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अपने पुत्र के जन्मदिन के अवसर पर पालक ने स्कूल में कराया न्योता भोज

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आरंग-  विकास खंड -आरंग के संकुल केन्द्र -सेमरिया (समोदा) के अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला सेमरिया (परसदा)में दिनांक 5 मार्च 2026 दिन -गुरुवार को पालक टिकेश्वर साहू और टिकेश्वरी साहू ने अपने पुत्र कुणाल साहू कक्षा पहली के जन्मदिन के अवसर पर स्कूल में न्योता भोज कराया गया।  यह किसी पालक के द्वारा स्कूल में कराया गया पहला न्योता भोज कार्यक्रम है। इससे पहले स्कूल के शिक्षक/शिक्षिका के द्वारा ही स्कूल में न्योता भोज कराया गया था।इस न्योता भोज से  कक्षा पहली से पांचवीं तक के सभी बच्चे बहुत उत्साहित नजर आये। टिकेश्वर एवं टिकेश्वरी साहू एवं उनके सपरिवार के द्वारा खीर,पुड़ी, केक, भजिया, टमाटर चटनी वितरित कर अपने बच्चे का जन्मदिन भारी उत्साह , उमंग एवं भव्यता के साथ मनाया गया।इस अवसर पर ग्राम पंचायत सेमरिया के सरपंच कुमारी साहू, उपसरपंच अश्वनी साहू,शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष रुपेन्द्र सिन्हा, उपाध्यक्ष पूर्णिमा देवांगन,खुमेश साहू, सोमनाथ साहू, एसकुमार साहू,खुलेश साहू,गैंदलाल साहू, रोशनी सिन्हा,नीरा साहू,सेवती साहू,रामेश्वरी साहू एवं विद्यालय के शिक्षक/शिक्षिकाएं उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय करेंगे लखपति दीदियों से संवाद

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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में रायपुर में आयोजित होगा ‘लखपति दीदी संवाद’ कार्यक्रम

रायपुर- अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ द्वारा 7 मार्च 2026 को रायपुर के इंडोर स्टेडियम में ‘लखपति दीदी संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस गरिमामय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा करेंगे। कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी भी उपस्थित रहेंगे। इस अवसर पर प्रदेश भर से हजारों लखपति दीदियां कार्यक्रम में भाग लेंगी। 

मुख्यमंत्री साय इन महिलाओं से संवाद करते हुए उनकी सफलता की कहानियां सुनेंगे और शासन की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से उनके जीवन में आए सकारात्मक बदलाव की जानकारी प्राप्त करेंगे। यह कार्यक्रम महिलाओं के आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को साझा करने का महत्वपूर्ण मंच बनेगा।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के करकमलों से लखपति दीदी आधारित कॉफी टेबल बुक तथा छत्तीसकला आधारित ब्रांड बुक का विमोचन किया जाएगा। इसके साथ ही ‘लखपति दीदी ग्राम पोर्टल’ का शुभारंभ भी किया जाएगा। इन प्रकाशनों के माध्यम से स्व-सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं की उपलब्धियों और आत्मनिर्भरता की प्रेरक यात्राओं को व्यापक रूप से प्रस्तुत किया जाएगा।

कार्यक्रम में प्रदेश भर से उत्कृष्ट कार्य करने वाली स्व-सहायता समूह की महिलाओं, कैडर्स और लखपति दीदियों को सम्मानित भी किया जाएगा। यह आयोजन महिलाओं की आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार के सतत प्रयासों को रेखांकित करेगा और अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करेगा।

होली पर किसानों के खातों में राशि अंतरण से दोगुनी हुई तिहार की खुशी : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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बिरगांव होली मिलन समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री, प्रदेशवासियों को दी होली की शुभकामनाएं

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज शाम नगर निगम बिरगांव में आयोजित होली मिलन समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने क्षेत्र के नागरिकों को रंगों के इस पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस वर्ष होली का उत्साह प्रदेश में और भी अधिक है, क्योंकि राज्य सरकार द्वारा अन्नदाता किसानों के खातों में धान उपार्जन के अंतर की राशि अंतरित की गई है। इससे किसानों के परिवारों में खुशी का माहौल है और त्यौहार की रौनक दोगुनी हो गई है। उन्होंने कहा कि किसान प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और उनकी समृद्धि ही राज्य की समृद्धि का आधार है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि होली का पर्व आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक है। यह त्योहार समाज में एकता, समरसता और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देता है तथा लोगों को एक-दूसरे के और करीब लाने का अवसर प्रदान करता है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मंशानुरूप प्रदेश में नक्सलवाद अब समाप्ति की ओर है और बस्तर अंचल में शांति और विकास का नया अध्याय शुरू हो रहा है। राज्य सरकार बस्तर सहित पूरे प्रदेश में शांति, विकास और खुशहाली के लिए निरंतर कार्य कर रही है।


समारोह के दौरान मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक मंडली द्वारा प्रस्तुत मनमोहक फाग गीत का आनंद लिया। साथ ही विधायक अनुज शर्मा की प्रस्तुति पर उपस्थित लोगों ने भी खूब उत्साह दिखाया। इस दौरान मुख्यमंत्री साय ने पिचकारी चलाकर रंगों की बौछार की और लोगों के साथ होली की खुशियां साझा कीं।

इस अवसर पर रायपुर ग्रामीण विधायक मोतीलाल साहू, विधायक पुरंदर मिश्रा, योगेश साहू, निशक्तजन आयोग के अध्यक्ष लोकेश कावड़िया, सीआईडीसी अध्यक्ष राजीव अग्रवाल, छत्तीसगढ़ औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम, उपाध्यक्ष अंजय शुक्ला, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शंशाक शर्मा, पूर्व विधायक एवं आरडीए अध्यक्ष नंदे साहू, छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी के अध्यक्ष मिर्जा एजाज बेग, रमेश ठाकुर, भागीरथी यादव, मनोज जोशी सहित बिरगांव नगर निगम के पार्षदगण, स्थानीय जनप्रतिनिधि, नागरिक और बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित थे।


यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में सफल प्रदेश के अभ्यर्थियों को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दी बधाई

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में सफलता प्राप्त करने वाले छत्तीसगढ़ के सभी अभ्यर्थियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दी हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रदेश के प्रतिभाशाली युवाओं ने अपनी मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प के बल पर यह उपलब्धि हासिल कर पूरे छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया है।

मुख्यमंत्री साय ने वैभवी अग्रवाल, दर्शना सिंह बघेल, डायमंड सिंह ध्रुव, रौनक अग्रवाल और संजय डहरिया को उनकी उल्लेखनीय सफलता के लिए बधाई दी है। उन्होंने कहा कि इन होनहार बेटे-बेटियों की उपलब्धि प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणादायक है और यह दिखाती है कि निरंतर परिश्रम और लक्ष्य के प्रति समर्पण से किसी भी ऊँचाई को प्राप्त किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सभी सफल अभ्यर्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि उनकी उपलब्धि छत्तीसगढ़ के युवाओं को बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें हासिल करने के लिए प्रेरित करती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन युवाओं की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों के सपनों को नई ऊर्जा और दिशा देने वाली प्रेरणा है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि ये सभी प्रतिभाशाली युवा प्रशासनिक सेवाओं में रहते हुए पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ जनसेवा करेंगे तथा राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

छत्तीसगढ़ में पहली बार अफीम की खेती पकड़ी गई, पुलिस ने मारा छापा

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में अफीम की गुप्त खेती का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां ज्वार की फसल के बीच चोरी-छिपे अफीम उगाई जा रही थी। सूचना मिलते ही पुलिस ने छापा मारकर करीब डेढ़ एकड़ खेत में लगी अफीम की फसल को जब्त कर लिया।


जानकारी के अनुसार यह मामला Samoda Village का है, जो Jevra Sirsa चौकी क्षेत्र के अंतर्गत आता है। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने शुक्रवार को खेत में छापेमार कार्रवाई की। मौके पर पहुंचने पर पुलिस ने पाया कि करीब डेढ़ एकड़ खेत में अफीम की फसल बोई गई थी।

सबसे खास बात यह रही कि अफीम की खेती को छिपाने के लिए खेत के चारों तरफ ज्वार की फसल लगाई गई थी, ताकि किसी को शक न हो और खेती सामान्य दिखाई दे।

मामले की जांच के दौरान पुलिस ने खेत के मालिक से भी पूछताछ की। खेत मालिक ने बताया कि उसने अपनी जमीन लीज पर दी थी और उसे इस बात की जानकारी नहीं थी कि वहां अफीम की खेती की जा रही है। बताया जा रहा है कि खेत में काम करने वाले मजदूर Khandwa के रहने वाले हैं। फिलहाल पुलिस ने Vinayak Tamrakar को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।

घटना की जानकारी मिलने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों को भी मौके पर बुलाया गया है। तहसीलदार और आरआई की मौजूदगी में आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं गांव में अफीम की खेती की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरी तरह से सोची-समझी योजना के तहत अफीम की खेती की जा रही थी।

मामले में Manishankar Chandra (एएसपी) ने बताया कि समोदा गांव में अफीम की खेती की सूचना मिलने पर पुलिस ने कार्रवाई की है। फिलहाल पूरे मामले की जांच की जा रही है और संदिग्ध से पूछताछ जारी है। बताया जा रहा है कि दुर्ग जिले में अफीम की खेती का यह पहला मामला सामने आया है।

छत्तीसगढ़ में दर्दनाक सड़क हादसा: बस-ट्रक की टक्कर में 4 की मौत, कई घायल

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 CG Accident : छत्तीसगढ़ में सड़क हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी बीच रायपुर–बिलासपुर नेशनल हाईवे National Highway 130 पर शुक्रवार को एक भीषण सड़क हादसा हो गया। तेज रफ्तार ट्रक ने पीछे से यात्री बस को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में 4 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 12 से अधिक यात्री घायल हो गए।


जानकारी के अनुसार यह हादसा Simga थाना क्षेत्र के Darchura Village के पास सुबह करीब 11 बजे हुआ। बताया जा रहा है कि बिलासपुर की ओर जा रही यात्री बस को पीछे से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बस में सवार कई यात्री अंदर ही फंस गए।

घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से घायलों को बाहर निकालकर नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। घायलों का इलाज जारी है।

पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हादसे के बाद ट्रक चालक मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश की जा रही है।

सड़क निर्माण में गुणवत्ता से समझौता नहीं होगा : मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर  : प्रदेश में सड़क निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता को लेकर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सड़क निर्माण में किसी भी प्रकार की लापरवाही या गुणवत्ताहीन कार्य को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि कहीं भी निर्माण कार्य में कमी पाई गई तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी और दोषी ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री साय ने यह निर्देश आज मंत्रालय महानदी भवन में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के कार्यों और गतिविधियों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान दिए। बैठक में उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री  अरुण साव  उपस्थित थे।


मुख्यमंत्री  साय ने अधिकारियों से कहा कि सड़क निर्माण के बाद निरीक्षण करने के बजाय निर्माण के दौरान ही नियमित रूप से फील्ड में जाकर गुणवत्ता की निगरानी की जाए। उन्होंने कहा कि सड़कों का निर्माण केवल तकनीकी कार्य नहीं बल्कि आमजन की सुविधा से जुड़ा हुआ महत्वपूर्ण अधोसंरचनात्मक कार्य है और इससे सरकार की छवि भी बनती है। यदि सड़क बनने के कुछ वर्षों के भीतर ही खराब हो जाए तो इससे सरकार की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।

बैठक में बागबहार–कोतबा सड़क की खराब स्थिति पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यह सड़क कुछ वर्ष पहले ही बनी थी, लेकिन उसकी स्थिति तेजी से खराब हो गई है। यदि सड़क चार वर्ष भी नहीं चले तो इसका कोई औचित्य नहीं रह जाता। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इस सड़क के निर्माण में हुई कमियों की गंभीरता से जांच की जाए और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो इसके लिए निर्माण के दौरान ही गुणवत्ता की सख्त निगरानी की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर सड़क निर्माण कार्य हो रहे हैं, लेकिन आमजन को इन कार्यों की जानकारी नहीं मिल पाती जिससे सकारात्मक नैरेटिव नहीं बनता। उन्होंने निर्देश दिए कि बड़ी सड़क परियोजनाओं के शिलान्यास और भूमिपूजन मुख्यमंत्री और मंत्रियों के हाथों से कराए जाएं तथा उन्हें व्यापक रूप से आमजन के सामने प्रस्तुत किया जाए।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सड़क निर्माण के टेंडर जारी होने से लेकर कार्य आवंटन (अवॉर्ड) तक की पूरी प्रक्रिया के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय की जाए। उन्होंने कहा कि कई ठेकेदार बहुत कम दर यानी बिलो रेट पर टेंडर प्राप्त कर लेते हैं, जिसके कारण कार्य समय पर और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में संबंधित ठेकेदार की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। यदि ठेकेदार बिलो रेट पर टेंडर लेता है तो यह उसकी जिम्मेदारी होगी कि वह कार्य को निर्धारित गुणवत्ता और समय-सीमा में पूरा करे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट नियमावली तैयार करने की आवश्यकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अन्य राज्यों में लागू बेहतर व्यवस्थाओं का अध्ययन कर छत्तीसगढ़ में भी उपयुक्त प्रावधान लागू किए जाएं। साथ ही टेंडर और डीपीआर जैसे तकनीकी कार्यों के लिए एक अलग इकाई बनाने पर भी गंभीरता से विचार किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में लगभग 300 ऐसे गांव चिन्हित किए गए हैं, जहां बरसात के दौरान संपर्क पूरी तरह टूट जाता है। ऐसे गांवों तक पहुंचने के लिए लोगों को कई बार बीमार मरीजों को खाट में उठाकर ले जाना पड़ता है, जो अत्यंत चिंता का विषय है। खाद्य विभाग से प्राप्त सूची के आधार पर चिन्हित इन गांवों को सड़कों और पुल-पुलियों के माध्यम से जोड़ने का कार्य प्राथमिकता के साथ किया जाए।

मुख्यमंत्री श्री साय ने लैलूंगा–कुंजारा–तोलगेपहाड़–मिलूपारा–तमनार मार्ग के निर्माण की आवश्यकता पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में बड़ी आबादी निवास करती है और यहां सड़क का निर्माण अत्यंत आवश्यक है। इस मार्ग के कुछ हिस्से में वन स्वीकृति की आवश्यकता होगी, लेकिन शेष हिस्सों में निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जाए।

बैठक में मनेंद्रगढ़–सूरजपुर–अंबिकापुर–पत्थलगांव–कुनकुरी–जशपुर–झारखंड सीमा राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-43 की प्रगति की भी समीक्षा की गई। लगभग 353 किलोमीटर लंबाई वाली इस सड़क परियोजना की स्थिति पर चर्चा की गई।पत्थलगांव-कुनकुरी खंड में भू-अर्जन का मुआवजा दिए जाने की जानकारी भी बैठक में साझा की गई। इसके अलावा अंबिकापुर–सेमरसोत–रामानुजगंज–गढ़वा मार्ग, गीदम–दंतेवाड़ा मार्ग, चांपा–सक्ती–रायगढ़–ओडिशा सीमा मार्ग, रायपुर–दुर्ग मार्ग तथा चिल्फी क्षेत्र की सड़कों सहित कई अन्य परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। 

बैठक में बस्तर में पुल-पुलिया निर्माण सहित 17 सड़कों के निर्माण एवं उन्नयन पर भी विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही राज्य द्रुतगामी सड़क संपर्क मार्ग की आगामी कार्ययोजना की विस्तृत रूपरेखा भी प्रस्तुत की गई।

मुख्यमंत्री ने भवन निर्माण कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि प्रदेश में शासकीय भवनों के डिजाइन बहुत पुराने और एक जैसे दिखाई देते हैं। अब समय आ गया है कि शासकीय भवनों का निर्माण आधुनिक डिजाइन और तकनीक के आधार पर किया जाए। उन्होंने कहा कि भवनों का डिजाइन उनकी उपयोगिता के अनुरूप होना चाहिए और भूमि के बेहतर उपयोग के लिए हॉरिजॉन्टल की जगह वर्टिकल संरचना को बढ़ावा दिया जाए। मुख्यमंत्री ने राजभवन में बन रहे गेस्ट हाउस को भी आधुनिक और गरिमामय स्वरूप में तैयार करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़कें आमजन के जीवन से सीधे जुड़ी होती हैं और लोग सड़क की गुणवत्ता को बहुत महत्व देते हैं। अन्य कई विकास कार्य भले दिखाई न दें, लेकिन सड़कें सीधे लोगों को दिखाई देती हैं और सरकार की छवि भी उसी के आधार पर बनती है। इसलिए लोक निर्माण विभाग एक अत्यंत महत्वपूर्ण विभाग है और इसमें होने वाले कार्यों को समयबद्धता और गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाना अनिवार्य है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसा तंत्र विकसित किया जाए जिससे सड़कों में बनने वाले गड्ढों की जानकारी समय पर मिल सके और उन्हें तुरंत ठीक किया जा सके।

बैठक में मुख्य सचिव  विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव  मुकेश बंसल, मुख्यमंत्री के सचिव  राहुल भगत तथा लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

ओडिशा के मुंडाली में CISF के 57वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल हुए गृह मंत्री अमित शाह, जवानों की भूमिका की सराहना

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ओडिशा के मुंडाली में आयोजित केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के 57वें स्थापना दिवस समारोह में अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने CISF के तीन आवासीय परिसरों—कामरूप, नासिक और सीहोर—का शिलान्यास किया, जिनका निर्माण लगभग 890 करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा। साथ ही राजारहाट और दिल्ली में बने दो आवासीय परिसरों का उद्घाटन भी किया। कार्यक्रम में धर्मेंद्र प्रधान,मोहन चरण माझी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। 

अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि 56 वर्षों की यात्रा में CISF ने शून्य से शिखर तक का सफर तय किया है, जो बल की समर्पण, साहस और कर्तव्यनिष्ठा की कहानी है। उन्होंने कहा कि भारत को विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने के लिए औद्योगिक विकास आवश्यक है, और औद्योगिक विकास के लिए मजबूत औद्योगिक सुरक्षा बल की आवश्यकता होती है।

उन्होंने बताया कि CISF ने समय के साथ हर चुनौती से सीखते हुए खुद को आधुनिक बनाया है, जबकि अपनी परंपराओं को भी जीवित रखा है। आधुनिक हथियारों और तकनीकों से लैस होकर CISF हर प्रकार की चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है।

गृह मंत्री ने कहा कि भारत के औद्योगिक विकास की कल्पना CISF के बिना संभव नहीं है, क्योंकि यह बल हमेशा देश की सुरक्षा के लिए ढाल बनकर खड़ा रहा है। उन्होंने बताया कि गृह मंत्रालय ने हाल ही में देश के सभी बंदरगाहों की सुरक्षा भी CISF को सौंपने का निर्णय लिया है।

अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दो महत्वपूर्ण संकल्पों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाना और 2027 तक भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाना लक्ष्य है, जिसमें CISF एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

उन्होंने कहा कि CISF के जवानों के बलिदान ने देश की आर्थिक मजबूती में बड़ा योगदान दिया है। पिछले 56 वर्षों में बल को 13,693 से अधिक वीरता और विशिष्ट सेवा पदक प्राप्त हुए हैं, जो इसकी दक्षता और समर्पण का प्रमाण हैं।

गृह मंत्री ने बताया कि आज CISF देश के 70 हवाई अड्डों और 361 महत्वपूर्ण संस्थानों की सुरक्षा कर रहा है। इसके अलावा ड्रोन सुरक्षा के लिए भी CISF को नोडल एजेंसी बनाया गया है। हाल के समय में कार्तव्य भवन, सेवा तीर्थ, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, नवी मुंबई एयरपोर्ट, लेंगपुई एयरपोर्ट, जवाहरपुर थर्मल पावर प्रोजेक्ट और भाखड़ा डैम जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स की सुरक्षा भी CISF को सौंपी गई है।

अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार का संकल्प है कि 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से मुक्त बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि ओडिशा, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में नक्सल विरोधी अभियानों में CISF ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जल्द ही देश पूरी तरह नक्सलवाद से मुक्त होगा और सुरक्षा बल देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। 

यह समारोह CISF की गौरवशाली परंपरा, आधुनिक क्षमता और राष्ट्र की सुरक्षा के प्रति उसके अटूट समर्पण का प्रतीक रहा। 


कोलकाता में आयोजित ‘सागर संकल्प’ संवाद में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा — अनिश्चितताओं के दौर में आत्मनिर्भरता ही प्रासंगिक बने रहने का एकमात्र रास्ता

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राजनाथ सिंह ने 6 मार्च 2026 को Kolkata में आयोजित “Sagar Sankalp - Reclaiming India’s Maritime Glory” रक्षा एवं समुद्री संवाद का उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम Garden Reach Shipbuilders & Engineers (GRSE) और एक निजी मीडिया संगठन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया।

रक्षा मंत्री ने कहा कि आज के वैश्विक परिदृश्य में सप्लाई चेन का पुनर्गठन, नई वैश्विक साझेदारियाँ और समुद्री गतिविधियों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। ऐसे समय में भारत के लिए हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि विश्व व्यवस्था तेजी से बदल रही है और वैश्विक अनिश्चितताएँ बढ़ रही हैं। मध्य पूर्व की स्थिति का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा किहोर्मुज़ जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी जैसे क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की अस्थिरता का सीधा प्रभाव तेल और गैस की आपूर्ति तथा वैश्विक व्यापार पर पड़ता है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि तकनीकी प्रगति आज के समय का सबसे महत्वपूर्ण कारक बन चुकी है, विशेषकर रक्षा क्षेत्र में। उन्होंने बताया कि सरकार का लक्ष्य रक्षा प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता हासिल करना है ताकि भविष्य की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।

उन्होंने रक्षा उत्पादन को मजबूत बनाने के लिए सरकार द्वारा किए गए सुधारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि रक्षा क्षेत्र में सार्वजनिक उपक्रमों (DPSUs) और निजी उद्योगों दोनों को समान अवसर देने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। रक्षा कॉरिडोर, DRDO प्रयोगशालाओं की उपलब्धता और आयात-निर्यात प्रक्रियाओं में सुधार जैसे कदम उद्योग को सशक्त बना रहे हैं।

रक्षा मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन 1.50 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया, जबकि रक्षा निर्यात लगभग 24,000 करोड़ रुपये तक पहुँच गया। अप्रैल 2026 तक इसके लगभग 29,000 करोड़ रुपये तक पहुँचने की उम्मीद है और सरकार ने FY 2029-30 तक 50,000 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात का लक्ष्य रखा है।

उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय नौसेना के लिए ऑर्डर किए गए सभी युद्धपोत और पनडुब्बियाँ अब भारतीय शिपयार्ड में ही डिजाइन से लेकर निर्माण तक तैयार किए जा रहे हैं। इसे उन्होंने “Builder’s Navy” की दिशा में बड़ा कदम बताया।

कार्यक्रम में GRSE केकमोडोर पी. आर. हरि (सेवानिवृत्त)ने भारत की समुद्री विरासत और स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता के विकास पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत का “Buyer’s Navy” से “Builder’s Navy” की ओर बढ़ना देश की तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।

इस संवाद में नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी, नीति निर्माता और उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल हुए। चर्चा के दौरान समुद्री सुरक्षा, घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करने, वैश्विक जहाज निर्माण में भारत की भूमिका बढ़ाने और जहाज मरम्मत उद्योग को विकसित करने जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।

रक्षा मंत्री ने कहा कि समन्वित योजना, नई तकनीक और संस्थागत सहयोग के माध्यम से भारत अपनी समुद्री शक्ति को मजबूत बना सकता है। उन्होंने लक्ष्य रखा कि भारत 2030 तक दुनिया के शीर्ष 10 और 2047 तक शीर्ष 5 जहाज निर्माण देशों में शामिल हो। 

खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने ‘स्वच्छता पखवाड़ा 2026’ के तहत चलाया स्वच्छता और जागरूकता अभियान

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खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (DFPD) ने 16 से 28 फरवरी 2026 तक आयोजित स्वच्छता पखवाड़ा के तहत स्वच्छता और जागरूकता से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया। इस अभियान के माध्यम से विभाग ने स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।

वर्ष 2026 विभाग में स्वच्छता पखवाड़ा के क्रियान्वयन का लगातार 11वां वर्ष है। अभियान को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए DFPD से जुड़े सभी संगठनों और कार्यालयों को विस्तृत दिशा-निर्देशों के साथ गतिविधियों का कैलेंडर भेजा गया, ताकि अभियान में समन्वित और व्यापक भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।

अभियान की शुरुआत 16 फरवरी 2026 को उद्घाटन समारोह के साथ हुई, जिसमें विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने और स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए स्वच्छता शपथ ली। यह शपथ खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के अतिरिक्त सचिव एवं वित्तीय सलाहकार के नेतृत्व में दिलाई गई, जिसमें कार्यस्थलों और दैनिक जीवन में स्वच्छता के सर्वोत्तम तरीकों को अपनाने का संकल्प लिया गया।

पखवाड़े के दौरान कई गतिविधियाँ आयोजित की गईं, जिनमें एकल-उपयोग प्लास्टिक के प्रयोग को हतोत्साहित करना, प्रभावी कचरा प्रबंधन को बढ़ावा देना और वृक्षारोपण अभियान शामिल थे। विभाग के कार्यालयों में स्वच्छता के महत्व को दर्शाने वाले बैनर और पोस्टर भी लगाए गए।

DFPD के अंतर्गत आने वाले सभी संगठनों ने “स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत” के उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए दैनिक रूप से अभियान में भाग लिया। इस दौरान कार्यालय परिसरों की सफाई, अनावश्यक सामान हटाना, धूल-सफाई और सैनिटाइजेशन, कचरे का पृथक्करण तथा शौचालयों और अन्य साझा स्थानों की साफ-सफाई जैसे कार्य किए गए, जिससे कार्यस्थल को अधिक स्वच्छ और स्वस्थ बनाया जा सके।

अभियान के अंतर्गत सफाई मित्रों के योगदान को सम्मानित करने के लिए एक सम्मान समारोह भी आयोजित किया गया। इस अवसर पर स्वच्छता कर्मियों को उनके समर्पित कार्य के लिए धन्यवाद स्वरूप उपहार भेंट किए गए।

विभाग ने स्वच्छता के इस अभियान को निरंतर जागरूकता और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, ताकि स्वच्छ और स्वस्थ भारत के लक्ष्य को साकार किया जा सके।

नागालैंड विश्वविद्यालय के 8वें दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन शामिल, युवाओं से राष्ट्र निर्माण में योगदान का आह्वान

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भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने आज नागालैंड विश्वविद्यालय के लुमामी परिसर में आयोजित 8वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया।

समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि पद संभालने के बाद उत्तर-पूर्व की यह उनकी पहली यात्रा है और नागालैंड आकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। उन्होंने कहा कि नागालैंड वह स्थान है जहाँ प्रकृति, संस्कृति और साहस का अद्भुत संगम देखने को मिलता है और राज्य की वास्तविक शक्ति उसके लोगों और उनकी समृद्ध परंपराओं में निहित है।

उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविधता में एकता है। हमारे देश की शक्ति मतभेदों में नहीं, बल्कि उस एकता में है जो हम सभी को जोड़कर रखती है।

उपराष्ट्रपति ने वर्ष 1994 में स्थापित नागालैंड विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान उत्तर-पूर्व क्षेत्र में उच्च शिक्षा के विस्तार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की उपलब्धता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कैंसर अनुसंधान प्रयोगशाला की स्थापना सहित विश्वविद्यालय द्वारा किए गए शोध कार्यों तथा नागा समुदाय की स्वदेशी भाषाओं और पारंपरिक कानूनों के संरक्षण के प्रयासों की भी प्रशंसा की।

दीक्षांत समारोह में स्नातक छात्रों को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि युवा अपने जीवन में उद्देश्यपूर्ण प्रगति करें और विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण के संतुलन को भी बनाए रखें। साथ ही उन्होंने युवाओं से नशे के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए “ड्रग्स को ना” कहने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है, इसलिए युवाओं को नई चुनौतियों और अवसरों के अनुरूप अपने ज्ञान और कौशल को लगातार अद्यतन करते रहना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में उत्तर-पूर्व क्षेत्र के विकास के लिए केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि Prime Minister’s Development Initiative for North East Region (PM-DevINE) जैसी योजनाओं के माध्यम से क्षेत्र में आधारभूत संरचना, सामाजिक विकास और आजीविका से जुड़े कई प्रकल्पों को समर्थन दिया जा रहा है, जिससे युवाओं के लिए नए अवसर पैदा होंगे।

उन्होंने फरवरी 2026 में केंद्र सरकार, नागालैंड सरकार और ईस्टर्न नागालैंड पीपल्स ऑर्गनाइजेशन (ईएनपीओ)के बीच हुए त्रिपक्षीय समझौते का भी उल्लेख किया, जिसका नेतृत्व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किया था। उपराष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि यह समझौता क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं के समाधान और शांति व विकास को बढ़ावा देने में सहायक होगा।

इस अवसर पर उन्होंने नागालैंड विश्वविद्यालय में HEFA फेज-II भवनों की आधारशिला भी रखी।

कार्यक्रम में नागालैंड के राज्यपालअजय कुमार भल्ला, उपमुख्यमंत्री  टी. आर. ज़ेलियांग, विश्वविद्यालय के कुलाधिपति समुद्र गुप्ता कश्यप, कुलपति जगदीश कुमार पटनायक सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।


सड़क निर्माण में गुणवत्ता से समझौता नहीं होगा : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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निर्माण के दौरान ही फील्ड में जाकर नियमित निरीक्षण करें अधिकारी, लापरवाही पर कार्रवाई और ठेकेदार होंगे ब्लैकलिस्ट

टेंडर से अवॉर्ड तक पूरी प्रक्रिया की समय-सीमा तय करने के निर्देश

आधुनिक डिजाइन और तकनीक से हों शासकीय भवनों का निर्माण

रायपुर- प्रदेश में सड़क निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता को लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सड़क निर्माण में किसी भी प्रकार की लापरवाही या गुणवत्ताहीन कार्य को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि कहीं भी निर्माण कार्य में कमी पाई गई तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी और दोषी ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। मुख्यमंत्री साय ने यह निर्देश आज मंत्रालय महानदी भवन में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के कार्यों और गतिविधियों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान दिए। बैठक में उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री अरुण साव  उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों से कहा कि सड़क निर्माण के बाद निरीक्षण करने के बजाय निर्माण के दौरान ही नियमित रूप से फील्ड में जाकर गुणवत्ता की निगरानी की जाए। उन्होंने कहा कि सड़कों का निर्माण केवल तकनीकी कार्य नहीं बल्कि आमजन की सुविधा से जुड़ा हुआ महत्वपूर्ण अधोसंरचनात्मक कार्य है और इससे सरकार की छवि भी बनती है। यदि सड़क बनने के कुछ वर्षों के भीतर ही खराब हो जाए तो इससे सरकार की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।

बैठक में बागबहार–कोतबा सड़क की खराब स्थिति पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यह सड़क कुछ वर्ष पहले ही बनी थी, लेकिन उसकी स्थिति तेजी से खराब हो गई है। यदि सड़क चार वर्ष भी नहीं चले तो इसका कोई औचित्य नहीं रह जाता। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इस सड़क के निर्माण में हुई कमियों की गंभीरता से जांच की जाए और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो इसके लिए निर्माण के दौरान ही गुणवत्ता की सख्त निगरानी की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर सड़क निर्माण कार्य हो रहे हैं, लेकिन आमजन को इन कार्यों की जानकारी नहीं मिल पाती जिससे सकारात्मक नैरेटिव नहीं बनता। उन्होंने निर्देश दिए कि बड़ी सड़क परियोजनाओं के शिलान्यास और भूमिपूजन मुख्यमंत्री और मंत्रियों के हाथों से कराए जाएं तथा उन्हें व्यापक रूप से आमजन के सामने प्रस्तुत किया जाए।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सड़क निर्माण के टेंडर जारी होने से लेकर कार्य आवंटन (अवॉर्ड) तक की पूरी प्रक्रिया के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय की जाए। उन्होंने कहा कि कई ठेकेदार बहुत कम दर यानी बिलो रेट पर टेंडर प्राप्त कर लेते हैं, जिसके कारण कार्य समय पर और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में संबंधित ठेकेदार की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। यदि ठेकेदार बिलो रेट पर टेंडर लेता है तो यह उसकी जिम्मेदारी होगी कि वह कार्य को निर्धारित गुणवत्ता और समय-सीमा में पूरा करे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट नियमावली तैयार करने की आवश्यकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अन्य राज्यों में लागू बेहतर व्यवस्थाओं का अध्ययन कर छत्तीसगढ़ में भी उपयुक्त प्रावधान लागू किए जाएं। साथ ही टेंडर और डीपीआर जैसे तकनीकी कार्यों के लिए एक अलग इकाई बनाने पर भी गंभीरता से विचार किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में लगभग 300 ऐसे गांव चिन्हित किए गए हैं, जहां बरसात के दौरान संपर्क पूरी तरह टूट जाता है। ऐसे गांवों तक पहुंचने के लिए लोगों को कई बार बीमार मरीजों को खाट में उठाकर ले जाना पड़ता है, जो अत्यंत चिंता का विषय है। खाद्य विभाग से प्राप्त सूची के आधार पर चिन्हित इन गांवों को सड़कों और पुल-पुलियों के माध्यम से जोड़ने का कार्य प्राथमिकता के साथ किया जाए।

मुख्यमंत्री साय ने लैलूंगा–कुंजारा–तोलगेपहाड़–मिलूपारा–तमनार मार्ग के निर्माण की आवश्यकता पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में बड़ी आबादी निवास करती है और यहां सड़क का निर्माण अत्यंत आवश्यक है। इस मार्ग के कुछ हिस्से में वन स्वीकृति की आवश्यकता होगी, लेकिन शेष हिस्सों में निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जाए।

बैठक में मनेंद्रगढ़–सूरजपुर–अंबिकापुर–पत्थलगांव–कुनकुरी–जशपुर–झारखंड सीमा राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-43 की प्रगति की भी समीक्षा की गई। लगभग 353 किलोमीटर लंबाई वाली इस सड़क परियोजना की स्थिति पर चर्चा की गई।पत्थलगांव-कुनकुरी खंड में भू-अर्जन का मुआवजा दिए जाने की जानकारी भी बैठक में साझा की गई। इसके अलावा अंबिकापुर–सेमरसोत–रामानुजगंज–गढ़वा मार्ग, गीदम–दंतेवाड़ा मार्ग, चांपा–सक्ती–रायगढ़–ओडिशा सीमा मार्ग, रायपुर–दुर्ग मार्ग तथा चिल्फी क्षेत्र की सड़कों सहित कई अन्य परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। 

बैठक में बस्तर में पुल-पुलिया निर्माण सहित 17 सड़कों के निर्माण एवं उन्नयन पर भी विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही राज्य द्रुतगामी सड़क संपर्क मार्ग की आगामी कार्ययोजना की विस्तृत रूपरेखा भी प्रस्तुत की गई।

मुख्यमंत्री ने भवन निर्माण कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि प्रदेश में शासकीय भवनों के डिजाइन बहुत पुराने और एक जैसे दिखाई देते हैं। अब समय आ गया है कि शासकीय भवनों का निर्माण आधुनिक डिजाइन और तकनीक के आधार पर किया जाए। उन्होंने कहा कि भवनों का डिजाइन उनकी उपयोगिता के अनुरूप होना चाहिए और भूमि के बेहतर उपयोग के लिए हॉरिजॉन्टल की जगह वर्टिकल संरचना को बढ़ावा दिया जाए। मुख्यमंत्री ने राजभवन में बन रहे गेस्ट हाउस को भी आधुनिक और गरिमामय स्वरूप में तैयार करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़कें आमजन के जीवन से सीधे जुड़ी होती हैं और लोग सड़क की गुणवत्ता को बहुत महत्व देते हैं। अन्य कई विकास कार्य भले दिखाई न दें, लेकिन सड़कें सीधे लोगों को दिखाई देती हैं और सरकार की छवि भी उसी के आधार पर बनती है। इसलिए लोक निर्माण विभाग एक अत्यंत महत्वपूर्ण विभाग है और इसमें होने वाले कार्यों को समयबद्धता और गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाना अनिवार्य है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसा तंत्र विकसित किया जाए जिससे सड़कों में बनने वाले गड्ढों की जानकारी समय पर मिल सके और उन्हें तुरंत ठीक किया जा सके।

बैठक में मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव मुकेश बंसल, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत तथा लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

ईको-पर्यटन की नई शुरुआत- नेचर कैंप मड हाउस से स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में बारनवापारा अभ्यारण्य के पास स्थित देवपुर रेंज में ईको-पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नए नेचर कैंप मड हाउस (मिट्टी के घर) शुरू किए गए हैं। ये घर पारंपरिक तरीके से मिट्टी और प्राकृतिक सामग्रियों से बने हैं, जो सैलानियों को प्रकृति के करीब रहने का अनूठा और शांत अनुभव प्रदान करते हैं।


बलौदाबाजार वनमंडल के देवपुर वन परिक्षेत्र में ईको-पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ‘नेचर कैंप मड हाउस’ का शुभारंभ किया गया। यह पहल वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अरुण कुमार पाण्डे के विशेष प्रयासों से शुरू की गई है। इससे स्थानीय ग्रामीणों के लिए रोजगार के नए अवसर उपलब्ध होंगे। गौरतलब है कि नेचर कैंप मड हाउस को प्राकृतिक संसाधनों और पारंपरिक शैली से तैयार किया गया है। यहां आने वाले पर्यटकों को प्रकृति के करीब रहने का अनूठा अनुभव मिलेगा। इस पहल का उद्देश्य पर्यावरण अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देना और स्थानीय लोगों की आय के स्थायी साधन विकसित करना है। इस परियोजना के संचालन में स्थानीय वन प्रबंधन समिति और स्व-सहायता समूहों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है।

इसी क्रम में बारनवापारा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के पर्यटन ग्राम में एक आधुनिक रिसेप्शन भवन का भी शुभारंभ किया गया। पर्यटन विभाग की ओर से यहां पर मड हाउस मॉडल बनाए गए हैं। इन मड हाउस में ठहरने वालों को प्रकृति और ग्रामीण परिवेश का पूरा आनंद मिलेए इसकी व्यवस्था की गई है। बारनवापारा में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक रिसेप्शन भवन भी बनाए गए हैं। इन तमाम सुविधाओं और व्यवस्थाओं से स्थानीय लोगों की आय में वृद्धि होगी, उनके जीवन स्तर में सुधार आएगा, बेरोजगारी भी कम होगी।

इस नए कैंप को स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक निर्माण शैली के साथ तैयार किया गया है। मिट्टी, लकड़ी और प्राकृतिक सामग्री से बने मड हाउस पर्यावरण के अनुकूल हैं। आसपास के जंगल के साथ पूरी तरह घुलते.मिलते नजर आने वाले ये मड हाउस पर्यटकों को आकर्षित करेंगे। वन विभाग का उद्देश्य है, कि पर्यटन हो लेकिन प्रकृति पर दबाव कम से कम पड़े। इस केंद्र के माध्यम से आने वाले पर्यटकों को अभ्यारण्य की जैव विविधता, वन्यजीवों और प्राकृतिक विरासत की जानकारी दी जाएगी। कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने बताया कि वन मंत्री केदार कश्यप की मंशा के अनुरूप वन विभाग ऐसे विकास कार्यों को प्राथमिकता दे रहा है, जिनमें वन संरक्षण और स्थानीय विकास का संतुलन बना रहे।

इस अवसर पर वनमंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर सहित विभागीय अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। यह पहल देवपुर क्षेत्र को ईको-पर्यटन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

होली की आड़ में शर्मनाक वारदात: मां को शराब लाने भेजा बाहर, युवती से गैंगरेप, 3 नाबालिग समेत 5 गिरफ्तार

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 कोंडागांव। होली के रंगों के बीच छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले से मानवता को शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है। यहां होली के दूसरे दिन 19 वर्षीय युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म की वारदात हुई है। पुलिस ने इस मामले में 3 नाबालिग सहित कुल 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। घटना केशकाल अनुविभाग के इरागांव थाना क्षेत्र की बताई जा रही है।


रंग-गुलाल लगाने के बहाने पहुंचे युवक

मिली जानकारी के अनुसार, गांव के कुछ युवक होली के मौके पर रंग-गुलाल लगाने के बहाने युवती के घर पहुंचे थे। इसी दौरान उन्होंने युवती की मां को शराब लाने के बहाने घर से बाहर भेज दिया।

मां के बाहर जाते ही आरोपियों ने मौके का फायदा उठाया। चार युवकों ने युवती को जबरन कमरे में ले जाकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया, जबकि एक युवक घर के बाहर पहरा देता रहा।

मां लौटी तो बंद मिला दरवाजा

बताया जा रहा है कि जब युवती की मां शराब लेकर वापस घर लौटीं तो घर का दरवाजा बंद मिला। दरवाजा खोलने पर उन्होंने देखा कि आरोपी युवती के साथ दुष्कर्म कर रहे थे। मां को देखते ही सभी आरोपी मौके से फरार हो गए।

गांव में बैठक के बाद थाने पहुंचा मामला

घटना के अगले दिन पीड़िता ने गांव में बैठक बुलाई, लेकिन आरोपी युवक वहां नहीं पहुंचे। इसके बाद पीड़िता देर शाम इरागांव थाने पहुंची और पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस की कार्रवाई में पांचों आरोपी गिरफ्तार

शिकायत मिलते ही पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर जांच शुरू की और आरोपियों की तलाश में जुट गई। त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने सभी पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इनमें दो आरोपी बालिग और तीन नाबालिग बताए जा रहे हैं।

आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई

कोंडागांव के एसपी पंकज चंद्रा ने बताया कि मामले में सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए पुलिस हर संभव प्रयास कर रही है और पूरे मामले की गहन जांच जारी है।

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टी-20 विश्वकप फाइनल में पहुँची टीम इंडिया, मुख्यमंत्री ने दी बधाई

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 रायपुर। विष्णु देव साय ने भारतीय क्रिकेट टीम को आईसीसी टी20 विश्व कप के सेमीफाइनल मुकाबले में इंग्लैंड क्रिकेट टीम को हराकर फाइनल में पहुँचने पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दी हैं।


मुख्यमंत्री साय ने अपने सोशल मीडिया संदेश में कहा कि टी-20 विश्वकप के सेमीफाइनल में शानदार और जुझारू प्रदर्शन करते हुए भारतीय टीम ने इंग्लैंड को पराजित कर भव्य अंदाज़ में फाइनल में प्रवेश किया है। यह पूरे देश के लिए गर्व और उत्साह का क्षण है।

उन्होंने कहा कि भारतीय टीम के सभी खिलाड़ियों ने अद्भुत टीमवर्क, साहस और उत्कृष्ट खेल कौशल का परिचय देते हुए पूरे देश को गर्व से भर दिया है। यह जीत केवल एक मैच की जीत नहीं, बल्कि हर भारतीय के आत्मविश्वास और तिरंगे की शान का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री साय ने भारतीय टीम को फाइनल मुकाबले के लिए अपनी शुभकामनाएँ देते हुए विश्वास जताया कि टीम इसी जज़्बे और दमदार प्रदर्शन के साथ आगे बढ़ते हुए विश्व मंच पर नया इतिहास रचेगी।

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