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वीबी जी राम जी योजना के अंतर्गत प्रत्येक जिले में तेज़ी से हो रहे रोजगार, जल संरक्षण एवं हरित विकास के कार्य

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एमसीबी जिले में मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान एवं ‘एक पेड़ मां के नाम’ कार्यक्रम का किया शुभारंभ

52 एकड़ में विकसित हो रहा समेकित जल संरक्षण मॉडल, लगभग 200 लाख लीटर भू-जल रिचार्ज क्षमता हुई विकसित

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं उपमुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM-G) के अंतर्गत पूरे प्रदेश में रोजगार सृजन, जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन तथा हरित विकास के कार्यों को व्यापक गति मिली है। ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान के माध्यम से राज्य सरकार जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप दे रही है। अभियान के तहत प्रदेशभर में लाखों मानव-दिवस का रोजगार सृजित होने के साथ-साथ जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण कर भू-जल संवर्धन की दिशा में प्रभावी कार्य किए जा रहे हैं।


इसी क्रम में जिला मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) के जनपद पंचायत खड़गवां अंतर्गत ग्राम पंचायत बरदर में जन सम्मेलन, ‘एक पेड़ मां के नाम’ वृहद वृक्षारोपण एवं ‘मोर गांव-मोर पानी’ जनभागीदारी कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री तथा मनेन्द्रगढ़ विधायक श्याम बिहारी जायसवाल ने वृक्षारोपण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने स्वयं कंटूर ट्रेंच की खुदाई कर जल संरक्षण का संदेश दिया और कहा कि जल संरक्षण केवल आज की आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने ग्रामीणों से अधिकाधिक जनभागीदारी के साथ जल संरक्षण एवं वृक्षारोपण अभियान को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।

ग्राम पंचायत बरदर में 52 एकड़ क्षेत्र में समेकित जल संरक्षण एवं हरित विकास मॉडल विकसित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत 30 एकड़ क्षेत्र में कंटूर ट्रेंच एवं अन्य जल संरक्षण कार्यों के माध्यम से वर्षाजल के संग्रहण और भू-जल संवर्धन की व्यवस्था विकसित की गई है, जबकि 22 एकड़ क्षेत्र में लगभग 2,000 फलदार एवं अन्य पौधों का रोपण प्रारंभ किया गया है। जल संरक्षण और हरित विकास का यह मॉडल ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण बनेगा।


‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान के अंतर्गत किए गए कार्यों से इस क्षेत्र में लगभग 200 लाख लीटर भू-जल रिचार्ज क्षमता विकसित हुई है। इससे भविष्य में सिंचाई, पेयजल उपलब्धता, कृषि उत्पादकता तथा पर्यावरण संरक्षण को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।

उल्लेखनीय है कि राज्य शासन द्वारा VB-G RAM-G के माध्यम से प्रदेश के सभी जिलों में जल संरक्षण, वृक्षारोपण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, ग्रामीण अधोसंरचना निर्माण तथा आजीविका संवर्धन के कार्यों को प्राथमिकता के साथ संचालित किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य जनभागीदारी के माध्यम से प्रत्येक ग्राम पंचायत को जल-सुरक्षित, हरित एवं आत्मनिर्भर बनाना है।

'चिरायु' की सतर्कता से थमी नहीं त्रिशांत के दिल की धड़कन; आरबीएसके ने मासूम को दिया नया जीवन

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धमतरी के 10 वर्षीय त्रिशांत का हुआ सफल और पूर्णतः निःशुल्क हृदय ऑपरेशन

लाडले को स्वस्थ देख परिजनों की आंखों में छलके खुशी के आंसू

​रायपुर- कहते हैं कि अगर सही समय पर सही मदद मिल जाए, तो किसी के जीवन की डूबती कश्ती को भी किनारा मिल जाता है। छत्तीसगढ़ शासन की संवेदनशीलता और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के अंतर्गत संचालित 'चिरायु योजना' धमतरी जिले के ग्राम सिंधौरीखुर्द निवासी 10 वर्षीय त्रिशांत यादव के लिए साक्षात वरदान साबित हुई है। चिरायु टीम की सतर्कता ने न सिर्फ एक मासूम को जन्मजात गंभीर बीमारी के चंगुल से छुड़ाया, बल्कि एक गरीब परिवार को जीवनभर का दर्द झेलने से भी बचा लिया।

स्कूल में जांच के दौरान खुली बीमारी की परत

​धमतरी जिले के कुरूद विकासखंड के सिंधौरीखुर्द का रहने वाला छात्र त्रिशांत रोज की तरह स्कूल जाता था। माता-पिता को अंदाजा भी नहीं था कि उनके लाडले के भीतर जन्मजात हृदय रोग (Congenital Heart Disease - CHD) पनप रहा है। ​तभी स्कूलों में चल रहे नियमित स्वास्थ्य परीक्षण अभियान के तहत चिरायु टीम कुरूद त्रिशांत के स्कूल पहुंची। परीक्षण के दौरान डॉक्टरों ने त्रिशांत के दिल की धड़कनों में असमानता महसूस की। टीम ने मामले की गंभीरता को भांपते हुए बिना देर किए परिजनों से संपर्क किया और उन्हें उच्च स्तरीय जांच की सलाह दी।

जिला अस्पताल से रायपुर तक त्वरित एक्शन

चिरायु टीम की संवेदनशीलता यहीं खत्म नहीं हुई। परिजनों की सहमति लेकर बच्चे को जिला अस्पताल धमतरी भेजा गया, जहाँ विशेषज्ञ डॉक्टरों ने पुष्टि की कि त्रिशांत के दिल में जन्मजात समस्या है और जल्द से जल्द ऑपरेशन जरूरी है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के मार्गदर्शन में चिरायु टीम ने कागजी प्रक्रियाओं और रेफरल को इतनी तेजी से पूरा किया कि बच्चे को बिना किसी रुकावट के रायपुर के प्रतिष्ठित एमएमआई (MMI) हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। बीते 8 जुलाई 2026 को विशेषज्ञ सर्जन्स की टीम ने त्रिशांत के दिल का सफल ऑपरेशन किया। आज वह पूरी तरह स्वस्थ है और डॉक्टरों की निगरानी में तेजी से सामान्य जीवन की ओर लौट रहा है।

​पहचान से लेकर घर वापसी तक

इस पूरी सफलता की कहानी को चिरायु टीम ने इन पांच चरणों में अमलीजामा पहनाया। ​राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत 'चिरायु टीम' की कार्यप्रणाली केवल एक चिकित्सीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा का एक जीवंत सफरनामा है। इसकी शुरुआत समय पर पहचान से होती है, जहाँ टीम के डॉक्टर स्कूलों में आयोजित स्वास्थ्य शिविरों के दौरान बच्चों के भीतर छिपे शुरुआती लक्षणों को पूरी सतर्कता से पकड़ते हैं। बीमारी की आशंका होते ही टीम त्वरित परामर्श का मोर्चा संभालती है और परिजनों को बिना डराए, बेहद आत्मीयता के साथ बीमारी की गंभीरता समझाकर उन्हें आगे के इलाज के लिए मानसिक रूप से तैयार करती है।

परिजनों की सहमति मिलते ही शुरू होता है निःशुल्क रैफरल का सिलसिला, जिसके तहत धमतरी से लेकर रायपुर तक के इलाज की पूरी रूपरेखा तैयार की जाती है और तमाम कागजी औपचारिकताओं का पूरा जिम्मा चिरायु टीम खुद उठाती है, ताकि गरीब परिवार पर कोई बोझ न पड़े। इसी तत्परता का सुखद परिणाम 8 जुलाई 2026 को सफल सर्जरी के रूप में सामने आया, जब रायपुर के विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा मासूम का पूर्णतः निःशुल्क और कामयाब हार्ट ऑपरेशन किया गया। चिरायु का यह मिशन अस्पताल तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि ऑपरेशन के बाद सतत फॉलो-अप के जरिए डिस्चार्ज के बाद भी बच्चे की सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित की जाती है और उसके पूर्ण रूप से स्वस्थ होने तक सेहत की लगातार मॉनिटरिंग की जाती है।"

लाखों का इलाज मुफ़्त हुआ, सरकार ने बचा ली हमारे घर की खुशियां

त्रिशांत के माता-पिता भावुक होकर बताते हैं कि हार्ट की बीमारी का नाम सुनकर ही हमारे पैर तले जमीन खिसक गई थी। हम ठहरे गरीब लोग, इतना महंगा इलाज हमारे बूते से बाहर था। अगर चिरायु की टीम स्कूल न आती, तो हमें कभी पता ही नहीं चलता। हम मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य विभाग को कोटि-कोटि धन्यवाद देते हैं, जिन्होंने हमारे बच्चे को नया जीवन दिया और हमारे घर की खुशियां लौटा दीं।

सिर्फ जांच नहीं, स्वस्थ भविष्य की गारंटी है 'आरबीएसके'

धमतरी जिले में चिरायु टीम का यह समर्पित प्रयास इस बात का जीवंत उदाहरण है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की स्वास्थ्य योजनाएं सिर्फ फाइलों या जांच तक सीमित नहीं हैं। यह कार्यक्रम बच्चों में जन्मजात विकारों, बीमारियों की पहचान करने से लेकर उनके पूर्णतः ठीक होने तक एक सुरक्षा कवच की तरह काम कर रहा है, जो छत्तीसगढ़ के नौनिहालों के सुरक्षित कल की मजबूत बुनियाद रख रहा है।

24 घंटे में मिली ट्राइसाइकिल, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की संवेदनशील पहल से दिव्यांग गणेश राम यादव के जीवन को मिली नई रफ्तार

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मार्मिक समाचार पर मुख्यमंत्री ने लिया तत्काल संज्ञान, शासकीय अवकाश के बावजूद सक्रिय रहा प्रशासन

समाज कल्याण विभाग ने जनपद पंचायत धरमजयगढ़ के माध्यम से पहुंचाई सहायता, आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़े गणेश राम यादव

प्रतिमाह मिलती है दिव्यांग पेंशन: राशन कार्ड के माध्यम से नियमित रूप से खाद्यान्न हो रहा उपलब्ध

महतारी वंदन योजना का मिल रहा परिवार को लाभ

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में सुशासन, संवेदनशीलता और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की कार्यसंस्कृति एक बार फिर धरातल पर देखने को मिली। रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ विकासखंड के ग्राम कमोसिनडांड निवासी जन्म से दिव्यांग गणेश राम यादव के संघर्षपूर्ण जीवन को लेकर प्रकाशित एक मार्मिक समाचार पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने तत्काल संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन को बिना किसी विलंब के शासकीय योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग ने अभूतपूर्व तत्परता दिखाते हुए मात्र 24 घंटे के भीतर गणेश राम यादव के लिए ट्राइसाइकिल उपलब्ध करा दी। यह पूरी प्रक्रिया रविवार के शासकीय अवकाश के दिन भी पूरी की गई, जो राज्य सरकार की संवेदनशील और जवाबदेह कार्यप्रणाली का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आई है।

मुख्यमंत्री के निर्देश मिलते ही समाज कल्याण विभाग और जिला प्रशासन सक्रिय हो गया। विभागीय अधिकारियों की टीम जनपद पंचायत धरमजयगढ़ पहुंची और वहां से ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पूरी की गई। प्रशासनिक दल गणेश राम यादव के घर भी पहुंचा, जहां उनके परिवार के सदस्यों, उनकी भाभी तथा वार्ड पंच से चर्चा की गई। उस समय गणेश राम यादव घर पर मौजूद नहीं थे, इसलिए उनके बड़े भाई विचित्र यादव को ट्राइसाइकिल सौंपते हुए यह जानकारी दी गई कि गणेश राम के घर लौटते ही उन्हें यह ट्राइसाइकिल उपलब्ध करा दी जाए।

उल्लेखनीय है कि धरमजयगढ़ क्षेत्र से हाल ही में गणेश राम यादव की एक मार्मिक तस्वीर सामने आई थी, जिसमें वे हाथों के सहारे चलकर अपनी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति करते दिखाई दे रहे थे। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण वे वर्षों से ट्राइसाइकिल जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित थे। पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्र में निवास करने के कारण उन्हें आवागमन, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने तथा अन्य आवश्यक कार्यों के लिए अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल राहत पहुंचाने के निर्देश दिए और प्रशासन ने भी संवेदनशीलता के साथ उनकी समस्या का समाधान सुनिश्चित किया।

ट्राइसाइकिल प्राप्त होने के बाद गणेश राम यादव के बड़े भाई विचित्र यादव के चेहरे पर राहत और संतोष स्पष्ट दिखाई दिया। भावुक माहौल में उन्होंने प्रशासन और शासन के प्रति आभार व्यक्त किया। उसने कहा कि अब तक गणेश राम यादव को छोटी-सी दूरी तय करने के लिए भी हाथों के सहारे सड़क और पगडंडियों पर चलना पड़ता था, जिससे उन्हें शारीरिक कष्ट के साथ-साथ सम्मानजनक जीवन जीने में भी अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। अब ट्राइसाइकिल मिलने से उनके जीवन में बड़ा सकारात्मक परिवर्तन आएगा। वे अधिक सहजता से आवागमन कर सकेंगे, अपने दैनिक कार्य स्वयं कर पाएंगे तथा स्वास्थ्य केंद्र, बैंक, पंचायत और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहले की तुलना में कहीं अधिक आसानी से पहुंच सकेंगे। इससे उनके आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सहभागिता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

गणेश राम यादव की भाभी चंद्रवती ने बताया कि उनके पति विचित्र यादव और देवर गणेश राम यादव दोनों जन्म से दिव्यांग हैं तथा वे स्वयं भी दिव्यांग हैं। दोनों भाइयों को प्रतिमाह दिव्यांग पेंशन प्राप्त होती है। परिवार को महतारी वंदन योजना का लाभ भी मिल रहा है। इसके साथ ही राशन कार्ड के माध्यम से नियमित रूप से खाद्यान्न भी उपलब्ध हो रहा है। उन्होंने कहा कि ट्राइसाइकिल मिलने से गणेश राम के जीवन में बड़ी राहत आएगी और उनका दैनिक जीवन पहले की अपेक्षा काफी आसान हो जाएगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर महज 24 घंटे के भीतर सहायता उपलब्ध होने से क्षेत्र के ग्रामीणों में राज्य सरकार की संवेदनशील, जनकेंद्रित और जवाबदेह सुशासन व्यवस्था के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ है। ग्रामीणों ने प्रशासन की इस मानवीय पहल की सराहना करते हुए कहा कि जनहित से जुड़े मामलों में जिस तत्परता से शासन और प्रशासन ने कार्य किया जा रहा है, वह जरूरतमंदों के प्रति सरकार की संवेदनशील सोच का प्रेरणादायी उदाहरण गया है।

जशक्राफ्ट से छत्तीसगढ़ के बांस हस्तशिल्प को मिलेगी नई पहचान

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आधुनिक प्रशिक्षण, डिजाइन नवाचार और बाजार से जुड़ाव के माध्यम से बढ़ेगी आजीविका और रोजगार

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ग्रामीण आजीविका, महिला सशक्तिकरण और पारंपरिक हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इसी क्रम में जशपुर जिले में जिला प्रशासन द्वारा "जशक्राफ्ट" ब्रांड के माध्यम से बांस हस्तशिल्प को नई पहचान देने, स्थानीय कारीगरों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने तथा उनकी आय में वृद्धि के उद्देश्य से विशेष पहल की जा रही है।

विकासखंड जशपुर की ग्राम पंचायत झोलांगा में 29 जून से 29 जुलाई तक एक माह का आवासीय बांस हस्तशिल्प प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है। जिला पंचायत एवं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के संयुक्त प्रयास से संचालित इस प्रशिक्षण का उद्देश्य बांस हस्तशिल्प से जुड़े लगभग 150 परिवारों की आजीविका को सशक्त बनाना है। वर्तमान में 46 महिलाओं का प्रथम बैच प्रशिक्षण प्राप्त कर रहा है।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को आधुनिक मशीनों के उपयोग, नवीन डिजाइनों और वर्तमान बाजार की मांग के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाले बांस उत्पाद तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके लिए गुजरात के सूरत से विशेषज्ञ प्रशिक्षकों को आमंत्रित किया गया है। प्रशिक्षण में फैंसी ट्रे, गुलदस्ते, माचिया, सजावटी सामग्री, चटाई, आकर्षक टोकरियां, फर्नीचर, सोफा, पलंग सहित अनेक आधुनिक एवं उपयोगी उत्पाद बनाना सिखाया जा रहा है।

जशपुर और मनोरा विकासखंड में लगभग 250 परिवार वर्षों से बांस हस्तशिल्प के माध्यम से अपनी आजीविका अर्जित कर रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या में बिहान स्व-सहायता समूहों की महिलाएं भी सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। इन समूहों को चक्रीय निधि, सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ), बैंक लिंकेज तथा मुद्रा ऋण जैसी वित्तीय सुविधाओं से जोड़कर उनके उद्यमों को मजबूत बनाया जा रहा है। साथ ही समय-समय पर कौशल उन्नयन एवं उद्यमिता विकास संबंधी प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

जशक्राफ्ट ब्रांड के अंतर्गत तैयार हस्तशिल्प उत्पादों को रूरल मार्ट, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनियों तथा देश के विभिन्न बाजारों तक पहुंचाने के लिए डिजाइन एवं विपणन विशेषज्ञों की सेवाएं ली जा रही हैं, ताकि स्थानीय कारीगरों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य मिल सके और उन्हें स्थायी बाजार उपलब्ध हो।

राज्य सरकार की यह पहल पारंपरिक बांस शिल्प को आधुनिक बाजार से जोड़ने के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण, स्थानीय रोजगार सृजन, जनजातीय परिवारों की आय वृद्धि तथा आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रही है। जिला प्रशासन का लक्ष्य आगामी वर्ष तक हस्तशिल्प से जुड़े सभी स्व-सहायता समूहों के सदस्यों को "लखपति दीदी" की श्रेणी में शामिल करना है।



डॉ. जितेंद्र सिंह ने विज्ञान मंत्रालयों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की, वैज्ञानिक संस्थानों के बीच समन्वय पर दिया जोर

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मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज भारत सरकार के विज्ञान मंत्रालयों एवं विभागों के सचिवों तथा वरिष्ठ अधिकारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को तेजी से पूरा करने के लिए वैज्ञानिक संस्थानों के बीच निर्बाध समन्वय पर बल दिया।

10 से 19 सितंबर 2026 तक आयोजित होने वाले राष्ट्रव्यापी तटीय स्वच्छता अभियान 'स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर' की तैयारियों की समीक्षा करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अधिकतम राष्ट्रीय प्रभाव सुनिश्चित करने के लिए वैज्ञानिक संस्थानों को तकनीकी नवाचार, जनभागीदारी और अंतर-विभागीय सहयोग के साथ मिलकर कार्य करना होगा।

नई दिल्ली स्थित सीएसआईआर- विज्ञान केंद्र में आयोजित इस बैठक में भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के सचिव प्रो. उमेश वी. वाघमारे, जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) के सचिव डॉ. राजेश एस. गोखले, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) की सचिव डॉ. एन. कलैसेल्वी सहित संबंधित वैज्ञानिक विभागों एवं संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

पिछली समन्वय बैठक में लिए गए निर्णयों पर की गई कार्रवाई की समीक्षा करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वैज्ञानिक विभागों को अलग-अलग संस्थानों के रूप में नहीं, बल्कि एकीकृत वैज्ञानिक पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मंत्रालयों के बीच नियमित संवाद, ज्ञान का आदान-प्रदान, संयुक्त पहल और समन्वित कार्यान्वयन से नवाचार को गति मिलेगी, सुशासन मजबूत होगा तथा वैज्ञानिक उपलब्धियों का लाभ सीधे नागरिकों तक पहुंचेगा।

बैठक का प्रमुख विषय 10 से 19 सितंबर 2026 तक देशभर के समुद्री तटों पर आयोजित होने वाला 'स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर' अभियान रहा। मंत्री ने इस राष्ट्रव्यापी पहल की जनजागरूकता रणनीति एवं तैयारियों की समीक्षा की। इस अभियान का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को जनजागरूकता एवं सामुदायिक भागीदारी के साथ जोड़ना है। इस अभियान में वैज्ञानिक संस्थान, सरकारी एजेंसियां, स्वयंसेवी संगठन, शैक्षणिक संस्थान तथा स्थानीय समुदाय व्यापक स्तर पर भागीदारी करेंगे।

बैठक में विभिन्न विज्ञान मंत्रालयों की संचार रणनीति की भी समीक्षा की गई, ताकि पिछले 12 वर्षों, विशेषकर वर्तमान सरकार के पिछले दो वर्षों की वैज्ञानिक उपलब्धियों को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाया जा सके। विभागों ने वीडियो, वृत्तचित्र, विषयगत अभियान, इन्फोग्राफिक्स, सफलता की कहानियों तथा जनसंपर्क कार्यक्रमों के माध्यम से डिजिटल पहुंच को मजबूत करने की योजनाएं प्रस्तुत कीं।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) ने अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एएनआरएफ), राष्ट्रीय क्वांटम मिशन, राष्ट्रीय अंतर्विषयक साइबर-भौतिक प्रणाली मिशन, अनुसंधान विकास एवं नवाचार योजना सहित विभिन्न प्रमुख राष्ट्रीय कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार की रणनीति प्रस्तुत की। जनभागीदारी बनाए रखने और वैज्ञानिक उपलब्धियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए चरणबद्ध प्रसार योजना तैयार की गई है।

वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) ने जानकारी दी कि सीएसआईआर अपने स्थापना दिवस के अवसर पर पिछले 12 वर्षों की प्रमुख उपलब्धियों पर आधारित एक व्यापक प्रकाशन जारी करने की तैयारी कर रहा है। डिजिटल माध्यमों पर सफलता की कहानियों का नियमित प्रसार तथा "इनोवेशन इन एक्शन" व्याख्यान श्रृंखला के माध्यम से वैज्ञानिक संस्थानों के बीच संवाद को और सुदृढ़ किया जाएगा।

जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) ने बताया कि उसने सार्वजनिक स्वास्थ्य, जैव-अर्थव्यवस्था, जीनोमिक्स, कृषि जैव प्रौद्योगिकी, अनुसंधान अवसंरचना, जैव प्रौद्योगिकी स्टार्टअप तथा सतत विकास में अपने योगदान को प्रदर्शित करने वाली विषयगत प्रकाशनों की श्रृंखला शुरू की है। विभाग #DBTQuest जनसहभागिता अभियान के माध्यम से ज्ञान-आधारित गतिविधियों द्वारा वैज्ञानिक जागरूकता बढ़ा रहा है तथा समन्वित सोशल मीडिया पहलों के जरिए जनसंपर्क का विस्तार कर रहा है।

बैठक में विज्ञान विभागों के बीच अंतर-मंत्रालयी सहयोग को मजबूत करने के प्रयासों की भी समीक्षा की गई। सीएसआईआर, इसरो, डीएसटी, डीबीटी, बार्क तथा अन्य वैज्ञानिक संस्थानों के संयुक्त कार्यक्रमों, प्रौद्योगिकी विकास साझेदारियों, जैव-चिकित्सा अनुसंधान, नवाचार मंचों तथा उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के लिए समन्वित कार्यक्रमों की प्रगति पर चर्चा हुई। विभागों ने वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं एवं शैक्षणिक संस्थानों के बीच नियमित संवाद तंत्र को मजबूत करने के प्रयासों की जानकारी भी दी।

बैठक में अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एएनआरएफ) के अंतर्गत हुई प्रगति की भी समीक्षा की गई। इसमें SARAL_AI मंच के व्यापक उपयोग, विभिन्न संस्थानों के शोधकर्ताओं की अधिक भागीदारी तथा अनुसंधान परियोजनाओं से संबंधित जानकारी को डिजिटल माध्यमों से आम जनता तक पहुंचाने के उपायों पर चर्चा हुई।

इसके अतिरिक्त ESTIC-2026, इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल (IISF)-2026, राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस-2026 तथा अन्य प्रमुख राष्ट्रीय वैज्ञानिक आयोजनों की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। विभागों ने इन कार्यक्रमों में शोधकर्ताओं, उद्योगों, स्टार्टअप, विद्यार्थियों तथा आम नागरिकों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए संस्थागत तैयारियों एवं जनसंपर्क योजनाओं की जानकारी दी।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत का वैज्ञानिक पारिस्थितिकी तंत्र अब ऐसे नए चरण में प्रवेश कर चुका है, जहां अनुसंधान उत्कृष्टता, तकनीकी नवाचार, संस्थागत समन्वय और जनसहभागिता को साथ लेकर आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक विभागों के बीच बढ़ता सहयोग विज्ञान को अधिक सुलभ, अधिक प्रभावी तथा देश की विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

बैठक के दौरान मंत्री ने प्रशासनिक कार्य निष्पादन, संस्थागत समन्वय तथा विज्ञान प्रशासकों की क्षमता निर्माण से जुड़े विषयों की भी समीक्षा की और विभागों से श्रेष्ठ कार्य प्रणालियों को साझा करते हुए वैज्ञानिक तंत्र में सहयोगात्मक सुशासन को और मजबूत करने का आह्वान किया।

शिलांग में 13–14 जुलाई को 'नेक्स्टजेन प्रशासनिक एवं ई-गवर्नेंस सुधार' पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित होगा

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प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी), मेघालय सरकार के सहयोग से 13–14 जुलाई 2026 को शिलांग, मेघालय में "नेक्स्टजेन प्रशासनिक एवं ई-गवर्नेंस सुधार" विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन करेगा।

सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा तथा अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह तथा मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा संबोधित करेंगे। यह सम्मेलन देशभर के नीति-निर्माताओं, प्रशासकों, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों तथा सुशासन के क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों को सार्वजनिक प्रशासन एवं डिजिटल शासन के भविष्य पर विचार-विमर्श के लिए एक साझा मंच प्रदान करेगा।

उद्घाटन सत्र को भारत सरकार में डीएआरपीजी, पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग (डीओपीपीडब्ल्यू) तथा उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय (एमडोनर) की सचिव निवेदिता शुक्ला वर्मा तथा मेघालय सरकार के मुख्य सचिव डॉ. शाकिल पी. अहमद भी संबोधित करेंगे।

सम्मेलन में केंद्र एवं राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, जिला कलेक्टर, नीति-निर्माता, विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ, शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधि तथा लोक प्रशासन से जुड़े विशेषज्ञों सहित 300 से अधिक प्रतिनिधियों के भाग लेने की संभावना है।

दो दिवसीय सम्मेलन में प्रधानमंत्री पुरस्कार विजेता पहल (2023 एवं 2024), राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार विजेता परियोजनाओं, मेघालय सरकार की उत्कृष्ट कार्य प्रणालियों तथा डीएआरपीजी समर्थित राज्य सहयोगात्मक पहलों (स्टेट कोलैबोरेटिव इनिशिएटिव–एससीआई) पर प्रस्तुतियां दी जाएंगी। इनमें जिला समग्र विकास, डिजिटल शासन, साइबर सुरक्षा, लोक सेवा वितरण, स्वास्थ्य, शिक्षा, उपभोक्ता संरक्षण, बैंकिंग, शहरी प्रशासन, ग्रामीण विकास तथा प्रौद्योगिकी आधारित सुशासन जैसे विविध विषय शामिल होंगे।

सम्मेलन की शुरुआत मेघालय सरकार की श्रेष्ठ कार्य प्रणालियों पर केंद्रित विशेष सत्र से होगी, जिसमें राज्य की नवाचारी प्रशासनिक पहलों एवं नागरिक-केंद्रित सुधारों को प्रस्तुत किया जाएगा, जिन्होंने सेवा वितरण और प्रशासनिक दक्षता को मजबूत किया है।

इसके बाद प्रधानमंत्री पुरस्कार विजेता पहल (2023 एवं 2024) पर आधारित सत्र आयोजित होगा, जिसमें जिला स्तर की उत्कृष्ट नवाचार परियोजनाओं एवं सुशासन मॉडलों को प्रस्तुत किया जाएगा। इन पहलों ने समग्र विकास, शिक्षा, ग्रामीण आजीविका तथा आकांक्षी जिला कार्यक्रम जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय परिणाम दिए हैं।

तीसरे सत्र में राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 से सम्मानित परियोजनाओं को प्रस्तुत किया जाएगा। इसमें विभिन्न मंत्रालयों, राज्य सरकारों, शहरी स्थानीय निकायों एवं सार्वजनिक संस्थानों द्वारा विकसित अत्याधुनिक डिजिटल शासन पहलों का प्रदर्शन होगा। इन परियोजनाओं में शहरी प्रशासन, स्वास्थ्य सेवाएं, डिजिटल बैंकिंग, तीर्थ प्रबंधन, पंचायती राज, उपभोक्ता संरक्षण तथा साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में उभरती प्रौद्योगिकियों के प्रभावी उपयोग को प्रदर्शित किया जाएगा, जिन्हें देशभर में अपनाया जा सकता है।

उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के विकास पर आयोजित विशेष सत्र में उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय (डोनर) एवं उत्तर-पूर्वी परिषद (एनईसी) द्वारा संचालित परिवर्तनकारी पहलों पर चर्चा होगी। इसमें बांस एवं अगरवुड मूल्य श्रृंखला, पर्यटन, क्षेत्रीय अवसंरचना, परियोजना निगरानी तथा सतत विकास के लिए अंतरराज्यीय सहयोग से जुड़े नवाचारों को प्रस्तुत किया जाएगा।

सम्मेलन में डीएआरपीजी/राज्य सहयोगात्मक पहल (एससीआई) के अंतर्गत उत्तर-पूर्वी क्षेत्र की श्रेष्ठ कार्य प्रणालियों पर भी विशेष सत्र आयोजित होगा। इसमें मेघालय, मिजोरम एवं नागालैंड की अभिनव प्रशासनिक परियोजनाओं को प्रदर्शित किया जाएगा। इन पहलों में प्रौद्योगिकी आधारित लोक सेवा वितरण, परियोजना निगरानी प्रणाली, डिजिटल गवर्नेंस प्लेटफॉर्म, उपभोक्ता शिकायत निवारण तंत्र तथा सार्वजनिक सुरक्षा समाधान शामिल होंगे, जिन्हें डीएआरपीजी के सहयोग से विकसित किया गया है।

इस राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्देश्य अभिनव सुशासन मॉडल साझा करने के लिए राष्ट्रीय स्तर का मंच उपलब्ध कराना, राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना तथा अगली पीढ़ी के प्रशासनिक सुधारों को अपनाने को प्रोत्साहित करना है। सम्मेलन का लक्ष्य शासन में डिजिटल परिवर्तन को गति देना, नागरिक-केंद्रित सार्वजनिक सेवा वितरण को सुदृढ़ करना, सफल प्रशासनिक मॉडलों के व्यापक प्रसार को बढ़ावा देना तथा उभरती प्रौद्योगिकियों एवं श्रेष्ठ कार्य प्रणालियों पर ज्ञान के आदान-प्रदान के माध्यम से पारदर्शी, कुशल एवं उत्तरदायी लोक प्रशासन का निर्माण करना है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अहमदाबाद में 'मिशन 5 मिलियन ट्रीज़' अभियान का शुभारंभ किया

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केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज गुजरात के अहमदाबाद में अहमदाबाद नगर निगम (एएमसी) के 'मिशन 5 मिलियन ट्रीज़' के तहत आयोजित वृहद वृक्षारोपण अभियान का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने अहमदाबाद में विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास भी किया। कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

सभा को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि आज केवल गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र में ही नागरिकों द्वारा एक करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए हैं। इसके अतिरिक्त अहमदाबाद शहर में 50 लाख पौधों का रोपण किया गया है। उन्होंने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य हरित पर्यावरण का निर्माण करना, स्वच्छ वायु एवं शुद्ध जल सुनिश्चित करना तथा भावी पीढ़ियों के लिए पृथ्वी को रहने योग्य बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि 1.25 करोड़ पौधे लगाने का अभियान अब केवल एक नारा नहीं, बल्कि जन आंदोलन बन चुका है।

शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान ने बहुत कम समय में जन आंदोलन का रूप ले लिया है और पूरा देश उनके "People, Planet with Progress" के मंत्र को आत्मसात कर रहा है।

केंद्रीय गृह मंत्री ने बताया कि पिछले सात वर्षों में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) ने देशभर में सात करोड़ से अधिक पौधे लगाए हैं। उन्होंने कहा कि दो दिन पहले दिल्ली में भी बड़े स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाया गया। उन्होंने बताया कि लगाए जा रहे पौधे भारत की पारिस्थितिकी के अनुरूप देशी प्रजातियों के हैं और इनमें अनेक वृक्षों की आयु 100 वर्ष से अधिक होती है। उन्होंने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य प्राकृतिक रूप से अहमदाबाद को एक हरित शहर में परिवर्तित करना है।

शाह ने बताया कि गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र में पहले 12 ऑक्सीजन पार्क थे, जबकि आज 61 नए ऑक्सीजन पार्कों का उद्घाटन किया गया है, जिससे इनकी कुल संख्या बढ़कर 73 हो गई है। वहीं अहमदाबाद नगर निगम ने एक ही दिन में 101 ऑक्सीजन पार्कों का उद्घाटन किया है।

उन्होंने कहा कि अहमदाबाद नगर निगम ने वैज्ञानिक पहल के तहत एक विशेष वाहन सेवा शुरू की है, जिसके माध्यम से वृक्षारोपण के इच्छुक नागरिकों के घर तक पौधे पहुंचाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी के बिना कोई भी अभियान सफल नहीं हो सकता। शाह ने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में यह वृक्षारोपण अभियान अहमदाबाद का तापमान अन्य शहरों की तुलना में कम से कम 5 प्रतिशत तक घटाने में सहायक होगा।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सबसे प्रभावी पहल है। उन्होंने सभी नागरिकों से एक-एक पौधा लगाने तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए ओजोन परत की रक्षा में योगदान देने का आह्वान किया।

शाह ने कहा कि साणंद, गांधीनगर, कलोल और अहमदाबाद शहर ने मिलकर गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र में हरित क्षेत्र (ग्रीन कवर) को 11.23 प्रतिशत तक बढ़ाया है और वर्ष 2029 तक इसे 20 प्रतिशत तक पहुंचाने का संकल्प लिया है।

उन्होंने कहा कि गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र में 20 प्रतिशत हरित क्षेत्र का लक्ष्य प्राप्त करना सभी नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि देश के सभी लोकसभा क्षेत्रों में सबसे अधिक सोलर रूफटॉप स्थापना गांधीनगर में हुई है। उन्होंने अहमदाबाद और गांधीनगर के नागरिकों से अपील की कि कोई भी घर, अपार्टमेंट या छत सोलर रूफटॉप से वंचित न रहे।

शाह ने बताया कि आज 22 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन तथा सात परियोजनाओं का शिलान्यास किया गया। उन्होंने कहा कि 325 नई एएमटीएस और बीआरटीएस बसों के संचालन से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और आज के बाद अहमदाबाद में प्रदूषण फैलाने वाली कोई भी बस नहीं बचेगी।

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र में अब तक ₹28,492 करोड़ की विकास परियोजनाएं पूरी की जा चुकी हैं। इनमें घाटलोडिया में ₹7,030 करोड़, वेजलपुर में ₹2,670 करोड़, साबरमती में ₹2,149 करोड़, नारणपुरा में ₹3,262 करोड़, साणंद में ₹2,800 करोड़, गांधीनगर उत्तर में ₹4,300 करोड़ तथा कलोल में ₹2,003 करोड़ की परियोजनाएं शामिल हैं।

उन्होंने अहमदाबाद शहर एवं गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र के नागरिकों से अपील की कि वे अपनी आवासीय सोसायटियों के किसी भी कोने को वृक्षों से वंचित न रहने दें। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए पृथ्वी को अधिक हरित और रहने योग्य बनाना हम सभी का सामूहिक लक्ष्य होना चाहिए। साथ ही उन्होंने प्रत्येक घर में सोलर रूफटॉप स्थापित करने का भी आह्वान किया।

उपराष्ट्रपति ने मन्नाथु पद्मनाभन की प्रतिमा का किया अनावरण, मन्नम स्मृति मंडपम् का उद्घाटन

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 भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली के द्वारका स्थित मन्नम इंटरनेशनल सेंटर में नायर सर्विस सोसाइटी (एनएसएस), दिल्ली द्वारा आयोजित कार्यक्रम में समाज सुधारक एवं स्वतंत्रता सेनानी मन्नाथु पद्मनाभन की प्रतिमा का अनावरण किया तथा मन्नम स्मृति मंडपम् का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने इसे आधुनिक भारत के महानतम समाज सुधारकों और राष्ट्रनिर्माताओं में से एक मन्नाथु पद्मनाभन की अमर विरासत का ऐतिहासिक उत्सव बताया। उन्होंने नायर सर्विस सोसाइटी (एनएसएस), दिल्ली को लंबे समय से संजोए गए मन्नम स्मृति मंडपम् के निर्माण के स्वप्न को साकार करने पर बधाई देते हुए कहा कि यह स्मारक केवल एक भवन नहीं, बल्कि एक ऐसी महान विरासत का जीवंत प्रतीक है, जिसके आदर्श सामाजिक न्याय, समानता और राष्ट्रसेवा की भावना को जाति, क्षेत्र और धर्म की सीमाओं से ऊपर उठाते हैं।

मन्नाथु पद्मनाभन के जीवन और योगदान का स्मरण करते हुए सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि प्रख्यात समाज सुधारक, स्वतंत्रता सेनानी और नायर सर्विस सोसाइटी के संस्थापक ने शिक्षा, सामाजिक सुधार, आत्मनिर्भरता और सामुदायिक सेवा के माध्यम से समाज के उत्थान के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित किया।

उपराष्ट्रपति ने मन्नाथु पद्मनाभन को सामाजिक पुनर्जागरण का सच्चा अग्रदूत बताते हुए कहा कि उनकी दृष्टि किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं थी। उन्होंने कहा, "वे मानते थे कि प्रत्येक व्यक्ति समान सम्मान और समान अवसर का अधिकारी है। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि वास्तविक सामाजिक प्रगति तभी संभव है, जब न्याय, करुणा और समावेशिता समाज के मार्गदर्शक सिद्धांत बनें।"

राधाकृष्णन ने कहा कि नायर सर्विस सोसाइटी की उल्लेखनीय प्रगति स्वयं उसके संस्थापक की असाधारण निष्ठा और दृढ़ संकल्प का प्रमाण है। उन्होंने बताया कि मन्नाथु पद्मनाभन का विश्वास था कि महान संस्थाएँ धन से नहीं, बल्कि समर्पण से बनती हैं। उन्होंने सामान्य परिवारों के छोटे-छोटे योगदानों से शिक्षा और सामाजिक संस्थानों की स्थापना की, जिसने अनेक पीढ़ियों के जीवन को बदल दिया।

उपराष्ट्रपति ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि स्थापना के एक शताब्दी से अधिक समय बाद भी मन्नाथु पद्मनाभन के आदर्श केरल से कहीं आगे तक फैल चुके हैं। उन्होंने विशेष रूप से एनएसएस दिल्ली द्वारा कलरिपयट्टु, कथकली और मोहिनीयाट्टम जैसी केरल की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों की सराहना की। उन्होंने दिल्ली-एनसीआर में 25 शाखाओं और लगभग 25,000 सदस्यों वाले संगठन के रूप में एनएसएस दिल्ली की उल्लेखनीय प्रगति पर भी बधाई दी।

स्मारकों के महत्व पर विचार व्यक्त करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, "स्मारक केवल पत्थरों पर की गई नक्काशी नहीं होते, बल्कि वे समाज की सामूहिक चेतना पर अंकित अमिट छाप होते हैं। उनका उद्देश्य केवल अतीत का स्मरण करना नहीं, बल्कि भविष्य को प्रेरणा देना भी है।"

उन्होंने नागरिकों से मन्नाथु पद्मनाभन के आदर्शों को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा, "उनके प्रति हमारी सबसे बड़ी श्रद्धांजलि यही होगी कि हम समानता, शिक्षा, करुणा, सेवा और राष्ट्रीय एकता पर आधारित समाज निर्माण के उनके मिशन को आगे बढ़ाएँ।"

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा संचालित राष्ट्रव्यापी 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान के अंतर्गत मन्नम इंटरनेशनल सेंटर परिसर में एक पौधा भी रोपा।

कार्यक्रम में केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस तथा पर्यटन राज्य मंत्री सुरेश गोपी, एनएसएस दिल्ली के अध्यक्ष एम. के. जी. पिल्लै, महासचिव एम. डी. जयप्रकाश सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

​दशकों का अंधेरा छँटा: 'नियद नेल्लानार योजना' से जगमगाए नारायणपुर के वनांचल गांव

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रायपुर- छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचल में बसे नारायणपुर जिले के ग्राम मोहन्दी और मसपुर के लोगों के लिए साल 2026 की यह गर्मियां एक ऐतिहासिक बदलाव लेकर आईं। दशकों से लालटेन और ढिबरी की मद्धम रोशनी में जिंदगी गुजार रहे इन आदिवासी बाहुल्य गांवों में जब पहली बार बिजली का बल्ब जला, तो ग्रामीणों की आंखें खुशी से छलक उठीं। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी 'नियद नेल्लानार (आपका अच्छा गांव) योजना' ने इन दुर्गम इलाकों में विकास का नया सवेरा ला दिया है।

​दुर्गम राहें, दृढ़ संकल्प और सफलता

घने जंगलों, ऊंची पहाड़ियों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण ग्राम मोहन्दी के मिचिंगपारा, कोडियारपारा व बीचपारा और ग्राम मसपुर के गुडरापारा तक बिजली पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं था। लेकिन जिला प्रशासन और विद्युत विभाग के दृढ़ संकल्प के आगे हर बाधा छोटी साबित हुई।

कलेक्टर के कुशल मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) की टीम और निर्माण एजेंसी एम/एस माँ शारदा ने युद्धस्तर पर काम करते हुए समय-सीमा के भीतर इस चुनौतीपूर्ण विद्युत लाइन विस्तार कार्य को सफलता पूर्वक पूरा किया।

लाखों का निवेश, परिवारों के जीवन में उजाला

वनांचल के इन गांवों को रोशन करने के लिए सरकार ने दिल खोलकर बजट स्वीकृत किया। जिसमें ​ग्राम मोहन्दी में लगभग 61.79 लाख रूपए की लागत से तीनों पाराओं में बिजली का विस्तार किया गया, जिससे सीधे 40 परिवारों को पहली बार बिजली मिली। ​ग्राम मसपुर गुडरापारा 22.42 लाख रूपए की लागत से कार्य पूर्ण कर 5 परिवारों के घरों को विद्युत कनेक्शन से जोड़ा गया।

बदलेगी गांवों की तस्वीर: शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका को नई उड़ान

बिजली पहुंचने से वनांचल के इन गांवों में अब विकास की रफ्तार तेज होने वाली है। अब रात के अंधेरे में बच्चों की पढ़ाई नहीं रुकेगी। बेहतर रोशनी मिलने से बच्चों की शिक्षा और उनके भविष्य को नई दिशा मिलेगी। मोबाइल चार्जिंग, पंखे और अन्य आवश्यक बिजली उपकरणों के उपयोग से ग्रामीणों की दैनिक जीवनशैली बेहद सुगम हो गई है। बिजली की उपलब्धता से स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य केंद्रों और जीवन रक्षक चिकित्सा उपकरणों का संचालन अब बेहतर ढंग से हो सकेगा। ग्रामीणों में अब स्वरोजगार को लेकर नया उत्साह है। सिलाई, कुटीर उद्योग और छोटे व्यवसायों के शुरू होने से गांवों में आजीविका के नए साधन विकसित होंगे।

सपना हुआ साकार, ग्रामीणों ने जताया आभार

​वर्षों के लंबे इंतजार के बाद अपने घरों को रोशनी से जगमगाता देख ग्रामीणों के चेहरों पर आत्मसंतुष्टि और खुशी की लहर है। ग्रामीणों का कहना है कि यह बदलाव उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा है। उन्होंने इस ऐतिहासिक पहल के लिए राज्य शासन, जिला प्रशासन और विद्युत विभाग के प्रति दिल से आभार व्यक्त किया है।

​'नियद नेल्लानार योजना' सिर्फ गांवों तक बिजली पहुंचाना नहीं, बल्कि वनांचल के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने की एक सशक्त मुहीम बन चुकी है। प्रशासन का लक्ष्य अब जिले के अन्य वंचित गांवों में भी इसी तरह चरणबद्ध तरीके से विकास की रोशनी पहुंचाना है।

नेशनल हाईवे-30 पर भीषण सड़क हादसा, रोडवेज बस की टक्कर से कार चालक की मौत

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 कोंडागांव। नेशनल हाईवे-30 पर रविवार को कोंडागांव के बनियागांव स्थित नीलगिरि प्लांट के पास हुए भीषण सड़क हादसे में एक कार चालक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कार में सवार एक महिला और उनका बेटा घायल हो गए। हादसे के बाद कुछ समय तक राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात प्रभावित रहा।


जानकारी के अनुसार, जगदलपुर से रायपुर जा रही कांकेर रोडवेज की यात्री बस ने कोंडागांव से गीदम की ओर जा रही एक कार को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।

हादसे के समय कार में चालक, एक महिला और उनका बेटा सवार थे। दुर्घटना में चालक की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। टक्कर के बाद चालक का शव कार के भीतर बुरी तरह फंस गया था, जिसे पुलिस और स्थानीय लोगों ने करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद बाहर निकाला।

घायल महिला और उनके बेटे को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल कोंडागांव में भर्ती कराया गया है। मृतक और घायल सभी कोंडागांव के निवासी बताए जा रहे हैं।

सूचना मिलते ही सिटी कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस दुर्घटना के कारणों का पता लगाने में जुटी है।

'नंबर ब्लॉक किया तो मिटा दिया वजूद': भिलाई के सनसनीखेज पीजी मर्डर केस का खुलासा; आशिक ही निकला कातिल

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 भिलाई। दुर्ग जिले के खुर्सीपार थाना क्षेत्र के एक पेइंग गेस्ट (पीजी) हाउस में हुई युवती की निर्मम हत्या के सनसनीखेज मामले का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। पुलिस जांच में यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि युवती की हत्या किसी अजनबी ने नहीं, बल्कि उसके ही प्रेमी ने की थी। मृतका द्वारा मोबाइल नंबर ब्लॉक किए जाने से नाराज आरोपी ने इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने मुख्य आरोपी पिंटू को बलौदाबाजार से गिरफ्तार कर लिया है।


नंबर ब्लॉक करने पर रची हत्या की साजिश

पुलिस के अनुसार, आरोपी पिंटू और मृतका के बीच पिछले एक वर्ष से प्रेम संबंध था, जिसकी जानकारी दोनों के परिजनों को भी थी। कुछ समय पूर्व दोनों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ, जिसके बाद युवती ने आरोपी का नंबर ब्लॉक कर दिया। इसके बाद आरोपी ने युवती की रूममेट से उसका नया नंबर हासिल कर संपर्क साधने की कोशिश की, लेकिन वहां भी ब्लॉक किए जाने से नाराज होकर उसने हत्या की साजिश रच डाली।

पहनी थीं दो शर्ट, वारदात के बाद नाले में फेंकी

वारदात के दिन आरोपी भिलाई पहुंचा और पीजी में युवती से मिलने की कोशिश की। बातचीत न होने पर उसने पहले युवती का गला दबाया और फिर चाकू से ताबड़तोड़ 11 वार कर उसे मौत के घाट उतार दिया। पुलिस ने बताया कि हत्या के दौरान अपने कपड़ों पर खून के धब्बे लगने से बचने के लिए आरोपी शातिराना तरीके से दो शर्ट पहनकर आया था। घटना के बाद उसने खून से सनी ऊपर वाली शर्ट उतारकर रास्ते में एक नाले में फेंक दी और फरार हो गया।

तकनीकी साक्ष्यों और सीसीटीवी की मदद से दबोचा गया आरोपी

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्य और मोबाइल लोकेशन का बारीकी से विश्लेषण किया। वारदात के बाद से ही आरोपी का मोबाइल बंद था, लेकिन पुलिस ने उसके रिश्तेदारों और परिचितों पर नजर रखी। नाले से बरामद खून से सनी शर्ट और अन्य पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने घेराबंदी कर आरोपी को बलौदाबाजार से धर दबोचा।

कार्रवाई जारी

थाना प्रभारी के अनुसार, आरोपी ने पूछताछ में अपना जुर्म कबूल कर लिया है। हत्या में प्रयुक्त हथियार और अन्य साक्ष्यों की बरामदगी की जा रही है। आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उसे न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

स्कूल जा रहे नाबालिग छात्र का अपहरण कर बेरहमी से पीटा, वीडियो वायरल; 6 हिरासत में

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 सक्ती। सक्ती जिले के अड़भार थाना क्षेत्र में एक नाबालिग छात्र के साथ कथित अपहरण कर मारपीट किए जाने का मामला सामने आया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अब तक छह लोगों को हिरासत में लिया है। इनमें चार नाबालिग बताए जा रहे हैं।


जानकारी के अनुसार, आत्मानंद स्कूल में पढ़ने वाला नाबालिग छात्र शुक्रवार सुबह करीब 11:30 बजे स्कूल जाने के लिए घर से निकला था। दोपहर करीब 12 बजे जब वह सेजेस स्कूल के पास पहुंचा, तभी चार बाइकों पर सवार 8 से 9 युवकों ने उसे कथित तौर पर जबरन अपने साथ ले लिया। आरोप है कि आरोपी छात्र को शनि मंदिर के पीछे स्थित गौठान के पास ले गए, जहां उसके साथ मारपीट की गई।

परिजनों के मुताबिक, आरोपियों ने छात्र के कपड़े उतरवाकर उसके साथ लात-घूंसों और थप्पड़ों से मारपीट की। इस दौरान उसकी बाइक की चाबी और नकदी भी छीन ली गई। छात्र किसी तरह शाम करीब चार बजे घर पहुंचा और परिजनों को घटना की जानकारी दी।

घटना के दौरान मौजूद किसी व्यक्ति ने मारपीट का वीडियो बना लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में एक युवक छात्र के साथ मारपीट करता दिखाई दे रहा है। वीडियो में मोबाइल नंबर को लेकर विवाद की बात भी सुनाई देती है। हालांकि, पुलिस ने अभी तक घटना के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पंकज पटेल ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू की। अब तक छह लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें चार नाबालिग शामिल हैं। सभी से पूछताछ की जा रही है और घटना के पीछे की वास्तविक वजह की जांच जारी है।

पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद पूरे घटनाक्रम और मारपीट के कारणों का स्पष्ट खुलासा किया जाएगा। वायरल वीडियो को भी साक्ष्य के रूप में जांच में शामिल किया गया है।

तीसरे विश्व युद्ध की आहट! अमेरिकी हमलों से कांपा ईरान; स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से दुनिया में मचेगा हाहाकार

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 वाशिंगटन/तेहरान: पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' में एक वाणिज्यिक (कमर्शियल) जहाज पर ईरानी हमले के बाद, अमेरिका ने रविवार को ईरान के खिलाफ इस सप्ताह की तीसरी और सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने साफ किया है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य था।


साइप्रस के जहाज पर हमला, एक क्रू मेंबर लापता

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, यह कार्रवाई ईरान की 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) द्वारा साइप्रस के ध्वज वाले कंटेनर जहाज 'एम/वी जीएफएस गैलेक्सी' पर किए गए हमले के जवाब में की गई है। भारतीय समयानुसार रविवार रात शुरू हुए इस हमले में जहाज में भीषण आग लग गई और उसके इंजन रूम को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे जहाज बीच समुद्र में ही ठप हो गया। हादसे के बाद से चालक दल (क्रू) का एक सदस्य लापता है, जिसकी तलाश जारी है।

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा, "ईरान ने अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन कर एक गलत फैसला लिया है, और अब उसे इसकी भारी कीमत चुकानी होगी।"

ईरान के पांच प्रमुख शहरों में गूंजे धमाके

ईरान के सरकारी प्रसारक (IRIB) ने अमेरिकी हवाई हमलों की पुष्टि करते हुए बताया कि देश के तटीय और रणनीतिक शहरों—असालुयेह, बंदर अब्बास, सीरिक, बंदर देयर और चाबहार में जोरदार विस्फोटों की आवाजें सुनी गई हैं। अमेरिकी लड़ाकू विमानों और मिसाइलों ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।

ईरान का दावा: नियमों के उल्लंघन पर की कार्रवाई, होर्मुज पूरी तरह बंद

दूसरी ओर, ईरान के संगठन IRGC ने अपने हमले को जायज ठहराते हुए दावा किया कि उक्त विदेशी जहाज ने अपना ट्रैकिंग सिस्टम बंद कर दिया था और बिना अनुमति के प्रतिबंधित मार्ग से गुजरने की कोशिश कर रहा था। ईरान के मुताबिक, चेतावनी के बावजूद रास्ता न बदलने पर ही जहाज पर फायरिंग की गई।

इस घटना के तुरंत बाद ईरान ने अगले आदेश तक 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को सभी प्रकार के समुद्री यातायात के लिए पूरी तरह बंद करने का ऐलान कर दिया। साथ ही तेहरान ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने दोबारा हमला किया, तो क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा।

वैश्विक तेल बाजार में हड़कंप, कूटनीतिक प्रयास तेज

दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल व्यापार के रास्ते 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के बंद होने से वैश्विक तेल बाजार में हड़कंप मच गया है और कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल की आशंका जताई जा रही है।

इस बीच, ओमान और कतर की मध्यस्थता में मस्कट में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत के जरिए तनाव कम करने की कोशिशें भी जारी हैं। हालांकि, ईरान ने रुख कड़ा करते हुए साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका होर्मुज और तेल निर्यात से जुड़े पुराने समझौतों का पालन नहीं करता, तब तक कोई भी शांति वार्ता संभव नहीं है।

शाला प्रवेश उत्सव में गूंजा शिक्षा का उत्साह, मंत्री राजेश अग्रवाल ने नवप्रवेशी बच्चों का किया आत्मीय स्वागत

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हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर अवसर उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, शिक्षा ही समृद्ध भविष्य की सबसे मजबूत नींव है — राजेश अग्रवाल

रायपुर- पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने आज स्वामी आत्मानंद गवर्नमेंट अंग्रेजी माध्यम स्कूल, उदयपुर में आयोजित विकासखंड स्तरीय 'शाला प्रवेश उत्सव' में सहभागिता कर नवप्रवेशी विद्यार्थियों का आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने बच्चों को मिठाई खिलाकर नवीन शैक्षणिक जीवन की शुभ शुरुआत कराई तथा अध्ययन सामग्री भेंट कर उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामनाएं की।

इस अवसर पर मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि "हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। शिक्षा केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि एक सशक्त, आत्मनिर्भर और संस्कारित समाज के निर्माण की आधारशिला है। हमें ऐसा वातावरण तैयार करना होगा, जहां प्रत्येक विद्यार्थी अपनी प्रतिभा को निखारते हुए अपने सपनों को साकार कर सके।"

उन्होंने कहा कि विद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कार, अनुशासन, आत्मविश्वास और व्यक्तित्व निर्माण की पाठशाला भी है। उन्होंने विद्यार्थियों से मन लगाकर अध्ययन करने, नियमित विद्यालय आने तथा जीवन में उच्च लक्ष्य निर्धारित कर आगे बढ़ने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के दौरान मंत्री राजेश अग्रवाल ने विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का अवलोकन किया और उनकी प्रतिभा की सराहना की। इस अवसर पर मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित कर उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन की प्रशंसा करते हुए उन्हें निरंतर उत्कृष्टता की ओर अग्रसर रहने के लिए प्रेरित किया।

मंत्री राजेश अग्रवाल ने नवीन शैक्षणिक सत्र के अवसर पर सभी विद्यार्थियों, अभिभावकों एवं शिक्षकगण को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास में परिवार और शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनके सामूहिक प्रयासों से ही शिक्षित, जागरूक और सशक्त समाज का निर्माण संभव है।

कार्यक्रम में जनप्रतिनिधिगण, शिक्षकगण, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

भोरमदेव में इको-टूरिज्म को मिली नई पहचान, उप मुख्यमंत्री ने वन महोत्सव और 6 किमी लंबे इको ट्रेल का किया शुभारंभ

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पर्यटन से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई मजबूती- उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

51 काला आम के पौधों का हुआ रोपण, 50 हजार सीड बॉल और एक लाख पौधों के वितरण अभियान की हुई शुरुआत

बैगा समुदाय के 100 हितग्राहियों को सोलर लालटेन और जैकेट का किया वितरण

हर शनिवार और रविवार होगी इको ट्रेल, नेचर गाइड के साथ सुरक्षित वन भ्रमण की सुविधा

रायपुर- कबीरधाम जिले के भोरमदेव अभ्यारण्य में प्रकृति संरक्षण और इको-टूरिज्म को नई पहचान देते हुए उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने आज जंगल सफारी में वन महोत्सव और भोरमदेव इको ट्रेल का शुभारंभ किया। इस दौरान उप मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, वन विभाग के कर्मचारियों और ग्रामीणों के साथ लगभग 6 किलोमीटर लंबी भोरमदेव इको ट्रेल का भ्रमण कर जंगल की प्राकृतिक सुंदरता, जैव विविधता और रोमांचक वन यात्रा का अनुभव लिया। प्राकृतिक पर्यावरण में की जाने वाली एक जिम्मेदार यात्रा है। इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना वहां के प्राकृतिक संसाधनों और वन्यजीवों का संरक्षण करना, और स्थानीय समुदायों को आर्थिक रूप से लाभ पहुँचाना है।

भोरमदेव क्षेत्र अनमोल प्राकृतिक सौंदर्य से समृद्ध 

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि भोरमदेव अभ्यारण्य में जंगल सफारी शुरू होने के बाद पर्यटक अब जंगल के अंदर जाकर प्रकृति का करीब से आनंद ले रहे हैं। अब आज से शुरू हुई भोरमदेव इको ट्रेल भी पर्यटकों को घने जंगल, प्राकृतिक सुंदरता और वन्य जीवों के बीच एक नया और यादगार अनुभव देगी। उन्होंने कहा कि प्रकृति ने भोरमदेव क्षेत्र को अनमोल प्राकृतिक सौंदर्य से समृद्ध किया है। उन्होंने कहा कि पर्यटन दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाला और सबसे अधिक रोजगार देने वाला क्षेत्र है। भोरमदेव में पर्यटन सुविधाओं के बढ़ने से यहां अधिक पर्यटक आएंगे। इससे होटल, वाहन, खान-पान, हस्तशिल्प और अन्य छोटे-बड़े व्यवसायों को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखना हम सभी की जिम्मेदारी 

उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि पर्यटन बढ़ने से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे। अभी भी कई युवा जंगल सफारी में नेचर गाइड बनकर पर्यटकों का मार्गदर्शन कर रहे हैं। आने वाले समय में ऐसे अवसर और बढ़ेंगे, जिससे उनकी आय में भी वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि साल भर यहां पर्यटन गतिविधियां तेजी से चलने की संभावना है, जिसका सीधा लाभ क्षेत्र के लोगों को मिलेगा। शर्मा ने कहा कि भोरमदेव का विकास तभी सफल होगा, जब स्थानीय लोग इसे अपनी धरोहर मानकर इसकी सुरक्षा करेंगे। उन्होंने सभी से पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन स्थलों की स्वच्छता बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि इस प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखना और आगे बढ़ाना हम सभी की जिम्मेदारी है।

स्वदेश दर्शन योजना से बदलेगी भोरमदेव की तस्वीर

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत भोरमदेव क्षेत्र के समग्र पर्यटन विकास के लिए 146 करोड़ रुपए स्वीकृत हुए हैं। इस राशि से प्रवेश द्वार, शेड, संग्रहालय, आधुनिक पार्क, पार्किंग, मेला स्थल, छेरकी महल, मड़वा महल, रामचूंआ और सरोदा बांध सहित विभिन्न पर्यटन स्थलों का विकास किया जा रहा है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से भोरमदेव राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित होगा।

6 किलोमीटर लंबी इको ट्रेल में मिलेगा प्रकृति के बीच रोमांच

वन विभाग द्वारा विकसित भोरमदेव इको ट्रेल लगभग 6 किलोमीटर लंबी है, जिसे पूरा करने में करीब 3 से 4 घंटे का समय लगता है। ट्रेल के दौरान पर्यटक प्राकृतिक वन, मनमोहक दृश्य, पक्षियों और तितलियों का अवलोकन, औषधीय वनस्पतियों की जानकारी तथा प्रशिक्षित नेचर गाइड के साथ सुरक्षित वन भ्रमण का आनंद ले सकेंगे।

बैगा समुदाय के हितग्राहियों को किया सोलर लालटेन वितरण

वन महोत्सव के अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने करिया आमा ग्राम में 51 काला आम के पौधों का रोपण कर काला आम उपवन की स्थापना की। इसके साथ ही जिलेभर में 50 हजार सीड बॉल रोपण अभियान का शुभारंभ किया। जिले में एक लाख पौधों के वितरण अभियान की शुरुआत करते हुए ई-रिक्शा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। कार्यक्रम में बैगा समुदाय के 100 हितग्राहियों को सोलर लालटेन और जैकेट भी वितरित की गई। 

भोरमदेव ईको ट्रेल हर शनिवार और रविवार को होगी आयोजित

भोरमदेव ईको ट्रेल का संचालन करियाआमा गेट स्थित भोरमदेव ईको कैंप से प्रत्येक शनिवार और रविवार को किया जाएगा। वन मंडलाधिकारी निखिल अग्रवाल ने बताया कि अनुभवी नेचर गाइड के साथ प्रतिभागियों को जंगल भ्रमण कराया जाएगा। इस दौरान वे पेड़-पौधों, औषधीय वनस्पतियों, पक्षियों, तितलियों, वन्यजीवों, स्थानीय भोजन, भोरमदेव मंदिर विरासत परिसर के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे। ईको ट्रेल में भाग लेने के लिए 1 हजार रुपए प्रति व्यक्ति शुल्क निर्धारित किया गया है। 

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष विशेषर पटेल, छत्तीसगढ़ कृषक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष सुरेश चंद्रवंशी, पुलिस जवाबदेही प्राधिकरण सदस्य भगत पटेल, जिला पंचायत अध्यक्ष ईश्वरी साहू, जिला पंचायत सदस्य राम कुमार भट्ट, डॉ वीरेन्द्र साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

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