Media24Media.com

Responsive Ad Slot

Latest

latest
lockdown news

महासमुंद की खबरें

महासमुंद की खबर

रायगढ़ की ख़बरें

raigarh news

दुर्ग की ख़बरें

durg news

जम्मू कश्मीर की ख़बरें

jammu and kashmir news

VIDEO

Videos
top news


 

कलयुगी बेटे ने पिता की लोहे के पाइप से हत्या, आरोपी गिरफ्तार

No comments Document Thumbnail

 सक्ति। जिले के डभरा थाना क्षेत्र से एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है, जहां एक पुत्र ने ही अपने पिता की लोहे के पाइप से मारकर निर्मम हत्या कर दी। घटना के बाद पूरे गांव में दहशत और आक्रोश का माहौल है।


प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना डभरा ब्लॉक के ग्राम पंचायत रामभांठा की है। 26-27 मार्च की दरमियानी रात आरोपी सुमित महिलांगे ने अपने पिता मनबोध महिलांगे पर लोहे के पाइप से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। हमले में गंभीर चोट लगने से मनबोध महिलांगे की मौके पर ही मौत हो गई।

सूचना मिलते ही डभरा पुलिस सुबह मौके पर पहुंची और शव का पंचनामा कर उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डभरा भेजा, जहां पोस्टमार्टम कराया गया।

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी सुमित महिलांगे को गिरफ्तार कर लिया है। फिलहाल हत्या के कारणों का खुलासा नहीं हो सका है और मामले की विस्तृत जांच जारी है।

वैश्विक हालात पर अलर्ट: CM साय ने की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक

No comments Document Thumbnail

 रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य के सभी संभागीय आयुक्तों, पुलिस महानिरीक्षकों, पुलिस आयुक्त रायपुर, कलेक्टरों एवं पुलिस अधीक्षकों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की।


यह बैठक वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों, विशेषकर पश्चिम एशिया में उत्पन्न स्थिति को ध्यान में रखते हुए आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य राज्य में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति एवं वितरण व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना तथा आमजन को किसी भी प्रकार की असुविधा से बचाना रहा।

बैठक में रसोई गैस (एलपीजी), पेट्रोल, डीजल एवं उर्वरकों की उपलब्धता, भंडारण और वितरण व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की गई। इसके साथ ही वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के उपयोग एवं संभावनाओं पर भी चर्चा की गई, ताकि दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

मुख्यमंत्री साय ने कानून-व्यवस्था की स्थिति की भी समीक्षा करते हुए अधिकारियों को अफवाहों एवं भ्रामक सूचनाओं पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की जमाखोरी, कालाबाजारी या कृत्रिम संकट उत्पन्न करने की कोशिशों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसे मामलों में तत्काल कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

बैठक में खाद्य, उद्योग, कृषि, खनिज, परिवहन, ऊर्जा विभाग तथा तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।

मुख्यमंत्री ने पेट्रोलियम पदार्थों एवं गैस सिलेंडरों की उपलब्धता पर जानकारी लेते हुए आमजन से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य में आवश्यक वस्तुओं की पर्याप्त उपलब्धता है और आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में है।

आकाशीय बिजली का कहर: 15 वर्षीय किशोरी की दर्दनाक मौत

No comments Document Thumbnail

 अंबिकापुर। सरगुजा जिले के लुण्ड्रा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बकना कला में शुक्रवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया। आकाशीय बिजली गिरने से 15 वर्षीय किशोरी की मौके पर ही मौत हो गई।


मृतका की पहचान सन्मतिया (15 वर्ष), पिता मतन राम, के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, सन्मतिया गांव के खेत के पास भैंस चरा रही थी। इसी दौरान अचानक मौसम ने करवट ली और तेज गर्जना, आंधी-तूफान के बीच बिजली गिर गई, जिसकी चपेट में आने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

घटना की सूचना मिलते ही लुण्ड्रा पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की। हादसे के बाद परिवार में कोहराम मच गया है, वहीं पूरे गांव में शोक का माहौल है।

मौसम विभाग के अनुसार, शुक्रवार दोपहर बाद अंबिकापुर और आसपास के क्षेत्रों में अचानक मौसम खराब हो गया। तेज आंधी, बारिश और बिजली गिरने की घटनाएं सामने आईं। इस दौरान शहर के कई हिस्सों में करीब डेढ़ घंटे तक बिजली आपूर्ति भी बाधित रही।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि आंधी-तूफान ने जहां गर्मी से राहत दी, वहीं जान-माल के लिए खतरा भी पैदा कर दिया। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों से दूर रहें और सुरक्षित स्थानों पर शरण लें।

लुण्ड्रा पुलिस ने बताया कि मामले में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है और आगे की कार्रवाई जारी है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी प्रदेश के कई हिस्सों में आंधी-तूफान और बिजली गिरने की संभावना जताई है, जिससे लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

मिडिल ईस्ट संकट में भारत को रूस का सहारा, 82% बढ़ी तेल सप्लाई

No comments Document Thumbnail

 पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बड़ी रणनीतिक सफलता हासिल की है। 28 फरवरी से इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता पैदा कर दी है। इसका असर भारत पर भी पड़ सकता था, क्योंकि देश अपनी लगभग 88% तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है।


होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट, खाड़ी से सप्लाई प्रभावित

होर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक तेल आपूर्ति की लाइफलाइन माना जाता है, मार्च की शुरुआत से लगभग ठप हो गया है। दुनिया का करीब 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है।
इसका असर सीधे भारत पर पड़ा, जहां इराक, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत से आने वाली सप्लाई में भारी गिरावट दर्ज की गई।

एनालिटिक्स फर्म Kpler के मुताबिक:

इराक से आयात: 69.2% कम
यूएई से आयात: 72.8% कम
सऊदी अरब और कुवैत से सप्लाई: लगभग आधी
रूस बना भारत का सबसे बड़ा सहारा

इस संकट के बीच भारत ने तेजी से रणनीति बदलते हुए रूस की ओर रुख किया।
1 से 25 मार्च के बीच रूस से तेल आयात में 82.3% की जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई और यह 1.9 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया।

फरवरी में हिस्सा: 20.1%
मार्च में बढ़कर: 45.2%

भारतीय रिफाइनरियों ने अप्रैल तक के लिए 60 मिलियन बैरल रूसी कच्चा तेल पहले ही खरीद लिया है, जिससे सप्लाई चेन मजबूत बनी हुई है।

अमेरिका ने भी बदला रुख

पहले अमेरिका भारत पर रूसी तेल न खरीदने का दबाव बना रहा था। लेकिन मौजूदा हालात और घरेलू चुनावी दबाव को देखते हुए वाशिंगटन ने भारत को रूसी तेल खरीदने की छूट (waiver) दे दी है।

यह भारत की बढ़ती कूटनीतिक ताकत को दिखाता है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार स्वतंत्र निर्णय ले सकता है।

क्या महंगा होगा पेट्रोल-डीजल?

हालांकि वैश्विक स्तर पर संकट बना हुआ है, लेकिन भारत के लिए राहत की खबर है।
देश में फिलहाल ईंधन की कोई कमी नहीं है और सप्लाई पूरी तरह स्थिर बनी हुई है।

कुल आयात में करीब 8 लाख बैरल/दिन की कमी
लेकिन रणनीतिक भंडार और बेहतर मैनेजमेंट से स्थिति नियंत्रण में

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का ऊर्जा सिस्टम काफी लचीला है और निकट भविष्य में पेट्रोल-डीजल की किल्लत या बड़े दाम बढ़ने का खतरा नहीं है।

रायपुर में पैसे के विवाद ने ली जान, आरोपी 2 घंटे में गिरफ्तार

No comments Document Thumbnail

 रायपुर। राजधानी के टिकरापारा थाना क्षेत्र में पैसे के विवाद ने खूनी रूप ले लिया। इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को महज दो घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया।


जानकारी के अनुसार, 27 मार्च की दोपहर करीब 2 बजे टिकरापारा पुलिस को सूचना मिली कि रावतपुरा फेस-02 स्थित सांई मंदिर के पास एक युवक पर चाकू से हमला किया गया है। घायल युवक की पहचान अजय अग्रवाल (34 वर्ष) के रूप में हुई, जिन्हें गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। मृतक के परिजनों से पूछताछ में सामने आया कि वारदात के पीछे डोमेश्वर देवांगन का हाथ है, जो कंस्ट्रक्शन का काम करता है।

पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी की तलाश शुरू की और कुछ ही समय में उसे पकड़ लिया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया।

पुलिस के अनुसार, आरोपी डोमेश्वर देवांगन ने मृतक के लिए कंस्ट्रक्शन का काम किया था। इसी काम के भुगतान को लेकर दोनों के बीच विवाद चल रहा था। आरोपी 50 हजार रुपये की मांग कर रहा था, जिसे मृतक देने से इनकार कर रहा था।

घटना वाले दिन सुबह आरोपी पैसे लेने मृतक के घर पहुंचा, लेकिन रकम नहीं मिलने पर वह बाहर इंतजार करने लगा। जैसे ही अजय अग्रवाल घर से बाहर निकले, आरोपी ने सब्जी काटने वाले चाकू से उनके पेट में वार कर दिया, जिससे उनकी मौत हो गई।

आरोपी डोमेश्वर देवांगन (18 वर्ष, निवासी चांगोरभाठा, थाना डी.डी.नगर, रायपुर) को हिरासत में लेकर टिकरापारा थाना में हत्या का मामला दर्ज किया गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

इस कार्रवाई में टिकरापारा थाना प्रभारी निरीक्षक विनय सिंह बघेल, डी.डी.नगर थाना प्रभारी निरीक्षक रवीन्द्र यादव, उपनिरीक्षक अतुलेश राय (एंटी क्राइम एवं साइबर यूनिट) सहित दोनों थानों के पुलिसकर्मियों की अहम भूमिका रही।

पुलिस ने बताया कि मामले में तत्काल संज्ञान लेते हुए आरोपी को समय रहते गिरफ्तार कर लिया गया है और न्यायिक प्रक्रिया की कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों ने मृतक के परिजनों को न्याय दिलाने का आश्वासन दिया है।

पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी प्रकार के विवाद को हिंसा में बदलने से पहले कानून का सहारा लें और तुरंत पुलिस को सूचना दें।

स्वच्छ ऊर्जा में बड़ी सफलता: नए पॉलिमर से ऊर्जा भंडारण और हाइड्रोजन उत्पादन में क्रांतिकारी प्रगति

No comments Document Thumbnail

ऊर्जा भंडारण और स्वच्छ ईंधन (हाइड्रोजन) उत्पादन के क्षेत्र में एक बड़ी प्रगति करते हुए वैज्ञानिकों ने नए, आसानी से संश्लेषित और अत्यधिक प्रभावी पॉलिमरिक पदार्थ विकसित किए हैं, जो स्वच्छ ऊर्जा की उपलब्धता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

Zn(DAB) और Cd(DAB) नामक ये समन्वय पॉलिमर (coordination polymers) विशेष रूप से डिजाइन की गई संरचनाएं हैं, जिनमें जिंक (Zn²⁺) या कैडमियम (Cd²⁺) धातु आयन और 3,3'-डायमिनोबेंजिडीन (DAB) नामक कार्बनिक अणु मिलकर मजबूत परतदार ढांचा बनाते हैं। इन्हें सरल, कमरे के तापमान पर और बिना जटिल उपकरणों के बड़े पैमाने पर तैयार किया जा सकता है, जिससे ये औद्योगिक उपयोग के लिए उपयुक्त बनते हैं।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अंतर्गत सेंटर फॉर नैनो एंड सॉफ्ट मैटर साइंसेज (CeNS) और बेंगलुरु स्थित क्राइस्ट विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की टीम ने इन पदार्थों का परीक्षण किया और स्वच्छ ऊर्जा के दो प्रमुख क्षेत्रों—ऊर्जा भंडारण और हाइड्रोजन उत्पादन—में उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त किए।

प्रयोगशाला परीक्षणों में Zn(DAB) ने 2091.4 F g⁻¹ और Cd(DAB) ने 1341.6 F g⁻¹ की ऊर्जा भंडारण क्षमता दिखाई। व्यावहारिक उपकरणों (सुपरकैपेसिटर) में भी Zn(DAB) ने 785.3 F g⁻¹ और Cd(DAB) ने 428.5 F g⁻¹ का प्रदर्शन किया। साथ ही, ये सामग्री 5000 चार्ज-डिस्चार्ज चक्रों के बाद भी अपनी क्षमता बनाए रखने में सक्षम रही, जो उनकी टिकाऊपन को दर्शाता है।

इसके अलावा, ये पदार्थ पानी को विभाजित कर स्वच्छ हाइड्रोजन ईंधन उत्पादन में भी सक्षम हैं। Zn(DAB) के लिए 263 mV और Cd(DAB) के लिए 209 mV की कम ऊर्जा आवश्यकता (ओवरपोटेंशियल) इन्हें अत्यधिक प्रभावी बनाती है, जिससे भविष्य में हरित हाइड्रोजन उत्पादन अधिक सस्ता और कुशल हो सकता है।

ऊर्जा भंडारण और हाइड्रोजन उत्पादन—दोनों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के कारण ये सामग्री स्वच्छ ऊर्जा समाधानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं। यह नवाचार शोध और वास्तविक उपयोग के बीच की दूरी को कम करने में सहायक होगा।

यह शोध ACS Omega और Catalysis Science & Technology जैसे प्रतिष्ठित जर्नलों में प्रकाशित हुआ है, जो समन्वय पॉलिमरों को अगली पीढ़ी के स्वच्छ ऊर्जा पदार्थों के रूप में स्थापित करता है।

सौर रेडियो तरंगों के रहस्य से उठा पर्दा, भारतीय वैज्ञानिकों ने सुलझाई टाइप-II बर्स्ट की पहेली

No comments Document Thumbnail

 सौर ज्वालाओं (Solar Flares) से उत्पन्न सौर कोरोना शॉक्स पर शोध कर रहे वैज्ञानिकों ने रेडियो तरंगों के ‘फंडामेंटल’ (मूल) और ‘हार्मोनिक’ (ओवरटोन) उत्सर्जन की सापेक्ष तीव्रता में होने वाले अंतर के पीछे के रहस्य को सुलझा लिया है।

यह अध्ययन इस बात की समझ को बेहतर बनाता है कि सौर शॉक्स रेडियो तरंगें कैसे उत्पन्न करते हैं और वे कोरोना में कैसे प्रसारित होती हैं। इससे अंतरिक्ष मौसम (Space Weather) के पूर्वानुमान में भी मदद मिल सकती है।

सौर ज्वालाओं या कोरोनल मास इजेक्शन (CME) से उत्पन्न शॉक्स ‘टाइप-II सोलर रेडियो बर्स्ट’ नामक विशेष प्रकार की रेडियो तरंगें उत्पन्न करते हैं। ये बर्स्ट लगभग 1000 किमी/सेकंड की गति से फैलते हैं और रेडियो तरंगों के रूप में दर्ज किए जाते हैं। ये उच्च आवृत्ति से निम्न आवृत्ति की ओर धीरे-धीरे शिफ्ट होते हैं, क्योंकि शॉक बाहर की ओर बढ़ता है।

आमतौर पर टाइप-II बर्स्ट दो भागों में होते हैं—फंडामेंटल और हार्मोनिक उत्सर्जन। सिद्धांत के अनुसार फंडामेंटल उत्सर्जन अधिक शक्तिशाली होना चाहिए, लेकिन कई बार हार्मोनिक उत्सर्जन अधिक मजबूत पाया गया, जो वैज्ञानिकों के लिए एक पहेली था।

भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA) के वैज्ञानिकों के नेतृत्व में एक टीम ने इस रहस्य को सुलझाने के लिए दुनिया भर में स्थित CALLISTO उपकरणों और गौरिबिदनूर रेडियो वेधशाला के GLOSS स्पेक्ट्रोग्राफ से प्राप्त 58 टाइप-II रेडियो बर्स्ट के डेटा का विश्लेषण किया।

अध्ययन में पाया गया कि सूर्य के 75° से अधिक हेलियोग्राफिक देशांतर वाले सक्रिय क्षेत्रों से उत्पन्न घटनाओं में हार्मोनिक उत्सर्जन अधिक मजबूत होता है, जबकि 75° से कम देशांतर (सौर डिस्क के केंद्र के पास) से उत्पन्न घटनाओं में फंडामेंटल उत्सर्जन अधिक मजबूत होता है। यह अंतर सौर कोरोना में अपवर्तन प्रभाव, उत्सर्जन की दिशा और पृथ्वी से देखने के कोण के कारण होता है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, 75° से अधिक देशांतर वाले क्षेत्रों से आने वाले फंडामेंटल उत्सर्जन पृथ्वी तक नहीं पहुंच पाते या कमजोर हो जाते हैं, जबकि हार्मोनिक उत्सर्जन व्यापक कोण में फैलते हैं, इसलिए वे अधिक मजबूत दिखाई देते हैं।

इस शोध के प्रमुख अन्वेषक डॉ. के. ससिकुमार राजा और प्रथम लेखक ऋषिकेश जी. झा ने बताया कि भविष्य में मशीन लर्निंग तकनीकों का उपयोग कर ऐसे विशाल डेटा का और गहराई से अध्ययन किया जाएगा।

यह शोध ‘सोलर फिजिक्स’ जर्नल में प्रकाशित हुआ है और इससे सौर गतिविधियों और अंतरिक्ष मौसम की बेहतर समझ विकसित करने में मदद मिलेगी।

DARPG ने आयोजित किया 36वां राष्ट्रीय सुशासन वेबिनार, उत्कृष्ट पहलों के प्रसार पर जोर

No comments Document Thumbnail

प्रधानमंत्री के निर्देशानुसार प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (DARPG) को जिला कलेक्टरों और अन्य अधिकारियों के साथ वर्चुअल कॉन्फ्रेंस/वेबिनार आयोजित करने के लिए कहा गया था, जिसमें प्रधानमंत्री पुरस्कार (लोक प्रशासन में उत्कृष्टता) के पूर्व विजेताओं को अपने अनुभव साझा करने के लिए आमंत्रित किया जाए, ताकि इन पहलों का व्यापक प्रसार और दोहराव सुनिश्चित किया जा सके।

इन्हीं निर्देशों के अनुपालन में DARPG ने अप्रैल 2022 से अब तक हर महीने एक वेबिनार आयोजित करते हुए कुल 36 राष्ट्रीय सुशासन वेबिनार आयोजित किए हैं। इन वेबिनारों का उद्देश्य प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार के तहत चयनित पहलों के अनुभवों को साझा करना और उन्हें अन्य स्थानों पर लागू करने के लिए प्रोत्साहित करना है। प्रत्येक वेबिनार में विभिन्न विभागों, राज्य सरकारों, जिला कलेक्टरों, राज्य प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थानों और केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थानों के लगभग 1000 अधिकारी भाग लेते हैं।

ये वेबिनार न केवल पहलों के संस्थागतकरण और स्थायित्व की वर्तमान स्थिति को प्रस्तुत करते हैं, बल्कि उनके विस्तार और अन्य क्षेत्रों में लागू किए जाने की संभावनाओं पर भी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं।

27 मार्च 2026 को आयोजित 36वें वेबिनार में ‘जिलों का समग्र विकास’ विषय के अंतर्गत वर्ष 2023 और 2024 के प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित दो पहलों को प्रस्तुत किया गया। इसमें मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले की पहल को डॉ. हरिदास फाटिंग (निदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं एवं परियोजना निदेशक, एड्स नियंत्रण सोसायटी) द्वारा तथा ओडिशा के कोरापुट जिले की पहल को वी. कीर्ति वासन (कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट, गंजाम) द्वारा प्रस्तुत किया गया।

यह वेबिनार DARPG के अतिरिक्त सचिव पुनीत यादव की अध्यक्षता में आयोजित हुआ और इसमें विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। देशभर के 620 से अधिक स्थानों से राज्य एवं केंद्र सरकार के अधिकारी, जिला कलेक्टर और प्रशिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि इस वेबिनार से जुड़े।

यह पहल देश में सुशासन के सफल मॉडलों के प्रसार और उनके व्यापक क्रियान्वयन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

जल जीवन मिशन 2.0 के तहत मेघालय ने केंद्र के साथ सुधार-आधारित MoU पर किए हस्ताक्षर

No comments Document Thumbnail

ग्रामीण जल आपूर्ति को परिणाम-आधारित और सेवा-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए मेघालय, जल जीवन मिशन (JJM) 2.0 के तहत केंद्र सरकार के साथ सुधार-आधारित समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करने वाला 12वां राज्य बन गया है। यह कदम राज्य के JJM 2.0 के सुधार-आधारित कार्यान्वयन ढांचे में औपचारिक प्रवेश को दर्शाता है, जिसे 10 मार्च 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी दी गई थी।

यह MoU केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल, जल शक्ति राज्य मंत्री वी. सोमन्ना तथा मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा की वर्चुअल उपस्थिति में हस्ताक्षरित हुआ।

बैठक में मेघालय सरकार के पीएचई मंत्री मार्कुइज़ एन. मराक, आयुक्त एवं सचिव प्रवीण बक्शी, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (DDWS) के सचिव अशोक के. के. मीना, राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के अतिरिक्त सचिव एवं मिशन निदेशक कमल किशोर सोअन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में DDWS के सचिव अशोक के. के. मीना ने कहा कि यह MoU केवल पाइपलाइन बिछाने तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर सतत जल सेवाओं को सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। उन्होंने विकेंद्रीकरण और सामुदायिक भागीदारी पर जोर देते हुए बताया कि ग्राम पंचायतों और गांव जल एवं स्वच्छता समितियों (VWSCs) को जल आपूर्ति प्रणालियों के संचालन और प्रबंधन में सशक्त बनाया जाएगा।

केंद्रीय मंत्री सी. आर. पाटिल ने मेघालय की प्रगति की सराहना करते हुए बताया कि राज्य ने 83% से अधिक ग्रामीण नल जल कवरेज हासिल कर लिया है और जल्द ही 100% लक्ष्य प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि जल जीवन मिशन की समयसीमा को दिसंबर 2028 तक बढ़ाया गया है, और इसके लिए अतिरिक्त ₹1.51 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिसमें 2025–26 के बजट में लगभग ₹67,300 करोड़ आवंटित किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हर घर तक स्वच्छ पेयजल और बेहतर स्वच्छता व्यवस्था आवश्यक है। उन्होंने जल संरक्षण और सतत जल प्रबंधन पर भी जोर दिया तथा मनरेगा और अन्य योजनाओं के माध्यम से जल स्रोतों को मजबूत करने की बात कही।

मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने केंद्र सरकार और जल शक्ति मंत्रालय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मेघालय, जो पहले ग्रामीण नल जल कवरेज में पिछड़े राज्यों में था, अब 83.59% कवरेज तक पहुंच गया है। उन्होंने राज्य की जल नीति (2019) और क्लाइमेट काउंसिल जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए बताया कि विभिन्न विभाग मिलकर जल प्रबंधन पर काम कर रहे हैं।

यह सुधार-आधारित MoU सुनिश्चित करेगा कि हर ग्रामीण परिवार को पर्याप्त मात्रा और निर्धारित गुणवत्ता के साथ नियमित रूप से पेयजल उपलब्ध हो। साथ ही, सामुदायिक भागीदारी और संरचनात्मक सुधारों के माध्यम से जल आपूर्ति प्रणालियों का सतत संचालन एवं रखरखाव सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे ग्रामीण जीवन स्तर में सुधार और दीर्घकालिक जल सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा।

भारत को जापान से 16,420 करोड़ रुपये की ODA सहायता, चार प्रमुख परियोजनाओं को मिलेगी गति

No comments Document Thumbnail

जापान सरकार ने भारत को शहरी परिवहन, स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्रों में चार महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए 275.858 बिलियन जापानी येन (लगभग 16,420 करोड़ रुपये) की आधिकारिक विकास सहायता (ODA) ऋण देने की प्रतिबद्धता जताई है। ये परियोजनाएं पंजाब, कर्नाटक और महाराष्ट्र राज्यों में लागू की जाएंगी।

24 मार्च 2026 को भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग के संयुक्त सचिव श्री आलोक तिवारी और भारत में जापान के राजदूत केइइची ओनो के बीच नोट्स का आदान-प्रदान किया गया। इसके साथ ही भारत सरकार और जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) के बीच ऋण समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए गए।

इन परियोजनाओं में “बेंगलुरु मेट्रो रेल परियोजना (फेज 3)” (102.480 बिलियन येन), “मुंबई मेट्रो लाइन 11 परियोजना” (92.400 बिलियन येन), “महाराष्ट्र में तृतीयक स्वास्थ्य सेवा, चिकित्सा एवं नर्सिंग शिक्षा प्रणाली सुदृढ़ीकरण परियोजना” (62.294 बिलियन येन) और “पंजाब में सतत बागवानी को बढ़ावा देने की परियोजना” (18.684 बिलियन येन) शामिल हैं।

बेंगलुरु मेट्रो परियोजना का उद्देश्य बढ़ते यातायात दबाव को कम करना, शहरी परिवहन प्रणाली को मजबूत करना, आर्थिक विकास को बढ़ावा देना और प्रदूषण कम कर पर्यावरण सुधार करना है। इसी प्रकार मुंबई मेट्रो लाइन 11 परियोजना भी यातायात जाम कम करने, शहरी विकास को प्रोत्साहित करने और प्रदूषण में कमी लाने में सहायक होगी।

महाराष्ट्र में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी परियोजना का उद्देश्य तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं, मेडिकल कॉलेजों और नर्सिंग संस्थानों को सुदृढ़ कर चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच को बेहतर बनाना है, जिससे सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) को बढ़ावा मिलेगा।

पंजाब में सतत बागवानी परियोजना किसानों की आय बढ़ाने, उच्च मूल्य वाली फसलों को प्रोत्साहित करने, बुनियादी ढांचे के विकास और क्षमता निर्माण के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और सतत सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देगी।

भारत और जापान के बीच 1958 से विकास सहयोग का मजबूत इतिहास रहा है। यह नई पहल दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को और मजबूत करेगी तथा उनके रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को और सुदृढ़ बनाएगी।

रक्षा मंत्रालय ने 858 करोड़ रुपये के दो महत्वपूर्ण रक्षा सौदों पर किए हस्ताक्षर

No comments Document Thumbnail

रक्षा मंत्रालय ने 27 मार्च 2026 को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन-2 में कुल 858 करोड़ रुपये के दो महत्वपूर्ण अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए। ये अनुबंध टुंगुस्का वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली की खरीद और P8I लंबी दूरी के समुद्री टोही विमान के डिपो स्तर निरीक्षण से संबंधित हैं।

टुंगुस्का वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली

भारतीय सेना के लिए 445 करोड़ रुपये की लागत से टुंगुस्का वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली की खरीद का अनुबंध रूस की कंपनी JSC रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के साथ किया गया। यह समझौता रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में संपन्न हुआ। ये अत्याधुनिक मिसाइलें विमान, ड्रोन और क्रूज मिसाइल जैसे हवाई खतरों के खिलाफ भारत की बहुस्तरीय वायु रक्षा क्षमता को मजबूत करेंगी। साथ ही, यह समझौता भारत-रूस के रणनीतिक रक्षा सहयोग को और सुदृढ़ करेगा।

P8I विमान का निरीक्षण

भारतीय नौसेना के P8I लंबी दूरी के समुद्री टोही विमानों के डिपो स्तर निरीक्षण के लिए 413 करोड़ रुपये का अनुबंध बोइंग इंडिया डिफेंस प्राइवेट लिमिटेड (बोइंग की पूर्ण स्वामित्व वाली भारतीय सहायक कंपनी) के साथ ‘बाय इंडियन’ श्रेणी के तहत किया गया, जिसमें 100% स्वदेशी सामग्री शामिल है। यह अनुबंध देश के भीतर ही मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) सुविधा के माध्यम से P8I बेड़े के रखरखाव को सुनिश्चित करेगा। यह पहल आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता के अनुरूप है।

इन समझौतों से भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूती मिलने के साथ-साथ स्वदेशीकरण और तकनीकी आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिलेगा।

निर्माण क्षेत्र में कौशल विकास को बढ़ावा: NCB और UltraTech Cement के बीच MoU हस्ताक्षरित

No comments Document Thumbnail

 भारत के निर्माण क्षेत्र में कौशल विकास और क्षमता निर्माण को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, नेशनल काउंसिल फॉर सीमेंट एंड बिल्डिंग मैटेरियल्स (NCB) ने एक प्रमुख सीमेंट निर्माता कंपनी के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

यह MoU आज एनसीबी, बल्लभगढ़ में एनसीबी के महानिदेशक डॉ. एल. पी. सिंह और अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड के तकनीकी सेवाओं के प्रमुख इंजीनियर राहुल गोयल द्वारा हस्ताक्षरित किया गया।

इस अवसर पर डॉ. एल. पी. सिंह ने कहा कि यह सहयोग निर्माण क्षेत्र में क्षमता निर्माण को बढ़ावा देगा। उन्होंने विश्वास जताया कि इस पहल के तहत अगले 3–5 वर्षों में बड़ी संख्या में पेशेवरों और श्रमिकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

यह साझेदारी देशभर में संरचित प्रशिक्षण और प्रमाणन कार्यक्रमों पर केंद्रित होगी, जिसका उद्देश्य सिविल इंजीनियरों, रेडी-मिक्स कंक्रीट (RMC) पेशेवरों, ठेकेदारों, निर्माण श्रमिकों और राजमिस्त्रियों की क्षमता को बढ़ाना है। प्रशिक्षण में सामग्री गुणवत्ता परीक्षण, कंक्रीट मिश्रण अनुपात, स्थायित्व और सतत निर्माण प्रथाओं जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल होंगे।

इस पहल के अंतर्गत कार्यशालाएं, साइट डेमोंस्ट्रेशन, तकनीकी सेमिनार तथा संयंत्रों और RMC सुविधाओं के दौरे भी आयोजित किए जाएंगे, जिससे व्यावहारिक समझ और तकनीकी कौशल को और मजबूत किया जा सके।

यह सहयोग भारत सरकार की प्रमुख योजनाओं, विशेष रूप से ‘स्किल इंडिया मिशन’ के अनुरूप है और देश के बढ़ते बुनियादी ढांचे और आवास क्षेत्र की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक कुशल कार्यबल के विकास में सहायक सिद्ध होगा।

QS रैंकिंग 2026 में भारतीय कृषि संस्थानों की ऐतिहासिक एंट्री, ICAR के संस्थानों ने बनाया वैश्विक पहचान

No comments Document Thumbnail

 विकसित भारत के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए भारतीय कृषि संस्थानों ने पहली बार QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स (विषयवार) 2026 में अपनी जगह बनाई है। यह उपलब्धि विशेष महत्व रखती है, क्योंकि दिसंबर 2025 में मुख्य सचिवों के सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री ने कुशल मानव संसाधन विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया था।

इस राष्ट्रीय प्राथमिकता के अनुरूप, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), जो कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करती है, राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान, शिक्षा एवं विस्तार प्रणाली (NAREES) के तहत एक विश्वस्तरीय, बहु-विषयक और शोध-आधारित शिक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयासरत रही है। 25 मार्च को ब्रिटेन की संस्था QS क्वाक्वारेली साइमंड्स द्वारा जारी रैंकिंग में 1,900 से अधिक विश्वविद्यालयों के 21,000 से ज्यादा शैक्षणिक कार्यक्रमों का मूल्यांकन किया गया।

पहली बार ICAR के दो संस्थानों ने इस प्रतिष्ठित वैश्विक सूची में स्थान प्राप्त किया है। ICAR-भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI), बरेली ने 51–100 रैंकिंग बैंड में जगह बनाई है और यह पशु चिकित्सा विज्ञान श्रेणी में शीर्ष 100 में शामिल होने वाला एकमात्र भारतीय संस्थान बन गया है। वहीं ICAR-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली ने कृषि एवं वानिकी श्रेणी में 151–200 बैंड में स्थान प्राप्त कर वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है।

कृषि एवं वानिकी श्रेणी में कुल 475 वैश्विक संस्थानों में से 10 भारतीय विश्वविद्यालय शामिल हुए हैं। IARI के साथ 151–200 बैंड में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय और IIT खड़गपुर भी शामिल हैं, जबकि तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय (TNAU) 201–250 बैंड में स्थान पर है। इसके अलावा चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार ने भी 301–350 बैंड में पहली बार प्रवेश किया है।

DARE के सचिव एवं ICAR के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने कहा कि ICAR के डीम्ड विश्वविद्यालयों का यह प्रदर्शन कृषि-खाद्य और स्वास्थ्य प्रणालियों में उनके बहुआयामी योगदान का प्रमाण है। वैश्विक स्तर पर कड़ी प्रतिस्पर्धा के बावजूद इन संस्थानों ने शोध उत्कृष्टता के साथ-साथ सामाजिक प्रभाव में भी अपनी मजबूत पहचान बनाई है। ICAR-IARI और IVRI का यह प्रदर्शन उनके समग्र दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसमें मूलभूत शोध, अनुप्रयुक्त विज्ञान, और जमीनी स्तर तक पहुंच शामिल है।

जैसे-जैसे भारत विकसित भारत की ओर अग्रसर हो रहा है, ICAR के प्रमुख संस्थानों को मिली यह वैश्विक पहचान इस बात का संकेत है कि देश की कृषि उच्च शिक्षा अब न केवल विश्व के साथ कदम मिला रही है, बल्कि उत्कृष्टता के नए मानक भी स्थापित कर रही है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने CPES और IES अधिकारियों को किया संबोधित, राष्ट्र निर्माण में योगदान पर दिया जोर

No comments Document Thumbnail

केंद्रीय विद्युत अभियांत्रिकी सेवा (CPES) और भारतीय आर्थिक सेवा (IES) के अधिकारियों ने आज (27 मार्च 2026) राष्ट्रपति भवन में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की।

अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि वे भारत की प्रगति के अग्रिम पंक्ति में खड़े हैं और उनके निर्णय एक मजबूत तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सहायक होंगे। उन्होंने कहा कि ये अधिकारी नीतियों के निर्माण और सुधारों के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, जिससे समावेशी और सतत विकास को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने अधिकारियों को समर्पण और जुनून के साथ कार्य करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में कई चुनौतियाँ आएंगी, लेकिन ये चुनौतियाँ राष्ट्र निर्माण में सार्थक योगदान देने के अवसर भी प्रदान करती हैं। उन्होंने जिज्ञासा, नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता और निरंतर सीखने की भावना बनाए रखने पर जोर दिया।

केंद्रीय विद्युत अभियांत्रिकी सेवा (CPES) के अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि बिजली औद्योगिक विकास, नवाचार, बेहतर जीवन स्तर और देश की समग्र सामाजिक-आर्थिक प्रगति की आधारशिला है। उन्होंने बताया कि CPES ने विद्युत उत्पादन, संचरण और वितरण के क्षेत्रों में योजना और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, साथ ही बिजली प्रणालियों की गुणवत्ता, विश्वसनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित की है। उन्होंने कहा कि सुदृढ़ इंजीनियरिंग प्रथाओं और नवाचार के माध्यम से देश की ऊर्जा संरचना को मजबूत करने में CPES अधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।

Uploading: 34197504 of 39350127 bytes uploaded.

भारतीय आर्थिक सेवा (IES) के अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि तेजी से बदलते वैश्विक और घरेलू परिदृश्य में आर्थिक योजना और उसके क्रियान्वयन की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने कहा कि IES अधिकारियों की भूमिका सतत विकास सुनिश्चित करने, महंगाई को नियंत्रित करने, रोजगार के अवसर बढ़ाने, असमानताओं को कम करने और जटिल आर्थिक परिस्थितियों में अर्थव्यवस्था का मार्गदर्शन करने में महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने अधिकारियों को यह याद रखने की सलाह दी कि हर आंकड़े के पीछे एक मानवीय कहानी होती है। किसी भी आर्थिक नीति का वास्तविक माप केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि उसके परिणामों में होता है—जो लोगों के जीवन में सुधार लाए, विशेषकर सबसे कमजोर वर्गों के लिए।

Uploading: 13009920 of 31601568 bytes uploaded.

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026:-58 किग्रा महिला वेटलिफ्टिंग में अरुणाचल की अनाई वांग्सू ने जीता स्वर्ण

No comments Document Thumbnail

रायपुर- रायपुर में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के अंतर्गत पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के खेल परिसर में आज सीनियर महिला वेटलिफ्टिंग (58 किलोग्राम भार वर्ग) प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। इस प्रतिस्पर्धा में देशभर की प्रतिभाशाली महिला खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन कर दर्शकों का मन मोह लिया।

प्रतियोगिता में अरुणाचल प्रदेश की अनाई वांग्सू (Anai Wangsu) ने बेहतरीन ताकत और तकनीक का प्रदर्शन करते हुए 169 किलोग्राम कुल वजन उठाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उन्होंने स्नैच में 74 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 95 किलोग्राम उठाकर शीर्ष स्थान हासिल किया।

ओडिशा की मिना सांता (Mina Santa) ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 165 किलोग्राम के कुल वजन के साथ रजत पदक जीता। वहीं ओडिशा की ही मीना सिंह (Mina Singh) ने 161 किलोग्राम वजन उठाकर कांस्य पदक पर कब्जा जमाया।

प्रतियोगिता में असम की मार्टिना मिली, तारा सोनवाल तथा आंध्र प्रदेश की जी. लेनिन एस प्रिया सहित अन्य खिलाड़ियों ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। सभी प्रतिभागियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली, जहां हर सफल लिफ्ट पर दर्शकों की तालियां गूंज उठीं।

यह प्रतियोगिता न केवल महिला खिलाड़ियों की शक्ति और आत्मविश्वास का प्रतीक बनी, बल्कि आदिवासी क्षेत्रों की उभरती खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच भी प्रदान कर रही है। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के माध्यम से देश की बेटियां खेल के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छूने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही हैं।

© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.