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जीजा के घर चोरी करने वाला सगा साला गिरफ्तार, ऑनलाइन जुए की लत में बना चोर; 37 लाख के जेवर बरामद

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दो दिन तक जीजा के घर रुककर बनाई थी चोरी की साजिश, ग्राइंडर से तोड़ा ताला और अलमारी का लॉकर; CCTV फुटेज से खुला रिश्ते में छिपे चोर का राज


रायपुर। ऑनलाइन जुए की लत और कर्ज चुकाने की मजबूरी ने एक युवक को ऐसा अपराधी बना दिया कि उसने अपने ही रिश्तेदार के घर को निशाना बना लिया। रायपुर के टिकरापारा थाना क्षेत्र के लक्ष्मी नगर में हुई लाखों रुपये की चोरी का पुलिस ने खुलासा करते हुए पीड़ित के सगे साले को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने जीजा के सूने मकान से सोने, चांदी और हीरे के आभूषणों के साथ नकदी चोरी की थी। पुलिस ने उसके कब्जे से करीब 25 तोला सोने के जेवर बरामद किए हैं, जिनकी अनुमानित कीमत 37 लाख रुपये बताई गई है।

दो दिन जीजा के घर रुककर बनाई चोरी की योजना

पुलिस के मुताबिक, प्रार्थी अनिल शर्मा कृषि विभाग में तकनीकी विशेषज्ञ के पद पर कोंडागांव में पदस्थ हैं और परिवार के साथ वहीं रहते हैं। रायपुर के लक्ष्मी नगर स्थित उनके मकान में परिवार के अन्य सदस्य अलग-अलग मंजिलों पर रहते हैं।

घटना से कुछ दिन पहले आरोपी प्रियंक उर्फ शुभम पाण्डेय अपनी बहन और प्रार्थी की पत्नी के साथ जीजा के घर दो दिन तक रुका था। इसी दौरान उसे घर की अलमारी में सोने, चांदी और हीरे के आभूषणों के साथ नकदी रखे होने की जानकारी मिल गई। उसे यह भी पता था कि उसकी बहन कोंडागांव लौट चुकी है और मकान सूना है। इसी जानकारी का फायदा उठाकर उसने चोरी की साजिश रची।

ग्राइंडर से तोड़ा ताला, अलमारी का लॉकर भी काटा

प्रार्थी के अनुसार, 28 अक्टूबर को मकान की सफाई करने वाली महिला सफाई के बाद ताला लगाकर चाबी उनकी मां सुमित्रा शर्मा को सौंपकर गई थी। 30 अक्टूबर की सुबह उनकी मां ने फोन कर मुख्य दरवाजे का ताला टूटा होने और घर में चोरी होने की जानकारी दी।

रायपुर पहुंचने पर अनिल शर्मा ने देखा कि मकान के मुख्य दरवाजे का ताला टूटा हुआ था। अंदर कमरे में रखी अलमारी और उसका लॉकर भी क्षतिग्रस्त था। अलमारी में रखे सोने, चांदी और हीरे के आभूषणों के साथ नकदी गायब थी।

शिकायत के आधार पर टिकरापारा थाने में अपराध क्रमांक 1004/26 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 331(4) और 305 के अंतर्गत मामला दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू की।

CCTV फुटेज ने खोला रिश्तेदार का राज

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस उपायुक्त (क्राइम एवं साइबर) स्मृतिक राजनाला और पुलिस उपायुक्त (पश्चिम क्षेत्र) रॉबिन्सन गुरिया के निर्देशन में एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट तथा टिकरापारा पुलिस की संयुक्त टीम गठित की गई।

पुलिस ने घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। इसमें एक संदिग्ध व्यक्ति मकान की दीवार फांदकर अंदर प्रवेश करते और सीढ़ियों के रास्ते तीसरी मंजिल तक जाते दिखाई दिया।

जांच के दौरान संदिग्ध की पहचान प्रार्थी के साले प्रियंक उर्फ शुभम पाण्डेय के रूप में हुई। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की। शुरुआत में आरोपी पुलिस को गुमराह करता रहा और चोरी में शामिल होने से इनकार करता रहा। हालांकि, साक्ष्यों के आधार पर पूछताछ करने पर उसने वारदात को अंजाम देना स्वीकार कर लिया।

ऑनलाइन जुए में डूबा कर्ज, जीजा के घर को बनाया निशाना

पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसे ऑनलाइन जुआ खेलने की लत थी। इस वजह से उस पर काफी कर्ज हो गया था। कर्ज चुकाने के लिए उसने अपने जीजा के घर चोरी करने की योजना बनाई।

वारदात के दिन आरोपी दीवार फांदकर मकान में दाखिल हुआ। इसके बाद छोटे ग्राइंडर की मदद से दरवाजे की कुंडी और ताला तोड़कर अंदर पहुंचा। फिर अलमारी का लॉकर तोड़कर सोने, चांदी और हीरे के आभूषणों के साथ नकदी चोरी कर ली।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने चोरी के बाद कुछ आभूषण घर में ही छोड़ दिए और कपड़ों को व्यवस्थित तरीके से अलमारी में रख दिया था, ताकि तत्काल किसी को उस पर संदेह न हो।

37 लाख के सोने के जेवर बरामद, आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने आरोपी प्रियंक उर्फ शुभम पाण्डेय (31 वर्ष) को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से करीब 25 तोला सोने के आभूषण बरामद किए हैं। जब्त जेवरों की अनुमानित कीमत 37 लाख रुपये बताई गई है।

आरोपी मूल रूप से वार्ड क्रमांक 13, पंजाबीपारा, थाना कोतवाली, जिला महासमुंद का निवासी है। वर्तमान में वह प्रिंस कॉलोनी, लक्ष्मी नगर, टिकरापारा रायपुर में रह रहा था। पुलिस मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई कर रही है।

रिश्तों का भरोसा तोड़कर की गई इस चोरी का खुलासा होने के बाद इलाके में भी चर्चा है। ऑनलाइन जुए की लत के चलते युवक ने न केवल कर्ज का बोझ बढ़ाया, बल्कि अपने ही जीजा के घर चोरी कर रिश्तों को भी दांव पर लगा दिया।

धान खरीदी से पहले महासमुंद के 363 किसानों की बढ़ी चिंता, फार्मर आईडी और एग्रीस्टैक पंजीयन अधूरा होने से MSP पर धान बेचने में आ सकती है परेशानी

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महासमुंद- छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू होने से पहले महासमुंद जिले के किसानों के सामने नई परेशानी खड़ी हो गई है। जिले के 363 किसानों का एग्रीस्टैक पंजीयन अब तक पूरा नहीं हो पाया है। फार्मर आईडी नहीं बनने और जमीन से जुड़े दस्तावेजों में गड़बड़ी के कारण इन किसानों को इस खरीफ सीजन में अपनी उपज समर्थन मूल्य पर बेचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। धान खरीदी की तारीख नजदीक आने के साथ ही किसानों की चिंता भी बढ़ने लगी है।

15 नवंबर से शुरू होनी है धान खरीदी

छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए 15 नवंबर से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू होने की जानकारी दी गई है। महासमुंद जिले में प्रशासन ने इसकी तैयारियां तेज कर दी हैं। जिले के 202 धान उपार्जन केंद्रों में साफ-सफाई और अन्य व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

इस खरीफ सीजन में जिले के 1 लाख 61 हजार 874 किसानों ने धान बेचने के लिए पंजीयन कराया है। इनमें 3,974 नए किसान शामिल हैं। लेकिन इन तैयारियों के बीच 363 किसानों का एग्रीस्टैक पंजीयन अधूरा रहना चिंता का विषय बना हुआ है।

आखिर क्यों अटका 363 किसानों का पंजीयन?

मिली जानकारी के अनुसार, इन किसानों की सबसे बड़ी समस्या जमीन से जुड़े राजस्व रिकॉर्ड में गड़बड़ी है। कई किसानों के खसरा रिकॉर्ड का सत्यापन नहीं हो पाया है, वहीं कुछ मामलों में जमीन के दस्तावेजों में दर्ज जानकारी का मिलान नहीं हो रहा है।

फार्मर आईडी बनाने के लिए जमीन से संबंधित रिकॉर्ड का सही होना और उनका सत्यापन जरूरी है। इसी प्रक्रिया में देरी होने से किसानों का एग्रीस्टैक पंजीयन पूरा नहीं हो सका।

बताया जा रहा है कि पटवारियों की हड़ताल के कारण भी जमीन संबंधी दस्तावेजों की जांच और खसरा रिकॉर्ड में सुधार का काम प्रभावित हुआ है।

31 अक्टूबर को समाप्त हुई पंजीयन की समय-सीमा

इस खरीफ सीजन में किसान पंजीयन और आवश्यक संशोधन के लिए 1 जुलाई से 31 अक्टूबर 2026 तक की समय-सीमा निर्धारित की गई थी। लेकिन समय-सीमा समाप्त होने के बाद भी जिले के 363 किसान जरूरी प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए।

ऐसे में अब इन किसानों की नजर पंजीयन की समय-सीमा बढ़ाने और प्रशासन की ओर से मिलने वाली राहत पर टिकी हुई है।

किसान नेताओं ने की समय-सीमा बढ़ाने की मांग

किसान नेताओं का कहना है कि किसानों की परेशानी को देखते हुए पंजीयन की समय-सीमा बढ़ाई जानी चाहिए, ताकि जिन किसानों का पंजीयन तकनीकी या राजस्व संबंधी कारणों से अधूरा रह गया है, उन्हें एक और मौका मिल सके।

किसानों का कहना है कि उनकी पूरी साल की मेहनत धान की फसल पर निर्भर रहती है। यदि समय रहते फार्मर आईडी और एग्रीस्टैक पंजीयन की समस्या दूर नहीं हुई तो उन्हें अपनी उपज बेचने में परेशानी हो सकती है।

नोडल अधिकारी ने क्या कहा?

रिपोर्ट के अनुसार, नोडल अधिकारी अविनाश शर्मा ने बताया कि जिले में अब तक 3,974 नए किसानों ने पंजीयन कराया है। वहीं 363 किसानों का एग्रीस्टैक पंजीयन अभी पूरा नहीं हो पाया है। इनमें अधिकांश मामले खसरा रिकॉर्ड से जुड़ी समस्याओं के हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि नए किसान पंजीयन और एग्रीस्टैक पंजीयन की समय-सीमा बढ़ाने के संबंध में फिलहाल कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई है।

महासमुंद जिले में खेती-किसानी की स्थिति

इस खरीफ सीजन में जिले की सहकारी समितियों के माध्यम से 85,779 किसानों को कुल 517 करोड़ रुपये का कृषि ऋण वितरित किया गया है। कृषि ऋण का निर्धारित लक्ष्य 500 करोड़ रुपये था, जिसे पार किया गया। इससे किसानों को खाद, बीज और खेती की अन्य जरूरतों के लिए आर्थिक सहायता मिली है।

किसानों के लिए जरूरी बात

जिन किसानों की फार्मर आईडी या एग्रीस्टैक पंजीयन प्रक्रिया अधूरी है, उन्हें अपनी संबंधित सहकारी समिति, उपार्जन केंद्र और राजस्व विभाग से संपर्क कर खसरा रिकॉर्ड तथा जमीन के दस्तावेजों की स्थिति की जानकारी लेनी चाहिए।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या धान खरीदी शुरू होने से पहले इन 363 किसानों की समस्या का समाधान हो पाएगा? क्या शासन पंजीयन की समय-सीमा बढ़ाकर किसानों को एक और मौका देगा?

महासमुंद के किसानों को अब प्रशासन के अगले फैसले का इंतजार है।


दीपावली से पहले छत्तीसगढ़ की महिलाओं को बड़ा उपहार

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गृह मंत्री अमित शाह के आतिथ्य में कल राज्योत्सव में जारी होगी महतारी वंदन योजना की 33वीं किस्त

रायपुर- छत्तीसगढ़ शासन द्वारा महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और उनकी आत्मनिर्भरता को सुनिश्चित करने की दिशा में चलाई जा रही महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना के तहत प्रदेश की माताओं-बहनों को एक और बड़ी सौगात मिलने जा रही है। आगामी दीपावली के पावन पर्व से ठीक पहले योजना की नवंबर माह की 33वीं किस्त का अंतरण कल यानी 3 नवंबर 2026 को राज्योत्सव समारोह के दौरान किया जाएगा।

गृह मंत्री अमित शाह करेंगे राशि का अंतरण

राज्योत्सव समारोह के मुख्य मंच से भारत सरकार के गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मुख्य आतिथ्य तथा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में यह कार्यक्रम आयोजित होगा। इस दौरान प्रदेश की 67 लाख 40 हजार 410 पात्र महिलाओं के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (क्ठज्) के माध्यम से कुल 632 करोड़ 63 लाख 67 हजार 750 रुपये की राशि सीधे अंतरित की जाएगी। त्योहार से पहले खाते में राशि आने से महिलाओं और उनके परिवारों में भारी उत्साह और उमंग का माहौल है।

इन महिलाओं के खातों में पहुंचेगी राशि

ई-केवाईसी पूर्ण करा चुकीं प्रदेशभर की 67 लाख 33 हजार 502 महिला हितग्राही लाभान्वित होंगी। नियद नेल्ला नार कैंप क्षेत्र की 6,908 महिलाओं को उनकी 13वीं किस्त की राशि प्रदान की जाएगी। इस प्रकार कुल 67 लाख 40 हजार 410 महिलाओं को इस चरण में लाभ मिलेगा।

योजना के सफर पर एक नजर

छत्तीसगढ़ में 1 मार्च 2024 से लागू इस योजना के तहत पहली किश्त 10 मार्च 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करकमलों से प्रदान की गई थी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में अब तक 32 किस्तों के माध्यम से महिलाओं को कुल 20 हजार 717.87 करोड़ रुपये की सहायता दी जा चुकी है। 33वीं किस्त के जुड़ने के बाद यह कुल आंकड़ा बढ़कर 21 हजार 350.50 करोड़ रुपये हो जाएगा।

छत्तीसगढ़ शासन की इस निरंतर वित्तीय सहायता से प्रदेश की महिलाएं अपनी छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ परिवार की आर्थिक गतिविधियों में भी सक्रिय योगदान दे रही हैं। हितग्राही महिलाएं भुगतान की स्थिति व अन्य जानकारी आधिकारिक पोर्टल mahtarivandan.cgstate.gov.in तथा प्ले स्टोर पर उपलब्ध मोबाइल ऐप के माध्यम से प्राप्त कर सकती हैं।

राज्यपाल रमेन डेका ने आसमान में देखा भारतीय वायु सेना का अद्भुत शौर्य, साहस और कौशल

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के गौरवपूर्ण अवसर पर नवा रायपुर का आसमान आज भारतीय वायु सेना के अदम्य शौर्य, साहस, अनुशासन और अद्भुत उड़ान कौशल का साक्षी बना। सेंध लेक में आयोजित भारतीय वायु सेना की विश्वप्रसिद्ध सारंग एयरोबेटिक डिस्प्ले टीम के भव्य एयर-शो में राज्यपाल रमेन डेका शामिल हुए। इस अवसर पर आकाशगंगा स्काईडाइविंग टीम, गरुड़ कमांडोज और सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम के जांबाजों ने अपने साहसिक करतबों, सटीक नियंत्रण और उत्कृष्ट समन्वय से उपस्थित जनसमूह को रोमांचित कर दिया। पांच हेलीकॉप्टरों की आकर्षक फॉर्मेशन, हैरतअंगेज हवाई करतबों, आसमान में तिरंगे की मनमोहक छटा और ‘वंदे मातरम्’ की गूंज ने पूरे वातावरण को देशभक्ति और राष्ट्रीय गौरव की भावना से सराबोर कर दिया।


राज्यपाल  रमेन डेका ने भारतीय वायु सेना के जांबाजों के शानदार प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर प्रतिष्ठित सारंग टीम का यह आयोजन हम सभी के लिए गौरव और प्रसन्नता का विषय है। वायु वीरों ने जिस साहस, अनुशासन, आत्मविश्वास और सटीक समन्वय के साथ अपने कौशल का प्रदर्शन किया है, वह प्रत्येक नागरिक, विशेषकर युवाओं के लिए प्रेरणादायी है। यह आयोजन केवल रोमांचकारी हवाई करतबों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि भारतीय वायु सेना की उत्कृष्ट क्षमता, कठिन प्रशिक्षण, समर्पण और राष्ट्रसेवा की भावना का जीवंत परिचय है। उन्होंने प्रदेशवासियों को छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कामना की, कि हमारा छत्तीसगढ़ निरंतर विकास, प्रगति और समृद्धि की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करता रहे। उन्होंने कहा कि राज्य स्थापना दिवस की खुशियों के बीच भारतीय वायु सेना के जांबाजों का यह अद्भुत प्रदर्शन प्रदेशवासियों के उत्साह और गौरव को और अधिक बढ़ा रहा है।


अनुशासन, आपसी विश्वास और टीम भावना का अनुपम उदाहरण है सारंग टीम

    राज्यपाल  डेका ने कहा कि सारंग का अर्थ मोर होता है। जिस प्रकार मोर हमारे देश की विशिष्ट पहचान और सुंदरता का प्रतीक है, उसी प्रकार सारंग टीम भारतीय वायु सेना की गरिमा, उत्कृष्ट कौशल और अनुशासन का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हवाई प्रदर्शन के दौरान हेलीकॉप्टरों की विभिन्न फॉर्मेशन और साहसिक करतब भले ही देखने में सहज और सुंदर दिखाई देते हों, लेकिन इनके पीछे विस्तृत योजना, निरंतर अभ्यास, गहरी एकाग्रता और     असाधारण समन्वय होता है। प्रत्येक पायलट को अपनी भूमिका के साथ-साथ अपने साथियों की गतिविधियों का भी पूरा ध्यान रखना पड़ता है। चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में एक-दूसरे पर अटूट विश्वास और सटीक तालमेल ही ऐसी अद्भुत प्रस्तुतियों को संभव बनाता है। उन्होंने कहा कि सारंग टीम का प्रदर्शन हमें यह महत्वपूर्ण संदेश देता है कि अनुशासन, समर्पण, सामूहिक प्रयास और आपसी विश्वास से कठिन से कठिन लक्ष्य भी प्राप्त किए जा सकते हैं। यह प्रदर्शन युवाओं को उत्कृष्टता प्राप्त करने, अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पित रहने और सामूहिक प्रयासों से सफलता हासिल करने की प्रेरणा देता है।


आकाशगंगा के जांबाजों ने आसमान से उतरकर दिखाया अद्भुत साहस और सटीक नियंत्रण

    एयर-शो का रोमांचकारी शुभारंभ भारतीय वायु सेना की प्रसिद्ध आकाशगंगा स्काईडाइविंग टीम ने किया। खुले आसमान से छलांग लगाते हुए टीम के जांबाजों ने अपने पैराशूट को कुशलतापूर्वक नियंत्रित कर अदम्य साहस, संतुलन और सटीकता का परिचय दिया। निर्धारित दिशा और गति के अनुरूप पैराशूट को नियंत्रित करते हुए स्काईडाइवर्स ने सेंध लेक के सामने निर्धारित स्थान पर सटीक लैंडिंग की। उनके इस साहसिक प्रदर्शन को देखकर दर्शक रोमांचित हो उठे और सफल लैंडिंग के बाद पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इस प्रस्तुति ने भारतीय वायु सेना के जवानों की शारीरिक दक्षता, मानसिक एकाग्रता और दृढ़ता और उच्चस्तरीय प्रशिक्षण की प्रभावशाली झलक प्रस्तुत की।


गरुड़ कमांडोज ने किया रेस्क्यू और कॉम्बैट ऑपरेशन का प्रभावशाली प्रदर्शन 

 
    आकाशगंगा टीम के प्रदर्शन के बाद भारतीय वायु सेना के गरुड़ कमांडोज ने अपने अदम्य साहस और विशेष ऑपरेशन की दक्षता का परिचय दिया। कमांडोज ने एयर-शो से पहले आठ हजार फीट की ऊंचाई से पैराशूट लैंडिंग कर दर्शकों को रोमांचित किया। इसके पश्चात एमआई-17 हेलीकॉप्टर से स्लिदरिंग का प्रदर्शन किया गया। हवा में स्थिर हेलीकॉप्टर से रस्सियों के सहारे नीचे उतरते जवानों ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में निर्धारित स्थान तक पहुंचने की अपनी दक्षता प्रदर्शित की। सेंध लेक के सामने कमांडोज ने रेस्क्यू एवं कॉम्बैट ऑपरेशन का प्रभावशाली प्रदर्शन कर अपनी परिचालन क्षमता, त्वरित कार्रवाई और कठिन परिस्थितियों में मिशन को सफलतापूर्वक पूरा करने के कौशल का परिचय दिया। इसके पश्चात जवानों ने मंच को सलामी दी। उनके अनुशासित और साहसिक प्रदर्शन पर दर्शकों ने तालियों के साथ उत्साहवर्धन किया।

सारंग के पांच हेलीकॉप्टरों की फॉर्मेशन और क्रॉसओवर करतब ने थाम दीं दर्शकों की सांसें

    एयर-शो का सबसे प्रमुख आकर्षण भारतीय वायु सेना की विश्वप्रसिद्ध सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम की शानदार प्रस्तुति रही। ग्रुप कैप्टन श्री अभिजीत कुमार के नेतृत्व में टीम के पांच हेलीकॉप्टरों ने नवा रायपुर के आसमान में एक के बाद एक आकर्षक फॉर्मेशन और रोमांचकारी हवाई करतब प्रस्तुत किए। पायलटों ने अत्यंत सटीक नियंत्रण, संतुलन और बेहतरीन समन्वय के साथ हेलीकॉप्टरों को उड़ाकर अपने अद्भुत कौशल का परिचय दिया।

    आसमान में एक साथ उड़ते पांच हेलीकॉप्टरों की आकर्षक फॉर्मेशन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कभी हेलीकॉप्टर एक-दूसरे के बेहद करीब आते दिखाई दिए, तो कभी अलग-अलग दिशाओं में उड़ान भरते हुए पुनः निर्धारित फॉर्मेशन में एक साथ आ गए। प्रदर्शन के दौरान हेलीकॉप्टरों का बेहद नजदीक से एक-दूसरे को क्रॉस करने वाला रोमांचकारी ‘क्रॉसओवर’ करतब विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। तेज गति से एक-दूसरे के सामने से गुजरते हेलीकॉप्टरों को देखकर दर्शक आश्चर्यचकित रह गए। इस करतब में पायलटों के मन की एकाग्रता, उड़ान पर नियंत्रण और आपसी तालमेल का अद्भुत प्रदर्शन देखने को मिला।

सारंग के कॉकपिट से गूंजा ‘छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया’, दर्शकों का उत्साह हुआ दोगुना

    छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर सारंग टीम ने प्रदेश के प्रति अपने विशेष स्नेह और सम्मान का भी परिचय दिया। हवाई प्रदर्शन के दौरान ग्रुप कैप्टन श्री अभिजीत कुमार ने हेलीकॉप्टर के कॉकपिट से छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय उद्घोष ‘छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया’ के माध्यम से प्रदेशवासियों का आत्मीय अभिवादन किया। आसमान से गूंजे इस उद्घोष ने उपस्थित जनसमूह के उत्साह को दोगुना कर दिया। राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर भारतीय वायु सेना के जांबाजों द्वारा छत्तीसगढ़ की विशिष्ट पहचान और जनभावनाओं को सम्मान देने का यह क्षण दर्शकों के लिए विशेष रूप से यादगार बन गया।

तिरंगे की मनमोहक फॉर्मेशन और ‘वंदे मातरम्’ की गूंज से देशभक्ति के रंग में रंगा आसमान

    हवाई प्रदर्शन के अंतिम चरण में सारंग टीम ने ‘वंदे मातरम्’ गीत की गूंज के बीच तिरंगे की मनमोहक फॉर्मेशन प्रस्तुत की। आसमान में तिरंगे के रंगों की आकर्षक छटा, हेलीकॉप्टरों का अद्भुत तालमेल और देशभक्ति गीत की गूंज ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया। शौर्य, साहस, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम से परिपूर्ण इस प्रस्तुति के साथ एयर-शो का भव्य एवं यादगार समापन हुआ। राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम ने प्रदेशवासियों को भारतीय वायु सेना की उत्कृष्टता और राष्ट्रसेवा के गौरवशाली स्वरूप को निकट से देखने का अवसर प्रदान किया।

विश्वभर में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ा चुकी है सारंग टीम

    उल्लेखनीय है कि भारतीय वायु सेना की सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम विश्व की एकमात्र पांच हेलीकॉप्टरों वाली एयरोबेटिक प्रदर्शन टीम है। यह टीम अपने सुनियोजित हवाई करतबों, आकर्षक फॉर्मेशनों और अद्भुत उड़ान कौशल के माध्यम से भारतीय वायु सेना की सटीकता, अनुशासन, व्यावसायिकता तथा उच्चस्तरीय प्रशिक्षण का परिचय देती है। सारंग टीम जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, मॉरिशस, रूस और मिस्र सहित दुनिया के अनेक देशों में अपने शानदार 1500 हवाई प्रदर्शनों से भारत की प्रतिष्ठा और गौरव को नई ऊंचाइयां प्रदान कर चुकी है।

    छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर नवा रायपुर में आयोजित यह भव्य एयर-शो प्रदेशवासियों के लिए विशेष गौरव और उत्साह का अवसर बना। आकाशगंगा स्काईडाइविंग टीम, गरुड़ कमांडोज और सारंग टीम की साहसिक प्रस्तुतियों ने राज्य स्थापना दिवस के उत्सव को और अधिक भव्य एवं यादगार बना दिया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल सहित सांसदगण, विधायकगण, निगम-मंडल के पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में दर्शकगण उपस्थित थे।

 

 

 

शिल्पग्राम में रेशम उत्पादन की प्रक्रिया जानने उमड़ रहे लोग

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सफेद, रंगीन, पीला मैसूर कोसा सहित रेशम के विभिन्न प्रकार बने आकर्षण का केंद्र

लघु एवं सीमांत किसानों को एक ही स्टॉल पर मिल रही शहतूत रेशम उत्पादन से जुड़ी सभी जानकारी

रायपुर- राज्योत्सव परिसर स्थित शिल्पग्राम में ग्रामोद्योग विकास विभाग के स्टॉल पर रेशम कीटपालन की प्रक्रिया समझने बड़ी संख्या में किसान एवं आम नागरिक पहुंच रहे हैं। प्राकृतिक रेशम कीड़ों को देखने के लिए भी लोगों में खासा उत्साह दिख रहा है।

स्टॉल में रेशम के विभिन्न प्रकारों और उनसे तैयार होने वाले धागों को प्रदर्शित किया गया है। इनमें मलबरी सफेद कोया, मलबरी रंगीन कोया, मलबरी पीला मैसूर, मलबरी सफेद रिल्ड, टसर स्पन धागा, टसर बाना धागा, डाबा पालित कोसा और रैली साबू बीज प्रमुख हैं। इन धागों का उपयोग कोसा सिल्क, मलबरी सिल्क के साथ-साथ बनारसी एवं कांजीवरम जैसी पारंपरिक साड़ियों के निर्माण में किया जाता है। लोग रेशम के प्रकारों, उसके उत्पादन और वस्त्र निर्माण की प्रक्रिया को करीब से जान-समझ रहे हैं।

स्टॉल में टसर धागा विक्रय केंद्र भी है, जहां प्रदेश के विभिन्न जिलों के विशेष सिल्क उत्पाद रखे गए हैं। इनमें सारंगढ़ से समलेश्वरी मलबरी सिल्क एवं समलेश्वरी टसर सिल्क, सरगुजा से महामाया सिल्क, जगदलपुर से दंतेश्वरी सिल्क, कांकेर से अरण्य सिल्क, महासमुंद से खल्लारी सिल्क, रायगढ़ से फॉरेस्ट गोल्ड सिल्क, गरियाबंद से गंडेश्वर सिल्क और जांजगीर-चांपा से प्रसिद्ध चांपा सिल्क के रेशम धागे और अन्य सामग्री शामिल हैं। साथ ही टसर बीजागर और स्पिनिंग मशीन के जरिए धागाकरण की प्रक्रिया का जीवंत प्रदर्शन भी किया जा रहा है।

किसानों को ग्रामोद्योग विकास विभाग की योजनाओं की जानकारी भी दी जा रही है। इसी क्रम में लोग निजी क्षेत्र में शहतूत की खेती और रेशम कीटपालन को बढ़ावा देने के लिए संचालित नवीन शहतूत रेशम बाड़ी योजना के बारे में जान रहे हैं। इसके तहत निजी भूमि पर एक एकड़ में शहतूत पौधरोपण एवं कीटपालन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। योजना में पौधरोपण एवं संधारण, कीटपालन भवन एवं उपकरण व सिंचाई सुविधाओं के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है। साथ ही पौधरोपण के बाद किसानों को शहतूत की खेती और रेशम कीटपालन की तकनीकी जानकारी देने के लिए एक माह का निःशुल्क प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाता है। इस योजना का उद्देश्य लघु एवं सीमांत किसानों को शहतूत रेशम उत्पादन से जोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी रोजगार के अवसर विकसित करना है।

गौरतलब है कि शहतूत रेशम कीटपालन कृषि आधारित कुटीर उद्योग है, जिसका अंतिम उत्पाद रेशम है। इसे खेती-किसानी के साथ आसानी से अपनाया जा सकता है। श्रम आधारित होने के कारण इसमें विभिन्न स्तरों पर रोजगार का सृजन होता है। परिवार आधारित उद्योग होने से यह ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका का भरोसेमंद साधन के साथ ही कृषि क्षेत्र की प्रमुख नगदी फसलों में शामिल है, जो मात्र एक माह में ही नगद आमदनी उपलब्ध कराती है।


छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026- खाना खजाना जोन में छत्तीसगढ़ी व्यंजन स्टॉल बना आकर्षण का केन्द्र

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पताल (टमाटर) की चटनी के साथ मूंग बड़ा का स्वाद लोगों को खूब भाया

रायपुर- नवा रायपुर में चल रहे राज्योत्सव में खाना खजाना जोन में छत्तीसगढ़ी व्यंजन स्टॉल लोगों के बीच आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। स्टॉल क्रमांक 12 "छत्तीसगढ़ी व्यंजन - जय जोहार जय छत्तीसगढ़" पर पारंपरिक व्यंजनों का लुत्फ उठाने के लिए लोगों की कतार लगी हुई है।

यहां परोसे जा रहे मूंग बड़ा का स्वाद लोगों को सबसे ज्यादा भा रहा है, खासकर पताल (टमाटर) की चटपटी चटनी के साथ इसका स्वाद और भी लाजवाब हो जाता है। गर्मागर्म मूंग बड़ा और चटपटी चटनी के कॉम्बिनेशन की लोग जमकर तारीफ कर रहे हैं।

उपरवारा के प्रीतम पटेल, उमेश देवांगन और उर्मिला कुमारी ने की तारीफ -

स्टॉल पर पहुंचे उपरवारा निवासी प्रीतम पटेल, उमेश देवांगन और उर्मिला कुमारी ने व्यंजनों का स्वाद लेकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि "पताल की चटनी के साथ मूंग बड़ा का स्वाद बिल्कुल घर जैसा है। ऐसे स्टॉल से हमारी छत्तीसगढ़ी संस्कृति को बढ़ावा मिल रहा है।"

स्टॉल के संचालक बलौदाबाजार के नीरज चंद्राकर ने बताया कि उनके स्टॉल पर छत्तीसगढ़ी व्यंजनों को पूरी शुद्धता और पारंपरिक तरीके से तैयार किया जा रहा है। चंद्राकर ने बताया कि विधानसभा सत्र के दौरान भी विधानसभा परिसर में उनके द्वारा ठेठरी, खुरमी सहित अन्य छत्तीसगढ़ी व्यंजनों की सप्लाई की गई थी, जिसे काफी सराहा गया था।

महासमुंद के भालुकोना में निकल का बड़ा भंडार मिलने के संकेत, 40 लाख टन से अधिक अयस्क की संभावना से छत्तीसगढ़ में बढ़ी उम्मीदें

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महासमुंद के भालुकोना में मिला 40 लाख टन से अधिक निकल युक्त खनिज का संकेत, देश की महत्वपूर्ण खनिज संपदा में जुड़ सकता है नया नाम

महासमुंद- छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के लिए खनिज संपदा के लिहाज से एक बड़ी खबर सामने आई है। जिले की बसना तहसील के भालुकोना क्षेत्र में निकल (Nickel), कॉपर (Copper) और प्लेटिनम समूह के खनिजों (PGE) की मौजूदगी को लेकर उत्साहजनक संकेत मिले हैं। खनन क्षेत्र की कंपनी डेक्कन गोल्ड माइंस लिमिटेड (Deccan Gold Mines Limited) की ओर से जारी प्रारंभिक भूवैज्ञानिक मॉडलिंग के अनुसार यहां 40 लाख टन से अधिक खनिजयुक्त अयस्क (Ore) होने की संभावना जताई गई है। कंपनी ने 1 नवंबर 2026 को इस संबंध में जानकारी साझा की है।

40 लाख टन से अधिक अयस्क का अनुमान

कंपनी की प्रारंभिक मॉडलिंग में भालुकोना परियोजना में लगभग 0.24 प्रतिशत निकल-समतुल्य (Nickel Equivalent) ग्रेड का अनुमान लगाया गया है। इसके आधार पर 10 हजार टन से अधिक निकल-समतुल्य धातु की मात्रा का संकेत मिला है।

यहां निकल-समतुल्य का अर्थ केवल शुद्ध निकल नहीं है, बल्कि इसमें निकल, कॉपर, प्लैटिनम और पैलेडियम जैसे खनिजों के योगदान को मिलाकर गणना की गई है।

15 स्थानों पर की गई ड्रिलिंग

कंपनी ने मार्च 2026 से भालुकोना क्षेत्र में खोज कार्य शुरू किया था। अब तक 15 डायमंड कोर ड्रिलिंग होल किए गए हैं, जिनकी कुल गहराई मिलाकर 2,773 मीटर है।

ड्रिलिंग के दौरान कुछ प्रमुख स्थानों पर खनिजों की मौजूदगी के संकेत मिले हैं।

  • BJD-03 में 54 मीटर तक 0.21 प्रतिशत निकल-समतुल्य ग्रेड।

  • BJD-09 में 34.2 मीटर तक 0.31 प्रतिशत।

  • BJD-01 में 29.8 मीटर तक 0.26 प्रतिशत।

  • BJD-02 में 15 मीटर तक 0.31 प्रतिशत।

ये ड्रिलिंग के अलग-अलग हिस्सों के परिणाम हैं, पूरे क्षेत्र का औसत ग्रेड नहीं।

अभी केवल 25 प्रतिशत क्षेत्र का आकलन

इस परियोजना की एक खास बात यह है कि कंपनी द्वारा जारी वर्तमान अनुमान केवल 1.3 किलोमीटर लंबे चिन्हित खनिज क्षेत्र के लगभग 300 से 350 मीटर हिस्से पर आधारित है।

अर्थात अभी पूरे संभावित खनिज क्षेत्र का आकलन नहीं हुआ है। ड्रोन आधारित मैग्नेटिक सर्वे और इंड्यूस्ड पोलराइजेशन (IP) सर्वे में दक्षिण-पूर्व दिशा में भी खनिजयुक्त संरचनाओं की पुनरावृत्ति की संभावना सामने आई है। इस क्षेत्र में आगे और खोज की जा सकती है।

30 वर्ग किलोमीटर में फैला है खनिज ब्लॉक

भालुकोना-जामनीडीह निकल ब्लॉक महासमुंद जिले की बसना तहसील में लगभग 30 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। अप्रैल 2025 में इस ब्लॉक का कंपोजिट लाइसेंस डेक्कन गोल्ड माइंस लिमिटेड को दिया गया था।

इस क्षेत्र में निकल, क्रोमियम, प्लेटिनम समूह के खनिजों और कॉपर की संभावनाओं को लेकर पहले भी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण किए जा चुके हैं।

देश के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह खोज?

निकल का उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियों, स्टेनलेस स्टील, विशेष मिश्र धातुओं और विभिन्न औद्योगिक उत्पादों में किया जाता है। वहीं कॉपर और प्लेटिनम समूह के खनिज भी आधुनिक उद्योग, इलेक्ट्रॉनिक्स और स्वच्छ ऊर्जा तकनीक के लिए महत्वपूर्ण हैं।

भारत में इन खनिजों की घरेलू उपलब्धता बढ़ने से भविष्य में आयात पर निर्भरता कम करने और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

अभी अंतिम भंडार की पुष्टि होना बाकी

कंपनी ने स्पष्ट किया है कि 40 लाख टन से अधिक अयस्क का यह आंकड़ा प्रारंभिक भूवैज्ञानिक मॉडलिंग पर आधारित है। इसे अभी प्रमाणित खनिज संसाधन या खनन योग्य भंडार (Mineral Reserve) नहीं माना जा सकता।

इसके लिए आगे और ड्रिलिंग, विस्तृत परीक्षण, खनिजों की गुणवत्ता का आकलन और आर्थिक व्यवहार्यता का अध्ययन जरूरी होगा।

महासमुंद के लिए क्यों खास है यह खबर?

भालुकोना क्षेत्र में निकल, कॉपर और प्लेटिनम समूह के खनिजों की संभावनाएं सामने आने से महासमुंद जिले की पहचान खनिज संपदा के क्षेत्र में भी मजबूत हो सकती है। हालांकि वास्तविक खनन, रोजगार और स्थानीय विकास पर इसका प्रभाव आगे की जांच, मंजूरियों और परियोजना के विकास पर निर्भर करेगा।


पूर्व प्राचार्य समीरचंद्र प्रधान ने प्राथमिक विद्यालय सलिहाभांठा के बच्चों को कराया न्योता भोज

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57 बच्चों और 34 पालकों के साथ बैठकर किया भोजन, विज्ञान के रोचक प्रयोगों से दिया समय प्रबंधन और अनुशासन का संदेश

पटेवा- प्राथमिक विद्यालय सलिहाभांठा में पूर्व प्राचार्य समीरचंद्र प्रधान द्वारा बच्चों के उत्साहवर्धन और उनके साथ खुशियां साझा करने के उद्देश्य से न्योता भोज का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के 57 बच्चों और 34 पालकों को आमंत्रित कर स्वादिष्ट खीर-पूड़ी, फल एवं मिठाई परोसी गई। प्रधान ने बच्चों और पालकों के साथ एक ही पंक्ति में बैठकर भोजन किया और सभी को शुभकामनाएं दीं।

कार्यक्रम की शुरुआत भोजन मंत्र के पश्चात एक बच्ची को अपने हाथों से फल खिलाकर की गई। इसके बाद प्रधान ने स्वयं बच्चों को भोजन परोसा। पालकों ने भी आयोजन में सहयोग किया और बच्चों के साथ बैठकर भोजन का आनंद लिया। आत्मीयता और अपनत्व से भरे इस आयोजन में बच्चे, पालक एवं शिक्षक काफी उत्साहित नजर आए।

विज्ञान के रोचक प्रयोगों से बच्चों को दिया सीखने का संदेश

न्योता भोज से पहले श्री प्रधान ने बच्चों की कक्षा में पहुंचकर 'हमारे जीवन में विज्ञान के चमत्कार' विषय पर रोचक चर्चा की। उन्होंने विभिन्न प्रयोगों के माध्यम से विज्ञान के सिद्धांतों को सरल और मनोरंजक तरीके से समझाया। साथ ही बच्चों को समय प्रबंधन, अनुशासन, नियमित दिनचर्या और व्यवस्थित जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया।

सिक्के को पानी में तैराने वाले प्रयोग के माध्यम से उन्होंने समझाया कि जिस प्रकार पानी में रखा कागज सिक्के को डूबने से बचाने में आधार का काम करता है, उसी प्रकार प्राथमिक शिक्षा भी आगे की शिक्षा का मजबूत आधार होती है। प्राथमिक स्तर पर जितनी मजबूत नींव तैयार होगी, भविष्य में सीखने और आगे बढ़ने की क्षमता उतनी ही सशक्त होगी।

इसी तरह दो गिलासों के बीच से कागज निकालने के प्रयोग में कक्षा चौथी की छात्रा राखी ने सफलतापूर्वक प्रयोग करके दिखाया। इस पर श्री प्रधान ने बच्चों को समझाया कि किसी भी कार्य को करने से पहले सोच-विचार करना, स्वयं से तर्क करना और सही निर्णय लेना सफलता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। जीवन में आगे बढ़ने के लिए सही सोच, तर्कशक्ति और आत्मविश्वास बेहद जरूरी हैं।

विद्यालय परिवार ने जताया आभार

पूर्व प्राचार्य प्रधान के इस आत्मीय प्रयास से बच्चों में काफी उत्साह देखने को मिला। विद्यालय परिवार एवं इको क्लब के बच्चों ने स्वादिष्ट न्योता भोज और ज्ञानवर्धक मार्गदर्शन के लिए उनका आभार व्यक्त किया। इस आयोजन ने बच्चों को न केवल सामूहिक भोजन और सहभागिता का आनंद दिया, बल्कि विज्ञान, शिक्षा, अनुशासन और जीवन मूल्यों की महत्वपूर्ण सीख भी दी।

कार्यक्रम में एसएमसी अध्यक्ष पिरीत राम साहू, पंचराम ध्रुव, भोजराम साहू, त्रिलोकी साहू, हेमलता साहू, देवकी सिन्हा, जिज्ञासा साहू, नीरा दीवान, कुसुमलता दीवान, लक्ष्मी साहू, बिंदा ध्रुव, बिसनी दीवान, प्रीति सिन्हा, हेमलता ध्रुव, अमरीका ध्रुव, उमठी बाई यादव, सुनीता दीवान, पिलेश्वर सिन्हा, अभिषेक दीवान, हेतराम ध्रुव, हरिशंकर निषाद, दल्लूराम यादव, गुलाब ध्रुव, संतुराम ध्रुव, डगेश्वर साहू, रामचरण यादव, खिलेश्वरी यादव सहित अन्य पालक उपस्थित रहे।

इसके अलावा गत वर्ष एकलव्य विद्यालय में चयनित पूर्व छात्रा रुखमणी एवं मुकेश तथा शिक्षक रामेश्वर ढीढी सहित विद्यालय के बच्चे और पालक बड़ी संख्या में मौजूद थे।

न्योता भोज के इस आयोजन ने शिक्षा के साथ संस्कार, विज्ञान के साथ तर्कशक्ति और सामूहिक सहभागिता के माध्यम से बच्चों के उज्ज्वल भविष्य का प्रेरक संदेश दिया।


दीपावली से पहले महिलाओं के खाते में आएंगे 632 करोड़, कल जारी होगी महतारी वंदन की 33वीं किस्त

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ की महिलाओं के लिए दीपावली से पहले बड़ी खुशखबरी है। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना की 33वीं किस्त 3 नवंबर 2026 को जारी की जाएगी। राज्योत्सव समारोह के दौरान आयोजित विशेष कार्यक्रम में प्रदेश की 67 लाख 40 हजार 410 पात्र महिलाओं के बैंक खातों में 632 करोड़ 63 लाख 67 हजार 750 रुपये की राशि सीधे ट्रांसफर की जाएगी। त्योहार से ठीक पहले मिलने वाली इस आर्थिक सहायता से लाखों महिलाओं को राहत मिलेगी।


राजधानी रायपुर में आयोजित राज्योत्सव समारोह के मुख्य मंच से केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मुख्य आतिथ्य और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में राशि अंतरण का कार्यक्रम संपन्न होगा। योजना के तहत हितग्राहियों के खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से राशि भेजी जाएगी।

67 लाख से अधिक महिलाओं को मिलेगा लाभ

महतारी वंदन योजना की इस किस्त के तहत ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी कर चुकीं प्रदेश की 67 लाख 33 हजार 502 महिला हितग्राहियों को नियमित मासिक सहायता मिलेगी। वहीं, नियद नेल्ला नार योजना के कैंप क्षेत्रों की 6,908 महिलाओं को 13वीं किस्त की राशि प्रदान की जाएगी। इस तरह कुल 67 लाख 40 हजार 410 महिलाओं के खातों में सहायता राशि पहुंचेगी।

32 किस्तों में अब तक 20,717 करोड़ रुपये का भुगतान

छत्तीसगढ़ में महतारी वंदन योजना की शुरुआत 1 मार्च 2024 को की गई थी। योजना की पहली किस्त 10 मार्च 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जारी की थी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में अब तक 32 किस्तों के माध्यम से प्रदेश की महिलाओं को कुल 20,717.87 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जा चुकी है।

अब 33वीं किस्त के 632.63 करोड़ रुपये जारी होने के बाद योजना के तहत वितरित कुल राशि बढ़कर लगभग 21,350.50 करोड़ रुपये हो जाएगी। यह योजना प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है।

छोटी जरूरतों से लेकर घरेलू खर्च में मिल रही मदद

महतारी वंदन योजना के तहत मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता से महिलाएं अपनी व्यक्तिगत जरूरतों, बच्चों की शिक्षा, घरेलू खर्च और अन्य आवश्यकताओं को पूरा करने में योगदान दे रही हैं। सरकार का मानना है कि महिलाओं के हाथों में सीधे आर्थिक सहायता पहुंचने से परिवार में उनकी आर्थिक भागीदारी और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत हो रही है।

ऑनलाइन चेक कर सकेंगी किस्त का स्टेटस

हितग्राही महिलाएं महतारी वंदन योजना की किस्त और भुगतान से जुड़ी जानकारी आधिकारिक वेबसाइट mahtarivandan.cgstate.gov.in पर देख सकती हैं। इसके अलावा प्ले स्टोर पर उपलब्ध योजना के मोबाइल ऐप के माध्यम से भी भुगतान की स्थिति और अन्य जानकारियां प्राप्त की जा सकती हैं।

चरौदा में राज्योत्सव पर 'भुइँया के गोठ' कार्यक्रम ने जीता दर्शकों का दिल, एक क्लिक में चरौदा पोर्टल लॉन्च

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आरंग- रविवार को छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के अवसर पर ग्राम चरौदा में आयोजित 'भुइँया के गोठ' सांस्कृतिक कार्यक्रम ने दर्शकों का दिल जीत लिया।

पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के तत्वावधान में आयोजित नुक्कड़ नाटक कार्यक्रम में भ्रष्टाचार मुक्त भारत बनाने पर जोर दिया गया। पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन के अधिकारी राहुल कुमार और युधिष्ठिर तारक ने ग्रामीणों को भ्रष्टाचार के विरुद्ध शपथ दिलाई।

कार्यक्रम की शुरुआत छत्तीसगढ़ महतारी के छायाचित्र पर पूजा-अर्चना और राजकीय गीत के साथ हुई। इस दौरान स्वयंसेवी संस्था पीपला वेलफेयर फाउंडेशन द्वारा निर्मित 'एक क्लिक में चरौदा' पोर्टल का शुभारंभ ग्राम सरपंच देवशरण धीवर, फाउंडेशन के संरक्षक पारसनाथ साहू, संयोजक महेन्द्र पटेल और एसएमसी अध्यक्ष चेतन पैगंबर ने किया।

इस अवसर पर पारसनाथ साहू ने कहा कि इस पोर्टल के माध्यम से गांव की समस्त जानकारी डिजिटल हो गई है, जो अन्य पंचायतों और ग्रामों के लिए प्रेरणादायक है। वहीं सरपंच देवशरण धीवर ने इस नवाचार को अनुकरणीय बताते हुए इसके निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले महेन्द्र पटेल और पीपला फाउंडेशन की मुक्तकंठ से सराहना की और इस आयोजन के लिए पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन का आभार जताया। साथ ही उन्होंने समस्त ग्रामवासियों के सहयोग से ग्राम को विकसित बनाने पर जोर दिया। कार्यक्रम का संचालन महेन्द्र पटेल और नरेन्द्र यादव ने किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।


कबरा हाथी का खूनी तांडव! चाचा-भतीजे पर हमला, दो की मौत; ट्रक के नीचे छिपकर बची जान

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 सूरजपुर। सरगुजा और सूरजपुर जिले की सीमा पर स्थित कल्याणपुर-अखोरा मार्ग पर रविवार शाम एक कबरा हाथी ने जमकर उत्पात मचाया। हाथी के हमले में बाइक सवार एक व्यक्ति और खेत में घास काट रहे ग्रामीण की मौत हो गई। वहीं, बाइक पर पीछे बैठा युवक सड़क किनारे खड़े ट्रक के नीचे छिपकर किसी तरह अपनी जान बचाने में सफल रहा। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और आगे की कार्रवाई शुरू की।


बाइक सवार चाचा-भतीजे पर हाथी ने किया हमला

जानकारी के मुताबिक, बलरामपुर जिले का निवासी विश्वनाथ रविवार को अपने भतीजे बलदेव के साथ बाइक से अखोरा गांव स्थित अपनी बहन के घर आया था। शाम करीब 5:30 बजे दोनों वापस लौट रहे थे। इसी दौरान कल्याणपुर-अखोरा मुख्य मार्ग पर उनका सामना कबरा हाथी से हो गया।

बताया जा रहा है कि हाथी ने अचानक बाइक सवारों पर हमला कर दिया। जान बचाने के लिए बलदेव सड़क किनारे खड़े एक ट्रक के नीचे जा छिपा। वहीं, हाथी ने विश्वनाथ को जमीन पर पटककर कुचल दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। मृतक बांटीडांड पहाड़ी कोरवा आश्रम में प्यून के पद पर पदस्थ था।

हाथी के वहां से जाने के बाद बलदेव ने ग्रामीणों को घटना की जानकारी दी। इसके बाद मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई।

खेत में घास काट रहे ग्रामीण को भी बनाया शिकार

इसी क्षेत्र में हाथी के हमले की दूसरी घटना भी सामने आई। अखोरा गांव का रहने वाला मानदेव यादव खेत में घास काटने गया था। इसी दौरान वहां से गुजर रहे हाथी ने उसे दौड़ाकर कुचल दिया। देर शाम खेत में उसका शव पड़ा मिला।

दो लोगों की मौत की खबर से गांव और आसपास के इलाकों में भय का माहौल है। वन विभाग की टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है।

छह महीने में 14 लोगों की मौत का दावा

बताया जा रहा है कि कबरा हाथी पिछले छह महीनों से क्षेत्र में लगातार जानलेवा हमले कर रहा है। स्थानीय जानकारी के अनुसार, इस अवधि में पहले 12 लोगों की मौत हो चुकी थी। रविवार को दो और लोगों की जान जाने के बाद इस हाथी के हमलों में मृतकों की संख्या बढ़कर 14 बताई जा रही है।

लगातार हो रही घटनाओं ने हाथी प्रभावित गांवों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों को सतर्क रहने और हाथी की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में अकेले नहीं जाने की जरूरत है। वन विभाग के सामने भी हाथी की गतिविधियों पर निगरानी रखने और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की चुनौती है।

महादेव सट्टा ऐप केस: सौरभ चंद्राकर दिल्ली की अदालत में पेश, CBI ने मांगी ट्रांजिट रिमांड

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रायपुर/नई दिल्ली। महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले में आरोपी और प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने उसे छत्तीसगढ़ लाने और आगे की पूछताछ के लिए अदालत से ट्रांजिट रिमांड की मांग की है। सुनवाई के दौरान जांच एजेंसी ने सौरभ का कथित फर्जी पासपोर्ट भी जब्त किए जाने की जानकारी दी। गिरफ्तारी की वैधता को लेकर बचाव पक्ष ने सवाल उठाए, जिसके बाद अदालत में दोनों पक्षों के बीच कानूनी बहस हुई। मामले की अगली सुनवाई दोपहर 2:30 बजे निर्धारित की गई।


गिरफ्तारी के कानूनी आधार पर आमने-सामने आए CBI और बचाव पक्ष

अदालत में सुनवाई के दौरान सौरभ चंद्राकर के वकील ने उसकी गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए सवाल उठाए। बचाव पक्ष का तर्क था कि भारत सरकार की ओर से ओमान को केवल मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत कार्रवाई की जानकारी दी गई थी। ऐसे में CBI ने किस कानूनी आधार पर सौरभ को गिरफ्तार किया?

इस पर CBI ने दलील दी कि बचाव पक्ष जिस पुराने आदेश का हवाला दे रहा है, वह पहले का है। जांच एजेंसी के मुताबिक, सौरभ की गिरफ्तारी ओमान सरकार के नए आदेश के तहत की गई है, जिसमें किसी एक विशेष जांच एजेंसी का उल्लेख नहीं है। अब अदालत के फैसले से यह तय होगा कि CBI को सौरभ की ट्रांजिट रिमांड मिलती है या नहीं।

भिलाई से दुबई तक फैला महादेव ऐप का नेटवर्क

छत्तीसगढ़ के भिलाई का रहने वाला सौरभ चंद्राकर कभी जूस की दुकान चलाता था। उसके पिता नगर निगम में पंप ऑपरेटर थे। शुरुआती दौर में सौरभ अपने साथी रवि उप्पल के साथ सट्टेबाजी के कारोबार से जुड़ा। बाद में दोनों ने ऑनलाइन सट्टेबाजी का नेटवर्क खड़ा किया और वर्ष 2019 में दुबई पहुंचकर कारोबार का विस्तार किया।

जांच एजेंसियों के मुताबिक, मोबाइल और इंटरनेट के माध्यम से सट्टा लगाने की सुविधा देने वाला महादेव ऑनलाइन ऐप धीरे-धीरे देशभर में फैल गया। इस नेटवर्क के जरिए बड़े पैमाने पर लेनदेन और कथित अवैध कमाई की गई। एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क के संचालन, वित्तीय लेनदेन और इससे जुड़े लोगों की भूमिका की जांच कर रही हैं।

200 करोड़ रुपये की शादी भी जांच के घेरे में

महादेव सट्टा ऐप मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सौरभ चंद्राकर की फरवरी 2023 में संयुक्त अरब अमीरात के रास अल खैमाह में हुई शादी को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए थे।

ED के अनुसार, शादी समारोह में करीब 200 करोड़ रुपये नकद खर्च किए गए थे। परिवार के सदस्यों को नागपुर से UAE ले जाने के लिए निजी विमान किराए पर लिए गए थे। समारोह में बॉलीवुड से जुड़ी कई हस्तियों, डांसरों और इवेंट मैनेजमेंट कंपनियों को भी बुलाया गया था।

जांच एजेंसी का दावा था कि शादी के खर्चों का भुगतान हवाला नेटवर्क के जरिए किया गया। ED के मुताबिक, एक इवेंट मैनेजमेंट कंपनी को हवाला के माध्यम से करीब 112 करोड़ रुपये दिए गए, जबकि लगभग 42 करोड़ रुपये की होटल बुकिंग का भुगतान UAE की मुद्रा में नकद किया गया था।

हवाला के जरिए रकम खपाने का आरोप

ED की जांच में आरोप लगाया गया था कि ऑनलाइन सट्टेबाजी से हासिल रकम को अलग-अलग बैंक खातों तक पहुंचाने के लिए बड़े पैमाने पर हवाला नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाता था। नए यूजर्स और फ्रेंचाइजी यानी पैनल संचालकों को जोड़ने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों में नकदी खर्च कर प्रचार-प्रसार भी किया जाता था।

जांच एजेंसियों का आरोप है कि सौरभ चंद्राकर और उसके सहयोगियों ने UAE में बैठकर इस नेटवर्क का संचालन किया और कथित अवैध कमाई को अलग-अलग माध्यमों से खपाया।

70 से अधिक FIR, 300 से ज्यादा गिरफ्तारियां

महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले में अलग-अलग जांच एजेंसियों की कार्रवाई के दौरान अब तक 70 से अधिक FIR दर्ज होने और 300 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी का दावा किया गया है। जांच का दायरा लगातार बढ़ा है और नेटवर्क से जुड़े कथित संचालकों, पैनल ऑपरेटरों तथा वित्तीय लेनदेन की पड़ताल की जा रही है।

सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल, शुभम सोनी और अनिल अग्रवाल के बीच कथित कारोबारी हिस्सेदारी को लेकर भी जांच में कई पहलुओं की पड़ताल की गई है। सौरभ की गिरफ्तारी के बाद अब CBI की पूछताछ और अदालत से मिलने वाली ट्रांजिट रिमांड पर इस बहुचर्चित मामले की आगे की जांच निर्भर करेगी।

मरवाही में हाथियों का बड़ा झुंड, ड्रोन से गिनती में सामने आए 62 गजराज; किसानों की बढ़ी चिंता

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 गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही। छत्तीसगढ़ के मरवाही वन मंडल में हाथियों की बढ़ती मौजूदगी ने वन विभाग के साथ-साथ ग्रामीणों और किसानों की चिंता बढ़ा दी है। क्षेत्र में विचरण कर रहे हाथियों के झुंड की वास्तविक संख्या अब सामने आ गई है। पहले वन विभाग इस दल में करीब 55 हाथियों के होने का अनुमान लगा रहा था, लेकिन ड्रोन कैमरे से निगरानी और गिनती के बाद इनकी संख्या 62 होने की पुष्टि हुई है। हाथियों के इतने बड़े झुंड की मौजूदगी से आसपास के गांवों में सतर्कता बढ़ा दी गई है।


ड्रोन कैमरे ने खोला राज, अनुमान से ज्यादा निकले हाथी

वन विभाग के मुताबिक, हाथियों का यह दल कई बार दो से तीन छोटे समूहों में बंटकर अलग-अलग स्थानों पर विचरण करता था। इस वजह से उनकी वास्तविक संख्या का सही आकलन नहीं हो पा रहा था। अलग-अलग समूहों में हाथियों की आवाजाही के कारण कभी इनकी संख्या कम तो कभी ज्यादा दिखाई देती थी।

हाल ही में वन विभाग ने ड्रोन कैमरे की मदद से इलाके का एरियल सर्वे कराया। आसमान से ली गई तस्वीरों और निगरानी के आधार पर हाथियों की सटीक गिनती की गई, जिसमें कुल 62 हाथियों की मौजूदगी सामने आई। मरवाही वन मंडल के डीएफओ एवं IFS अधिकारी कुमार निशांत ने इसकी पुष्टि की है।

खेतों में घुस रहा हाथियों का झुंड, किसानों की फसलें हो रहीं बर्बाद

मरवाही क्षेत्र में 62 हाथियों के एक बड़े झुंड की मौजूदगी किसानों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। हाथियों का दल लगातार जंगल से लगे खेतों और कृषि क्षेत्रों में पहुंच रहा है। खेतों में खड़ी फसलें हाथियों के आहार का हिस्सा बन रही हैं, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।

एक साथ इतनी बड़ी संख्या में हाथियों के विचरण करने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। किसानों को अपनी फसलों की चिंता सता रही है, वहीं हाथियों के अचानक गांवों या खेतों की ओर पहुंचने से जनहानि की आशंका भी बनी हुई है।

वन विभाग और हाथी मित्र दल अलर्ट, ग्रामीणों को सतर्क रहने की अपील

हाथियों की लगातार गतिविधियों को देखते हुए वन विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है। मैदानी अमले के साथ हाथी मित्र दल भी सक्रिय है। टीम हाथियों की लोकेशन, उनके मूवमेंट और संभावित रास्तों पर लगातार नजर रख रही है, ताकि ग्रामीणों को समय रहते सूचना दी जा सके।

वन विभाग का प्रयास है कि हाथियों और ग्रामीणों के बीच किसी तरह का टकराव न हो। इसके लिए संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी रखी जा रही है और लोगों को हाथियों के नजदीक नहीं जाने तथा उन्हें परेशान नहीं करने की सलाह दी जा रही है।

फिलहाल मरवाही वन मंडल में 62 हाथियों की मौजूदगी वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। आने वाले दिनों में हाथियों का यह झुंड किस दिशा में आगे बढ़ता है और किसानों की फसलों को नुकसान से बचाने के लिए क्या अतिरिक्त कदम उठाए जाते हैं, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

ओमान से भारत पहुंचा महादेव सट्टा ऐप का प्रमोटर सौरभ चंद्राकर, CM साय बोले- पूछताछ में खुलेंगे कई बड़े राज

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 रायपुर। महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले में लंबे समय से फरार चल रहे मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत लाए जाने के बाद छत्तीसगढ़ की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। आरोपी की भारत वापसी को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने केंद्रीय जांच एजेंसियों की बड़ी कामयाबी बताया है। सोमवार को दिल्ली रवाना होने से पहले रायपुर में मीडिया से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने CBI और अन्य केंद्रीय एजेंसियों को बधाई दी। उन्होंने उम्मीद जताई कि सौरभ चंद्राकर से पूछताछ के बाद महादेव सट्टा सिंडिकेट से जुड़े कई अहम खुलासे हो सकते हैं।


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सोमवार सुबह करीब 9:45 बजे नियमित कार्यक्रम के तहत रायपुर से दिल्ली के लिए रवाना हुए। दिल्ली प्रवास के दौरान उनकी भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की संभावना है। हालांकि, मुलाकातों को लेकर विस्तृत आधिकारिक कार्यक्रम सामने नहीं आया है। दिल्ली रवाना होने से पहले मुख्यमंत्री ने महादेव सट्टा ऐप मामले में हुई कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सौरभ चंद्राकर को पकड़ने के लिए CBI लगातार प्रयास कर रही थी। आखिरकार उसे भारत लाना जांच एजेंसियों की बड़ी सफलता है।

ओमान में हिरासत के बाद प्रत्यर्पण, CBI की टीम भारत लेकर पहुंची

महादेव ऑनलाइन बुक सट्टा सिंडिकेट के प्रमुख प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को भारतीय जांच एजेंसियों ने ओमान से प्रत्यर्पित कराया है। बताया गया है कि इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर रॉयल ओमान पुलिस ने उसे हिरासत में लिया था। इसके बाद भारतीय एजेंसियों ने ओमान के अधिकारियों के साथ समन्वय कर प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पूरी की और CBI की विशेष टीम उसे भारत लेकर पहुंची।

जांच एजेंसियों के अनुसार, सौरभ चंद्राकर दो CBI मामलों में वांछित था, जिनमें आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं। इसके अलावा प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी उसके खिलाफ एक मामले में अभियोजन शिकायत दाखिल की है। भारत वापसी के बाद मेडिकल परीक्षण और ट्रांजिट रिमांड की कानूनी प्रक्रिया के जरिए उसे रायपुर लाकर विशेष CBI अदालत में पेश किए जाने की तैयारी थी।

सट्टा नेटवर्क से लेकर हवाला कारोबार तक, जांच एजेंसियों के निशाने पर कई पहलू

महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले की जांच केवल ऑनलाइन बेटिंग के संचालन तक सीमित नहीं है। जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क के वित्तीय लेनदेन, कथित मनी लॉन्ड्रिंग, हवाला के जरिए विदेशों में रकम भेजने और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।

CBI की जांच में विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से पैसों के लेनदेन और कथित तौर पर कुछ सरकारी कर्मचारियों को संरक्षण राशि दिए जाने के आरोप भी शामिल हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के जरिए ही होगी।

अब सौरभ चंद्राकर से पूछताछ के दौरान जांच एजेंसियां सट्टा नेटवर्क के संचालन, पैसों के स्रोत, विदेशों में कथित संपत्तियों, आर्थिक लेनदेन और इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश कर सकती हैं। माना जा रहा है कि उसकी पूछताछ से जांच के कई अहम पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

छत्तीसगढ़ में राजनीतिक बहस का केंद्र रहा है महादेव ऐप मामला

महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप का मामला छत्तीसगढ़ में लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी चर्चा के केंद्र में रहा है। इस प्रकरण में कथित अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी, करोड़ों रुपये के लेनदेन, मनी लॉन्ड्रिंग और प्रभावशाली लोगों की भूमिका को लेकर लगातार जांच होती रही है।

सौरभ चंद्राकर की भारत वापसी को इस मामले की जांच में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे केंद्रीय एजेंसियों की बड़ी उपलब्धि बताते हुए उम्मीद जताई है कि अब मामले से जुड़े कई अनसुलझे सवालों के जवाब मिल सकेंगे।

फिलहाल सभी की नजरें सौरभ चंद्राकर से होने वाली पूछताछ और आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि उसकी गिरफ्तारी के बाद महादेव सट्टा ऐप के पूरे नेटवर्क, कथित आर्थिक साम्राज्य और अन्य आरोपियों की भूमिका को लेकर जांच एजेंसियां क्या नए तथ्य सामने लाती हैं।

ओडिशा में चक्रवात का खतरा

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ओडिशा और पूर्वी भारत

इस खबर में दो अलग-अलग पहलुओं को समझना जरूरी है:

  1. पहले आए चक्रवात और उसके बाद हुई बाढ़ से नुकसान।

  2. संभावित नए चक्रवात को लेकर मौसम विभाग और प्रशासन की तैयारी।

पहले चक्रवात अर्नब से कितना नुकसान हुआ?

चक्रवात अर्नब ने 28 अक्टूबर 2026 को आंध्र प्रदेश के तट पर लैंडफॉल किया था। इसके बाद हुई भारी बारिश से दक्षिणी ओडिशा के कई इलाकों में बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति बनी।

1 नवंबर तक ओडिशा सरकार के विशेष राहत आयुक्त के हवाले से जारी आंकड़े:

1,18,730- लोग प्रभावित

75,855- लोग सुरक्षित निकाले गए

75,388- हेक्टेयर फसल प्रभावित

1,672- मकान क्षतिग्रस्त

इसके अलावा:

  • 6 लोगों की मौत की सूचना दी गई।

  • 10 लोग लापता बताए गए।

  • कम से कम 10 भूस्खलन की घटनाएं सामने आईं।

  • लगभग 396 राहत शिविर स्थापित किए गए।

  • बिजली बहाली के लिए 6,400 से अधिक कर्मचारी लगाए गए।

सबसे ज्यादा प्रभावित जिले कौन से हैं?
गंजाम (Ganjam)

सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में शामिल। 398 गांवों और 22 ब्लॉकों में लगभग 1.5 लाख लोगों के प्रभावित होने की रिपोर्ट है। करीब 74 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि और लगभग 1,000 मकान प्रभावित बताए गए।

कंधमाल (Kandhamal)

भारी बारिश के कारण पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन हुआ। गिड़िपाबाली गांव में मलबे ने मकानों को नष्ट कर दिया। यहां राहत और बचाव अभियान चलाया गया।

गजपति (Gajapati)

प्रशासन ने भूस्खलन की आशंका वाले लगभग 150 स्थानों की पहचान की और वहां रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी की।

गांव पर पहाड़ का मलबा गिरा, पूरा गांव तबाह

कंधमाल और गंजाम जिले की सीमा पर स्थित गिड़िपाबाली गांव में चक्रवात के दौरान हुई लगातार बारिश से पहाड़ का भारी मलबा नीचे आ गया।

  • गांव में करीब 26 लोग रहते थे।

  • पहाड़ी से कीचड़ और पत्थरों का बड़ा हिस्सा नीचे आया।

  • कई मकान मलबे में दब गए।

  • बचाए गए कम से कम 13 लोगों को G. Udayagiri के पास राहत केंद्र में रखा गया।

  • प्रशासन के अनुसार, भूस्खलन से लापता लोगों की तलाश जारी थी।

यह घटना बताती है कि चक्रवात के दौरान केवल समुद्र तटीय क्षेत्रों में ही नहीं, बल्कि पहाड़ी इलाकों में भी जान का खतरा बढ़ जाता है।

मुख्यमंत्री ने राहत पैकेज की घोषणा की

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी

मुख्यमंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया और किसानों, मकान मालिकों तथा छोटे कारोबारियों के लिए विशेष आर्थिक सहायता पैकेज घोषित किया।

सरकार की घोषित सहायता:

प्रभावित वर्ग

    घोषित सहायता

प्रत्येक प्रभावित परिवार

    50 किलो चावल + ₹2,500

असिंचित खेत की फसल

      ₹8,500 प्रति हेक्टेयर

सिंचित खेत की फसल

    ₹17,000 प्रति हेक्टेयर

ग्रीष्मकालीन फसल

    ₹22,500 प्रति हेक्टेयर

मैदानी क्षेत्र में क्षतिग्रस्त मकान

    ₹1.20 लाख

पहाड़ी क्षेत्र में क्षतिग्रस्त मकान

    ₹1.30 लाख

छोटे दुकानदार/अस्थायी दुकान

       ₹10,000

बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान

        ₹25,000

सरकार ने कहा है कि अंतिम नुकसान का आकलन होने के बाद सहायता राशि में संशोधन किया जा सकता है।

इसके अलावा 2 से 4 नवंबर के बीच आठ सदस्यीय केंद्रीय अंतर-मंत्रालयी टीम ओडिशा पहुंचकर नुकसान का आकलन करने वाली है।

अब नया चक्रवात मुरासु (MURASU) कितना खतरनाक है?

IMD द्वारा चक्रवाती तूफान की पुष्टि

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के 2 नवंबर सुबह 6:48 बजे जारी समुद्री बुलेटिन के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में चक्रवात मुरासु तेज होकर गंभीर चक्रवाती तूफान (Severe Cyclonic Storm) बन चुका था।

IMD की रिपोर्ट में दी गई स्थिति:

विवरण

    जानकारी

चक्रवात का नाम

    मुरासु (Murasu)

समुद्री क्षेत्र

    पश्चिम-मध्य और दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी

अनुमानित हवा की गति

    100–110 किमी/घंटा

तेज झोंके

       120 किमी/घंटा तक

संभावित लैंडफॉल

    2 नवंबर की रात से 3 नवंबर की सुबह

संभावित क्षेत्र

    नेल्लोर से नरसापुर, आंध्र प्रदेश

संभावित समय

    रात 11:30 से सुबह 4 बजे के बीच

इसका नाम भारत ने दिया है। मुरासु का अर्थ युद्ध का नगाड़ा (War Drum) है।

चक्रवात का संभावित रास्ता

ध्यान दें: मुरासु का मुख्य लैंडफॉल ओडिशा में नहीं, बल्कि दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट पर होने का अनुमान था। हालांकि इसके प्रभाव से ओडिशा में भारी बारिश और तेज हवाओं की आशंका है।

ओडिशा में किन तारीखों को बारिश का अलर्ट?

IMD भुवनेश्वर की 2 नवंबर की चेतावनी:

तारीख

    मौसम चेतावनी

2 नवंबर

    भारी बारिश, गरज-चमक

3 नवंबर

    बहुत भारी बारिश

4 नवंबर

    बहुत भारी बारिश

5 नवंबर

    गरज-चमक और बिजली

6–8 नवंबर

कोई चेतावनी नहीं


इसका मतलब है कि 3 और 4 नवंबर ओडिशा के लिए विशेष सतर्कता वाले दिन हैं।

ओडिशा सरकार ने क्या तैयारियां की हैं?

राज्य सरकार ने पिछले चक्रवात से हुए नुकसान को देखते हुए नई आपदा प्रबंधन तैयारियां की हैं।

  • दक्षिणी ओडिशा के लिए हाई अलर्ट जारी किया गया।

  • गंजाम सहित संवेदनशील क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए गए।

  • निचले इलाकों और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की निकासी की तैयारी की गई।

  • NDRF, ODRAF और अग्निशमन विभाग को अलर्ट पर रखा गया।

  • बिजली और संचार सेवाओं को बहाल करने के प्रयास जारी हैं।

  • मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी गई।

  • दक्षिणी ओडिशा के कुछ जिलों में 3 नवंबर तक स्कूल और कॉलेज बंद करने की घोषणा की गई।

क्या छत्तीसगढ़ और रायपुर पर भी असर पड़ेगा?

छत्तीसगढ़ के लिए भी इस मौसम प्रणाली पर नजर रखना जरूरी है।

  • ओडिशा में भारी बारिश होने पर सीमावर्ती इलाकों में मौसम प्रभावित हो सकता है।

  • बस्तर और दक्षिण छत्तीसगढ़ के मौसम पर विशेष निगरानी रखनी चाहिए।

  • भारी बारिश की स्थिति में नदी-नालों का जलस्तर बढ़ सकता है।

  • रायपुर में बारिश होगी या नहीं, इसकी पुष्टि अलग से IMD के जिला-वार पूर्वानुमान से करनी होगी।

अभी उपलब्ध ओडिशा IMD चेतावनी के आधार पर रायपुर में चक्रवात का सीधा असर घोषित नहीं किया गया है।

आम लोगों को क्या सावधानी रखनी चाहिए?

  1. समुद्र, नदी और जलभराव वाले इलाकों से दूर रहें।

  2. प्रशासन के निर्देश पर राहत शिविरों में जाएं।

  3. पेड़ों, बिजली के खंभों और कमजोर मकानों से दूर रहें।

  4. मोबाइल फोन चार्ज रखें और जरूरी दवाइयां साथ रखें।

  5. किसानों को कटी हुई फसल सुरक्षित रखने की व्यवस्था करनी चाहिए।

  6. मछुआरे समुद्र में न जाएं।

इस खबर का निष्कर्ष

इस समय ओडिशा दोहरी चुनौती से गुजर रहा है।

  • पहली चुनौती: चक्रवात अर्नब के कारण 1.18 लाख से अधिक प्रभावित लोगों को राहत और पुनर्वास देना।

  • दूसरी चुनौती: चक्रवात मुरासु के कारण आने वाली भारी बारिश और संभावित बाढ़ से लोगों को सुरक्षित रखना।

सबसे अधिक चिंता गंजाम, कंधमाल और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की है। वहीं मुरासु का मुख्य लैंडफॉल दक्षिण आंध्र प्रदेश में अनुमानित था।

आधिकारिक अपडेट कहां देखें?

मेरी सलाह: इस खबर में सबसे महत्वपूर्ण अगले 48 घंटे हैं। विशेष रूप से 2 से 4 नवंबर के IMD अपडेट और प्रशासन की निकासी संबंधी घोषणाओं पर नजर रखें।


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