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इंडिया स्किल 2025-26 में छत्तीसगढ़ को मिली ऐतिहासिक सफलता

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छत्तीसगढ़ के प्रतिभागियों ने ईस्ट ज़ोन प्रतियोगिता में जीते 12 पदक

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दी बधाई 

रायपुर- युवाओं की प्रतिभा, तकनीकी दक्षता एवं नवाचार क्षमता को राष्ट्रीय मंच प्रदान करने के उद्देश्य से भारत सरकार का कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय द्वारा आयोजित इंडिया स्किल प्रतियोगिता 2025-26 में छत्तीसगढ़ राज्य के युवाओं ने ईस्ट ज़ोन रीजनल प्रतियोगिता में 12 पदक और 04 मेडल ऑफ एक्सीलेंस अर्जित कर उल्लेखनीय उपलब्धि प्राप्त की है। यह प्रतियोगिता क्रमशः चार चरणों में जिला, राज्य, रीजनल एवं राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित की जा रही है। राष्ट्रीय स्तर पर चयनित प्रतिभागियों को वर्ल्ड स्किल्स इंटरनेशनल के अंतर्गत भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर प्राप्त होगा। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश के युवाओं को बधाई देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के युवाओं ने यह सिद्ध कर दिया है कि वे राष्ट्रीय ही नहीं, वैश्विक स्तर पर भी प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हैं। राज्य सरकार कौशल विकास को प्राथमिकता देते हुए आधुनिक प्रशिक्षण, नवाचार और उद्योगोन्मुख पाठ्यक्रमों को बढ़ावा दे रही है। यह सफलता सशक्त युवा, समृद्ध छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

ईस्ट जोन की रीजनल प्रतियोगिता का समापन 02 मार्च 2026 को भुवनेश्वर में हुआ, जिसमें ओडिशा, बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़ एवं अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह के 200 से अधिक प्रतिभागियों ने 59 कौशल श्रेणियों में भाग लिया। छत्तीसगढ़ के प्रतिभागियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए कुल 12 पदक एवं 04 मेडल ऑफ एक्सीलेंस सम्मान अर्जित किए, जिनमें 01 स्वर्ण, 02 रजत, 05 कांस्य पदक तथा 04 मेडल ऑफ एक्सीलेंस शामिल हैं। 

डिजिटल इंटरैक्टिव मीडिया में सुनील कुमार पैतल ने स्वर्ण पदक, 3डी डिजिटल गेम आर्ट में खुशांक नायक, सीएनसी मिलिंग में पुष्कर सोनबर एवं सीएनसी टर्निंग में आत्माराम ने रजत पदक अर्जित कर राज्य को गौरवान्वित किया। इसी तरह सीएनसी मिलिंग में निखिल, इलेक्ट्रॉनिक्स में अभिषेक कुमार, प्लंबिंग एवं हीटिंग में रेशमान, वेब टेक्नोलॉजी में सतेंद्र कुमार ने कांस्य पदक जीतकर छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया। इसी तरह रेन्यूबल एनर्जी में नोहर लाल पटेल, मेकेनिकल इंजीनियरिंग में ओम बंजारे, हेल्थ एंड सोशल केयर में अंतरा मुखर्जी ने मेडल ऑफ एक्सीलेंस प्राप्त किया। 

उल्लेखनीय है कि राज्य में प्रतियोगिता का सफल आयोजन छत्तीसगढ़ राज्य कौशल विकास प्राधिकरण द्वारा किया गया। 19 कौशल ट्रेड्स में आयोजित जिला स्तरीय प्रतियोगिता में 3327 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें से 381 प्रतिभागी राज्य स्तरीय प्रतियोगिता हेतु चयनित हुए। राज्य स्तरीय प्रतियोगिता 03 एवं 04 फरवरी 2026 को रायपुर, दुर्ग एवं रायगढ़ जिलों के प्रतिष्ठित संस्थानों में संपन्न हुई। व्यावहारिक मूल्यांकन के पश्चात 38 प्रतिभागियों का चयन रीजनल स्तर के लिए किया गया। रीजनल स्तर पर सफल प्रतिभागी अब राष्ट्रीय प्रतियोगिता में राज्य का प्रतिनिधित्व करेंगे। राज्य में पहली बार कौशल तिहार 2025 एवं मोबाइल आधारित एमसीक्यू परीक्षा जैसे नवाचारों के माध्यम से प्रतियोगिता का व्यापक एवं पारदर्शी संचालन किया गया।


प्रेम और सद्भाव के रंगों से सराबोर हो होली : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाएँ

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रंगों के पावन पर्व होली के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने कामना की है कि यह उल्लास, उमंग और आत्मीयता का महापर्व सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और नई ऊर्जा का संचार करे।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि यह आपसी प्रेम, सौहार्द और भाईचारे को सशक्त बनाने का अवसर है। यह पर्व समाज में समरसता, सद्भाव और एकता की भावना को प्रगाढ़ करता है तथा हमें सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में होली का विशेष महत्व है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय, अहंकार पर विनम्रता की जीत और वैमनस्य पर प्रेम की प्रधानता का संदेश देता है। होली के रंग हमें स्मरण कराते हैं कि विविधताओं से परिपूर्ण हमारे समाज की वास्तविक शक्ति परस्पर विश्वास, अपनत्व और सामूहिक सहयोग में निहित है।

मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे इस पर्व को हर्षोल्लास, संयम और पारंपरिक मर्यादाओं के साथ मनाएँ। प्राकृतिक रंगों का उपयोग कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दें तथा समाज के वंचित एवं जरूरतमंद वर्गों के साथ भी इस उत्सव की खुशियाँ साझा करें।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रेम, सद्भाव और भाईचारे के रंगों से सजी यह होली छत्तीसगढ़ की एकता, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक गौरव को और अधिक सुदृढ़ करेगी।

लक्ष्मी वर्मा का राज्यसभा में जाना लगभग तय, भाजपा से उम्मीदवार घोषित

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रायपुर- भारतीय जनता पार्टी ने छत्तीसगढ़ से राज्यसभा चुनाव 2026 के लिए लक्ष्मी वर्मा को उम्मीदवार घोषित किया है। यह फैसला मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पसंद पर केंद्रीय चुनाव समिति की मुहर लगने के बाद आया।

लक्ष्मी वर्मा का राजनीतिक पृष्ठभूमि 

लक्ष्मी वर्मा 55 वर्षीय वरिष्ठ भाजपा नेत्री हैं, जिन्होंने एमए की डिग्री प्राप्त की है। वे छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य और पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष रह चुकी हैं। 

रायपुर जिला पंचायत की पूर्व अध्यक्ष के रूप में उन्होंने स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, साथ ही कुर्मी समाज और महिला मतदाताओं में मजबूत पकड़ रखती हैं। 

उनका राजनीतिक सफर 1990 से शुरू हुआ, जब उन्होंने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता ली और 1994 में रायपुर नगर निगम पार्षद बनीं। 

 चुना जाना लगभग तय 

छत्तीसगढ़ से राज्यसभा की दो सीटें 9 अप्रैल 2026 को खाली हो रही हैं, जहां भाजपा को एक सीट आसानी से मिल सकती है क्योंकि राज्य में 90 विधायक हैं और 31 वोट पर्याप्त हैं। 

प्रदेश संगठन ने सात नामों का पैनल भेजा था, जिसमें से केंद्रीय स्तर पर लक्ष्मी वर्मा का चयन हुआ। यह चयन भाजपा की महिला सशक्तिकरण नीति को मजबूत करता है।

छत्तीसगढ़ में दिल दहला देने वाली वारदात, बेटे ने टांगी से की पिता की हत्या

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 रायपुर/अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर से खून के रिश्ते को शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है। मणिपुर थाना क्षेत्र में एक बेटे ने अपने ही पिता की धारदार हथियार से हत्या कर दी। घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।


मिली जानकारी के अनुसार, देर रात किसी बात को लेकर पिता और आरोपी बेटे के बीच विवाद हो गया। देखते ही देखते कहासुनी बढ़कर मारपीट में बदल गई। गुस्से में आरोपी ने टांगी से अपने पिता के सिर पर ताबड़तोड़ वार कर दिए। गंभीर चोट लगने के कारण पिता की मौके पर ही मौत हो गई।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी बेटे को गिरफ्तार कर लिया। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और घटना के पीछे की वजहों का पता लगाया जा रहा है।

Rajya Sabha Elections : छत्तीसगढ़ से लक्ष्मी वर्मा राज्यसभा उम्मीदवार घोषित, नितिन नवीन भी जाएंगे उच्च सदन

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 Rajya Sabha Elections : भारतीय जनता पार्टी ने आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। छत्तीसगढ़ से पार्टी ने लक्ष्मी वर्मा को राज्यसभा उम्मीदवार घोषित किया है। भाजपा केंद्रीय कार्यालय की ओर से जारी सूची में विभिन्न राज्यों से कई नामों की घोषणा की गई है।


घोषित सूची के अनुसार बिहार से नितिन नवीन और शिवेश कुमार को उम्मीदवार बनाया गया है। असम से तेराश गोवाला और जोगेन मोहन को मौका दिया गया है। हरियाणा से संजय भाटिया को राज्यसभा का टिकट मिला है। ओडिशा से मनमोहन सामल और सुजीत कुमार को उम्मीदवार घोषित किया गया है, जबकि पश्चिम बंगाल से राहुल सिन्हा को पार्टी ने मैदान में उतारा है।


छत्तीसगढ़ से लक्ष्मी वर्मा के नाम की घोषणा के बाद प्रदेश भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है। वहीं बिहार से नितिन नवीन के नाम की घोषणा भी राजनीतिक रूप से अहम मानी जा रही है।

माना जा रहा है कि पार्टी ने संगठनात्मक सक्रियता, सामाजिक समीकरण और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है। राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और अब सभी की नजरें नामांकन और मतदान प्रक्रिया पर टिकी हैं।

गरियाबंद में होली पर सख्ती: 75 लीटर अवैध शराब जब्त, 49 वाहन चालकों के चालान

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 गरियाबंद। होली त्योहार के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए गरियाबंद पुलिस ने विशेष अभियान चलाया। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में एक साथ की गई। अभियान के तहत गुंडा-बदमाशों की सघन चेकिंग, अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई और यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्ती बरती गई।


गुंडा-बदमाशों पर दबिश

सूचीबद्ध निगरानी बदमाशों के ठिकानों पर पुलिस टीमों ने दबिश दी। उनकी वर्तमान गतिविधियों का सत्यापन किया गया और सख्त हिदायत दी गई कि वे किसी भी आपराधिक गतिविधि में शामिल न हों। जो बदमाश अपने निवास पर नहीं मिले, उनके संबंध में जानकारी जुटाकर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

अवैध शराब के खिलाफ बड़ी कार्रवाई

सार्वजनिक स्थानों पर शराब की अवैध बिक्री करने वालों के खिलाफ 3 प्रकरण दर्ज किए गए और कुल 75 लीटर अवैध शराब जब्त की गई। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि होली के दौरान शराब से जुड़े विवादों और अपराधों को रोकने के लिए यह अभियान जारी रहेगा।

ड्रिंक एंड ड्राइव और ट्रैफिक उल्लंघन पर कार्रवाई

नशे की हालत में वाहन चलाने वालों के खिलाफ विशेष ‘ड्रिंक एंड ड्राइव’ अभियान चलाया गया। ब्रेथ एनालाइजर से जांच कर नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई की गई। इसके अलावा बिना हेलमेट, तीन सवारी और बिना दस्तावेज वाहन चलाने वाले 49 वाहन चालकों के खिलाफ चालान काटे गए।

कबाड़ियों की आकस्मिक जांच

चोरी की घटनाओं पर रोक लगाने के उद्देश्य से शहर के कबाड़खानों की आकस्मिक जांच की गई। कबाड़ियों को निर्देश दिए गए कि वे किसी भी संदिग्ध सामान की खरीदी-बिक्री न करें और सभी लेन-देन का रिकॉर्ड रखें। संदिग्ध सामान मिलने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

15 असामाजिक तत्वों पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई

शांति भंग की आशंका को देखते हुए पुलिस ने 15 असामाजिक तत्वों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की है। शहर के प्रमुख चौराहों और संवेदनशील मार्गों पर मोबाइल चेक पोस्ट (MCP) लगाकर देर रात तक वाहनों की सघन जांच की गई। संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ और वाहनों की तलाशी भी ली गई।

गरियाबंद पुलिस ने स्पष्ट किया है कि होली पर्व को शांतिपूर्ण और सुरक्षित माहौल में संपन्न कराने के लिए यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। नागरिकों से अपील की गई है कि वे त्योहार को संयम और भाईचारे के साथ मनाएं तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।

शादी की खुशियों के बीच भरोसे पर वार, बड़ी बहन पर जेवर चोरी का आरोप

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 भिलाई। शादी का खुशियों भरा माहौल उस समय तनाव में बदल गया, जब छोटी बहन ने अपनी बड़ी बहन पर जेवर लेकर फरार होने का आरोप लगाया। मामला भिलाई के छावनी थाना क्षेत्र का है, जहां पुलिस ने नामजद शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।


शीतला मंदिर, कैंप-2 निवासी राधिका बाई (36 वर्ष), पति गुलाब चंद साहू, ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 23 फरवरी को उसकी दूसरी बहन सुनीता की बेटी की शादी थी। इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए उसकी बड़ी बहन कमलेश्वरी अपने पति लक्ष्मी नारायण के साथ 17 फरवरी को घर आई थी।

शादी की तैयारियों के दौरान राधिका ने अपने सोने-चांदी के गहने बड़ी बहन को दिखाए थे। घर में भीड़भाड़ और अलमारी का ताला खराब होने के कारण उसने जेवरों की देखरेख की जिम्मेदारी कमलेश्वरी को सौंप दी थी।

बताया गया कि 18 फरवरी की सुबह राधिका अपनी सास के साथ पानी भरने बाहर गई थी। वापस लौटने पर कमलेश्वरी घर पर नहीं मिली। इस संबंध में पूछने पर जीजा लक्ष्मी नारायण ने बताया कि वह किसी रिश्तेदार के यहां गई है।

काफी समय बीत जाने के बाद भी जब कमलेश्वरी वापस नहीं लौटी तो परिवार को संदेह हुआ। अलमारी की जांच करने पर सोने का लॉकेट, मंगलसूत्र, चार गेहूं दाना, दो गोल मोती, बालियां, चांदी की करधन और पायजेब गायब मिले।

फिलहाल छावनी थाना पुलिस ने शिकायत दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

राज्यसभा को लेकर कांग्रेस में घमासान, उम्मीदवार चयन पर मंथन तेज

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस को अधिकृत बी-फॉर्म मिल चुका है और अब विधायकों की अहम बैठक बुलाई गई है। पार्टी स्तर पर उम्मीदवार के नाम को लेकर मंथन जारी है।


सूत्रों के मुताबिक नामांकन की प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी। सभी विधायकों को रायपुर में मौजूद रहने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अंतिम रणनीति तय की जा सके।

5 मार्च तक नामांकन

राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 5 मार्च निर्धारित है। 6 मार्च को नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी होगी, जबकि 9 मार्च तक नाम वापसी की प्रक्रिया चलेगी। यदि आवश्यक हुआ तो 16 मार्च को मतदान कराया जाएगा।

स्थानीय बनाम बड़ा चेहरा

बैठक में इस बात पर गहन चर्चा हो रही है कि राज्यसभा के लिए किसी स्थानीय नेता को मौका दिया जाए या फिर किसी बड़े राष्ट्रीय चेहरे को मैदान में उतारा जाए। कई विधायकों का मत है कि प्रदेश से ही जुड़े चेहरे को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

किन नामों पर चर्चा?

संभावित दावेदारों में पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel, विधानसभा नेता प्रतिपक्ष Charandas Mahant और वरिष्ठ नेता T. S. Singh Deo के नाम चर्चा में हैं।

आदिवासी प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष Deepak Baij, पूर्व अध्यक्ष Mohan Markam और Amarjeet Bhagat के नाम भी सामने आ रहे हैं।

वहीं ओबीसी वर्ग से किरणमयी नायक और अनुसूचित जाति वर्ग से शिव डहरिया को भी संभावित दावेदार माना जा रहा है।

सियासी गणित अहम

इस बार छत्तीसगढ़ से दो राज्यसभा सीटों पर चुनाव होना है। मौजूदा संख्या बल के आधार पर कांग्रेस को एक सीट मिलने की संभावना मजबूत मानी जा रही है। हालांकि अंतिम फैसला पार्टी आलाकमान के संकेत और रणनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा।

Chandra Grahan 2026: आज लगेगा साल का पहला चंद्र ग्रहण, भारत में दिखेगा ‘ब्लड मून’ का अद्भुत नजारा

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 Chandra Grahan 2026 : इस साल 3 मार्च 2026 को फाल्गुन माह की पूर्णिमा के दिन वर्ष का पहला चंद्र ग्रहण लग रहा है। यह ग्रहण सिंह राशि और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में घटित होगा। खास बात यह है कि यह चंद्र ग्रहण भारत में भी दिखाई देगा और इसका सूतक काल भी मान्य रहेगा, जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है।




खगोल विज्ञान के अनुसार जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है, तब चंद्र ग्रहण होता है। पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान जब चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की छाया में ढक जाता है, तो वह लाल रंग का दिखाई देता है। इसी को वैज्ञानिक भाषा में ‘ब्लड मून’ कहा जाता है।

चंद्र ग्रहण और सूतक काल 2026 का समय

  • ग्रहण की शुरुआत: दोपहर 3:20 बजे
  • पूर्ण चंद्र ग्रहण: शाम 4:58 बजे से 5:32 बजे तक
  • भारत में दिखाई देने का समय: शाम 6:20 बजे से 6:46 बजे तक
  • ग्रहण समाप्ति: शाम 6:46 बजे
  • सूतक काल प्रारंभ: सुबह 6:20 बजे
  • सूतक काल समाप्ति: ग्रहण समाप्ति के साथ

भारत में कितनी देर दिखेगा ग्रहण?

भारतीय समयानुसार यह चंद्र ग्रहण अधिकांश शहरों में शाम करीब 6:20 बजे दिखाई देना शुरू होगा। अलग-अलग स्थानों पर यह लगभग 20 से 25 मिनट तक नजर आ सकता है।

पूर्वोत्तर भारत में ‘ब्लड मून’ का दृश्य अपेक्षाकृत स्पष्ट दिखने की संभावना है। वहीं पश्चिम और दक्षिण भारत में ग्रहण का अंतिम चरण ही दिखाई देगा। साफ आसमान होने पर नजारा और भी स्पष्ट होगा।

बड़े शहरों में चंद्र ग्रहण का समय

  • दिल्ली-एनसीआर: शाम 6:26 बजे
  • प्रयागराज: शाम 6:08 बजे
  • कानपुर: शाम 6:14 बजे
  • वाराणसी: शाम 6:04 बजे
  • पटना: शाम 5:55 बजे
  • रांची: शाम 5:55 बजे
  • कोलकाता: शाम 5:43 बजे
  • भुवनेश्वर: शाम 5:54 बजे
  • गुवाहाटी: शाम 5:27 बजे
  • चेन्नई: शाम 6:21 बजे
  • बेंगलुरु: शाम 6:32 बजे
  • हैदराबाद: शाम 6:26 बजे
  • ईटानगर: शाम 5:07 बजे
  • इन सभी स्थानों पर ग्रहण की समाप्ति शाम 6:46 बजे होगी।

खगोलविदों के अनुसार, यह खगोलीय घटना न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से भी विशेष महत्व रखती है। यदि मौसम साफ रहा, तो देश के कई हिस्सों में लोग इस अद्भुत ‘ब्लड मून’ का साक्षी बन सकेंगे।

पर्यावरण संरक्षण : ग्रामीणों की अनोखी पहल, होलिका दहन में छः साल से नहीं जलाते है लकड़ी

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लाफिन कला में लकड़ियों की जगह गोबर के कंडों से जलती है होलिका

महासमुंद। जहां आधुनिकता के दौर में पर्यावरण को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं, वहीं महासमुंद जिले से महज आठ किलोमीटर दूर ग्राम लाफिन कला एक अनुकरणीय मिसाल पेश कर रहा है। यहां पिछले छः वर्षों से होलिका दहन के लिए पेड़ों की लकड़ियों का नहीं, बल्कि गोबर के कंडों (उपलों) का उपयोग किया जा रहा है।इसी कड़ी में ग्रामीण सोमवार में घर-घर जाकर कंडे एकत्रित किए और समाज को प्रकृति बचाने का संदेश दिया।

इस मुहिम की कमान ग्राम के शिक्षक महेन्द्र कुमार पटेल और गोवर्धन साहू ने संभाल रखी है। बीते छ: साल से उनके द्वारा किया गया यह पहल अब गांव के लिए परंपरा बन रही है। उन्होंने ग्रामीणों के साथ मिलकर इस वर्ष भी घर-घर से कंडे जुटाए। उनका कहना है कि प्रतिवर्ष होलिका दहन के नाम पर देश भर में लाखों टन लकड़ियां जला दी जाती हैं, जिससे न केवल प्रदूषण फैलता है, बल्कि बड़ी संख्या में हरे-भरे पेड़ भी नष्ट हो जाते हैं। शिक्षक महेंद्र पटेल ने भावुक अपील करते हुए कहा कि यदि हम अपनी व्यस्त जीवनशैली में एक नया पेड़ लगा नहीं सकते, तो कम से कम होलिका दहन में कंडों का उपयोग कर पुराने पेड़ों को कटने से बचा तो सकते हैं। उन्होंने बताया कि गोबर के कंडे जलाने से वातावरण शुद्ध होता है और प्रदूषण भी कम होता है। इस पहल से पेड़ों की रक्षा होती है। लाखों पेड़ों को कटने से बचाने का प्रयास है। लकड़ियों के धुएं की तुलना में गोबर के कंडे कम हानिकारक है। उन्होंने बताया कि गोबर की पवित्रता को उत्सव से जोड़ने की आवश्यकता है। पूरे गांव का एक साथ मिलकर कंडे दान करना है। लाफिन कला की यह पहल आज पूरे जिले और प्रदेश के लिए एक प्रेरणा है कि कैसे हम अपनी परंपराओं को निभाते हुए प्रकृति की रक्षा कर सकते हैं।

शास्त्रों में भी है गोबर की पवित्रता

हिंदू शास्त्रों में गोबर को अत्यंत पवित्र माना गया है। चाहे विवाह हो, गौरी-गणेश का निर्माण हो या कोई भी शुभ अनुष्ठान, गोबर का उपयोग अनिवार्य होता है। यहां तक कि जीवन के अंतिम संस्कार में भी गोबर का उपयोग शुचिता का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में होलिका दहन में इसका उपयोग न केवल पर्यावरण बल्कि धार्मिक दृष्टि से भी श्रेष्ठ है।

पहल को लेकर बच्चों और युवाओं में भी उत्साह

गांव के बच्चों और युवा नेतन पटेल ने बताया कि अब लाफिन कला में लकड़ियों की समस्या खत्म हो गई है। कंडों के उपयोग से होलिका दहन अब अधिक सुलभ और पर्यावरण के अनुकूल हो गया है। हर दृष्टि से यह पहल फायदेमंद साबित हो रही है। होलिका दहन के पहले गांव के घर-घर से बच्चे और जवान सियान सभी कंडे लेकर होलिका दहन स्थल में एकत्र करते है। 

शिक्षको ने बच्चों को बताया होली का महत्व ,कहा सावधानी पूर्वक खेले होली

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आरंग- अंचल में होली की तैयारियां जोरों पर है। गांव गांव में होलिका दहन की तैयारियां की जा रही है।होली को लेकर लोगों में खासा उत्साह है,खासकर बच्चों में। वहीं सोमवार को शासकीय पूर्व माध्यमिक एवं नवीन प्राथमिक शाला चरौदा में शिक्षकों ने बच्चों को होली का महत्व बताते हुए सावधानी बरतते हुए होली खेलने को कहा। वहीं शिक्षको ने बच्चों को होलिका दहन की कथा सतयुग से तथा रंग गुलाल खेलने की परंपरा द्वापर युग से जुड़े होने की जानकारी देते हुए होली का महत्व बताया। कल चंद्रग्रहण होने के कारण बच्चों ने एक दिन पहले ही एक दूसरे पर गुलाल लगाकर जमकर होली खेले।


आईएनएस सुदर्शिनी लोकायन-26 अभियान के तहत अलेक्जेंड्रिया पहुँची

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भारतीय नौसेना का पोत आईएनएस सुदर्शिनी 01 मार्च 2026 को ऐतिहासिक बंदरगाह नगर अलेक्जेंड्रिया पहुँचा, जो उसके जारी अंतरमहासागरीय अभियान ‘लोकायन-26’ की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह आगमन पिछले सप्ताह सफ़ागा से प्रस्थान के बाद पोत के स्वेज नहर से उत्तर की ओर पारगमन के उपरांत हुआ।

तीन मस्तूलों वाला यह बार्क पोत 193 किलोमीटर लंबी  स्वेज नहर से होकर गुजरा, जो पूर्व और पश्चिम को जोड़ने वाले विश्व के ऐतिहासिक समुद्री द्वारों में से एक है। यह पारगमन इस वैश्विक यात्रा में भाग ले रहे प्रशिक्षुओं के लिए एक प्रमुख प्रशिक्षण उपलब्धि रहा।

अलेक्जेंड्रिया में प्रवेश “ब्रिजेज़ ऑफ फ्रेंडशिप” पहल को और सुदृढ़ करता है, जो भारत और मिस्र के बीच स्थायी समुद्री साझेदारी का उत्सव है। दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों की समृद्ध विरासत कई शताब्दियों पुरानी है। हाल के वर्षों में रक्षा और समुद्री सहयोग सहित विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंध और अधिक मजबूत हुए हैं। सुदर्शिनी की यह यात्रा समुद्री क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने तथा द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा करने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को पुनः रेखांकित करती है।

आगमन पर पोत का स्वागत मिस्र की नौसेना और भारतीय दूतावास के अधिकारियों द्वारा किया गया। कमांडिंग अधिकारी ने अलेक्जेंड्रिया नौसैनिक अड्डे के कमांडर रियर एडमिरल महमूद अब्देलसत्तार से भेंट की। पोर्ट कॉल के दौरान दल के सदस्य पेशेवर आदान-प्रदान, सामुदायिक संपर्क और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेंगे, जिनका उद्देश्य पारस्परिक सद्भाव को प्रोत्साहित करना, परस्पर संचालन क्षमता को सुदृढ़ करना और दोनों नौसेनाओं के बीच सहयोग को बढ़ाना है।


उपराष्ट्रपति C. P. Radhakrishnan ने तमिल विरासत और महान विभूतियों पर आधारित 16 पुस्तकों का विमोचन किया

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भारत के उपराष्ट्रपति C. P. Radhakrishnan ने आज Publications Division, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा प्रकाशित 16 महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन Uparashtrapati Bhavan में किया। ये पुस्तकें प्रख्यात तमिल विद्वानों, विरासत, वास्तुकला, साहित्य, संस्कृति और सभ्यतागत चिंतन पर आधारित हैं।

इन प्रकाशनों में विविध विषयों को समाहित किया गया है, जिनमें Rameswaram — उत्तर से दक्षिण भारत तक आध्यात्मिक एकता का प्रतीक पवित्र तीर्थ; Sri Ramanuja का जीवन और दर्शन; नडुकल परंपरा; प्राचीन व्यापारिक केंद्र Arikamedu; नयनमारों और आलवारों की भक्ति साहित्य परंपरा; प्राकृतिक कृषि पद्धतियाँ; प्राचीन तमिल वाद्ययंत्र; तमिलनाडु के लोक देवता; उभरती वैज्ञानिक प्रौद्योगिकियाँ; तथा Meenakshi Amman Temple और Brihadeesvara Temple की स्थापत्य भव्यता शामिल हैं। इसके अतिरिक्त Manimekalai तथा महाविद्वान Mahavidwan Meenakshi Sundaram Pillai पर आधारित कृतियाँ भी इन पुस्तकों में सम्मिलित हैं।

उपराष्ट्रपति ने गर्व और प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि आज जारी की गई पुस्तकें तमिल सभ्यता की गहराई और विविधता को प्रतिबिंबित करती हैं, जिनमें मंदिर परंपराएँ, दर्शन, वास्तुकला, साहित्य, संगीत, विज्ञान, सामाजिक सुधार और आध्यात्मिक चिंतन का समावेश है।

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने Bankim Chandra Chatterjee पर आधारित एक पुस्तक का भी विमोचन किया, जो तमिल, अंग्रेज़ी और हिंदी भाषाओं में प्रकाशित हुई है। “वंदे मातरम्” के अमर शब्दों का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि इस गीत ने लाखों लोगों के हृदय में क्रांति की ज्योति प्रज्वलित की और असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि ये दो शब्द हमारी मातृभूमि की आत्मा, हमारी नदियों की शक्ति और हमारी धरती की सुगंध को अभिव्यक्त करते हैं।

उन्होंने तमिल को विश्व की प्राचीनतम शास्त्रीय भाषाओं में से एक बताते हुए कहा कि इसका दो सहस्राब्दियों से अधिक का साहित्यिक और दार्शनिक इतिहास है। आज प्रकाशित पुस्तकें तमिल ज्ञान परंपरा की बौद्धिक गहराई और सभ्यतागत निरंतरता को दर्शाती हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय मंदिर केवल पूजा के स्थान नहीं, बल्कि कला, वास्तुकला, संगीत, खगोलशास्त्र, गणित और सामाजिक संगठन के केंद्र रहे हैं। हमारे पूर्वज दर्शन, साहित्य, विज्ञान और सामाजिक सुधार के क्षेत्र में अद्वितीय थे।

उन्होंने कहा कि भारत अनेक भाषाओं का देश है, किंतु उसकी सभ्यतागत आत्मा एक है। विभिन्न भाषाओं, धर्मों और राजनीतिक विचारधाराओं के बावजूद भारत सांस्कृतिक रूप से एक राष्ट्र रहा है। “वसुधैव कुटुम्बकम्” और “याधुम ऊरे यावरुम केलिर” जैसी अवधारणाएँ इसी एकात्म भाव को व्यक्त करती हैं।

उन्होंने कहा कि Ramayana और Mahabharata का प्रसार भारत के प्रत्येक ग्राम तक स्वाभाविक रूप से हुआ। ये महाकाव्य थोपे नहीं गए, बल्कि साझा आध्यात्मिक चेतना के माध्यम से जन-जन द्वारा अपनाए गए।

प्रधानमंत्री Narendra Modi के वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि आर्थिक प्रगति के साथ सांस्कृतिक संरक्षण भी आवश्यक है। उन्होंने वैश्विक मंचों पर Thirukkural तथा Subramania Bharati का उल्लेख किए जाने की सराहना की।

उन्होंने मलेशिया के एक विश्वविद्यालय में Thiruvalluvar पीठ की स्थापना की घोषणा का स्मरण करते हुए Kashi Tamil Sangamam जैसी पहलों को राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि तमिल भाषा को वैश्विक स्तर पर सम्मान मिल रहा है तथा तमिल स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार किया जा रहा है। इनमें Pulithevar, Velu Nachiyar, Veerapandiya Kattabomman, Ondiveeran, Thiruppur Kumaran, Theeran Chinnamalai, Kuyili, Sundaralinganar तथा मरुदु बंधु प्रमुख हैं।

उन्होंने कहा कि प्रकाशन विभाग द्वारा प्रकाशित ये पुस्तकें केवल साहित्यिक कृतियाँ नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी के लिए पथप्रदर्शक दीप हैं। तीव्र परिवर्तनशील प्रौद्योगिकी युग में युवाओं को मजबूत जड़ों के साथ ऊँची उड़ान की आवश्यकता है। उन्होंने युवाओं से प्रतिदिन कम से कम एक घंटा पुस्तक-पठन के लिए समर्पित करने का आह्वान किया।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री Ashwini Vaishnaw, राज्य मंत्री L. Murugan, उपराष्ट्रपति के सचिव Amit Khare तथा प्रकाशन विभाग के प्रधान महानिदेशक Bhupendra Kainthola सहित अनेक विद्वान और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

अपने संबोधन के अंत में उपराष्ट्रपति ने कहा कि विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ते हुए आर्थिक उन्नति के साथ सांस्कृतिक शक्ति का सुदृढ़ होना भी अनिवार्य है।

होली सद्भाव, अपनत्व और गिले-शिकवे भुलाने का पर्व है : मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज रायपुर प्रेस क्लब द्वारा आयोजित होली मिलन समारोह “रंगोत्सव” एवं “महामूर्ख सम्मेलन 2026” में शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को होली की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह आपसी प्रेम, सद्भाव और भाईचारे को सुदृढ़ करने का पावन अवसर भी है। यह पर्व हमें छोटी-छोटी अनबन और गिले-शिकवे भुलाकर नए सिरे से संबंधों को मजबूत करने की प्रेरणा देता है।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि रायपुर प्रेस क्लब में पर्वों को मिल-जुलकर मनाने की एक गौरवशाली परंपरा रही है। रायपुर प्रेस क्लब वर्षों से होली मिलन और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने का कार्य कर रहा है, यह परंपरा आगे भी निरंतर जारी रहनी चाहिए। उन्होंने प्रेस क्लब परिवार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कामना की कि यह उल्लासपूर्ण पर्व सभी के जीवन में नई ऊर्जा, उत्साह और सकारात्मकता लेकर आए।


इस दौरान रायपुर प्रेस क्लब के सदस्यों ने मुख्यमंत्री साय का अनूठे अंदाज में मिर्ची की माला पहनाकर तथा त्रिशूलनुमा पिचकारी भेंट कर आत्मीय स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने प्रेस क्लब के होली विशेषांक ‘सेंसलेस टाइम्स’ का विमोचन भी किया।


मुख्यमंत्री साय ने बजाया नगाड़ा, रंगों के उल्लास में झूमे पत्रकार

होली मिलन समारोह में उमंग का तब अनोखा वातावरण देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्वयं नगाड़ा बजाकर उत्सव का जोश दोगुना कर दिया। मुख्यमंत्री के नगाड़ा बजाते ही समारोह में उपस्थित पत्रकारों और अतिथियों ने तालियों से उत्साह व्यक्त किया और पूरे परिसर में आनंद की लहर दौड़ गई। पारंपरिक ढोल-नगाड़ों की धुन पर मुख्यमंत्री भी पत्रकार साथियों के साथ फाग गीतों और होली के उल्लास में सहभागी बने। कार्यक्रम में संगीत, संस्कृति और आपसी भाईचारे का सुंदर संगम देखने को मिला।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा, मुख्यमंत्री के सलाहकार आर कृष्णा दास, राजनांदगांव सांसद संतोष पांडेय, विधायक सुनील सोनी, मोतीलाल साहू, रायपुर प्रेस क्लब अध्यक्ष मोहन तिवारी सहित अन्य पत्रकारगण, जनप्रतिनिधिगण, अधिकारीगण एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने ‘सशक्त नारी, समृद्ध दिल्ली’ कार्यक्रम में महिला सशक्तिकरण पर दिया जोर

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नई दिल्ली- भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज नई दिल्ली में दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीटी) सरकार द्वारा आयोजित ‘सशक्त नारी, समृद्ध दिल्ली’ कार्यक्रम में भाग लिया और उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया।

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं। सैनिक के रूप में वे देश की सीमाओं की रक्षा कर रही हैं, वैज्ञानिक के रूप में प्रयोगशालाओं में शोध कर रही हैं और खेल प्रतियोगिताओं में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तिरंगा लहरा रही हैं। राजनीति, समाजसेवा, प्रशासन और व्यापार—सभी क्षेत्रों में महिलाएं नई ऊंचाइयों को छू रही हैं। देशभर के दीक्षांत समारोहों में डिग्री और पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में बढ़ती बालिकाओं की संख्या प्रेरणादायक है।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं को अब भी हिंसा, आर्थिक असमानता, सामाजिक रूढ़ियों और स्वास्थ्य संबंधी उपेक्षा जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इन बाधाओं को दूर किए बिना महिला सशक्तिकरण का लक्ष्य प्राप्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि महिला तभी वास्तविक रूप से सशक्त होगी जब वह स्वतंत्र निर्णय लेने में सक्षम हो, आत्मसम्मान के साथ जीवन जी सके और उसे समान अवसर एवं सुरक्षा प्राप्त हो। एक सशक्त महिला न केवल अपना जीवन बदलती है, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों की दिशा भी निर्धारित करती है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत सरकार ने महिला सशक्तिकरण के लिए अनेक कदम उठाए हैं। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना बालिकाओं की शिक्षा और सुरक्षा को बढ़ावा दे रही है। ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ लाखों महिलाओं को धुएं से मुक्ति दिलाकर उनके स्वास्थ्य की रक्षा कर रही है। ‘प्रधानमंत्री मुद्रा योजना’ महिलाओं को स्वरोजगार के लिए ऋण उपलब्ध करा रही है। ‘लखपति दीदी योजना’ जैसी पहलें महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के अवसर प्रदान कर रही हैं। ‘प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना’ महिलाओं के स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इन सभी प्रयासों से महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थिति में सुधार हो रहा है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक सदस्य और संस्था की सामूहिक जिम्मेदारी है। महिलाओं को शिक्षित करना, उनका आत्मविश्वास बढ़ाना और उन्हें प्रोत्साहन एवं सहयोग देना हम सभी का कर्तव्य है। हमें महिलाओं को यह विश्वास दिलाना होगा कि वे सपने देख सकती हैं और उन्हें पूरा भी कर सकती हैं, और हम उनके साथ खड़े हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि दिल्ली देश की राजधानी है, जहां हर राज्य और क्षेत्र के लोग निवास करते हैं। यदि दिल्ली की महिलाएं सुरक्षित, शिक्षित और आत्मनिर्भर हों तथा समाज के हर क्षेत्र में आत्मविश्वास के साथ नेतृत्व करें, तो यह पूरे देश में सकारात्मक संदेश देगा। दिल्ली को महिला-नेतृत्व विकास का उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि समृद्ध दिल्ली और विकसित भारत के सपने को साकार करने में महिलाओं की पूर्ण भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सरकार और समाज को उन्हें बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना होगा। ऐसा वातावरण जहां वे बिना किसी दबाव या भय के अपने जीवन से जुड़े स्वतंत्र निर्णय ले सकें।

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