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रायपुर में पैसे के विवाद ने ली जान, आरोपी 2 घंटे में गिरफ्तार

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 रायपुर। राजधानी के टिकरापारा थाना क्षेत्र में पैसे के विवाद ने खूनी रूप ले लिया। इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को महज दो घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया।


जानकारी के अनुसार, 27 मार्च की दोपहर करीब 2 बजे टिकरापारा पुलिस को सूचना मिली कि रावतपुरा फेस-02 स्थित सांई मंदिर के पास एक युवक पर चाकू से हमला किया गया है। घायल युवक की पहचान अजय अग्रवाल (34 वर्ष) के रूप में हुई, जिन्हें गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। मृतक के परिजनों से पूछताछ में सामने आया कि वारदात के पीछे डोमेश्वर देवांगन का हाथ है, जो कंस्ट्रक्शन का काम करता है।

पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी की तलाश शुरू की और कुछ ही समय में उसे पकड़ लिया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया।

पुलिस के अनुसार, आरोपी डोमेश्वर देवांगन ने मृतक के लिए कंस्ट्रक्शन का काम किया था। इसी काम के भुगतान को लेकर दोनों के बीच विवाद चल रहा था। आरोपी 50 हजार रुपये की मांग कर रहा था, जिसे मृतक देने से इनकार कर रहा था।

घटना वाले दिन सुबह आरोपी पैसे लेने मृतक के घर पहुंचा, लेकिन रकम नहीं मिलने पर वह बाहर इंतजार करने लगा। जैसे ही अजय अग्रवाल घर से बाहर निकले, आरोपी ने सब्जी काटने वाले चाकू से उनके पेट में वार कर दिया, जिससे उनकी मौत हो गई।

आरोपी डोमेश्वर देवांगन (18 वर्ष, निवासी चांगोरभाठा, थाना डी.डी.नगर, रायपुर) को हिरासत में लेकर टिकरापारा थाना में हत्या का मामला दर्ज किया गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

इस कार्रवाई में टिकरापारा थाना प्रभारी निरीक्षक विनय सिंह बघेल, डी.डी.नगर थाना प्रभारी निरीक्षक रवीन्द्र यादव, उपनिरीक्षक अतुलेश राय (एंटी क्राइम एवं साइबर यूनिट) सहित दोनों थानों के पुलिसकर्मियों की अहम भूमिका रही।

पुलिस ने बताया कि मामले में तत्काल संज्ञान लेते हुए आरोपी को समय रहते गिरफ्तार कर लिया गया है और न्यायिक प्रक्रिया की कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों ने मृतक के परिजनों को न्याय दिलाने का आश्वासन दिया है।

पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी प्रकार के विवाद को हिंसा में बदलने से पहले कानून का सहारा लें और तुरंत पुलिस को सूचना दें।

स्वच्छ ऊर्जा में बड़ी सफलता: नए पॉलिमर से ऊर्जा भंडारण और हाइड्रोजन उत्पादन में क्रांतिकारी प्रगति

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ऊर्जा भंडारण और स्वच्छ ईंधन (हाइड्रोजन) उत्पादन के क्षेत्र में एक बड़ी प्रगति करते हुए वैज्ञानिकों ने नए, आसानी से संश्लेषित और अत्यधिक प्रभावी पॉलिमरिक पदार्थ विकसित किए हैं, जो स्वच्छ ऊर्जा की उपलब्धता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

Zn(DAB) और Cd(DAB) नामक ये समन्वय पॉलिमर (coordination polymers) विशेष रूप से डिजाइन की गई संरचनाएं हैं, जिनमें जिंक (Zn²⁺) या कैडमियम (Cd²⁺) धातु आयन और 3,3'-डायमिनोबेंजिडीन (DAB) नामक कार्बनिक अणु मिलकर मजबूत परतदार ढांचा बनाते हैं। इन्हें सरल, कमरे के तापमान पर और बिना जटिल उपकरणों के बड़े पैमाने पर तैयार किया जा सकता है, जिससे ये औद्योगिक उपयोग के लिए उपयुक्त बनते हैं।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अंतर्गत सेंटर फॉर नैनो एंड सॉफ्ट मैटर साइंसेज (CeNS) और बेंगलुरु स्थित क्राइस्ट विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की टीम ने इन पदार्थों का परीक्षण किया और स्वच्छ ऊर्जा के दो प्रमुख क्षेत्रों—ऊर्जा भंडारण और हाइड्रोजन उत्पादन—में उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त किए।

प्रयोगशाला परीक्षणों में Zn(DAB) ने 2091.4 F g⁻¹ और Cd(DAB) ने 1341.6 F g⁻¹ की ऊर्जा भंडारण क्षमता दिखाई। व्यावहारिक उपकरणों (सुपरकैपेसिटर) में भी Zn(DAB) ने 785.3 F g⁻¹ और Cd(DAB) ने 428.5 F g⁻¹ का प्रदर्शन किया। साथ ही, ये सामग्री 5000 चार्ज-डिस्चार्ज चक्रों के बाद भी अपनी क्षमता बनाए रखने में सक्षम रही, जो उनकी टिकाऊपन को दर्शाता है।

इसके अलावा, ये पदार्थ पानी को विभाजित कर स्वच्छ हाइड्रोजन ईंधन उत्पादन में भी सक्षम हैं। Zn(DAB) के लिए 263 mV और Cd(DAB) के लिए 209 mV की कम ऊर्जा आवश्यकता (ओवरपोटेंशियल) इन्हें अत्यधिक प्रभावी बनाती है, जिससे भविष्य में हरित हाइड्रोजन उत्पादन अधिक सस्ता और कुशल हो सकता है।

ऊर्जा भंडारण और हाइड्रोजन उत्पादन—दोनों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के कारण ये सामग्री स्वच्छ ऊर्जा समाधानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं। यह नवाचार शोध और वास्तविक उपयोग के बीच की दूरी को कम करने में सहायक होगा।

यह शोध ACS Omega और Catalysis Science & Technology जैसे प्रतिष्ठित जर्नलों में प्रकाशित हुआ है, जो समन्वय पॉलिमरों को अगली पीढ़ी के स्वच्छ ऊर्जा पदार्थों के रूप में स्थापित करता है।

सौर रेडियो तरंगों के रहस्य से उठा पर्दा, भारतीय वैज्ञानिकों ने सुलझाई टाइप-II बर्स्ट की पहेली

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 सौर ज्वालाओं (Solar Flares) से उत्पन्न सौर कोरोना शॉक्स पर शोध कर रहे वैज्ञानिकों ने रेडियो तरंगों के ‘फंडामेंटल’ (मूल) और ‘हार्मोनिक’ (ओवरटोन) उत्सर्जन की सापेक्ष तीव्रता में होने वाले अंतर के पीछे के रहस्य को सुलझा लिया है।

यह अध्ययन इस बात की समझ को बेहतर बनाता है कि सौर शॉक्स रेडियो तरंगें कैसे उत्पन्न करते हैं और वे कोरोना में कैसे प्रसारित होती हैं। इससे अंतरिक्ष मौसम (Space Weather) के पूर्वानुमान में भी मदद मिल सकती है।

सौर ज्वालाओं या कोरोनल मास इजेक्शन (CME) से उत्पन्न शॉक्स ‘टाइप-II सोलर रेडियो बर्स्ट’ नामक विशेष प्रकार की रेडियो तरंगें उत्पन्न करते हैं। ये बर्स्ट लगभग 1000 किमी/सेकंड की गति से फैलते हैं और रेडियो तरंगों के रूप में दर्ज किए जाते हैं। ये उच्च आवृत्ति से निम्न आवृत्ति की ओर धीरे-धीरे शिफ्ट होते हैं, क्योंकि शॉक बाहर की ओर बढ़ता है।

आमतौर पर टाइप-II बर्स्ट दो भागों में होते हैं—फंडामेंटल और हार्मोनिक उत्सर्जन। सिद्धांत के अनुसार फंडामेंटल उत्सर्जन अधिक शक्तिशाली होना चाहिए, लेकिन कई बार हार्मोनिक उत्सर्जन अधिक मजबूत पाया गया, जो वैज्ञानिकों के लिए एक पहेली था।

भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA) के वैज्ञानिकों के नेतृत्व में एक टीम ने इस रहस्य को सुलझाने के लिए दुनिया भर में स्थित CALLISTO उपकरणों और गौरिबिदनूर रेडियो वेधशाला के GLOSS स्पेक्ट्रोग्राफ से प्राप्त 58 टाइप-II रेडियो बर्स्ट के डेटा का विश्लेषण किया।

अध्ययन में पाया गया कि सूर्य के 75° से अधिक हेलियोग्राफिक देशांतर वाले सक्रिय क्षेत्रों से उत्पन्न घटनाओं में हार्मोनिक उत्सर्जन अधिक मजबूत होता है, जबकि 75° से कम देशांतर (सौर डिस्क के केंद्र के पास) से उत्पन्न घटनाओं में फंडामेंटल उत्सर्जन अधिक मजबूत होता है। यह अंतर सौर कोरोना में अपवर्तन प्रभाव, उत्सर्जन की दिशा और पृथ्वी से देखने के कोण के कारण होता है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, 75° से अधिक देशांतर वाले क्षेत्रों से आने वाले फंडामेंटल उत्सर्जन पृथ्वी तक नहीं पहुंच पाते या कमजोर हो जाते हैं, जबकि हार्मोनिक उत्सर्जन व्यापक कोण में फैलते हैं, इसलिए वे अधिक मजबूत दिखाई देते हैं।

इस शोध के प्रमुख अन्वेषक डॉ. के. ससिकुमार राजा और प्रथम लेखक ऋषिकेश जी. झा ने बताया कि भविष्य में मशीन लर्निंग तकनीकों का उपयोग कर ऐसे विशाल डेटा का और गहराई से अध्ययन किया जाएगा।

यह शोध ‘सोलर फिजिक्स’ जर्नल में प्रकाशित हुआ है और इससे सौर गतिविधियों और अंतरिक्ष मौसम की बेहतर समझ विकसित करने में मदद मिलेगी।

DARPG ने आयोजित किया 36वां राष्ट्रीय सुशासन वेबिनार, उत्कृष्ट पहलों के प्रसार पर जोर

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प्रधानमंत्री के निर्देशानुसार प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (DARPG) को जिला कलेक्टरों और अन्य अधिकारियों के साथ वर्चुअल कॉन्फ्रेंस/वेबिनार आयोजित करने के लिए कहा गया था, जिसमें प्रधानमंत्री पुरस्कार (लोक प्रशासन में उत्कृष्टता) के पूर्व विजेताओं को अपने अनुभव साझा करने के लिए आमंत्रित किया जाए, ताकि इन पहलों का व्यापक प्रसार और दोहराव सुनिश्चित किया जा सके।

इन्हीं निर्देशों के अनुपालन में DARPG ने अप्रैल 2022 से अब तक हर महीने एक वेबिनार आयोजित करते हुए कुल 36 राष्ट्रीय सुशासन वेबिनार आयोजित किए हैं। इन वेबिनारों का उद्देश्य प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार के तहत चयनित पहलों के अनुभवों को साझा करना और उन्हें अन्य स्थानों पर लागू करने के लिए प्रोत्साहित करना है। प्रत्येक वेबिनार में विभिन्न विभागों, राज्य सरकारों, जिला कलेक्टरों, राज्य प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थानों और केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थानों के लगभग 1000 अधिकारी भाग लेते हैं।

ये वेबिनार न केवल पहलों के संस्थागतकरण और स्थायित्व की वर्तमान स्थिति को प्रस्तुत करते हैं, बल्कि उनके विस्तार और अन्य क्षेत्रों में लागू किए जाने की संभावनाओं पर भी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं।

27 मार्च 2026 को आयोजित 36वें वेबिनार में ‘जिलों का समग्र विकास’ विषय के अंतर्गत वर्ष 2023 और 2024 के प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित दो पहलों को प्रस्तुत किया गया। इसमें मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले की पहल को डॉ. हरिदास फाटिंग (निदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं एवं परियोजना निदेशक, एड्स नियंत्रण सोसायटी) द्वारा तथा ओडिशा के कोरापुट जिले की पहल को वी. कीर्ति वासन (कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट, गंजाम) द्वारा प्रस्तुत किया गया।

यह वेबिनार DARPG के अतिरिक्त सचिव पुनीत यादव की अध्यक्षता में आयोजित हुआ और इसमें विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। देशभर के 620 से अधिक स्थानों से राज्य एवं केंद्र सरकार के अधिकारी, जिला कलेक्टर और प्रशिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि इस वेबिनार से जुड़े।

यह पहल देश में सुशासन के सफल मॉडलों के प्रसार और उनके व्यापक क्रियान्वयन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

जल जीवन मिशन 2.0 के तहत मेघालय ने केंद्र के साथ सुधार-आधारित MoU पर किए हस्ताक्षर

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ग्रामीण जल आपूर्ति को परिणाम-आधारित और सेवा-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए मेघालय, जल जीवन मिशन (JJM) 2.0 के तहत केंद्र सरकार के साथ सुधार-आधारित समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करने वाला 12वां राज्य बन गया है। यह कदम राज्य के JJM 2.0 के सुधार-आधारित कार्यान्वयन ढांचे में औपचारिक प्रवेश को दर्शाता है, जिसे 10 मार्च 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी दी गई थी।

यह MoU केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल, जल शक्ति राज्य मंत्री वी. सोमन्ना तथा मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा की वर्चुअल उपस्थिति में हस्ताक्षरित हुआ।

बैठक में मेघालय सरकार के पीएचई मंत्री मार्कुइज़ एन. मराक, आयुक्त एवं सचिव प्रवीण बक्शी, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (DDWS) के सचिव अशोक के. के. मीना, राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के अतिरिक्त सचिव एवं मिशन निदेशक कमल किशोर सोअन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में DDWS के सचिव अशोक के. के. मीना ने कहा कि यह MoU केवल पाइपलाइन बिछाने तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर सतत जल सेवाओं को सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। उन्होंने विकेंद्रीकरण और सामुदायिक भागीदारी पर जोर देते हुए बताया कि ग्राम पंचायतों और गांव जल एवं स्वच्छता समितियों (VWSCs) को जल आपूर्ति प्रणालियों के संचालन और प्रबंधन में सशक्त बनाया जाएगा।

केंद्रीय मंत्री सी. आर. पाटिल ने मेघालय की प्रगति की सराहना करते हुए बताया कि राज्य ने 83% से अधिक ग्रामीण नल जल कवरेज हासिल कर लिया है और जल्द ही 100% लक्ष्य प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि जल जीवन मिशन की समयसीमा को दिसंबर 2028 तक बढ़ाया गया है, और इसके लिए अतिरिक्त ₹1.51 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिसमें 2025–26 के बजट में लगभग ₹67,300 करोड़ आवंटित किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हर घर तक स्वच्छ पेयजल और बेहतर स्वच्छता व्यवस्था आवश्यक है। उन्होंने जल संरक्षण और सतत जल प्रबंधन पर भी जोर दिया तथा मनरेगा और अन्य योजनाओं के माध्यम से जल स्रोतों को मजबूत करने की बात कही।

मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने केंद्र सरकार और जल शक्ति मंत्रालय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मेघालय, जो पहले ग्रामीण नल जल कवरेज में पिछड़े राज्यों में था, अब 83.59% कवरेज तक पहुंच गया है। उन्होंने राज्य की जल नीति (2019) और क्लाइमेट काउंसिल जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए बताया कि विभिन्न विभाग मिलकर जल प्रबंधन पर काम कर रहे हैं।

यह सुधार-आधारित MoU सुनिश्चित करेगा कि हर ग्रामीण परिवार को पर्याप्त मात्रा और निर्धारित गुणवत्ता के साथ नियमित रूप से पेयजल उपलब्ध हो। साथ ही, सामुदायिक भागीदारी और संरचनात्मक सुधारों के माध्यम से जल आपूर्ति प्रणालियों का सतत संचालन एवं रखरखाव सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे ग्रामीण जीवन स्तर में सुधार और दीर्घकालिक जल सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा।

भारत को जापान से 16,420 करोड़ रुपये की ODA सहायता, चार प्रमुख परियोजनाओं को मिलेगी गति

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जापान सरकार ने भारत को शहरी परिवहन, स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्रों में चार महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए 275.858 बिलियन जापानी येन (लगभग 16,420 करोड़ रुपये) की आधिकारिक विकास सहायता (ODA) ऋण देने की प्रतिबद्धता जताई है। ये परियोजनाएं पंजाब, कर्नाटक और महाराष्ट्र राज्यों में लागू की जाएंगी।

24 मार्च 2026 को भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग के संयुक्त सचिव श्री आलोक तिवारी और भारत में जापान के राजदूत केइइची ओनो के बीच नोट्स का आदान-प्रदान किया गया। इसके साथ ही भारत सरकार और जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) के बीच ऋण समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए गए।

इन परियोजनाओं में “बेंगलुरु मेट्रो रेल परियोजना (फेज 3)” (102.480 बिलियन येन), “मुंबई मेट्रो लाइन 11 परियोजना” (92.400 बिलियन येन), “महाराष्ट्र में तृतीयक स्वास्थ्य सेवा, चिकित्सा एवं नर्सिंग शिक्षा प्रणाली सुदृढ़ीकरण परियोजना” (62.294 बिलियन येन) और “पंजाब में सतत बागवानी को बढ़ावा देने की परियोजना” (18.684 बिलियन येन) शामिल हैं।

बेंगलुरु मेट्रो परियोजना का उद्देश्य बढ़ते यातायात दबाव को कम करना, शहरी परिवहन प्रणाली को मजबूत करना, आर्थिक विकास को बढ़ावा देना और प्रदूषण कम कर पर्यावरण सुधार करना है। इसी प्रकार मुंबई मेट्रो लाइन 11 परियोजना भी यातायात जाम कम करने, शहरी विकास को प्रोत्साहित करने और प्रदूषण में कमी लाने में सहायक होगी।

महाराष्ट्र में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी परियोजना का उद्देश्य तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं, मेडिकल कॉलेजों और नर्सिंग संस्थानों को सुदृढ़ कर चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच को बेहतर बनाना है, जिससे सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) को बढ़ावा मिलेगा।

पंजाब में सतत बागवानी परियोजना किसानों की आय बढ़ाने, उच्च मूल्य वाली फसलों को प्रोत्साहित करने, बुनियादी ढांचे के विकास और क्षमता निर्माण के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और सतत सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देगी।

भारत और जापान के बीच 1958 से विकास सहयोग का मजबूत इतिहास रहा है। यह नई पहल दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को और मजबूत करेगी तथा उनके रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को और सुदृढ़ बनाएगी।

रक्षा मंत्रालय ने 858 करोड़ रुपये के दो महत्वपूर्ण रक्षा सौदों पर किए हस्ताक्षर

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रक्षा मंत्रालय ने 27 मार्च 2026 को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन-2 में कुल 858 करोड़ रुपये के दो महत्वपूर्ण अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए। ये अनुबंध टुंगुस्का वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली की खरीद और P8I लंबी दूरी के समुद्री टोही विमान के डिपो स्तर निरीक्षण से संबंधित हैं।

टुंगुस्का वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली

भारतीय सेना के लिए 445 करोड़ रुपये की लागत से टुंगुस्का वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली की खरीद का अनुबंध रूस की कंपनी JSC रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के साथ किया गया। यह समझौता रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में संपन्न हुआ। ये अत्याधुनिक मिसाइलें विमान, ड्रोन और क्रूज मिसाइल जैसे हवाई खतरों के खिलाफ भारत की बहुस्तरीय वायु रक्षा क्षमता को मजबूत करेंगी। साथ ही, यह समझौता भारत-रूस के रणनीतिक रक्षा सहयोग को और सुदृढ़ करेगा।

P8I विमान का निरीक्षण

भारतीय नौसेना के P8I लंबी दूरी के समुद्री टोही विमानों के डिपो स्तर निरीक्षण के लिए 413 करोड़ रुपये का अनुबंध बोइंग इंडिया डिफेंस प्राइवेट लिमिटेड (बोइंग की पूर्ण स्वामित्व वाली भारतीय सहायक कंपनी) के साथ ‘बाय इंडियन’ श्रेणी के तहत किया गया, जिसमें 100% स्वदेशी सामग्री शामिल है। यह अनुबंध देश के भीतर ही मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) सुविधा के माध्यम से P8I बेड़े के रखरखाव को सुनिश्चित करेगा। यह पहल आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता के अनुरूप है।

इन समझौतों से भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूती मिलने के साथ-साथ स्वदेशीकरण और तकनीकी आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिलेगा।

निर्माण क्षेत्र में कौशल विकास को बढ़ावा: NCB और UltraTech Cement के बीच MoU हस्ताक्षरित

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 भारत के निर्माण क्षेत्र में कौशल विकास और क्षमता निर्माण को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, नेशनल काउंसिल फॉर सीमेंट एंड बिल्डिंग मैटेरियल्स (NCB) ने एक प्रमुख सीमेंट निर्माता कंपनी के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

यह MoU आज एनसीबी, बल्लभगढ़ में एनसीबी के महानिदेशक डॉ. एल. पी. सिंह और अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड के तकनीकी सेवाओं के प्रमुख इंजीनियर राहुल गोयल द्वारा हस्ताक्षरित किया गया।

इस अवसर पर डॉ. एल. पी. सिंह ने कहा कि यह सहयोग निर्माण क्षेत्र में क्षमता निर्माण को बढ़ावा देगा। उन्होंने विश्वास जताया कि इस पहल के तहत अगले 3–5 वर्षों में बड़ी संख्या में पेशेवरों और श्रमिकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

यह साझेदारी देशभर में संरचित प्रशिक्षण और प्रमाणन कार्यक्रमों पर केंद्रित होगी, जिसका उद्देश्य सिविल इंजीनियरों, रेडी-मिक्स कंक्रीट (RMC) पेशेवरों, ठेकेदारों, निर्माण श्रमिकों और राजमिस्त्रियों की क्षमता को बढ़ाना है। प्रशिक्षण में सामग्री गुणवत्ता परीक्षण, कंक्रीट मिश्रण अनुपात, स्थायित्व और सतत निर्माण प्रथाओं जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल होंगे।

इस पहल के अंतर्गत कार्यशालाएं, साइट डेमोंस्ट्रेशन, तकनीकी सेमिनार तथा संयंत्रों और RMC सुविधाओं के दौरे भी आयोजित किए जाएंगे, जिससे व्यावहारिक समझ और तकनीकी कौशल को और मजबूत किया जा सके।

यह सहयोग भारत सरकार की प्रमुख योजनाओं, विशेष रूप से ‘स्किल इंडिया मिशन’ के अनुरूप है और देश के बढ़ते बुनियादी ढांचे और आवास क्षेत्र की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक कुशल कार्यबल के विकास में सहायक सिद्ध होगा।

QS रैंकिंग 2026 में भारतीय कृषि संस्थानों की ऐतिहासिक एंट्री, ICAR के संस्थानों ने बनाया वैश्विक पहचान

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 विकसित भारत के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए भारतीय कृषि संस्थानों ने पहली बार QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स (विषयवार) 2026 में अपनी जगह बनाई है। यह उपलब्धि विशेष महत्व रखती है, क्योंकि दिसंबर 2025 में मुख्य सचिवों के सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री ने कुशल मानव संसाधन विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया था।

इस राष्ट्रीय प्राथमिकता के अनुरूप, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), जो कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करती है, राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान, शिक्षा एवं विस्तार प्रणाली (NAREES) के तहत एक विश्वस्तरीय, बहु-विषयक और शोध-आधारित शिक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयासरत रही है। 25 मार्च को ब्रिटेन की संस्था QS क्वाक्वारेली साइमंड्स द्वारा जारी रैंकिंग में 1,900 से अधिक विश्वविद्यालयों के 21,000 से ज्यादा शैक्षणिक कार्यक्रमों का मूल्यांकन किया गया।

पहली बार ICAR के दो संस्थानों ने इस प्रतिष्ठित वैश्विक सूची में स्थान प्राप्त किया है। ICAR-भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI), बरेली ने 51–100 रैंकिंग बैंड में जगह बनाई है और यह पशु चिकित्सा विज्ञान श्रेणी में शीर्ष 100 में शामिल होने वाला एकमात्र भारतीय संस्थान बन गया है। वहीं ICAR-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली ने कृषि एवं वानिकी श्रेणी में 151–200 बैंड में स्थान प्राप्त कर वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है।

कृषि एवं वानिकी श्रेणी में कुल 475 वैश्विक संस्थानों में से 10 भारतीय विश्वविद्यालय शामिल हुए हैं। IARI के साथ 151–200 बैंड में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय और IIT खड़गपुर भी शामिल हैं, जबकि तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय (TNAU) 201–250 बैंड में स्थान पर है। इसके अलावा चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार ने भी 301–350 बैंड में पहली बार प्रवेश किया है।

DARE के सचिव एवं ICAR के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने कहा कि ICAR के डीम्ड विश्वविद्यालयों का यह प्रदर्शन कृषि-खाद्य और स्वास्थ्य प्रणालियों में उनके बहुआयामी योगदान का प्रमाण है। वैश्विक स्तर पर कड़ी प्रतिस्पर्धा के बावजूद इन संस्थानों ने शोध उत्कृष्टता के साथ-साथ सामाजिक प्रभाव में भी अपनी मजबूत पहचान बनाई है। ICAR-IARI और IVRI का यह प्रदर्शन उनके समग्र दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसमें मूलभूत शोध, अनुप्रयुक्त विज्ञान, और जमीनी स्तर तक पहुंच शामिल है।

जैसे-जैसे भारत विकसित भारत की ओर अग्रसर हो रहा है, ICAR के प्रमुख संस्थानों को मिली यह वैश्विक पहचान इस बात का संकेत है कि देश की कृषि उच्च शिक्षा अब न केवल विश्व के साथ कदम मिला रही है, बल्कि उत्कृष्टता के नए मानक भी स्थापित कर रही है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने CPES और IES अधिकारियों को किया संबोधित, राष्ट्र निर्माण में योगदान पर दिया जोर

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केंद्रीय विद्युत अभियांत्रिकी सेवा (CPES) और भारतीय आर्थिक सेवा (IES) के अधिकारियों ने आज (27 मार्च 2026) राष्ट्रपति भवन में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की।

अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि वे भारत की प्रगति के अग्रिम पंक्ति में खड़े हैं और उनके निर्णय एक मजबूत तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सहायक होंगे। उन्होंने कहा कि ये अधिकारी नीतियों के निर्माण और सुधारों के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, जिससे समावेशी और सतत विकास को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने अधिकारियों को समर्पण और जुनून के साथ कार्य करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में कई चुनौतियाँ आएंगी, लेकिन ये चुनौतियाँ राष्ट्र निर्माण में सार्थक योगदान देने के अवसर भी प्रदान करती हैं। उन्होंने जिज्ञासा, नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता और निरंतर सीखने की भावना बनाए रखने पर जोर दिया।

केंद्रीय विद्युत अभियांत्रिकी सेवा (CPES) के अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि बिजली औद्योगिक विकास, नवाचार, बेहतर जीवन स्तर और देश की समग्र सामाजिक-आर्थिक प्रगति की आधारशिला है। उन्होंने बताया कि CPES ने विद्युत उत्पादन, संचरण और वितरण के क्षेत्रों में योजना और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, साथ ही बिजली प्रणालियों की गुणवत्ता, विश्वसनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित की है। उन्होंने कहा कि सुदृढ़ इंजीनियरिंग प्रथाओं और नवाचार के माध्यम से देश की ऊर्जा संरचना को मजबूत करने में CPES अधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।

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भारतीय आर्थिक सेवा (IES) के अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि तेजी से बदलते वैश्विक और घरेलू परिदृश्य में आर्थिक योजना और उसके क्रियान्वयन की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने कहा कि IES अधिकारियों की भूमिका सतत विकास सुनिश्चित करने, महंगाई को नियंत्रित करने, रोजगार के अवसर बढ़ाने, असमानताओं को कम करने और जटिल आर्थिक परिस्थितियों में अर्थव्यवस्था का मार्गदर्शन करने में महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने अधिकारियों को यह याद रखने की सलाह दी कि हर आंकड़े के पीछे एक मानवीय कहानी होती है। किसी भी आर्थिक नीति का वास्तविक माप केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि उसके परिणामों में होता है—जो लोगों के जीवन में सुधार लाए, विशेषकर सबसे कमजोर वर्गों के लिए।

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खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026:-58 किग्रा महिला वेटलिफ्टिंग में अरुणाचल की अनाई वांग्सू ने जीता स्वर्ण

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रायपुर- रायपुर में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के अंतर्गत पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के खेल परिसर में आज सीनियर महिला वेटलिफ्टिंग (58 किलोग्राम भार वर्ग) प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। इस प्रतिस्पर्धा में देशभर की प्रतिभाशाली महिला खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन कर दर्शकों का मन मोह लिया।

प्रतियोगिता में अरुणाचल प्रदेश की अनाई वांग्सू (Anai Wangsu) ने बेहतरीन ताकत और तकनीक का प्रदर्शन करते हुए 169 किलोग्राम कुल वजन उठाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उन्होंने स्नैच में 74 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 95 किलोग्राम उठाकर शीर्ष स्थान हासिल किया।

ओडिशा की मिना सांता (Mina Santa) ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 165 किलोग्राम के कुल वजन के साथ रजत पदक जीता। वहीं ओडिशा की ही मीना सिंह (Mina Singh) ने 161 किलोग्राम वजन उठाकर कांस्य पदक पर कब्जा जमाया।

प्रतियोगिता में असम की मार्टिना मिली, तारा सोनवाल तथा आंध्र प्रदेश की जी. लेनिन एस प्रिया सहित अन्य खिलाड़ियों ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। सभी प्रतिभागियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली, जहां हर सफल लिफ्ट पर दर्शकों की तालियां गूंज उठीं।

यह प्रतियोगिता न केवल महिला खिलाड़ियों की शक्ति और आत्मविश्वास का प्रतीक बनी, बल्कि आदिवासी क्षेत्रों की उभरती खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच भी प्रदान कर रही है। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के माध्यम से देश की बेटियां खेल के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छूने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही हैं।

महासमुंद में बड़ी कार्रवाई: छह गांजा तस्कर गिरफ्तार, 1.12 करोड़ का माल जब्त

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 महासमुंद (छत्तीसगढ़)। जिले की पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए छह गांजा तस्करों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में अवैध गांजा बरामद किया गया है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 1.12 करोड़ रुपये आंकी गई है।


पुलिस के अनुसार, आरोपियों से कुल 2 क्विंटल 25 किलो गांजा जब्त किया गया। तस्कर ओडिशा से गांजा लेकर मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश की ओर तस्करी के इरादे से जा रहे थे।

यह कार्रवाई राष्ट्रीय राजमार्ग-53 पर रेहटीखोल के पास की गई, जहां सिंघोड़ा पुलिस ने घेराबंदी कर एक पिकअप वाहन को रोका। तलाशी के दौरान वाहन में छिपाकर रखी गई नौ बोरियों से कुल 213 पैकेट गांजा बरामद किया गया।

गिरफ्तार आरोपियों में दो मध्यप्रदेश और चार उत्तर प्रदेश के निवासी शामिल हैं। उनकी पहचान सतीश गुप्ता, घनश्याम गुप्ता, सूरज गुप्ता, योगेश कुशवाहा, हरिबाबू वर्मा और रामबाबू वर्मा के रूप में हुई है।

पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट की धारा 20(बी) के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। फिलहाल आरोपियों से पूछताछ जारी है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।

CG NEWS : दिनदहाड़े नर्स पर जानलेवा हमला, चाकू घोंपकर फरार आरोपी

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कोरबा। शहर में अपराध का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी कड़ी में सीएसईबी चौक से पंप हाउस जाने वाले मार्ग पर शुक्रवार को एक नर्स पर अज्ञात युवकों ने चाकू से जानलेवा हमला कर दिया। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया।


प्राप्त जानकारी के अनुसार, करीब 25 वर्षीय युवती शहर की एक पैथोलॉजी लैब में नर्स के रूप में कार्यरत है। ड्यूटी समाप्त कर वह अपने घर लौट रही थी। जैसे ही वह पंप हाउस कॉलोनी के पास पहुंची, पीछे से आए दो अज्ञात युवकों ने उस पर अचानक चाकू से हमला कर दिया।

हमला इतना अचानक था कि आसपास मौजूद लोग कुछ समझ नहीं पाए। प्रत्यक्षदर्शियों ने आरोपियों को पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन वे मौके से फरार हो गए।

घटना में युवती गंभीर रूप से घायल हो गई। स्थानीय लोगों की मदद से उसे तत्काल मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत नाजुक बनी हुई है। चिकित्सकों की टीम उसका उपचार कर रही है।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि आरोपियों की पहचान की जा सके। पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

दिनदहाड़े हुई इस घटना ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने पुलिस गश्त बढ़ाने और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

रामनवमी पर दिव्य नजारा: अयोध्या में रामलला के ललाट पर सूर्यदेव का तिलक, श्रद्धालु हुए भावविभोर

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 अयोध्या। पावन पर्व रामनवमी के अवसर पर अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि मंदिर में भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का आयोजन इस वर्ष अत्यंत भव्य और दिव्य रूप में किया जा रहा है। दोपहर ठीक 12 बजे एक अद्भुत और अलौकिक दृश्य देखने को मिला, जब सूर्य की किरणों ने रामलला के ललाट पर तिलक किया। यह दिव्य क्षण लगभग चार मिनट तक चला और श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।


धार्मिक मान्यता के अनुसार यही समय भगवान श्रीराम के जन्म का माना जाता है। ऐसे में सूर्य तिलक का ठीक उसी क्षण होना इस आयोजन को और भी विशेष बना गया। इस दिव्य दृश्य को देखने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे, वहीं लाइव प्रसारण के माध्यम से करोड़ों लोगों ने भी इस ऐतिहासिक पल के दर्शन किए।

इस वर्ष रामनवमी पर रवि योग और सर्वार्थसिद्धि योग का विशेष संयोग भी बना है, जिससे इस पर्व का धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ गया है। सूर्य तिलक के साथ ही रामलला का अभिषेक, श्रृंगार और विशेष पूजा-अर्चना विधि-विधान से संपन्न की गई।

इस भव्य आयोजन से पहले मंदिर प्रशासन द्वारा तीन दिनों तक लगातार सूर्य तिलक का सफल ट्रायल किया गया। बृहस्पतिवार से शुरू हुए परीक्षण में दोपहर 12 बजे सूर्य की किरणों को सटीक रूप से रामलला के मस्तक तक पहुंचाने की प्रक्रिया को परखा गया, जो पूरी तरह सफल रही। शुक्रवार को भी इसी प्रक्रिया को दोहराया गया।

मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, सूर्य तिलक के लिए अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया है। मंदिर के ऊपरी तल पर विशेष रिफ्लेक्टर, लेंस और मिरर सिस्टम लगाए गए हैं। सूर्य की किरणें इन लेंसों के माध्यम से दूसरे तल पर लगे दर्पण तक पहुंचती हैं और वहां से परावर्तित होकर लगभग 75 मिलीमीटर के आकार में रामलला के ललाट पर तिलक के रूप में दिखाई देती हैं। यह पूरी प्रक्रिया सूर्य की दिशा और गति के अनुसार सटीक रूप से निर्धारित की गई है।

रामनगरी अयोध्या में इस दिव्य आयोजन ने श्रद्धालुओं के मन में गहरी आस्था और भक्ति का संचार कर दिया है। रामनवमी का यह पावन पर्व इस बार एक ऐतिहासिक और अविस्मरणीय रूप में मनाया जा रहा है।

वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच बड़ा फैसला, राज्यों को 70% LPG आवंटन के निर्देश

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Global Energy Crisis : मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अलर्ट मोड में आ गई है और देशभर में ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए तेजी से कदम उठा रही है। सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के वितरण को बढ़ाकर 70 प्रतिशत तक करें, ताकि उद्योगों और व्यवसायों पर पड़ रहे दबाव को कम किया जा सके।


इस संबंध में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव डॉ. नीजर मित्तल ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर संशोधित आवंटन योजना की जानकारी दी है। नई व्यवस्था के तहत मौजूदा 50 प्रतिशत कॉमर्शियल एलपीजी आवंटन के अलावा अतिरिक्त 20 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी, जिससे कुल आवंटन 70 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा। यह स्तर संकट से पहले की स्थिति के करीब माना जा रहा है।

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट किया है कि इस बढ़े हुए आवंटन का लाभ प्राथमिकता के आधार पर स्टील, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल और अन्य श्रम-प्रधान उद्योगों को दिया जाएगा। खासतौर पर उन क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा जहां पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की सुविधा उपलब्ध नहीं है।

सरकार का यह कदम ऐसे समय पर आया है जब हाल ही में आम जनता को यह भरोसा दिलाया गया है कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कोई कमी नहीं है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ईंधन आपूर्ति तंत्र पूरी तरह नियंत्रण में है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है।

इस बीच सरकार ने अफवाहों से बचने की अपील भी की है। अधिकारियों का कहना है कि घरेलू एलपीजी की उपलब्धता पर्याप्त है और उत्पादन बढ़ाया जा रहा है, ताकि भविष्य में भी आपूर्ति बाधित न हो।

गौरतलब है कि ईरान पर अमेरिका और इजरायल की ओर से किए गए हमलों का चौथा हफ्ता जारी है और अब तक इस संघर्ष के समाप्त होने के कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। इसी बीच Strait of Hormuz के प्रभावित होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है।

भारत में भी इसका असर साफ दिखाई दे रहा है। एक ओर प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि हुई है, वहीं औद्योगिक ईंधन डीजल के दाम भी बढ़ाए गए हैं। इससे पहले घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए कॉमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति को सीमित कर दिया गया था, ताकि आम उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

कुल मिलाकर, वैश्विक तनाव का सीधा असर भारत के ऊर्जा क्षेत्र पर पड़ रहा है और सरकार लगातार संतुलन बनाने की कोशिश में जुटी हुई है, ताकि आम लोगों और उद्योगों दोनों की जरूरतें सुचारु रूप से पूरी की जा सकें।

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