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रायपुर में डॉक्टरों ने पांच घंटे की जटिल सर्जरी कर बचाई महिला की जान, ऑपरेशन के दौरान चढ़ाया गया 10 यूनिट खून

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रायपुर- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी एक राहत भरी खबर सामने आई है। द रूरल प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, डॉक्टरों की टीम ने गंभीर स्थिति में पहुंची एक महिला का करीब पांच घंटे तक जटिल ऑपरेशन किया। महिला की जान बचाने के लिए उपचार के दौरान 10 यूनिट खून का इस्तेमाल किया गया। यह मामला गंभीर मरीजों के उपचार में चिकित्सकीय टीम की भूमिका और समय पर उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं के महत्व को रेखांकित करता है।

प्रसव के दौरान बिगड़ी महिला की हालत

रिपोर्ट के मुताबिक, 32 वर्षीय महिला अपनी चौथी गर्भावस्था में थी। गर्भावस्था की अवधि पूरी होने के बाद उसे प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजन उसे सबसे पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। वहां से उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और फिर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया।

मेडिकल कॉलेज में प्रसव कराने के प्रयास के दौरान महिला की बच्चेदानी (गर्भाशय) और मूत्राशय को गंभीर क्षति पहुंची। गर्भस्थ शिशु की भी पेट में ही मृत्यु हो गई। दूसरी ओर, अत्यधिक रक्तस्राव के कारण महिला की हालत जानलेवा हो गई। गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल में रेफर किया गया। 

पांच घंटे तक चली जटिल सर्जरी

अस्पताल पहुंचने के बाद महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए तत्काल आपातकालीन सर्जरी की तैयारी की गई। स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. ज्योति जायसवाल के नेतृत्व में चिकित्सकों की टीम ने ऑपरेशन शुरू किया।

सर्जरी के दौरान डॉक्टरों के सामने दो बड़ी चुनौतियां थीं—गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त बच्चेदानी का उपचार करना और मूत्राशय की चोट को ठीक करना।

  • बच्चेदानी का ऑपरेशन: गर्भाशय को गंभीर क्षति पहुंचने के कारण डॉक्टरों को उसे निकालना पड़ा।

  • मूत्राशय की मरम्मत: सर्जरी विभाग की डॉ. प्राची के सहयोग से क्षतिग्रस्त मूत्राशय की मरम्मत की गई।

  • निश्चेतना और निगरानी: डॉ. अमृता की टीम ने ऑपरेशन के दौरान मरीज की स्थिति को नियंत्रित रखने में सहयोग दिया।

  • रक्त की व्यवस्था: अत्यधिक रक्तस्राव के कारण मरीज को कुल 10 यूनिट रक्त एवं रक्त घटक चढ़ाए गए।

करीब पांच घंटे तक चली इस जटिल सर्जरी में अलग-अलग विभागों के डॉक्टरों ने मिलकर काम किया। 

दो दिन वेंटिलेटर पर रहा उपचार

सर्जरी पूरी होने के बाद भी महिला की स्थिति गंभीर थी। उसे वेंटिलेटर पर रखकर क्रिटिकल केयर यूनिट (CCU) में भर्ती किया गया। वहां डॉ. ओ.पी. सुंदरानी की टीम की देखरेख में दो दिनों तक गहन उपचार और लगातार निगरानी की गई।

इस दौरान स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग, सर्जरी विभाग, निश्चेतना विभाग, क्रिटिकल केयर यूनिट, ब्लड बैंक और नर्सिंग टीम ने समन्वय से काम किया। लगातार उपचार के बाद महिला की हालत में सुधार हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, बाद में उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और वह अपने परिवार के पास लौट गई। 

डॉक्टरों की टीम के सामूहिक प्रयास की सराहना

पंडित जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी ने इस उपचार को चिकित्सा सेवा, समर्पण और महिला चिकित्सकों के प्रयासों का उदाहरण बताया।

अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने भी प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग समेत विभिन्न टीमों के प्रयासों की सराहना की। इस मामले में समय पर उच्च स्तरीय उपचार, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता और अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण रहा। 

इस घटना से क्या सीख मिलती है?

गंभीर प्रसूति जटिलताएं मां और शिशु दोनों के लिए जानलेवा हो सकती हैं। अत्यधिक रक्तस्राव और गर्भाशय या आसपास के अंगों को क्षति पहुंचने जैसी स्थितियों में तत्काल विशेषज्ञ चिकित्सा, जरूरत पड़ने पर रक्त की उपलब्धता और आपातकालीन सर्जरी बेहद महत्वपूर्ण होती है।

गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच और प्रसव के लिए ऐसी स्वास्थ्य सुविधा चुनना जहां आपातकालीन उपचार उपलब्ध हो, जोखिम को समय रहते पहचानने में मदद कर सकता है। हालांकि, इस मामले में जटिलता कैसे उत्पन्न हुई, इसकी विस्तृत चिकित्सकीय जांच के निष्कर्ष रिपोर्ट में नहीं दिए गए हैं।

निष्कर्ष

रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल में 32 वर्षीय महिला की जान बचाने के लिए की गई पांच घंटे की सर्जरी गंभीर प्रसूति जटिलताओं के उपचार में विशेषज्ञ टीम और बहु-विभागीय सहयोग के महत्व को सामने लाती है। बच्चेदानी और मूत्राशय को गंभीर क्षति, अत्यधिक रक्तस्राव और दो दिन वेंटिलेटर पर रहने के बावजूद महिला का स्वस्थ होकर घर लौटना उसके उपचार का महत्वपूर्ण परिणाम रहा।

मुंगेली में भीषण सड़क हादसा: मॉर्निंग वॉक पर निकले विधायक पुन्नूलाल मोहले के भाई समेत तीन ग्रामीणों की मौत

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मुंगेली- छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में गुरुवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे में तीन ग्रामीणों की मौत हो गई। हादसा उस समय हुआ, जब तीनों लोग सुबह टहलने के लिए निकले थे। इसी दौरान तेज रफ्तार पिकअप वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी। मृतकों में मुंगेली के विधायक और पूर्व मंत्री पुन्नूलाल मोहले के भाई अधीन दास मोहले भी शामिल बताए गए हैं। घटना के बाद क्षेत्र में शोक का माहौल है। 

दशरंगपुर के पास हुआ हादसा

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दुर्घटना मुंगेली जिले के दशरंगपुर गांव में, जरहागांव थाना क्षेत्र के अंतर्गत बिलासपुर-मुंगेली मुख्य मार्ग पर हुई। बताया गया है कि गुरुवार सुबह करीब 6:30 बजे तीनों ग्रामीण मॉर्निंग वॉक पर निकले थे। इसी दौरान मुंगेली की ओर जा रहे एक तेज रफ्तार पिकअप वाहन ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। 

टक्कर इतनी गंभीर थी कि तीनों की जान नहीं बचाई जा सकी। हालांकि, घटनास्थल पर उनकी मृत्यु हुई या अस्पताल ले जाने के बाद, इस संबंध में अलग-अलग रिपोर्टों में विवरण एक जैसा नहीं है।

विधायक के भाई समेत तीन की गई जान

प्रकाशित खबरों में मृतकों के नाम अधीन दास मोहले, बबलू बघेल और गंगाराम बताए गए हैं। अधीन दास मोहले को मुंगेली विधायक पुन्नूलाल मोहले का भाई बताया गया है। इस घटना से मृतकों के परिवारों और स्थानीय ग्रामीणों में शोक व्याप्त है। 

हादसे के बाद वाहन चालक की तलाश

कुछ स्थानीय समाचार रिपोर्टों के अनुसार, टक्कर के बाद पिकअप चालक मौके से फरार हो गया। पुलिस दुर्घटना से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है और वाहन की पहचान तथा चालक का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। एक स्थानीय रिपोर्ट में घटनास्थल के आसपास के CCTV फुटेज खंगालने का भी उल्लेख है। 

चालक की गिरफ्तारी, वाहन के पंजीकरण नंबर और पुलिस की आगे की कार्रवाई के संबंध में आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध होने पर ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।

सड़क सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

सुबह के समय सड़क पर टहलने निकले ग्रामीणों के साथ हुई इस दुर्घटना ने सड़क सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय रिपोर्टों में सड़क की स्थिति और तेज रफ्तार वाहनों की आवाजाही को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, दुर्घटना के सटीक कारणों का निर्धारण जांच के बाद ही किया जा सकेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रामीण सड़कों पर वाहन चालकों को निर्धारित गति सीमा का पालन करना चाहिए। पैदल चलने वालों की सुरक्षा के लिए सड़क किनारे सुरक्षित रास्ते, पर्याप्त रोशनी और यातायात नियंत्रण के उपाय भी महत्वपूर्ण हैं।

निष्कर्ष

मुंगेली के दशरंगपुर में हुआ यह हादसा तीन परिवारों के लिए गहरा दुख लेकर आया है। मॉर्निंग वॉक पर निकले तीन ग्रामीणों की मौत के बाद अब दुर्घटना की परिस्थितियों, संबंधित वाहन और चालक की भूमिका की जांच महत्वपूर्ण है। मामले में पुलिस की आधिकारिक जानकारी और जांच के निष्कर्षों से ही आगे की कार्रवाई स्पष्ट हो सकेगी।


निलंबित IPS रतन लाल डांगी के खिलाफ आरोप-पत्र जारी, पीड़िता की आपत्ति पर बदली गई अधिकारी की जिम्मेदारी

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छत्तीसगढ़ में निलंबित भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी रतन लाल डांगी के खिलाफ महिला की शिकायत से जुड़े विभागीय मामले में एक नया घटनाक्रम सामने आया है। प्रारंभिक जांच में आरोप प्रमाणित पाए जाने की जानकारी राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को दी है। वहीं, शिकायतकर्ता की आपत्ति के बाद विभागीय जांच में सरकार की ओर से पक्ष रखने वाले अधिकारी की जिम्मेदारी बदलकर महिला IPS अधिकारी पारुल माथुर को सौंपी गई है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला बिलासपुर निवासी एक महिला योग प्रशिक्षक की शिकायत से जुड़ा है, जो एक सब-इंस्पेक्टर (SI) की पत्नी हैं। महिला ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारी रतन लाल डांगी पर कथित तौर पर अनुचित व्यवहार, उत्पीड़न और अपने पद के प्रभाव का इस्तेमाल करने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि वर्ष 2017 से 2025 के बीच उन्हें विभिन्न तरीकों से प्रताड़ित किया गया। उन्होंने इस संबंध में पुलिस महानिदेशक (DGP) के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की थी। इसके बाद पुलिस मुख्यालय ने मामले की विभागीय जांच शुरू की।

महत्वपूर्ण बात: ये शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोप हैं। इन्हें अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।

20 अप्रैल 2026 को जारी हुआ आरोप-पत्र

दैनिक जागरण और नईदुनिया की रिपोर्टों के अनुसार, राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि प्रारंभिक जांच के बाद रतन लाल डांगी के खिलाफ 20 अप्रैल 2026 को औपचारिक विभागीय आरोप-पत्र जारी किया गया था।

प्रारंभिक जांच में आरोप प्रमाणित पाए जाने की जानकारी भी अदालत में दी गई। इसके आधार पर विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई आगे बढ़ाई गई है।

आरोप-पत्र जारी होने का अर्थ यह है कि संबंधित अधिकारी को विभागीय कार्यवाही में आरोपों का जवाब देने और अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाता है। यह अपने आप में किसी आपराधिक मामले में दोषसिद्धि के बराबर नहीं है।

पीड़िता ने जांच की निष्पक्षता पर उठाए सवाल

शिकायतकर्ता ने पहले की जांच प्रक्रिया पर असंतोष जताया था। उनका आरोप था कि जांच निष्पक्ष तरीके से नहीं की जा रही और संबंधित अधिकारी को बचाने की कोशिश हो रही है।

इसी आधार पर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए और महिला अधिकारी को जिम्मेदारी देने की मांग की। अदालत ने राज्य के गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक से इस संबंध में जवाब मांगा था।

यहां ध्यान देना जरूरी है कि जांच में पक्षपात के आरोप भी शिकायतकर्ता के दावे हैं; उन्हें किसी स्वतंत्र न्यायिक निष्कर्ष के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।

पारुल माथुर को मिली प्रस्तुतकर्ता अधिकारी की जिम्मेदारी

मामले में पहले IPS अधिकारी प्रशांत कुमार अग्रवाल को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी बनाया गया था। शिकायतकर्ता ने इस नियुक्ति पर आपत्ति जताई और संवेदनशील मामले में महिला अधिकारी की नियुक्ति की मांग की।

इसके बाद गृह विभाग ने 29 सितंबर 2026 को आदेश जारी कर IPS पारुल माथुर को नया प्रस्तुतकर्ता अधिकारी नियुक्त किया। वहीं, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG) दीपांशु विजय काबरा को जांच अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई।

दोनों भूमिकाओं में अंतर समझना महत्वपूर्ण है:

  • जांच अधिकारी: विभागीय जांच की प्रक्रिया संचालित करता है और संबंधित साक्ष्यों व तथ्यों का परीक्षण करता है।

  • प्रस्तुतकर्ता अधिकारी: विभाग की ओर से आरोपों और संबंधित दस्तावेजों को विभागीय जांच के समक्ष प्रस्तुत करता है।

इस बदलाव का उद्देश्य विभागीय जांच की निर्धारित प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है। केवल महिला अधिकारी की नियुक्ति से अपने आप आरोप सिद्ध नहीं हो जाते।

हाईकोर्ट ने याचिका का किया निराकरण

14 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित नईदुनिया की रिपोर्ट और 15 अक्टूबर को प्रकाशित अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार ने अदालत को आरोप-पत्र जारी होने और अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव की जानकारी दी।

सरकार के जवाब और की गई कार्रवाई पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने शिकायतकर्ता की याचिका का निराकरण कर दिया।

याचिका का निराकरण होने का अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने रतन लाल डांगी को आरोपों में दोषी ठहरा दिया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, इस सुनवाई में मुख्य विषय विभागीय जांच की प्रक्रिया और अधिकारियों की नियुक्ति था।

पहले भी निलंबित हो चुके हैं रतन लाल डांगी

रतन लाल डांगी को मार्च 2026 में विभागीय कार्रवाई के तहत निलंबित किया गया था। उस समय मीडिया रिपोर्टों में बताया गया था कि उनके आचरण को लेकर प्रारंभिक जांच में प्रथमदृष्टया प्रतिकूल तथ्य सामने आए थे।

डांगी ने पहले इन आरोपों से इनकार किया था और शिकायतकर्ता पर उन्हें ब्लैकमेल करने के आरोप लगाए थे। इसलिए मामले में शिकायतकर्ता के आरोपों के साथ-साथ अधिकारी के पक्ष को भी ध्यान में रखना जरूरी है। इन पर अंतिम निष्कर्ष सक्षम जांच या न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

आगे क्या होगा?

अब विभागीय जांच में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार संबंधित दस्तावेजों, साक्ष्यों और पक्षों के जवाबों पर विचार किया जाना है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर सक्षम प्राधिकारी नियमानुसार आगे की कार्रवाई कर सकता है।

फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों से यह स्पष्ट नहीं होता कि विभागीय जांच का अंतिम निष्कर्ष कब आएगा या उसके आधार पर आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ के निलंबित IPS अधिकारी रतन लाल डांगी के खिलाफ मामले में 20 अप्रैल 2026 को जारी विभागीय आरोप-पत्र और शिकायतकर्ता की आपत्ति के बाद प्रस्तुतकर्ता अधिकारी में किया गया बदलाव प्रमुख घटनाक्रम हैं। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से दी गई जानकारी के बाद याचिका का निराकरण किया है। अब मामले में आगे की स्थिति विभागीय जांच के निष्कर्षों और नियमानुसार की जाने वाली कार्रवाई पर निर्भर करेगी।

रायपुर में नौकरी की तलाश कर रहे युवक से ₹2.72 लाख की साइबर ठगी, फर्जी जॉब लिंक के जरिए क्रेडिट कार्ड से निकाली रकम

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रायपुर- राजधानी रायपुर में ऑनलाइन नौकरी की तलाश कर रहे एक युवक के साथ साइबर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। नौकरी और इंटरव्यू की प्रक्रिया पूरी कराने के नाम पर युवक के दो क्रेडिट कार्ड से कुल ₹2,72,600 निकाल लिए गए। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह घटना ऑनलाइन भर्ती प्रक्रिया के दौरान बरती जाने वाली लापरवाही और साइबर ठगों के बढ़ते जाल को लेकर चिंता बढ़ाती है।

रिज्यूमे अपलोड करने के बाद शुरू हुआ संपर्क

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पीड़ित नवीन कन्नौजे रायपुर के प्रोफेसर कॉलोनी क्षेत्र के निवासी हैं और नौकरी की तलाश कर रहे थे। इसी दौरान उनके Gmail पर नौकरी से संबंधित एक लिंक आया, जो Shine.com से जुड़ा हुआ प्रतीत होता था। लिंक खोलने के बाद उन्होंने अपना CV यानी बायोडाटा अपलोड कर दिया।

इसके बाद नौकरी और इंटरव्यू की प्रक्रिया के संबंध में उनसे संपर्क किया गया। शुरुआती तौर पर यह प्रक्रिया सामान्य भर्ती प्रक्रिया जैसी लगी, लेकिन आगे चलकर यही संपर्क कथित साइबर ठगी का माध्यम बन गया।

₹10 के ट्रांजैक्शन के बहाने ली गई कार्ड की जानकारी

रिपोर्ट के मुताबिक, इंटरव्यू और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी कराने के नाम पर युवक से केवल ₹10 का ऑनलाइन भुगतान करने को कहा गया। इस भुगतान के दौरान उन्होंने अपने क्रेडिट कार्ड की जानकारी दर्ज की।

इसके बाद उनके दो क्रेडिट कार्ड से चार अलग-अलग ट्रांजैक्शन में कुल ₹2,72,600 की रकम निकाल ली गई। पीड़ित के अनुसार, इन लेनदेन के दौरान उनसे OTP भी नहीं मांगा गया। हालांकि, कार्ड से रकम निकलने की सटीक तकनीकी प्रक्रिया की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

शिकायत के बाद पुलिस ने शुरू की जांच

जब पीड़ित को क्रेडिट कार्ड से बड़ी रकम निकलने की जानकारी मिली, तो उन्होंने साइबर हेल्पलाइन 1930 और संबंधित बैंकों में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पुरानी बस्ती थाने में भी मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई गई।

पुलिस अब शिकायत से संबंधित तथ्यों और वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है। उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों में आरोपियों की पहचान या रकम की वापसी के संबंध में कोई पुष्ट जानकारी नहीं दी गई है।

नौकरी तलाशने वालों के लिए जरूरी सावधानियां

साइबर अपराधी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को निशाना बनाने के लिए फर्जी भर्ती लिंक, नकली इंटरव्यू कॉल, रजिस्ट्रेशन फीस और दस्तावेज सत्यापन जैसे तरीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसलिए ऑनलाइन नौकरी के लिए आवेदन करते समय कुछ सावधानियां बेहद जरूरी हैं:

  • नौकरी देने वाली कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट और ईमेल डोमेन की जांच करें।

  • किसी अनजान लिंक पर क्रेडिट कार्ड, बैंक खाते या भुगतान संबंधी जानकारी दर्ज करने से बचें।

  • इंटरव्यू, जॉब ऑफर या रजिस्ट्रेशन के नाम पर मांगे गए भुगतान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें।

  • बैंकिंग अलर्ट चालू रखें और किसी भी संदिग्ध लेनदेन पर तुरंत बैंक से संपर्क करें।

  • साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।

निष्कर्ष

रायपुर का यह मामला बताता है कि नौकरी की तलाश के दौरान किसी भी ऑनलाइन लिंक पर भरोसा करने से पहले उसकी प्रामाणिकता जांचना कितना महत्वपूर्ण है। मामूली भुगतान के नाम पर कार्ड की जानकारी दर्ज कराना भी गंभीर वित्तीय जोखिम पैदा कर सकता है। युवाओं को सतर्क रहने के साथ-साथ किसी भी संदिग्ध भर्ती प्रक्रिया की जानकारी संबंधित कंपनी और आधिकारिक स्रोतों से सत्यापित करनी चाहिए।


श्री सत्य साईं हेल्थ एंड एजुकेशन ट्रस्ट का स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और मानव कल्याण के क्षेत्र में व्यापक सेवा मिशन

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हृदय चिकित्सा से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तक निःस्वार्थ सेवा का विस्तार

रायपुर-  श्री सत्य साईं बाबा के दिव्य संकल्प से प्रेरित होकर श्री सत्य साईं हेल्थ एंड एजुकेशन ट्रस्ट, चेयरमैन सी. श्रीनिवास जी के नेतृत्व में स्वास्थ्य सेवा, चिकित्सा शिक्षा, नर्सिंग, कौशल विकास और अनुसंधान के क्षेत्र में व्यापक सेवा मिशन संचालित कर रहा है।

इस मिशन का प्रमुख उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद लोगों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराना है, ताकि आर्थिक कठिनाइयों के कारण कोई भी व्यक्ति उपचार से वंचित न रहे और प्रत्येक बच्चे को स्वस्थ एवं सम्मानजनक जीवन का अवसर मिल सके।

प्रमुख उपलब्धियाँ

बच्चों के लिए निःशुल्क हृदय चिकित्सा सेवाओं का विस्तार

ट्रस्ट ने बच्चों में जन्मजात एवं अन्य हृदय रोगों के उपचार के लिए विशेष अस्पतालों की स्थापना कर देश-विदेश में चिकित्सा सेवाओं का विस्तार किया है।

- 2012 में रायपुर, छत्तीसगढ़ में श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल की स्थापना की गई, जहाँ बच्चों को निःशुल्क हृदय चिकित्सा और शल्य चिकित्सा सेवाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं।

- 2016 में पलवल, हरियाणा में अस्पताल की स्थापना कर उत्तर भारत के जरूरतमंद बच्चों तक हृदय चिकित्सा सेवाएँ पहुँचाई गईं।

- 2018 में खारघर, नवी मुंबई, महाराष्ट्र में चिकित्सा सेवाओं का विस्तार किया गया।

- 2022 में फिजी में भारत के बाहर जरूरतमंद बच्चों के लिए निःशुल्क हृदय चिकित्सा सेवाओं की पहल की गई।

- 2023 में श्रीलंका में बच्चों के हृदय उपचार के लिए सेवा मिशन का विस्तार किया गया।

- 2024 में कोंडापाका, तेलंगाना में अस्पताल की स्थापना के माध्यम से दक्षिण भारत में बच्चों के लिए हृदय चिकित्सा सेवाओं को और अधिक सुलभ बनाया गया।

इन संस्थानों के माध्यम से विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श, आधुनिक चिकित्सा सुविधाएँ, हृदय शल्य चिकित्सा और उपचार के बाद आवश्यक देखभाल उपलब्ध कराई जाती है। इन सेवाओं का उद्देश्य केवल रोग का उपचार करना नहीं, बल्कि बच्चों और उनके परिवारों को स्वस्थ एवं बेहतर भविष्य की आशा प्रदान करना है।

 मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता 

ट्रस्ट ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण पहल की है। विभिन्न केंद्रों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं, माताओं, नवजात शिशुओं और बच्चों को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं।

- 2021 में रायपुर, छत्तीसगढ़ में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया गया।

- 2022 में रायवाला, उत्तराखंड में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई।

- 2022 में यवतमाल, महाराष्ट्र में जरूरतमंद माताओं और बच्चों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया गया।

- 2022 में पलवल, हरियाणा में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ किया गया।

- 2022 में जमशेदपुर, झारखंड में जरूरतमंद वर्गों तक मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने की पहल की गई।

इन सेवाओं के माध्यम से सुरक्षित मातृत्व, नवजात शिशुओं की देखभाल और बच्चों के समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने के राष्ट्रीय प्रयासों में भी योगदान दिया जा रहा है।

चिकित्सा सेवा के साथ शिक्षा, कौशल विकास और अनुसंधान 

श्री सत्य साईं हेल्थ एंड एजुकेशन ट्रस्ट का कार्य केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं है। ट्रस्ट नर्सिंग शिक्षा, स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण, कौशल विकास और अनुसंधान के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को अधिक प्रभावी और सशक्त बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।

नर्सिंग कॉलेजों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से सेवाभावी, दक्ष और संवेदनशील स्वास्थ्यकर्मियों को तैयार किया जा रहा है, ताकि समाज के विभिन्न वर्गों को बेहतर और मानवीय चिकित्सा सेवाएँ उपलब्ध हो सकें।

सेवा का प्रभाव

ट्रस्ट की पहल से हृदय रोग से पीड़ित बच्चों, माताओं, नवजात शिशुओं और अन्य जरूरतमंद मरीजों को समय पर उपचार, विशेषज्ञ चिकित्सा परामर्श और आवश्यक देखभाल प्राप्त हो रही है। निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण सेवाओं के माध्यम से अनेक परिवारों को आर्थिक बोझ से राहत मिली है और उन्हें बेहतर स्वास्थ्य तथा सुरक्षित भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिला है।

सी. श्रीनिवास जी के नेतृत्व में श्री सत्य साईं हेल्थ एंड एजुकेशन ट्रस्ट भगवान श्री सत्य साईं बाबा के दिव्य संकल्प को साकार करने की दिशा में निरंतर अग्रसर है। ट्रस्ट चिकित्सा सेवा को व्यवसाय नहीं, बल्कि मानवता की सेवा के रूप में देखता है। प्रेम, करुणा, समानता और निःस्वार्थ सेवा इस मिशन के मूल आधार हैं।

भगवान श्री सत्य साईं बाबा का संदेश, “मानव सेवा ही माधव सेवा है”, इस संपूर्ण सेवा अभियान की प्रेरणा है।

हृदय रोग से पीड़ित बच्चों को नया जीवन देने से लेकर माताओं और नवजात शिशुओं की देखभाल तक, ट्रस्ट की सेवा यात्रा प्रत्येक जीवन को अनमोल मानने और मानवता के प्रति समर्पण का प्रतीक है।

श्री सत्य साईं हेल्थ एंड एजुकेशन ट्रस्ट का संकल्प है कि सेवा, करुणा और प्रेम के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएँ अधिक से अधिक जरूरतमंद लोगों तक पहुँचाई जाएँ।

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बाघ के हमले का वीडियो शेयर करने पर डोनाल्ड ट्रंप की आलोचना, मृत युवक के परिवार ने लगाई फुटेज प्रसारित न करने की गुहार

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वॉशिंगटन- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवादों में आ गए हैं। ब्रिटेन के एक वन्यजीव पार्क में बाघ के हमले में 23 वर्षीय युवक विलियम चैपमैन की मौत के बाद ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर घटना से जुड़ा वीडियो साझा किया। इसके बाद उन्होंने एक AI-जनरेटेड वीडियो भी पोस्ट किया, जिसमें वह बाघ के साथ खेलते और उसे गले लगाते दिखाई देते हैं। इन पोस्टों को लेकर सोशल मीडिया पर आलोचना हुई है। मृतक के परिवार ने लोगों से घटना की फुटेज साझा करना बंद करने की अपील की है। 

क्या है पूरा मामला?

यह घटना 10 अक्टूबर 2026 को इंग्लैंड के डोनकास्टर के पास स्थित Yorkshire Wildlife Park में हुई थी। रिपोर्टों के अनुसार, विलियम चैपमैन बाघ के बाड़े में प्रवेश कर गए थे, जहां अमूर टाइगर ने उन पर हमला कर दिया। युवक की घटनास्थल पर मौत हो गई।

इसके बाद 13 अक्टूबर को ट्रंप ने हमले से जुड़ा वीडियो Truth Social पर साझा किया। पोस्ट के साथ उन्होंने लिखा, “Don't ever mess with nature!” यानी प्रकृति से कभी खिलवाड़ न करें। वीडियो में हमले के दृश्य दिखाई देते हैं, लेकिन उसमें युवक की मृत्यु का क्षण नहीं दिखाया गया था। 

AI वीडियो से क्यों बढ़ा विवाद?

हमले का वीडियो साझा करने के बाद ट्रंप ने एक अन्य AI-जनरेटेड वीडियो पोस्ट किया। इसमें उन्हें बाघ के साथ कुश्ती करते, उसके साथ खेलते और अंत में उसे गले लगाते दिखाया गया। वीडियो में लोकप्रिय गीत “The Lion Sleeps Tonight” भी इस्तेमाल किया गया था।

इस पोस्ट की आलोचना इसलिए हुई क्योंकि उसी घटना में जान गंवाने वाले युवक का परिवार शोक में था और लोगों से वीडियो का प्रसार रोकने की अपील कर रहा था। आलोचकों ने इसे मृतक और उसके परिवार की भावनाओं के प्रति असंवेदनशील बताया।

परिवार की अपील: वीडियो शेयर करना बंद करें

मृतक के परिवार ने बयान जारी कर कहा कि वे अपने बेटे की मौत से बेहद दुखी हैं और घटना से जुड़े वीडियो का लगातार प्रसारित होना उन्हें गंभीर मानसिक पीड़ा पहुंचा रहा है। परिवार ने लोगों से वीडियो शेयर करना बंद करने और उनकी निजता का सम्मान करने की अपील की। परिवार ने यह भी कहा कि विलियम की मौत के पीछे की परिस्थितियों का पता संबंधित अधिकारी लगाएं।

वन्यजीव संरक्षण संगठन ने भी जताई चिंता

वन्यजीव संरक्षण संगठन Born Free Foundation के कार्यकारी अध्यक्ष विल ट्रैवर्स ने ट्रंप के AI वीडियो की आलोचना की। उनके अनुसार, इस तरह के वीडियो इंसानों और खतरनाक जंगली जानवरों के बीच अवास्तविक और जोखिमपूर्ण नजदीकी को बढ़ावा दे सकते हैं, जिससे मनुष्यों और जानवरों दोनों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। 

बाघ के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी?

घटना में शामिल अमूर टाइगर का नाम अल्ताई बताया गया है। Yorkshire Wildlife Park ने कहा है कि बाघ को इच्छामृत्यु नहीं दी जाएगी। घटना के बाद पार्क बंद रहा और स्थानीय अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था की जांच शुरू की। विलियम की मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसकी जांच और कोरोनर की प्रक्रिया के जरिए पड़ताल की जा रही है। 

सोशल मीडिया पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?

इस मामले ने सोशल मीडिया पर तीन प्रमुख मुद्दों को लेकर बहस छेड़ी है:

  • किसी व्यक्ति की मौत से जुड़े संवेदनशील वीडियो को सार्वजनिक रूप से साझा करने की नैतिकता।

  • AI से बनाए गए वीडियो में वास्तविक त्रासदी की नकल करने की जिम्मेदारी।

  • वायरल सामग्री के प्रसार से पीड़ित परिवारों की निजता और मानसिक स्थिति पर पड़ने वाला प्रभाव।

ट्रंप की पोस्ट के पीछे का उद्देश्य स्पष्ट नहीं है। हालांकि, परिवार की अपील और वन्यजीव संरक्षण संगठन की प्रतिक्रिया के बाद यह मामला ऑनलाइन सामग्री के जिम्मेदार इस्तेमाल को लेकर चर्चा में आ गया है। 

निष्कर्ष

ब्रिटेन में बाघ के हमले में विलियम चैपमैन की मौत के बाद डोनाल्ड ट्रंप की सोशल मीडिया पोस्ट ने अंतरराष्ट्रीय विवाद को जन्म दिया है। मृतक के परिवार ने वीडियो का प्रसार रोकने की अपील की है, जबकि वन्यजीव संरक्षण विशेषज्ञों ने AI वीडियो के संभावित जोखिमों पर चिंता जताई है। घटना की परिस्थितियों की जांच जारी है।



केरल के त्रिशूर में दोहरी हत्या से सनसनी, पत्नी और 4 साल के बेटे की हत्या का आरोप; आरोपी पति अस्पताल में भर्ती

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त्रिशूर- केरल के त्रिशूर जिले के वलप्पाड इलाके में गुरुवार तड़के एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक व्यक्ति पर अपनी पत्नी और चार वर्षीय बेटे की हत्या करने का आरोप है। घटना के बाद आरोपी ने कथित तौर पर खुदकुशी करने की कोशिश की, जिसके बाद उसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

क्या है पूरा मामला?

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मृतकों की पहचान विस्मया और उनके छोटे बेटे दक्षिण के रूप में हुई है। घटना 15 अक्टूबर की रात करीब 12:30 से 1:30 बजे के बीच वलप्पाड बीच के पास स्थित घर में हुई।

पुलिस की प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, आरोपी पति विजेश पर धारदार हथियार से पत्नी और बेटे पर हमला करने का आरोप है। घटना के बाद दोनों को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। आरोपी भी घायल अवस्था में मिला और उसे इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। 

परिवार में विवाद की बात आई सामने

प्रारंभिक मीडिया रिपोर्टों में दंपती के बीच घरेलू विवाद होने की बात सामने आई है। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि घटना से पहले परिवार में क्या परिस्थितियां थीं और विवाद की कोई भूमिका थी या नहीं।

कुछ रिपोर्टों के अनुसार, दंपती को पारिवारिक विवाद के संबंध में गुरुवार सुबह पुलिस थाने में उपस्थित होने के लिए कहा गया था। हालांकि, घटना के पीछे की पूरी वजह अभी जांच का विषय है। किसी कथित कारण को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। 

चीख सुनकर परिजन पहुंचे

रिपोर्टों के अनुसार, महिला की चीख सुनकर उनके भाई ने कमरे का दरवाजा खोलने की कोशिश की। इसके बाद परिजन मौके पर पहुंचे और घायलों को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की। पुलिस को सूचना मिलने के बाद अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे और मामले की जांच शुरू की।

घटना के क्रम और इसमें शामिल लोगों की भूमिका को लेकर पुलिस परिजनों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर रही है। 

आरोपी की हालत गंभीर

घटना के बाद आरोपी पति भी घायल अवस्था में मिला। रिपोर्टों के मुताबिक, उसने कथित तौर पर खुदकुशी का प्रयास किया था। उसे त्रिशूर सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज चल रहा था।

आरोपी की चिकित्सकीय स्थिति और आगे की पुलिस कार्रवाई के बारे में नवीनतम आधिकारिक जानकारी की प्रतीक्षा है। 

पुलिस जांच में किन बिंदुओं पर ध्यान?

पुलिस मामले में कई पहलुओं की जांच कर रही है:

  • घटना से पहले परिवार में हुए विवाद और परिस्थितियां।

  • घटनास्थल से जुटाए जाने वाले साक्ष्य।

  • परिजनों और अन्य संबंधित व्यक्तियों के बयान।

  • घटना का सटीक क्रम और आरोपी की भूमिका।

  • पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा अन्य फॉरेंसिक साक्ष्य।

जांच पूरी होने और अदालत में साक्ष्यों की समीक्षा के बाद ही मामले के सभी पहलुओं पर अंतिम निष्कर्ष निकाला जा सकेगा।

निष्कर्ष

त्रिशूर के वलप्पाड इलाके में पत्नी और छोटे बेटे की मौत की इस घटना ने स्थानीय क्षेत्र में चिंता पैदा कर दी है। पुलिस मामले की जांच कर रही है, जबकि आरोपी पति अस्पताल में उपचाराधीन बताया गया है। फिलहाल घटना के पीछे की परिस्थितियों और सभी कानूनी पहलुओं की पुष्टि जांच के निष्कर्षों के आधार पर होगी।


छत्तीसगढ़ के ₹3,200 करोड़ के कथित शराब घोटाले में बड़ा अपडेट, ACB-EOW ने दाखिल की 27 हजार पन्नों की 10वीं चार्जशीट; 20 लोगों और 22 कंपनियों के नाम

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रायपुर- छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कथित शराब घोटाले की जांच में एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। राज्य के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने इस मामले में 10वीं पूरक चार्जशीट रायपुर की विशेष अदालत में दाखिल की है। समाचार एजेंसी PTI के अनुसार, करीब 27,000 पन्नों के दस्तावेजों वाली इस चार्जशीट में 20 व्यक्तियों और 22 फर्मों एवं कंपनियों को आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, मामले में कथित वित्तीय अनियमितताओं का कुल आकार लगभग ₹3,200 करोड़ है।

 
चार्जशीट में क्या है खास?

जांच एजेंसी की ओर से दाखिल दस्तावेजों में कथित शराब उत्पादन, परिवहन, बिक्री, कमीशन के लेन-देन और अवैध कमाई को अलग-अलग माध्यमों से निवेश करने से जुड़े आरोपों का विवरण शामिल है।

इस कार्रवाई की प्रमुख बातें हैं:

  • चार्जशीट: मामले में 10वीं पूरक चार्जशीट।

  • दस्तावेज: लगभग 27,000 पन्ने।

  • नामजद आरोपी: 20 व्यक्ति।

  • फर्म एवं कंपनियां: 22।

  • कथित घोटाले का आकार: लगभग ₹3,200 करोड़।

  • अदालत: रायपुर की विशेष भ्रष्टाचार निवारण अदालत।

ये आंकड़े जांच एजेंसी की कार्रवाई और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं। चार्जशीट दाखिल होना अपने-आप में किसी आरोपी का अपराध अदालत में सिद्ध होना नहीं है। 

जांच एजेंसी के अनुसार क्या हुआ था?

ACB-EOW के आरोपों के अनुसार, कथित अनियमितताएं राज्य की आबकारी व्यवस्था, शराब के उत्पादन और वितरण तथा सरकारी दुकानों में बिक्री से जुड़ी थीं। एजेंसी ने आरोप लगाया है कि कुछ मामलों में बिना उचित आबकारी शुल्क के शराब की बिक्री, आधिकारिक रिकॉर्ड से बाहर लेन-देन और कथित कमीशन वसूली के जरिए अवैध कमाई की गई।

जांच में कथित रकम के लेन-देन, हवाला और आंगड़िया नेटवर्क तथा कंपनियों और संपत्तियों में निवेश की भी पड़ताल की गई है। इन सभी बिंदुओं पर अंतिम निष्कर्ष अदालत में पेश साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा। 

मामला किस अवधि से जुड़ा है?

जांच एजेंसियों के अनुसार, कथित शराब घोटाले का संबंध मुख्य रूप से वर्ष 2019 से 2022 के बीच की आबकारी व्यवस्था और लेन-देन से है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी इस मामले में कथित अपराध से अर्जित आय और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन की जांच कर रहा है।

इस प्रकरण में राज्य की आबकारी व्यवस्था, सरकारी राजस्व और निजी कंपनियों के बीच हुए कथित लेन-देन की भूमिका जांच के दायरे में है। अलग-अलग एजेंसियां अपने-अपने कानूनी अधिकारों के तहत जांच और अभियोजन की कार्रवाई कर रही हैं। 

किन लोगों और कंपनियों के नाम सामने आए?

PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, इस 10वीं पूरक चार्जशीट में पूर्व कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल सहित 20 व्यक्तियों और 22 फर्मों एवं कंपनियों को आरोपी बनाया गया है। रिपोर्ट में यश टुटेजा और अनवर ढेबर से जुड़े मामले की व्यापक जांच का भी संदर्भ मिलता है। प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका और उसके विरुद्ध आरोप अलग-अलग हो सकते हैं; इसलिए किसी नाम को शामिल किए जाने को दोष सिद्ध होना नहीं माना जाना चाहिए। 

₹3,200 करोड़ की रकम का क्या अर्थ है?

जांच एजेंसी ने कथित घोटाले का आकार लगभग ₹3,200 करोड़ बताया है। यह जांच में सामने आए कथित वित्तीय प्रभाव और अवैध कमाई से संबंधित अनुमान है। इसे सीधे तौर पर अदालत द्वारा सिद्ध सरकारी नुकसान या सभी आरोपियों से वसूली जाने वाली अंतिम रकम नहीं माना जाना चाहिए।

मामले में कथित कमीशन, बिना उचित शुल्क के शराब की बिक्री और अन्य वित्तीय लेन-देन की जांच की गई है। अंतिम वित्तीय जिम्मेदारी और किसी व्यक्ति या कंपनी की भूमिका का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगा।

क्या एक और मामले में भी चार्जशीट दाखिल हुई?

हां। इसी दौरान ACB-EOW ने राज्य की सरकारी शराब निगम से जुड़े कथित ₹182.98 करोड़ के मैनपावर भुगतान अनियमितता मामले में छठी पूरक चार्जशीट भी दाखिल की है। यह शराब घोटाले से संबंधित व्यापक जांच के साथ खबरों में सामने आया एक अलग मामला है। दोनों मामलों को कानूनी रूप से एक ही प्रकरण नहीं समझना चाहिए।

अब आगे क्या होगा?

चार्जशीट दाखिल होने के बाद संबंधित विशेष अदालत में मामले की आगे की न्यायिक प्रक्रिया चलेगी। अदालत दस्तावेजों, साक्ष्यों और आरोपों की कानूनी समीक्षा करेगी। आवश्यकता पड़ने पर जांच एजेंसियां आगे की जांच या अतिरिक्त अभियोजन संबंधी कार्रवाई भी कर सकती हैं।

मामले में आरोपियों की भूमिका, कथित वित्तीय लेन-देन और सरकारी राजस्व पर प्रभाव को लेकर अंतिम निष्कर्ष अदालत के फैसले के बाद ही निकाला जा सकेगा।

निष्कर्ष: छत्तीसगढ़ के कथित ₹3,200 करोड़ के शराब घोटाले में 27,000 पन्नों की 10वीं पूरक चार्जशीट दाखिल होना जांच का महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। इसमें 20 व्यक्तियों और 22 कंपनियों को आरोपी बनाया गया है। अब इस मामले में अदालत की आगे की कार्यवाही और प्रस्तुत साक्ष्यों पर नजर रहेगी।


छत्तीसगढ़ शिक्षक भर्ती 12,489 पद: हाईकोर्ट के फैसले की पूरी जानकारी

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छत्तीसगढ़ शिक्षक भर्ती पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 12,489 पदों के आरक्षण रोस्टर को झटका; नियुक्तियों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार

बिलासपुर- छत्तीसगढ़ में शिक्षक भर्ती को लेकर एक बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। वर्ष 2023 में विज्ञापित 12,489 शिक्षक एवं सहायक शिक्षक पदों की भर्ती में लागू आरक्षण रोस्टर को लेकर हाईकोर्ट के फैसले ने अभ्यर्थियों और पहले से नियुक्त शिक्षकों के बीच चिंता बढ़ा दी है। प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, हाईकोर्ट ने संबंधित आरक्षण रोस्टर को निरस्त कर दिया है। हालांकि, इस फैसले का सभी नियुक्तियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह संबंधित न्यायिक आदेशों और सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले की स्थिति पर निर्भर करेगा।

क्या है पूरा मामला?

मामला 4 मई 2023 को जारी शिक्षक भर्ती विज्ञापन से जुड़ा है। इस भर्ती के तहत प्रदेश में शिक्षक एवं सहायक शिक्षक के कुल 12,489 पदों पर नियुक्तियां की जानी थीं। भर्ती प्रक्रिया में इस्तेमाल किए गए आरक्षण रोस्टर को अदालत में चुनौती दी गई थी।

याचिकाकर्ताओं की ओर से आरक्षण निर्धारण की वैधता पर सवाल उठाए गए। विवाद का एक प्रमुख पहलू वर्ष 2012 की आरक्षण व्यवस्था और उसके आधार पर तैयार किए गए रोस्टर से संबंधित था। इस मामले में अदालत के सामने यह सवाल था कि पहले की न्यायिक कार्यवाही के बाद संबंधित आरक्षण व्यवस्था के आधार पर भर्ती प्रक्रिया किस सीमा तक आगे बढ़ाई जा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी नजरें

इस प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले की भूमिका महत्वपूर्ण है। भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की अनुमति और आरक्षण व्यवस्था की अंतिम वैधता दो अलग-अलग कानूनी प्रश्न हैं। इसलिए अभ्यर्थियों को किसी भी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले हाईकोर्ट के मूल आदेश और सुप्रीम कोर्ट में हुई कार्यवाही की स्थिति देखनी चाहिए।

क्या पहले से नियुक्त शिक्षकों की नौकरी पर पड़ेगा असर?

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल पहले से नियुक्त शिक्षकों की नौकरी को लेकर है। उपलब्ध प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, तत्काल सभी नियुक्त शिक्षकों को हटाने का निर्देश सामने नहीं आया है। लेकिन इसका अर्थ यह भी नहीं है कि भविष्य में किसी प्रकार का प्रभाव पड़ने की संभावना पूरी तरह समाप्त हो गई है।

नियुक्त शिक्षकों की स्थिति, आगे होने वाली नियुक्तियों और भर्ती प्रक्रिया के अगले चरणों पर अंतिम असर संबंधित अदालतों के आदेशों तथा राज्य सरकार की आगे की कार्रवाई से स्पष्ट होगा।

क्या दोबारा होगी भर्ती?

फिलहाल केवल आरक्षण रोस्टर को लेकर आए फैसले के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि सभी 12,489 पदों पर दोबारा परीक्षा आयोजित की जाएगी या पूरी भर्ती प्रक्रिया नए सिरे से शुरू होगी। इस संबंध में किसी नए रोस्टर, संशोधित विज्ञापन, नई मेरिट सूची या पुनः भर्ती का निर्णय तभी निश्चित माना जा सकता है, जब सक्षम प्राधिकरण या अदालत की ओर से स्पष्ट आदेश जारी किया जाए।

अभ्यर्थियों के लिए क्या जरूरी है?

शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों को विभाग की आधिकारिक सूचना, हाईकोर्ट के मूल आदेश और सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले की नवीनतम स्थिति पर नजर रखनी चाहिए। सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट खबरों के आधार पर नौकरी समाप्त होने, नई परीक्षा या भर्ती रद्द होने का निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए।

निष्कर्ष: छत्तीसगढ़ की 12,489 पदों वाली शिक्षक भर्ती में आरक्षण रोस्टर का विवाद एक महत्वपूर्ण न्यायिक मुद्दा बन गया है। अब अभ्यर्थियों, चयनित उम्मीदवारों और पहले से कार्यरत शिक्षकों की नजरें आगे के न्यायिक आदेशों तथा राज्य सरकार के आधिकारिक निर्णय पर टिकी हैं।


चेतन साहू हत्याकांड में तीन दोषियों को उम्रकैद, प्रेम संबंधों के विवाद में हुई थी युवक की हत्या

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 दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में पुलिसकर्मी के बेटे चेतन साहू की हत्या के मामले में अदालत ने तीन आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। प्रथम अपर सत्र न्यायालय, दुर्ग ने रोशनी लकड़ा, आकाश देशलहरा और कुलेश्वर साहू को दोषी ठहराते हुए यह फैसला सुनाया। अदालत ने दोषियों पर अलग-अलग धाराओं के तहत अर्थदंड भी लगाया है। आदेश के मुताबिक, सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।


दिसंबर 2024 में हुई थी हत्या

मामला 29 दिसंबर 2024 की रात का है। पुलिस की जांच के अनुसार, चेतन साहू और रोशनी लकड़ा के बीच पहले से जान-पहचान थी। बाद में रोशनी की नजदीकियां किसी अन्य युवक से बढ़ गई थीं। दिसंबर 2024 में रोशनी अपनी मां के साथ दुर्ग आई थी। इसी दौरान चेतन उससे लगातार संपर्क करने की कोशिश कर रहा था।

पुलिस के मुताबिक, लगातार फोन आने से परेशान होकर रोशनी ने इसकी जानकारी अपने नए प्रेमी को दी। इसके बाद चेतन को कसारीडीह सिविल लाइन स्थित क्वार्टर के पास मिलने के लिए बुलाया गया।

अस्पताल के पास विवाद के बाद किया गया हमला

जांच के अनुसार, 29 दिसंबर की रात करीब 8:30 बजे आयुष्मान अस्पताल के पास विवाद हुआ। इसी दौरान चेतन पर लाठी-डंडों और अन्य घातक हथियारों से हमला किया गया। गंभीर चोटें लगने के कारण उसकी मौत हो गई।

घटना के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और रोशनी लकड़ा, आकाश देशलहरा तथा कुलेश्वर साहू को गिरफ्तार किया। मामले में तीन नाबालिगों को भी पकड़ा गया था। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया था।

अदालत ने अलग-अलग धाराओं में सुनाई सजा

मामले की सुनवाई के बाद प्रथम अपर सत्र न्यायालय, दुर्ग ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराया। सजा वारंट के अनुसार, BNS की धारा 103(1)/190 और 61(2) के तहत आजीवन कारावास के साथ 500-500 रुपये का अर्थदंड लगाया गया है।

इसके अलावा, धारा 191(2) के तहत दो वर्ष और धारा 191(3) तथा 118(1) के तहत तीन-तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

छत्तीसगढ़ की शक्तिपीठ परियोजना : पांच प्रमुख शक्तिपीठों का होगा विकास

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 धनंजय राठौर (संयुक्त संचालक, जनसंपर्क रायपुर)

रायपुर : पर्यटन एक ऐसी यात्रा या भ्रमण है, जो मनोरंजन या फुर्सत के क्षणों का आनंद उठाने के उद्देश्य से किया जाता है। अतिथि देवो भवः भारतीय परंपरा प्राचीन काल से रही है। छत्तीसगढ़ में लगभग 138 स्थलों को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व के आधार पर पर्यटन स्थल के रूप में प्राथमिकता दी गई है, जिसमें 58 स्मारकों को 11 अभ्यारण 03 राष्ट्रीय उद्यान को संरक्षित घोषित किया गया है। पर्यटन मानव की प्राचीन एवं मौलिक प्रवृत्ति है। पर्यटन धरातलीय तथा मानवीय विभिन्नताओं विविधताओं का अवलोकन कर ज्ञान की बढ़ोतरी एवं मनोरंजन करता है। छत्तीसगढ़ प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन का एक प्रमुख गंतव्य है। यहाँ के प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक धरोहर ने इसे एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया है।


छत्तीसगढ़ सरकार ने उत्तराखंड के चार धाम की तर्ज पर राज्य के प्रमुख धार्मिक स्थलों को जोड़ने के लिए शक्तिपीठ परियोजना की शुरुआत की है। इस परियोजना के तहत लगभग 1,000 किलोमीटर लंबे आध्यात्मिक और धार्मिक पर्यटन कॉरिडोर का विकास किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ के प्रमुख शक्तिपीठों एवं महत्वपूर्ण पूजा स्थलों का विकास, सौंदर्याकरण तथा आधारभूत सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। शक्तिपीठों में श्रद्धालुओं के लिए सुगम पहुंच मार्ग, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छता, विश्राम स्थल एवं सुरक्षा व्यवस्था जैसी आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

छत्तीसगढ़ आस्था पथ (शक्तिपीठ भ्रमण) योजना प्रारंभ करने जा रहे हैं, जिसमें पांचों शक्तिपीठों का भ्रमण एवं दर्शन कराया जाएगा, इसके लिए सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में 5 करोड़ का प्रावधान किया है। प्रदेश के पांच शक्तिपीठों कुदरगढ़, डोगरगढ़, रतनपुर, चन्द्रपुर एवं दंतेवाड़ा को शक्तिपीठ सर्किट के रूप में विकसित करने के लिए बजटीय प्रावधान किया है। इस परियोजना के तहत रतनपुर स्थित मां महामाया, चंद्रपुर की मां चंद्रहासनी, डोंगरगढ़ की मां बम्लेश्वरी, दंतेवाड़ा की मां दंतेश्वरी और सूरजपुर के कुदरगढ़ मंदिर को एक धार्मिक सर्किट के रूप में विकसित किया जाना था। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सरकार गठन के बाद बजट में इसके लिए पांच करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया गया था, जिससे प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिलने की उम्मीद थी। इन पाँचों शक्तिपीठों को बेहतर सड़कों, यात्री सुविधाओं, विश्राम स्थलों और सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर से जोड़ना। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल और जिला प्रशासन द्वारा इन मंदिरों में सौंदर्यीकरण और श्रद्धालुओं की सुविधाओं का काम तेजी से किया जा रहा है।

केंद्र सरकार की प्रसाद (PRASHAD)योजना के तहत छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले स्थित माँ महामाया मंदिर, रतनपुर के समग्र विकास के लिए 200 करोड़ की कार्ययोजना तैयार की गई है, जिसे केन्द्र सरकार के पर्यटन मंत्रालय को प्रेषित की गई है। उक्त कार्य योजना को स्वीकृति मिलते ही एंजेसी तय कर कार्य प्रारंभ की जाएगी। यह मंदिर 11वीं-12वीं शताब्दी के दौरान कलचुरी राजा रत्नदेव प्रथम द्वारा बनवाया गया था और यह माँ महालक्ष्मी एवं माँ महासरस्वती को समर्पित है। यह दक्षिण कोशल क्षेत्र की आराध्य देवी और रतनपुर राज्य की कुलदेवी के रूप में पूजी जाती हैं। इसके अलावा डोंगरगढ़, कुदरगढ़, चंद्रपुर और दंतेवाड़ा की शक्तिपीठों के लिए सीपीआर तैयार करने प्रक्रियाधीन है।

प्रसाद योजना के तहत केंद्र सरकार ने प्रथम चरण में देश के 26 धार्मिक तीर्थ स्थलों का चयन किया है। इन्हें पर्यटन के लिहाज से विकसित किया जा रहा है ताकि देश-विदेश के पर्यटक यहां पहुंच सकें। पर्यटन को बढ़ावा मिले। इन स्थलों की प्रसिद्धी का विस्तार हो। हमारे प्रमुख देवी तीर्थ स्थल महामाया मंदिर और दंतेश्वरी मंदिर को प्रसाद योजना में शामिल करवाने के लिए प्रस्ताव तैयार किया जाकर केंद्र सरकार को भेजा गया है।

यह सुविधाएं की जानी है विकसित

पांचों शक्तिपीठों में गार्डन, ठहने की व्यवस्था, लाइटिंग, हवन-पूजन स्थल, रेलिंग, पानी, सामुदायिक शौचालय, बैठने की व्यवस्था, रोप-वे, पर्यटन मंडल का केंद्र, सीसीटीवी कैमरा, सुरक्षा व्यवस्था और होम स्टे आदि की सुविधाएं विकसित की जानी है। इन स्थलों में बेहतर सड़क संपर्क, स्वच्छ पेयजल, आधुनिक शौचालय, सुव्यवस्थित पार्किंग, पर्यटक सहायता केंद्र, डिजिटल सूचना प्रणाली, प्राथमिक चिकित्सा और सुरक्षा जैसी आवश्यक सुविधाओं को प्राथमिकता के साथ विकसित किया जाएगा। इन पर्यटन स्थलों की विशिष्टता को ध्यान में रखते हुए उनके विकास में स्थानीय वास्तुकला, संस्कृति और प्राकृतिक परिवेश के संरक्षण का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा।

1.    मां बम्लेश्वरी मंदिर डोंगरगढ़

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में स्थित डोंगरगढ़ की सुरम्य पहाड़ियों की गोद में विराजी माँ बम्लेश्वरी देवी इस क्षेत्र की ही नहीं, बल्कि देश-विदेश के लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं की अगाध आस्था का मुख्य केंद्र हैं। समुद्र तल से लगभग 1600 फीट की ऊँचाई पर पहाड़ी पर स्थित यह पवित्र मंदिर माँ शक्ति के पावन रूपों में विशेष स्थान रखता है। छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ में स्थित माँ बम्लेश्वरी मंदिर का इतिहास लगभग 2200 वर्ष पुराना है। यह एक प्रसिद्ध शक्तिपीठ है। 2200 वर्ष पहले यहाँ कामाख्या नगरी (वर्तमान डोंगरगढ़) थी, जहाँ राजा वीरसेन का शासन था। निःसंतान होने पर उन्होंने शिव और दुर्गा की आराधना की। देवी की कृपा से उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई, जिसके बाद उन्होंने इस मंदिर की स्थापना करवाई। 11वीं शताब्दी में कलचुरी राजा कर्णदेव ने इस मंदिर को पुनर्विकसित किया। बाद में 15वीं-16वीं शताब्दी में गोंड राजाओं ने इस क्षेत्र और मंदिर का विस्तार किया। मां बम्लेश्वरी मंदिर डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़ ही नहीं देश-विदेशों में भक्तों के लिए आस्था का केंद्र हैं। मां बम्लेश्वरी मंदिर का इतिहास 2500 वर्ष से भी प्राचीन बताया जाता है। केंद्र सरकार ने यहां प्रसाद योजना के तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर की परियोजना की घोषणा की है।


2.    मां महामाया मंदिर रतनपुर

रतनपुर महामाया मंदिर छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के रतनपुर में स्थित एक प्रसिद्ध और ऐतिहासिक सिद्ध शक्तिपीठ है। बिलासपुर-कोरबा मार्ग पर महामाया देवी का यह मंदिर 1050 ईसवी में बना बताया जाता है। राजा रत्नदेव प्रथम द्वारा स्थापित मंदिर क्षेत्र को कलचुरियों की राजधानी माना जाता है। यह कलचुरी राजाओं की कुलदेवी का ऐतिहासिक मंदिर है, जहाँ माता का कंधा गिरने की मान्यता है।


इस मंदिर का निर्माण 11वीं-12वीं शताब्दी (लगभग 12-13वीं शताब्दी) में कलचुरी वंश के राजा रतनदेव प्रथम द्वारा कराया गया था। बाद में 1492 ईस्वी (विक्रम संवत 1552) में राजा बहार साईं ने वर्तमान मंदिर का जीर्णोद्धार व निर्माण कराया। गर्भगृह में माँ महामाया की दुर्लभ दोहरी (ड्यूअल) प्रतिमा है - आगे महिषासुरमर्दिनी और पीछे देवी सरस्वती की आकृति विराजमान है। ऐसी मान्यता है कि यहाँ माता सती का दाहिना हाथ गिरा था।

3.    मां दंतेश्वरी मंदिर दंतेवाड़ा

छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में स्थित माँ दंतेश्वरी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि स्थानीय जनजातीय परंपरा और सनातन आस्था के अद्भुत मिलन का सबसे बड़ा प्रतीक है। यह मंदिर दंतेवाड़ा में शंखिनी और डंकिनी नदियों के पवित्र संगम तट पर स्थित है, जो सदियों से आदिवासियों और आम लोगों की अगाध श्रद्धा का केंद्र रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहाँ माता सती के दाँत गिरे थे, जिसके कारण इस पावन स्थल का नाम दंतेवाड़ा और माता का नाम दंतेश्वरी पड़ा। 14वीं शताब्दी में निर्मित इस मंदिर की अधिष्ठात्री देवी को बस्तर के काकतीय राजा अपनी कुलदेवी मानते थे। मंदिर के गर्भगृह में काले पत्थर से निर्मित छह भुजाओं वाली महिषासुरमर्दिनी की भव्य मूर्ति स्थापित है। विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा के दौरान इस मंदिर का महत्व सबसे चरम पर होता है। उत्सव के दौरान माता के छत्र और डोली को दंतेवाड़ा से जगदलपुर ले जाया जाता है, जिसमें शामिल होने के लिए दूर-दूर से हजारों आदिवासी और आम श्रद्धालु पैदल पहुँचते हैं। यह आयोजन क्षेत्र की सांस्कृतिक एकता और आपसी भाईचारे को दर्शाता है।


4.    मां बागेश्वरी कुदरगढ़ धाम

सूरजपुर जिले के ओडगी विकासखंड स्थित बागेश्वरी माता को राक्षसों के संहार के लिए जाना जाता है। यह शक्ति एवं साहस का प्रतीक माना जाता है।  1500 फीट ऊंचे पहाड़ों पर स्थित यह मंदिर चारों ओर घने जंगलों से घिरा है।  मान्यता के अनुसार कुदरगढ़ क्षेत्र मां भगवती पार्वती की तपोस्थली रही हैं। जहां माता भगवती ने शक्ति का रूप धारण कर राक्षसों का संहार किया था। बाद में इसी जगह पर लगभग चार सौ साल पहले राजा बालंद ने माता बागेश्वरी को स्थापित किया, वे माता के भक्त थे। बाद में चौहान वंश के राजा ने बालंद को युद्ध में पराजित कर दिया था, जिसके बाद उसी वंश ने माता के मंदिर की देख रेख की। तब से हर साल नवरात्र में सुबह की पहली आरती चौहान वंश के वंशज ही यहां करते हैं। 18वीं सदी में चौहान राजाओं ने छत्तीसगढ़ के मूल आदिवासी बैगा जनजाति को माता के देख-रेख और पूजा की जिम्मेदारी सौंपी थी, तब से आज तक बैगा समुदाय के लोग ही माता कि पूजा करते है।


5.    मां चंद्रहासिनी चंद्रपुर

    छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले (पूर्व में जांजगीर-चांपा) के चंद्रपुर में महानदी के तट पर स्थित मां चंद्रहासिनी देवी का मंदिर एक प्रसिद्ध सिद्ध शक्तिपीठ है। यह मंदिर महानदी और मांड नदी के संगम के पास चंद्रपुर में स्थित है। प्रचलित मान्यताओं के अनुसार, संबलपुर के राजा चंद्रहास ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था, जिसके कारण इस स्थान का नाम 'चंद्रपुर' और देवी का नाम 'चंद्रहासिनी' पड़ा।  वर्ष 1522 में चांद्रपुर के गोंड राजा धुंध्या राम साह अत्राम ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। गोंड राजाओं ने मां को अपनी कुलदेवी माना और शक्ति पूजा की परंपरा को आगे बढ़ाया।


          सक्ती जिला स्थित मां चंद्रहासिनी मंदिर का इतिहास काफी प्राचीन है। यह चंद्रपुर की पहाड़ी पर स्थित हैं। मंदिर की सुंदर कलाकृति प्राचीनता का अनुभव कराती है। लोगों की माता को लेकर बड़ी आस्था है। इसे 52 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है, और ऐसी मान्यता है कि यहां माता सती का बायां कान गिरा था। वर्ष 1935 में महानदी में भीषण बाढ़ आई थी। तब राजा चंद्रहास के वंशज ठाकुर शशिभूषण ने माता को बकरा बलि अर्पित कर प्रार्थना की, जिसके बाद नदी का जलस्तर कम हो गया और लोगों की जान बची। आज भी नदी के पास पत्थर पर माता के पद-चिह्न मौजूद हैं, जिनकी पूजा की जाती है।

राज्य के आर्थिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक पारिस्थितिकी दृष्टि से संवहनीय पर्यटन को प्रोत्साहित करना है। छत्तीसगढ़ में पर्यटन, अनुभव की गुणवत्ता एवं आकर्षण को सुदृढ़ करना, छत्तीसगढ़ की समृद्ध एवं विविध सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण, संवर्धन एवं प्रचार-प्रसार करना, आर्थिक विकास एवं संबन्धित क्षेत्रों में पर्यटन के योगदान में वृद्धि करना। पर्यटन से संबन्धित अधोसंरचना के विकास में निजी निवेशकों के प्रयत्नों को प्रोत्साहित करना। शासन की भूमिका को सुविधापरक बनाना, पर्यटन के क्षेत्र में नई अवधारणाएं जैसे- टाइम शेयर, पारिस्थितिकी पर्यटन, साहसिक पर्यटन, इत्यादि को बढ़ावा देना। स्थानीय समुदाय की बौद्धिक सम्पदा एवं अधिकारों का सम्मान करना। छत्तीसगढ़ में पर्यटन को उद्योग का दर्जा देना, जिससे बेरोजगारों को रोजगार मिलने की संम्भावना होगी।

Jio Platforms IPO 2026: ₹30,000 करोड़ से ज्यादा का मेगा IPO, ₹1,065–₹1,119 तय हुआ प्राइस बैंड

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भारत के टेलीकॉम और डिजिटल सेक्टर की प्रमुख कंपनी Jio Platforms अपना बहुप्रतीक्षित IPO लेकर आ रही है। कंपनी ने प्रति शेयर ₹1,065 से ₹1,119 का प्राइस बैंड तय किया है। इस इश्यू के जरिए ऊपरी कीमत पर लगभग ₹30,213 करोड़ जुटाए जा सकते हैं। इसके साथ ही यह भारत के सबसे बड़े IPO का रिकॉर्ड बना सकता है।

यह IPO Reliance Industries के डिजिटल और टेलीकॉम कारोबार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि कंपनी का मूल्यांकन, उसकी कमाई और भविष्य में डिजिटल सेवाओं की वृद्धि बाजार की उम्मीदों पर कितना खरा उतरती है।

Jio Platforms IPO की महत्वपूर्ण जानकारी

प्राइस बैंड- ₹1,065–₹1,119

कुल इश्यू का संभावित आकार- ₹30,213 करोड़ तक

नए शेयर- 27 करोड़ तक

IPO खुलने की तारीख- 21 अक्टूबर 2026

IPO बंद होने की तारीख- 23 अक्टूबर 2026

संभावित लिस्टिंग- 28 अक्टूबर 2026

निवेशक कितने रुपये से आवेदन कर सकेंगे?

कंपनी ने एक लॉट में न्यूनतम 12 शेयरों के लिए आवेदन निर्धारित किया है। इसके बाद 12 शेयरों के गुणकों में बोली लगाई जा सकती है।

12 शेयरों के एक लॉट की कीमत

न्यूनतम प्राइस पर- ₹12,780

अधिकतम प्राइस पर- ₹13,428

यह एक लॉट की गणना है। अंतिम भुगतान आवंटन और लागू नियमों पर निर्भर करेगा।

IPO से जुटाए गए पैसे का इस्तेमाल कहाँ होगा?

Jio Platforms के IPO में मौजूदा शेयरधारकों के शेयर बेचने के बजाय नए शेयर जारी किए जा रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, कंपनी की योजना से जुटाई गई राशि का बड़ा हिस्सा अपनी टेलीकॉम सहायक कंपनी Reliance Jio Infocomm के कर्ज का भुगतान करने में इस्तेमाल करने की है।

  • लगभग ₹27,500 करोड़ तक कर्ज चुकाने के लिए निर्धारित।

  • शेष राशि सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल की जा सकती है।

  • इस इश्यू में पात्र Reliance Industries शेयरधारकों और कर्मचारियों के लिए अलग आरक्षण की व्यवस्था भी बताई गई है।

 Jio Platforms का कारोबार कितना बड़ा है?

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Jio Platforms केवल मोबाइल इंटरनेट तक सीमित नहीं है। इसके कारोबार में टेलीकॉम सेवाएँ, 4G/5G नेटवर्क, फिक्स्ड ब्रॉडबैंड, क्लाउड और एंटरप्राइज डिजिटल सेवाएँ शामिल हैं।
  • ग्राहक आधार: जून 2026 के अंत में कंपनी के लगभग 53.33 करोड़ ग्राहक बताए गए।

  • डिजिटल कारोबार: मोबाइल कनेक्टिविटी के साथ इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं पर जोर।

  • प्रमुख निवेशक: Meta और Google जैसी वैश्विक कंपनियों की भी Jio Platforms में हिस्सेदारी है।

  • IPO का उद्देश्य: कंपनी को सार्वजनिक बाजार में सूचीबद्ध करना और टेलीकॉम कारोबार की वित्तीय स्थिति को मजबूत करना।

क्या यह भारत का सबसे बड़ा IPO होगा?

रिपोर्टों के अनुसार, ₹30,213 करोड़ के संभावित इश्यू आकार पर Jio Platforms का IPO अक्टूबर 2024 में Hyundai Motor India के लगभग ₹27,800 करोड़ के IPO से बड़ा हो सकता है। हालांकि, वास्तविक रिकॉर्ड अंतिम इश्यू आकार पर निर्भर करेगा।

कंपनी की रिपोर्ट की गई शर्तों के अनुसार, पात्र कर्मचारियों को प्रति शेयर ₹54 की छूट और पात्र Reliance Industries शेयरधारकों के लिए ₹2,500 करोड़ तक के शेयर आरक्षित रखने की व्यवस्था है।

निवेशकों को किन बातों पर ध्यान देना चाहिए?

IPO का बड़ा आकार अपने-आप में निवेश पर लाभ की गारंटी नहीं है। आवेदन करने से पहले इन बिंदुओं पर विचार करें:

  • वैल्यूएशन: कंपनी की कमाई के मुकाबले शेयर की कीमत कितनी है?

  • कर्ज: IPO से मिलने वाली राशि के इस्तेमाल के बाद कंपनी की वित्तीय स्थिति में क्या बदलाव होगा?

  • प्रतिस्पर्धा: टेलीकॉम बाजार में Airtel और अन्य कंपनियों से प्रतिस्पर्धा का क्या प्रभाव पड़ेगा?

  • लिस्टिंग जोखिम: शेयर लिस्टिंग के दिन इश्यू प्राइस से नीचे भी कारोबार कर सकता है।

  • लंबी अवधि की वृद्धि: 5G, ब्रॉडबैंड, क्लाउड और डिजिटल सेवाओं से भविष्य में कितनी कमाई हो सकती है?

निष्कर्ष: Jio Platforms का IPO भारतीय शेयर बाजार की एक महत्वपूर्ण पेशकश हो सकता है। ₹1,065–₹1,119 का प्राइस बैंड और लगभग ₹30,213 करोड़ का संभावित इश्यू आकार इसे चर्चा में ला रहा है। लेकिन निवेश का निर्णय केवल कंपनी की लोकप्रियता या IPO के आकार के आधार पर नहीं, बल्कि उसके वित्तीय आँकड़ों, वैल्यूएशन और अपने जोखिम उठाने की क्षमता के आधार पर लेना चाहिए।


25 करोड़ की रंगदारी का मामला: शोएब ढेबर के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी

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विदेशी व्हाट्सएप नंबर से कांग्रेस नेता आनंद कुकरेजा को धमकी देने का आरोप, लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर मांगी गई थी रकम


रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 25 करोड़ रुपये की कथित रंगदारी और जान से मारने की धमकी के मामले में आरोपी शोएब ढेबर की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पुलिस ने आरोपी के देश छोड़कर फरार होने की आशंका के मद्देनजर उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी किया है। इससे पहले पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए 5 हजार रुपये का इनाम भी घोषित कर चुकी है। आरोपी शोएब ढेबर कारोबारी अनवर ढेबर का बेटा है।

मामला कांग्रेस नेता आनंद कुकरेजा को विदेशी व्हाट्सएप नंबर से कथित तौर पर धमकी मिलने और लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर 25 करोड़ रुपये की मांग किए जाने से जुड़ा है। पुलिस इस मामले में आरोपी की तलाश कर रही है।

विदेशी नंबर से मांगी गई थी 25 करोड़ की रकम

जानकारी के मुताबिक, सितंबर में कांग्रेस नेता आनंद कुकरेजा को एक विदेशी व्हाट्सएप नंबर से संदेश मिला था। आरोप है कि संदेश भेजने वाले ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम लेकर 25 करोड़ रुपये की मांग की थी। रकम नहीं देने पर कुकरेजा और उनके परिवार को जान से मारने की धमकी भी दी गई थी।

शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट (ACCU) ने डिजिटल साक्ष्यों सहित अन्य पहलुओं की पड़ताल की। इसी जांच के दौरान शोएब ढेबर का नाम सामने आया। पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए उसे पहले गिरफ्तार भी किया था।

जमानत के बाद दोबारा गिरफ्तारी की कोशिश

जानकारी के अनुसार, शोएब ढेबर को पहले गिरफ्तारी के बाद जमानत मिल गई थी। इसके बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई के तहत पुलिस ने उसकी दोबारा गिरफ्तारी के लिए तलाश शुरू की। हालांकि, वह पुलिस की पकड़ में नहीं आया। इसके बाद पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी में मदद के लिए 5 हजार रुपये का इनाम घोषित किया।

विदेश भागने की आशंका के चलते जारी किया LOC

लगातार तलाश के बावजूद आरोपी का पता नहीं चलने और उसके विदेश भागने की आशंका को देखते हुए पुलिस ने अब लुकआउट सर्कुलर जारी किया है। इसके जरिए संबंधित अधिकारियों को आरोपी की संभावित विदेश यात्रा के संबंध में सतर्क किया जा सकेगा। इससे उसके देश छोड़ने की कोशिश करने पर उसे पकड़ने में मदद मिल सकती है।

फिलहाल रायपुर पुलिस शोएब ढेबर की तलाश में जुटी है। 25 करोड़ रुपये की कथित रंगदारी और जान से मारने की धमकी से जुड़े इस मामले में पुलिस की अगली कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।

Rajasthan Drone Drop Case: पुलिस को ड्रग्स की जगह मिला विस्फोटक और हथियारों का बड़ा जखीरा

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राजस्थान के भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास एक गंभीर सुरक्षा मामला सामने आया है। श्रीगंगानगर जिले के रावला इलाके में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने कथित ड्रोन से गिराए गए तीन पैकेट बरामद किए। शुरुआत में अधिकारियों को शक था कि पैकेटों में नशीले पदार्थ हैं, लेकिन तलाशी में संदिग्ध विस्फोटक, हथियार और बड़ी मात्रा में कारतूस मिले।

पूरा मामला क्या है?

NDTV और अन्य मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, 12 और 13 अक्टूबर की दरमियानी रात श्रीगंगानगर जिले के रावला क्षेत्र में सीमा पार से आए बताए जा रहे ड्रोन ने खेत में पैकेट गिराए। यह जगह भारत-पाकिस्तान सीमा से लगभग पांच किलोमीटर दूर बताई गई है।

राजस्थान एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) और सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने संयुक्त कार्रवाई की। दो युवक, जिनके पंजाब के निवासी होने की जानकारी दी गई, कथित तौर पर पैकेट उठाने पहुंचे थे। उन्हें हिरासत में लिया गया और मामले की जांच शुरू हुई।

बरामदगी में क्या-क्या मिला?

  • लगभग 7–7.75 किलोग्राम संदिग्ध RDX
  • 2 विदेशी निर्मित पिस्तौल, रिपोर्ट के अनुसार, तुर्किये निर्मित जिगाना पिस्तौल।
  • सैकड़ों कारतूस और मैगजीन, NDTV ने 867 कारतूस, जबकि कुछ अन्य रिपोर्टों ने लगभग 650 कारतूस बताए।
  • IED से जुड़े उपकरण, रिमोट कंट्रोल, डेटोनेशन उपकरण और अन्य संदिग्ध विस्फोटक सामग्री।

सुरक्षा एजेंसियों ने क्या कार्रवाई की?

  • ANTF और BSF ने संयुक्त तलाशी अभियान चलाया।

  • पैकेट लेने पहुंचे दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया।

  • बम निरोधक दस्ते को बुलाकर विस्फोटक सामग्री को सुरक्षित तरीके से नष्ट किया गया।

  • बरामदगी के बाद सीमावर्ती क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई।

  • जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और राजस्थान पुलिस की संबंधित इकाइयाँ भी शामिल हुईं।

क्या किसी बड़े आतंकी हमले की साजिश थी?

जांच एजेंसियों को संदेह है कि हथियारों और विस्फोटकों की यह खेप किसी बड़े हमले या संगठित आपराधिक गतिविधि के लिए भेजी गई हो सकती है। NDTV की रिपोर्ट में त्योहारों के दौरान या पंजाब में आगामी चुनावों से पहले संभावित हमले की आशंका का उल्लेख किया गया है।

हालाँकि, अभी तक संभावित निशाने, अंतिम प्राप्तकर्ता और पूरी साजिश की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे किसी निश्चित आतंकी हमले की साजिश साबित हो चुकी है, ऐसा कहना जल्दबाजी होगी।

ताजा अपडेट: विस्फोटक नष्ट किए गए

15 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, जयपुर से आई बम निरोधक टीम ने श्रीगंगानगर में बरामद संदिग्ध RDX और डेटोनेटर को नियंत्रित विस्फोट के जरिए नष्ट कर दिया। अब जांच का प्रमुख उद्देश्य खेप के स्रोत, इसे भेजने वालों और इसके अंतिम गंतव्य का पता लगाना है।

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