदारी और बेहतर सुविधाएं

देशभर में जागरूकता अभियान

इस पखवाड़े के दौरान देशभर के आंगनवाड़ी केंद्रों में

  • पोषण पंचायत

  • जागरूकता कार्यक्रम

  • खेल आधारित शिक्षा

  • स्वस्थ जीवनशैली अभियान
    आयोजित किए जाएंगे, जिनमें माताएं, परिवार और समुदाय सक्रिय रूप से भाग लेंगे।

जन आंदोलन के रूप में पोषण अभियान

पोषण अभियान आज एक जन आंदोलन बन चुका है, जिसमें लोगों की भागीदारी से कुपोषण के खिलाफ लड़ाई को मजबूत किया जा रहा है।

निष्कर्ष

पोषण पखवाड़ा 2026 का उद्देश्य यह संदेश देना है कि सही पोषण, देखभाल, शिक्षा और सामुदायिक भागीदारी से ही एक स्वस्थ, शिक्षित और सशक्त भारत का निर्माण संभव है।

नए बेस ईयर (2022–23) पर राज्य आय आंकड़ों को लेकर विशाखापट्टनम में राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन

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विशाखापट्टनम- सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के अंतर्गत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) की राष्ट्रीय लेखा प्रभाग (NAD) द्वारा 8 से 10 अप्रैल 2026 तक आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में तीन दिवसीय अखिल भारतीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यशाला का उद्देश्य राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के अधिकारियों को नए आधार वर्ष (2022–23) के अनुसार राज्य आय और संबंधित आंकड़ों में किए गए बदलावों से अवगत कराना तथा आंकड़ों में एकरूपता, पारदर्शिता और तुलनीयता सुनिश्चित करना है।

कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में MoSPI के सचिव डॉ. सौरभ गर्ग मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर आंध्र प्रदेश सरकार के वित्त एवं योजना विभाग के प्रधान सचिव पीयूष कुमार, MoSPI के अतिरिक्त महानिदेशक सिद्धार्थ कुंडू, उप महानिदेशक डॉ. सुभ्रा सरकार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

अपने संबोधन में डॉ. सौरभ गर्ग ने कहा कि राज्य सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) राज्यों की उधारी सीमा तय करने और केंद्र से मिलने वाले करों के बंटवारे के लिए एक महत्वपूर्ण संकेतक है। उन्होंने GST, e-Vahan और PFMS जैसे प्रशासनिक डेटा के अधिक उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि इससे आंकड़ों की सटीकता और विश्वसनीयता बढ़ेगी। उन्होंने राज्यों से ASUSE और PLFS जैसे सर्वेक्षणों में सक्रिय भागीदारी की अपील भी की, ताकि विशेष रूप से असंगठित क्षेत्र के लिए बेहतर जिला स्तर के आंकड़े तैयार किए जा सकें।

आंध्र प्रदेश के प्रधान सचिव पीयूष कुमार ने कहा कि 2011–12 से 2022–23 में बेस ईयर का बदलाव अर्थव्यवस्था में आए संरचनात्मक परिवर्तनों को सही तरीके से दर्शाने के लिए आवश्यक है। इससे राज्य और जिला स्तर पर नीति निर्माण के लिए अधिक सटीक और अद्यतन आंकड़े उपलब्ध होंगे।

इस अवसर पर अधिकारियों ने राज्यों की भूमिका को राष्ट्रीय आंकड़ों की विश्वसनीयता के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए समय पर और सटीक डेटा उपलब्ध कराने पर जोर दिया।

इस तीन दिवसीय कार्यशाला में देशभर के 31 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से लगभग 125 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं।

निष्कर्ष: यह कार्यशाला राज्यों को नई आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप आंकड़ों को समझने और बेहतर नीति निर्माण में सहायता प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

PMMSY के तहत सिरसा में खारे पानी की झींगा पालन क्लस्टर की समीक्षा, किसानों की आय बढ़ाने पर जोर

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सिरसा (हरियाणा)- भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के तहत मत्स्य पालन विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने आज हरियाणा के सिरसा जिले का दौरा कर प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के अंतर्गत विकसित खारे पानी (Saline Water) एक्वाकल्चर क्लस्टर की प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने झींगा (श्रिम्प) और मछली किसानों से संवाद कर जमीनी स्तर पर आने वाली समस्याओं और चुनौतियों को समझा।

डॉ. लिखी ने किसानों को संबोधित करते हुए तकनीक आधारित झींगा पालन, वैज्ञानिक तालाब प्रबंधन और मजबूत बायो-सिक्योरिटी उपायों को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सिरसा जैसे खारे पानी वाले क्षेत्र झींगा पालन के लिए बेहद उपयुक्त हैं और इससे किसानों की आय में विविधता, रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है। उन्होंने MPEDA को किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन देने और निर्यात से जोड़ने के निर्देश भी दिए। साथ ही, स्थानीय स्तर पर परीक्षण किट की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर बल दिया गया ताकि किसानों को दूर नहीं जाना पड़े।

चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय (CDLU) में आयोजित एक समीक्षा बैठक में PMMSY के तहत क्लस्टर आधारित मत्स्य विकास योजनाओं की प्रगति पर चर्चा की गई। इस बैठक में केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारी, ICAR के वैज्ञानिक, NABARD, NFDB, MPEDA, मत्स्य किसान, सहकारी संस्थाएं और देशभर के प्रतिनिधि शामिल हुए। 500 से अधिक प्रतिभागियों ने बैठक में हिस्सा लिया। किसानों ने इस दौरान बिजली की ऊंची लागत, गुणवत्तापूर्ण बीज की कमी और पानी की उपलब्धता जैसी समस्याएं उठाईं और पंचायत भूमि को स्वयं सहायता समूहों को लीज पर देने की मांग की।

डॉ. लिखी ने सिरसा के रघुआना गांव में PMMSY के तहत विकसित एक सफल झींगा फार्म का भी दौरा किया। करीब 3 हेक्टेयर में फैले 7 तालाबों वाले इस फार्म से सालाना 28 टन उत्पादन हो रहा है, जिससे लगभग ₹90 लाख का कारोबार और स्थानीय रोजगार सृजन हो रहा है। उन्होंने कहा कि झींगा पालन के विस्तार के लिए बेहतर बीज, फीड, बुनियादी ढांचा और बाजार तक पहुंच को मजबूत करना जरूरी है।

हरियाणा ने PMMSY के तहत उल्लेखनीय प्रगति की है, जहां ₹760.88 करोड़ का निवेश आकर्षित हुआ है। राज्य में 456 RAS और बायोफ्लॉक सिस्टम स्थापित किए गए हैं, जबकि 3,766 हेक्टेयर तालाब और 2,204 हेक्टेयर खारे क्षेत्र में विकास कार्य किए जा रहे हैं। इसके अलावा, सिरसा में ₹110 करोड़ का एकीकृत एक्वापार्क स्थापित किया जा रहा है और कोल्ड-चेन इंफ्रास्ट्रक्चर भी विकसित किया जा रहा है।

भारत का झींगा निर्यात समुद्री उत्पादों का प्रमुख हिस्सा है, जो कुल निर्यात का लगभग 69% है। देश का समुद्री निर्यात पिछले दशक में दोगुना होकर ₹62,408 करोड़ तक पहुंच गया है, जिसमें झींगा का योगदान ₹43,334 करोड़ है।

देश में 34 मत्स्य क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें सिरसा का खारा पानी क्लस्टर एक प्रमुख उदाहरण है। यह क्लस्टर झींगा, स्कैम्पी और सीबास जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों के जरिए किसानों की आय बढ़ाने, रोजगार सृजन और संसाधनों के बेहतर उपयोग को बढ़ावा दे रहा है।

भारत का अंतर्देशीय मत्स्य क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है, जो कुल उत्पादन का 75% योगदान देता है। 2013-14 से 2024-25 के बीच उत्पादन 61 लाख टन से बढ़कर 153 लाख टन हो गया है। देश के विशाल जल संसाधनों को देखते हुए मत्स्य पालन क्षेत्र में विकास की अपार संभावनाएं हैं, जिसे सरकार प्राथमिकता दे रही है।

निष्कर्ष: सिरसा का यह मॉडल दर्शाता है कि सही नीति, तकनीक और सहयोग के जरिए खारे और अनुपयोगी क्षेत्रों को भी आय और रोजगार के मजबूत स्रोत में बदला जा सकता है।

INS त्रिकंड मोंबासा पहुंचा, भारत-केन्या समुद्री सहयोग को मिलेगा बढ़ावा

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भारतीय नौसेना का अत्याधुनिक गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट INS त्रिकंड 7 अप्रैल 2026 को केन्या के मोंबासा बंदरगाह पहुंचा। यह दौरा दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर क्षेत्र में चल रही तैनाती के तहत किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य भारत और केन्या के बीच समुद्री सहयोग को मजबूत करना और द्विपक्षीय संबंधों को और प्रगाढ़ बनाना है। इस दौरान पश्चिमी नौसेना कमान के प्रमुख वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन का केन्या दौरा भी हो रहा है, जिससे इस यात्रा का महत्व और बढ़ गया है।

पोर्ट कॉल के दौरान जहाज के क्रू द्वारा पेशेवर, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों में भाग लिया जाएगा, साथ ही केन्या डिफेंस फोर्सेस को आवश्यक सामग्री भी सौंपी जाएगी। INS त्रिकंड के कमांडिंग ऑफिसर वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। मोंबासा से प्रस्थान के बाद भारतीय और केन्याई नौसेना के बीच PASSEX (Passage Exercise) आयोजित किया जाएगा, जिससे दोनों देशों के बीच समुद्री समन्वय और संचालन क्षमता को और मजबूत किया जा सके। यह दौरा भारत के MAHASAGAR (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) विजन के अनुरूप है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा और विकास को बढ़ावा देता है।



INS सुदर्शिनी ने फ्रांस में बिखेरा जलवा, भारत की समुद्री ताकत और संस्कृति का प्रदर्शन

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भारतीय नौसेना का सेल ट्रेनिंग शिप INS सुदर्शिनी 7 अप्रैल 2026 को फ्रांस के सेट (Sète) बंदरगाह से रवाना हुआ, जहां उसने प्रतिष्ठित ‘Escale à Sète’ समुद्री महोत्सव में सफल भागीदारी दर्ज की। यह महोत्सव भूमध्यसागर के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय समुद्री आयोजनों में से एक है, जिसमें दुनिया भर के जहाज शामिल होते हैं। इस दौरान सुदर्शिनी ने विभिन्न समुद्री गतिविधियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, वर्कशॉप और खेल प्रतियोगिताओं में सक्रिय भाग लेकर भारत की मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। खास आकर्षण फ्रांसीसी नौसेना की 400वीं वर्षगांठ पर आयोजित हेरिटेज सिटी परेड रही, जिसमें भारतीय नौसेना के मार्चिंग दल ने ऐतिहासिक सड़कों पर तिरंगा लहराते हुए अनुशासन और एकता का शानदार प्रदर्शन किया।

इस यात्रा के दौरान INS सुदर्शिनी की रोइंग टीम ने Jeux Maritimes प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। महोत्सव के समापन पर ग्रांडे परेड डे डिपार में जहाज ने अपने पाल खोलकर आकर्षक दृश्य प्रस्तुत किया। बंदरगाह प्रवास के दौरान हजारों लोगों ने जहाज का दौरा किया, जिससे भारत और फ्रांस के बीच सांस्कृतिक और समुद्री संबंध और मजबूत हुए। इस दौरान भारतीय राजदूत संजीव सिंगला द्वारा जहाज पर आयोजित स्वागत समारोह में कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि शामिल हुए। अब INS सुदर्शिनी ‘Lokayan 26’ मिशन के तहत कैसाब्लांका की ओर बढ़ रही है, जहां वह भारत के वैश्विक समुद्री संबंधों को और सुदृढ़ करेगी।



आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम: ICAR का जलवायु-सहिष्णु कृषि पर जोर, गेहूं-जौ अनुसंधान से मजबूत होगी खाद्य सुरक्षा

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नई दिल्ली/करनाल- आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को आगे बढ़ाते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) देश में संरक्षण कृषि (Conservation Agriculture) और जलवायु-सहिष्णु गेहूं व जौ प्रणाली पर बड़े स्तर पर शोध कर रही है। इसका उद्देश्य खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना, किसानों की आय बढ़ाना और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देना है।

ICAR के महानिदेशक एवं DARE के सचिव डॉ. एम.एल. जाट ने आज करनाल स्थित ICAR–गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (IIWBR) और मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान (CSSRI) का दौरा कर चल रहे शोध कार्यों की समीक्षा की।

उत्पादन और आत्मनिर्भरता पर फोकस

डॉ. जाट ने कहा कि भारत इस वर्ष गेहूं उत्पादन में बेहतर स्थिति में है और न केवल अपनी जरूरतें पूरी कर सकता है बल्कि वैश्विक स्तर पर भी सहयोग देने में सक्षम है।

उन्होंने बताया कि ICAR का मुख्य लक्ष्य जलवायु-सहिष्णु और पोषक तत्वों से भरपूर फसल किस्में विकसित करना है, जिससे किसानों की आय और लोगों का स्वास्थ्य दोनों बेहतर हो सके।

बड़ी उपलब्धियां (Conservation Agriculture)

करनाल में चल रहे शोध से महत्वपूर्ण परिणाम सामने आए हैं:

  • 85% तक सिंचाई जल की बचत

  • 28% तक उर्वरक की कमी

  • 51% ईंधन की बचत

  • 95% तक पराली जलाने में कमी

  • 46% ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी

  • 33% तक उत्पादन में वृद्धि

  • किसानों की आय लगभग दोगुनी

पर्यावरण और मिट्टी की सेहत में सुधार

  • 15 वर्षों में मिट्टी की गुणवत्ता और जैविक कार्बन दोगुना

  • जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता मजबूत

  • कार्बन न्यूट्रल और “वन हेल्थ” लक्ष्य में योगदान

नई तकनीक: BNI (Biological Nitrification Inhibition)

  • उर्वरक उपयोग में 25% तक कमी संभव

  • उत्पादन पर कोई असर नहीं

  • अगर 25% क्षेत्र में लागू किया जाए तो
     हर साल ₹2000 करोड़ की बचत

गेहूं सुरक्षा और अनुसंधान

  • रस्ट (Rust) बीमारी से बचाव के लिए राष्ट्रीय निगरानी कार्यक्रम

  • 30+ संस्थानों का नेटवर्क, 1 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र कवर

  • हर साल 1000 से ज्यादा नई किस्मों का परीक्षण

जलवायु-सहिष्णु किस्में

  • जंगली प्रजातियों (Aegilops) के जरिए
    सूखा, गर्मी और लवणता सहने वाली नई किस्में विकसित

  • अब तक 55 बायोफोर्टिफाइड गेहूं किस्में जारी

  • 45% क्षेत्र में इनका उपयोग

जौ (Barley) की बढ़ती अहमियत

  • कम पानी और उर्वरक की जरूरत

  • स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद (हाई फाइबर)

  • फूड, फीड और इंडस्ट्री में बढ़ती मांग

आधुनिक खेती तकनीक

  • जीरो टिलेज, मशीन से बुवाई, अवशेष प्रबंधन

  • 6–10% उत्पादन बढ़ोतरी

  • 70–75% समय और ईंधन की बचत

निष्कर्ष

ICAR के ये प्रयास न केवल किसानों को सशक्त बना रहे हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सतत और आत्मनिर्भर कृषि प्रणाली की ओर भारत को तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं।

छत्तीसगढ़ में मौसम का बदला मिजाज: तीन दिन तक आंधी-बारिश और बिजली गिरने का अलर्ट

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि अगले तीन दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में गरज-चमक, तेज हवाएं और वज्रपात की स्थिति बनी रह सकती है।


तीन दिन तक असर, फिर बढ़ेगा तापमान

फिलहाल तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया है, लेकिन तीन दिन बाद इसमें धीरे-धीरे बढ़ोतरी के संकेत हैं। अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि दर्ज की जा सकती है।

क्यों बदला मौसम?

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, ओडिशा और आसपास के क्षेत्रों में बने चक्रवाती परिसंचरण तथा दक्षिण भारत तक फैली द्रोणिका के कारण प्रदेश में वातावरण अस्थिर बना हुआ है। इसी वजह से मौसम में यह बदलाव देखने को मिल रहा है।

आज के लिए विशेष चेतावनी

विभाग ने चेताया है कि आज कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि, बिजली गिरने और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। इसके साथ ही आने वाले दिनों में भी हल्की बारिश और गरज-चमक का दौर जारी रहने की संभावना है।

राजधानी में गर्मी बरकरार

राजधानी रायपुर में आज मौसम अपेक्षाकृत साफ रहने का अनुमान है, लेकिन अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना रहेगा, जिससे गर्मी का असर पूरी तरह कम नहीं होगा।

बारिश और तापमान का हाल

बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। राजनांदगांव में सर्वाधिक 38.5 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया, जबकि अंबिकापुर सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 17.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कई क्षेत्रों में 1 से 3 सेंटीमीटर तक वर्षा भी हुई है।

विकास की राह पर बस्तर: सीएम साय ने पीएम को सौंपा प्लान, बोले कश्यप

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 रायपुर। मुख्यमंत्री साय के हालिया दिल्ली दौरे को लेकर प्रदेश सरकार ने बस्तर के विकास को लेकर बड़े संकेत दिए हैं। मंत्री Kedar Kashyap ने कहा कि मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री Narendra Modi को बस्तर के समग्र विकास का विस्तृत ब्लूप्रिंट सौंपा है, जिससे क्षेत्र में आने वाले समय में व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा।


मंत्री कश्यप ने बताया कि सरकार की प्राथमिकता बस्तर में शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के प्रयासों से केंद्र सरकार की योजनाओं को गति मिलेगी और भाजपा सरकार बस्तर जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में तेजी से काम करेगी।

भूजल गिरावट पर चिंता

कश्यप ने प्रदेश में गिरते भूजल स्तर पर चिंता जताते हुए कहा कि अत्यधिक दोहन के कारण जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है। इसे नियंत्रित करने के लिए सरकार ने कई इलाकों में गर्मी के मौसम में फसल के दौरान भूजल उपयोग पर पाबंदी लगाई है। उन्होंने बताया कि इस पहल में किसानों का सहयोग भी मिल रहा है।

कांग्रेस पर साधा निशाना

कांग्रेस की प्रस्तावित बैठकों पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री कश्यप ने कहा कि पार्टी को पहले अपने आंतरिक विवाद सुलझाने चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस ने आम जनता के लिए कौन सी ठोस योजनाएं लागू कीं।

नक्सलमुक्त गांवों को मिलेगा प्रोत्साहन

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों को लेकर कश्यप ने बताया कि सरकार ने नक्सलमुक्त गांवों को एक करोड़ रुपये देने की योजना बनाई है। पंचायत स्तर पर इसकी घोषणा की जा चुकी है और जो गांव स्वयं को नक्सल मुक्त घोषित करेंगे, उन्हें इस योजना का लाभ दिया जाएगा।

उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में बस्तर संभाग विकास के मामले में प्रदेश का सबसे समृद्ध क्षेत्र बनकर उभरेगा।

अमेरिका-ईरान युद्धविराम का भारत ने किया स्वागत, शांति बहाली की जताई उम्मीद

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 नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच घोषित युद्धविराम (सीजफायर) पर भारत ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। भारत सरकार ने इस कदम का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि इससे पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में स्थायी शांति स्थापित करने में मदद मिलेगी।


अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा ईरान के साथ सीजफायर की घोषणा के बाद क्षेत्र में जारी तनाव फिलहाल थमता नजर आ रहा है। बताया जा रहा है कि दोनों देशों के बीच करीब एक महीने से अधिक समय से चल रहा संघर्ष अब दो सप्ताह के लिए रोक दिया गया है।

विदेश मंत्रालय ने बुधवार को जारी अपने आधिकारिक बयान में कहा, “हम युद्धविराम का स्वागत करते हैं और आशा करते हैं कि इससे पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित होगी।” मंत्रालय ने दोहराया कि भारत हमेशा से संवाद और कूटनीति के माध्यम से विवादों के समाधान का पक्षधर रहा है।

आम लोगों पर पड़ा गहरा असर

विदेश मंत्रालय ने कहा कि लंबे समय से जारी इस संघर्ष ने आम नागरिकों को भारी नुकसान पहुंचाया है। साथ ही वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार नेटवर्क भी प्रभावित हुआ है। भारत ने विशेष रूप से Strait of Hormuz में निर्बाध नौवहन की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि यहां से व्यापारिक गतिविधियां सुचारू रूप से जारी रहनी चाहिए।

28 फरवरी से शुरू हुआ था संघर्ष

गौरतलब है कि यह टकराव 28 फरवरी को तब शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर संयुक्त सैन्य कार्रवाई की थी। इसके बाद ईरान ने जवाबी हमले किए और खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। इस संघर्ष का असर वैश्विक स्तर पर देखा गया।

करीब 40 दिनों तक चले इस तनावपूर्ण दौर के बाद अब दोनों देशों के बीच युद्धविराम पर सहमति बनी है। यह सहमति उस समय बनी, जब अमेरिका द्वारा तय की गई समयसीमा खत्म होने में केवल कुछ ही समय बचा था।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह सीजफायर क्षेत्र में तनाव कम करने की दिशा में अहम कदम है, हालांकि स्थायी शांति के लिए आगे भी कूटनीतिक प्रयास जरूरी होंगे।

बारात में गया परिवार, सूने घर में फिर चोरी - रिटायर्ड ASI के मकान को दोबारा बनाया निशाना

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 कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में चोरी की एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। सिविल लाइन थाना क्षेत्र स्थित सीएसईबी कॉलोनी में रहने वाले रिटायर्ड एएसआई गलेटबिन कुमार के सूने घर को चोरों ने एक बार फिर निशाना बना लिया। खास बात यह है कि इससे पहले भी इसी मकान में बड़ी चोरी हो चुकी है।


जानकारी के अनुसार, गलेटबिन कुमार अपने बेटे की शादी में शामिल होने के लिए बालको स्थित साईं मंगलम भवन में बारात लेकर गए हुए थे। इसी दौरान चोरों ने बंद पड़े घर में धावा बोल दिया। बुधवार सुबह पड़ोसियों ने घर का दरवाजा संदिग्ध स्थिति में देखा, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, चोर करीब 20 हजार रुपये नकद, एक लैपटॉप, कंप्यूटर, टीवी समेत मेहमानों का सामान लेकर फरार हो गए। वास्तविक नुकसान का आंकलन परिवार के लौटने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।

CCTV से छेड़छाड़, DVR भी ले गए चोर

पहली चोरी के बाद सुरक्षा के लिए घर में CCTV कैमरे लगाए गए थे, लेकिन इस बार चोरों ने कैमरों से छेड़छाड़ कर DVR भी अपने साथ ले गए। इससे पुलिस को तकनीकी साक्ष्य जुटाने में दिक्कत आ रही है।

बताया जा रहा है कि इसी घर में जनवरी महीने में भी सेंधमारी की घटना हुई थी, जिसमें सोने-चांदी के जेवर और नकदी सहित करीब 10 लाख रुपये का नुकसान हुआ था। उस मामले में अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।

जांच में जुटी पुलिस, डॉग स्क्वायड की मदद

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी है। डॉग स्क्वायड की भी मदद ली जा रही है। सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी ने बताया कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार करने का प्रयास किया जाएगा।

लगातार एक ही घर में हो रही चोरी और पहले मामले में कार्रवाई न होने से स्थानीय सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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