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'बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026' का आयोजन 22 मार्च को जगदलपुर में

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ में खेलों को बढ़ावा देने और बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय मंच पर लाने के उद्देश्य से “बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026” का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में यह आयोजन राज्य के लिए एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है।


 22 मार्च को आयोजित होने वाली यह मैराथन जगदलपुर के लालबाग मैदान से प्रारंभ होकर चित्रकोट जलप्रपात तक पहुंचेगी। यह रूट प्रतिभागियों को बस्तर के प्राकृतिक और ऐतिहासिक सौंदर्य से रूबरू कराएगा।


मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह आयोजन ‘रन फॉर नेचर-रन फॉर कल्चर‘ की थीम के साथ राज्य की पहचान को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा और युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरित करेगा।


मैराथन में 42 किलोमीटर, 21 किलोमीटर, 10 किलोमीटर और 5 किलोमीटर जैसी अलग-अलग श्रेणियां रखी गई हैं, जिसमें देशभर से धावकों के शामिल होने की उम्मीद है। विजेता प्रतिभागियों के लिए कुल 25 लाख रूपए तक का आकर्षक पुरस्कार रखा गया है। साथ ही प्रतिभागियों को फिनिशर मेडल, ई-सर्टिफिकेट और रनिंग फोटोज़ दिए जाएंगे। कार्यक्रम में ज़ुम्बा सेशन और लाइव डीजे जैसी गतिविधियां भी होंगी। प्रतिभागी इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए वेबसाईट
https://www.bastarheritage.run/registration अवलोकन कर सकते हैं। 

छत्तीसगढ़ में सनसनी: शिक्षक की बेरहमी से हत्या, शव जलाकर सबूत मिटाने की कोशिश

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 रायपुर : सक्ती जिले के जैजैपुर थाना क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक दिव्यांग शिक्षक की निर्मम हत्या कर दी गई। हमलावर ने टंगिया (धारदार हथियार) से वार कर शिक्षक की जान ली और बाद में शव को जलाकर सबूत मिटाने की कोशिश की।


मृतक की पहचान देवानंद भारद्वाज के रूप में हुई है, जो पिहरीद में पदस्थ थे। बताया जा रहा है कि वे अपनी ट्राइसाइकिल से घूमने निकले थे, तभी घात लगाए आरोपी ने उन पर हमला कर दिया।

ऐसे हुई वारदात

घटना जैजैपुर थाना क्षेत्र के जर्वे गांव की है। आरोपी ने पहले शिक्षक पर टंगिया से ताबड़तोड़ वार किए, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद आरोपी ने शव को घर के पीछे ले जाकर आग के हवाले कर दिया।

गांव में दहशत, पुलिस जांच जारी

घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। आरोपी घटना के बाद से फरार है, जिसकी तलाश के लिए पुलिस ने घेराबंदी तेज कर दी है।

जमीन विवाद बना हत्या की वजह

प्राथमिक जांच में सामने आया है कि मृतक का जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। पुलिस को आशंका है कि इसी विवाद के चलते इस वारदात को अंजाम दिया गया।

ग्रामीणों की मांग

ग्रामीणों ने पुलिस से जल्द से जल्द आरोपी की गिरफ्तारी और कड़ी सजा की मांग की है। फिलहाल पुलिस संदिग्ध की तलाश में जुटी हुई है और मामले की जांच जारी है।

छत्तीसगढ़ के IAS डॉ. रवि मित्तल को केंद्र में बड़ी जिम्मेदारी, PMO में 'डिप्टी सेक्रेटरी' नियुक्त

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रायपुर/नई दिल्ली-  छत्तीसगढ़ कैडर के 2016 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी डॉ. रवि मित्तल को केंद्र सरकार ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें प्रतिनियुक्ति पर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में उप सचिव (Deputy Secretary) के पद पर नियुक्त किया गया है।

कार्यकाल: केंद्र सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार, डॉ. मित्तल की यह नियुक्ति कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से चार वर्षों की अवधि के लिए अथवा अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी।

वर्तमान जिम्मेदारी: दिल्ली पदस्थापना से पहले डॉ. मित्तल छत्तीसगढ़ में जनसंपर्क आयुक्त (CPR) और मुख्यमंत्री सचिवालय में संयुक्त सचिव के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे।

चयन प्रक्रिया: कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) की मंजूरी के बाद कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किया है।

शानदार रहा है प्रशासनिक सफर 

​डॉ. रवि मित्तल अपनी कार्यकुशलता और प्रशासनिक पकड़ के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने जशपुर जिले में कलेक्टर के रूप में बेहतरीन कार्य किया, जिसकी सराहना राज्य स्तर पर हुई। उनके पास चिकित्सा की पृष्ठभूमि (MBBS) भी है, जो उन्हें जटिल मुद्दों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझने में मदद करती है।

​छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग के मुखिया के तौर पर उन्होंने सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुँचाने में तकनीकी नवाचारों का भी प्रयोग किया। अब PMO जैसे देश के सबसे प्रभावशाली कार्यालय में उनकी नियुक्ति को उनके करियर की एक बड़ी छलांग के रूप में देखा जा रहा है।

सरहुल उत्सव जनजातीय संस्कृति की विशिष्ट धरोहर, इसे संजोकर रखना हम सबकी जिम्मेदारी – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज जशपुर के दीपू बगीचा में आयोजित पारंपरिक सरहुल महोत्सव में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने धरती माता, सूर्य देव एवं साल वृक्ष की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, उत्तम वर्षा और समृद्ध फसल की कामना की। सरहुल की पारंपरिक रस्म के तहत पूजा कराने वाले बैगा द्वारा मुख्यमंत्री के कान में सरई (साल) फूल खोंचकर शुभ आशीष प्रदान किया गया।

मुख्यमंत्री साय ने जिलेवासियों को सरहुल उत्सव एवं हिंदू नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सरहुल महोत्सव सदियों से प्रकृति, धरती और जीवन के संतुलन का प्रतीक रहा है। बैगा, पाहन एवं पुजारी द्वारा की जाने वाली पूजा-अर्चना केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और सामूहिक जीवन मूल्यों की अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि यह पर्व जनजातीय समाज की समृद्ध सभ्यता और संस्कृति का जीवंत प्रतीक है, जिसे सहेजकर रखना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि राज्य सरकार जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश की जनता से किए गए वादों को तेजी से पूरा कर रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से लाखों परिवारों को आवास उपलब्ध कराए जा रहे हैं। महतारी वंदन योजना के तहत अब तक 25 किश्तों में 16 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि जारी किए जा चुके हैं, जिससे महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को नई दिशा मिली है। वहीं 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी कर किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि विधानसभा में प्रस्तुत धर्म स्वातंत्र्य विधेयक भी सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो अवैध धर्मांतरण पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करेगा।

उल्लेखनीय है कि सरहुल परब चैत्र माह में मनाया जाने वाला उरांव समुदाय का प्रमुख पर्व है, जो प्रकृति के नवजीवन और ऋतु परिवर्तन का प्रतीक है। इस पर्व में धरती माता और सूर्य देव के प्रतीकात्मक विवाह के साथ सामूहिक पूजा की जाती है। सरना स्थल पर पारंपरिक विधि से पूजा-अर्चना, प्रसाद वितरण और लोकनृत्य-गीतों के माध्यम से सामाजिक एकता और सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ किया जाता है। घर-घर सरई फूल और पवित्र जल का वितरण कर सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।

कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक वेशभूषा में सजी 100 से अधिक महिलाओं एवं युवतियों की टोली ने मनमोहक सरहुल नृत्य प्रस्तुत किया। मांदर की गूंजती थाप और उत्साह से भरे वातावरण ने पूरे परिसर को जनजातीय संस्कृति के रंग में रंग दिया, जहां जनसैलाब उमड़ पड़ा और उत्सव का उल्लास चरम पर रहा।

इस अवसर पर अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह, राष्ट्रीय महामंत्री योगेश बापट, विधायक गोमती साय, नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद भगत, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव सहित अनेक जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे।

नेशनल ट्राइबल गेम्स : रायपुर में होंगे हॉकी, फुटबॉल, तैराकी, तीरंदाजी और वेट-लिफ्टिंग के आयोजन

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जगदलपुर में एथलेटिक्स और अंबिकापुर में कुश्ती की प्रतियोगिताएं होंगी

32 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 3000 जनजातीय खिलाड़ी करेंगे भागीदारी

डेमो गेम्स के रूप में दो परंपरागत खेल कबड्डी और मलखंब भी शामिल

रायपुर- छत्तीसगढ़ में आयोजित हो रहे खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स में देशभर के जनजातीय खिलाड़ी सात खेलों में अपनी प्रतिभा दिखाएंगे। इसमें देश के 32 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के करीब 3000 खिलाड़ी भागीदारी करेंगे। आयोजन के दौरान पुरूष एवं महिला वर्गों में राजधानी रायपुर में पांच खेलों तथा बस्तर संभागीय मुख्यालय जगदलपुर और सरगुजा संभागीय मुख्यालय अंबिकापुर में एक-एक खेल होंगे। इसमें छत्तीसगढ़ के कुल 164 खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें 86 पुरूष और 78 महिला खिलाड़ी शामिल हैं।

तीनों शहरों में नेशनल ट्राइबल गेम्स के लिए चिन्हांकित खेल स्थलों व मैदानों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार तैयार करने का काम जोरों पर है। रायपुर के पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय फुटबॉल मैदान और स्वामी विवेकानंद एथलेटिक्स स्टेडियम कोटा में फुटबॉल की प्रतियोगिताएं होंगी। रायपुर के सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में हॉकी की स्पर्धाएं होंगी। वहीं रायपुर के अंतरराष्ट्रीय स्वीमिग पूल में तैराकी, खेल एवं युवा कल्याण विभाग संचालनालय के ओपन मैदान में तीरंदाजी तथा पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय ओपन ग्राउंड में वेट-लिफ्टिंग की प्रतियोगिताएं संपन्न होंगी।

जगदलपुर के धरमपुरा क्रीड़ा परिसर में एथलेटिक्स और अंबिकापुर के गांधी स्टेडियम में कुश्ती की प्रतियोगिताएं होंगी। खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स में देश के दो परंपरागत खेलों कबड्डी और मलखंब को भी डेमो गेम्स के रूप में शामिल किया गया है। कबड्डी की स्पर्धाएं रायपुर के सरदार बलबीर सिंह इंडोर स्टेडियम और मलखंब का प्रदर्शन अंबिकापुर के गांधी स्टेडियम में होगा।

आबकारी आरक्षक के 200 पदों पर भर्ती हेतु अंतिम चयन परिणाम जारी

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रायपुर- आबकारी विभाग के अंतर्गत आबकारी आरक्षक के रिक्त 200 पदों की पूर्ति हेतु सीधी भर्ती के माध्यम से छत्तीसगढ़ व्यवसायिक परीक्षा मण्डल रायपुर (व्यापम) द्वारा 27 जुलाई 2025 को लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी। उक्त भर्ती परीक्षा का अंतिम उत्तर तथा परीक्षा परिणाम व्यापम की वेबसाइट पर 19 सितम्बर 2025 को प्रदर्शित किया गया।

आबकारी विभाग के अधिकारियों ने बताया कि विभाग को उपलब्ध कराये गये परीक्षा परिणाम की प्राप्तांक सूची एवं परीक्षा से संबंधित अन्य अभिलेखों के आधार पर विज्ञापन में उल्लेखित वर्गवार, प्रवर्गवार रिक्तियों की संख्या के लगभग तीन गुना अभ्यर्थियों को मेरिट क्रम में चिन्हांकित किया गया। उनके मूल प्रमाण पत्रों (दस्तावेजों) का सत्यापन एवं शारीरिक मापदण्ड की जॉच के लिए बुलाया गया, किन्तु पर्याप्त अवसर दिये जाने के बाद भी सत्यापन में अनुपस्थित एवं शारीरिक मापदण्ड में अपात्र पाये गये कुल 128 अभ्यर्थियों के नामों पर चयन प्रक्रिया में विचार नहीं करने संबंधी 12 मार्च 2026 को पत्र  जारी किया गया। शेष पात्र अभ्यर्थियों में से व्यापम द्वारा जारी मेरिट क्रम के आधार पर वर्गवार, प्रवर्गवार आबकारी आरक्षक पद के कुल 200 पदों के विरूद्ध 200 पदों पर अभ्यर्थियों की उपलब्धता अनुसार चयन सूची तथा 43 अनुपूरक (प्रतीक्षा) सूची जारी गई है। 

अधिकारियों ने बताया कि आबकारी आरक्षक पद हेतु छत्तीसगढ़ व्यापम द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षा में व्यापम द्वारा जारी मेरिट सूची के आधार पर विभाग में दस्तावेज सत्यापन एवं शारीरिक मापदण्ड में पात्र पाये गये अभ्यर्थियों में से चयन हेतु उपयुक्त पाये गये अभ्यर्थियों की सूची मंडल की वेबसाईट https://vyapamcg.cgstate.gov.in/ पर अपलोड कर दी गई है।

जशपुर को विकास की नई सौगात: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 19.51 करोड़ के 6 विकास कार्यों का किया भूमिपूजन

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ऑडिटोरियम, मुक्तिधाम और सड़कों के निर्माण से शहरी-ग्रामीण ढांचे को मिलेगी मजबूती

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज जशपुरनगर में पुलिस लाइन हेलीपैड के समीप कुल 19 करोड़ 51 लाख 78 हजार रुपए की लागत से 6 महत्वपूर्ण विकास कार्यों का भूमिपूजन कर क्षेत्र को विकास की नई सौगात दी। इस अवसर पर उन्होंने शहरी एवं ग्रामीण बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने की दिशा में राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।

मुख्यमंत्री साय ने नगर पालिका जशपुर के वार्ड क्रमांक 18 भागलपुर में 35.46 लाख रुपए की लागत से मुक्तिधाम निर्माण कार्य तथा वार्ड क्रमांक 16 में 6.76 करोड़ रुपए की लागत से आधुनिक ऑडिटोरियम निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया। इन परियोजनाओं से शहरवासियों को बेहतर सामाजिक, सांस्कृतिक एवं सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

मुख्यमंत्री साय ने जशपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन को सुगम एवं सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से चार प्रमुख सड़कों के निर्माण कार्यों का भी भूमिपूजन किया। इनमें 2.89 करोड़ रुपए लागत से चटकपुर-रेंगारबहार मार्ग, 3.01 करोड़ रुपए लागत से कुनकुरी-औंरीजोर-मतलूटोली-पटेल पारा मार्ग, 3.29 करोड़ रुपए लागत से रानीबंध-चिड़ाटांगर-उपरकछार मार्ग तथा 3.18 करोड़ रुपए लागत से धुरीअम्बा-कटुखोसा मार्ग का निर्माण शामिल है। इन सड़कों के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बेहतर होगी और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के समग्र और संतुलित विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों में आधुनिक सुविधाओं का विस्तार और ग्रामीण अंचलों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन विकास कार्यों के पूर्ण होने से क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास को नई दिशा और गति मिलेगी।

इस अवसर पर विधायक  गोमती साय, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद भगत, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, नगर पालिका उपाध्यक्ष यश प्रताप सिंह जूदेव सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

भारत की बायोइकोनॉमी में ऐतिहासिक उछाल: 2014 के 10 अरब डॉलर से बढ़कर 2025 में 195 अरब डॉलर, वैश्विक बायोटेक हब बनने की ओर देश

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नई दिल्ली- भारत की बायोइकोनॉमी ने पिछले एक दशक में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि यह क्षेत्र 2014 में लगभग 10 अरब डॉलर से बढ़कर 2025 में 195 अरब डॉलर से अधिक तक पहुंच गया है। यह तेज़ वृद्धि भारत को वैश्विक स्तर पर एक मजबूत बायोटेक्नोलॉजी केंद्र के रूप में स्थापित कर रही है।

वे बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल (BIRAC) के 14वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे, जहां देशभर के वैज्ञानिक, नीति-निर्माता, उद्योग प्रतिनिधि और स्टार्टअप्स शामिल हुए।

 तेज़ी से बढ़ता बायोटेक सेक्टर

मंत्री ने कहा कि बीते एक वर्ष में ही इस क्षेत्र ने 17–18 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की है, जो इसे भारत के सबसे तेज़ी से बढ़ते क्षेत्रों में शामिल करता है।

  • 2025 में बायोइकोनॉमी का आकार: 195.3 अरब डॉलर

  • GDP में योगदान: लगभग 4.8%

  • 2020 के बाद से क्षेत्र का आकार: दोगुना से अधिक

यह दर्शाता है कि भारत अब वैश्विक बायोटेक शक्ति के रूप में उभर रहा है।

BIRAC: नवाचार का प्रमुख स्तंभ

BIRAC को इस सफलता का मुख्य आधार बताते हुए मंत्री ने कहा कि यह संस्था:

  • अनुसंधान और उद्योग के बीच सेतु का कार्य करती है

  • स्टार्टअप्स को फंडिंग, मेंटरशिप और इन्क्यूबेशन प्रदान करती है

  • प्रयोगशालाओं से तकनीकों को बाजार तक पहुंचाने में मदद करती है

2030 तक 300 अरब डॉलर का लक्ष्य

भारत ने वर्ष 2030 तक 300 अरब डॉलर की बायोइकोनॉमी का लक्ष्य निर्धारित किया है।
मंत्री ने विश्वास जताया कि वैज्ञानिकों, उद्यमियों और स्टार्टअप्स के सहयोग से यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

 BioE3 नीति: सतत विकास की दिशा

सरकार की BioE3 Policy के तहत:

  • पर्यावरण अनुकूल बायोमैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा

  • क्लाइमेट-रेजिलिएंट कृषि

  • स्मार्ट प्रोटीन और बायो-केमिकल्स

  • कार्बन कैप्चर तकनीक

जैसे क्षेत्रों में नवाचार को प्रोत्साहन दिया जाएगा।

निवेश और स्टार्टअप्स का विस्तार

  • ₹1 लाख करोड़ का RDI फंड

  • देश में 11,800 से अधिक बायोटेक स्टार्टअप्स सक्रिय

यह भारत के डीप-टेक और नवाचार इकोसिस्टम को मजबूत बना रहा है।

रिपोर्ट्स में दिखी प्रगति

कार्यक्रम के दौरान जारी:

  • India Bioeconomy Report 2026

  • BIRAC Impact Report

में बताया गया कि

  • इस क्षेत्र में रोजगार सृजन बढ़ा है

  • सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं और टिकाऊ तकनीकों का विकास हुआ है

  • स्टार्टअप्स का तेजी से विस्तार हुआ है

युवाओं और नवाचार पर फोकस

मंत्री ने कहा कि सरकार:

  • टियर-2 और टियर-3 शहरों के युवाओं को अवसर दे रही है

  • महिला उद्यमियों को प्रोत्साहित कर रही है

 इससे देशभर में इनोवेशन की मजबूत संस्कृति विकसित हो रही है।

 निष्कर्ष

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विज्ञान, उद्योग और नीति-निर्माताओं के संयुक्त प्रयास से
भारत आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

बायोटेक्नोलॉजी सेक्टर भविष्य में भारत की अर्थव्यवस्था का मुख्य ग्रोथ इंजन बनकर उभरेगा।

वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की पहल: वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) का 10वां प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न

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देहरादून- वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) ने आम नागरिकों और वन्यजीव प्रेमियों के लिए आयोजित 10वां वन्यजीव संरक्षण प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न किया। यह 10 दिवसीय कार्यक्रम 2 से 11 मार्च 2026 तक आयोजित हुआ, जिसमें देशभर से 15 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के अंतर्गत संचालित इस संस्थान द्वारा शुरू की गई इस पहल के तहत वर्ष 2012 से अब तक कुल 148 लोग प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं।

यह विशेष कोर्स उन लोगों के लिए तैयार किया गया है, जिन्हें वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में औपचारिक प्रशिक्षण नहीं है, लेकिन इस विषय में गहरी रुचि रखते हैं। कार्यक्रम में विभिन्न पेशेवर क्षेत्रों—जैसे सशस्त्र बल, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, आईटी, कॉर्पोरेट, मीडिया, शिक्षा और छात्र समुदाय—से प्रतिभागियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को चार दिनों तक विशेषज्ञों द्वारा सैद्धांतिक प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें भारतीय जैव-भूगोल, वन्यजीव संरक्षण की रणनीतियां, बड़े स्तनधारियों का प्रबंधन, वन्यजीवों की अवैध तस्करी, फॉरेंसिक विज्ञान की भूमिका, संकटग्रस्त वन्यजीवों का संरक्षण और नागरिक विज्ञान जैसे विषय शामिल रहे।

इसके अलावा, प्रतिभागियों को लैंसडाउन वन प्रभाग (उत्तराखंड) में पांच दिवसीय फील्ड विजिट पर ले जाया गया, जहां उन्होंने जंगल और वन्यजीवों का प्रत्यक्ष अध्ययन किया। इस दौरान उन्हें जंगल प्रबंधन, संरक्षण की चुनौतियों और स्थानीय समुदायों की वन संसाधनों पर निर्भरता के बारे में व्यावहारिक जानकारी दी गई।

कार्यक्रम का समापन 11 मार्च को हुआ, जिसमें रमेश कुमार पांडे, अतिरिक्त महानिदेशक (वन्यजीव), ने प्रतिभागियों से संवाद किया और भारत में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य आम नागरिकों में जैव विविधता के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उन्हें संरक्षण गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना है।

यह पहल इस बात को रेखांकित करती है कि वन्यजीव संरक्षण केवल विशेषज्ञों तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग की जिम्मेदारी है।

भारत को स्वदेशी ड्रोन निर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए मिशन मोड में काम जरूरी: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

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नई दिल्ली- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि आने वाले वर्षों में भारत को स्वदेशी ड्रोन निर्माण का वैश्विक केंद्र (Global Hub) बनाने के लिए मिशन मोड में कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों और बदलते युद्ध के स्वरूप को देखते हुए ड्रोन और काउंटर-ड्रोन तकनीक भविष्य की युद्ध रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।


रक्षा मंत्री नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में आयोजित दो दिवसीय नेशनल डिफेंस इंडस्ट्रीज कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस सम्मेलन का आयोजन रक्षा उत्पादन विभाग द्वारा ‘एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजीज’ थीम पर किया गया है।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारत को केवल ड्रोन तैयार करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि ड्रोन के सभी महत्वपूर्ण घटकों—सॉफ्टवेयर, इंजन, बैटरी और अन्य तकनीकी हिस्सों—का निर्माण भी देश में ही करना होगा। उन्होंने बताया कि दुनिया के कई देशों में ड्रोन निर्माण के लिए अभी भी महत्वपूर्ण पुर्जे चीन से आयात किए जाते हैं, और भारत को इस निर्भरता को कम करते हुए आत्मनिर्भर बनना होगा।

रक्षा मंत्री ने कहा कि देश का रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र (ecosystem) बड़े उद्योगों, MSMEs, स्टार्ट-अप्स और नवाचारकर्ताओं के सहयोग से मजबूत बनता है। उन्होंने निजी क्षेत्र को भी इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया और भरोसा दिलाया कि सरकार भारत को स्वदेशी ड्रोन निर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए हर संभव सहयोग देगी।

इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने Defence India Start-up Challenge (DISC-14) और ADITI 4.0 चैलेंज का शुभारंभ किया। इन पहलों के तहत रक्षा बलों, भारतीय तटरक्षक बल और रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी की ओर से कुल 107 समस्या कथन जारी किए गए हैं, जिनका उद्देश्य स्टार्ट-अप्स और नवाचारकर्ताओं को नई तकनीकों और समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करना है। इसके अलावा, रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (DPSUs) द्वारा 101 नवाचार चुनौतियों की एक नई पहल भी शुरू की गई है, जिससे MSMEs और स्टार्ट-अप्स को डिजाइन-आधारित नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।

रक्षा मंत्री ने Innovations for Defence Excellence (iDEX) और ADITI को रक्षा क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने वाली गेम-चेंजर पहल बताया। उन्होंने बताया कि फरवरी 2026 तक लगभग 676 स्टार्ट-अप्स, MSMEs और नवाचारकर्ता इस रक्षा नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़ चुके हैं। अब तक 548 अनुबंध किए जा चुके हैं और 566 चुनौतियां शुरू की गई हैं। इनमें से 58 प्रोटोटाइप को लगभग ₹3,853 करोड़ के मूल्य के साथ खरीद के लिए स्वीकृति मिल चुकी है, जबकि लगभग ₹2,326 करोड़ के 45 खरीद अनुबंध पहले ही किए जा चुके हैं।

रक्षा मंत्री ने कहा कि आज MSMEs कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रोबोटिक्स, ऑटोमेशन और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। उन्होंने MSMEs और स्टार्ट-अप्स से आग्रह किया कि वे इंडस्ट्री 4.0 तकनीकों को अपनाकर अपनी क्षमता और संसाधनों का बेहतर उपयोग करें। उन्होंने ‘डिजिटल ट्विन’ जैसी आधुनिक तकनीकों का भी उल्लेख किया, जो जटिल प्रणालियों को समझने और बेहतर निर्णय लेने में सहायक होती हैं।

उन्होंने MSMEs की क्षमता बढ़ाने के लिए हॉरिजॉन्टल और वर्टिकल इंटीग्रेशन की आवश्यकता पर भी बल दिया। उनके अनुसार, MSMEs का आपसी सहयोग और बड़े उद्योगों के साथ साझेदारी एक मजबूत नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करने में मदद करेगी।

रक्षा मंत्री ने बताया कि सरकार MSMEs को मजबूत बनाने के लिए लगातार कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि हाल के बजट में MSMEs के लिए इक्विटी, लिक्विडिटी और प्रोफेशनल सपोर्ट प्रदान करने की तीन-स्तरीय रणनीति अपनाई गई है, जिससे वे ‘चैंपियन MSMEs’ के रूप में उभर सकें।

उन्होंने यह भी बताया कि 2012-13 में देश में MSMEs की संख्या लगभग 4.67 करोड़ थी, जो अब बढ़कर लगभग 8 करोड़ हो गई है। सरकार ने MSMEs के पंजीकरण और पहचान को आसान बनाने के लिए Udyam Portal और Udyam Assist Portal जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म भी शुरू किए हैं।

कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री ने रक्षा उत्पादन विभाग की पांच महत्वपूर्ण प्रकाशन भी जारी किए, जिनका उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, निर्यात को बढ़ावा और उद्योगों के लिए सुगम व्यवसाय वातावरण तैयार करना है। साथ ही, सम्मेलन में एक प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया गया, जिसमें भारतीय और विदेशी कंपनियों ने AI, रोबोटिक्स, ऑटोमेशन और स्मार्ट मटेरियल्स जैसी उन्नत विनिर्माण तकनीकों का प्रदर्शन किया।

इस अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान सहित सेना और रक्षा मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

रक्षा मंत्री ने अंत में MSMEs और स्टार्ट-अप्स से आह्वान किया कि वे नवाचार, नई तकनीकों को अपनाने और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ते हुए ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।

‘योग 365’ पहल की शुरुआत: अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को दैनिक जीवन से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम

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नई दिल्ली- योग को एक दिन के उत्सव से आगे बढ़ाकर दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने ‘योग 365’ नामक एक महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय अभियान की शुरुआत की है। इस पहल का लक्ष्य देशभर में लोगों को साल के 365 दिनों तक नियमित रूप से योग अपनाने के लिए प्रेरित करना है।

इस अभियान की घोषणा प्रतापराव जाधव, आयुष मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) ने की। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग दिवस ने व्यापक जागरूकता पैदा की है, लेकिन अब समय आ गया है कि इस जागरूकता को नियमित अभ्यास में बदला जाए।

‘योग 365’ पहल का औपचारिक शुभारंभ Yoga Mahotsav–2026 के दौरान किया गया, जो 2026 के योग दिवस के लिए 100 दिन की उलटी गिनती का प्रतीक है। इस अवसर पर मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (MDNIY) ने Habuild के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किया, जिसके तहत देशभर में लोगों के लिए निःशुल्क दैनिक ऑनलाइन योग सत्र उपलब्ध कराए जाएंगे।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में योग के प्रति जागरूकता काफी अधिक है—ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 95 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 96 प्रतिशत लोग योग के बारे में जानते हैं। हालांकि, नियमित रूप से योग करने वालों की संख्या अपेक्षाकृत कम है। ‘योग 365’ अभियान का उद्देश्य इसी अंतर को पाटना है।

आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने बताया कि यह पहल योग को अधिक सुलभ, व्यावहारिक और दैनिक स्वास्थ्य का हिस्सा बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। वहीं, संयुक्त सचिव मोनालिसा डैश ने कहा कि यह अभियान समुदायों, संस्थानों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करेगा।

इस पहल के तहत योग को स्कूलों, कार्यालयों, सामुदायिक समूहों और डिजिटल माध्यमों से जोड़ने की योजना है। साथ ही, Y-Break, कॉमन योग प्रोटोकॉल और रोगों के लिए विशेष योग कार्यक्रमों के माध्यम से इसे जीवनशैली का हिस्सा बनाने पर जोर दिया जाएगा।

गौरतलब है कि 2015 में शुरू हुआ अंतरराष्ट्रीय योग दिवस अब एक वैश्विक जनआंदोलन बन चुका है, जिसमें हर वर्ष करोड़ों लोग भाग लेते हैं। वर्ष 2025 में ही 26 करोड़ से अधिक लोगों की भागीदारी ने इसकी लोकप्रियता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

‘योग 365’ इसी आंदोलन का अगला चरण है, जिसका उद्देश्य स्पष्ट है—

योग को एक दिन की गतिविधि से आगे बढ़ाकर, हर दिन की स्वस्थ आदत बनाना।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने श्री राम जन्मभूमि मंदिर में किए दर्शन, ‘राम राज्य’ के आदर्श पर दिया जोर

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अयोध्या- भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर का दौरा किया और राम लला के दर्शन किए। इस दौरान उन्होंने मंदिर परिसर में विभिन्न स्थलों पर पूजा-अर्चना और आरती की तथा श्री राम यंत्र स्थापना एवं पूजन भी किया।

यह पावन अवसर चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, नव संवत्सर 2083 के आरंभ और नवरात्रि के प्रथम दिन के रूप में विशेष महत्व रखता है।

राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि अयोध्या की पवित्र भूमि पर आना उनके लिए “सर्वोच्च सौभाग्य” है। उन्होंने श्री राम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े ऐतिहासिक अवसरों—जैसे भूमि पूजन, प्राण प्रतिष्ठा, राम दरबार के उद्घाटन और मंदिर शिखर पर ध्वजारोहण—को भारत की संस्कृति और इतिहास के स्वर्णिम क्षण बताया।

अपने संबोधन में उन्होंने ‘राम राज्य’ की अवधारणा पर विशेष बल देते हुए कहा कि यह आदर्श समाज आर्थिक समृद्धि, सामाजिक समानता और नैतिक मूल्यों पर आधारित होता है। गोस्वामी तुलसीदास के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि राम राज्य में कोई भी व्यक्ति दुखी, वंचित या असहाय नहीं होता।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत आज समावेशी समाज और विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य, भगवान श्रीराम के आशीर्वाद और नागरिकों की एकजुटता से अवश्य प्राप्त होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि देश में इस समय आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण हो रहा है, और सभी नागरिकों को एकता, भाईचारे और समर्पण के साथ राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए।

यह दौरा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारत के सांस्कृतिक पुनरुत्थान और विकसित राष्ट्र के संकल्प को भी दर्शाता है।


छत्तीसगढ़ में शहरी विकास को नई रफ्तार, नगर एवं ग्राम निवेश संशोधन विधेयक 2026 पास

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और सुव्यवस्थित विकास की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए वित्त मंत्री ओपी चौधरी द्वारा प्रस्तुत छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश (संशोधन) विधेयक 2026 को विधानसभा ने ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस संशोधन का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में अनियंत्रित विस्तार और अवैध प्लॉटिंग पर नियंत्रण स्थापित करते हुए योजनाबद्ध विकास को गति देना है।


सदन में चर्चा के दौरान वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि वर्तमान में नगर विकास योजनाएं तैयार करने और उनके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी मुख्यतः रायपुर विकास प्राधिकरण और नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण जैसे प्राधिकरणों पर निर्भर है। हालांकि, राज्य गठन के बाद विभिन्न कारणों से ऐसी योजनाओं की संख्या अपेक्षाकृत कम रही, जिससे कई शहरों में अव्यवस्थित विकास और अवैध प्लॉटिंग की समस्या बढ़ी है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि मध्यप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में विभिन्न एजेंसियों की भागीदारी से नगर विकास योजनाओं के बेहतर परिणाम सामने आए हैं। विशेष रूप से अहमदाबाद में रिंग रोड जैसी प्रमुख परियोजनाएं योजनाबद्ध तरीके से विकसित की गई हैं।

वित्त मंत्री चौधरी ने बताया कि छत्तीसगढ़ में भी रायपुर मास्टर प्लान के अंतर्गत एम.आर.-43 मार्ग का निर्माण नगर विकास योजना के माध्यम से किया जा रहा है, जो इस प्रणाली की उपयोगिता को दर्शाता है। संशोधन के तहत छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 की धारा-38 में बदलाव किया गया है। इसके अनुसार अब नगर विकास योजनाएं तैयार करने के लिए अधिकृत एजेंसियों के दायरे का विस्तार किया जाएगा। नगर तथा ग्राम विकास प्राधिकरणों के अलावा राज्य शासन के अभिकरणों और सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियों को भी इस कार्य के लिए अधिकृत किया जा सकेगा।

इस बदलाव के बाद छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल और छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम जैसे संस्थान भी नगर विकास योजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन में भागीदारी निभा सकेंगे। इससे योजनाओं की संख्या में वृद्धि होने के साथ-साथ औद्योगिक और आवासीय विकास को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।

वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि इस विधेयक का मूल उद्देश्य राज्य में सुनियोजित शहरी विकास को बढ़ावा देना, अवैध प्लॉटिंग पर अंकुश लगाना और उद्योग व आवास के लिए व्यवस्थित भूखंडों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह संशोधन छत्तीसगढ़ के शहरी परिदृश्य को अधिक सुव्यवस्थित और विकासोन्मुख बनाने में महत्वपूर्ण साबित होगा।

छत्तीसगढ़ में छुट्टियों में भी खुले रहेंगे पंजीयन कार्यालय, राजस्व बढ़ाने बड़ा फैसला

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 एमसीबी : राज्य में राजस्व संग्रह को गति देने के उद्देश्य से पंजीयन विभाग ने बड़ा निर्णय लिया है। कार्यालय महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक, छत्तीसगढ़ द्वारा जारी आदेश के अनुसार मार्च माह के अंत तक कुछ शासकीय अवकाश के दिनों में भी पंजीयन कार्यालय खुले रहेंगे और नियमित रूप से पंजीयन कार्य संपादित किए जाएंगे।


वित्तीय वर्ष 2025-26 के समापन को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है ताकि अधिक से अधिक पंजीयन कार्य हो सके और राजस्व में वृद्धि सुनिश्चित की जा सके। आदेश के तहत 22 मार्च (चतुर्थ रविवार), 28 मार्च (अंतिम शनिवार), 29 मार्च (अंतिम रविवार) और 31 मार्च (महावीर जयंती) को भी पंजीयन कार्यालय खुले रखे जाएंगे।

31 मार्च तक जारी रहेंगे सरकारी लेनदेन

निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इन अवकाश दिनों में न केवल पंजीयन कार्यालय खुले रहेंगे, बल्कि बैंकों में भी 31 मार्च 2026 तक शासकीय लेनदेन जारी रखा जाएगा। इसके लिए जिला पंजीयक, कोषालय अधिकारी एवं भारतीय स्टेट बैंक सहित संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने के लिए कहा गया है।

जनता को मिलेगी बड़ी राहत

इस फैसले से आम नागरिकों, खरीदारों और विक्रेताओं को बड़ी सुविधा मिलेगी। अक्सर छुट्टियों के कारण रजिस्ट्री कार्य प्रभावित होता था, लेकिन अब लोग अवकाश के दिनों में भी आसानी से अपने पंजीयन कार्य करा सकेंगे।

प्रशासन ने दिए सख्त निर्देश

संबंधित अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि सभी उप पंजीयक कार्यालयों में निर्धारित नियमों के अनुसार दस्तावेजों का पंजीयन कार्य सुचारू रूप से हो और किसी प्रकार की असुविधा न हो। साथ ही ई-स्टाम्प और अन्य आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता भी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।

आयुष्मान कार्ड गड़बड़ी पर विधानसभा में हंगामा, विधायक ने FIR की उठाई मांग

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 रायपुर। आयुष्मान भारत योजना से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर छत्तीसगढ़ विधानसभा में गुरुवार को जमकर बहस हुई। प्रश्नकाल के दौरान यह मामला प्रमुखता से उठा, जिसमें विधायकों ने सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की।


विधायक कुंवर सिंह निषाद ने बोलोद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आयुष्मान कार्ड से संबंधित गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए जांच पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई है और दोषियों पर कार्रवाई जरूरी है।

इस पर जवाब देते हुए मंत्री श्याम बिहारी ने बताया कि शिकायत के आधार पर जांच टीम गठित कर पूरे मामले की जांच की गई। जांच में किसी भी प्रकार की आर्थिक अनियमितता सामने नहीं आई है। हालांकि संबंधित अधिकारी को नोटिस जारी कर भविष्य में सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

सरकार के जवाब से असंतुष्ट निषाद ने मांग की कि मामले की जांच विधायक दल से कराई जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे प्रकरण में डॉ. होलकर की भूमिका है, इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

वहीं, विधायक उमेश पटेल और देवेंद्र समेत विपक्ष के अन्य सदस्यों ने भी मामले को गंभीर बताते हुए एफआईआर दर्ज करने की मांग की।

हालांकि मंत्री श्याम बिहारी ने साफ कर दिया कि इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी, क्योंकि जांच में किसी भी तरह की वित्तीय गड़बड़ी के प्रमाण नहीं मिले हैं।

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