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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अतिवृष्टि प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाने के दिए निर्देश

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प्रभावित परिवारों तक बिना विलंब राहत सामग्री एवं आवश्यक सहायता पहुँचाने को कहा

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बिलासपुर एवं जांजगीर-चांपा जिलों में हुई अत्यधिक वर्षा एवं जलभराव की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता नहीं बरतने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि जिला प्रशासन पूरी सतर्कता और तत्परता के साथ कार्य करते हुए प्रत्येक प्रभावित एवं जरूरतमंद व्यक्ति तक समय पर राहत और आवश्यक सहायता सुनिश्चित करे।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री, भोजन, पेयजल, चिकित्सा सहित सभी आवश्यक सुविधाएँ बिना किसी विलंब के उपलब्ध कराई जाएँ। साथ ही जलनिकासी की त्वरित व्यवस्था, क्षतिग्रस्त मार्गों की शीघ्र बहाली तथा जनसुविधाओं को जल्द सामान्य करने के लिए सभी उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और प्रभावित क्षेत्रों की निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है। आवश्यकता के अनुरूप अतिरिक्त संसाधन एवं सहायता भी तत्काल उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि राहत कार्यों में किसी प्रकार की बाधा न आए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेशवासियों की सुरक्षा तथा प्रत्येक प्रभावित परिवार तक समय पर राहत पहुँचाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। राज्य सरकार पूरी संवेदनशीलता, तत्परता और प्रतिबद्धता के साथ प्रभावित नागरिकों के साथ खड़ी है तथा जनजीवन को शीघ्र सामान्य बनाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।

राष्ट्रीय मंच पर चमकी धमतरी की अभिनव पहल, सीएससी स्थापना दिवस पर PACS ड्रोन मॉडल को मिली विशेष पहचान

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कोलकाता में आयोजित 17वें सीएससी स्थापना दिवस समारोह में धमतरी के कृषि नवाचार की सराहना, ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल कृषि सेवाओं के विस्तार का बना मॉडल

रायपुर- कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड के 17वें स्थापना दिवस के अवसर पर पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित धोनो धान्यो ऑडिटोरियम में आयोजित राष्ट्रीय समारोह में छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले की अभिनव पहल PACS ड्रोन मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान मिली। कार्यक्रम में जिले द्वारा प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS) के माध्यम से संचालित ड्रोन सेवाओं, डिजिटल क्रॉप सर्वे तथा किसान पंजीयन (फार्मर रजिस्ट्री) जैसे नवाचारों की सराहना की गई। समारोह के मुख्य अतिथि पश्चिम बंगाल शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष थे।


 कार्यक्रम के दौरान मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत धमतरी जयंत नाहटा ने PACS के माध्यम से कृषि उन्नयन“ विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में भाग लेते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में ड्रोन सेवाओं के विस्तार तथा PACS को ’वन स्टॉप रूरल सर्विस सेंटर’ के रूप में विकसित करने की कार्ययोजना प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि वर्तमान में जिले की 10 प्राथमिक कृषि साख समितियों के माध्यम से ड्रोन द्वारा तरल उर्वरकों का छिड़काव किया जा रहा है, जो छत्तीसगढ़ में धमतरी जिले की एक अभिनव पहल है।

उन्होंने कहा कि भविष्य में PACS के माध्यम से किसानों को कृषि यंत्रीकरण, डिजिटल सेवाएं, फसल सर्वेक्षण, किसान पंजीयन, वित्तीय एवं बैंकिंग सेवाओं सहित विभिन्न सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने की योजना है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक कृषि सेवाओं की पहुंच बढ़ेगी तथा किसानों को तकनीक आधारित सुविधाओं का लाभ सहजता से प्राप्त होगा।

कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के उपयोग को किसानों की आय बढ़ाने, कृषि लागत कम करने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सीएससी-व्हीएलई को सम्मानित भी किया गया।

कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल शासन के सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के अपर मुख्य सचिव, भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय के सचिव तथा सीएससी ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी अखिल कुमार सहित देशभर के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी एवं सीएससी प्रतिनिधि उपस्थित थे।

आत्मनिर्भर भारत की ऐतिहासिक उड़ान: भारत के पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट ‘विक्रम-1’ का सफल प्रक्षेपण

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भारत के पहले निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल ‘विक्रम-1’ के सफल प्रक्षेपण ने वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की मजबूत उपस्थिति दर्ज करा दी है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग और अंतरिक्ष विभाग में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलने के दूरदर्शी निर्णय का प्रत्यक्ष परिणाम है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से मिशन ‘आगमन’ के सफल प्रक्षेपण का प्रत्यक्ष साक्षी बनते हुए स्काईरूट एयरोस्पेस की टीम को बधाई दी। इस मिशन के तहत विक्रम-1 ने सफलतापूर्वक अपने निर्धारित लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में प्रवेश किया। इसके साथ ही स्काईरूट एयरोस्पेस भारत की पहली निजी कंपनी बन गई जिसने भारतीय धरती से ऑर्बिटल लॉन्च करने का इतिहास रच दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी स्काईरूट एयरोस्पेस की पूरी टीम को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि यह भारत के तेजी से विकसित हो रहे अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र, वैज्ञानिक क्षमता, नवाचार और उद्यमशीलता का प्रतीक है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्काईरूट एयरोस्पेस के संस्थापक पवन कुमार चंदाना और भरत डाका को विशेष रूप से बधाई देते हुए कहा कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए नहीं खोला होता तो यह उपलब्धि संभव नहीं हो पाती। उन्होंने कहा कि इन सुधारों ने भारतीय स्टार्टअप्स को राष्ट्रीय अंतरिक्ष अवसंरचना तक पहुंच प्रदान की और विश्वस्तरीय अंतरिक्ष तकनीक विकसित करने का अवसर दिया।

उन्होंने ISRO, IN-SPACe और अंतरिक्ष विभाग की भी सराहना करते हुए कहा कि इनके सहयोग से तैयार सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल ने भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र को नई दिशा दी है। विक्रम-1 की सफलता इस बात का प्रमाण है कि दूरदर्शी नीतियां, वैज्ञानिक उत्कृष्टता और युवा उद्यमियों की प्रतिभा मिलकर वैश्विक स्तर की तकनीकी उपलब्धियां हासिल कर सकती हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विक्रम-1 ने अपने पहले ही मिशन में उच्च तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन किया। दुनिया के अधिकांश पहले प्रक्षेपण केवल डमी पेलोड लेकर उड़ान भरते हैं, जबकि विक्रम-1 अपने साथ कई प्रयोगात्मक पेलोड, तकनीकी प्रदर्शन और भारतीय एवं अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के पेलोड भी लेकर गया। इससे भारत की व्यावसायिक लॉन्च सेवाओं पर वैश्विक विश्वास और मजबूत हुआ है।

उन्होंने बताया कि 2020 के सुधारों के बाद भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र तेजी से विकसित हुआ है। कुछ वर्षों पहले जहां निजी लॉन्च इकोसिस्टम लगभग नहीं था, वहीं आज देश में 400 से अधिक स्पेस स्टार्टअप, पहला स्पेस यूनिकॉर्न और लगभग 9 अरब डॉलर की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था मौजूद है। सरकार का लक्ष्य अगले दशक में इसे बढ़ाकर 44 अरब डॉलर तक पहुंचाना है।

पूरी तरह भारत में विकसित विक्रम-1 लगभग 22 मीटर ऊंचा है और 350 किलोग्राम तक का पेलोड लो अर्थ ऑर्बिट में स्थापित करने में सक्षम है। इसमें कई स्वदेशी तकनीकी उपलब्धियां शामिल हैं, जैसे—

  • भारत का पहला ऑल-कार्बन कंपोजिट ऑर्बिटल रॉकेट,

  • 100 प्रतिशत 3D-प्रिंटेड लिक्विड इंजन,

  • उन्नत अल्ट्रा-लो-शॉक न्यूमैटिक सेपरेशन सिस्टम,

  • और देश के सबसे लंबे मोनोलिथिक कार्बन-कंपोजिट रॉकेट स्टेज में से एक।

इस मिशन ने प्रणोदन (Propulsion), एवियोनिक्स, टेलीमेट्री, नेविगेशन और फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों का सफल परीक्षण किया, जिससे भारत के भविष्य के व्यावसायिक ऑर्बिटल लॉन्च मिशनों की मजबूत नींव तैयार हुई।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विक्रम-1 का सफल प्रक्षेपण केवल एक मिशन की सफलता नहीं, बल्कि भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र के नए युग की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि मजबूत नीति सुधारों, सार्वजनिक-निजी साझेदारी और भारतीय नवाचार के बल पर भारत वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा, "भारत के लिए अब आसमान भी सीमा नहीं रहा।"

आत्मनिर्भर भारत की ऐतिहासिक उड़ान : विक्रम-1 की सफलता पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दी बधाई

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भारत की बढ़ती वैज्ञानिक क्षमता और नवाचार का सशक्त प्रतीक है विक्रम-1 : मुख्यमंत्री साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा विकसित भारत के पहले निजी कक्षीय प्रक्षेपण यान विक्रम-1 के सफल प्रक्षेपण पर प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने इसे देश के अंतरिक्ष इतिहास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में अंतरिक्ष क्षेत्र में किए गए व्यापक सुधारों और निजी क्षेत्र को प्रोत्साहन की नीतियों के फलस्वरूप आज भारत वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में नई पहचान बना रहा है। विक्रम-1 का सफल प्रक्षेपण इसी परिवर्तनकारी सोच का परिणाम है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्काईरूट एयरोस्पेस की पूरी टीम को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह उपलब्धि भारत को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।

निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें अब तक नहीं पहुंचीं, बुनियादी शिक्षा पर पहले ध्यान दे स्कूल शिक्षा विभाग: शिक्षक गेंदलाल कोकड़िया

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महासमुंद- नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के एक माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद कई सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। इसी बीच स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संचालित "लक्ष्य" कार्यक्रम के तहत प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को नवोदय एवं प्रयास विद्यालय प्रवेश परीक्षा की तैयारी कराने के निर्देश दिए गए हैं। इस पर शिक्षा के मानवीयकरण के लिए कार्यरत चेतना विकास मूल्य शिक्षा संचालित अभिभावक विद्यालय, कोकड़ी (महासमुंद) से जुड़े शिक्षक गेंदलाल कोकड़िया ने कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं।

कोकड़िया का कहना है कि वर्तमान में अधिकांश सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों की बुनियादी शैक्षणिक स्थिति अभी भी चिंता का विषय है। उनके अनुसार कक्षा तीसरी और पांचवीं के औसतन 25 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थी अभी भी धाराप्रवाह पढ़ने, लिखने तथा गुणा-भाग जैसे मूलभूत गणितीय कौशल में कमजोर हैं। इसके अलावा अंग्रेजी पढ़ने, लिखने और बोलने की क्षमता भी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाई है।

उन्होंने कहा कि एफएलएन (Foundational Literacy and Numeracy) तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के मूल लक्ष्य अभी पूरी तरह हासिल नहीं हुए हैं। दूसरी ओर शिक्षकों को नियमित शिक्षण कार्य के साथ कई प्रशासनिक जिम्मेदारियां, सरकारी पत्राचार, विभिन्न सर्वे, प्रशिक्षण और अन्य योजनाओं के कार्य भी करने पड़ते हैं, जिससे उन पर अतिरिक्त कार्यभार बढ़ रहा है।

कोकड़िया ने यह भी कहा कि जब तक सभी विद्यार्थियों को समय पर पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं हो जातीं और बुनियादी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार नहीं होता, तब तक नवोदय एवं प्रयास विद्यालयों में अधिक से अधिक चयन का लक्ष्य व्यवहारिक रूप से कठिन दिखाई देता है। उनके अनुसार केवल लक्ष्य निर्धारित करने से पहले यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि उस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए आवश्यक संसाधन और आधारभूत व्यवस्थाएं मौजूद हों।

उन्होंने सुझाव दिया कि यदि सरकार वास्तव में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना चाहती है तो नवोदय एवं प्रयास विद्यालय जैसी सुविधाएं सभी सरकारी विद्यालयों में विकसित की जानी चाहिए, ताकि बच्चों को बेहतर शिक्षा के लिए अपने गांव और परिवार से दूर न जाना पड़े।

कोकड़िया का मानना है कि प्रारंभिक वर्षों में बच्चों का सर्वांगीण विकास परिवार और स्थानीय सामाजिक वातावरण में अधिक प्रभावी ढंग से होता है। उनका कहना है कि बेहतर शिक्षा की व्यवस्था गांव स्तर पर ही उपलब्ध कराई जाए, जिससे बच्चों को घर-परिवार छोड़कर बाहर जाने की आवश्यकता न पड़े।

उन्होंने स्कूल शिक्षा विभाग से मांग की कि विभाग का पहला लक्ष्य प्रत्येक बच्चे को बुनियादी साक्षरता, गणितीय दक्षता और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मानकों के अनुरूप सक्षम बनाना होना चाहिए। उनका कहना है कि जब तक हर बच्चा पढ़ने-लिखने और गणना जैसी मूलभूत क्षमताओं में दक्ष नहीं हो जाता, तब तक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के बड़े लक्ष्य अधूरे रहेंगे।

कोकड़िया ने कहा कि स्वतंत्रता के लगभग 80 वर्ष बाद भी यदि सभी बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण और मानवीय शिक्षा समान रूप से नहीं पहुंच पा रही है, तो यह शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर आत्ममंथन का विषय है। उन्होंने आग्रह किया कि स्कूल शिक्षा विभाग पहले प्रत्येक सरकारी विद्यालय को आवश्यक संसाधन, पर्याप्त शिक्षण सामग्री और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराए, ताकि हर बच्चा समान अवसर के साथ आगे बढ़ सके।

रामनगर–देहरादून एक्सप्रेस को मिली हरी झंडी, कुमाऊँ और गढ़वाल के बीच पहली सीधी एक्सप्रेस ट्रेन शुरू

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नई दिल्ली- केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज वर्चुअल माध्यम से रामनगर–देहरादून एक्सप्रेस की पहली सेवा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहे। यह पहली बार है जब रामनगर और देहरादून के बीच सीधी एक्सप्रेस ट्रेन सेवा शुरू हुई है, जिससे क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी हुई है और कुमाऊँ तथा गढ़वाल के बीच रेल संपर्क और मजबूत होगा।

ट्रेन का संचालन और समय

  • यह एक्सप्रेस हर बुधवार और शुक्रवार संचालित होगी।

  • ट्रेन संख्या 15310 रामनगर से सुबह 05:50 बजे रवाना होकर 12:40 बजे देहरादून पहुंचेगी।

  • वापसी में ट्रेन संख्या 15309 देहरादून से 15:55 बजे प्रस्थान कर 23:30 बजे रामनगर पहुंचेगी।

  • मार्ग में ट्रेन काशीपुर, रोशनपुर, पिपलसाना, मुरादाबाद, नजीबाबाद और हरिद्वार स्टेशनों पर रुकेगी।

सभी वर्गों के यात्रियों के लिए सुविधाएं

ट्रेन में एसी द्वितीय श्रेणी, एसी तृतीय श्रेणी, एसी चेयर कार, स्लीपर क्लास, द्वितीय बैठक (सेकंड सिटिंग) तथा सामान्य द्वितीय श्रेणी के डिब्बे उपलब्ध होंगे, जिससे विभिन्न श्रेणी के यात्रियों को आरामदायक यात्रा का विकल्प मिलेगा।

यात्रियों को होगा बड़ा लाभ

इस नई सेवा से उत्तराखंड के नैनीताल, ऊधम सिंह नगर, हरिद्वार और देहरादून जिलों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद और बिजनौर जिलों के लोगों को लाभ मिलेगा। छात्र, किसान, व्यापारी और आम नागरिक एक ही दिन में देहरादून या हरिद्वार जाकर अपने सरकारी, शैक्षणिक, व्यावसायिक या व्यक्तिगत कार्य पूरे कर वापस लौट सकेंगे।

पर्यटन और तीर्थाटन को मिलेगा बढ़ावा

नई ट्रेन सेवा से जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान, गिरिजा देवी मंदिर, सीतामढ़ी/सीतावनी जैसे प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान होगी। साथ ही हरिद्वार और देहरादून के माध्यम से चारधाम यात्रा (बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री) के लिए भी बेहतर रेल संपर्क उपलब्ध होगा।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने क्या कहा

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह ट्रेन उत्तराखंड के कुमाऊँ और गढ़वाल क्षेत्रों के बीच रेल संपर्क को नई मजबूती देगी। उन्होंने बताया कि:

  • ऋषिकेश रेलवे स्टेशन को हरिद्वार पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए फीडर स्टेशन के रूप में विकसित किया जाएगा।

  • इसके लिए एक मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है, जिससे अतिरिक्त क्षमता विकसित होगी और हरिद्वार–ऋषिकेश के बीच यात्रियों की सुविधा बढ़ेगी।

उन्होंने यह भी बताया कि उत्तराखंड में रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास का कार्य तेजी से चल रहा है। राज्य के 11 रेलवे स्टेशनों—देहरादून, हरिद्वार जंक्शन, हर्रावाला, काशीपुर जंक्शन, किच्छा, कोटद्वार, रुड़की, काठगोदाम, लालकुआं जंक्शन, रामनगर और टनकपुर—का आधुनिकीकरण किया जा रहा है।

रेल मंत्री ने कहा कि हरिद्वार और देहरादून स्टेशनों के पुनर्विकास में गरीब और मध्यम वर्ग के यात्रियों की सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि भीड़भाड़ न बढ़े। उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में शुरू हुई टनकपुर–नांदेड़ एक्सप्रेस को अच्छा प्रतिसाद मिला है और क्षेत्र में चल रही वंदे भारत सेवाएं भी सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं।


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का वक्तव्य

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि रामनगर–देहरादून एक्सप्रेस की शुरुआत उत्तराखंड में रेल संपर्क को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने राज्यवासियों को इस नई सेवा के लिए बधाई देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में उत्तराखंड में कई नई ट्रेन सेवाएं शुरू होने से रेल संपर्क में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल परियोजना का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है, जो राज्य के सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक और पर्यटन विकास के लिए जीवनरेखा साबित होगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड को ₹4,769 करोड़ का रिकॉर्ड रेल बजट मिला है, जबकि राज्य में ₹40,000 करोड़ से अधिक की रेलवे परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है। उन्होंने आगामी कुंभ मेले को ध्यान में रखते हुए हरिद्वार में नई रेल अवसंरचना और ट्रेन सेवाओं की योजनाओं का भी उल्लेख किया।

इस अवसर पर हरिद्वार से सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत, गढ़वाल से सांसद अनिल बलूनी तथा रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

आसमान से बरसी मौत: बारिश से बचने पेड़ के नीचे छिपे थे मासूम, बिजली गिरने से दो की मौत, दो गंभीर

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 अंबिकापुर/सरगुजा। सरगुजा जिले के लुंड्रा थाना क्षेत्र से एक बेहद दर्दनाक और रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है। शुक्रवार शाम ग्राम नागम बांसपारा में आकाशीय बिजली गिरने से एक बड़ा हादसा हो गया। तेज बारिश से बचने के लिए सड़क किनारे एक पेड़ के नीचे खड़े चार मासूम बच्चे वज्रपात की चपेट में आ गए। इस आसमानी कहर ने दो बच्चों की मौके पर ही जान ले ली, जबकि दो सगे भाई गंभीर रूप से झुलस गए। घटना के बाद से पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है।


खेलते-खेलते अचानक आई आफत, पेड़ बना काल

प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के अनुसार, शुक्रवार शाम ग्राम नागम निवासी संदीप नगेसिया (11 वर्ष), रोशन पनिका (12 वर्ष), प्रभु राम नगेसिया (12 वर्ष) और दिनेश नगेसिया (11 वर्ष) गांव में ही खेल रहे थे। इसी बीच अचानक मौसम बदला और तेज आंधी के साथ मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। झमाझम बारिश से बचने के लिए चारों बच्चे ग्राम पंचायत नागम के पास सड़क किनारे लगे एक पेड़ की छांव में जाकर खड़े हो गए। उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि जिस पेड़ को वो अपनी ढाल बना रहे हैं, वही काल बन जाएगा। कुछ ही पलों में तेज गर्जना के साथ आसमानी बिजली सीधे उसी पेड़ पर आ गिरी।

चीख-पुकार के बीच दो ने मौके पर तोड़ा दम, अस्पताल रेफर

वज्रपात इतना भयानक था कि बिजली की चपेट में आते ही संदीप नगेसिया और रोशन पनिका ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। वहीं, प्रभु राम और दिनेश नगेसिया गंभीर रूप से झुलस कर अचेत हो गए। धमाके की आवाज सुनकर ग्रामीण तुरंत मौके की ओर दौड़े और लहूलुहान बच्चों को लेकर धौरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। यहाँ डॉक्टरों ने संदीप और रोशन को मृत घोषित कर दिया। वहीं गंभीर रूप से झुलसे दोनों सगे भाइयों को प्राथमिक उपचार के बाद अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया है, जहाँ उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।

हादसे के वक्त पास में था मोबाइल? जांच में जुटी पुलिस

चर्चाओं का बाजार गर्म: इस दर्दनाक हादसे के बाद ग्रामीणों के बीच यह चर्चा भी जोरों पर है कि घटना के वक्त बच्चों के पास एक चालू मोबाइल फोन भी था। हालांकि, प्रशासन या मौसम वैज्ञानिकों द्वारा इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है कि बिजली गिरने की मुख्य वजह मोबाइल सिग्नल था या पेड़ की ऊंचाई। पुलिस ने मर्ग कायम कर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले के हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है।

सावधान! अलर्ट पर रखें ध्यान, पेड़ कतई सुरक्षित नहीं

मौसम विभाग ने आगामी दिनों के लिए प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश और आकाशीय बिजली (Lightening Alert) की चेतावनी जारी की है।

पुरानी रंजिश में दंपती की टांगी मारकर निर्मम हत्या, साक्ष्य मिटाने के लिए शवों को फूंका; दो सगे भाई गिरफ्तार

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 धरमजयगढ़ (रायगढ़)। धरमजयगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम क्रोंधा में वर्षो पुराने भूमि विवाद को लेकर दो सगे भाइयों ने एक वृद्ध दंपती की टांगी (कुल्हाड़ी) से काटकर बेरहमी से हत्या कर दी। आरोपियों ने दोहरे हत्याकांड को हादसे का रूप देने के उद्देश्य से शवों को घर के भीतर ही आग के हवाले कर दिया। पुलिस ने डॉग स्क्वॉड 'रूबी' और फॉरेंसिक टीम (FSL) की मदद से अंधे कत्ल की गुत्थी को महज कुछ ही घंटों में सुलझाते हुए दोनों सगे भाइयों को गिरफ्तार कर लिया है।


सुबह काम पर पहुंचे नौकर ने देखा मंजर

पुलिस के अनुसार, ग्राम क्रोंधा निवासी मंगल राठिया (65 वर्ष) और उनकी पत्नी पुनाई बाई राठिया (55 वर्ष) अपने घर में अकेले थे। उनका नौकर रामलाल चौहान जब सुबह करीब 6 बजे काम पर पहुंचा, तो घर के दरवाजे खुले हुए थे और एक कमरे से धुआं निकल रहा था। अंदर जाने पर उसने दंपती के जले हुए शव जमीन पर पड़े देखे। नौकर की सूचना पर परिजनों और तत्काल पुलिस को अवगत कराया गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीओपी सिद्धांत तिवारी, धरमजयगढ़ थाना प्रभारी राजेश जांगड़े और घरघोड़ा थाना प्रभारी कुमार गौरव पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1), 238(बी) और 326(जी) के तहत मामला दर्ज कर तफ्तीश शुरू की।

स्निफर डॉग 'रूबी' ने खोला राज

घटनास्थल की कमान संभालते ही पुलिस के खोजी कुत्ते 'रूबी' ने हत्या में इस्तेमाल की गई टांगी की गंध ली और सीधे संदेही श्याम लाल राठिया के पास जाकर रुक गई। पुलिस ने ह्यूमन इंटेलिजेंस और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर संदेही श्याम लाल और उसके भाई जीवन लाल राठिया को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की, जिसके बाद दोनों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

क्या था विवाद?

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वर्ष 2013 में उन्होंने एक जमीन खरीदी थी, जिसे बाद में मूल मालिक ने अधिक पैसे मिलने के लालच में मृतक मंगल राठिया को बेच दिया था। हालांकि आरोपियों को उनकी रकम वापस मिल गई थी, लेकिन मंगल राठिया द्वारा उसी भूमि पर मकान बनाकर खेती करने से दोनों भाई लंबे समय से रंजिश पाले हुए थे।

सोते समय बोला धावा

इसी विवाद के चलते 14 जुलाई की रात दोनों भाई टांगी लेकर मंगल के घर में घुसे। दरवाजा खुलते ही उन्होंने वृद्ध मंगल राठिया पर ताबड़तोड़ वार कर उसे मौत के घाट उतार दिया। चीख-पुकार सुनकर बीच-बचाव करने आई पत्नी पुनाई बाई को भी आरोपियों ने टांगी से काट डाला। साक्ष्य मिटाने के लिए उन्होंने शवों पर कपड़े और सोफा कवर डालकर आग लगा दी और मौके से फरार हो गए।

गिरफ्तार आरोपी:

  • श्याम लाल राठिया (32 वर्ष)
  • जीवन लाल राठिया (48 वर्ष)

(दोनों निवासी: ग्राम कोंध्रा, धरमजयगढ़)

एसएसपी शशि मोहन सिंह के निर्देशन और एएसपी अनिल सोनी के मार्गदर्शन में इस अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझाने में धरमजयगढ़ व घरघोड़ा पुलिस टीम सहित एफएसएल और श्वान दल की मुख्य भूमिका रही। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त हथियार और खून से सने कपड़े बरामद कर लिए हैं।

छत्तीसगढ़ में रूह कंपा देने वाली वारदात: महिला की हत्या के बाद शव से दुष्कर्म, आरी से टुकड़े कर नदी में बहाया, आरोपी गिरफ्तार

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 बेमेतरा। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के चंदनू थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ एक 42 वर्षीय व्यक्ति ने 50 वर्षीय महिला की बेरहमी से हत्या कर दी और पहचान छिपाने के लिए शव के टुकड़े-टुकड़े कर शिवनाथ नदी में फेंक दिए। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी रामप्रसाद सोनवानी को गिरफ्तार कर लिया है, जिसने पूछताछ में अपना जुर्म कबूल कर लिया है।


7 जुलाई से लापता थी महिला

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, मृतका 7 जुलाई से अपने घर से रहस्यमय परिस्थितियों में लापता थी। परिजनों द्वारा काफी खोजबीन करने के बाद भी जब उसका कुछ पता नहीं चला, तो चंदनू थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।

नदी किनारे दो गठरियों में मिले शव के टुकड़े

मामले में मोड़ तब आया जब 9 जुलाई को महिला के बेटे को अमरैया नाला और शिवनाथ नदी के संगम के पास पानी में तैरती हुई साड़ी से बंधी दो संदिग्ध गठरियां दिखाई दीं। पुलिस की मौजूदगी में जब इन्हें खोला गया, तो एक गठरी में महिला का धड़ और दूसरी गठरी में कटे हुए हाथ-पैर बरामद हुए। शव काफी हद तक सड़ चुका था।

विरोध करने पर फावड़े से किया वार

थाना प्रभारी के मुताबिक, जांच के दौरान पुलिस को मृतका और गांव के ही रामप्रसाद सोनवानी के संबंध में अहम सुराग मिले। हिरासत में लेकर की गई कड़ाई से पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह 6 जुलाई की रात करीब 10 बजे महिला के घर गया था। उस समय महिला घर में अकेली थी। आरोपी ने महिला के साथ जबरदस्ती करने का प्रयास किया, जिसका विरोध करने पर उसने पास ही रखे फावड़े के बेंट (हैंडल) से महिला के सिर पर ताबड़तोड़ वार कर दिए, जिससे महिला की मौके पर ही मौत हो गई।

शव के साथ बर्बरता और लूट

आरोपी ने कबूला कि हत्या के बाद उसने मृतका के शव के साथ दुष्कर्म (शवकामुकता) जैसी घिनौनी हरकत की। इसके बाद साक्ष्य छिपाने के उद्देश्य से उसने घर में रखी आरी से शव के दोनों हाथ और पैर काट दिए। उसने शव के हिस्सों को अलग-अलग गठरियों में बांधकर अपनी झोपड़ी में छिपा दिया और अगली रात का फायदा उठाकर उन्हें शिवनाथ नदी में फेंक दिया।

इतना ही नहीं, आरोपी जाते-जाते मृतका के घर से ₹2,500 की नकदी भी लूट ले गया था। पुलिस ने आरोपी के पास से बचे हुए ₹500 और घटना में प्रयुक्त हथियार बरामद कर लिए हैं। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या, साक्ष्य छिपाने, लूट और अन्य गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उसे जेल भेज दिया है।

Raipur Sensation: राजधानी में दहला देने वाली वारदात, एक ही घर में बिछीं 5 लाशें; सुसाइड या मर्डर? उलझी पुलिस

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 रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से इस वक्त एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी खबर सामने आ रही है। टिकरापारा थाना क्षेत्र के संजय नगर (मदनी चौक) स्थित एक मकान में एक ही परिवार के 5 सदस्यों की संदिग्ध परिस्थितियों में लाश मिलने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।


हत्या या सामूहिक खुदकुशी? जांच में जुटी पुलिस

प्रारंभिक जांच और आस-पास के लोगों से मिली जानकारी के मुताबिक, आशंका जताई जा रही है कि परिवार के मुखिया ने पहले अपनी पत्नी और बच्चों को जहर देकर मौत की नींद सुलाया और उसके बाद खुद फांसी लगाकर जान दे दी। हालांकि, पुलिस मामले की जांच हत्या और सामूहिक आत्महत्या दोनों ही एंगल से कर रही है। मौत के असली कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा।


कमरे का नजारा देख दहल गए लोग

पुलिस के अनुसार, मृतकों में परिवार के मुखिया साजिद अली (50 वर्ष) का शव फांसी के फंदे से लटका हुआ पाया गया। वहीं एक अन्य कमरे में उनकी पत्नी राबिया, 19 साल का बेटा और दो नाबालिग बेटियों के शव बिस्तर पर पड़े मिले।

मृतकों के नाम:

  • साजिद अली (50 वर्ष) - मुखिया
  • राबिया - पत्नी
  • इरशाद अली (19 वर्ष) - पुत्र
  • शाहिदा बेगम (17 वर्ष) - पुत्री
  • इरशाबा परवीन (16 वर्ष) - पुत्री

शाम से बंद था दरवाजा

मकान मालिक और पड़ोसियों ने बताया कि यह परिवार मूल रूप से शीतला मंदिर के पास, मतपुर का निवासी था और पिछले 8 महीनों से यहां सैयद जहीर के मकान में किराए पर रह रहा था। शुक्रवार शाम से ही घर का दरवाजा अंदर से बंद था और कोई हलचल नहीं हो रही थी। जब शनिवार को भी दरवाजा नहीं खुला, तो पड़ोसियों को शक हुआ। खिड़की से झांककर देखने पर भीतर लाशें दिखाई दीं, जिसके बाद तुरंत टिकरापारा थाना पुलिस को सूचना दी गई।

फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल को किया सील

टिकरापारा थाना प्रभारी राजेश मराई ने बताया कि घटना वाली जगह को पूरी तरह से सील कर दिया गया है। साक्ष्य जुटाने के लिए फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स (FSL) की टीम को मौके पर बुलाया गया है, जो फिंगरप्रिंट और संदिग्ध सामग्रियों के सैंपल ले रही है। सभी शवों को पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया गया है और पुलिस परिजनों व आस-पास के लोगों से पूछताछ कर रही है।

छत्तीसगढ़ में सुशासन, विकास और विश्वास की नई इबारत लिख रही है सरकार : CM साय

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 रायपुर :  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ विधानसभा में विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि यह प्रस्ताव सरकार के विरुद्ध नहीं, बल्कि प्रदेश की तीन करोड़ जनता के विश्वास और जनादेश के विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव, लोकसभा चुनाव तथा नगरीय निकाय चुनावों में जनता ने विकास, सुशासन और प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की गारंटी पर अपना अटूट विश्वास व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में राज्य सरकार ने जनता से किए गए अधिकांश वादों और मोदी की गारंटी को धरातल पर उतारने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि सरकार की उपलब्धियां स्वयं उसकी कार्यशैली और जनविश्वास का प्रमाण हैं।


मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों, महिलाओं, गरीबों, युवाओं, आदिवासियों तथा समाज के प्रत्येक वर्ग के कल्याण को सरकार ने सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। किसानों को 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी, दो वर्षों के बकाया बोनस का भुगतान, महतारी वंदन योजना के माध्यम से लगभग 70 लाख महिलाओं को 18,800 करोड़ रुपये से अधिक की सम्मान राशि तथा गरीब परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण को नई दिशा दी है। महतारी वंदन योजना के साथ-साथ 10 लाख 40 हजार से अधिक महिलाओं को 'लखपति दीदी' बनाया गया है। महिलाओं के संपत्ति अधिकारों को मजबूत करने के लिए रजिस्ट्री शुल्क में 50 प्रतिशत तथा स्टांप शुल्क में एक प्रतिशत की छूट दी गई है। उन्होंने कहा कि स्व-सहायता समूहों को पुनः रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए हैं और महिलाओं का आशीर्वाद ही सरकार की सबसे बड़ी शक्ति है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की समृद्धि के लिए रिकॉर्ड धान खरीदी, कृषक उन्नति योजना, शून्य प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण, फसल विविधीकरण, उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता तथा सिंचाई क्षमता के विस्तार जैसे अनेक निर्णय लिए गए हैं। उन्होंने बताया कि जल संसाधन परियोजनाओं के लिए रिकॉर्ड प्रशासनिक स्वीकृतियां दी गई हैं तथा सिंचाई क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आदिवासी समाज के विकास के लिए सरकार ने अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं। तेंदूपत्ता संग्राहकों का पारिश्रमिक बढ़ाया गया, चरणपादुका योजना पुनः प्रारंभ की गई तथा वनाधिकार पत्रधारकों को राहत देने वाले निर्णय लिए गए। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान तथा प्रधानमंत्री जनमन योजना के माध्यम से हजारों जनजातीय गांवों और विशेष रूप से कमजोर जनजातीय परिवारों तक सड़क, बिजली, पेयजल, आवास और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। जनजातीय युवाओं के लिए दिल्ली स्थित ट्राइबल यूथ हॉस्टल का विस्तार, खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की मेजबानी तथा जनजातीय संग्रहालय और शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक जैसी पहलें भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने कानून व्यवस्था को मजबूत करने और नक्सलवाद के उन्मूलन की दिशा में ऐतिहासिक सफलता प्राप्त की है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में सुरक्षा, विकास और जनविश्वास की रणनीति के माध्यम से प्रदेश में शांति का नया वातावरण बना है। रायपुर में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू की गई है तथा साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए नए साइबर थानों की स्थापना की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को रोजगार, शिक्षा और कौशल विकास के अधिक अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि नई औद्योगिक नीति के कारण राज्य में निवेश का वातावरण मजबूत हुआ है। देश और विदेश में आयोजित निवेश सम्मेलनों के माध्यम से 8 लाख 23 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनसे लाखों रोजगार सृजित होंगे। वस्त्र उद्योग, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एआई-सेज, डेटा सेंटर पार्क तथा इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के क्षेत्र में राज्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में सरकार ने उत्पादन, पारेषण, वितरण और नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत 76 हजार से अधिक घरों में सौर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं तथा मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना के माध्यम से 12 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को राहत दी गई है। किसानों के सिंचाई पंपों का बड़े पैमाने पर ऊर्जीकरण किया गया है तथा राज्य ने प्लांट लोड फैक्टर के मामले में देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। नई ताप विद्युत परियोजनाओं, पम्प स्टोरेज तथा सौर ऊर्जा परियोजनाओं पर भी तेजी से कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि खनिज संसाधनों के पारदर्शी उपयोग और जिला खनिज संस्थान निधि के प्रभावी संचालन से प्रदेश के विकास को नई गति मिली है। रिकॉर्ड खनिज राजस्व अर्जित करने के साथ खनिज ऑनलाइन 2.0 और डीएमएफ पोर्टल 2.0 लागू किए गए हैं। 82 हजार से अधिक विकास कार्य पूरे किए जा चुके हैं तथा खनिज ब्लॉकों की नीलामी, लीथियम जैसे रणनीतिक खनिजों के विकास और नई रेत नीति के माध्यम से पारदर्शी एवं जवाबदेह व्यवस्था स्थापित की गई है। अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई और पर्यावरण संरक्षण के लिए बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण भी किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल अधोसंरचना, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। दूरस्थ क्षेत्रों में 829 मोबाइल टावर स्थापित किए गए हैं तथा भारतनेट फेज-3.0 के माध्यम से हजारों ग्राम पंचायतों को हाई-स्पीड इंटरनेट से जोड़ा जा रहा है। शिक्षा में युक्तियुक्तकरण के माध्यम से शिक्षकविहीन विद्यालयों की समस्या समाप्त की गई है, जबकि आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत राज्य के अधिकांश परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराई गई है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रशासनिक सुधार और ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में राज्य ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। सेवा सेतु के माध्यम से 36 विभागों की 528 सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई गई हैं। ई-डिस्ट्रिक्ट, ऑटो म्यूटेशन, मॉडल स्मार्ट रजिस्ट्री कार्यालय, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076' के माध्यम से आम नागरिकों तक शासकीय सेवाओं की समयबद्ध और पारदर्शी पहुंच सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि 435 प्रशासनिक सुधार लागू कर छत्तीसगढ़ को सुशासन का मॉडल बनाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण, इको-टूरिज्म, वन संवर्धन और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को समान महत्व दे रही है। 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के अंतर्गत सात करोड़ से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि श्री रामलला दर्शन योजना के माध्यम से हजारों श्रद्धालु अयोध्या धाम की यात्रा कर चुके हैं तथा राज्य की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को नई पहचान मिल रही है।

अपने संबोधन के समापन में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने विश्वास व्यक्त किया कि जनता का अटूट विश्वास सरकार के साथ है और विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को पूरा करने के लिए सरकार पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करती रहेगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में दुर्गम बैगा अंचल तक पहुँची विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा

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छिरहिट्टी में विशेष स्वास्थ्य शिविर से 164 ग्रामीणों को मिला निःशुल्क उपचार, विशेषज्ञ चिकित्सकों ने गांव पहुंचकर दी स्वास्थ्य सेवाएं

स्वास्थ्य विभाग की संवेदनशील पहल से बैगा आदिवासी परिवारों को घर के नजदीक मिला गुणवत्तापूर्ण उपचार

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की प्रतिबद्धता लगातार धरातल पर दिखाई दे रही है। इसी क्रम में स्वास्थ्य विभाग छत्तीसगढ़ द्वारा विशेष पिछड़ी जनजातीय बैगा समुदाय तक स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विकासखंड गौरेला के दुर्गम बैगा आदिवासी बाहुल्य ग्राम छिरहिट्टी (साल्हेघोरी) में विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया गया। शिविर में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने गांव पहुंचकर ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया तथा निःशुल्क उपचार, परामर्श एवं दवाइयां उपलब्ध कराईं। इससे दूरस्थ क्षेत्र के लोगों को अपने गांव में ही विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिला।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रामेश्वर शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित इस शिविर में कुल 164 ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण एवं उपचार किया गया। मौसमी बीमारियों की रोकथाम, समय पर रोगों की पहचान तथा बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लगाए गए इस शिविर में ग्रामीणों की विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं की जांच कर आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श दिया गया। जरूरतमंद मरीजों को निःशुल्क दवाइयों का वितरण भी किया गया, जिससे उन्हें तत्काल राहत मिली।

विशेष स्वास्थ्य शिविर में हड्डी रोग विशेषज्ञ, महिला रोग विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ, मेडिसिन विशेषज्ञ सहित विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने सेवाएं प्रदान कीं। इसके साथ ही मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला कार्यक्रम प्रबंधक, खंड चिकित्सा अधिकारी गौरेला तथा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी भी पूरे समय उपस्थित रहकर शिविर के सफल संचालन में सक्रिय भूमिका निभाते रहे।

राज्य सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रदेश का कोई भी नागरिक, चाहे वह कितने ही दूरस्थ या दुर्गम क्षेत्र में क्यों न रहता हो, स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित न रहे। विशेष पिछड़ी जनजातियों तक विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।  स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरतमंद लोगों तक स्वयं पहुंचकर उपचार उपलब्ध कराना ही सुशासन की वास्तविक पहचान है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि दूरस्थ एवं विशेष पिछड़ी जनजातीय क्षेत्रों में नियमित रूप से ऐसे विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि बीमारियों की समय पर पहचान हो सके, उपचार उपलब्ध कराया जा सके तथा गंभीर मरीजों को आवश्यकतानुसार उच्च चिकित्सा संस्थानों तक रेफर किया जा सके। साथ ही ग्रामीणों को स्वच्छता, पोषण, मौसमी बीमारियों से बचाव और स्वस्थ जीवनशैली के संबंध में भी जागरूक किया जा रहा है।

दुर्गम बैगा अंचलों तक विशेषज्ञ चिकित्सकों की पहुंच यह दर्शाती है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, समावेशी और प्रभावी बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। ऐसे विशेष स्वास्थ्य शिविर न केवल लोगों को समय पर उपचार उपलब्ध करा रहे हैं, बल्कि जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य के प्रति विश्वास और जागरूकता को भी मजबूत कर रहे हैं।

राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस-2026: वैज्ञानिक सोच और नवाचार से सतत विकास का संकल्प

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33 जिलों के जिला समन्वयकों एवं रिसोर्स शिक्षकों का राज्य स्तरीय उन्मुखीकरण सम्पन्न

'साइंस एंड इनोवेशन फॉर सस्टेनेबिलिटी' विषय पर स्थानीय समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान विकसित करने पर जोर

रायपुर- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, छत्तीसगढ़ शासन तथा छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (सीकॉस्ट) द्वारा राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के सहयोग से आयोजित 32वीं राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस-2026 के अंतर्गत जिला समन्वयकों एवं रिसोर्स शिक्षकों के लिए एक दिवसीय राज्य स्तरीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन शुक्रवार को रीजनल साइंस सेंटर, रायपुर में किया गया। 

कार्यशाला का उद्देश्य प्रदेशभर के शिक्षकों एवं जिला समन्वयकों को राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की नई थीम, परियोजना निर्माण प्रक्रिया, वैज्ञानिक अनुसंधान पद्धति तथा मूल्यांकन प्रणाली से अवगत कराना था, ताकि अधिकाधिक विद्यार्थी स्थानीय समस्याओं पर आधारित वैज्ञानिक परियोजनाएं तैयार कर राष्ट्रीय स्तर तक अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें। कार्यशाला का आयोजन प्रमुख सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग सोनमणी बोरा तथा महानिदेशक, छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद एवं रीजनल साइंस सेंटर प्रशांत कविश्वर के मार्गदर्शन में किया गया।

विद्यार्थियों को विज्ञान एवं अनुसंधान से जोड़ने का महत्वपूर्ण मंच

राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस देश का एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक कार्यक्रम है, जो 10 से 17 वर्ष आयु वर्ग के विद्यार्थियों को विज्ञान एवं अनुसंधान से जोड़ने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है। इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थी वैज्ञानिक पद्धति अपनाते हुए स्थानीय समस्याओं की पहचान करते हैं, आंकड़ों का संग्रह एवं विश्लेषण करते हैं तथा नवाचार आधारित समाधान प्रस्तुत करते हैं। ब्लॉक, जिला एवं राज्य स्तर पर चयनित बाल वैज्ञानिक राष्ट्रीय स्तर पर अपने राज्य का प्रतिनिधित्व करते हैं।

विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अनुसंधान क्षमता और नवाचार आधारित सोच विकसित करना

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के वैज्ञानिक 'ई' एवं राज्य समन्वयक डॉ. जे. के. राय, वैज्ञानिक 'डी' डॉ. ए. के. पाठक, वैज्ञानिक 'डी' डॉ. अमित दुबे, राज्य अकादमिक समन्वयक प्रो. (डॉ.) केशव कांत साहू तथा वनस्पति विज्ञान के वरिष्ठ शिक्षाविद डॉ. वी. के. कानूनगो कार्यक्रम में शामिल हुए। सभी वक्ताओं ने राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस-2026 की थीम "साइंस एंड इनोवेशन फॉर सस्टेनेबिलिटी" की प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि आज की सबसे बड़ी आवश्यकता विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अनुसंधान क्षमता और नवाचार आधारित सोच विकसित करना है। उन्होंने शिक्षकों एवं जिला समन्वयकों से आग्रह किया कि वे विद्यार्थियों को अपने आसपास की समस्याओं की वैज्ञानिक पहचान कर व्यावहारिक समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित करें।

राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की रूपरेखा और परियोजना निर्माण की जानकारी

कार्यशाला में राज्य समन्वयक डॉ. जे. के. राय ने राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस-2026 की संपूर्ण रूपरेखा, पात्रता, परियोजना निर्माण की प्रक्रिया, अनुसंधान पद्धति, दस्तावेजीकरण, प्रस्तुतीकरण एवं मूल्यांकन प्रणाली की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक परियोजनाएं केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रहकर स्थानीय आवश्यकताओं एवं समाजोपयोगी विषयों पर आधारित होनी चाहिए, जिससे विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व भी विकसित हो।

स्थानीय समस्याओं पर आधारित परियोजनाओं को मिलेगा बढ़ावा

तकनीकी सत्र में विशेषज्ञों ने इस वर्ष की थीम के विभिन्न उपविषयों पर विस्तृत प्रस्तुतियां दीं। इनमें R5 तकनीक (Reduce, Reuse, Recover, Redesign एवं Recycle) के माध्यम से कचरा प्रबंधन, E4 मॉडल (Explore, Experiment, Enhance एवं Evolve) के जरिए ऊर्जा संरक्षण एवं नवाचार, जल संचयन, पुनर्चक्रण एवं संरक्षण, तथा खाद्य, कृषि एवं स्वास्थ्य की स्थिरता के लिए भारतीय ज्ञान प्रणालियों के उपयोग जैसे विषय शामिल रहे। विशेषज्ञों ने बताया कि इन विषयों पर विद्यार्थियों द्वारा स्थानीय समस्याओं के समाधान आधारित उत्कृष्ट वैज्ञानिक परियोजनाएं विकसित की जा सकती हैं।मिशन लाइफ़ की भावना से जोड़ने का आह्वान

राज्य अकादमिक समन्वयक प्रो. (डॉ.) केशव कांत साहू ने राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की थीम और उसके विभिन्न उपविषयों का विस्तार से परिचय देते हुए कहा कि विद्यार्थियों को केवल वैज्ञानिक जानकारी देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें अनुसंधान, डेटा संग्रहण, विश्लेषण एवं समाधान आधारित सोच के लिए प्रेरित करना भी आवश्यक है। उन्होंने मार्गदर्शकों को वैज्ञानिक लेखन, परियोजना प्रस्तुतीकरण तथा मूल्यांकन के मानकों से अवगत कराते हुए Mission LiFE की भावना के अनुरूप अधिकाधिक विद्यार्थियों की सहभागिता सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

R5 तकनीक से पर्यावरण संरक्षण का संदेश

डॉ. वी. के. कानूनगो ने अपने व्याख्यान में R5 सिद्धांतों की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग, अपशिष्ट में कमी, पुनः उपयोग, पुनः डिज़ाइन तथा पुनर्चक्रण की अवधारणा को अपनाकर प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण किया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण के लिए दैनिक जीवन में इन सिद्धांतों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

ऊर्जा संरक्षण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर विशेष जोर

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर के सहायक प्राध्यापक डॉ. आयुष खरे ने ऊर्जा के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते उपयोग पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एआई आधारित तकनीकों के माध्यम से ऊर्जा दक्षता बढ़ाने, संसाधनों के बेहतर प्रबंधन तथा स्वच्छ ऊर्जा प्रणालियों के विकास को नई दिशा मिल रही है। उन्होंने विद्यार्थियों से ऊर्जा क्षेत्र में नवाचार आधारित अनुसंधान करने का आह्वान किया।

वैज्ञानिक परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने का आग्रह

वहीं, प्रो. नमिता ब्राह्मे ने ऊर्जा संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों तथा ऊर्जा दक्ष तकनीकों को सतत विकास की आधारशिला बताते हुए शिक्षकों से विद्यालय स्तर पर ऊर्जा ऑडिट, एलईडी अध्ययन, सौर कुकर एवं अन्य वैज्ञानिक परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी को "एनर्जी एम्बेसडर" बनकर समाज में ऊर्जा संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलानी चाहिए।

प्रदेशभर के शिक्षक होंगे वैज्ञानिक प्रतिभाओं के मार्गदर्शक

कार्यशाला में प्रदेश के सभी 33 जिलों से जिला समन्वयकों एवं रिसोर्स शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस-2026 के सफल आयोजन तथा अधिक से अधिक बाल वैज्ञानिकों को शोध एवं नवाचार आधारित परियोजनाओं से जोड़ने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया गया। आगामी राज्य स्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस में प्रदेशभर से चयनित बाल वैज्ञानिक अपनी शोध परियोजनाओं का प्रदर्शन करेंगे, जिनमें उत्कृष्ट प्रतिभागी राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करेंगे। कार्यशाला में छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद एवं रीजनल साइंस सेंटर के वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों की भी सक्रिय सहभागिता रही।

छत्तीसगढ़ में स्वतंत्रता दिवस 2026 की तैयारियां शुरू, राज्य शासन ने जारी किए स्वतंत्रता दिवस आयोजन संबंधी विस्तृत दिशा-निर्देश

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ शासन ने स्वतंत्रता दिवस 2026 को पूरे प्रदेश में गरिमामय, भव्य और प्रेरणादायी ढंग से मनाने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इस वर्ष का स्वतंत्रता दिवस विशेष होने जा रहा है, क्योंकि इस मौके पर राष्ट्रगीत श्वंदे मातरम्श् के 150 वर्ष पूरे होने का ऐतिहासिक उत्सव भी मनाया जाएगा। शासन द्वारा सभी जिलों के कलेक्टरों और विभागीय प्रमुखों को आयोजनों की समुचित निगरानी के कड़े निर्देश दिए गए हैं।


मुख्यमंत्री रायपुर में करेंगे ध्वजारोहण, वंदे मातरम् का सामूहिक गायन अनिवार्य

राजधानी रायपुर के स्थानीय पुलिस परेड ग्राउंड में मुख्य राज्य स्तरीय समारोह 15 अगस्त की प्रातः 9:00 बजे आयोजित किया जाएगा। इस भव्य समारोह में माननीय मुख्यमंत्री जी ध्वजारोहण कर परेड की सलामी लेंगे।

ऐतिहासिक अवसर वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए सभी शासकीय कार्यक्रमों में वंदे मातरम् का सामूहिक गायन अनिवार्य किया गया है। परेड में बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (पुरुष व महिला), नगर सेना, एनसीसी तथा बैंड प्लाटून की टुकड़ियाँ भाग लेंगी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री जी प्रदेश की जनता के नाम संदेश देंगे।

जिला और ब्लॉक स्तर पर मंत्रियों व स्थानीय जन-प्रतिनिधियों को कमान

जिला मुख्यालयों में शासन द्वारा नामित मंत्रीगण ध्वजारोहण कर परेड की सलामी लेंगे और मुख्यमंत्री के संदेश का वाचन करेंगे। यहाँ स्कूली बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। जनपद पंचायत मुख्यालयों में जनपद पंचायत अध्यक्ष, नगर पालिकाओं व पंचायतों में उनके अध्यक्ष व सरपंच तथा बड़े गांवों में ग्राम प्रमुख ध्वजारोहण करेंगे। इन स्थलों पर राष्ट्रीय गान, भाषण तथा देश की एकता एवं अखण्डता का संदेश प्रसारित किया जाएगा।

शहीदों के परिजनों का सम्मान

जिला कलेक्टरों को निर्देशित किया गया है कि जिला स्तरीय समारोह में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और नक्सली हिंसा में शहीद हुए जवानों के परिजनों को विशेष व सम्मानपूर्वक रूप से आमंत्रित कर सम्मानित किया जाए।

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जारी होने वाले सरकारी विज्ञापन स्वतंत्रता संग्राम के नायकों और छत्तीसगढ़ के शहीदों को समर्पित होंगे। इन विज्ञापनों का प्रकाशन 15 अगस्त के दिन समाचार पत्रों में सुनिश्चित किया जाएगा।

रात्रि में शासकीय भवनों पर होगी विशेष रोशनी

स्वतंत्रता दिवस की रात्रि को प्रदेश के सभी शासकीय भवनों, कार्यालयों और राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों को आकर्षक रोशनी (लाइटिंग) से सजाया जाएगा, जिसका खर्च संबंधित विभाग स्वयं वहन करेंगे। आम नागरिकों और निजी संस्थाओं से भी अपने भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने और रात्रि में रोशनी करने की अपील की जाएगी।

संस्थानों के लिए अन्य महत्वपूर्ण निर्देश

शासकीय एवं शिक्षण संस्थाओं में प्रातः 9:00 बजे से पहले ध्वजारोहण, राष्ट्रगान, प्रभात फेरी, सांस्कृतिक, साहित्यिक, खेलकूद और वृक्षारोपण जैसे कार्यक्रम संपन्न कराने होंगे। लाउडस्पीकर के प्रयोग हेतु जिला कलेक्टर से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। लाउडस्पीकर पर केवल मर्यादित और देशभक्ति से ओतप्रोत गीत ही बजाए जा सकेंगे।

एचपीवी टीकाकरण में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला बना प्रदेश में अव्वल

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विशेष टीकाकरण दिवस पर राज्य में सर्वाधिक बालिकाओं को लगी एचपीवी वैक्सीन, सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम की दिशा में बड़ी उपलब्धि

स्वास्थ्य विभाग छत्तीसगढ़ की प्रभावी रणनीति और जनजागरूकता अभियान से 74 विद्यालयों में चला व्यापक टीकाकरण अभियान, हजारों बालिकाओं के सुरक्षित भविष्य की रखी मजबूत नींव

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा  बालिकाओं के स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए संचालित जनकल्याणकारी स्वास्थ्य अभियानों का सकारात्मक परिणाम अब प्रदेशभर में दिखाई देने लगा है। स्वास्थ्य विभाग छत्तीसगढ़ द्वारा संचालित विशेष एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण सप्ताह के अंतर्गत 17 जुलाई को आयोजित विशेष टीकाकरण दिवस पर गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले ने पूरे प्रदेश में सर्वाधिक एचपीवी टीकाकरण कर उल्लेखनीय सफलता हासिल की। यह उपलब्धि राज्य सरकार की दूरदर्शी स्वास्थ्य नीति, प्रभावी कार्ययोजना तथा स्वास्थ्य विभाग की सुदृढ़ कार्यप्रणाली का सशक्त उदाहरण है।

राज्य सरकार बेटियों के स्वस्थ, सुरक्षित और सशक्त भविष्य के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। एचपीवी टीकाकरण जैसी पहल भविष्य में सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। प्रत्येक पात्र बालिका तक यह सुरक्षा कवच पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है और स्वास्थ्य विभाग इस दिशा में सराहनीय कार्य कर रहा है।

13 से 18 जुलाई तक आयोजित विशेष एचपीवी टीकाकरण सप्ताह के अंतर्गत 14 से 15 वर्ष आयु वर्ग की पात्र बालिकाओं को एचपीवी वैक्सीन लगाकर सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित करने का अभियान चलाया जा रहा है। कलेक्टर विजय दयाराम के. के मार्गदर्शन में अभियान की शुरुआत विकासखंड गौरेला के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नेवसा एवं शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चुकतीपानी से की गई।

राज्य स्तर से जिले को 3,893 बालिकाओं के टीकाकरण का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। विशेष टीकाकरण दिवस पर जिले के 74 विद्यालयों में चिकित्सा अधिकारियों एवं स्वास्थ्य अमले की उपस्थिति में व्यापक स्तर पर टीकाकरण अभियान संचालित किया गया। अभियान के दौरान लगभग 809 बालिकाओं का ऑनलाइन तथा 1,100 बालिकाओं का ऑफलाइन पंजीकरण एवं टीकाकरण किया गया। इस उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले ने राज्य में सर्वाधिक एचपीवी टीकाकरण कर नई उपलब्धि दर्ज की।

अभियान की सफलता में जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग के बेहतर समन्वय की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अभियान के दौरान जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मुकेश रावटे, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रामेश्वर शर्मा, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास गोपेश मनहर सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, चिकित्सा अधिकारी, शिक्षकों तथा विद्यालय प्रबंधन का सक्रिय सहयोग प्राप्त हुआ।

स्वास्थ्य विभाग छत्तीसगढ़ द्वारा विद्यालय आधारित टीकाकरण अभियान के माध्यम से बालिकाओं और उनके अभिभावकों को एचपीवी संक्रमण, सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम तथा टीकाकरण के महत्व के बारे में भी जागरूक किया जा रहा है। यह अभियान केवल टीकाकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि किशोरियों में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने और भविष्य में गंभीर बीमारियों से सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रभावी प्रयास भी है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, मातृ एवं बाल स्वास्थ्य को प्राथमिकता तथा निवारक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में किए जा रहे सतत प्रयासों का यह परिणाम है कि प्रदेश में स्वास्थ्य कार्यक्रम प्रभावी ढंग से सफल हो रहे हैं। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही की यह उपलब्धि न केवल जिले बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है और यह दर्शाती है कि स्वास्थ्य विभाग छत्तीसगढ़ जनस्वास्थ्य की सुरक्षा एवं स्वस्थ भविष्य के निर्माण के लिए पूरी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।

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