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भाभी की हत्या कर रेप जैसा रचा सीन, पुलिस को गुमराह करने कपड़े फाड़े; ननद गिरफ्तार

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 कबीरधाम जिले में रिश्तों को शर्मसार करने वाली एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। लंबे समय से चल रहे पारिवारिक विवाद में एक महिला ने अपनी ही भाभी की धारदार हथियार से हत्या कर दी। इतना ही नहीं, पुलिस को गुमराह करने और मामला रेप के बाद हत्या का दिखाने के लिए शव के कपड़े भी फाड़ दिए। पुलिस ने आरोपी ननद को गिरफ्तार कर लिया है।


मामला Lohara थाना क्षेत्र के ग्राम सिंगारपुर का है। जानकारी के मुताबिक, 3 मई 2026 को झोंकाखार खेत में एक महिला का शव संदिग्ध अवस्था में मिला था। महिला का शव निर्वस्त्र पड़ा था और उसके सिर व चेहरे पर गंभीर चोट के निशान थे। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शुरुआती जांच में अज्ञात आरोपी के खिलाफ रेप के बाद हत्या का मामला दर्ज किया गया।

जांच में मृतका की पहचान बेलसिया छेदैया (32) निवासी ग्राम सिंगारपुर के रूप में हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए Dharmendra Singh के निर्देश पर विशेष जांच टीम गठित की गई।

घटनास्थल से पुलिस को लोहे की रपली, हंसिया, टूटी चूड़ियां, कपड़ों के टुकड़े, बटन और साड़ी पिन सहित कई अहम साक्ष्य मिले। साइबर सेल और एफएसएल टीम की मदद से जांच आगे बढ़ाई गई। तकनीकी जांच में खुलासा हुआ कि महिला के साथ दुष्कर्म नहीं हुआ था, बल्कि हत्या के बाद शव को निर्वस्त्र कर घटना को दूसरी दिशा देने की कोशिश की गई थी।

पूछताछ में सामने आया कि मृतका और उसकी ननद मालती मरकाम (33) के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। दोनों के बीच पहले भी कई बार मारपीट हो चुकी थी। करीब छह महीने पहले भी मालती ने अपनी भाभी की हत्या की कोशिश की थी, लेकिन परिवार के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हो गया था।

पुलिस जांच में यह भी पता चला कि आरोपी मालती मरकाम का पति नरेन्द्र मरकाम शराब के नशे में उसके साथ मारपीट करता था। इससे परेशान होकर वह करीब पांच साल पहले ससुराल छोड़कर मायके में रहने लगी थी। फिलहाल पुलिस ने आरोपी महिला को गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

कबीरधाम में दर्दनाक सड़क हादसा : ट्रक की चपेट में आने से दंपति की मौत, 4 साल का बेटा घायल

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 Kabirdham जिले में आज शुक्रवार को हुए भीषण सड़क हादसे में बाइक सवार दंपति की मौत हो गई, जबकि उनका 4 वर्षीय बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन शुरू कर दिया। मामला Kunda थाना क्षेत्र का है।


जानकारी के अनुसार, मृतकों की पहचान कृष्णा आढिले और उनकी पत्नी कीर्ति आढिले के रूप में हुई है। दोनों सारंगढ़ क्षेत्र के निवासी बताए जा रहे हैं। दंपति अपने 4 वर्षीय बेटे के साथ बाइक से कोलेगांव स्थित ससुराल जा रहे थे। इसी दौरान कुण्डा थाना क्षेत्र में सामने से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक को क्रॉस करते समय उनकी बाइक सड़क किनारे गीली मिट्टी में फिसल गई।

हादसे में पति-पत्नी ट्रक के पहिए के नीचे आ गए, जिससे दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं उनका बेटा दूर जा गिरा, जिससे उसे गंभीर चोटें आई हैं। घायल बच्चे को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुण्डा में भर्ती कराया गया, जहां उसका उपचार जारी है।
घटना के बाद ट्रक चालक वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

हादसे से नाराज ग्रामीणों ने घटनास्थल और कुण्डा थाना के पास चक्काजाम कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने सड़क निर्माण एजेंसी और ठेकेदार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि सड़क के किनारे शोल्डर कटिंग में मुरुम की जगह मिट्टी का इस्तेमाल किया गया, जो बारिश के कारण कीचड़ में बदल गई है। इससे लगातार बाइक सवार दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं।

ग्रामीणों ने सड़क निर्माण ठेकेदार को मौके पर बुलाने और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लोगों को समझाने में जुटे रहे, लेकिन प्रदर्शनकारी ठेकेदार के आने तक आंदोलन जारी रखने की बात कहते रहे।

दंतेवाड़ा नक्सली हमले के सभी 11 आरोपी बरी, हाईकोर्ट ने जांच पर उठाए सवाल

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 Chhattisgarh के बहुचर्चित 2010 दंतेवाड़ा नक्सली हमले मामले में बड़ा कानूनी फैसला सामने आया है। Chhattisgarh High Court ने मामले में आरोपित सभी 11 लोगों को बरी कर दिया है। अदालत ने जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य पेश करने में असफल रहा।


यह फैसला चीफ जस्टिस Ramesh Sinha और जस्टिस Ravindra Kumar Agrawal की डिवीजन बेंच ने सुनाया। कोर्ट ने कहा कि इतने बड़े हमले के बावजूद जांच एजेंसियां असली अपराधियों की पहचान तक नहीं कर सकीं।

गौरतलब है कि 6 अप्रैल 2010 को Dantewada जिले के ताड़मेटला और चिंतलनार के जंगलों में नक्सलियों ने सीआरपीएफ और पुलिस के संयुक्त दल पर घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में 75 सीआरपीएफ जवान और एक पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। इसे देश के इतिहास के सबसे बड़े नक्सली हमलों में गिना जाता है।

अपने फैसले में हाईकोर्ट ने जांच में कई गंभीर खामियां बताईं। अदालत ने कहा कि किसी भी आरोपी की पहचान न्यायालय में नहीं हो सकी और न ही टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड (TIP) कराई गई। इसके अलावा फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) रिपोर्ट पेश नहीं की गई और आरोपियों से किसी प्रकार के हथियार की बरामदगी भी नहीं हुई। कोर्ट ने यह भी कहा कि जांच के दौरान कानूनी प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन नहीं किया गया और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ी अधूरी रही।

अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल शक के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अभियोजन पक्ष आरोपियों की भूमिका संदेह से परे साबित करने में विफल रहा, इसलिए सभी आरोपियों को दोषमुक्त किया गया।

फैसले के बाद शहीद जवानों के परिवारों में निराशा का माहौल है। वहीं कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि नक्सल और आतंकी मामलों में तकनीकी जांच, फॉरेंसिक साक्ष्य और गवाहों की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण होती है। शुरुआती जांच में हुई चूक अदालत में पूरे मामले को कमजोर कर देती है।

सोमनाथ धाम पर पीएम मोदी का लेख; कहा- केवल मंदिर नहीं, भारत की अटूट सभ्यता...

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 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

जय सोमनाथ! वर्ष 2026 की शुरुआत में मुझे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में सम्मिलित होने का सौभाग्य मिला। यह सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले आक्रमण के एक हजार वर्ष बाद भी मंदिर के शाश्वत और अविनाशी होने का पर्व था। अब 11 मई को मुझे एक बार फिर सोमनाथ जाने का सुअवसर प्राप्त हो रहा है। इस बार यह यात्रा पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के लोकार्पण की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में है। मैं उस क्षण को फिर जीने जा रहा हूं, जब भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी ने मंदिर का लोकार्पण किया था। उस दिन, सोमनाथ में विध्वंस से सृजन तक की यात्रा फिर से जीवंत होगी। छह महीनों के भीतर सोमनाथ के इतिहास से जुड़े इन दो अत्यंत महत्वपूर्ण पड़ावों का साक्षी बनना मेरे लिए बहुत सौभाग्य की बात है।


सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, हमारी सभ्यता का अटूट संकल्प है। इसके सामने लहराता विशाल समुद्र अनंत काल की अनुभूति कराता है। इसकी लहरें हमें सिखाती हैं कि तूफान चाहे कितने भी विकराल क्यों न हों, मनुष्य का साहस और आत्मबल हर बार फिर से उठ खड़ा होने में सक्षम है। तट से टकराती लहरें सदियों से यह उद्घोष कर रही हैं कि मानवीय चेतना को लंबे समय तक दबाया नहीं जा सकता है।

जिन्हें कोई झुका नहीं पाया
हमारे प्राचीन शास्त्रों में लिखा है: प्रभासं च परिक्रम्य पृथिवीक्रमसंभवम्। अर्थात दिव्य प्रभास (सोमनाथ) की परिक्रमा पूरी पृथ्वी की परिक्रमा के समान है! जब लोग यहां दर्शन-पूजन के लिए आते हैं, तब उन्हें उस सभ्यता की अद्भुत निरंतरता का भी अनुभव होता है, जिसकी ज्योति कभी बुझाई नहीं जा सकी। कई साम्राज्य आए और गए, समय बदला और इतिहास ने ढेरों उतार-चढ़ाव देखे, फिर भी सोमनाथ हमारे हृदय में हमेशा बना रहा।

यह समय उन असंख्य महान विभूतियों के स्मरण का भी है, जो क्रूर आक्रांताओं के सम्मुख अडिग रहे। लकुलीश और सोम शर्मा जैसे मनीषियों ने प्रभास को शैव दर्शन का महान केंद्र बनाया। चक्रवर्ती महाराज धारसेन चतुर्थ ने सदियों पहले वहां दूसरा मंदिर बनवाया था। समय की कठिन परीक्षा के बीच भीम प्रथम, जयपाल और आनंदपाल जैसे शासकों ने आक्रमणों के विरुद्ध अपनी सभ्यता की ढाल बनकर मंदिर की रक्षा की थी।

ऐसा माना जाता है कि महान राजा भोज ने भी इस पावन स्थल के पुनर्निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया था। कर्णदेव सोलंकी और जयसिंह सिद्धराज ने गुजरात की राजनीतिक और सांस्कृतिक शक्ति को पुनर्स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई। भाव बृहस्पति, कुमारपाल सोलंकी और पाशुपताचार्यों ने इस तीर्थ को आराधना और ज्ञान के केंद्र के रूप में स्थापित करने में अमूल्य योगदान दिया। विशालदेव वाघेला और त्रिपुरांतक ने इसकी बौद्धिक और आध्यात्मिक परंपराओं की रक्षा की।

महिपाल चूड़ासमा और राव खंगार चूड़ासमा ने विध्वंस के बाद पूजा-पाठ की परंपरा को पुनर्जीवित किया। पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होल्कर, जिनकी 300वीं जयंती मनाई जा रही है, उन्होंने सबसे चुनौतीपूर्ण समय में भी भक्ति की परंपरा को जीवंत रखा। बड़ौदा के गायकवाड़ों ने तीर्थयात्रियों के अधिकारों की रक्षा की। इसके साथ ही हमारी यह धरती वीर हमीरजी गोहिल, वीर वेगड़ाजी भील जैसे पराक्रमियों से धन्य हुई है। उनके साहस और बलिदान को आज भी याद किया जाता है।

ऐसे पूरा हुआ सरदार का सपना
1940 के दशक में स्वतंत्रता की भावना पूरे भारत में फैल रही थी। सरदार पटेल जैसे महान नेताओं के नेतृत्व में स्वतंत्र भारत की नींव रखी जा रही थी। ऐसे में एक बात जो उन्हें बहुत व्यथित करती थी, वह थी- सोमनाथ की दुर्दशा। 13 नवंबर 1947 को, दिवाली के समय, उन्होंने सोमनाथ के जर्जर अवशेषों के सामने खड़े होकर, समुद्र का जल हाथ में लेकर संकल्प लिया, ‘इस (गुजराती) नववर्ष पर हमारा निश्चय है कि सोमनाथ का पुनर्निर्माण होगा। सौराष्ट्र के लोगों को इसके लिए हर तरह से अपना योगदान देना होगा। यह एक पावन कार्य है, जिसमें हर किसी को भागीदारी निभानी होगी।’ उनके इस आह्वान ने सिर्फ गुजरात ही नहीं, बल्कि संपूर्ण भारतवर्ष को नए उत्साह से भर दिया।

दुर्भाग्यवश, सरदार पटेल अपने उस सपने को साकार होते नहीं देख सके, जिसके लिए उन्होंने स्वयं को समर्पित कर दिया था। इससे पहले कि जीर्णोद्धार के बाद सोमनाथ मंदिर भक्तों के लिए खुलता, उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। इसके बावजूद, प्रभास पाटन की पावन धरती पर उनका प्रभाव निरंतर महसूस किया जाता रहा है। उनके विजन को के.एम. मुंशी ने आगे बढ़ाया, जिन्हें नवानगर के जामसाहेब का समर्थन मिला। 1951 में मंदिर का पुनर्निर्माण पूरा होने पर राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद को उद्घाटन के लिए आमंत्रित किया गया। तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित नेहरू के विरोध के बावजूद, डॉ. प्रसाद ने समारोह में हिस्सा लेकर इसे ऐतिहासिक बना दिया।

श्रद्धा और विश्वास नष्ट नहीं होते
मुझे अक्टूबर 2001 का वह समय आज भी अच्छे से याद है, जब मैंने मुख्यमंत्री के रूप में दायित्व संभाला था। 31 अक्टूबर 2001 को, सरदार पटेल की जयंती के अवसर पर गुजरात सरकार ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की 50वीं वर्षगांठ का भव्य आयोजन किया। इसी समय सरदार पटेल की 125वीं जयंती भी मनाई जा रही थी। इस कार्यक्रम में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी और तत्कालीन गृह मंत्री श्री लालकृष्ण आडवाणी जी की मौजूदगी ने इसे और भी गरिमापूर्ण बना दिया।

11 मई 1951 को अपने भाषण में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा था कि सोमनाथ मंदिर दुनिया को यह संदेश देता है कि अद्वितीय श्रद्धा और विश्वास को कभी नष्ट नहीं किया जा सकता। उन्होंने आशा व्यक्त की, कि यह मंदिर सदैव लोगों के हृदय में बसा रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर के पुनर्निर्माण से सरदार पटेल का सपना साकार हुआ है। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि सरदार पटेल की भावनाओं के अनुरूप लोगों के जीवन में समृद्धि भी लानी होगी। इसको लेकर उनके संदेश अत्यंत प्रेरणादायी रहे हैं।

पिछले एक दशक से हम इसी मार्ग पर चल रहे हैं। ‘विकास भी, विरासत भी’ के मंत्र से प्रेरित होकर सोमनाथ से काशी, कामाख्या से केदारनाथ, अयोध्या से उज्जैन और त्रयंबकेश्वर से श्रीशैलम तक, हमने अपने आध्यात्मिक केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया है। इसके साथ ही उनकी पारंपरिक पहचान को भी बनाए रखा है। आज बेहतर कनेक्टिविटी से ज्यादा से ज्यादा लोग यहां आ पा रहे हैं। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिल रहा है, आजीविका सुरक्षित हो रही है, साथ ही ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना और सशक्त हो रही है।

विभाजित दुनिया को सोमनाथ का संदेश
सोमनाथ की रक्षा और इसके पुनर्निर्माण के लिए जिन्होंने अपना सर्वस्व बलिदान किया, उनका संघर्ष हम कभी नहीं भुला सकते। भारत के विभिन्न हिस्सों से आए लोगों ने इसकी भव्यता और दिव्यता को लौटाने में अपना अद्भुत योगदान दिया। उनकी ऐसी ही आस्था पूरे भारतवर्ष को लेकर भी थी। वे एकता की ऐसी अद्भुत डोर से बंधे थे, जिसे जमीनी सीमाओं में नहीं बांटा जा सकता।

आज की विभाजित दुनिया में, सोमनाथ से मिलने वाली एकता की यह सीख पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है। सोमनाथ अपनी गौरवशाली परंपरा के साथ हमेशा खड़ा रहेगा, क्योंकि यह हमारी साझा सभ्यता का प्रतीक है। इसी गौरव को नमन करते हुए बलिदान देने वाले वीरों की स्मृति में और दानवीरों की उदारता को याद करते हुए अगले एक हजार दिनों तक यहां विशेष पूजा आयोजित की जाएगी। यह देखकर बहुत प्रसन्नता हो रही है कि बड़ी संख्या में लोग इस पुनीत कार्य में अपना योगदान दे रहे हैं।

सोमनाथ हमें याद दिलाता है कि जब कोई समाज अपनी आस्था, अपनी संस्कृति और अपनी एकता से जुड़ा रहता है, तब उसे लंबे समय तक दबाया नहीं जा सकता। आज भी हमारी सबसे बड़ी शक्ति यही साझा चेतना है, यही एकात्म भाव है। यही भावना हमें विभाजन से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में साथ चलने की प्रेरणा देती है।

मैं सभी देशवासियों से आग्रह करता हूं कि इस पावन अवसर पर पवित्र सोमनाथ धाम की यात्रा करें और इसकी भव्यता के साक्षात दर्शन करें। जब आप सोमनाथ के तट पर खड़े होंगे, तब उसकी प्राचीन प्रतिध्वनियों को अपने भीतर महसूस करेंगे। वहां आपको केवल भक्ति का अनुभव नहीं होगा, बल्कि उस सभ्यतागत चेतना की सशक्त धड़कन भी सुनाई देगी, जो कभी रुकी नहीं, जिसकी तीव्रता कभी कम नहीं हुई।

डीआरडीओ और भारतीय वायुसेना ने किया ‘TARA’ हथियार का सफल पहला परीक्षण

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Defence Research and Development Organisation (DRDO) और Indian Air Force (IAF) ने 7 मई 2026 को ओडिशा तट के पास Tactical Advanced Range Augmentation (TARA) हथियार का सफल पहला उड़ान परीक्षण किया।

TARA भारत का पहला स्वदेशी ग्लाइड वेपन सिस्टम है, जो बिना गाइडेड वारहेड्स को अत्याधुनिक प्रिसीजन गाइडेड हथियारों में बदलने की क्षमता रखता है। यह सिस्टम कम लागत में दुश्मन के जमीनी ठिकानों को अधिक सटीकता और ताकत के साथ निशाना बनाने में सक्षम है।

इस अत्याधुनिक प्रणाली को Research Centre Imarat (RCI), हैदराबाद और DRDO की अन्य प्रयोगशालाओं द्वारा विकसित किया गया है। इसमें आधुनिक और कम लागत वाली तकनीकों का उपयोग किया गया है।

TARA परियोजना का निर्माण Development cum Production Partners (DcPP) और कई भारतीय उद्योगों के सहयोग से किया गया है, जिन्होंने इसके उत्पादन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफल परीक्षण पर DRDO, भारतीय वायुसेना और सभी साझेदार उद्योगों को बधाई दी। उन्होंने इसे भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि बताया।

वहीं, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और DRDO के चेयरमैन समीर वी कामत ने भी इस सफल उड़ान परीक्षण से जुड़ी पूरी टीम को शुभकामनाएं दीं।


Met Gala 2026 में छाया ‘मजनू भाई’ का जादू, अनिल कपूर का AI लुक हुआ वायरल

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अनिल कपूर एक बार फिर सोशल मीडिया पर छा गए हैं। इस बार वजह बना उनका मजेदार और अनोखा AI-जनरेटेड Met Gala 2026 लुक, जिसमें उन्होंने फिल्म वेलकम के अपने आइकॉनिक किरदार “मजनू भाई” की मशहूर पेंटिंग को फैशन का हिस्सा बना दिया।

वायरल तस्वीर में अनिल कपूर ब्लैक डिजाइनर आउटफिट में नजर आए, जिसके ऊपर मजनू भाई की फेमस पेंटिंग को खास अंदाज में दिखाया गया था। यह तस्वीर इंटरनेट पर आते ही तेजी से वायरल हो गई और फैंस ने इसे “Met Gala का सबसे एंटरटेनिंग लुक” बताया।

अनिल कपूर ने खुद भी इस तस्वीर को सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए लिखा —
“जब MET Gala मिला मजनू भाई से… कला की कोई सीमा नहीं होती!”

फैंस ने पोस्ट पर मजेदार रिएक्शन दिए। किसी ने लिखा, “मजनू भाई इंटरनेशनल लेवल पर पहुंच गए,” तो किसी ने फिल्म के डायलॉग याद करते हुए कहा, “जिस दिन मैं ब्रश उठाता हूं…”।

करीब 19 साल बाद भी ‘मजनू भाई’ का किरदार और उसकी अजीबोगरीब पेंटिंग आज भी लोगों के बीच उतनी ही लोकप्रिय है। यही वजह है कि AI और फैशन के इस अनोखे कॉम्बिनेशन ने इंटरनेट पर धूम मचा दी।

नासिक TCS धर्मांतरण मामले में बड़ा एक्शन, मुख्य आरोपी निदा खान गिरफ्तार

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 Nashik स्थित Tata Consultancy Services (TCS) से जुड़े कथित धर्मांतरण मामले में फरार चल रही मुख्य आरोपी Nida Khan को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई नासिक पुलिस और Chhatrapati Sambhajinagar पुलिस की संयुक्त टीम ने की। पुलिस अब आरोपी को कोर्ट में पेश करने की तैयारी कर रही है।


पुलिस सूत्रों के मुताबिक, निदा खान को छत्रपति संभाजीनगर के नाइगांव इलाके से गिरफ्तार किया गया। मामला दर्ज होने के बाद से वह लगातार फरार चल रही थी और पुलिस उसकी तलाश में कई स्थानों पर दबिश दे रही थी। करीब 25 दिनों की तलाश के बाद पुलिस को यह सफलता मिली।

25 दिनों से तलाश में जुटी थी SIT

जानकारी के अनुसार, नासिक पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) पिछले कई दिनों से आरोपी की तलाश कर रही थी। गिरफ्तारी से बचने के लिए निदा खान ने अग्रिम जमानत याचिका भी दायर की थी, लेकिन अदालत ने इस महीने की शुरुआत में उसे खारिज कर दिया था।

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया था कि मामले में डिजिटल साक्ष्य, गवाहों के बयान और अन्य अहम जानकारियों की जांच के लिए आरोपी से हिरासत में पूछताछ जरूरी है। जांच एजेंसियों का कहना है कि मामले के तार नासिक के बाहर अन्य शहरों से भी जुड़े हो सकते हैं।

SIT ने अदालत में रखे ये तथ्य

पुलिस आयुक्त के निर्देश पर गठित SIT ने अदालत को बताया कि निदा खान ने कथित तौर पर शिकायतकर्ता को धार्मिक गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया था। जांच में यह भी सामने आया कि पीड़िता को हिजाब और बुर्का पहनने के लिए प्रेरित किया गया तथा उसे धार्मिक सामग्री और मोबाइल एप्लिकेशन भेजे गए थे।

पति से पूछताछ के बाद कई जगह छापेमारी

इससे पहले पुलिस ने आरोपी के पति से भी पूछताछ की थी। पूछताछ के आधार पर कई संभावित ठिकानों पर छापेमारी की गई, लेकिन आरोपी वहां नहीं मिली। पुलिस के मुताबिक, आरोपी और उसके कुछ रिश्तेदारों के मोबाइल फोन भी बंद मिले थे।

फिलहाल पुलिस मामले में आगे की जांच में जुटी हुई है और आरोपी से पूछताछ के बाद कई नए खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

बंगाल में सत्ता परिवर्तन की आहट, विधानसभा भंग, आज चुना जाएगा नया मुख्यमंत्री

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 पश्चिम बंगाल की राजनीति में गुरुवार को बड़ा उलटफेर देखने को मिला। राज्यपाल द्वारा विधानसभा भंग किए जाने के साथ ही 15 साल पुरानी तृणमूल कांग्रेस सरकार का अंत हो गया। इसके साथ ही Mamata Banerjee का मुख्यमंत्री पद भी समाप्त हो गया। अब राज्य में नई सरकार गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है और आज बीजेपी विधायक दल की बैठक में नए नेता का चुनाव होगा।


राज्यपाल R. N. Ravi ने संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत 7 मई 2026 से विधानसभा भंग करने की अधिसूचना जारी की। अधिसूचना जारी होते ही मंत्रिमंडल स्वतः समाप्त हो गया। नई सरकार के शपथ लेने तक राज्य का प्रशासन राजभवन की निगरानी में रहेगा।

सूत्रों के मुताबिक, चुनाव में करारी हार के बाद ममता बनर्जी इस्तीफा देने के पक्ष में नहीं थीं और उन्होंने चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए थे। हालांकि संवैधानिक प्रक्रिया लागू होने के बाद सत्ता परिवर्तन का रास्ता साफ हो गया।

आज बीजेपी विधायक दल की अहम बैठक

भारतीय जनता पार्टी विधायक दल की बैठक आज आयोजित होगी। पार्टी ने केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। बैठक में विधायक दल के नेता का चुनाव किया जाएगा। बताया जा रहा है कि 9 मई सुबह 10 बजे नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित हो सकता है।

चुनाव बाद भी नहीं थम रही हिंसा

चुनावी नतीजों के तीन दिन बाद भी राज्य में राजनीतिक हिंसा जारी है। Howrah के शिवपुर इलाके में गुरुवार को बमबाजी और हिंसक झड़प की घटना सामने आई। बीजेपी ने आरोप लगाया है कि टीएमसी कार्यकर्ताओं ने भाजपा समर्थकों पर हमला किया।

वहीं Panihati में देर रात हुए बम धमाके में बीजेपी के पांच कार्यकर्ता घायल हो गए। यह घटना विपक्ष के नेता Suvendu Adhikari के करीबी सहयोगी चंद्रनाथ रथ की हत्या के कुछ घंटों बाद हुई।

घायलों को इलाज के लिए R. G. Kar Medical College and Hospital में भर्ती कराया गया है। पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है।

विशेष लेख-सेवा सेतु- छत्तीसगढ़ में सुशासन और डिजिटल क्रांति का नया अध्याय

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जन-केंद्रित बनाने की दिशा में “सेवा सेतु” एक गेम-चेंजर पहल साबित हो रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रशासनिक सेवाओं को नागरिकों की उंगलियों तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी विजन का परिणाम है कि आज आय, जाति, निवास प्रमाण-पत्र से लेकर राशन कार्ड और भू-नक़ल तक की 441 से अधिक सेवाएं एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। डिजिटल युग में सुशासन का असली अर्थ है सेवाओं का सरलीकरण और समयबद्धता। “सेवा सेतु” इसी सोच को साकार कर रहा है, जो छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक पहचान को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार है।

डिजिटल सुशासन- कार्यालयों के चक्करों से मिली मुक्ति

एक समय था जब नागरिकों को प्रमाण-पत्र बनवाने जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए अलग-अलग सरकारी कार्यालयों की दौड़ लगानी पड़ती थी। इसमें न केवल समय और श्रम की बर्बादी होती थी, बल्कि बिचौलियों का डर भी बना रहता था। “सेवा सेतु” ने इस पारंपरिक ढर्रे को बदलते हुए “वन स्टॉप सॉल्यूशन” पेश किया है। अब नागरिक घर बैठे या नजदीकी लोक सेवा केंद्र से ऑनलाइन आवेदन कर निर्धारित समय-सीमा में सेवाओं का लाभ ले रहे हैं। तकनीकी उन्नयन की दिशा में राज्य ने लंबी छलांग लगाई है। छत्तीसगढ़ के पुराने ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर जहाँ केवल 86 सेवाएं उपलब्ध थीं, वहीं नए और उन्नत “सेवा सेतु” प्लेटफॉर्म पर अब 441 सेवाएं लाइव हैं।

इस पोर्टल पर 30 से अधिक विभागों को एक साथ जोड़ा गया है

इस नई सेवा में 54 नई सेवाओं के साथ विभिन्न विभागों की 329 री-डायरेक्ट सेवाओं का सफल एकीकरण किया गया है, जिससे नागरिकों को अलग-अलग पोर्टल्स पर भटकना नहीं पड़ता। छत्तीसगढ़ लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत समय-सीमा में सेवा देना अब केवल कागजी नियम नहीं, बल्कि हकीकत है। पिछले 28 महीनों के आंकड़े इसकी सफलता की कहानी बयां करते हैं। कुल  75 लाख 70 हजार से अधिक आवेदनों में से 68 लाख 41 हजार से अधिक मामले का निराकरण किया जा चुका है। इस प्रकार 95 प्रतिशत से अधिक आवेदनों का निपटारा तय समय-सीमा के भीतर किया गया।

प्रमाण-पत्रों की डिजिटल सुलभता

आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक मांग बुनियादी प्रमाण-पत्रों की रही है। चिप्स (ब्भ्पच्ै) कार्यालय के मुताबिक आय प्रमाण-पत्ररू 32 लाख से अधिक आवेदन, मूल निवास, जाति प्रमाण-पत्र, विवाह पंजीयन और भू-नक़ल सेवाओं का भी बड़े पैमाने पर डिजिटल उपयोग हुआ है।

व्हाट्सएप और डिजिटल ट्रांजेक्शन- पहुँच हुई और भी आसान

तकनीक को जन-जन तक पहुँचाने के लिए अब “सेवा सेतु” को व्हाट्सएप से भी जोड़ दिया गया है। डिजिटल इंडिया की अवधारणा को धरातल पर उतारते हुए इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से अब तक 3.3 करोड़ से अधिक डिजिटल ट्रांजेक्शन किए जा चुके हैं।

पारदर्शिता और विश्वास का नया मॉडल

“सेवा सेतु” केवल एक तकनीकी पोर्टल नहीं, बल्कि सरकार और जनता के बीच विश्वास का सेतु है। इलेक्ट्रॉनिक वर्कफ्लो प्रणाली के कारण अब हर आवेदन की रीयल-टाइम निगरानी संभव है, जिससे अनावश्यक देरी और भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म हुई है। यदि इसी गति से सुधार जारी रहा, तो छत्तीसगढ़ का यह मॉडल भविष्य में देश के अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा बन सकता है।

सुशासन तिहार: उलखर और बड़े नावापारा में उमड़ा जनसैलाब,मौके पर ही निराकृत हुई ग्रामीणों की समस्याएं

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​रायपुर- ​छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी पहल 'सुशासन तिहार 2026' के माध्यम से प्रशासन और जनता के बीच की दूरी कम होती नजर आ रही है। इसी कड़ी में सारंगढ़ ब्लॉक के ग्राम उलखर और बरमकेला विकासखंड के ग्राम बड़े नावापारा में  शिविरों का आयोजन किया गया, जहां 1400 से अधिक ग्रामीणों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य सरकारी योजनाओं को सीधे आमजन तक पहुंचाना और उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान करना था। उलखर शिविर में जहां 638 आवेदन प्राप्त हुए, वहीं बड़े नावापारा में 836 ग्रामीणों ने अपनी मांगों और शिकायतों के निराकरण हेतु पंजीयन कराया।

कलेक्टर  ने दोनों ही शिविरों का बारीकी से निरीक्षण किया और अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्राप्त आवेदनों का निपटारा प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। उन्होंने विभिन्न विभागों के स्टॉलों का अवलोकन कर यह जानने का प्रयास किया कि ग्रामीणों को किन क्षेत्रों में सबसे अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। शिविर के दौरान स्वास्थ्य और आयुर्वेद विभाग ने नि:शुल्क जांच शिविर लगाया, वहीं मत्स्य विभाग द्वारा जाल वितरण और समाज कल्याण विभाग द्वारा दिव्यांग प्रमाण पत्र व पेंशन जैसी सुविधाएं तत्काल प्रदान की गईं। राजस्व विभाग ने किसान पुस्तिका और बी-1 के वितरण में तत्परता दिखाई, तो खाद्य विभाग ने पात्र हितग्राहियों को नए राशन कार्ड सौंपे। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत स्वीकृति और पूर्णता प्रमाण पत्र मिलने से कई परिवारों के अपने घर का सपना साकार हुआ।

प्रशासनिक कार्यों के साथ-साथ यह शिविर सामाजिक सरोकारों का भी गवाह बना। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा गर्भवती महिलाओं की गोदभराई कर उन्हें उपहार दिए गए और छोटे बच्चों का अन्नप्राशन संस्कार संपन्न कराया गया। स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के स्टॉल लगाए गए, जिन्होंने ग्रामीणों का मन मोह लिया। पर्यावरण संरक्षण के प्रति सजगता दिखाते हुए कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों ने जल बचाने की सामूहिक शपथ ली। इस सफल आयोजन में क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों सहित विभिन्न विभागों के कर्मचारियों ने एकजुट होकर कार्य किया, जिससे शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम छोर के व्यक्ति तक सुगमता से पहुंच सका।

विशेष-लेख- बस्तर में बैंकिंग क्रांति - विश्वास, विकास और बदलाव की नई इबारत

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नक्सलमुक्त बस्तर में विकास की नई धारा-  बैंकिंग विस्तार से मजबूत हो रही अर्थव्यवस्था

31 नई बैंक शाखाओं के साथ बस्तर में आर्थिक सशक्तिकरण का नया अध्याय

रायपुर- एक समय नक्सल हिंसा और विकास की चुनौतियों के लिए पहचाने जाने वाला बस्तर अब बदल चुका है। आज बस्तर शांति, विश्वास, सुशासन और विकास की नई पहचान बन रहा है। नक्सलमुक्त होते बस्तर में अब सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, इंटरनेट और बैंकिंग जैसी बुनियादी सुविधाएं तेजी से विस्तार पा रही हैं। कभी बैंकिंग सुविधाओं के अभाव, नकदी आधारित अर्थव्यवस्था और सीमित वित्तीय पहुंच के लिए पहचाने जाने वाले बस्तर संभाग में अब परिवर्तन की नई कहानी लिखी जा रही है। इसी परिवर्तन का सबसे मजबूत उदाहरण है पिछले ढाई वर्षों में बस्तर संभाग में 31 नई बैंक शाखाओं का खुलना। विष्णु देव साय की सरकार के गठन के बाद बस्तर में बैंकिंग सुविधाओं के विस्तार को नई गति मिली है। दूरस्थ और पूर्व में प्रभावित रहे क्षेत्रों तक बैंकिंग सेवाओं की पहुंच ने यह साबित किया है कि अब बस्तर विकास की मुख्यधारा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह नया बस्तर है, जहां बंदूक की आवाज नहीं, बल्कि विकास, विश्वास और समृद्धि की नई गूंज सुनाई दे रही है।

बैंक शाखाएं नहीं, विकास के नए द्वार

दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में बैंक शाखाओं की स्थापना ग्रामीण जीवन में व्यापक बदलाव लेकर आ रही है। पहले लोगों को छोटी-छोटी बैंकिंग जरूरतों के लिए जिला मुख्यालय या अन्य कस्बों तक लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। कई गांवों के लोगों को पूरा दिन खर्च कर बैंक पहुंचना पड़ता था। अब गांवों और ब्लॉक स्तर तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचने से न केवल समय और संसाधनों की बचत हो रही है, बल्कि लोगों का औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जुड़ाव भी बढ़ रहा है, इससे शासन की योजनाओं का लाभ सीधे हितग्राहियों के खातों में पहुंच रहा है और पारदर्शिता मजबूत हुई है।

बैंकिंग नेटवर्क बना नए बस्तर की पहचान

बस्तर संभाग के गांवों और कस्बों में बैंक शाखाओं का खुलना केवल वित्तीय संस्थाओं का विस्तार नहीं, बल्कि बदलते सामाजिक और आर्थिक परिवेश का प्रतीक है। जिन क्षेत्रों में कभी मूलभूत सेवाएं पहुंचाना चुनौती माना जाता था, वहां आज आधुनिक बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं। पिछले ढाई वर्षों में बस्तर संभाग में 31 नई बैंक शाखाएं शुरू हुई हैं, इनमें बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, कांकेर, कोंडागांव और बस्तर जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्रों तक बैंकिंग सेवाओं का विस्तार हुआ है। तर्रेम, जगरगुंडा, चिंतलनार, किस्टाराम, पामेड़, समलवार और कोहकामेटा जैसे क्षेत्रों में बैंक शाखाओं का खुलना विकास और विश्वास दोनों का प्रतीक बन गया है।

नक्सलमुक्त बस्तर में बढ़ा विश्वास

बस्तर में शांति और सुरक्षा का वातावरण मजबूत होने के साथ अब विकास कार्यों को नई गति मिली है। बैंक शाखाओं का विस्तार यह दर्शाता है कि अब शासन और जनता के बीच विश्वास पहले से अधिक मजबूत हुआ है। जहां कभी लोगों को बैंकिंग कार्यों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, वहीं अब गांवों और ब्लॉक स्तर पर ही बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं। इससे आम नागरिकों का जीवन आसान हुआ है और वे औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से तेजी से जुड़ रहे हैं। आज बस्तर के ग्रामीण बैंक खातों, डिजिटल भुगतान, किसान कृषि ऋण, बीमा, पेंशन और स्वरोजगार योजनाओं का लाभ आसानी से ले पा रहे हैं, इससे आर्थिक गतिविधियों में पारदर्शिता और आत्मनिर्भरता दोनों बढ़ी हैं।

आदिवासी अंचलों को मिला आर्थिक संबल

 बस्तर संभाग की बड़ी आबादी आदिवासी समुदाय की है। बैंकिंग नेटवर्क के विस्तार से आदिवासी परिवारों को अब सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है, जिससे योजनाओं को लाभ सीधे हितग्राहियों के खाते में (डी बीटी के माध्यम) मिल रहा है। प्रधानमंत्री जनधन योजना, किसान सम्मान निधि, तेंदूपत्ता बोनस, वन धन योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन और अन्य डीबीटी के माध्यम से योजनाओं की राशि सीधे लाभार्थियों तक पहुंच रही है, इससे बिचौलियों की भूमिका कम हुई है और पारदर्शी व्यवस्था मजबूत हुई है। महिला स्व-सहायता समूहों को भी बैंकिंग सुविधाओं से बड़ी लाभ मिली है। समूहों को ऋण सुविधा मिलने से आजीविका गतिविधियों और छोटे उद्यमों को नई गति मिली है।स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिल रही नई ताकत

31 नई बैंक शाखाओं के खुलने से बस्तर की स्थानीय अर्थव्यवस्था को नया आधार मिला है। अब छोटे व्यापारियों, किसानों और युवाओं को वित्तीय सहायता आसानी से उपलब्ध हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में नकदी आधारित व्यवस्था की जगह डिजिटल लेनदेन तेजी से बढ़ रहा है। यूपीआई, मोबाइल बैंकिंग, माइक्रो एटीएम और आधार आधारित भुगतान जैसी सुविधाएं गांवों तक पहुंच चुकी हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था अधिक संगठित और पारदर्शी बन रही है। बैंकिंग सुविधाओं के विस्तार से बाजार गतिविधियां बढ़ी हैं और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं।

युवाओं और स्वरोजगार को बढ़ावा

बस्तर में बैंकिंग नेटवर्क मजबूत होने से युवाओं के लिए स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसर बढ़े हैं। बैंक ऋण और वित्तीय सहायता मिलने से युवा अब कृषि आधारित उद्योग, लघु व्यवसाय, सेवा क्षेत्र और स्टार्टअप गतिविधियों की ओर आगे बढ़ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राहक सेवा केंद्र, बैंक मित्र और डिजिटल बैंकिंग सेवाओं के माध्यम से स्थानीय युवाओं की भागीदारी भी बढ़ी है। इससे आर्थिक गतिविधियों में स्थानीय स्तर पर नई ऊर्जा दिखाई दे रही है।

विकास और सुशासन का नया मॉडल बनता बस्तर

बस्तर में बैंकिंग विस्तार यह दर्शाता है कि अब यह क्षेत्र केवल सुरक्षा के नजरिए से नहीं, बल्कि विकास और संभावनाओं के केंद्र के रूप में उभर रहा है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, मोबाइल नेटवर्क और बैंकिंग जैसी सुविधाओं का तेजी से विस्तार यह साबित कर रहा है कि नक्सलमुक्त बस्तर अब आत्मनिर्भरता और समग्र विकास की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है। पिछले ढाई वर्षों में 31 नई बैंक शाखाओं का खुलना केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि बदलते बस्तर की नई तस्वीर है- जहां विश्वास है, अवसर हैं और विकास की नई संभावनाएं हैं।

नया बस्तर- विकास, विश्वास और आत्मनिर्भरता की ओर

आज बस्तर बदल रहा है। गांवों तक पहुंचती बैंकिंग सेवाएं यह संदेश दे रही हैं कि अब विकास अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है। नक्सलमुक्त बस्तर में मजबूत होता बैंकिंग नेटवर्क आने वाले समय में क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था, सामाजिक स्थिरता और आत्मनिर्भरता की सबसे बड़ी ताकत बनने जा रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की बड़ी सौगात: जशपुर में श्री नदी पर बनेगा उच्च स्तरीय पुल, तीन राज्यों की कनेक्टिविटी होगी मजबूत

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9 करोड़ 45 लाख की लागत से बनेगा श्री नदी पर  उच्च स्तरीय पुल  

  झारखंड और ओडिशा राज्य को जोड़ने वाले मार्ग पर आवागमन होगा आसान  

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले को एक और महत्वपूर्ण विकास परियोजना की सौगात मिली है। राज्य शासन द्वारा वर्ष 2025-26 के बजट अंतर्गत कुनकुरी-तपकरा-लवाकेरा मार्ग पर श्री नदी में उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग निर्माण कार्य के लिए 9 करोड़ 45 लाख 85 हजार रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है।

यह मार्ग छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। उच्च स्तरीय पुल के निर्माण से तीनों राज्यों के बीच आवागमन अधिक सुरक्षित, सुगम और निर्बाध हो सकेगा। साथ ही व्यापार, परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।

वर्तमान में इस मार्ग पर स्थित सकरा पुल बरसात के मौसम में बड़ी समस्या बन जाता था। जलस्तर बढ़ने पर आवागमन बाधित हो जाता था और ग्रामीणों एवं राहगीरों को जोखिम उठाकर यात्रा करनी पड़ती थी। लंबे समय से क्षेत्रवासी उच्च स्तरीय पुल निर्माण की मांग कर रहे थे। अब प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद क्षेत्र में खुशी का माहौल है।

स्थानीय ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार सीमावर्ती एवं ग्रामीण क्षेत्रों में अधोसंरचना विकास को प्राथमिकता देते हुए लगातार जनहितकारी कार्य कर रही है। पुल निर्माण से हजारों लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलेगी और क्षेत्रीय विकास को नई दिशा मिलेगी।

क्षेत्रवासियों का मानना है कि श्री नदी पर बनने वाला यह उच्च स्तरीय पुल जशपुर जिले के लिए विकास का नया द्वार साबित होगा तथा राज्य के दूरस्थ अंचलों को बेहतर संपर्क सुविधा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

सुशासन तिहार 2026: त्रिवेणी रात्रे का पक्के घर का सपना हुआ पूरा

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जनसमस्या निवारण शिविर में मिली प्रधानमंत्री आवास योजना की चाबी, चेहरे पर आई खुशी

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार आयोजित “सुशासन तिहार 2026” आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित, पारदर्शी एवं संवेदनशील समाधान का प्रभावी माध्यम बनता जा रहा है। जिले के विभिन्न ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकायों में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविरों के माध्यम से शासन की योजनाओं का लाभ सीधे जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाया जा रहा है।

इसी क्रम में जांजगीर-चांपा जिले के जनपद पंचायत अकलतरा अंतर्गत ग्राम तिलई में आयोजित शिविर में ग्राम मुरलीडीह निवासी त्रिवेणी रात्रे को प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत पक्के मकान की चाबी प्रदान की गई। वर्षों से पक्के घर का सपना देख रही त्रिवेणी रात्रे के लिए यह अवसर बेहद खुशी और संतोष लेकर आया।

त्रिवेणी रात्रे ने बताया कि उनका परिवार पहले कच्चे मकान में निवास करता था, जहां बारिश के दौरान पानी टपकने और गर्मी के मौसम में अत्यधिक परेशानी का सामना करना पड़ता था। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान मिलने से अब उनका परिवार सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण में जीवन यापन कर रहा है।

उन्होंने कहा कि पक्का घर मिलने से परिवार में आत्मविश्वास बढ़ा है और अब वे स्वयं को अधिक सुरक्षित महसूस कर रही हैं।

रात्रे ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सुशासन तिहार आम लोगों के लिए राहत और खुशियों का माध्यम बनकर सामने आया है तथा शासन की योजनाओं का लाभ अब सीधे पात्र हितग्राहियों तक पहुंच रहा है।

भारत में स्वदेशी टाइप-IV CNG कंपोजिट सिलेंडर निर्माण सुविधा स्थापित करने हेतु TDB और NTF Energy Solutions के बीच समझौता

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भारत सरकार के स्वच्छ ऊर्जा गतिशीलता को बढ़ावा देने, कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने तथा आत्मनिर्भर भारत के अंतर्गत स्वदेशी विनिर्माण को सशक्त करने के दृष्टिकोण के अनुरूप, प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST), भारत सरकार ने दिल्ली स्थित M/s NTF Energy Solutions Private Limited के साथ “टाइप-IV CNG सिलेंडर के व्यावसायीकरण हेतु विनिर्माण सुविधा की स्थापना” नामक परियोजना के लिए एक समझौता किया है।

इस परियोजना का उद्देश्य उन्नत विनिर्माण सुविधा स्थापित करना है, जिसके माध्यम से अत्याधुनिक फिलामेंट वाइंडिंग, ब्लो मोल्डिंग और उच्च-दबाव परीक्षण तकनीकों का उपयोग कर स्वदेशी रूप से विकसित टाइप-IV कंपोजिट CNG सिलेंडरों का उत्पादन और व्यावसायीकरण किया जाएगा। यह पहल स्वच्छ परिवहन और उभरते ऊर्जा अनुप्रयोगों के लिए उन्नत गैस भंडारण प्रणालियों में भारत की घरेलू क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

टाइप-IV कंपोजिट सिलेंडर पारंपरिक इस्पात सिलेंडरों का अगली पीढ़ी का विकल्प हैं, जो लगभग 75% तक वजन में कमी प्रदान करते हैं, जिससे वाहन की दक्षता बढ़ती है और कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आती है। इन सिलेंडरों में जंग-रोधी पॉलिमर लाइनर, अनुकूलित CFRP ले-अप और उन्नत मैकेनिकल लॉकिंग सिस्टम का उपयोग किया गया है, जो सुरक्षा, टिकाऊपन तथा रिसाव, कंपन और दबाव चक्रों के प्रति प्रतिरोध को बढ़ाते हैं। इनका डिज़ाइन 600 बार से अधिक बर्स्ट प्रेशर प्राप्त करता है, जो नियामक मानकों से काफी अधिक है और संचालन सुरक्षा को मजबूत बनाता है।

यह तकनीक NTF Energy Solutions Pvt. Ltd. द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित की गई है और इसे भारत के तेजी से बढ़ते CNG मोबिलिटी इकोसिस्टम को समर्थन देने के लिए डिजाइन किया गया है। यह परियोजना सरकार के स्वच्छ परिवहन, स्वच्छ ईंधन और उन्नत मोबिलिटी घटकों के स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा देने के व्यापक लक्ष्य के अनुरूप है।

प्रस्तावित सुविधा स्थानीय रूप से उपलब्ध कच्चे माल और उन्नत विनिर्माण प्रक्रियाओं का उपयोग कर उच्च-दबाव कंपोजिट सिलेंडरों के लिए एक लागत-प्रतिस्पर्धी और भविष्य-उन्मुख उत्पादन प्रणाली विकसित करेगी। यह परियोजना आयात प्रतिस्थापन, तकनीकी आत्मनिर्भरता और देश में एक मजबूत स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

इस अवसर पर TDB के सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा, “उन्नत टाइप-IV कंपोजिट सिलेंडरों का विकास और व्यावसायीकरण भारत के स्वच्छ गतिशीलता ढांचे और स्वदेशी विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। NTF Energy Solutions को TDB का समर्थन सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके तहत वह सतत परिवहन, ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भर भारत में योगदान देने वाली अगली पीढ़ी की तकनीकों को सक्षम बना रही है।”

NTF Energy Solutions Pvt. Ltd. के प्रबंध निदेशक नवीन जैन और निदेशक नमन जैन ने TDB के समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि यह सहायता स्वदेशी हल्के कंपोजिट सिलेंडर तकनीकों के व्यावसायीकरण को तेज करेगी, जिससे कंपनी भारत के स्वच्छ और अधिक दक्ष गतिशीलता समाधान की दिशा में संक्रमण में योगदान दे सकेगी।

भारत-वियतनाम ने विज्ञान और तकनीक सहयोग को दी नई गति, जितेंद्र सिंह और वियतनाम मंत्री के बीच अहम बैठक

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केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने नई दिल्ली में वियतनाम के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री वु हाई क्वान के साथ द्विपक्षीय बैठक की। बैठक में दोनों देशों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, रोबोटिक्स, बायोटेक्नोलॉजी और स्टार्टअप इकोसिस्टम जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत और वियतनाम के बीच लगभग दो हजार वर्षों पुराने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंध हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री फाम मिन्ह चिन्ह की वर्ष 2024 में भारत यात्रा के बाद दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती मिली है।

बैठक में स्टार्टअप सहयोग, रिसर्च पार्टनरशिप, तकनीकी नवाचार और संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। दोनों देशों ने विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में नियमित सहयोग जारी रखने और साझा विकास के लिए ठोस पहल करने पर सहमति व्यक्त की।


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