Media24Media.com

Responsive Ad Slot

Latest

latest
lockdown news

महासमुंद की खबरें

महासमुंद की खबर

रायगढ़ की ख़बरें

raigarh news

दुर्ग की ख़बरें

durg news

जम्मू कश्मीर की ख़बरें

jammu and kashmir news

VIDEO

Videos
top news


 

नवा रायपुर में PGTI गोल्फ का रोमांच, खलीन जोशी ने जीता पहला Nava Raipur Open 2026

No comments Document Thumbnail

नवा रायपुर- छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर में आयोजित SECL Presents Nava Raipur Open 2026 ने प्रदेश में प्रोफेशनल गोल्फ की बढ़ती पहचान को एक बार फिर सामने रखा। DP World Professional Golf Tour of India (PGTI) के इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट का आयोजन 15 से 18 सितंबर तक Fairway Golf & Lake Resort में किया गया। टूर्नामेंट में कुल 1 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि रखी गई थी। 

खलीन जोशी ने जीता खिताब

टूर्नामेंट का खिताब बेंगलुरु के 34 वर्षीय गोल्फर खलीन जोशी ने अपने नाम किया। उन्होंने चार राउंड में कुल 13-अंडर 123 का स्कोर दर्ज किया और एक स्ट्रोक के अंतर से जीत हासिल की। PGTI के अनुसार, यह 2026 सीजन में जोशी का तीसरा खिताब और उनके करियर का नौवां PGTI खिताब रहा। 

जोशी ने चार राउंड में क्रमशः 29, 30, 33 और 31 का स्कोर बनाया। अंतिम राउंड में उन्होंने बोगी-फ्री प्रदर्शन करते हुए तीन अंडर 31 का स्कोर किया। इस जीत के साथ उन्हें 15 लाख रुपये की पुरस्कार राशि मिली और DP World India Championship की रेस में उनकी रैंकिंग भी 12वें से बढ़कर सातवें स्थान पर पहुंच गई। 

बारिश ने बदला टूर्नामेंट का फॉर्मेट

इस टूर्नामेंट की सबसे खास बात इसका बदला हुआ फॉर्मेट रहा। लगातार बारिश और जलभराव के कारण गोल्फ कोर्स पर सामान्य 18-होल राउंड कराना संभव नहीं था। इसके चलते टूर्नामेंट कमेटी ने सभी चार राउंड को 9-9 होल तक सीमित कर दिया और मुकाबले बैक नाइन पर कराए गए।

इसके बावजूद खिलाड़ियों ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में शानदार प्रदर्शन किया। खलीन जोशी ने परिस्थितियों के अनुरूप अपने खेल को संभालते हुए लगातार बेहतर प्रदर्शन किया और अंततः खिताब अपने नाम किया।

एक स्ट्रोक के अंतर से रहा रोमांचक मुकाबला

फाइनल परिणाम में खलीन जोशी 13-अंडर 123 के साथ पहले स्थान पर रहे। उनके पीछे अनशुल पटेल, रौनिल कुकर और ओम प्रकाश चौहान 12-अंडर के स्कोर के साथ संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर रहे। इससे मुकाबले की कड़ी प्रतिस्पर्धा का अंदाजा लगाया जा सकता है।

नवा रायपुर में दूसरी बार PGTI आयोजन

नवा रायपुर में वर्ष 2026 में यह PGTI का दूसरा आयोजन था। टूर्नामेंट में 132 प्रोफेशनल गोल्फर, जिनमें 18 विदेशी खिलाड़ी भी शामिल थे, हिस्सा लेने वाले थे। आयोजन को छत्तीसगढ़ सरकार का समर्थन मिला और इसका उद्देश्य प्रदेश में गोल्फ के साथ-साथ खेल पर्यटन तथा स्थानीय पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी और कारोबार की संभावनाओं को बढ़ावा देना भी रहा।

CM विष्णु देव साय और कपिल देव ने किया था उद्घाटन

Nava Raipur Open 2026 का उद्घाटन मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और DP World PGTI के अध्यक्ष एवं पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान कपिल देव ने किया था। उद्घाटन के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा था कि नवा रायपुर में ऐसे प्रोफेशनल गोल्फ टूर्नामेंट आयोजित होने से बाहरी खिलाड़ियों और दर्शकों का आगमन बढ़ सकता है तथा युवाओं को गोल्फ के प्रति प्रोत्साहित करने के साथ पर्यटन और स्थानीय व्यवसायों के लिए भी अवसर बन सकते हैं। 

खेल पर्यटन के लिहाज से नवा रायपुर के लिए महत्वपूर्ण आयोजन

नवा रायपुर में PGTI जैसे राष्ट्रीय स्तर के प्रोफेशनल टूर्नामेंट का आयोजन छत्तीसगढ़ के खेल इंफ्रास्ट्रक्चर और गोल्फ कोर्स को राष्ट्रीय गोल्फ सर्किट के मंच पर प्रदर्शित करता है। टूर्नामेंट के जरिए नवा रायपुर को एक संभावित स्पोर्ट्स और गोल्फ टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में भी प्रस्तुत किया गया है। 

कुल मिलाकर, Nava Raipur Open 2026 का समापन खलीन जोशी की जीत के साथ हुआ। लगातार बारिश के कारण टूर्नामेंट का फॉर्मेट भले ही असामान्य रहा, लेकिन खिलाड़ियों के प्रदर्शन और रोमांच ने प्रतियोगिता को खास बना दिया। नवा रायपुर में PGTI आयोजन की निरंतरता छत्तीसगढ़ में प्रोफेशनल गोल्फ और खेल पर्यटन को लेकर बढ़ती गतिविधियों को भी रेखांकित करती है।


महानदी जल विवाद के जल्द समाधान की उम्मीद, ओडिशा दौरे पर CM विष्णु देव साय ने कहा- बातचीत से निकलेगा रास्ता

No comments Document Thumbnail

भुवनेश्वर- छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल विवाद को लेकर समाधान की उम्मीद बढ़ी है। दो दिवसीय ओडिशा दौरे पर पहुंचे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रविवार को कहा कि विवाद का समाधान बहुत जल्द होने की संभावना है। उनके मुताबिक, केंद्र सरकार इस दिशा में काम कर रही है और दोनों राज्यों के बीच बातचीत आगे बढ़ रही है।

केंद्रीय जल आयोग के स्तर पर चल रही बातचीत

मुख्यमंत्री साय के अनुसार, महानदी जल बंटवारे को लेकर छत्तीसगढ़ और ओडिशा पहले ही अपनी-अपनी बात केंद्रीय जल आयोग (CWC) के सामने रख चुके हैं। दोनों राज्यों की तकनीकी टीमें भी आयोग की निगरानी में बातचीत कर रही हैं। साय ने कहा कि दोनों पक्ष आयोग के स्तर पर लिए जाने वाले निर्णय का सम्मान करेंगे।

इससे पहले 30 जुलाई 2026 को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ और ओडिशा के मुख्यमंत्रियों तथा वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक हुई थी। केंद्र सरकार ने उस बैठक को विवाद के सौहार्दपूर्ण समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया था।

तकनीकी पहलुओं पर भी हो रहा मंथन

महानदी विवाद में अब बातचीत के साथ-साथ तकनीकी आंकड़ों पर भी चर्चा हो रही है। केंद्रीय जल आयोग और दोनों राज्यों की तकनीकी टीमें नदी में पानी की उपलब्धता, मौजूदा जल उपयोग, प्रमुख जल परियोजनाओं की क्षमता और भविष्य की जरूरतों से जुड़े आंकड़ों का अध्ययन कर रही हैं।

दोनों राज्यों की तकनीकी टीमों के बीच अब तक दो दौर की बातचीत हो चुकी है। अगली बैठक 21 सितंबर को प्रस्तावित है, जिसमें जल बंटवारे से जुड़े संभावित ढांचे पर चर्चा होने की बात सामने आई है।

ट्रिब्यूनल की सुनवाई 28 सितंबर तक टली

महानदी जल विवाद को लेकर गठित महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण ने 17 सितंबर की सुनवाई को आगे बढ़ाकर 28 सितंबर 2026 कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब दोनों राज्य आपसी बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की कोशिश कर रहे हैं।

न्यायाधिकरण ने दोनों राज्यों से बातचीत में हुई प्रगति की जानकारी मांगी है। इससे आने वाले दिनों में तकनीकी वार्ता और संभावित समझौते की दिशा महत्वपूर्ण हो गई है।

वर्षों पुराने विवाद में नई पहल

महानदी जल विवाद कई वर्षों से छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच प्रमुख अंतरराज्यीय मुद्दा रहा है। दोनों राज्यों के बीच महानदी के पानी के उपयोग, जल परियोजनाओं और डाउनस्ट्रीम जल उपलब्धता को लेकर अलग-अलग मत रहे हैं।

ओडिशा का कहना रहा है कि ऊपरी हिस्से में बने बांधों और बैराजों से हीराकुंड जलाशय और राज्य के निचले इलाकों में पानी की उपलब्धता प्रभावित होती है। वहीं छत्तीसगढ़ ने अपने जल उपयोग को राज्य की जरूरतों और अपने हिस्से के अनुरूप ब

छत्तीसगढ़ में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ी रफ्तार, अगस्त में 5,943 EV की बिक्री; पिछले साल से करीब 67% ज्यादा

No comments Document Thumbnail

रायपुर- छत्तीसगढ़ में इलेक्ट्रिक वाहनों की लोकप्रियता लगातार बढ़ती नजर आ रही है। राज्य में अगस्त 2026 के दौरान 5,943 इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री दर्ज की गई, जबकि अगस्त 2025 में यह आंकड़ा 3,550 वाहन था। यानी एक साल में EV बिक्री में करीब 67 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। यह आंकड़ा बताता है कि राज्य में लोग पारंपरिक पेट्रोल-डीजल वाहनों के साथ-साथ अब इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को भी तेजी से अपना रहे हैं।

पिछले साल की तुलना में बड़ा उछाल

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2025 में छत्तीसगढ़ में 3,550 इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री हुई थी। एक साल बाद अगस्त 2026 में यह संख्या बढ़कर 5,943 हो गई। इस तरह एक वर्ष में 2,393 अतिरिक्त इलेक्ट्रिक वाहन बिके।

EV बिक्री में इस वृद्धि को राज्य में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के प्रति बढ़ते रुझान के तौर पर देखा जा रहा है। खासकर शहरी क्षेत्रों में दोपहिया और अन्य इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग बढ़ने की बात सामने आ रही है।

पेट्रोल-डीजल के विकल्प के रूप में बढ़ रही EV की मांग

ईंधन की बढ़ती लागत, कम परिचालन खर्च और पर्यावरण को लेकर बढ़ती जागरूकता इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में शामिल हैं। इलेक्ट्रिक वाहन सामान्य तौर पर पेट्रोल या डीजल वाहनों की तुलना में चलाने की लागत कम कर सकते हैं, हालांकि वाहन की कीमत, चार्जिंग सुविधा और बैटरी से जुड़े खर्च मॉडल के अनुसार अलग-अलग होते हैं।

चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की अहम भूमिका

EV की बिक्री बढ़ने के साथ राज्य में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार भी महत्वपूर्ण हो जाता है। शहरों के साथ-साथ प्रमुख राजमार्गों और अंतरशहरी मार्गों पर पर्याप्त चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध होना इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

छत्तीसगढ़ में EV की बढ़ती बिक्री से वाहन बाजार में भी बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। आने वाले समय में इलेक्ट्रिक दोपहिया, तिपहिया और चारपहिया वाहनों की बिक्री का रुझान राज्य की परिवहन व्यवस्था में बदलाव को प्रभावित कर सकता है।

67 फीसदी की बढ़ोतरी का क्या मतलब?

अगस्त 2025 के 3,550 वाहनों से अगस्त 2026 में 5,943 वाहनों तक पहुंचना लगभग 67.4% की साल-दर-साल वृद्धि है। हालांकि, केवल एक महीने के आंकड़े से पूरे साल की बिक्री का रुझान तय नहीं किया जा सकता। इसके लिए आने वाले महीनों के आंकड़ों को भी देखना जरूरी होगा।

फिलहाल अगस्त के आंकड़े छत्तीसगढ़ में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग की ओर संकेत करते हैं और बताते हैं कि राज्य के वाहन खरीदारों के बीच इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की स्वीकार्यता बढ़ रही है।

महासमुंद में ₹120 करोड़ के खैर तस्करी नेटवर्क का खुलासा, फर्जी NOC और 8 शेल कंपनियों से चल रहा था कथित कारोबार

No comments Document Thumbnail

महासमुंद- छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में खैर लकड़ी की कथित अंतरराज्यीय तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस जांच के अनुसार, यह नेटवर्क पिछले करीब दो वर्षों से ओडिशा से हिमाचल प्रदेश तक फैला हुआ था और इस दौरान ₹120 करोड़ से अधिक मूल्य की खैर लकड़ी के कथित अवैध कारोबार के प्रमाण मिले हैं। जांच में फर्जी वन दस्तावेज, नकली इनवॉयस, शेल कंपनियों और संदिग्ध बैंक खातों के इस्तेमाल की जानकारी सामने आई है।

23,350 किलो खैर लकड़ी से शुरू हुई जांच

मामला उस समय सामने आया जब 17 जून 2026 को महासमुंद जिले में एक ट्रक को रोका गया। ट्रक में करीब 23,350 किलोग्राम खैर लकड़ी लदी थी। पुलिस और वन विभाग की जांच में परिवहन से जुड़े दस्तावेजों में कथित गड़बड़ी सामने आई। अधिकारियों के अनुसार, ट्रक के पास मौजूद नेशनल ट्रांजिट पास सिस्टम (NTPS) से संबंधित NOC/क्लीयरेंस दस्तावेज फर्जी पाए गए।

इसके बाद पुलिस ने मामले की तकनीकी और वित्तीय जांच शुरू की, जिसमें कथित तौर पर नेटवर्क के कई राज्यों तक फैले होने के संकेत मिले।

8 शेल कंपनियों के जरिए कागजों में दिखाया जाता था वैध कारोबार

पुलिस के मुताबिक, खैर लकड़ी के कथित अवैध कारोबार को कागजों पर वैध दिखाने के लिए 8 शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया जाता था। इन कंपनियों के माध्यम से फर्जी इनवॉयस तैयार किए जाने की बात जांच में सामने आई है। इसके अलावा 10 से अधिक संदिग्ध/म्यूल बैंक खातों के इस्तेमाल की भी जांच की जा रही है।

जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन कंपनियों और बैंक खातों के जरिए रकम का लेन-देन किस तरह किया जाता था और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोग कौन-कौन हैं।

ओडिशा से हिमाचल तक फैला था नेटवर्क

पुलिस की जांच के अनुसार, कथित तस्करी का नेटवर्क ओडिशा से शुरू होकर छत्तीसगढ़ होते हुए दूसरे राज्यों तक फैला था और खैर की लकड़ी को हिमाचल प्रदेश स्थित कत्था निर्माण इकाइयों तक पहुंचाने की बात सामने आई है। खैर के पेड़ की लकड़ी का उपयोग कत्था (catechu) बनाने में किया जाता है, जिसका इस्तेमाल पान में व्यापक रूप से होता है। 

50 टन से ज्यादा खैर लकड़ी जब्त होने का दावा

जांच के दौरान अलग-अलग स्थानों पर की गई कार्रवाई में पुलिस ने 50 टन से अधिक खैर लकड़ी जब्त करने और कुल 12 लोगों की गिरफ्तारी किए जाने की जानकारी दी है। यह कार्रवाई कई राज्यों में की गई छापेमारी से जुड़ी बताई गई है। हालांकि, मामले में गिरफ्तार आरोपियों और नेटवर्क की भूमिका को लेकर जांच अभी जारी है।

दो फर्म संचालक भी गिरफ्तार

महासमुंद पुलिस ने हाल में कथित तौर पर फर्जी इनवॉयस उपलब्ध कराने वाले दो फर्म संचालकों—पारितोष मिश्रा और अखिलेश सिंघल—को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार दोनों को 14 सितंबर को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया। 

पुलिस का आरोप है कि इन फर्मों का इस्तेमाल खैर लकड़ी के कथित अवैध कारोबार को दस्तावेजों के जरिए वैध दिखाने में किया जाता था।

मुख्य आरोपी के ठिकाने से ₹81 लाख नकद बरामद

जांच के दौरान पुलिस ने कथित मुख्य आरोपी मनीष अग्रवाल से जुड़े ठिकाने पर भी कार्रवाई की। 7 सितंबर को की गई तलाशी में पुलिस ने ₹81 लाख नकद बरामद करने की जानकारी दी है। पुलिस रकम के स्रोत और कथित तस्करी नेटवर्क से उसके संबंधों की जांच कर रही है। 

वित्तीय नेटवर्क की भी जांच

पुलिस अब केवल लकड़ी की तस्करी तक सीमित न रहकर कथित पूरे वित्तीय नेटवर्क की जांच कर रही है। शेल कंपनियों, फर्जी इनवॉयस और बैंक खातों के माध्यम से हुए लेन-देन को खंगाला जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, मामले में शामिल अन्य संदिग्धों की भूमिका और कथित नेटवर्क की पूरी श्रृंखला का पता लगाने के लिए जांच जारी है।

वन संपदा की सुरक्षा को लेकर भी चिंता

खैर के पेड़ों की अवैध कटाई और तस्करी का मामला केवल आर्थिक अपराध तक सीमित नहीं है। इससे वन संपदा और स्थानीय पारिस्थितिकी पर भी असर पड़ सकता है। इस मामले में फर्जी वन दस्तावेजों के इस्तेमाल की जांच ने वन उत्पादों के परिवहन की निगरानी और दस्तावेजी सत्यापन को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।

पुलिस के अनुसार जांच अभी जारी है। ₹120 करोड़ के कथित कारोबार, आरोपियों की भूमिका और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के संबंध में अंतिम तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। ऊपर बताए गए आरोप पुलिस जांच और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं; इन्हें अदालत द्वारा सिद्ध तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।


वाराणसी में पुलिस मुठभेड़ में झारखंड का वांटेड नक्सली कमांडर ढेर, ₹30 लाख का था इनाम

No comments Document Thumbnail

वाराणसी- उत्तर प्रदेश के वाराणसी में रविवार सुबह पुलिस और झारखंड के एक वांटेड नक्सली कमांडर के बीच मुठभेड़ हुई। पुलिस के मुताबिक, मुठभेड़ में ब्रिजेश गंजू उर्फ गोपाल सिंह भोकता की मौत हो गई। वह झारखंड में प्रतिबंधित तृतीय प्रस्तुति समिति (TPC) का कमांडर बताया गया है। उसके ऊपर कुल ₹30 लाख का इनाम घोषित था।

रामनगर इलाके में हुई मुठभेड़

पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई वाराणसी के रामनगर इलाके में हुई। पुलिस को ब्रिजेश गंजू के इलाके में मौजूद होने की सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने उसे रोकने और गिरफ्तार करने का प्रयास किया।

बताया गया है कि ब्रिजेश एक सहयोगी के साथ मोटरसाइकिल पर टेगरा क्रॉसिंग से मुगलसराय की ओर जा रहा था। पुलिस ने जब उसे रोकने की कोशिश की तो वह कथित तौर पर मोटरसाइकिल से उतरकर पुलिस टीम पर गोली चलाने लगा। इसके बाद पुलिस और उसके बीच गोलीबारी हुई।

पुलिस की जवाबी कार्रवाई में घायल

पुलिस के मुताबिक, मुठभेड़ के दौरान ब्रिजेश गंजू को गोली लगी। उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

पुलिस ने बताया कि आरोपी की ओर से चलाई गई कुछ गोलियां यूपी ATS के DSP विपिन राय और हेड कॉन्स्टेबल नितेंद्र कृष्णा की बुलेटप्रूफ जैकेट से टकराईं। पुलिसकर्मियों को गंभीर चोट नहीं आई।

₹30 लाख का था इनाम

ब्रिजेश गंजू लंबे समय से पुलिस के लिए वांटेड था। पुलिस के अनुसार, उसके खिलाफ करीब 50 आपराधिक मामले दर्ज थे। इनमें हिंसा और अन्य गंभीर अपराधों से जुड़े मामले शामिल बताए गए हैं।

उसकी गिरफ्तारी की सूचना देने पर झारखंड सरकार ने ₹25 लाख, जबकि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने ₹5 लाख के इनाम की घोषणा की थी। इस तरह उसके ऊपर कुल ₹30 लाख का इनाम था।

TPC का कमांडर था ब्रिजेश गंजू

ब्रिजेश गंजू उर्फ गोपाल सिंह भोकता को झारखंड स्थित प्रतिबंधित नक्सली संगठन तृतीय प्रस्तुति समिति (TPC) का प्रमुख/कमांडर बताया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, TPC का गठन CPI (Maoist) से अलग हुए एक गुट के रूप में हुआ था।

हथियार बरामद होने का दावा

पुलिस के अनुसार, मुठभेड़ के बाद घटनास्थल से दो पिस्तौल और एक कार्बाइन समेत हथियार और कारतूस बरामद किए गए हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि ब्रिजेश गंजू वाराणसी में कब से रह रहा था और उसके स्थानीय स्तर पर किन लोगों से संपर्क थे।

सहयोगी की तलाश जारी

मुठभेड़ के दौरान ब्रिजेश के साथ मौजूद उसके सहयोगी के संबंध में पुलिस जांच कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, उसके नेटवर्क और वाराणसी में उसके ठिकाने से जुड़े लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है। मामले में आगे की जांच जारी है।

नोट: मुठभेड़ और आरोपी के खिलाफ मामलों से संबंधित विवरण पुलिस/जांच एजेंसियों के बयानों और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं; जांच आगे बढ़ने के साथ अन्य तथ्य सामने आ सकते हैं।

मुंबई कोस्टल रोड पर दर्दनाक हादसा: BMW के खाई में गिरने से 3 छात्रों की मौत, एक गंभीर

No comments Document Thumbnail

मुंबई- मुंबई के कोस्टल रोड पर रविवार सुबह एक भीषण सड़क हादसे में तीन छात्रों की मौत हो गई, जबकि एक अन्य गंभीर रूप से घायल है। हादसा सुबह करीब 5:20 बजे लोटस जेट्टी के पास हुआ, जब तेज रफ्तार BMW कथित तौर पर चालक के नियंत्रण से बाहर हो गई और सड़क की बाहरी रेलिंग से टकराकर नीचे निर्माणाधीन पार्किंग साइट में जा गिरी।

Marine Drive से Haji Ali जा रही थी कार

पुलिस के अनुसार BMW Marine Drive से Haji Ali की ओर जा रही थी। लोटस जेट्टी के पास, Lala Lajpatrai College के सामने, कार एक मोड़ पर कथित तौर पर नियंत्रण से बाहर हो गई। इसके बाद वाहन डिवाइडर/बाहरी बैरियर से टकराया और ऊंचे हिस्से से नीचे जा गिरा। रिपोर्टों में गिरने की ऊंचाई करीब 75 फीट बताई गई है।

CCTV में कैद हुआ पूरा हादसा

घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। फुटेज में BMW तेज गति से आगे बढ़ती दिखाई देती है और फिर सड़क के किनारे लगे बैरियर से टकराकर पुल से नीचे गिर जाती है। दुर्घटना के बाद कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।

तीन छात्रों की मौत

हादसे के बाद BMW में सवार चारों लोगों को उपचार के लिए नायर अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने तीन लोगों को मृत घोषित कर दिया, जबकि चौथे व्यक्ति को गंभीर हालत में ट्रॉमा वार्ड में भर्ती किया गया। 

ताजा रिपोर्टों में मृतकों की पहचान 21 वर्षीय Shanay Gajjal, 20 वर्षीय Aditya Jakasania और 17 वर्षीय Dhirya Seth के रूप में बताई गई है। चौथा व्यक्ति करीब 20 वर्ष का बताया गया है और उसकी हालत गंभीर है। 

सभी छात्र गुजरात के रहने वाले बताए गए

रिपोर्टों के मुताबिक कार में सवार चारों युवक अहमदाबाद के रहने वाले और मुंबई में पढ़ाई कर रहे छात्र थे। इनमें कुछ छात्र जुहू के एक मैनेजमेंट कॉलेज तथा एक छात्र कुर्ला के कॉलेज में पढ़ता था। बताया गया है कि वे Marine Drive गए थे और वहां से लौट रहे थे।

तेज रफ्तार बनी हादसे की वजह?

पुलिस की शुरुआती जांच में तेज रफ्तार और मोड़ पर वाहन पर नियंत्रण खोना हादसे की संभावित वजह के तौर पर सामने आया है। हालांकि, दुर्घटना की सटीक वजह और अन्य परिस्थितियों की जांच अभी जारी है। पुलिस CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच कर रही है। 

हादसे ने फिर उठाए सड़क सुरक्षा पर सवाल

मुंबई के व्यस्त और तेज रफ्तार वाले कोस्टल रोड पर हुए इस हादसे ने रात और सुबह के समय तेज गति से वाहन चलाने तथा सड़क के संवेदनशील मोड़ों पर सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, हादसे के कारणों पर अंतिम निष्कर्ष पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।


मुंबई के गणपति पंडाल के पास करंट का कहर, 8 साल की बच्ची समेत दो की मौत; चार घायल

No comments Document Thumbnail

मुंबई- गणेशोत्सव के बीच मुंबई के लालबाग-कालाचौकी इलाके में रविवार तड़के एक दर्दनाक हादसा हो गया। गणपति पंडाल के प्रवेश द्वार के पास अस्थायी पानी और कोल्ड ड्रिंक स्टॉल में कथित शॉर्ट सर्किट के बाद करंट फैल गया। इस हादसे में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि चार अन्य घायल हुए हैं। मृतकों में एक 8 वर्षीय बच्ची भी शामिल है।

तड़के करीब 2:20 बजे हुआ हादसा

जानकारी के मुताबिक घटना रविवार तड़के करीब 2:20 बजे कालाचौकी के दत्ताराम लाड मार्ग स्थित महागणपति उत्सव मंडल के पास हुई। उस समय गणेशोत्सव के चलते इलाके में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। पंडाल के प्रवेश द्वार के नजदीक लगे अस्थायी पानी और कोल्ड ड्रिंक स्टॉल में विद्युत संबंधी खराबी के बाद आसपास करंट फैलने की बात सामने आई है।

8 साल की बच्ची और 33 वर्षीय महिला की मौत

हादसे के बाद कुल छह लोगों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। मसिना अस्पताल में 8 वर्षीय राघिनी घनश्याम यादव को मृत घोषित किया गया। वहीं 33 वर्षीय सुजाता को ग्लोबल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें भी मृत घोषित कर दिया।

घायलों में 19 वर्षीय किरण अकबर नाइक, 19 वर्षीय तन्वी नरेश हांडे और 19 वर्षीय साहिल संदीप तारे शामिल हैं, जिनकी हालत स्थिर बताई गई है। वहीं 12 वर्षीय रुही सिंह की हालत गंभीर बताई गई है और उसे आईसीयू में भर्ती किया गया है।

अस्थायी बिजली व्यवस्था पर उठे सवाल

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार गणपति मंडल की रोशनी और अस्थायी स्टॉल के लिए अस्थायी बिजली मीटर लगाया गया था। रिपोर्टों में बताया गया है कि अस्थायी मीटर की वायरिंग और एमसीबी को बाद में एक स्थानीय इलेक्ट्रीशियन द्वारा डिस्कनेक्ट किया गया था। घटना के बाद BEST के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर विद्युत व्यवस्था का निरीक्षण किया।

पुलिस ने शुरू की जांच

हादसे के तुरंत बाद बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई और घटनास्थल को घेरकर सुरक्षा व्यवस्था की गई। कालाचौकी पुलिस मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि करंट फैलने की वास्तविक वजह क्या थी तथा अस्थायी विद्युत व्यवस्था में किसी तरह की लापरवाही हुई थी या नहीं।

गणेशोत्सव के दौरान भारी भीड़ वाले स्थान पर हुए इस हादसे ने अस्थायी बिजली कनेक्शन, स्टॉल और पंडालों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, हादसे की अंतिम वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

50 रुपये का लालच देकर दो नाबालिगों को सुनसान जगह ले गया आरोपी, दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तार

No comments Document Thumbnail

 बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से नाबालिगों से दुष्कर्म का गंभीर मामला सामने आया है। गुण्डरदेही थाना क्षेत्र में एक युवक पर दो नाबालिगों को 50 रुपये देने का लालच देकर बहला-फुसलाकर सुनसान स्थान पर ले जाने और उनके साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगा है। शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।


50 रुपये देने का दिया लालच

पुलिस के मुताबिक, 17 सितंबर को पीड़ित पक्ष की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में बताया गया कि आरोपी ललित ठाकुर ने दो नाबालिगों को 50 रुपये देने और घटना के बारे में किसी को नहीं बताने की बात कही। इसके बाद वह दोनों को साइकिल पर बैठाकर सुनसान जगह ले गया।

घटना के बाद दोनों नाबालिगों ने अपने परिजनों को पूरी जानकारी दी, जिसके बाद मामले की शिकायत पुलिस से की गई।

पॉक्सो एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में केस दर्ज

शिकायत के आधार पर गुण्डरदेही पुलिस ने आरोपी के खिलाफ बीएनएस की धारा 65(2), 137(2) और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। इसके बाद आरोपी की तलाश के लिए पुलिस टीम को रवाना किया गया।

24 घंटे के भीतर आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने कार्रवाई करते हुए करीब 24 घंटे के भीतर आरोपी ललित ठाकुर को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान पुलिस के अनुसार आरोपी ने अपराध स्वीकार किया। इसके बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।

पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है।

डिजिटल क्रांति की ओर छत्तीसगढ़: 'वसुंधरा' परियोजना से सुशासन और पारदर्शी राजस्व सेवाओं का नया दौर

No comments Document Thumbnail

विष्णु प्रसाद वर्मा, सहायक संचालक

रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार राज्य के नागरिकों को सुगम, त्वरित और पारदर्शी राजस्व सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए 'सेवा के संकल्प' के साथ एक ऐतिहासिक डिजिटल क्रांति का नेतृत्व कर रही है। राजस्व, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग द्वारा शुरू की गई 'वसुंधरा' (Verified Accessible System for Unified Digital Land Records & Historical Archives) परियोजना के माध्यम से प्रदेश भर के पुराने और वर्तमान राजस्व अभिलेखों का संपूर्ण डिजिटलीकरण, संरक्षण तथा प्रमाणीकरण किया जा रहा है, जिससे आम जनता को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से हमेशा के लिए मुक्ति मिलेगी।

सफलता का आधार: दंतेवाड़ा का क्रांतिकारी मॉडल

इस महत्वाकांक्षी योजना की सफलता की मजबूत नींव दंतेवाड़ा जिले के क्रांतिकारी मॉडल पर आधारित है। दंतेवाड़ा में पिछले एक वर्ष के दौरान 12 हजार से अधिक नागरिकों ने कियोस्क सेवाओं का लाभ उठाया और 15 हजार से अधिक जाति प्रमाण-पत्र मात्र एक से दो दिनों में जारी किए गए। इसके साथ ही सैकड़ों विवादित मामलों का त्वरित निराकरण संभव हुआ और अभिलेखों में छेड़छाड़ का एक भी मामला सामने नहीं आया।

विस्तृत खाका: 12.89 करोड़ पृष्ठों का डिजिटलीकरण

​दंतेवाड़ा के इसी सफल प्रयोग से प्रेरणा लेते हुए अब पूरे राज्य में लगभग 12 करोड़ 89 लाख पृष्ठों के विभिन्न राजस्व अभिलेखों को डिजिटाइज़ करने का विस्तृत खाका तैयार किया गया है। इसके अंतर्गत 22.72 करोड़ रुपए की लागत से 5.68 करोड़ पृष्ठ खसरा पांचसाला, 11.77 करोड़ रुपए की लागत से 2.94 करोड़ पृष्ठ B-1 रिकॉर्ड, 9.98 करोड़ रुपए की लागत से 2.49 करोड़ पृष्ठ नामांतरण व संशोधन पंजी, 2.13 करोड़ रुपए की लागत से 53.16 लाख पृष्ठ मिसल पंजी और 1.89 करोड़ रुपए की लागत से 47.29 लाख पृष्ठ अधिकार अभिलेख शामिल हैं। इसके अतिरिक्त निस्तार पत्रक, वाजिब-उल-अर्ज, रीनंबरिंग सूची, साधारण खसरा, नजूल शीट एवं व्यवर्तन पंजी जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों को भी डिजिटल रूप से सुरक्षित किया जाएगा।

वित्तीय ढांचा और समयबद्ध कार्यान्वयन

इस विशाल परियोजना के सुचारू क्रियान्वयन के लिए 65.41 करोड़ रुपए की कुल एकमुश्त पूंजीगत लागत (CAPEX) और 50 लाख रुपए प्रति वर्ष का परिचालन व्यय (OPEX) तय किया गया है, जिसकी वित्तीय व्यवस्था राज्य के अधोसंरचना मद और केंद्र सरकार की DILRMP 3.0 योजना से की जाएगी। योजना के तहत राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के सहयोग से अगले तीन महीनों के भीतर वसुंधरा पोर्टल और मोबाइल ऐप तैयार किया जाएगा, जिसके बाद कार्यदायी एजेंसियों का चयन कर एक वर्ष के भीतर सभी अभिलेखों के डिजिटलीकरण और सत्यापन का कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा।

तकनीकी नवाचार: AI और ब्लॉकचेन से सुरक्षा

​'वसुंधरा' परियोजना की सबसे बड़ी खासियत इसमें आधुनिकतम तकनीकों का समावेश है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित OCR, डॉक्यूमेंट क्लासिफिकेशन और स्मार्ट सर्च इंजन की मदद से दशकों पुराने रिकॉर्ड भी पलक झपकते ही खोजे जा सकेंगे। वहीं अभिलेखों में किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या हेरफेर को रोकने के लिए ब्लॉकचेन आधारित सुरक्षा, डिजिटल हस्ताक्षर और यूनिक QR व बारकोड प्रणाली लागू की जाएगी।

त्वरित सेवाएं और सुशासन का नया युग

इस योजना के पूर्ण रूप से लागू होने के बाद वर्तमान में नकल प्राप्ति में लगने वाला 3 से 7 दिनों का समय घटकर मात्र कुछ मिनटों का रह जाएगा और यह सेवा नागरिकों को 24 घंटे उपलब्ध रहेगी। नागरिक अब वेब पोर्टल, मोबाइल ऐप, लोक सेवा केंद्रों और कियोस्क के माध्यम से घर बैठे आसानी से प्रमाणित अभिलेख प्राप्त कर सकेंगे। सुगम ऑनलाइन पेमेंट गेटवे और अधिकारियों के लिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग जैसी सुविधाओं से आम जनता को राहत मिलेगी। छत्तीसगढ़ सरकार का यह नवाचार न केवल भूमि विवादों और फर्जीवाड़े पर पूरी तरह अंकुश लगाएगा, बल्कि राज्य में डिजिटल गवर्नेंस, पारदर्शिता और सुशासन के एक नए युग का सूत्रपात भी करेगा।

वीबी-जीरामजी से अब होंगे 375 प्रकार के अनुमेय कार्य - उप मुख्यमंत्री शर्मा

No comments Document Thumbnail

 रायपुर : छत्तीसगढ़ में ग्रामीण विकास को रोजगार, आजीविका और स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण से जोड़ने की दिशा में विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जीरामजी) का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। मिशन के अंतर्गत अनुमेय कार्यों की संख्या अब 318 से बढ़ाकर 375 कर दी गई है। 


उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा ने अनुमेय कार्यों की संख्या में वृद्धि पर हर्ष जताते हुए कहा कि वीबी-जीरामजी के अंतर्गत अनुमेय कार्यों की संख्या 318 से बढ़कर 375 होने से विकास कार्यों को गति प्राप्त होगी और ग्रामीण विकास सुदृढ होगा। छत्तीसगढ़ शासन ने मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए वर्ष 2026-27 के बजट में 4 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि इस प्रावधान का लाभ केवल मजदूरी भुगतान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके माध्यम से गांवों में ऐसी परिसंपत्तियों का निर्माण होगा, जो आने वाले वर्षों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करेंगी।

शर्मा ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ के लिए वीबी-जीरामजी के तहत 3,354.85 करोड़ रुपये का अंतरिम आवंटन प्रदान किया गया है। मिशन के अंतर्गत अकुशल श्रमिकों की मजदूरी दर 261 रुपये से बढ़ाकर 300 रुपये प्रतिदिन की गई है। रोजगार के दिनों में वृद्धि, मजदूरी दर में सुधार और स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण का यह समन्वय ग्रामीण परिवारों की आर्थिक सुरक्षा तथा गांवों के समग्र विकास को नई गति देगा।

       उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने विकसित भारत/2047 की परिकल्पना में गांवों को विकास की केंद्रीय इकाई के रूप में महत्व दिया है। वीबी-जीरामजी के माध्यम से रोजगार, आजीविका, जल संरक्षण, कृषि उत्पादकता, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अधोसंरचना को एक साथ जोड़ने का प्रयास इसी व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन तथा केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में ग्रामीण विकास को नई दिशा मिली है।

क्यूआर कोड से मिलेगी अनुमेय कार्यों की जानकारी

       उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने बताया कि वीबी-जीरामजी के अंतर्गत 375 अनुमेय कार्यों को 4 मुख्य श्रेणियों और 30 उप-श्रेणियों में व्यवस्थित किया गया है। इनमें 68 प्रकार के व्यक्तिगत कार्य, 99 प्रकार के मरम्मत एवं रखरखाव संबंधी कार्य तथा समूह और सामुदायिक उपयोगिता से जुड़े कार्य शामिल हैं। अनुमेय कार्यों की जानकारी प्रत्येक ग्रामीण तक आसानी से पहुंचे, इसके लिए राज्य में क्यूआर कोड भी जारी किया गया है, जिसके माध्यम से ग्रामीण अनुमेय कार्यों की विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।


2027 तक हर बालिका के लिए स्कूलों में शौचालय का लक्ष्य

      वीबी-जीरामजी की कार्य-सूची में शासकीय विद्यालयों की अधोसंरचना को विशेष महत्व दिया गया है। विद्यालयों में शौचालयों की मरम्मत, अतिरिक्त कक्षों का निर्माण, प्रयोगशालाएं, रसोई शेड, परिसर की दीवार और खेल मैदान जैसे कार्य इसके अंतर्गत किए जा सकेंगे।

      इसी दिशा में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा ‘मेरी बेटी-मेरा अभिमान’ अभियान संचालित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत 26 जनवरी 2027 तक ग्रामीण क्षेत्रों के शासकीय विद्यालयों में 6,671 बालिका शौचालयों का निर्माण किया जाएगा। यह पहल बालिकाओं की गरिमा, स्वच्छता और विद्यालयों में बेहतर सुविधाजनक वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

हर गांव में मुक्तिधाम और प्रतीक्षालय की दिशा में आगे बढ़ रहा राज्य

      ग्रामीण क्षेत्रों में आवश्यक सामुदायिक अधोसंरचना के विस्तार के लिए राज्य सरकार द्वारा हर गांव में मुक्तिधाम निर्माण का संकल्प लिया गया है। 6,524 गांवों में प्रतीक्षालय सहित मुक्तिधाम के निर्माण की दिशा में कार्य किया जा रहा है। वीबी-जीरामजी में श्मशान घाट तथा अन्य सामुदायिक अधोसंरचना से संबंधित निर्माण एवं मरम्मत कार्यों को भी अनुमेय बनाया गया है। इसके अतिरिक्त जल संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए राज्य के 10 हजार से अधिक बंद अथवा डिफंक्ट बोरवेलों में सैंड फिल्टर एवं रिचार्ज संरचनाओं का निर्माण कराया जाएगा।

जल सुरक्षा से लेकर भूजल पुनर्भरण तक

      अनुमेय कार्यों की पहली मुख्य श्रेणी में जल संरक्षण और जल सुरक्षा से जुड़े कार्य शामिल हैं। इनमें नहर, बाढ़ नियंत्रण चौनल, चेकडैम, गली प्लग, भूमिगत डाइक, तालाबों का पुनर्जीवन, परकोलेशन टैंक, रिचार्ज पिट और रिचार्ज शाफ्ट, इंजेक्शन वेल, सिंचाई कुएं, माइक्रो एवं ड्रिप सिंचाई चौनल, वाटरशेड भूमि का पुनरुद्धार, वनीकरण एवं पौधरोपण, मृदा-नमी संरक्षण तथा रूफटॉप वर्षाजल संचयन जैसे कार्य शामिल हैं।

      इन कार्यों से गांवों में जल संचयन क्षमता बढ़ाने, भूजल पुनर्भरण, सिंचाई सुविधा के विस्तार और कृषि भूमि की उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलेगी। व्यक्तिगत और सामुदायिक दोनों स्तरों पर जल संरक्षण से जुड़ी संरचनाओं के निर्माण एवं रखरखाव को भी इसमें स्थान दिया गया है।

सड़क, स्कूल, पंचायत भवन और स्वच्छता सहित मजबूत होगी ग्रामीण अधोसंरचना

      कार्यों की दूसरी मुख्य श्रेणी में ग्रामीण अधोसंरचना से संबंधित है। इसमें ग्रामीण सड़कें, पुलिया एवं क्रॉस-ड्रेनेज संरचनाएं, ग्राम संपर्क सुविधाएं, ग्राम पंचायत भवन, आंगनबाड़ी केंद्र, ग्रामीण पुस्तकालय, सार्वजनिक भवन, स्कूल अधोसंरचना, रसोई शेड, अतिरिक्त कक्ष, प्रयोगशालाएं, स्कूल परिसर की दीवारें और खेल मैदान जैसे कार्य शामिल हैं।

      इसके साथ श्मशान घाट, कब्रिस्तान, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, स्वच्छता परिसर, अपशिष्ट पृथक्करण एवं संग्रहण केंद्र, सौर प्रकाश व्यवस्था, बायोगैस प्लांट, पार्किंग एवं परिवहन शेड सहित अन्य सामुदायिक सुविधाओं के निर्माण और विकास को भी अनुमेय कार्यों में शामिल किया गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत अनुमेय ग्रामीण आवास कार्य तथा जल जीवन मिशन के तहत निर्मित जलापूर्ति परिसंपत्तियों की मरम्मत एवं रखरखाव भी इस श्रेणी में शामिल हैं।

आजीविका के साथ स्थानीय स्तर पर आय के अवसर

      कार्यों की तीसरी मुख्य श्रेणी आजीविका संबंधी अधोसंरचना की है। इसके अंतर्गत प्रशिक्षण-सह-कौशल विकास केंद्र, स्वयं सहायता समूहों के लिए वर्कशेड, ग्रामीण हाट एवं साप्ताहिक बाजार, खाद्यान्न एवं कृषि उपज भंडारण, कोल्ड स्टोरेज, कृषि मूल्य श्रृंखला से जुड़ी संरचनाएं, स्वयं सहायता समूह एवं फेडरेशन स्तर के भवन, वर्मी कम्पोस्ट एवं नाडेप इकाइयां, सिल्विपास्चर, डेयरी एवं दुग्ध संग्रहण केंद्र, पशु आश्रय, मत्स्य पालन अधोसंरचना, नर्सरी एवं पौधरोपण तथा भवन निर्माण सामग्री के उत्पादन से जुड़े कार्य शामिल हैं।

      कृषि आधारित प्रसंस्करण को भी इस श्रेणी में स्थान दिया गया है। मिनी फ्लोर मिल, खाद्य प्रसंस्करण, तेल प्रसंस्करण, एकीकृत कृषि प्रसंस्करण, वन उत्पाद प्रसंस्करण, हस्तशिल्प प्रसंस्करण, जैव-अवक्रमणीय उत्पाद प्रसंस्करण तथा बांस शिल्प जैसी गतिविधियों के लिए अधोसंरचना विकसित की जा सकेगी। इससे स्थानीय संसाधनों के स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन की संभावनाएं बढ़ेंगी।

महिला स्व-सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमिता को मिलेगा आधार

        स्व-सहायता समूहों के लिए वर्कशेड और समूह स्तर की गतिविधियों के लिए अधोसंरचना को अनुमेय कार्यों में शामिल किए जाने से ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक गतिविधियों को आवश्यक स्थान और सुविधाएं उपलब्ध कराने के अवसर बढ़ेंगे। वर्मी कम्पोस्ट, नाडेप, नर्सरी, कृषि उत्पाद भंडारण, पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन से जुड़ी परिसंपत्तियां ग्रामीण परिवारों के लिए आय के विविध स्रोत विकसित करने में सहायक होंगी।

आपदा और चरम मौसम से निपटने के लिए भी होंगे कार्य

       चौथी मुख्य श्रेणी में अति विषम मौसमी घटनाओं के न्यूनीकरण और आपदा सजगता से संबंधित कार्य शामिल हैं। इनमें चक्रवात आश्रय, बाढ़ आश्रय, तटबंध, मिट्टी एवं गेबियन संरचनाएं, रिटेनिंग वॉल, बाढ़ सुरक्षा दीवार, लेवल बेंच टेरेस, अपलैंड बेंच टेरेस, स्थिरीकरण तालाब, आपदा के बाद ग्रामीण सड़कों एवं सामुदायिक परिसंपत्तियों का पुनर्स्थापन, विंडब्रेक एवं शेल्टरबेल्ट पौधरोपण तथा वन अग्नि प्रबंधन से जुड़े कार्य शामिल हैं।वन अग्नि प्रबंधन के अंतर्गत फायर ब्रेक हेज, वन अग्नि रेखा और फ्यूल बफर जोन सहित अन्य सहायक कार्य भी अनुमेय हैं। इससे प्राकृतिक आपदाओं और चरम मौसमी परिस्थितियों के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों की सुरक्षा तथा सार्वजनिक और सामुदायिक परिसंपत्तियों की संरक्षण क्षमता को मजबूत करने में सहायता मिलेगी।

      उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि वीबी-जीरामजी केवल ग्रामीण परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह गांवों की आर्थिक क्षमता बढ़ाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, स्थानीय आजीविका को मजबूत करने और टिकाऊ ग्रामीण अधोसंरचना विकसित करने का व्यापक अवसर है। 375 अनुमेय कार्यों के माध्यम से रोजगार को परिसंपत्ति निर्माण और परिसंपत्तियों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए विकसित गांव की दिशा में ठोस आधार तैयार किया जा रहा है।

लखपति दीदी बनाने में मददगार बन रही छत्तीसगढ़ की महतारी वंदन योजना

No comments Document Thumbnail

 धनंजय राठौर- संयुक्त संचालक ,जनसंपर्क, रायपुर

रायपुर : महतारी वंदन योजना के तहत मिलने वाली 1,000 रुपये की मासिक राशि छत्तीसगढ़ की लाखों महिलाओं के लिए घर-गृहस्थी में मदद से कहीं ज्यादा साबित हो रही है। यह राशि कर्ज, स्वयं सहायता समूहों और आजीविका के अवसरों के साथ मिलकर महिलाओं की आय का स्थायी जरिया बन रही है।


महतारी वंदन योजना राज्य की सबसे बड़ी योजनाओं में से एक है, जिसमें लगभग 68 लाख महिला लाभार्थी शामिल हैं। इस योजना के तहत लाभार्थियों को अब तक 31 किस्तों में 20,075.38 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। इस साल राज्य के बजट में इस योजना के लिए 8,200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

इसी योजना की पूरक ’महतारी शक्ति ऋण योजना’ के तहत नवंबर 2024 से अब तक लगभग 41,124 लाभार्थियों ने 102.38 करोड़ रुपये के बिना गारंटी वाले स्वरोजगार ऋण का लाभ उठाया है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा, ष्इस योजना के तहत मिलने वाले लोन से सब्जी बेचने, कारीगरी और दूसरे छोटे-मोटे काम करने वाली महिलाओं को अपना कारोबार बढ़ाने और घर की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद मिलती है। इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के श्लखपति दीदीश् के विजन को साकार करने में भी मदद मिल रही है।ष्

इनकी कहानियां बनीं मिसाल

रानू कैवर्त, आंदी गांव, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही
सिलाई, कपड़े और किराने के कारोबार के साथ-साथ बटेर और देसी मुर्गी पालन एवं हैचरी का काम करके सालाना 3 लाख रुपये की आमदनी।

सीता मरावी, गुडुमदेवारी

किराने की दुकान के लिए बैंक से 25 हजार और मुर्गी पालन के लिए स्वयं सहायता समूह से 50 हजार रुपये का लोन लेकर सालाना कमाई 2.5 लाख रुपये तक पहुंचाई।

सुमन लता वाकरे, गुडुमदेवारी

स्वयं सहायता समूह से 15 हजार रुपये लेकर किराने की दुकान शुरू की, बाद में बैंक लोन से विस्तार किया। अब सालाना 1 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई। 

केजू बाई सलामे, रामगढ़, मोहला-मानपुर- अंबागढ़ चौकी
महतारी वंदन के हर महीने मिलने वाले 1,000 रुपये का इस्तेमाल किराने के सामान का स्टॉक भरने में करती हैं, जिससे बिक्री बढ़ी और वे लखपति दीदी बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

13.85 लाख महिलाएं बनीं लखपति दीदी

10 मार्च, 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वर्चुअल मौजूदगी में शुरू हुई महतारी वंदन योजना ने लखपति दीदी के लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभाई है। प्रदेश में स्वयं-सहायता समूहों की 13.85 लाख महिला सदस्य पहले ही लखपति दीदी की श्रेणी में शामिल हो चुकी हैं।

राज्य सरकार द्वारा लखपति दीदी भ्रमण योजना के तहत भी बजटीय प्रावधान किया गया है, ताकि लखपति दीदियां देश भर के व्यापारिक और आर्थिक केंद्रों के साथ-साथ प्रमुख शक्तिपीठों का भी दौरा कर सकें।

Asian Games 2026: भारत का खुला मेडल खाता, शूटिंग में महिला टीम ने जीता सिल्वर; हॉकी टीम ने भी मचाया धमाल

No comments Document Thumbnail

 नागोया। जापान के आइची-नागोया में आयोजित 20वें एशियन गेम्स में भारत ने अपने अभियान का शानदार आगाज किया है। भारत ने शूटिंग में महिला टीम इवेंट में सिल्वर मेडल जीतकर प्रतियोगिता में अपना पदक खाता खोल दिया है। वहीं भारतीय महिला हॉकी टीम ने भी उज्बेकिस्तान को 19-0 से हराकर धमाकेदार शुरुआत की है।


इस बार एशियन गेम्स में भारत के 500 से अधिक खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। दूसरे दिन शूटिंग, हॉकी, क्रिकेट, बैडमिंटन समेत कई खेलों में भारतीय खिलाड़ियों से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है।

शूटिंग में भारत को पहला मेडल

महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्धा में एलावेनिल वलारिवान, सोनम मस्कर और विदर्शा विनोद की भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल अपने नाम किया।

भारतीय तिकड़ी ने चीन के बाद दूसरा स्थान हासिल किया। चीन ने इस स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता। इस सिल्वर के साथ भारत ने आइची-नागोया एशियन गेम्स में अपना आधिकारिक पदक खाता खोल लिया।

एलावेनिल और सोनम ने फाइनल में बनाई जगह

महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल व्यक्तिगत स्पर्धा के क्वालिफिकेशन में एलावेनिल वलारिवान ने 633.5 अंक के साथ सातवां स्थान हासिल किया और फाइनल के लिए क्वालीफाई किया। वहीं सोनम उत्तम मस्कर ने क्वालिफिकेशन में तीसरा स्थान हासिल करते हुए मेडल राउंड में जगह बनाई।

इस तरह व्यक्तिगत स्पर्धा के मेडल राउंड में भारत की दो निशानेबाजों की चुनौती देखने को मिलेगी।

महिला हॉकी टीम की भी धमाकेदार शुरुआत

भारतीय महिला हॉकी टीम ने भी एशियन गेम्स में शानदार आगाज किया। कप्तान सलीमा टेटे की अगुवाई वाली टीम ने ग्रुप स्टेज के मुकाबले में उज्बेकिस्तान को 19-0 से करारी शिकस्त दी।

इस मुकाबले की सबसे बड़ी स्टार दीपिका रहीं, जिन्होंने अकेले 8 गोल दागे। इनमें पांच गोल पेनल्टी कॉर्नर के जरिए आए। यह एशियन गेम्स हॉकी में किसी एक खिलाड़ी द्वारा एक मैच में किए गए सर्वाधिक गोलों का रिकॉर्ड बताया जा रहा है।

भारत ने मुकाबले में शुरू से ही दबदबा बनाए रखा। तीसरे क्वार्टर की समाप्ति तक टीम 16-0 से आगे थी। आखिरी क्वार्टर में तीन और गोल दागकर भारत ने 19-0 से मुकाबला अपने नाम कर लिया।

22-0 के रिकॉर्ड से तीन गोल पीछे रहा भारत

उज्बेकिस्तान के खिलाफ 19-0 की जीत एशियन गेम्स में भारत की बड़ी जीत में शामिल हो गई है। भारतीय महिला हॉकी टीम की सबसे बड़ी जीत 1982 के एशियन गेम्स में हांगकांग के खिलाफ आई थी, जब भारत ने 22-0 से मुकाबला जीता था। इसके बाद 2018 में कजाकिस्तान के खिलाफ भारत ने 21-0 से जीत दर्ज की थी।

एशियन गेम्स के शुरुआती मुकाबलों में शूटिंग का सिल्वर और महिला हॉकी की बड़ी जीत ने भारतीय दल के अभियान को जोरदार शुरुआत दी है। अब भारतीय खिलाड़ियों की नजरें आने वाले मुकाबलों में पदकों की संख्या बढ़ाने पर होंगी।

श्मशान घाट पर जल रहा था शव… तभी खुला ऐसा राज, मच गया हड़कंप

No comments Document Thumbnail

 गया। बिहार के गया जिले से अस्पताल प्रशासन की कथित लापरवाही का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को उनके अपने व्यक्ति की जगह किसी दूसरे का शव सौंप दिया गया। परिजन शव को लेकर श्मशान घाट पहुंच गए और अंतिम संस्कार भी शुरू कर दिया। इसी दौरान शव की पहचान को लेकर गलती सामने आई। जब तक अंतिम संस्कार रुकवाया गया, तब तक शव करीब 75 फीसदी जल चुका था।


पोस्टमार्टम के बाद सौंप दिया दूसरे का शव

मामला गुरारू थाना क्षेत्र के वर्मा गांव निवासी विगन दास से जुड़ा है। शुक्रवार को गांव के पास सड़क हादसे में विगन दास गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें इलाज के लिए मगध मेडिकल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

शनिवार को शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। परिजन सुबह से ही पोस्टमार्टम हाउस के बाहर शव मिलने का इंतजार कर रहे थे। पोस्टमार्टम के बाद अस्पताल कर्मचारियों ने उन्हें एक शव सौंप दिया। हालांकि, शव का चेहरा देखते ही परिजनों को शक हुआ और उन्होंने पहचान लिया कि यह उनके चाचा विगन दास का शव नहीं है। इसके बाद पोस्टमार्टम हाउस में हंगामा शुरू हो गया।

श्मशान घाट पहुंच चुका था असली शव

इसी बीच जानकारी मिली कि विगन दास का शव किसी दूसरे शव के साथ श्मशान घाट भेज दिया गया है। पुलिस को सूचना मिलते ही श्मशान घाट पर फोन कर अंतिम संस्कार रुकवाने के निर्देश दिए गए। लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।

अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी और शव करीब 75 फीसदी जल चुका था। इसके बाद आनन-फानन में पानी डालकर आग बुझाई गई।

गांव में अंतिम दर्शन के लिए जुटे थे लोग

मृतक के परिजन सुनील कुमार ने मगध मेडिकल थाने में लिखित शिकायत दी है। उनका आरोप है कि गांव में करीब 200 लोग अंतिम दर्शन के लिए इंतजार कर रहे थे, लेकिन अस्पताल की लापरवाही के कारण परिवार को इस परेशानी का सामना करना पड़ा।

जांच के बाद होगी कार्रवाई

मामले को लेकर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. पीके अग्रवाल ने कहा कि यह मामला कॉलेज प्रशासन से संबंधित है। वहीं, प्राचार्य डॉ. लता शुक्ला द्विवेदी ने बताया कि नियम के अनुसार शव की पहचान करने के बाद ही उसे परिजनों को सौंपा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और लापरवाही सामने आने पर संबंधित दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

परिवर्तिनी एकादशी पर करवट बदलेंगे भगवान विष्णु, जानें व्रत की सही तारीख, मुहूर्त और पूजा विधि

No comments Document Thumbnail

 Parivartini Ekadashi 2026: परिवर्तिनी एकादशी के व्रत को लेकर इस बार लोगों के मन में तारीख को लेकर सवाल है। कोई 21 सितंबर को एकादशी बता रहा है तो कहीं 22 सितंबर की तारीख दी गई है। पंचांग के अनुसार, इस बार परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 22 सितंबर 2026, मंगलवार को रखा जाएगा। एकादशी तिथि 21 सितंबर की रात शुरू होगी और 22 सितंबर की रात तक रहेगी।


इसी वजह से दोनों तारीखों को लेकर भ्रम बना हुआ है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की इस एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी, पार्श्व एकादशी और वामन एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु शयन करते हुए करवट बदलते हैं। इसी कारण इस एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है।

21 या 22 सितंबर, कब है परिवर्तिनी एकादशी?

पंचांग की गणना के अनुसार, परिवर्तिनी एकादशी की तिथि 21 सितंबर 2026 को रात करीब 8 बजे शुरू होगी। यह तिथि 22 सितंबर को रात करीब 9 बजकर 43 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर व्रत 22 सितंबर को रखा जाएगा। इसलिए भक्तों को 22 सितंबर को एकादशी का व्रत रखना चाहिए।

परिवर्तिनी एकादशी का महत्व

परिवर्तिनी एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है। इस दिन भक्त भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं। कई श्रद्धालु व्रत रखते हैं और दिनभर भगवान के नाम का जाप करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, एकादशी का व्रत मन को संयमित रखने और भगवान की भक्ति में समय लगाने का अवसर देता है। इस दिन दान-पुण्य और जरूरतमंदों की मदद करने की परंपरा भी है। परिवर्तिनी एकादशी को भगवान विष्णु के वामन अवतार से भी जोड़ा जाता है। इसलिए कुछ स्थानों पर इस दिन वामन भगवान की विशेष पूजा की जाती है।

परिवर्तिनी एकादशी पर कैसे करें पूजा?

सुबह उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करके भगवान विष्णु की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। भगवान को पीले फूल, फल, तुलसी दल और भोग अर्पित करें। पूजा के दौरान भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें। श्रद्धा के अनुसार विष्णु सहस्रनाम या विष्णु चालीसा का पाठ भी किया जा सकता है। शाम के समय दीपक जलाकर भगवान की आरती करें।
एकादशी पर क्या खाएं और क्या न खाएं?

एकादशी व्रत में आमतौर पर चावल, गेहूं और अन्य अनाज से बचने की परंपरा है। व्रत रखने वाले लोग फल, दूध, साबूदाना, कुट्टू और सिंघाड़े के आटे से बने व्यंजन अपनी परंपरा के अनुसार खा सकते हैं। व्रत के नियम अलग-अलग परिवारों और संप्रदायों में अलग हो सकते हैं। इसलिए अपनी सुविधा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर व्रत करें। जरूरत से ज्यादा तला-भुना भोजन करने से बचें और पर्याप्त पानी पिएं, यदि आपका व्रत इसकी अनुमति देता है।

कब होगा व्रत का पारण?

परिवर्तिनी एकादशी का पारण 23 सितंबर 2026, बुधवार को किया जाएगा। उपलब्ध पंचांग विवरण के अनुसार, पारण का समय सुबह करीब 6 बजकर 10 मिनट से 10 बजकर 12 मिनट के बीच बताया गया है।
परिवर्तिनी एकादशी पर कर सकते हैं ये उपाय

  • - भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित करें।
  • - जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन या आवश्यक वस्तुओं का दान करें।
  • - भगवान विष्णु के मंत्र का जाप करें।
  • - घर में साफ-सफाई रखें और शांत वातावरण में पूजा करें।
  • - अपनी क्षमता के अनुसार गरीबों और बुजुर्गों की मदद करें।

- पूजा के बाद परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें।

परिवर्तिनी एकादशी व्रत कथा का महत्व

एकादशी के दिन भगवान विष्णु की व्रत कथा सुनने की परंपरा है। भक्त कथा के जरिए भगवान के वामन अवतार और राजा बलि से जुड़े प्रसंगों का स्मरण करते हैं। कई जगहों पर परिवर्तिनी एकादशी के दिन वामन भगवान की पूजा भी की जाती है। कथा सुनने के बाद भगवान विष्णु की आरती की जाती है। इसके बाद प्रसाद बांटा जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार दान-पुण्य करते हैं।

पुरानी रंजिश में युवक पर हमला, सिर और आंख के पास लगी चोटें; दो आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज

No comments Document Thumbnail

महासमुंद- जिले के परसकोल वार्ड नंबर 12 में गणेश पंडाल की ओर जा रहे एक युवक पर कथित तौर पर हमला किए जाने का मामला सामने आया है। घटना के बाद घायल युवक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने दो लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।


गणेश पंडाल जाते समय हुआ विवाद

शिकायत के अनुसार, युवक गणेश पंडाल की ओर जा रहा था। इसी दौरान रास्ते में दो लोगों ने उसे कथित तौर पर रोक लिया और उसके साथ मारपीट की। घटना में युवक के सिर और आंख के पास चोटें आने की बात सामने आई है।

पुरानी रंजिश का बताया जा रहा मामला

प्रारंभिक शिकायत में घटना के पीछे पुरानी रंजिश की बात सामने आई है। हालांकि, हमले की वास्तविक वजह और घटनाक्रम को लेकर पुलिस की जांच जारी है। पुलिस शिकायत में लगाए गए आरोपों की भी जांच कर रही है।

पुलिस ने दर्ज किया मामला

घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने घायल युवक की शिकायत के आधार पर दोनों आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस अब घटना से जुड़े तथ्यों, गवाहों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है।

घायल युवक का उपचार

हमले में घायल युवक के सिर और आंख के आसपास चोटें बताई गई हैं। घटना के बाद उसका उपचार कराया गया। पुलिस द्वारा मामले की जांच पूरी होने के बाद घटना की परिस्थितियों को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।


© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.