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प्रकृति में जनजातीयों की अटूट आस्था, देवी-देवताओं के वास से जल जंगल का हो रहा संरक्षण व संवर्धन : रामविचार नेताम

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 रायपुर : आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि देश के लगभग सभी राज्यों में जनजातीय समुदाय के लोग निवास करते हैं। उन्होंने कहा कि 2011 की जनगणना के अनुसार देश में 10 करोड़ से अधिक जनजातीय समुदाय हैं। उन्होंने कहा कि जनजातीयों का जल, जंगल, जमीन, नदी-नालों और पहाड़ों में अटूट आस्था है। जनजातीय समुदाय पेड़ पौधों, नदी-नालों में देवी-देवताओं का वास मानते हैं और इन्ही संस्कृति और परंपराओं के कारण वनवासी समुदाय प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन में पहले पायदान पर है।


मंत्री नेताम ने आज नवा रायपुर स्थित जनजातीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित दो दिवसीय राज्य-स्तरीय संवाद सम्मेलन ’छत्तीसगढ़ कॉमन्स क्विनिंग’ के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि सामुदायिक संसाधनों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए गहन मंथन हुआ है। इस मंथन में जो भी तथ्य निकलकर आएंगे उसकी उपयोगिता नीति निर्माण और जनहित में कैसी होगी इसके लिए हमारी सरकार तत्परता के साथ काम करेगी।


मंत्री नेताम कहा कि राज्य सरकार जनजातीय समुदायों के विभिन्न समस्याओं और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन के लिए एक उच्च स्तरीय टास्क फोर्स का गठन करने जा रही है। इस टास्क फोर्स की संवेदनशीलता और महत्व को देखते हुए इसकी कमान स्वयं मुख्यमंत्री संभालेंगे, जो इसके अध्यक्ष होंगे। नीतिगत निर्णयों के धरातल पर प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को मिलाकर एक विशेष कार्यान्वयन समिति भी बनाई जाएगी, जो बेहतर समन्वय सुनिश्चित करेगी ।

नेताम ने कहा कि पेसा (पंचायत उपबंध अधिनियम) और एफआरए (वनाधिकार अधिनियम) के क्रियान्वयन के दौरान आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों, विशेष रूप से सीमाओं के निर्धारण (डिमार्केशन ऑफ बॉउंड्रिस) जैसी समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल करने की बात कही। उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के प्रति उत्तरदायित्व का भाव जागृत करते हुए कहा, “हम केवल इन साझा संसाधनों के उपयोगकर्ता ही नहीं, बल्कि इनके संरक्षक भी हैं, और हमारा उपभोग केवल अपनी वास्तविक आवश्यकताओं की पूर्ति तक ही सीमित होना चाहिए”। इस टास्क फोर्स का मुख्य उद्देश्य राज्य भर में जनजातीय कल्याण से जुड़ी नीतियों के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं को दूर करना और समुदायों को उनके अधिकार दिलाना है ।

आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने कहा कि यह टास्क फोर्स विशेष रूप से पेसा और वनाधिकार अधिनियम के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेगी। उन्होंने कहा कि हमारी विरासत में जनजातीय बोली, भाषा, समुदायिक नेतृत्व समृद्ध है। जल, जंगल, जमीन के संरक्षण व संवर्धन में इन जनजातीयों का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि प्रकृति के प्रति उनके ज्ञान, उनका उद्देश्य, जल जंगल से जुड़े हुए हैं। उनका रिश्ता प्रकृति से है। वे प्रकृति को मां के रूप में, देवता के रूप में पूजते हैं। उनके दैनिक क्रियाकलापों से लेकर मृत्यु तक के उत्सव प्रकृति के संरक्षण में सहायक सिद्ध होती है।

प्रमुख सचिव बोरा ने कहा कि इन दो दिनों तक चले अधिवेशन में छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों के 300 से अधिक प्रतिभागियों, नीति विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और ग्राम प्रमुखों ने भाग लिया। चर्चा का मुख्य केंद्र राज्य की 70 लाख एकड़ ’कॉमन्स’ भूमि (जंगल, चारागाह और जल निकाय) रही, जो ग्रामीण और जनजातीय आबादी की जीवन रेखा है। उन्होंने कहा कि पीएम जनमन योजना, धरतीआबा ग्राम उत्कर्ष अभियान, नियद नेल्ला नार जैसे विभिन्न योजनाओं के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों एवं जनजातीय समुदाय के सम्पूर्ण विकास के साथ ही प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में काम कर रहे हैं। आगे भी सामुदायिक सहयोग से बेहतर दिशा में काम किया जाएगा।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री वी. श्रीनिवास राव ने जोर दिया कि सामुदायिक सहयोग के बिना विशाल वनों और जैव विविधता की रक्षा संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य की वन नीतियां प्रतिबंधात्मक नहीं, बल्कि विनियामक हैं।

मनरेगा आयुक्त तारण प्रकाश सिन्हा ने कहा कि जल संरक्षण जनजातीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने मनरेगा के माध्यम से वंचित समुदायों को जल प्रबंधन में जोड़ने पर बल दिया। रायपुर कलेक्टर गौरव सिंह ने रेखांकित किया कि जल संरक्षण कोई ’रॉकेट साइंस’ नहीं है, बल्कि यह सदियों के अनुभव से उपजा सामुदायिक ज्ञान है।

संवाद सम्मेलन में यह बात उभर कर आई कि कॉमन्स केवल आर्थिक संसाधन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक आधार हैं। इस अवसर पर सोनमणि बोरा ने जनजातीय लोक गीतों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के दस्तावेजीकरण और कॉपीराइट संरक्षण के लिए एक विशेष स्टूडियो स्थापित करने की योजना साझा की। सम्मेलन में नेल्सन मंडेला पुरस्कार विजेता श्री शेर सिंह आंचला, पद्म पांडी राम मंडावी, पद्मश्री जगेेश्वर यादव और गौर मारिया कलाकार लक्ष्मी सोरी, इंदु नेताम ने भी अपने अनुभव साझा किए और संसाधनों के संरक्षण की अपील की।

कार्यक्रम को सफल बनाने में अपर संचालक संजय गौड़, टीआरटीआई की संयुक्त संचालक गायत्री नेताम की विशेष योगदान रही। यह कार्यक्रम आदिम जाति विकास विभाग, टीआरटीआई और फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी द्वारा प्रॉमिस ऑफ कॉमन्स पहल के तहत संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था। इसमें यूएनडीपीए आईआईटी-भिलाई, बीआरएलएफ, एक्सिस बैंक फाउंडेशन और अन्य प्रमुख संस्थान सहयोगी रहे।

राजधानी में अंतर्राज्यीय चेन स्नैचिंग गिरोह का भंडाफोड़, 8 आरोपी गिरफ्तार

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 रायपुर। राजधानी रायपुर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक अंतर्राज्यीय चेन स्नैचिंग गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस गिरोह में 7 महिलाएं और 1 पुरुष शामिल हैं, जो अलग-अलग राज्यों में घूमकर सोने की चेन चोरी की वारदातों को अंजाम देते थे। पुलिस ने सभी 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर उनसे पूछताछ शुरू कर दी है।


पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य लग्जरी वाहन—खासकर इनोवा—का इस्तेमाल करते थे। ये लोग भीड़भाड़ वाले इलाकों जैसे बाजार, धार्मिक स्थल और सार्वजनिक स्थानों को निशाना बनाते थे। मौका मिलते ही लोगों के गले से सोने की चेन झपटकर फरार हो जाते थे।

जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने रायपुर में ही एक दर्जन से अधिक वारदातों को अंजाम दिया है। सरस्वती नगर, खमतराई, कोतवाली, गोलबाजार और डीडी नगर थाना क्षेत्रों में इनके खिलाफ कई मामले दर्ज हैं। बढ़ती घटनाओं को देखते हुए पुलिस ने विशेष टीम गठित कर गिरोह की तलाश शुरू की थी।

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार सभी आरोपी आपस में रिश्तेदार हैं और सुनियोजित तरीके से इस अपराध को अंजाम देते थे। पूछताछ में यह भी सामने आया है कि गिरोह के सदस्य गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में सक्रिय रहे हैं।

आरोपियों के कब्जे से करीब 11 लाख 30 हजार रुपये मूल्य की चोरी की गई सोने की चेन और अन्य सामान बरामद किया गया है। पुलिस ने यह भी बताया कि चोरी की चेन बेचकर मिली रकम से आरोपियों ने इनोवा वाहन खरीदा था, जिसका इस्तेमाल वारदातों में किया जाता था।

प्रारंभिक जांच में पता चला है कि आरोपी मध्य प्रदेश के इंदौर और महाराष्ट्र के जलगांव के निवासी हैं। वारदात के बाद ये लोग तुरंत स्थान बदल लेते थे, जिससे पुलिस की पकड़ से बच सकें।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरोह की गिरफ्तारी से शहर में चेन स्नैचिंग की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगेगा। साथ ही अन्य राज्यों की पुलिस से भी संपर्क किया जा रहा है, ताकि आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड की विस्तृत जानकारी जुटाई जा सके।

खीरा की खेती ने बदली सुभद्रा की जिंदगी,बिहान योजना से बनी लखपति दीदी

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रायपुर-सुभद्रा पहले गरीबी से जूझ रही थीं, लेकिन स्वयं सहायता समूह जुड़कर एवं ऋण लेकर उन्होंने खीरा की खेती शुरू की l खीरा की खेती से प्राप्त आय से आज वह 'लखपति दीदी' बन चुकी हैं 

बिलासपुर जिला के कोटा के ग्राम करका की सुभद्रा ने यह साबित कर दिया है कि यदि सही मार्गदर्शन, समूह की शक्ति और मेहनत साथ हो, तो आर्थिक रूप से आत्मनिर्भरता का सपना आसानी से साकार किया जा सकता है। सुभद्रा समूह से जुड़कर खीरा की खेती कर आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ अब लखपति दीदी बन चुकी हैl सुभद्रा मुख्यमन्त्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहती हैं कि सरकारी योजना ने उनका जीवन बदल दिया है।

आदिवासी बहुल गांव करका की सुभद्रा आर्मी ने आजीविका मिशन बिहान के अंतर्गत मां सरस्वती समूह से जुड़कर खीरा की खेती को अपनी आजीविका का माध्यम बनाया। शुरुआत में समूह को 15 हजार रुपये रिवाल्विंग फण्ड, 60 हजार रुपये सी आई एफ तथा 3 लाख रुपये बैंक ऋण प्राप्त हुआ। इस आर्थिक सहयोग ने महिलाओं को खेती के लिए जरूरी संसाधन जुटाने में बड़ी मदद दी। समूह की महिलाओं ने मेहनत, लगन और आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाते हुए खीरा की खेती शुरू की। उनकी मेहनत का परिणाम यह है कि आज वे 2 एकड़ में खेती कर लगभग 10 क्विंटल खीरा की बिक्री हर दूसरे दिन कर रही हैं। इससे उन्हें लगभग 7 हजार रुपये की आय प्राप्त हो रही है।

इस अतिरिक्त आय से समूह की महिलाओं की आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार हुआ है। अब वे अपने परिवार की जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा कर पा रही हैं l बच्चों की शिक्षा पर ध्यान दे रही हैं और भविष्य के लिए बचत भी कर रही हैं। सुभद्रा बताती हैं कि इस सफलता के पीछे समूह की बीमा सखी हबीबुन निशा का विशेष सहयोग और मार्गदर्शन रहा, जिन्होंने समय-समय पर महिलाओं को बैंकिंग और वित्तीय साक्षरता प्रदान कर ऋण सबंधी प्रक्रिया को पूरा करने में  सहायता की साथ ही खेती की गतिविधियों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सुभद्रा आर्मी की मेहनत लगन और सरकारी योजनाओं की मदद से अब वह लखपति दीदी” बनने का गौरव हासिल कर चुकी है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचार को नई दिशा देगा वाइस चांसलर मीट-2026 : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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आधुनिक चिकित्सा और पारंपरिक औषधीय ज्ञान के संगम से सशक्त होगा छत्तीसगढ़ का स्वास्थ्य मॉडल: मुख्यमंत्री साय

मेडिसिटी हब और नए मेडिकल कॉलेज से बदलेगा प्रदेश का स्वास्थ्य परिदृश्य

सुकमा में “मुख्यमंत्री बस्तर स्वास्थ्य योजना” का होगा शुभारम्भ

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज नवा रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय में आयोजित ऑल इंडिया हेल्थ साइंसेज वाइस चांसलर मीट-2026 को संबोधित करते हुए इसे प्रदेश के लिए एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण अवसर बताया। उन्होंने भगवान श्रीराम के ननिहाल छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर देशभर से आए कुलपतियों, शिक्षाविदों और विद्यार्थियों का आत्मीय स्वागत किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पहली बार आयोजित इस एकदिवसीय सम्मेलन के माध्यम से स्वास्थ्य शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्र में नवाचारों का व्यापक आदान-प्रदान होगा, जो आने वाले समय में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस मंच से निकले विचार न केवल नीति निर्माण को दिशा देंगे, बल्कि आमजन तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में भी सहायक होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दो वर्षों में राज्य सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। प्रदेश में पांच नए मेडिकल कॉलेज, 14 नर्सिंग कॉलेज तथा एक होम्योपैथी कॉलेज का निर्माण कार्य प्रगति पर है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ नागरिक ही विकसित छत्तीसगढ़ की आधारशिला हैं और इसी दृष्टिकोण के साथ स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और गुणवत्ता सुधार पर निरंतर कार्य किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के प्रयासों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत गरीब परिवारों को 5 लाख रुपये तक की सहायता मिलना उनके लिए वरदान सिद्ध हो रहा है। उन्होंने कहा कि पहले गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए ग्रामीणों को कर्ज लेने या जमीन बेचने जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब यह स्थिति तेजी से बदल रही है और स्वास्थ्य सेवाओं में विश्वास बढ़ा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मधुमेह और कैंसर जैसी बीमारियां, जो पहले सीमित वर्ग तक मानी जाती थीं, अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी तेजी से फैल रही हैं। इस चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सरकार द्वारा “आरोग्य मंदिर” जैसी पहल की जा रही है, जिसका उद्देश्य लोगों को स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा देश में तीन आयुर्वेदिक एम्स स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य का लगभग 44 प्रतिशत क्षेत्र वनाच्छादित है, जो औषधीय पौधों की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है। इसी संदर्भ में उन्होंने हेमचंद मांझी को आयुर्वेद के क्षेत्र में पद्मश्री सम्मान मिलने पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि उनके पास कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए विदेशों से भी लोग आते हैं।

मुख्यमंत्री ने राज्य में स्वास्थ्य अधोसंरचना के तेजी से विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि राजधानी क्षेत्र में मेडिसिटी हब विकसित किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत 5000 बिस्तरों वाला सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल स्थापित किया जाएगा। इससे प्रदेशवासियों को विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने यह भी बताया कि उनके कार्यकाल में रायपुर में एक दर्जन से अधिक निजी अस्पतालों का शुभारंभ किया गया है।

भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा देश नालंदा, तक्षशिला और विक्रमशिला जैसे महान शिक्षा केंद्रों का धनी रहा है और चिकित्सा व अध्यात्म दोनों क्षेत्रों में विश्व गुरु के रूप में स्थापित रहा है। आयुर्वेद को ऋग्वेद का उपवेद बताते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में “सर्वे भवन्तु सुखिनः” का भाव सदैव विद्यमान रहा है।

कोविड-19 महामारी के दौरान भारत की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने तीन प्रकार के टीकों का विकास कर न केवल अपने 140 करोड़ नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की, बल्कि अन्य देशों की भी सहायता कर वैश्विक स्तर पर मानवता का परिचय दिया।मुख्यमंत्री साय ने चिकित्सकों को समाज में भगवान के बाद सबसे महत्वपूर्ण स्थान बताते हुए उनसे सेवा भाव के साथ संवेदनशीलता बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास जताया कि यह सम्मेलन स्वास्थ्य क्षेत्र में नए मार्ग प्रशस्त करेगा और इसके सकारात्मक परिणाम आम जनता तक पहुंचेंगे।

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने अपने संबोधन में कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में स्वास्थ्य क्षेत्र की अनेक चुनौतियों का सफलतापूर्वक समाधान किया गया है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा में नवाचार के तहत हिंदी माध्यम की सुविधा प्रारंभ की गई है तथा तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग से भविष्य में स्वास्थ्य सेवाएं और अधिक प्रभावी होंगी। उन्होंने चिकित्सकों से सेवा भाव और संवेदनशीलता के साथ कार्य करने का आह्वान किया।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रदेश में 5 नए मेडिकल कॉलेज, 14 नर्सिंग कॉलेज और 2 मानसिक अस्पताल सहित स्वास्थ्य सुविधाओं का व्यापक विस्तार किया गया है तथा 275 अत्याधुनिक एम्बुलेंस उपलब्ध कराई गई हैं। उन्होंने जानकारी दी कि 13 अप्रैल से सुकमा में मुख्यमंत्री बस्तर स्वास्थ्य योजना के तहत 36 लाख लोगों की हेल्थ स्क्रीनिंग और आयुष्मान कार्ड निर्माण का कार्य प्रारंभ किया जाएगा।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि नक्सल समस्या के समाप्त होने के बाद छत्तीसगढ़ तेजी से विकास की दिशा में अग्रसर होगा। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन से प्राप्त सुझाव आयुष मंत्रालय को भेजे जाएंगे और यह आयोजन स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार में प्रेरक भूमिका निभाएगा। उन्होंने आयोजन की सफलता के लिए शुभकामनाएं भी दीं।इस अवसर पर विधायक इंद्र कुमार साहू, विधायक पुरन्दर मिश्रा, विशेष आमंत्रित अतिथि डॉ. वेद प्रकाश मिश्रा, भारतीय स्वास्थ्य विद्यापीठ के अध्यक्ष डॉ. राजीव सूद तथा आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. प्रदीप कुमार पात्रा सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पद्मश्री जागेश्वर यादव के जीवन पर आधारित पुस्तक “बिरहोर जननायक” का किया विमोचन

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सेवा और समर्पण का प्रेरक दस्तावेज है यह कृति: मुख्यमंत्री

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में पद्मश्री जागेश्वर यादव के जीवन पर आधारित पुस्तक “बिरहोर जननायक” का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने पुस्तक के लेखक डॉ. लोकेश पटेल को बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पद्मश्री जागेश्वर यादव का जीवन संघर्ष, सेवा और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने कहा कि उनका संपूर्ण जीवन समाज के प्रति समर्पित रहा है और उनके कार्य विशेष रूप से जनसेवा के क्षेत्र में कार्य करने वाले लोगों के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जशपुर जिले में ‘बिरहोर के भाई’ के रूप में विख्यात जागेश्वर यादव ने बिरहोर आदिवासी समाज के उत्थान के लिए जो कार्य किए हैं, वे अत्यंत सराहनीय हैं। उन्होंने कहा कि उनका सरल व्यक्तित्व और समाज के प्रति अटूट प्रतिबद्धता यह दर्शाती है कि सच्चा नेतृत्व सेवा और संवेदनशीलता से ही जन्म लेता है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि “बिरहोर जननायक” पुस्तक उनके संघर्ष, समर्पण और सेवा की उस प्रेरक यात्रा को सामने लाती है, जो नई पीढ़ी को समाज के प्रति जागरूक और उत्तरदायी बनने की दिशा देती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह कृति पाठकों को न केवल प्रेरित करेगी, बल्कि समाज के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने में भी सहायक होगी।

इस अवसर पर पुस्तक के लेखक डॉ. लोकेश पटेल ने बताया कि इस पुस्तक की रचना आदिम जनजातियों, विशेषतः बिरहोर समुदाय के सर्वांगीण विकास के लिए जागेश्वर यादव द्वारा किए गए समर्पित प्रयासों से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि इस कृति में उनके जीवन संघर्ष, सामाजिक योगदान और मानवीय दृष्टिकोण को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है।

महासमुंद को मिलेगी बड़ी राहत: सिकासार-कोडार लिंक परियोजना से दूर होगा सूखा, 178 गांवों को फायदा

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 महासमुंद। जिले के सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए राहत भरी खबर है। राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत सिकासार-कोडार लिंक परियोजना के तहत अब गरियाबंद के सिकासार जलाशय का अतिरिक्त पानी महासमुंद के कोडार जलाशय तक पहुंचाया जाएगा।


करीब ₹3400 करोड़ की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत 88 किलोमीटर लंबी भूमिगत पाइपलाइन बिछाई जाएगी, जिसके माध्यम से एक जलाशय को दूसरे से जोड़ा जाएगा। यह प्रदेश की पहली ऐसी परियोजना होगी, जिसमें स्टील की अंडरग्राउंड पाइप का उपयोग किया जा रहा है।

परियोजना से महासमुंद जिले के कई गांवों को सिंचाई सुविधा का सीधा लाभ मिलेगा, वहीं पेयजल संकट से भी राहत मिलने की उम्मीद है। वाष्पीकरण से नष्ट होने वाले लगभग 25 प्रतिशत पानी को संरक्षित कर उसका बेहतर उपयोग किया जाएगा, जिससे कृषि क्षेत्र में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

सरकार ने इस परियोजना के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है और वर्ष 2029 से पहले इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

हालांकि, इस योजना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्ष ने इसे कुछ क्षेत्रों के हितों के खिलाफ बताया है, जबकि सत्ता पक्ष इसे प्रदेश में जल प्रबंधन और सिंचाई विस्तार की दिशा में बड़ा कदम मान रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि योजना समय पर पूरी होती है, तो महासमुंद जिले में जल संकट की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।

रायपुर में ऑल इंडिया हेल्थ साइंसेज वाइस चांसलर्स मीट 2026 का आयोजन, सीएम साय हुए शामिल

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 रायपुर। राजधानी रायपुर में आज ऑल इंडिया हेल्थ साइंसेज वाइस चांसलर्स मीट 2026 का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय शामिल हुए। देशभर से आए हेल्थ साइंसेज विश्वविद्यालयों के वाइस चांसलर्स की मौजूदगी में स्वास्थ्य शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा की गई।


यह कार्यक्रम नया रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय मेमोरियल हेल्थ साइंसेज एवं आयुष विश्वविद्यालय में आयोजित किया गया। इसमें विभिन्न राज्यों से पहुंचे वाइस चांसलर्स और स्वास्थ्य शिक्षा से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया।

बैठक के दौरान मेडिकल और आयुष शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने, रिसर्च को प्रोत्साहन देने और आधुनिक तकनीकों को शिक्षा से जोड़ने जैसे विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि देश में पहली बार इस तरह की वाइस चांसलर्स मीट आयोजित की जा रही है। विकसित भारत के निर्माण में शिक्षा और स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण योगदान रहेगा। उन्होंने कहा कि इस मंथन से जो निष्कर्ष निकलेंगे, वे चिकित्सा क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होंगे।

वहीं, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि देशभर के मेडिकल साइंस विश्वविद्यालयों के वाइस चांसलर्स का एक मंच पर आना महत्वपूर्ण है। इस बैठक के माध्यम से मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और डॉक्टरों की कमी को दूर करने के उपायों पर चर्चा की जा रही है।

कार्यक्रम में स्वास्थ्य शिक्षा से जुड़े कई विशेषज्ञों ने भी अपने विचार रखे।

फुटपाथ पर दरिंदगी के बाद हत्या, 8 दिन तक फरार रहा आरोपी आखिर गिरफ्तार, इनामी चढ़ा पुलिस के हत्थे

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 अंबिकापुर, 10 अप्रैल। शहर में महिला के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या के सनसनीखेज मामले में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। घटना के 8 दिन बाद फरार चल रहे आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को कोरिया जिले से पकड़ा गया, जिस पर ₹35,000 का इनाम घोषित था।


पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी को पकड़ने के लिए लगातार दबिश दी जा रही थी और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर उसकी लोकेशन ट्रेस की गई। गिरफ्तारी के बाद सरगुजा पुलिस की टीम आरोपी को अंबिकापुर लाने के लिए रवाना हो गई है।

3 अप्रैल की रात हुई थी वारदात

यह घटना 3 अप्रैल की दरमियानी रात महामाया द्वार के पास हुई थी, जहां फुटपाथ पर सो रही एक महिला के साथ आरोपी ने दुष्कर्म किया और बाद में उसकी हत्या कर दी। इस जघन्य वारदात के बाद पूरे शहर में आक्रोश का माहौल बन गया था।

इनाम घोषित कर तेज की गई थी तलाश

मामले की गंभीरता को देखते हुए आईजी रेंज और डीआईजी स्तर पर आरोपी की जानकारी देने वालों के लिए ₹35,000 का इनाम घोषित किया गया था। पुलिस ने लगातार प्रयास करते हुए आखिरकार आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

भिलाई में दिनदहाड़े झपटमारी, महिला से 15 हजार रुपये समेत बैग लूटकर फरार

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 भिलाईनगर : दुर्ग जिले के भिलाई शहर में झपटमारी की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। खुर्सीपार थाना क्षेत्र में दिनदहाड़े एक महिला से बाइक सवार तीन युवकों ने बैग छीन लिया और फरार हो गए। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है।


पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, पुरैना वार्ड नंबर 40 निवासी संध्या (33 वर्ष) 2 अप्रैल को अपनी 12 वर्षीय बेटी के साथ ऑटो से खुर्सीपार जा रही थीं। शाम करीब 5 बजे खुर्सीपार गेट चौक पर ऑटो से उतरने के बाद जैसे ही वे सर्विस रोड पर पहुंचीं, तभी पावर हाउस की ओर से आए एक मोटरसाइकिल पर सवार तीन युवकों ने उनके कंधे पर टंगे हैंडबैग को झपट्टा मारकर छीन लिया।

वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी तेजी से रायपुर की ओर फरार हो गए। पीड़िता ने बताया कि वह बाइक का नंबर नहीं देख पाई, हालांकि आरोपियों को पहचान सकती हैं। घटना के दौरान आसपास मौजूद लोगों ने भी पूरी वारदात देखी।

लूटे गए बैग में करीब 15 हजार रुपये नकद, बैंक ऑफ बड़ौदा की पासबुक और एसबीआई का एटीएम कार्ड रखा हुआ था। घटना के बाद महिला ने अपने परिजनों को इसकी जानकारी दी।

घटना के लगभग एक सप्ताह बाद, 9 अप्रैल को पीड़िता ने अपने पति के साथ खुर्सीपार थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने अज्ञात बाइक सवार तीन आरोपियों के खिलाफ अपराध क्रमांक 0131/26 के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं, ताकि जल्द से जल्द आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जा सके।

आमने-सामने भिड़ीं कारें, कांकेर में 6 लोगों की मौके पर मौत

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 कांकेर, 10 अप्रैल। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में गुरुवार देर रात हुए भीषण सड़क हादसे में छह लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा कोतवाली थाना क्षेत्र के नाथिया नवागांव के पास हुआ, जहां दो कारों की आमने-सामने जोरदार टक्कर हो गई।




पुलिस अधीक्षक निखिल अशोक कुमार राखेचा के अनुसार, रात करीब 11 बजे हुई इस दुर्घटना में छह लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए और घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची और राहत-बचाव कार्य शुरू किया। पुलिस अधीक्षक स्वयं भी घटनास्थल पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। घायलों को तत्काल एम्बुलेंस के जरिए कांकेर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

पुलिस के मुताबिक, हादसे के कारणों का अभी स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। घायलों के बयान के आधार पर दुर्घटना के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है।

झोलाछाप और अपंजीकृत चिकित्सकों पर बरसे निजी चिकित्सा कल्याण संघ के अध्यक्ष

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 महासमुंद । ग्रामीण एवं शहरी निजी चिकित्सा कल्याण संघ की कार्यकारी बैठक आशीर्वाद निवास, लभरा खुर्द में आयोजित की गई। बैठक जिला अध्यक्ष राजेंद्र सेन की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई।


बैठक को संबोधित करते हुए सेन ने संगठन से बाहर रहकर प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सकों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि ऐसे कई व्यक्ति बिना किसी वैद्यकीय नियमों का पालन किए एवं बिना किसी अधिकृत संगठन के दिशा-निर्देशों को माने, बेधड़क दवाखाना एवं क्लिनिक का बोर्ड लगाकर चिकित्सा कार्य कर रहे हैं।

उनके द्वारा कई बार गलत एवं अवैज्ञानिक उपचार किए जाने से मरीजों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जिससे पूरे चिकित्सा समुदाय की छवि धूमिल होती है और समाज में चिकित्सकों के प्रति विश्वास भी प्रभावित होता है।

निजी स्कूलों की मनमानी पर सख्त सीएम साय, अभिभावकों को दी राहत

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 रायपुर। नए शैक्षणिक सत्र में स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू होते ही फीस को लेकर मनमानी के मामले सामने आने लगे हैं। कई निजी स्कूलों पर अभिभावकों से एडमिशन फीस के नाम पर जबरन वसूली और अत्यधिक शुल्क लेने के आरोप लग रहे हैं।


इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कड़ा रुख अपनाते हुए निजी स्कूलों को सख्त हिदायत दी है। गुरुवार को मीडिया से चर्चा में उन्होंने स्पष्ट कहा कि प्रदेश में किसी भी निजी स्कूल की मनमानी नहीं चलने दी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा, “अभिभावक निश्चिंत रहें, राज्य में निजी स्कूलों की मनमानी किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।” उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी स्कूल के खिलाफ शिकायत मिलती है और नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित संस्थान के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

सीएम साय ने जोर देकर कहा कि अभिभावकों पर किसी भी प्रकार का अनावश्यक दबाव या आर्थिक बोझ डालना स्वीकार्य नहीं है। राज्य सरकार इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता तथा संतुलन बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

जनता से जुड़ी सभी सेवाएं को लोक सेवा गारंटी अधिनियम के दायरे में होना चाहिए

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मुख्य सचिव ने लोक सेवा गारंटी की सेवाओं के क्रियान्वन की समीक्षा की

रायपुर- मुख्य सचिव विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में छत्तीसगढ़ शासन के समस्त विभागांे के भारसाधक सचिव की बैठक लेकर विभागों के अंतर्गत छत्तीसगढ़ लोक सेवा गांरटी अधिनियम के अंतर्गत विभागीय सेवाओं के क्रियान्वन समीक्षा की। मुख्य सचिव ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिये है कि उनके विभाग के अंतर्गत ऐसी सभी सेवाएं जो सीधे जनता से जुड़ी है, उन सभी सेवाओं को लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत अधिसूचित की जाये तथा अधिसूचित सेवाओं को ऑनलाईन किया जाये। समय सीमा में सेवाओं का लाभ हितग्राही को दिया जाए। समय सीमा में सेवाएं यदि नहीं दी जाती हैं तो संबधित  अधिकारी को उत्तरदायी ठहराया जायेगा और उसके विरूद्ध नियमानुसार कार्यवाई की जायेगी। उन्होंने कहा कि लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत उत्कृष्ट सेवा कार्य करने वाले अधिकारियों को प्रोत्साहित किया जायेगा। 

मुख्य सचिव ने बैठक में कहा कि छत्तीसगढ़ लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत जनता से जुड़ी सभी शासकीय सेवाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर सेवाएं प्रदान करना हैं। मुख्य सचिव ने प्रत्येक विभाग के अंतर्गत लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत आने वाली सेवाओं की वर्तमान स्थिति की विस्तार से समीक्षा की । मुख्य सचिव ने अधिकारियों के कहा कि वे अपने विभाग के अंतर्गत और सेवाएं जो अधिनियम के अंतर्गत लायी जा सकती है, उन्हे चिन्हित कर अधिसूचित कर ली जाएं और सुशासन एवं अभिसरण विभाग को इसकी सूची उपलब्ध की जाएं। बैठक में बताया गया की छत्तीसगढ़ शासन द्वारा लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत लोक सेवा की प्रभावी क्रियान्वन को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जा रही हैं। मुख्य सचिव ने प्रस्तुतिकरण के जरिए विभिन्न  विभागों के अधिकारियो को विभागीय सेवओं को लोक सेवा गारंटी अधिनियम में लाने के लिए मार्ग दर्शन दिया। 

सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव राहुल भगत ने प्रस्तुतिकरण के जरिए विभिन्न विभागों की लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत आने वाली सेवाओं की विस्तार से जानकारी दी गई।राहुल भगत ने बताया की छत्तीसगढ़ शासन के सुशासन विभाग द्वारा विभिन्न राज्यों में जाकर लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत अधिसूचित सेवाओं का अध्ययन किया गया है। छत्तीसगढ़ राज्य के परिपेक्ष में प्रदाय की जा रहीं समान्तर सेवाओं एवं संबंधित विभागों की सेवाओं की सांकेतिक रूप से मैपिंग की गई है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से कहा कि वे अपने विभाग की और सेवाओं को चिन्हित कर अधिनियम के अंतर्गत अधिसूचित करने  हेतु प्रस्तावित करें।

बैठक में गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, पंचायत एवं ग्रामीण विकास की प्रमुख सचिव निहारिका बारिक, आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव  शहला निगार, खनिज विभाग एवं मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद, वित्त एवं वाणिज्यिक कर विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल, ऊर्जा एवं जनसंपर्क के सचिव रोहित यादव, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग एवं मुख्यमंत्री के सचिव बसवराजू एस., वाणिज्यिक कर (आबकारी)  आर. शंगीता, समाज कल्याण विभाग के सचिव भुवनेश यादव, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार, गामोउद्योग के सचिव श्यामलाल धावड़े सहित वन एवं जलवायु परिवर्तन, लोक निर्माण, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण, सामान्य प्रशासन, स्कूल शिक्षा, लोक स्वास्थ एवं परिवार कल्याण, परिवहन, वाणिज्यिक एवं उद्योग, आवास एवं पर्यावरण, लोक स्वास्थ यांत्रिकी, श्रम, जल संसाधन, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन सहित अन्य विभागों के अधिकारी शामिल हुए। 


निजी क्षेत्र को R&D में आगे आना होगा: डॉ. जितेंद्र सिंह का आह्वान

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नई दिल्ली- केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने निजी क्षेत्र से अनुसंधान एवं विकास (R&D) गतिविधियों में अपनी भागीदारी तेज करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए उद्योगों की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है।

नीति आयोग द्वारा R&D प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर आधारित दो रिपोर्ट जारी करने के अवसर पर बोलते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि सरकार ने अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों को निजी क्षेत्र के लिए खोलने तथा RDI फंड जैसी व्यवस्थाएं बनाने सहित कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। अब उद्योगों को भी निवेश बढ़ाकर और साझेदारी के माध्यम से इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि शोध तभी फल-फूल सकता है, जब उसमें अनावश्यक बाधाएं, देरी और व्यवधान न हों। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नीतियों का मूल्यांकन केवल उनके डिजाइन से नहीं, बल्कि शोधकर्ताओं के वास्तविक अनुभव के आधार पर होना चाहिए।

डॉ. सिंह ने कहा कि भारत में प्रतिभा की कमी नहीं है और देश के वैज्ञानिकों को वैश्विक स्तर पर पहचान मिल रही है, लेकिन संस्थागत और प्रक्रियागत जटिलताएं अभी भी प्रगति में बाधा बन रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आज का शोध बहु-विषयक (interdisciplinary) हो गया है, जिसमें उद्योग, वित्त और वैश्विक सहयोग की अहम भूमिका है।

उन्होंने निजी क्षेत्र की सीमित भागीदारी पर चिंता जताते हुए कहा कि केवल सरकारी समर्थन से दीर्घकालिक नवाचार संभव नहीं है। उन्होंने कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के तहत R&D में निवेश बढ़ाने और वैज्ञानिक कार्यों के लिए मजबूत सहयोग संस्कृति विकसित करने की आवश्यकता बताई।

डॉ. सिंह ने ‘वन नेशन, वन सब्सक्रिप्शन’ जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ज्ञान तक आसान पहुंच शोध को गति देती है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अनुमोदन, फंडिंग और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में छोटे-छोटे सुधार भी शोध उत्पादकता पर बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं।

नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी ने कहा कि R&D प्रक्रियाओं को आसान बनाने की पहल वैज्ञानिक समुदाय की लंबे समय से चली आ रही मांगों पर आधारित है। उन्होंने पूरे शोध चक्र में समन्वय बढ़ाने और अनावश्यक देरी को कम करने पर जोर दिया।

नीति आयोग के सदस्य वी. के. सारस्वत ने कहा कि भारत का शोध पारिस्थितिकी तंत्र एक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, जहां फंडिंग में देरी और प्रशासनिक बाधाएं अभी भी चुनौती बनी हुई हैं। उन्होंने अधिक स्वायत्तता और उद्योग-शोध के बेहतर संबंधों की आवश्यकता बताई।

प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. ए.के. सूद ने कहा कि R&D को आसान बनाना एक सतत प्रक्रिया है और इसमें अभी भी कई सुधार की आवश्यकता है, जैसे फंडिंग सफलता दर, भर्ती और बुनियादी ढांचे से जुड़ी चुनौतियां।

नीति आयोग की रिपोर्टों में शोध प्रणाली में अधिक पारदर्शिता, लचीलापन और स्पष्टता लाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है, ताकि वैज्ञानिक अपने कार्य को बेहतर तरीके से योजना बनाकर आगे बढ़ा सकें।

अंत में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत के शोध पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए सरकार के साथ-साथ उद्योग, संस्थान और समाज की संयुक्त भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा, “विज्ञान आज इतना महत्वपूर्ण विषय है कि इसे केवल वैज्ञानिकों तक सीमित नहीं रखा जा सकता,” और सभी हितधारकों से इसमें सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

वैज्ञानिकों की बड़ी खोज: छोटे अणुओं से उन्नत स्मार्ट मैटेरियल विकसित करने का नया तरीका

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नई दिल्ली- भारतीय वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल करते हुए यह समझ विकसित की है कि छोटे ऑर्गेनिक अणुओं (मॉलिक्यूल्स) को कैसे नियंत्रित कर उन्नत कार्यात्मक मैटेरियल तैयार किए जा सकते हैं। यह खोज भविष्य में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, ट्यून करने योग्य ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, स्मार्ट मैटेरियल और बायोइलेक्ट्रॉनिक इंटरफेस के विकास में मददगार साबित हो सकती है।

बेंगलुरु स्थित सेंटर फॉर नैनो एंड सॉफ्ट मैटर साइंसेज (CeNS) और जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च (JNCASR) के वैज्ञानिकों की संयुक्त टीम ने इस दिशा में काम किया। दोनों संस्थान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST), भारत सरकार के अंतर्गत स्वायत्त संस्थाएं हैं।

शोध में वैज्ञानिकों ने नैफ्थलीन डाइइमाइड (NDI) नामक एक विशेष अणु का अध्ययन किया, जो एम्फीफिलिक (जल और वसा दोनों के साथ प्रतिक्रिया करने वाला) होता है। यह अणु पानी में स्वयं को एक व्यवस्थित संरचना में बदलने की क्षमता रखता है, जिसे ‘सुप्रामॉलिक्यूलर सेल्फ-असेंबली’ कहा जाता है।

अध्ययन में पाया गया कि सामान्य तापमान पर ये अणु मिलकर छोटे-छोटे गोलाकार नैनोस्ट्रक्चर (नैनोडिस्क) बनाते हैं। इन नैनोडिस्क में एक विशेष ऑप्टिकल गुण (काइरोऑप्टिकल एक्टिविटी) होता है, जिससे वे प्रकाश के साथ खास तरीके से प्रतिक्रिया करते हैं।

जब तापमान बढ़ाया जाता है, तो ये नैनोडिस्क अपनी संरचना बदलकर दो-आयामी नैनोशीट्स में परिवर्तित हो जाते हैं, और उनकी यह विशेष ऑप्टिकल क्षमता समाप्त हो जाती है। इससे यह स्पष्ट होता है कि केवल तापमान के बदलाव से ही मैटेरियल के संरचनात्मक और ऑप्टिकल गुणों को बदला जा सकता है।

शोध में यह भी पाया गया कि नैनोडिस्क की विद्युत चालकता (इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी) अधिक होती है, जबकि नैनोशीट्स में बदलने पर यह लगभग सात गुना तक कम हो जाती है। इसका मतलब है कि इस मैटेरियल के विद्युत गुणों को भी नियंत्रित किया जा सकता है, जो छोटे ऑर्गेनिक अणुओं में बहुत दुर्लभ माना जाता है।

यह तकनीक ऐसे स्मार्ट और अनुकूलनशील (adaptive) मैटेरियल विकसित करने का रास्ता खोलती है, जो अपने परिवेश के अनुसार खुद को बदल सकते हैं।

यह शोध हाल ही में ACS Applied Nano Materials जर्नल में प्रकाशित हुआ है। इस अध्ययन का नेतृत्व डॉ. गौतम घोष (CeNS) ने किया, उनके साथ शोध छात्र सौरव मोयरा (CeNS) और सहयोगी तारक नाथ दास (JNCASR) शामिल रहे।

यह खोज अगली पीढ़ी के सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्ट तकनीकों के विकास में नई संभावनाएं प्रदान करती है।

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