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नई दिल्ली। देश में बढ़ती गर्मी के साथ जल संकट गहराता नजर आ रहा है। केंद्रीय जल आयोग (CWC) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, देश के 166 प्रमुख जलाशयों में जल स्तर घटकर कुल क्षमता के 40 प्रतिशत से नीचे पहुंच गया है, जिससे कई राज्यों में पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है।
आंकड़ों के मुताबिक, इन 166 जलाशयों में वर्तमान लाइव स्टोरेज 71.082 अरब घन मीटर (BCM) है, जो उनकी कुल क्षमता 183.565 BCM का केवल 38.72 प्रतिशत है। 9 अप्रैल 2026 को यह स्तर 44.71 प्रतिशत था, यानी तीन सप्ताह में ही जल भंडारण में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। ये जलाशय देश की कुल अनुमानित भंडारण क्षमता का लगभग 71.20 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी जल प्रबंधन और संरक्षण के उपाय नहीं किए गए, तो आने वाले महीनों में कई क्षेत्रों में पेयजल संकट और गहरा सकता है।
• धनंजय राठौर (संयुक्त संचालक)
वनांचल में बिखरे पारंपरिक ज्ञान को महज एक स्मृति न रहने देने के संकल्प के साथ बोर्ड ने इसे वैज्ञानिक पद्धति से जोड़ने का निर्णय लिया है। इसके तहत उन स्थानीय वैद्यों और जानकारों का चिन्हांकन शुरू किया गया है, जिनके पास असाध्य रोगों के उपचार का अद्भुत ज्ञान है। बोर्ड का प्रयास इन महिलाओं को एक उचित मंच प्रदान करना है, ताकि उनकी विशेषज्ञता का लाभ समाज को मिले और वे स्वयं को आर्थिक रूप से सुदृढ़ कर सकें। यह केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि उस विरासत का सम्मान है जिसे ग्रामीण महिलाओं ने सदियों से सहेजकर रखा है। छत्तीसगढ़ में पारंपरिक जड़ी-बूटी और जनजातीय ज्ञान को अब आधुनिक विज्ञान के माध्यम से नई पहचान मिल रही है। राज्य के वनों में छिपे औषधीय खजाने को वैज्ञानिक आधार पर प्रमाणित कर, उसे आजीविका के साधन के रूप में विकसित किया जा रहा है।
आर्थिक मोर्चे पर सबसे बड़ा बदलाव तब दिखाई दे रहा है, जब जड़ी-बूटियों का संग्रहण करने वाली महिलाएं अब संग्राहक से आगे बढ़कर निर्माता की भूमिका में नजर आ रही हैं। बोर्ड के दिशा-निर्देशों के अनुरूप, महिला स्व-सहायता समूहों को औषधि प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) के उन्नत गुर सिखाए जा रहे हैं। यह पहल न केवल औषधीय पौधों का संरक्षण कर रही है, बल्कि वनवासियों और लघु वन उपज संग्राहकों की आय में वृद्धि करके उन्हें आत्मनिर्भर बना रही है। छत्तीसगढ़ में 1500 से अधिक सक्रिय वैद्यों के ज्ञान को सहेजने और जड़ी-बूटियों के विपणन के लिए छत्तीसगढ़ जनजातीय स्थानीय स्वास्थ्य परंपराएं और औषधीय पादप बोर्ड सक्रिय रूप से काम कर रहा है। यह संस्था हर्बल उत्पादों की खेती, मूल्य संवर्धन, और मार्केटिंग में तकनीकी सहायता और सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित करती है।
छत्तीसगढ़, जिसे 'जड़ीबूटि गढ़' भी कहा जाता है, अपने घने जंगलों, विशेषकर बस्तर में 160 से अधिक प्रकार की दुर्लभ जड़ी-बूटियों का प्राकृतिक खजाना है। यहाँ की मिट्टी में अश्वगंधा, सर्पगंधा, गोक्षुरा (गोखरू), कुटकी और तिखुर जैसी औषधियां पाई जाती हैं, जो स्वास्थ्य और जीवन शक्ति के लिए प्रसिद्ध हैं। बाजार की चुनौतियों को अवसर में बदलते हुए बोर्ड ने विपणन (मार्केटिंग) तंत्र को पारदर्शी बनाया है। प्रदेश के छत्तीसगढ़ हर्बल्स ब्रांड को सशक्त करने के लिए प्रदर्शनियों और रिटेल आउटलेट्स के माध्यम से इन उत्पादों को सीधे शहरी उपभोक्ताओं तक पहुँचाया जा रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के 'व्होकल फार लोकल' और मुख्यमंत्री के 'लखपति दीदी' अभियान को सफल बनाने में यह रणनीति संजीवनी का कार्य कर रही है।
जड़ी बूटियों को किचिन गार्डन, होम गार्डन में खिड़की, बालकनी, टेरिस पर गमलों, या अन्य कंटेनरों में कभी भी उगाया जा सकता है। कंटेनर गार्डनिंग या ग्रो बैग में जड़ी-बूटियां उगाने का एक फायदा यह भी है कि जड़ी-बूटी को उसकी जरूरत के आधार पर मिट्टी, पोषक तत्व, सूर्य प्रकाश और नमी के स्तर को नियंत्रित किया जा सकता है तथा गमलों में उगाई गई प्रत्येक जड़ी-बूटी (हर्बल) को उसकी आदर्श स्थितियां दे सकते हैं। पर्यावरण संरक्षण और आजीविका के बीच संतुलन बनाने के उद्देश्य से औषधीय पौधों की 'मदर नर्सरी' विकसित करने की जिम्मेदारी महिला समूहों को सौंपी जा रही है। इससे दुर्लभ जड़ी-बूटियों की प्रजातियों को विलुप्त होने से बचाया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर महिलाओं के लिए बारहमासी रोजगार के द्वार खुल गए हैं, जिससे वनांचल से होने वाले पलायन पर भी अंकुश लगा है।
राज्य शासन का यह समेकित दृष्टिकोण इस बात का प्रमाण है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशानुरूप छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड केवल एक प्रशासक की नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहा है। सामूहिक नेतृत्व और संस्थागत सुधारों पर जोर देने से आज छत्तीसगढ़ की बेटियां आत्मनिर्भर बन रही हैं। वनांचल की महिलाओं के चेहरे पर उपजी मुस्कान एक समृद्ध और स्वावलंबी छत्तीसगढ़ की सच्ची तस्वीर पेश कर रही है।
रायपुर : सुशासन तिहार के दौरान जशपुर जिले के ग्राम भैंसामुड़ा में एक ऐसा आत्मीय और भावुक क्षण सामने आया, जिसने वहां मौजूद प्रत्येक व्यक्ति के मन को गहराई से छू लिया और पूरे वातावरण को संवेदनाओं से भर दिया। यह दृश्य उस मानवीय स्पर्श का जीवंत उदाहरण बन गया, जहां शासन और संवेदना एक साथ दिखाई देते हैं।
सुशासन तिहार के दौरान जैसे ही मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की नजर 4 वर्षीय नन्हीं बच्ची मानविका चौहान पर पड़ी, वे सहज भाव से उसके पास पहुंच गए। उनके इस स्वाभाविक और अनायास कदम ने पूरे माहौल को एक अलग ही अपनत्व के वातावरण में बदल दिया।
मुख्यमंत्री साय ने स्नेहपूर्वक बच्ची को अपनी गोद में उठाया और मुस्कुराते हुए उससे आत्मीय संवाद करने लगे। उनके चेहरे पर झलकता स्नेह और व्यवहार की सरलता इस बात को दर्शा रही थी कि सच्चा नेतृत्व वही होता है, जो लोगों के बीच जाकर उनके अपनेपन को महसूस करता है। मुख्यमंत्री साय के पूछने पर मासूमियत भरी आवाज़ में जब मानविका ने तुतलाते हुए कहा - "मुझे डॉक्टर बनना है", तो उस छोटे-से वाक्य में एक बड़े सपने की झलक साफ दिखाई दे रही थी।
यह सुनकर मुख्यमंत्री साय के चेहरे पर सहज और स्नेहिल मुस्कान उभर आई। उन्होंने पूरे अपनत्व के साथ बच्ची को आशीर्वाद दिया और उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। यह संवाद भले ही कुछ क्षणों का रहा, लेकिन उसमें जो भावनात्मक गहराई थी, उसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को यह महसूस कराया कि छोटे बच्चों के सपनों को भी सही प्रोत्साहन देने का कार्य भी मुख्यमंत्री का रहे हैं। इसी आत्मीयता में मुख्यमंत्री साय ने अपने पास रखा चश्मा निकालकर बड़े प्यार से बच्ची को पहनाया और उसे पुचकारते हुए उसका हौसला बढ़ाया।
मानविका की माता दीपांजलि चौहान ने बताया कि उनकी बेटी मुख्यमंत्री से मिलने को लेकर बेहद उत्साहित थी और उनसे मिलकर अत्यंत खुश हुई। उन्होंने इस स्नेहपूर्ण व्यवहार के लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह उनके परिवार के लिए एक यादगार अनुभव बन गया है।
यह पूरा प्रसंग संवेदनशील और जनसरोकार से जुड़े नेतृत्व का सजीव उदाहरण बन गया, जहां शासन केवल योजनाओं और नीतियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि स्नेह, संवाद और विश्वास के माध्यम से सीधे लोगों के दिलों तक अपनी जगह बनाता है।
महासमुंद। जिले के सरायपाली विकासखंड स्थित शिशुपाल पर्वत के नीचे एक युवक और युवती के शव मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। रविवार सुबह ग्रामीणों ने दोनों शव देखे और तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही सरायपाली थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी।
पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में दोनों मृतकों की पहचान नहीं हो सकी है, जिससे मामला और पेचीदा हो गया है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि शव कितने समय पुराने हैं और किन परिस्थितियों में दोनों की मौत हुई। मौके पर फोरेंसिक टीम को बुलाकर साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर युवक-युवती के प्रेमी जोड़ा होने की चर्चा है। बताया जा रहा है कि यह क्षेत्र पहले भी इस तरह की घटनाओं को लेकर चर्चा में रहा है। हालांकि पुलिस ने ऐसी किसी भी अटकल की पुष्टि नहीं की है और इसे शुरुआती कयास बताया है।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच आत्महत्या, दुर्घटना और आपराधिक पहलुओं को ध्यान में रखकर की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में ‘बोरे बासी दिवस’ को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। श्रमिक दिवस (1 मई) पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा मिट्टी के बर्तन में बोरे बासी खाकर इसे मनाने के बाद अब स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
रविवार को पश्चिम बंगाल दौरे पर रवाना होने से पहले गजेंद्र यादव ने कहा कि मिट्टी के बर्तन में बोरे बासी खाना सिर्फ एक “प्रोपेगेंडा” है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मिट्टी के बर्तन का उपयोग पिंडदान और पितृ भोज में होता है, ऐसे में क्या भूपेश बघेल कांग्रेस का पिंडदान करने गए थे। उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस इस तरह के आयोजन कर आखिर क्या संदेश देना चाहती है—क्या छत्तीसगढ़ के लोग सिर्फ बासी भोजन ही करें?
मंत्री यादव ने पांच राज्यों के चुनाव परिणामों को लेकर भी भाजपा के पक्ष में मजबूत दावा किया। उन्होंने कहा कि परिणाम “बेहद शानदार” होंगे और बंगाल में “सुनामी” के रूप में भाजपा की सरकार बनेगी। उनके मुताबिक, पांच में से कम से कम तीन राज्यों में स्पष्ट बहुमत से भाजपा सरकार बनाएगी।
इसी दौरान गजेंद्र यादव ने 10वीं और 12वीं के मेधावी छात्रों के लिए बड़ी सौगात की घोषणा की। उन्होंने कहा कि मेरिट सूची में आने वाले छात्रों को एकमुश्त 1.50 लाख रुपये दिए जाएंगे, जिससे उन्हें आगे की पढ़ाई में सुविधा मिल सके।
बच्चों को हेलीकॉप्टर यात्रा कराने के मुद्दे पर भी मंत्री यादव ने कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार छात्रों को नकद सहायता दे रही है, जिससे वे अपने परिवार के साथ बेहतर तरीके से यात्रा या अन्य जरूरतें पूरी कर सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार में केवल एक बार हेलीकॉप्टर यात्रा कराई जाती थी, जबकि अब दी जा रही राशि से छात्र अधिक लाभ उठा सकेंगे।
राज्य में इन बयानों के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया है। भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में शासकीय कार्य में बाधा और मारपीट का मामला सामने आया है। बिल्हा ब्लॉक के ग्राम घोघरा में जनगणना ड्यूटी पर पहुंचे शिक्षक नेतराम पैकरा के साथ एक युवक ने तीन बार मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी।
जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह शिक्षक नेतराम पैकरा मकान नंबर 141 के पास जनगणना संबंधी जानकारी एकत्र कर रहे थे। इसी दौरान गांव के ही निर्मल सतनामी ने उनका रास्ता रोककर विवाद शुरू किया और मारपीट करने लगा। शिक्षक द्वारा तहसीलदार का जारी आईडी कार्ड दिखाने के बावजूद आरोपी ने उसे फर्जी बताते हुए फाड़ दिया और उनकी शर्ट भी फाड़ दी।
बताया जा रहा है कि जान बचाकर शिक्षक पंचायत भवन पहुंचे, लेकिन आरोपी वहां भी पहुंच गया और फिर से दुर्व्यवहार किया। बाद में जब शिक्षक दगौरी की ओर निकले, तो आरोपी ने चुराघाट तक उनका पीछा किया।
घटना के बाद शिक्षक ने प्रशासनिक और शिक्षा अधिकारियों को जानकारी दी, जिसके निर्देश पर बिल्हा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ बीएनएस की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है। फिलहाल आरोपी फरार बताया जा रहा है।
नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 20 मई 2026 से शुक्र ग्रह आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करने जा रहा है, जिसका व्यापक असर विभिन्न राशियों पर देखने को मिल सकता है। द्रिक पंचांग के मुताबिक यह परिवर्तन धन, सुख-सुविधा, आकर्षण और भौतिक जीवन से जुड़े मामलों में तेजी ला सकता है।
आर्द्रा नक्षत्र के स्वामी राहु माने जाते हैं, जो अचानक घटनाओं और अप्रत्याशित लाभ के कारक हैं। ऐसे में शुक्र और राहु के प्रभाव से कुछ राशियों के लिए आर्थिक अवसर बढ़ने और रुका हुआ धन मिलने के योग बन रहे हैं। खासतौर पर व्यापार, मीडिया, कला और क्रिएटिव क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए यह समय लाभकारी माना जा रहा है।
ज्योतिषीय दृष्टि से शुक्र का आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश कई राशियों के लिए आर्थिक और सामाजिक रूप से सकारात्मक परिणाम लेकर आ सकता है। हालांकि, किसी भी निर्णय से पहले व्यक्तिगत कुंडली के आधार पर विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित रहेगा।
रायपुर- महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) अंतर्गत ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य की मांग एवं लंबित देनदारियों को ध्यान में रखते हुए कुल 1333 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। इससे राज्य के लाखों ग्रामीण श्रमिक परिवारों को बड़ी राहत मिलने जा रही है।
स्वीकृत राशि में से 800 करोड़ रुपए से अधिक की राशि मजदूरी भुगतान हेतु जारी की गई है। यह राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से पारदर्शिता के साथ श्रमिकों के बैंक खातों में अंतरित की जा रही है।
वर्तमान में राज्य के श्रमिकों के खातों में 212 करोड़ रुपए की मजदूरी राशि का भुगतान किया जा चुका है। शेष राशि भी शीघ्र ही चरणबद्ध तरीके से श्रमिकों के खातों में अंतरित की जाएगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ श्रमिकों की आजीविका को स्थायित्व प्राप्त होगा।
राज्य में संचालित “मोर गांव मोर पानी महा अभियान” के अंतर्गत जल संरक्षण एवं आजीविका संवर्धन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। मनरेगा के माध्यम से आजीविका डबरी, नवा तरिया तथा अन्य जल संरक्षण कार्यों को व्यापक स्तर पर स्वीकृत किया जा रहा है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़े, भू-जल स्तर में सुधार हो तथा किसानों की आय और रोजगार के अवसरों में वृद्धि हो सके।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ग्रामीण विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मनरेगा के माध्यम से रोजगार सृजन, ग्रामीण अधोसंरचना विकास तथा गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक संबल प्रदान करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।
भारत सरकार से प्राप्त यह वित्तीय स्वीकृति छत्तीसगढ़ के ग्रामीण विकास को नई गति देने के साथ-साथ श्रमिकों के जीवन स्तर में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी।
दाढ़ी (बेमेतरा) सीसी रोड प्रकरण पर सख्त रुख: कलेक्टर को मामले की जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश
रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बेमेतरा जिले के नगर पंचायत दाढ़ी क्षेत्र में हाल ही में निर्मित सीसी रोड के अल्प समय में ही क्षतिग्रस्त होने संबंधी प्रकाशित समाचार को गंभीरता से लेते हुए तत्काल संज्ञान लिया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि विकास कार्यों की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की ढिलाई या लापरवाही पूर्णतः अस्वीकार्य है।
मुख्यमंत्री साय ने बेमेतरा की कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाईं से दूरभाष पर चर्चा कर पूरे प्रकरण की विस्तृत एवं समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि संबंधित सीसी रोड का तकनीकी परीक्षण कर वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाए तथा निर्माण में प्रयुक्त सामग्री, कार्य की गुणवत्ता और पर्यवेक्षण व्यवस्था की समग्र जांच की जाए।
मुख्यमंत्री ने निर्देशित किया कि यदि जांच में गुणवत्ता में कमी, मानकों का उल्लंघन अथवा किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित ठेकेदार एवं जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही क्षतिग्रस्त सड़क का त्वरित रूप से पुनर्निर्माण कर आमजन को सुरक्षित एवं सुगम आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
मुख्यमंत्री साय ने यह भी निर्देश दिए कि जिले में संचालित अन्य निर्माण कार्यों की भी विशेष समीक्षा की जाए, ताकि कहीं और इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न न हो। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना प्रशासन की मूल जिम्मेदारी है, और इसमें किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट किया कि जनहित से जुड़े कार्यों में लापरवाही करने वालों के विरुद्ध जवाबदेही तय होगी और कार्रवाई अनिवार्य होगी। उन्होंने निर्देश दिए कि सतत मॉनिटरिंग, फील्ड निरीक्षण और प्रभावी गुणवत्ता नियंत्रण तंत्र के माध्यम से विकास कार्यों की विश्वसनीयता एवं टिकाऊपन सुनिश्चित किया जाए, ताकि जनता का विश्वास और अधिक सुदृढ़ हो सके।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारी सरकार की मंशा स्पष्ट है - जनहित के प्रत्येक कार्य में गुणवत्ता, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित किया जाए।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशभर में निर्माण कार्यों की निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण सुदृढ़ करने के निर्देश दिए हैं ताकि आम नागरिकों को सुरक्षित, टिकाऊ और भरोसेमंद अधोसंरचना का लाभ मिल सके।
51 हजार से अधिक कर्मचारी घर-घर पहुँचकर जुटा रहे जानकारी
रायपुर- छत्तीसगढ़ राज्य में भारत की जनगणना 2027श् के प्रथम चरण मकान सूचीकरण और मकानों की गणना का फील्ड कार्य आधिकारिक रूप से प्रारंभ हो गया है। 01 मई से शुरू हुआ यह महाभियान 30 मई 2026 तक चलेगा। इस कार्य के लिए राज्य भर में 51 हजार 300 प्रगणक और 9 हजार पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गई है, जो घर-घर जाकर डेटा एकत्रित कर रहे हैं।
पहली बार डिजिटल मोड में जनगणना
इस बार की जनगणना ऐतिहासिक है क्योंकि यह पूरी तरह डिजिटल माध्यम से की जा रही है। प्रगणक मोबाइल ऐप के जरिए मकानों की स्थिति, परिवारों को उपलब्ध सुविधाओं और परिसंपत्तियों से संबंधित कुल 33 प्रश्नों की जानकारी दर्ज करेंगे।
प्रशासन सख्त- अनुपस्थित कर्मचारियों पर कार्रवाई
प्रशासन ने जनगणना कार्य को लेकर सख्त रुख अपनाया है। रायपुर नगर निगम में ड्यूटी से अनुपस्थित रहने वाले 44 कर्मचारियों को जनगणना अधिनियम 1948 और छत्तीसगढ़ सिविल आचरण नियमों के तहत नोटिस जारी किया गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जनगणना कार्य में बाधा डालना या इससे इनकार करना एक दंडनीय अपराध है।
उपलब्धियां और उत्साह का वातावरण
दुर्गम क्षेत्रों में मिसाल- बस्तर जिले के तोकापाल तहसील अंतर्गत ग्राम गाटम के प्रगणक ने विषम परिस्थितियों के बावजूद पहले ही दिन कार्य पूर्ण कर राज्य स्तर पर उत्साह का संचार किया। अभियान के पहले दिन ही जिला कलेक्टरों और नगर निगम आयुक्तों ने फील्ड में जाकर कार्यों का निरीक्षण किया और कार्यकर्ताओं का उत्साहवर्धन किया। स्व-गणना राज्य में डिजिटल साक्षरता का प्रभाव दिखा, जहाँ 16 से 30 अप्रैल के बीच 1 लाख 49 हजार 862 परिवारों ने वेब पोर्टल के माध्यम से स्वयं अपनी गणना की।
डेटा सुरक्षा और गोपनीयता की गारंटी
जनगणना निदेशालय ने आम नागरिकों को आश्वस्त किया है कि उनके द्वारा दी गई सभी व्यक्तिगत जानकारी जनगणना अधिनियम 1948 के तहत पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी। यह जानकारी किसी भी टैक्स, पुलिस जांच या कोर्ट केस में साक्ष्य के रूप में उपयोग नहीं की जा सकती। यहाँ तक कि सूचना का अधिकार के माध्यम से भी व्यक्तिगत डेटा प्राप्त नहीं किया जा सकता। इन आंकड़ों का उपयोग केवल राष्ट्र निर्माण और जन कल्याणकारी योजनाओं के निर्माण हेतु किया जाएगा।
नागरिकों से अपील
प्रशासन ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि जब भी प्रगणक उनके घर आएं, उन्हें सही और सटीक जानकारी प्रदान करें। आपका यह सहयोग केवल जानकारी मात्र नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में आपका अमूल्य योगदान है।
22 हजार के बदले कमाए 3 लाख रुपए
गेंदा उत्पादन से कोड़केल के किसान ने पेश की सफलता की मिसाल
रायपुर- छत्तीसगढ़ में किसान अब पारंपरिक धान की खेती छोड़कर फूलों की खेती अपनाकर अपनी तकदीर बदल रहे हैं। उद्यानिकी विभाग और सरकारी योजनाओं की मदद से गेंदा, गुलाब जैसे फूलों की वैज्ञानिक खेती कर किसान कम लागत में लाखों रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार आया है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन और उद्यानिकी विभाग से मार्गदर्शन मिलने के कारण किसान वैज्ञानिक पद्धति से अधिक उत्पादन ले रहे हैं। एक किसान आनंदराम सिदार की सफलता देखकर अब अन्य ग्रामीण भी परंपरागत खेती से आगे बढ़कर उद्यानिकी फसलों की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।
परंपरागत खेती के दौर में जहाँ किसान अक्सर कम मुनाफे से परेशान रहते हैं, वहीं रायगढ़ जिले के लैलूंगा विकासखण्ड के एक छोटे से गाँव कोड़केल के किसान आनंदराम सिदार ने नवाचार से समृद्धि की नई इबारत लिखी है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन की श्गेंदा क्षेत्र विस्तार योजनाश् का लाभ उठाकर आनंदराम ने अपनी आय में कई गुना वृद्धि की है।
धान बनाम गेंदा- मुनाफे का बड़ा अंतर
आनंदराम सिदार पहले पारंपरिक धान की खेती पर निर्भर थे। वे 10 क्विंटल धान का उत्पादन कर मुश्किल से 31 हजार रुपए की कुल आय प्राप्त कर पाते थे, जिसमें से लागत काटकर उनके हाथ मात्र 22 हजार रुपए का लाभ आता था। लेकिन उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने 0.400 हेक्टेयर क्षेत्र में गेंदा फूल की खेती शुरू की, जिससे उनकी आय का ग्राफ अचानक बदल गया।
तकनीकी सहयोग और बंपर उत्पादन
वर्ष 2025-26 के दौरान उद्यानिकी विभाग ने उन्हें उन्नत बीज, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण दिया। आनंदराम की मेहनत और विभागीय सहयोग का नतीजा यह रहा कि उन्होंने कुल उत्पादन लगभग 44 क्विंटल गेंदा फूल बेचकर
3 लाख रुपए से अधिक की कुल आमदनी हासिल की। धान की तुलना में बेहतर रिटर्न और कम समय में अधिक आय प्राप्त किया।
क्षेत्र के किसानों के लिए बने रोल मॉडल
आनंदराम सिदार की इस सफलता ने पूरे रायगढ़ जिले में गेंदा जैसी नगदी फसलों के प्रति अन्य किसानों का रुझान बढ़ा दिया है। अब क्षेत्र के कई किसान धान के स्थान पर फूलों की खेती को एक लाभकारी विकल्प के रूप में अपना रहे हैं। आनंदराम सिदार का कहना है कि शुरुआत में जोखिम लग रहा था, लेकिन उद्यानिकी विभाग के तकनीकी सहयोग और सही समय पर की गई देखरेख ने मेरी तकदीर बदल दी। आज मैं आत्मनिर्भर हूँ और अपने परिवार को बेहतर जीवन दे पा रहा हूँ।
विभाग की सक्रिय पहल
रायगढ़ जिले में राष्ट्रीय बागवानी मिशन की गेंदा क्षेत्र विस्तार योजना से जुड़ने के बाद आनंदराम सिदार का जीवन की दिशा ही बदल गई। उद्यानिकी विभाग की सक्रियता से फूलों की खेती अब एक टिकाऊ और मुनाफे वाले व्यवसाय के रूप में उभर रही है। विभाग द्वारा लगातार किसानों को प्रशिक्षण और प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है।
रायपुर : भारत की जनगणना 2027 के प्रथम चरण भवन क्रमांकन एवं मकान सूचीकरण के अंतर्गत प्रगणकों और पर्यवेक्षकों के लिए 15 से 17 अप्रैल 2026 तक शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय दुलदुला में तीन दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया था।
तहसीलदार एवं चार्ज जनगणना अधिकारी (ग्रामीण) दुलदुला के प्रतिवेदन के अनुसार, जशपुर जिले के प्राथमिक शाला सरहापानी, ग्राम पतराटोली के सहायक शिक्षक सत्यजीत निराला बिना पूर्व सूचना या अनुमति के प्रशिक्षण में अनुपस्थित रहे। इस पर उन्हें 19 अप्रैल 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया, लेकिन उन्होंने कोई उत्तर प्रस्तुत नहीं किया।इसके बाद जिला स्तर से भी 21 अप्रैल 2026 को पुनः नोटिस जारी किया गया, परंतु संबंधित द्वारा अब तक कोई जवाब नहीं दिया गया।
प्रकरण में स्पष्ट हुआ कि निराला ने जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्य में गंभीर लापरवाही बरती और उच्चाधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना की। यह आचरण छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 3 एवं 7 का उल्लंघन माना गया है।
इसी आधार पर सत्यजीत निराला को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम 9 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी, दुलदुला कार्यालय निर्धारित किया गया है तथा उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा।
बलौदाबाजार। जिले सहित प्रदेशभर में पड़ रही भीषण गर्मी का असर अब जंगलों और वन्यजीवों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। जहां कभी घने जंगलों में नदी-नाले और प्राकृतिक जलस्रोत लबालब रहते थे, वहीं पिछले कुछ वर्षों में कई जलस्रोत सूखने लगे हैं।
स्थिति यह है कि पानी की तलाश में वन्यजीवों को जंगल से बाहर निकलने पर मजबूर होना पड़ रहा है। ऐसे हालात को देखते हुए प्रसिद्ध बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य में वन विभाग ने वन्यजीव संरक्षण के लिए विशेष और संवेदनशील पहल शुरू की है।
वन विभाग द्वारा जंगल के भीतर स्थित नालों की सफाई कर उन्हें पुनर्जीवित किया जा रहा है। साथ ही जगह-जगह बनाए गए कृत्रिम जलस्रोतों और सीमेंटेड वॉटरहोल में टैंकरों के माध्यम से नियमित रूप से पानी भरा जा रहा है, ताकि वन्यजीवों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
अभयारण्य क्षेत्र में 240 से अधिक जलस्रोतों—जैसे तालाब, स्टॉप डैम और वॉटरहोल—को चिन्हित कर उनकी नियमित निगरानी की जा रही है। वन विभाग हर 15 दिनों में जलस्तर का आकलन कर यह सुनिश्चित कर रहा है कि प्रत्येक 5 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में पानी उपलब्ध रहे।
इसके अलावा 25 से 30 संवेदनशील स्थानों पर टैंकरों के जरिए जलापूर्ति की जा रही है। जल की गुणवत्ता की भी नियमित जांच की जा रही है, जिसमें पीएच और टीडीएस जैसे मानकों का परीक्षण शामिल है, ताकि पानी वन्यजीवों के लिए सुरक्षित रहे।
वन्यजीवों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए जलस्रोतों के आसपास साल्ट लिक की भी व्यवस्था की गई है, जिससे उन्हें आवश्यक खनिज तत्व मिल सकें।
वनमंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर ने बताया कि यह पहल न केवल वर्तमान गर्मी में वन्यजीवों को राहत देने वाली है, बल्कि भविष्य में जल प्रबंधन के प्रभावी मॉडल के रूप में भी काम करेगी।
चंडीगढ़। आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए राज्यसभा सांसद संदीप पाठक की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पंजाब के अलग-अलग जिलों में उनके खिलाफ दो मामले दर्ज किए गए हैं। बताया जा रहा है कि दोनों मामलों में गैर-जमानती धाराएं लगाई गई हैं। वहीं, पंजाब पुलिस की टीम कार्रवाई के लिए दिल्ली पहुंची है।
सूत्रों के अनुसार, पुलिस टीम के पहुंचने से पहले ही संदीप पाठक अपने आवास से निकल चुके थे।
संदीप पाठक ने 25 अप्रैल को राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, विक्रमजीत सिंह साहनी, राजेंद्र गुप्ता और स्वाति मालीवाल समेत अन्य नेताओं के साथ भाजपा का दामन थामा था।
संदीप पाठक को अरविंद केजरीवाल का करीबी माना जाता था। जब केजरीवाल जेल में थे, तब जिन चुनिंदा लोगों को उनसे मिलने की अनुमति थी, उनमें संदीप पाठक भी शामिल थे। पंजाब विधानसभा चुनाव में पार्टी की रणनीति तैयार करने में उनकी अहम भूमिका मानी जाती है। चुनाव में जीत के बाद वे पार्टी के प्रमुख रणनीतिकार के रूप में उभरे थे। बाद में उन्हें राज्यसभा भेजा गया।
हालांकि बाद में उन्हें पंजाब प्रभारी पद से हटाकर छत्तीसगढ़ का प्रभारी बनाया गया। उनके स्थान पर मनीष सिसोदिया को पंजाब चुनाव प्रभारी नियुक्त किया गया था। सूत्रों के मुताबिक, इस फैसले से वे नाराज बताए जा रहे थे।
छत्तीसगढ़ के रहने वाले संदीप पाठक ने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से पीएचडी की है। उन्होंने आईआईटी दिल्ली की नौकरी छोड़कर आम आदमी पार्टी का दामन थामा था।
इधर, आप छोड़ने वाले उद्योगपति पद्मश्री राजेंद्र गुप्ता की बरनाला स्थित ट्राइडेंट इंडस्ट्री यूनिट पर पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) ने छापा मारा था। इसके खिलाफ ट्राइडेंट ग्रुप ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।
हाईकोर्ट ने मामले में पंजाब सरकार को नोटिस जारी किया है। साथ ही पीपीसीबी ने कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि 4 मई तक कंपनी के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
बलरामपुर। जिले के सामरी पाठ थाना क्षेत्र अंतर्गत भुताही गांव में नदी में डूबने से दो मासूम बच्चों की मौत हो गई। इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरे गांव में शोक की लहर है, वहीं परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
जानकारी के अनुसार, 5 और 6 वर्षीय दोनों बच्चे अपने साथियों के साथ गांव के पास स्थित नदी में नहाने गए थे। भीषण गर्मी के कारण बच्चे नदी में खेलते और नहाते समय अनजाने में गहरे पानी में चले गए, जिससे वे डूबने लगे।
साथ मौजूद अन्य बच्चों ने शोर मचाकर ग्रामीणों को सूचना दी। मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने तत्काल नदी में उतरकर दोनों बच्चों को बाहर निकाला, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
घटना की सूचना मिलते ही परिजन मौके पर पहुंचे। बच्चों के शव देखकर परिवार में कोहराम मच गया। बताया जा रहा है कि दोनों बच्चे ग्राम पंचायत सबाग और भुताही के निवासी थे।
सूचना मिलने पर सामरी पाठ थाना प्रभारी विजय सिंह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पंचनामा कार्रवाई के बाद शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। शनिवार को दोनों बच्चों का पोस्टमार्टम कराया गया।
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