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बिलासपुर में आकाशीय बिजली का कहर, बारिश के दौरान 3 किसानों की मौत

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बिलासपुर- जिले में बारिश के दौरान आकाशीय बिजली गिरने से तीन किसानों की मौत हो गई। यह दर्दनाक हादसा लखोदना और मानपुर क्षेत्र में हुआ, जहां किसान बारिश के बीच अपने खेतों में काम कर रहे थे। अचानक तेज गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने से तीनों इसकी चपेट में आ गए।

घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोगों में हड़कंप मच गया। स्थानीय लोगों ने तत्काल घटना की सूचना संबंधित अधिकारियों और पुलिस को दी। इसके बाद मौके पर पहुंची टीम ने आवश्यक कार्रवाई शुरू की।

खेत में काम करने के दौरान हुआ हादसा

जानकारी के अनुसार, बारिश के दौरान किसान अपने कृषि कार्य में लगे हुए थे। इसी दौरान मौसम अचानक बदला और तेज गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरी। बिजली की चपेट में आने से तीन किसानों की मौके पर ही मौत हो गई।

हादसे के बाद संबंधित क्षेत्रों में शोक का माहौल है। घटना ने एक बार फिर बारिश और गरज-चमक के दौरान खेतों में काम करने वाले किसानों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

बारिश और आकाशीय बिजली के दौरान सावधानी जरूरी

मौसम विभाग और प्रशासन द्वारा आमतौर पर गरज-चमक के दौरान लोगों को खुले स्थानों, खेतों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी जाती है। विशेषकर किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से मौसम खराब होने पर सुरक्षित स्थान पर रहने की अपील की जाती है।

बिलासपुर में हुई इस घटना के बाद प्रशासन द्वारा भी लोगों से आकाशीय बिजली और खराब मौसम के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतने की अपील की जा रही है।

परिजनों में शोक का माहौल

तीन किसानों की मौत की खबर से उनके परिवारों और आसपास के गांवों में शोक की लहर है। हादसे के बाद प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है तथा नियमानुसार राहत एवं सहायता संबंधी प्रक्रिया की जानकारी जुटाई जा रही है।

रायपुर में 61 ट्रैफिक पुलिसकर्मियों का सम्मान, ड्यूटी के दौरान अपराधियों को पकड़ने और संदिग्ध गतिविधियों पर कार्रवाई के लिए मिली सराहना

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रायपुर- शहर में यातायात व्यवस्था संभालने के साथ-साथ अपराध नियंत्रण और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखते हुए उल्लेखनीय कार्य करने वाले 61 ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को सम्मानित किया गया। पुलिसकर्मियों को यह सम्मान उनकी सतर्कता, तत्परता और ड्यूटी के दौरान किए गए सराहनीय कार्यों के लिए प्रदान किया गया।

यातायात पुलिस की जिम्मेदारी केवल सड़कों पर यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना ही नहीं है, बल्कि ड्यूटी के दौरान सामने आने वाली संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल कार्रवाई करना भी है। इसी तरह के मामलों में सक्रियता दिखाने वाले पुलिसकर्मियों को उनके कार्य के लिए प्रोत्साहित किया गया।

अपराधियों को पकड़ने में निभाई अहम भूमिका

सम्मानित किए गए पुलिसकर्मियों ने यातायात ड्यूटी के दौरान संदिग्ध व्यक्तियों और गतिविधियों पर नजर रखते हुए कई मामलों में पुलिस को महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराई। उनकी सतर्कता के चलते अपराध से जुड़े मामलों में कार्रवाई करने में पुलिस को मदद मिली।

पुलिस विभाग के अनुसार, ट्रैफिक ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मियों की सक्रियता और सतर्क निगरानी से अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी में भी सहायता मिली। कई मामलों में पुलिसकर्मियों ने मौके पर तत्परता दिखाते हुए संदिग्ध गतिविधियों को गंभीरता से लिया।

सतर्क पुलिसिंग को प्रोत्साहन

कार्यक्रम के दौरान पुलिसकर्मियों के कार्यों की सराहना करते हुए कहा गया कि यातायात व्यवस्था के साथ-साथ कानून-व्यवस्था बनाए रखने में भी ट्रैफिक पुलिस की महत्वपूर्ण भूमिका है। ड्यूटी के दौरान छोटी-छोटी गतिविधियों पर नजर रखना और किसी भी संदिग्ध स्थिति में तत्काल प्रतिक्रिया देना प्रभावी पुलिसिंग का हिस्सा है।

61 पुलिसकर्मियों का सम्मान किए जाने से अन्य पुलिसकर्मियों को भी बेहतर और जिम्मेदारी के साथ ड्यूटी करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। विभाग ने ऐसे सराहनीय कार्य करने वाले पुलिसकर्मियों को आगे भी प्रोत्साहित करने की बात कही।

यातायात व्यवस्था के साथ सुरक्षा की जिम्मेदारी

रायपुर जैसे बड़े शहर में बढ़ते यातायात दबाव के बीच ट्रैफिक पुलिसकर्मी लगातार सड़कों पर ड्यूटी करते हैं। इस दौरान यातायात नियंत्रण के साथ नागरिकों की सुरक्षा और संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी भी उनकी जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

61 ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को मिला यह सम्मान सतर्कता, कर्तव्यनिष्ठा और बेहतर पुलिसिंग के प्रयासों को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

रेलवे के 14 AC कोच कर्मचारियों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, अतिरिक्त कार्य भत्ता देने का आदेश बरकरार

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बिलासपुर- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के 14 AC कोच कर्मचारियों को अतिरिक्त कार्य के लिए भत्ता दिए जाने के मामले में कर्मचारियों के पक्ष में फैसला बरकरार रखा है। अदालत ने रेलवे प्रशासन की ओर से दायर याचिका को खारिज करते हुए पूर्व में दिए गए आदेश को कायम रखा।

मामला AC कोचों में कार्यरत कर्मचारियों को उनके नियमित दायित्वों के अतिरिक्त किए जाने वाले कार्य के लिए अतिरिक्त कार्य भत्ता (Additional Duty Allowance) दिए जाने से जुड़ा था। कर्मचारियों की ओर से इस भत्ते का दावा किया गया था, जिसके बाद मामला न्यायालय तक पहुंचा।

रेलवे प्रशासन ने दी थी चुनौती

रेलवे प्रशासन ने कर्मचारियों को अतिरिक्त कार्य भत्ता देने संबंधी पूर्व आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। रेलवे की ओर से आदेश पर पुनर्विचार की मांग की गई थी।

मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने रेलवे की याचिका को स्वीकार नहीं किया और कर्मचारियों को अतिरिक्त कार्य भत्ता देने संबंधी पूर्व आदेश को बरकरार रखा। इससे संबंधित 14 कर्मचारियों को राहत मिली है।

14 कर्मचारियों को मिलेगा लाभ

हाईकोर्ट के इस निर्णय का सीधा लाभ दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के संबंधित 14 AC कोच कर्मचारियों को मिलेगा। अदालत के आदेश के बाद कर्मचारियों के अतिरिक्त कार्य के एवज में देय भत्ते को लेकर उनकी स्थिति स्पष्ट हुई है।

रेलवे कर्मचारियों के लिए यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह मामला नियमित ड्यूटी के अतिरिक्त जिम्मेदारियां निभाने वाले कर्मचारियों को मिलने वाले भत्ते से संबंधित है।

रेलवे की याचिका खारिज

हाईकोर्ट ने मामले में रेलवे प्रशासन की याचिका को खारिज करते हुए पूर्व आदेश को प्रभावी रखा। इस फैसले के बाद संबंधित कर्मचारियों को अतिरिक्त कार्य भत्ता मिलने का रास्ता साफ हो गया है।

हाईकोर्ट के इस आदेश से दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के 14 कर्मचारियों को राहत मिली है।

धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2026 को हाईकोर्ट में चुनौती, राज्य सरकार से 3 सप्ताह में जवाब तलब

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बिलासपुर- छत्तीसगढ़ में लागू छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2026 और धर्म स्वतंत्रता नियम 2026 की संवैधानिक वैधता को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की युगल पीठ ने राज्य सरकार को अंतरिम आवेदन पर अपना जवाब प्रस्तुत करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है।

यह याचिका वी.एन. प्रसाद राव एवं अन्य की ओर से दायर की गई है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपना पक्ष रखा। याचिकाकर्ताओं ने नए कानून के कुछ प्रावधानों की संवैधानिकता पर सवाल उठाते हुए उन्हें मौलिक अधिकारों के अनुरूप नहीं होने का दावा किया है।

धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया को लेकर उठाए सवाल

याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में तर्क दिया गया कि कानून के तहत धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया में कई प्रशासनिक औपचारिकताएं और अनुमतियां निर्धारित की गई हैं। याचिका में दावा किया गया है कि स्वैच्छिक धर्म परिवर्तन के मामले में भी संबंधित व्यक्ति को निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा और इसकी जानकारी सार्वजनिक करने सहित कई औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी।

याचिकाकर्ता पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि धर्म परिवर्तन कराने वाले व्यक्ति के लिए पंजीकरण जैसी व्यवस्थाएं अनिवार्य की गई हैं। उनके अनुसार, कानून के कुछ प्रावधान अंतःकरण की स्वतंत्रता, धार्मिक स्वतंत्रता, निजता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े संवैधानिक अधिकारों को प्रभावित कर सकते हैं।

कड़े दंडात्मक प्रावधानों पर भी आपत्ति

याचिका में कानून के दंडात्मक प्रावधानों को लेकर भी आपत्ति जताई गई है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, कुछ परिस्थितियों में धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों में कठोर सजा और आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है। हालांकि, इन प्रावधानों को लेकर याचिकाकर्ताओं की दलीलें अभी अदालत के समक्ष विचाराधीन हैं।

अब सरकार के जवाब पर होगी आगे की सुनवाई

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को अंतरिम आवेदन पर अपना पक्ष रखने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है। अब सरकार के जवाब के बाद अदालत मामले में आगे की सुनवाई करेगी।

फिलहाल हाईकोर्ट ने कानून की संवैधानिक वैधता पर अंतिम निर्णय नहीं दिया है। मामला न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है और आगे की दिशा सरकार के जवाब तथा अदालत में होने वाली आगामी सुनवाई के बाद स्पष्ट होगी।

11 सूत्रीय मांगों को लेकर किसानों का प्रदेशव्यापी प्रदर्शन, 33 जिलों में ट्रैक्टर रैली निकालकर सौंपा ज्ञापन

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रायपुर- किसानों की विभिन्न समस्याओं और मांगों को लेकर भारतीय किसान संघ के आह्वान पर छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों में किसानों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान किसानों ने अपनी मांगों को लेकर ट्रैक्टर रैली निकाली और जिला मुख्यालय पहुंचकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।

किसानों ने कृषि क्षेत्र से जुड़ी 11 सूत्रीय मांगों को प्रमुखता से उठाते हुए सरकार का ध्यान किसानों की समस्याओं की ओर आकर्षित किया। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टरों के साथ रैली में शामिल हुए। किसानों ने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते हुए प्रशासन के माध्यम से सरकार तक अपनी बात पहुंचाई।

भारतीय किसान संघ का कहना है कि किसानों की समस्याओं का समाधान केवल घोषणाओं तक सीमित न रहकर जमीनी स्तर पर प्रभावी तरीके से किया जाना चाहिए। किसानों को खेती-किसानी में आने वाली विभिन्न परेशानियों, कृषि लागत, उपज के उचित मूल्य, सिंचाई, बिजली, खाद-बीज सहित अन्य विषयों पर राहत और समाधान की आवश्यकता है।

33 जिलों में एक साथ आंदोलन

किसान संघ के आह्वान पर प्रदेश के 33 जिलों में एक साथ प्रदर्शन किए जाने से आंदोलन को व्यापक स्वरूप मिला। जिला मुख्यालयों पर आयोजित कार्यक्रमों में किसानों ने अपनी स्थानीय समस्याओं के साथ-साथ प्रदेश स्तर की मांगों को भी प्रशासन के सामने रखा।

किसानों ने कहा कि कृषि क्षेत्र प्रदेश की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण जीवन की महत्वपूर्ण आधारशिला है। ऐसे में किसानों से जुड़ी समस्याओं का समय पर निराकरण किया जाना आवश्यक है।

प्रशासन को सौंपा ज्ञापन

प्रदर्शन के बाद किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने संबंधित जिला प्रशासन को 11 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से किसानों की मांगों पर आवश्यक कार्रवाई करने और सरकार तक उनकी बात पहुंचाने का आग्रह किया गया।

भारतीय किसान संघ ने स्पष्ट किया कि किसानों की मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होने की स्थिति में संगठन आगे भी किसानों के हित में अपनी आवाज उठाता रहेगा। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने एकजुट होकर अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने का संदेश दिया।

अवैध रेत परिवहन पर खनिज विभाग की बड़ी कार्रवाई, 4 हाईवा और 5 ट्रैक्टर जब्त

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बरबसपुर में 5 ट्रैक्टर और चिंगरौद में 4 हाईवा पर कार्रवाई, खनिज अधिनियम के तहत होगी कार्रवाई

महासमुंद- जिले में अवैध रेत उत्खनन एवं परिवहन के खिलाफ खनिज विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है। कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के निर्देशानुसार खनिज विभाग की टीम द्वारा लगातार निगरानी एवं जांच अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत विभाग ने अलग-अलग स्थानों पर कार्रवाई करते हुए 4 हाईवा और 5 ट्रैक्टर जब्त किए हैं। 

जानकारी के अनुसार, 5 अक्टूबर को खनिज विभाग की टीम ने ग्राम बरबसपुर में औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान रेत का अवैध परिवहन करते हुए 5 ट्रैक्टर पाए गए। विभागीय टीम ने सभी ट्रैक्टरों को मौके पर जब्त कर थाना तुमगांव पुलिस की अभिरक्षा में रखवाया है।

इसी क्रम में 6 अक्टूबर की मध्य रात्रि को ग्राम चिंगरौद में रेत के अवैध परिवहन की शिकायत मिलने पर खनिज विभाग की टीम मौके पर पहुंची। जांच के दौरान रेत से भरे 4 हाईवा वाहन पाए गए। टीम ने चारों वाहनों को जब्त कर थाना महासमुंद की अभिरक्षा में खड़ा कराया।

बिना वैध दस्तावेज के रेत परिवहन पर कार्रवाई

खनिज विभाग के अनुसार, रेत सहित गौण खनिजों के उत्खनन और परिवहन के लिए निर्धारित नियमों का पालन करना अनिवार्य है। वैध अनुमति एवं आवश्यक अभिवहन पास (Transit Pass) के बिना खनिज का परिवहन किया जाना नियमों का उल्लंघन है।

जब्त किए गए सभी वाहनों के विरुद्ध छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम, 2015 तथा खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। 

अवैध खनन और परिवहन पर लगातार नजर

खनिज विभाग द्वारा जिले में अवैध खनिज उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण को रोकने के लिए लगातार जांच अभियान चलाया जा रहा है। विभागीय टीम द्वारा संवेदनशील क्षेत्रों में वाहनों की जांच के साथ-साथ प्राप्त शिकायतों के आधार पर भी मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की जा रही है।

गौरतलब है कि महासमुंद जिले में इससे पहले भी अवैध खनिज परिवहन के खिलाफ कई कार्रवाई की जा चुकी हैं। विभाग का कहना है कि अवैध उत्खनन एवं परिवहन को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी। 

कुल 9 वाहन जब्त

इस कार्रवाई में खनिज विभाग ने दो अलग-अलग दिनों में कुल 9 वाहन जब्त किए हैं—

  • बरबसपुर: 5 ट्रैक्टर — 5 अक्टूबर

  • चिंगरौद: 4 हाईवा — 6 अक्टूबर

  • कुल: 9 वाहन

खनिज विभाग की इस कार्रवाई से जिले में अवैध रेत परिवहन करने वालों में हड़कंप की स्थिति है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि आगे भी अवैध उत्खनन एवं परिवहन की शिकायतों पर जांच कर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। 

महापुरुषों की जयंतियों और पुण्यतिथियों पर अवकाश नहीं, प्रेरणा का पाठ पढ़ाया जाए—शिक्षक गेंदलाल कोकडिया

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महासमुंद- वर्तमान समय में महापुरुषों का अभाव क्यों दिखाई दे रहा है? समाज में अपराध, भ्रष्टाचार, आतंक, हिंसा और विभिन्न प्रकार के संघर्ष समाप्त क्यों नहीं हो पा रहे हैं? क्या हमारी नई पीढ़ी महापुरुषों और शहीदों के जीवन, संघर्ष, त्याग और विचारों से पर्याप्त रूप से परिचित हो पा रही है? इन्हीं महत्वपूर्ण और जनसरोकार से जुड़े प्रश्नों को लेकर चेतना विकास एवं मूल्य शिक्षा कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला में शिक्षक गेंदलाल कोकडिया ने महापुरुषों एवं शहीदों की जयंतियों और पुण्यतिथियों पर दिए जाने वाले शासकीय अवकाश के उद्देश्य पर चर्चा करते हुए कहा कि इन महान व्यक्तित्वों को याद करने का वास्तविक उद्देश्य केवल छुट्टी मनाना नहीं, बल्कि उनके जीवन और विचारों से नई पीढ़ी को प्रेरणा देना होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि महापुरुषों और शहीदों की जयंतियों एवं पुण्यतिथियों पर विद्यालय और महाविद्यालय बंद रखने के बजाय उस दिन विशेष कक्षाएं, परिचर्चा, भाषण, वाद-विवाद, जीवनी-पाठ और मूल्य शिक्षा से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, तो विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम, सामाजिक जिम्मेदारी, त्याग, अनुशासन और नैतिक मूल्यों का विकास अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।

कोकडिया ने कहा कि आज की जेन-जी पीढ़ी आधुनिक तकनीक और सोशल मीडिया से तो तेजी से जुड़ रही है, लेकिन अनेक महापुरुषों के जीवन-संघर्ष और उनके विचारों से उसका जुड़ाव अपेक्षाकृत कम होता जा रहा है। ऐसे में महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथि को केवल अवकाश तक सीमित करने के बजाय उसे ‘प्रेरणा दिवस’ के रूप में मनाने की आवश्यकता है।

कार्यशाला में उपस्थित बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों ने भी अपने विचार रखे। प्रतिभागियों ने कहा कि अवकाश के दिन विद्यार्थी अक्सर अपना समय मनोरंजन, घूमने-फिरने और अन्य गतिविधियों में व्यतीत कर देते हैं। यदि इन्हीं अवसरों का उपयोग महापुरुषों और शहीदों के जीवन तथा उनके आदर्शों को समझाने में किया जाए, तो विद्यार्थियों में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

कार्यशाला में उपस्थित सभी लोगों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि महापुरुषों की जयंतियों और पुण्यतिथियों का महत्व केवल उन्हें याद करने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उनके विचारों को वर्तमान पीढ़ी के जीवन में उतारने का प्रयास होना चाहिए।

सभा ने सरकार से मांग की कि महापुरुषों एवं शहीदों की जयंतियों और पुण्यतिथियों पर विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में अवकाश देने के स्थान पर विशेष शिक्षण एवं प्रेरणात्मक कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। विद्यार्थियों को उस दिन संबंधित महापुरुष के जीवन, संघर्ष, विचार, त्याग और योगदान के बारे में विस्तार से पढ़ाया और बताया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ी उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर समाज और राष्ट्र के निर्माण में अपनी सकारात्मक भूमिका निभा सके।

छत्तीसगढ़ होम गार्ड्स, फायर और एसडीआरएफ के जवानों के लिए बैंक ऑफ़ बड़ौदा लाया आकर्षक सैलरी बेनिफिट्स

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रायपुर- नगर सेना, अग्निशमन, आपातकालीन सेवाएँ एवम् SDRF छत्तीसगढ़ और बैंक आफ बड़ौदा के मध्य 6 अक्टूबर 2026 को MOU संपादित किया गया है । इसमें विभाग के समस्त ऐसे निम्न आय वर्ग के स्वयंसेवकों एवम् कर्मचारियों,  जिन्हें 10 हजार से 50 हजार के मध्य वेतन/मानदेय वेतन प्राप्त होता है, के लिए जीवन बीमा, व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना एवम् अन्य सुविधाओं का लाभ सुनिश्चित किया गया है। इससे लाभान्वित होने वाले कर्मचारी/स्वयंसेवक अपना वेतन एकाउण्ट (खाता) बैंक आफ बड़ौदा के अपने जिला शाखा में खुलवा सकते हैं। सभी इकाई प्रमुखों को बैंक से समन्वय स्थापित कर उक्त कार्यवाही को शीघ्र पूर्ण करने निर्देशित किया गया है।

छत्तीसगढ़ राज्य के होमगार्ड, फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज (अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं) तथा एसडीआरएफ (SDRF) विभाग के कर्मचारियों और जवानों के लिए बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) द्वारा विशेष वेतन लाभ (Salary Benefits) की घोषणा की गई है। इस योजना के तहत जवानों और उनके परिवारों को कई बेहतरीन वित्तीय और बीमा सुरक्षा लाभ प्रदान किए जा रहे हैं।

प्रमुख विशेषताएँ एवं मिलने वाले लाभ

छत्तीसगढ़ राज्य के होमगार्ड, फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज (अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं) तथा एसडीआरएफ (SDRF) विभाग के कर्मचारियों और जवानों को 1 लाख तक का जीवन बीमा कवर, 40 लाख तक का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा,  40 लाख तक का हवाई दुर्घटना बीमा कवर, ड्यूटी के दौरान अतिरिक्त कवर- मूल व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा (PAI) का 25% अतिरिक्त कवर (10 लाख तक), दिव्यांगता लाभ- पूर्ण/स्थायी विकलांगता पर 40 लाख तक और आंशिक विकलांगता पर 30 लाख तक की आर्थिक सहायता दी जाएगी।

परिवार और बच्चों के लिए कल्याणकारी योजनाएं 

राज्य के होमगार्ड, फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज (अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं) तथा एसडीआरएफ (SDRF) विभाग के कर्मचारियों और जवानों  के पुत्री की विवाह के लिए 4 लाख तक की सहायता, बच्चों की शिक्षा के लिए 4 लाख तक का लाभ दिया जाएगा।

खाता और कार्ड की विशेषताएं

राज्य के होमगार्ड, फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज (अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं) तथा एसडीआरएफ (SDRF) विभाग के कर्मचारियों और जवानों  को  जीरो बैलेंस (Zero Balance) तिमाही औसत शेष (QAB) की सुविधा, लाइफटाइम फ्री रुपे प्लेटिनम डेबिट कार्ड (Rupay Platinum Debit Card) और सिलेक्ट वेरिएंट का मुफ्त क्रेडिट कार्ड प्रदाय किया जाएगा। उनके   परिवार के लिए 4 खातों तक और जीवनसाथी (पति-पत्नी) के खाते के लिए जीरो बैलेंस के साथ मुफ्त रुपे डेबिट कार्ड की सुविधा के अलावा अन्य बैंकिंग सुविधाएं में मुफ्त चेक बुक, डिमांड ड्राफ्ट (DD), आरटीजीएस (RTGS), नेफ्ट (NEFT) और एटीएम का असीमित उपयोग पूरी तरह नि:शुल्क है।

बैंक ऑफ़ बड़ौदा की इस पहल से राज्य की सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं में अपनी सेवाएं दे रहे इन जवानों और उनके परिवारों को बड़ी आर्थिक मजबूती और सहूलियतें प्राप्त होंगी।

विश्व दृष्टि दिवस पर खमतराई हाई स्कूल में नेत्र परीक्षण शिविर आयोजित

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आरंग- मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथलेश चौधरी के निर्देशन एवं खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. विजय लक्ष्मी अनंत के मार्गदर्शन में आज 8 अक्टूबर को “विश्व दृष्टि दिवस” के अवसर पर हाई स्कूल खमतराई में नेत्र परीक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों के नेत्र परीक्षण के लिए नेत्र सहायक अधिकारी सालिक नौरंगे विशेष रूप से उपस्थित रहे। हाई एवं मिडिल स्कूल के कुल 105 छात्र-छात्राओं का नेत्र परीक्षण किया गया, जिसमें 5 विद्यार्थियों में दृष्टि दोष पाया गया। इन विद्यार्थियों के चश्मे की जांच की गई। शासन से चश्मा प्राप्त होने के उपरांत नियमानुसार विद्यार्थियों को निःशुल्क चश्मा प्रदान किया जाएगा।

इस अवसर पर नेत्र सहायक अधिकारी सालिक नौरंगे द्वारा विद्यार्थियों को विश्व दृष्टि दिवस के महत्व एवं नेत्र सुरक्षा के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि आंखों को चोट लगने से बचाना, धूम्रपान से दूरी बनाए रखना, मोबाइल एवं कंप्यूटर स्क्रीन का अत्यधिक उपयोग न करना तथा स्क्रीन का उपयोग करते समय उचित दूरी एवं बीच-बीच में आंखों को आराम देना आवश्यक है। साथ ही संतुलित एवं पौष्टिक आहार लेने से आंखों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है। विद्यार्थियों को नियमित नेत्र जांच कराने तथा किसी भी प्रकार की दृष्टि संबंधी समस्या होने पर समय पर नेत्र चिकित्सक से परामर्श लेने के लिए भी जागरूक किया गया।

कार्यक्रम में प्राचार्य टिकेश्वरी चंद्राकर, प्रभारी प्रधान पाठक हरीश दीवान, सी.एल. एनेस्वरी, बबीता लहरे, सीमा राठौर, तारकेश्वर डडसेना, पुनेश्वर साहू, हेमा बंजारे, सौरभ साहू सहित विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।


तेलीबांधा चौक का नाम नहीं बदला जा रहा, किसी तरह का भ्रम न रखें : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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प्रदेश के 38 स्थानों पर विकसित होंगे ‘सेवा ज्योति संकल्प चौक’, तेलीबांधा चौक भी इनमें शामिल

मुख्यमंत्री ने कहा - न चौक का नाम बदल रहे हैं, न उसके मूल स्वरूप से कोई छेड़छाड़ की जा रही है

महतारी वंदन योजना की 32वीं किस्त होगी जारी, दुर्ग जिले को मिलेंगी विकास कार्यों की सौगात

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर के तेलीबांधा चौक के नाम परिवर्तन को लेकर उत्पन्न भ्रम को स्पष्ट करते हुए कहा है कि तेलीबांधा चौक का नाम नहीं बदला जा रहा है। न तो चौक के नाम में कोई परिवर्तन किया जा रहा है और न ही उसके मूल स्वरूप के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ की जा रही है।

मुख्यमंत्री साय ने मीडिया से चर्चा के दौरान कहा कि प्रदेश में 38 स्थानों पर ‘सेवा ज्योति संकल्प चौक’ के तहत विकसित किए जाने की घोषणा की गई है। इनमें रायपुर का तेलीबांधा चौक भी शामिल है। उन्होंने कहा कि इसे लेकर किसी को भी भ्रम में नहीं रहना चाहिए। तेलीबांधा चौक का नाम यथावत रहेगा, इसे केवल ‘सेवा ज्योति संकल्प’ की भावना के अनुरूप विकसित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में जनसेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर पूरे देश में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ में भी इसे ‘सेवा संकल्प अभियान’ के रूप में मनाया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि इसी क्रम में आज दुर्ग में आयोजित ‘सेवा सेतु’ कार्यक्रम में वे शामिल होंगे। कार्यक्रम के दौरान प्रदेश की माताओं-बहनों के लिए संचालित महतारी वंदन योजना की 32वीं किस्त जारी की जाएगी। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर प्रदेश की सभी माताओं-बहनों को शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि दुर्ग जिले को इस अवसर पर विभिन्न विकास एवं जनकल्याणकारी कार्यों की सौगात भी मिलेगी। उन्होंने कहा कि सेवा, सुशासन और जनकल्याण की भावना के साथ राज्य सरकार छत्तीसगढ़ के प्रत्येक क्षेत्र और प्रत्येक वर्ग के विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

https://x.com/vishnudsai/status/2108092195647734164

बस्तर में आज से राष्ट्रीय सहकारिता सम्मेलन, जगदलपुर में देशभर के सहकारी क्षेत्र के दिग्गज जुटेंगे

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जगदलपुर- बस्तर संभाग के लिए आज का दिन महत्वपूर्ण है। जगदलपुर में 8 और 9 अक्टूबर को राष्ट्रीय सहकारिता सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। बस्तर में पहली बार हो रहे इस सम्मेलन में देश के अलग-अलग राज्यों से सहकारिता क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी, विशेषज्ञ और प्रतिनिधि शामिल होंगे।

सहकारिता को मजबूत बनाने पर होगा मंथन

दो दिवसीय सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य सहकारी समितियों को अधिक मजबूत, आधुनिक और तकनीक आधारित बनाना है। सम्मेलन में देश में सहकारिता आंदोलन को गांव और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने के साथ-साथ सहकारी संस्थाओं की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने पर चर्चा होगी।

सहकारी समितियों के डिजिटलीकरण पर विशेष जोर

सम्मेलन में सहकारी समितियों के डिजिटलीकरण को प्रमुख विषय के रूप में रखा गया है। डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल से समितियों के रिकॉर्ड, लेन-देन, सदस्यता और सेवाओं को अधिक पारदर्शी एवं व्यवस्थित बनाने के तरीकों पर चर्चा होगी।

M-PACS से किसानों को जोड़ने की योजना

सम्मेलन में M-PACS (मॉडल प्राथमिक कृषि ऋण समितियां) से जुड़े विषयों पर भी चर्चा होगी। इसका उद्देश्य प्राथमिक कृषि समितियों के माध्यम से किसानों तक ऋण, कृषि संबंधी सेवाएं, भंडारण और अन्य सुविधाएं बेहतर तरीके से पहुंचाना है।

दुग्ध सहकारी समितियों पर भी चर्चा

ग्रामीण अर्थव्यवस्था में दुग्ध उत्पादन की भूमिका को देखते हुए दुग्ध सहकारी समितियों के विस्तार और उन्हें बाजार से जोड़ने के मुद्दे पर भी मंथन होगा। दूध उत्पादन करने वाले किसानों को बेहतर बाजार, प्रसंस्करण और आय के अवसर उपलब्ध कराने पर चर्चा की जाएगी।

भंडारण और कृषि उपज को लेकर रणनीति

किसानों की उपज के भंडारण की समस्या भी सम्मेलन के महत्वपूर्ण विषयों में शामिल है। गोदामों और भंडारण सुविधाओं के विस्तार, कृषि उपज के बेहतर प्रबंधन तथा किसानों को अपनी उपज सुरक्षित रखने की सुविधा उपलब्ध कराने पर विचार किया जाएगा।

सहकारी बैंकिंग को मजबूत करने पर जोर

ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए सहकारी बैंकों और प्राथमिक कृषि ऋण समितियों की भूमिका पर भी चर्चा होगी। किसानों और ग्रामीण लोगों को आसान एवं समय पर वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए सहकारी बैंकिंग व्यवस्था को मजबूत करने के उपायों पर विचार किया जाएगा।

बस्तर के लिए क्यों महत्वपूर्ण है सम्मेलन?

बस्तर में बड़ी संख्या में लोग कृषि, वनोपज, पशुपालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े हैं। ऐसे में सहकारिता मॉडल के जरिए स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़ने, किसानों और ग्रामीण उत्पादकों की आय बढ़ाने तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर विकसित करने की संभावनाओं पर भी ध्यान दिया जा सकता है।

दो दिन चलेगा सम्मेलन

राष्ट्रीय सहकारिता सम्मेलन 8 और 9 अक्टूबर को जगदलपुर में आयोजित किया जा रहा है। दो दिनों के दौरान सहकारिता क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों और अधिकारियों के बीच चर्चा होगी तथा भविष्य की कार्ययोजना को लेकर विचार-विमर्श किया जाएगा।


रायपुर में रोजगार मेले का आज आखिरी दिन, हजारों युवाओं के लिए नौकरी का बड़ा मौका

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रायपुर- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय रोजगार मेले का आज, 8 अक्टूबर को आखिरी दिन है। यह मेला 7 और 8 अक्टूबर को बूढ़ापारा स्थित सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग द्वारा आयोजित किया जा रहा है।

9,000 से ज्यादा पदों पर भर्ती का अवसर

मेले में अलग-अलग कंपनियों और नियोजकों द्वारा बड़ी संख्या में रिक्त पदों पर भर्ती की जा रही है। ताजा रिपोर्टों में 9,449 से अधिक पदों पर भर्ती का अवसर बताया गया है, जबकि इससे पहले आयोजन की तैयारी के दौरान 8 हजार से अधिक रिक्तियों की जानकारी सामने आई थी। कुछ रिपोर्टों में 10 हजार से ज्यादा युवाओं को रोजगार मिलने की संभावना भी जताई गई है। 

10वीं-12वीं से लेकर इंजीनियरिंग और MBA तक के युवाओं को मौका

इस रोजगार मेले की खास बात यह है कि इसमें केवल उच्च शिक्षित युवाओं के लिए ही अवसर नहीं हैं। 10वीं और 12वीं पास, ITI, डिप्लोमा, स्नातक, इंजीनियरिंग, MBA और अन्य योग्यता रखने वाले उम्मीदवार अपनी योग्यता के अनुसार विभिन्न पदों के लिए आवेदन और चयन प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं। 

तकनीकी और गैर-तकनीकी दोनों क्षेत्रों में अवसर

रोजगार मेले में तकनीकी और गैर-तकनीकी दोनों क्षेत्रों की नौकरियों के लिए अवसर उपलब्ध हैं। इसका उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को कंपनियों और निजी संस्थानों के साथ सीधे जोड़ना और उनकी योग्यता व कौशल के अनुसार रोजगार उपलब्ध कराना है। 

युवाओं को क्या करना होगा?

छत्तीसगढ़ रोजगार विभाग के अनुसार, इस राज्य स्तरीय रोजगार मेले में शामिल होने के लिए उम्मीदवारों को CG रोजगार पोर्टल पर “रोजगार इच्छुक लॉगिन” के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करके उपलब्ध रिक्तियों का चयन करना अनिवार्य है। विभाग ने मेले के लिए प्रवेश-पत्र डाउनलोड करने की सुविधा भी उपलब्ध कराई है। 

जरूरी दस्तावेज साथ ले जाना जरूरी

नौकरी के लिए आने वाले युवाओं को अपने शैक्षणिक प्रमाण-पत्र, आधार कार्ड/पहचान पत्र, बायोडाटा (Resume), अनुभव प्रमाण-पत्र यदि उपलब्ध हो और अन्य जरूरी दस्तावेज साथ लेकर जाना चाहिए। इससे कंपनी के प्रतिनिधियों के सामने दस्तावेज सत्यापन और इंटरव्यू की प्रक्रिया में आसानी होगी।

CM विष्णुदेव साय भी होंगे शामिल

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज रायपुर के राज्य स्तरीय रोजगार मेले में शामिल होने वाले हैं। उनके कार्यक्रम के अनुसार वे दोपहर करीब 3:15 बजे सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम पहुंचेंगे और रोजगार मेले में युवाओं से संबंधित कार्यक्रम में शामिल होंगे।

दूसरे जिलों से आने वाले युवाओं के लिए भी सुविधा

रोजगार मेले में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से युवा पहुंच रहे हैं। कुछ जिलों के प्रशासन की ओर से उम्मीदवारों को रायपुर लाने-ले जाने के लिए बस सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। उदाहरण के तौर पर बलौदाबाजार जिले से आवेदकों के लिए आने-जाने की बस व्यवस्था की गई है। 

युवाओं के लिए क्यों खास है यह मेला?

यह रोजगार मेला युवाओं को अलग-अलग कंपनियों में अलग-अलग जगह आवेदन करने के बजाय एक ही स्थान पर कई नियोक्ताओं से सीधे संपर्क करने का अवसर देता है। उम्मीदवार अपनी योग्यता के मुताबिक उपलब्ध पदों की जानकारी ले सकते हैं, आवेदन कर सकते हैं और चयन प्रक्रिया में हिस्सा ले सकते हैं।


रायगढ़ में कॉलेज प्रोफेसर का अपहरण, चाकू की नोक पर UPI से ट्रांसफर कराए करीब ₹1 लाख; 24 घंटे में रेस्क्यू

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रायगढ़- जिले के पुसौर थाना क्षेत्र में इवनिंग वॉक पर निकले एक कॉलेज प्रोफेसर के कथित अपहरण का मामला सामने आया है। रिपोर्टों के मुताबिक, आरोपियों ने प्रोफेसर को रास्ते से अगवा कर उनकी आंखों पर पट्टी बांध दी और चाकू की नोक पर मोबाइल, पासवर्ड तथा UPI से जुड़ी जानकारी हासिल की। इसके बाद उनके खाते से करीब ₹1 लाख ऑनलाइन ट्रांसफर कराया गया। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए प्रोफेसर को करीब 24 घंटे के भीतर सकुशल बरामद कर लिया और एक आरोपी को हिरासत में लिया है। अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

इवनिंग वॉक के दौरान बनाया गया निशाना

जानकारी के अनुसार, 5 अक्टूबर की शाम करीब 6 से 7 बजे के बीच जकेला गांव निवासी डिग्री कॉलेज के प्रोफेसर कपुरचंद गुप्ता इवनिंग वॉक के लिए निकले थे। वह पुसौर थाना क्षेत्र में डीपापारा और शोभा राइस मिल के आसपास थे। इसी दौरान आरोपियों ने कथित तौर पर उन्हें घेर लिया। रिपोर्टों के अनुसार, प्रोफेसर को सुनसान स्थान की ओर ले जाकर आंखों पर पट्टी बांध दी गई और चाकू दिखाकर धमकाया गया। 

मोबाइल और UPI की जानकारी लेकर कराया ट्रांजैक्शन

आरोपियों ने कथित तौर पर प्रोफेसर से उनके मोबाइल का पासवर्ड और डिजिटल पेमेंट से जुड़ी जानकारी हासिल की। रिपोर्टों में Google Pay और BHIM App का भी उल्लेख है। इसके बाद आरोपियों ने एक महिला के बैंक खाते का QR कोड हासिल किया और प्रोफेसर के खाते से करीब ₹1 लाख की रकम ट्रांसफर कराई।

पुलिस अब यह जांच कर रही है कि जिस खाते में रकम भेजी गई, उसका आरोपियों से क्या संबंध है और क्या इस बैंक खाते या UPI माध्यम का इस्तेमाल पहले भी किसी अन्य अपराध में किया गया था। पुलिस के अनुसार, ट्रांसफर की गई रकम को सुरक्षित कराने की कार्रवाई भी की गई है।

दूसरे इलाके में ले जाकर बनाया बंधक

रिपोर्टों के मुताबिक, आरोपियों ने प्रोफेसर को मोटरसाइकिल से दूसरे थाना क्षेत्र के पंडरीपानी इलाके में ले जाकर एक कमरे में बंधक बनाकर रखा। कथित तौर पर परिवार को गुमराह करने के लिए प्रोफेसर से फोन भी करवाया गया, लेकिन परिजनों को बातचीत के दौरान कुछ गड़बड़ी का शक हो गया। 

परिजनों को हुआ शक, पुलिस ने शुरू की तलाश

प्रोफेसर के परिवार को जब घटना पर संदेह हुआ तो पुलिस को इसकी जानकारी दी गई। इसके बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तलाश शुरू की। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने तकनीकी और डिजिटल सुरागों के आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ाई और करीब 24 घंटे के भीतर प्रोफेसर को सकुशल बरामद कर लिया।

एक आरोपी हिरासत में, बाकी की तलाश जारी

पुलिस ने मामले में सुनील सारथी नाम के एक आरोपी को हिरासत में लिया है। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में अन्य लोगों की भूमिका की जानकारी सामने आई है और उनके संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। हालांकि, मामले की जांच अभी जारी है और आरोपियों की भूमिका के संबंध में अंतिम निष्कर्ष पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

₹1 लाख ट्रांसफर के पीछे क्या था मकसद?

इस मामले की खास बात यह है कि कथित अपहरण के बाद आरोपियों ने केवल फिरौती मांगने के बजाय प्रोफेसर के मोबाइल और UPI सिस्टम का इस्तेमाल कर सीधे बैंक खाते से रकम ट्रांसफर कराई। पुलिस अब डिजिटल ट्रांजैक्शन के पूरे रास्ते की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि रकम किस-किस खाते तक पहुंची।

पुलिस की जांच में अब इन बिंदुओं पर फोकस

  • अपहरण में शामिल सभी आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी

  • करीब ₹1 लाख के UPI ट्रांजैक्शन की पूरी जानकारी

  • रकम जिस खाते में गई, उसके धारक की भूमिका

  • आरोपियों और पीड़ित के बीच कोई पुराना संबंध या विवाद था या नहीं

  • घटना में इस्तेमाल मोबाइल, वाहन और अन्य डिजिटल सबूत

  • क्या इसी तरीके से पहले भी कोई अपराध किया गया था

फिलहाल प्रोफेसर सुरक्षित हैं और पुलिस मामले की आगे जांच कर रही है। एक आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस बाकी आरोपियों तक पहुंचने और पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। 

CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA गठबंधन का प्रदर्शन तेज, दिल्ली में सियासी घमासान

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नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA गठबंधन का विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है। विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के SIR (Special Intensive Revision) को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए CEC के इस्तीफे की मांग की है। 

विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में अनियमितताओं से मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। INDIA गठबंधन का कहना है कि मतदाता सूची में पारदर्शिता और निष्पक्षता लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद है, इसलिए चुनाव आयोग को इन आरोपों पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

दिल्ली में हाई अलर्ट जैसा माहौल

विरोध प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर और मध्य दिल्ली के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। कई रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई और प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया। प्रदर्शन के कारण दिल्ली के कई हिस्सों में यातायात भी प्रभावित हुआ।

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी प्रदर्शन में शामिल

प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत INDIA गठबंधन के कई सांसद सड़क पर उतरे। बुधवार को विपक्षी सांसदों ने जंतर-मंतर की ओर मार्च करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने रास्ते में उन्हें रोक दिया। इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया।

प्रदर्शन के दौरान प्रियंका गांधी सड़क पर बैठ गईं और उनके हाथ में संविधान की प्रति दिखाई दी। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच काफी देर तक तनाव की स्थिति बनी रही।

राहुल गांधी का बड़ा बयान

राहुल गांधी ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि वह ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने इसे लोकतंत्र और मतदाताओं के अधिकारों की लड़ाई बताया। कांग्रेस ने देशभर में राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर भी विरोध प्रदर्शन तेज करने का आह्वान किया है। 

विपक्ष बनाम चुनाव आयोग

इस पूरे विवाद का केंद्र SIR के जरिए मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण है। विपक्षी दलों का कहना है कि प्रक्रिया में अगर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटते हैं या गलत तरीके से प्रभावित होते हैं, तो इसका सीधा असर चुनावी अधिकारों पर पड़ सकता है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ रहा है।

आगे क्या?

INDIA गठबंधन ने संकेत दिया है कि विरोध प्रदर्शन अभी खत्म नहीं होगा। आने वाले दिनों में दिल्ली के साथ-साथ अलग-अलग राज्यों में भी प्रदर्शन बढ़ सकते हैं। गुरुवार को भी विपक्षी नेताओं की बैठक और आगे की रणनीति पर चर्चा जारी है। 

दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का निधन: सिनेमा जगत में शोक की लहर

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गोवा- ​भारतीय सिनेमा के मशहूर और दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। उन्होंने आज 8 अक्टूबर 2026 को सुबह  गोवा में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से पूरी फिल्म इंडस्ट्री और प्रशंसक गहरे सदमे में हैं।


 कार्डियक अरेस्ट बना निधन का कारण 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नाना पाटेकर को गोवा के डोना पाउला स्थित उनके आवास पर अचानक गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया। दिल का दौरा पड़ने के बाद वे अपने घर पर बेहोश पाए गए थे।

परिजनों ने उन्हें तुरंत गोवा के मनिपाल अस्पताल में भर्ती कराया। डॉक्टरों की विशेष मेडिकल टीम ने उन्हें होश में लाने का हरसंभव प्रयास किया। डॉक्टरों ने लगातार करीब 45 मिनट तक सीपीआर (CPR) दिया। हालांकि, तमाम कोशिशों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।

​ सुबह 5:20 बजे डॉक्टरों ने की पुष्टि 

अस्पताल की मेडिकल टीम ने सुबह 5:20 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने इस दुखद खबर की पुष्टि की है। उनके जाने से बॉलीवुड और मराठी सिनेमा ने अपना एक अनमोल रत्न खो दिया है।

 ​नाना पाटेकर की यादगार सुपरहिट फिल्में 

नाना पाटेकर अपने कड़क संवाद अदायगी और बेमिसाल अभिनय के लिए जाने जाते थे। उन्होंने बॉलीवुड और मराठी सिनेमा में कई यादगार किरदार निभाए:

​ परिंदा (1989): इस फिल्म में 'अन्ना' के नेगेटिव रोल ने उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार दिलाया।

​ क्रांतिवीर (1994): इस फिल्म के उनके संवाद आज भी लोगों की जुबां पर हैं। इसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला।

​ अग्नि साक्षी (1996): इस थ्रिलर फिल्म में उनके अभिनय की जमकर तारीफ हुई।

​ यशवंत (1997): "एक मच्छर आदमी को..." वाला उनका संवाद इसी फिल्म से अमर हुआ।

 ​खामोशी: द म्यूजिकल (1996): एक मूक-बधिर पिता के रूप में उनके भावुक अभिनय ने सभी का दिल जीत लिया।

​ वेलकम (2007) और राजनीति (2010): 'उदय भाई' के कॉमेडी रोल से लेकर गंभीर राजनीतिक किरदार तक, उन्होंने हर रूप में दर्शकों को प्रभावित किया।

​ नटसम्राट (2016): मराठी सिनेमा की इस कालजयी फिल्म में उनका अभिनय भारतीय सिनेमा के इतिहास के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनों में गिना जाता है।

​ सामाजिक कार्यों में भी रहे अग्रणी 

नाना पाटेकर केवल एक महान कलाकार ही नहीं, बल्कि एक संवेदनशील इंसान भी थे। उन्होंने 'नाम फाउंडेशन' के जरिए महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त किसानों की आर्थिक मदद की और कई सामाजिक कार्य किए।

​उनका असमय चले जाना सिनेमा जगत और उनके लाखों फैंस के लिए एक कभी न पूरी होने वाली क्षति है।

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